🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Aatmadroh

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

‘आत्मद्रोह’आर. चेतनक्रान्ति का आत्मवान संग्रह है, इस अर्थ में कि जो शक्तियाँ नागरिकता और राष्ट्र की आत्मा को नष्ट करना चाहती हैं, वे उनकी गहरी पहचान करते हैं और इस तरह सामूहिक आत्मा के पुनर्वास की युक्तियाँ तलाशते हैं। उन्हें इस बात का पूरा अभिज्ञान है कि समुदायों का नैतिक बल घटा है। वह अफ़वाह, असत्य और घृणा का शिकार हुआ है। वह गहरे अफ़सोस के साथ देखते हैं इस परिघटना को जो उनकी कविता में तंज़ और आत्मावगाहन में बदलती जाती है। सामाजिक और राजनीतिक अधःपतन को वह व्यंग्यार्थ और कई बार गहरे कटाक्ष के साथ कहते हैं। उनकी नागरिक सजगता भाषिक सजगता में संक्रमित होती है जो अन्तत: विरल काव्यात्मक उठान में परिलक्षित होती है। शमशेर बहादुर सिंह की परम्परा में चेतन हिन्दी के उन गिने-चुने विशिष्ट कवियों में हैं जो उर्दू ग़ज़लें और नज़्म, जो इस संग्रह का भी हिस्सा हैं, कहते हुए अविलेय आपसदारी का पुनर्स्मरण कराना नहीं भूलते। इस संग्रह में यदि कवि का स्वर बदला हुआ है, वह अधिक तल्ख़ और तेज़ाबी हुआ है तो इसलिए कि समय बदला है और सामाजिक विषाक्तता बहुत तेज़ी के साथ बढ़ी है। कोमलता और पारस्परिकता के इस संहार के सामने न तो निरुपाय हुआ जा सकता है और न ही तटस्थ। चेतन इस अवस्थिति के लिए विडम्बना और आत्म-धिक्कारवाले स्वर और संरचना को उन्मोचित करते हैं। शोकनाच’ (2004) और ‘वीरता पर विचलित’ (2017) के बाद ‘आत्मद्रोह’ आर. चेतनक्रान्ति का तीसरा कविता-संग्रह है। सांस्कृतिक कूद-फाँद वाले इस अवसरवादी माहौल में चेतन ने आत्म-निर्वासन और सन्त जैसे काव्य-व्यक्तित्व की जो विलक्षणता अर्जित की है, वह हिन्दी की बड़ी उपलब्धियों में एक है। —देवी प्रसाद मिश्र

Read more

₹ 199

₹ 159.2 20% off

Unavailable

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

This Book is out of stock
Frequently bought together
Aatmadroh This book ₹159
Kachhue Intizar Hussain ₹199
Rachna Ka Garbhgriha Krishna Sobti ₹695
3 books selected ₹1,093 ₹1,053
This Book is out of stock

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

‘आत्मद्रोह’आर. चेतनक्रान्ति का आत्मवान संग्रह है, इस अर्थ में कि जो शक्तियाँ नागरिकता और राष्ट्र की आत्मा को नष्ट करना चाहती हैं, वे उनकी गहरी पहचान करते हैं और इस तरह सामूहिक आत्मा के पुनर्वास की युक्तियाँ तलाशते हैं। उन्हें इस बात का पूरा अभिज्ञान है कि समुदायों का नैतिक बल घटा है। वह अफ़वाह, असत्य और घृणा का शिकार हुआ है। वह गहरे अफ़सोस के साथ देखते हैं इस परिघटना को जो उनकी कविता में तंज़ और आत्मावगाहन में बदलती जाती है। सामाजिक और राजनीतिक अधःपतन को वह व्यंग्यार्थ और कई बार गहरे कटाक्ष के साथ कहते हैं। उनकी नागरिक सजगता भाषिक सजगता में संक्रमित होती है जो अन्तत: विरल काव्यात्मक उठान में परिलक्षित होती है।

शमशेर बहादुर सिंह की परम्परा में चेतन हिन्दी के उन गिने-चुने विशिष्ट कवियों में हैं जो उर्दू ग़ज़लें और नज़्म, जो इस संग्रह का भी हिस्सा हैं, कहते हुए अविलेय आपसदारी का पुनर्स्मरण कराना नहीं भूलते। इस संग्रह में यदि कवि का स्वर बदला हुआ है, वह अधिक तल्ख़ और तेज़ाबी हुआ है तो इसलिए कि समय बदला है और सामाजिक विषाक्तता बहुत तेज़ी के साथ बढ़ी है। कोमलता और पारस्परिकता के इस संहार के सामने न तो निरुपाय हुआ जा सकता है और न ही तटस्थ। चेतन इस अवस्थिति के लिए विडम्बना और आत्म-धिक्कारवाले स्वर और संरचना को उन्मोचित करते हैं।

शोकनाच’ (2004) और ‘वीरता पर विचलित’ (2017) के बाद ‘आत्मद्रोह’ आर. चेतनक्रान्ति का तीसरा कविता-संग्रह है। सांस्कृतिक कूद-फाँद वाले इस अवसरवादी माहौल में चेतन ने आत्म-निर्वासन और सन्त जैसे काव्य-व्यक्तित्व की जो विलक्षणता अर्जित की है, वह हिन्दी की बड़ी उपलब्धियों में एक है।

—देवी प्रसाद मिश्र

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2023
Weight
130 grams
ISBN-13
9788119159406
Pages
136
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
13 × 20 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp