Sipi Aur Shankha
(0)
₹
199
₹ 159.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
<strong>–</strong> ‘सीपी और शंख' रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा अंग्रेज़ी से अनूदित विश्व की श्रेष्ठ कविताओं का संग्रह है। बावजूद इसके ये दिनकर जी के व्यक्तित्व के रूपों को उद्घाटित करती उनकी अपनी मौलिक रचनाएँ भी प्रतीत होती हैं, क्योंकि उन्होंने भावों से प्रेरणा लेते हुए अपनी तरफ़ से ऐसे-ऐसे चित्रों की सृष्टि कर डाली है जो मूल में कहीं नहीं। इसलिए इन कविताओं में दिनकर जी के अपने चिन्तन और भाषा का परस्पर अन्योन्य सम्बन्ध भी परिलक्षित होते हैं।</p> <p>संग्रह में पुर्तगीज़ी, स्पेनिश, अंग्रेज़ी, जर्मन, फ़्रेंच, अमरीकी, चीनी, पोलिश और भारतीय भाषाओं में मलयालम की अछूती भावभूमि और नवीन भंगिमाओं वाली कविताएँ शामिल हैं। रूमानी, आत्मपीड़न के अतिरिक्त भक्तिभाव से पूर्ण इन कविताओं की मुख्य विशेषता रस-प्रवणता, लावण्ययुक्त बिम्ब और श्रम की प्रतिष्ठा है।</p> <p>इस संग्रह की कौन सी कविता किस कवि की कविता का प्रतिबिम्ब है, यह सूचित करने को पुस्तक के अन्त में एक सूची भी दी गई है ताकि सहज ही सृजन के विभिन्न आयामों से जुड़ा जा सके। निस्सन्देह, कविता में नवीन रुचि रखनेवाले पाठकों को दिनकर जी की यह कृति पसन्द ही नहीं आएगी, बल्कि अविस्मरणीय भी साबित होगी।
Read moreAbout the Book
<strong>–</strong> ‘सीपी और शंख' रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा अंग्रेज़ी से अनूदित विश्व की श्रेष्ठ कविताओं का संग्रह है। बावजूद इसके ये दिनकर जी के व्यक्तित्व के रूपों को उद्घाटित करती उनकी अपनी मौलिक रचनाएँ भी प्रतीत होती हैं, क्योंकि उन्होंने भावों से प्रेरणा लेते हुए अपनी तरफ़ से ऐसे-ऐसे चित्रों की सृष्टि कर डाली है जो मूल में कहीं नहीं। इसलिए इन कविताओं में दिनकर जी के अपने चिन्तन और भाषा का परस्पर अन्योन्य सम्बन्ध भी परिलक्षित होते हैं।</p>
<p>संग्रह में पुर्तगीज़ी, स्पेनिश, अंग्रेज़ी, जर्मन, फ़्रेंच, अमरीकी, चीनी, पोलिश और भारतीय भाषाओं में मलयालम की अछूती भावभूमि और नवीन भंगिमाओं वाली कविताएँ शामिल हैं। रूमानी, आत्मपीड़न के अतिरिक्त भक्तिभाव से पूर्ण इन कविताओं की मुख्य विशेषता रस-प्रवणता, लावण्ययुक्त बिम्ब और श्रम की प्रतिष्ठा है।</p>
<p>इस संग्रह की कौन सी कविता किस कवि की कविता का प्रतिबिम्ब है, यह सूचित करने को पुस्तक के अन्त में एक सूची भी दी गई है ताकि सहज ही सृजन के विभिन्न आयामों से जुड़ा जा सके। निस्सन्देह, कविता में नवीन रुचि रखनेवाले पाठकों को दिनकर जी की यह कृति पसन्द ही नहीं आएगी, बल्कि अविस्मरणीय भी साबित होगी।
Book Details
-
ISBN9789389243055
-
Pages128
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Prasad Kavya Mein Bimb Yojana
- Author Name:
Ramkrishna Agrawal
- Book Type:

-
Description:
बिम्ब भावों और विचारों के सम्प्रेषण का विशेष सहायक तत्त्व है। वह पाठक को काव्यवस्तु के मूल तक पहुँचाने और कवि के मानस का साक्षात्कार करानेवाला सीधा मार्ग है।
पहले अध्याय में बिम्ब के स्वरूप पर पाश्चात्य दृष्टि से विचार करने के उपरान्त भारतीय काव्यशास्त्र के विभिन्न सिद्धान्तों से उसकी तुलना की गई है। तत्पश्चात् बिम्ब के आधारभूत तत्त्वों, उसकी उपयोगिता एवं कार्यों और उसके वर्गीकरण पर विचार किया गया है। अन्त में कल्पना और भाषा से बिम्ब का सम्बन्ध दिखाया गया है।
दूसरे अध्याय में प्रसाद-काव्य के बिम्बों का विस्तृत वर्गीकृत अध्ययन किया गया है। उपात्त वस्तु के आधार पर प्रकृति और मानव के क्षेत्र से गृहीत वस्तुओं की विविधता का विस्तृत विवेचन हुआ है। तत्पश्चात् क्रमशः संवेदनाओं, प्रेरक अनुभूतियों और मूर्तता के आधार पर प्रसाद जी के बिम्बों का वर्गीकरण किया गया है।
तीसरे अध्याय में प्रसाद जी के बिम्बों के विकास पर विचार करते हुए उसके तीन चरण निर्धारित किए गए हैं—आरम्भिक काव्य, मध्यवर्ती काव्य और प्रौढ़ काव्य। इनकी व्यावर्तक विशेषताओं को स्पष्ट करने के लिए अध्याय के अन्त में कुछ पुनरावृत्त बिम्बों का विकासात्मक अध्ययन भी प्रस्तुत किया गया है।
चौथे अध्याय में बिम्बगत गुणों के आधार पर प्रसाद जी के बिम्बों की सफलता और असफलता पर विचार किया गया है। तदनन्तर प्रसाद-काव्य के परम्परागत और नवीन बिम्बों का अध्ययन हुआ है।
पाँचवें अध्याय में बिम्ब के माध्यम से अभिव्यक्त होनेवाले प्रसाद जी के दार्शनिक तथा अन्य विचारों का विवेचन किया गया है। साथ ही ‘कामायनी’ के रूपक-तत्त्व के निर्वाह में बिम्ब-विधान का कितना योगदान रहा है, इस पर भी विचार हुआ है।
छठे अध्याय में छायावादी काव्य-बिम्बों की उपात्त वस्तु, बिम्बगत संवेदना, मूर्त और अमूर्त बिम्ब-विधान एवं बिम्बगत गुणों का संक्षिप्त विवेचन करते हुए उसमें प्रसाद जी का स्थान निर्धारित किया गया है। तत्पश्चात् बिम्बों में व्यक्त प्रसाद जी के व्यक्तित्व पर विचार किया गया है।
सातवाँ अध्याय प्रबन्ध का उपसंहार है।
प्रस्तुत ग्रन्थ में लेखक ने बिम्ब के माध्यम से प्रसाद के कविमानस का साक्षात्कार कराया है। हिन्दी में सम्भवतः पहली बार समग्र प्रसाद-काव्य की बिम्ब-योजना के विशद विश्लेषण एवं विवेचन के साथ-साथ बिम्ब के आधार पर कवि की विकास-यात्रा का निकट से अध्ययन किया गया है।
Srishti Par Pahara
- Author Name:
Kedarnath Singh
- Book Type:

- Description: केदारनाथ सिंह का यह नया संग्रह कवि के इस विश्वास का ताज़ा साक्ष्य है कि अपने समय में प्रवेश करने का रास्ता अपने स्थान से होकर जाता है। यहाँ स्थान का सबसे विश्वसनीय भूगोल थोड़ा और विस्तृत हुआ है, जो अनुभव के कई सीमान्तों को छूता है। इन कविताओं में कवि की भाषा और पारदर्शी हुई है—और संवादधर्मी भी। संग्रह की लम्बी कविता ‘मंच और मचान’ इस दृष्टि से उल्लेखनीय है कि यहाँ कटते हुए वृक्ष के विरुद्ध एक व्यक्ति (चीना बाबा) का प्रतिरोध ‘घर’ के लिए आदमी के बुनियादी संघर्ष का रूपक बन जाता है। यहाँ तुच्छ कीचड़ भी दुनिया बचाने के लिए सक्रिय दीखता है और घास की एक छोटी-सी पत्ती भी बैनर उठाए हुए मैदान में खड़ी है। पानी, कपास, लकड़ी और धूल जैसी छोटी-छोटी चीज़ों की बेचैनी से भरी ये कविताएँ कोई दावा नहीं करतीं। वे सिर्फ़ आपसे बोलना-बतियाना चाहती हैं—एक ऐसी भाषा में जो जितनी इनकी है उतनी ही आपकी भी।
Pandit Ramprasad 'Bismil' (Mahakavya)
- Author Name:
Acharya Devendra Dev
- Book Type:

- Description: "महाकाव्य विषयक लगभग सभी शास्त्र-सम्मत मानकों पर खरी उतरनेवाली, सोलह सर्गों में निबद्ध इस महनीय महाकाव्य-कृति ‘पं. रामप्रसाद बिस्मिल’, में महाकवि देव ने बिस्मिलजी के अग्निधर्मा व्यक्तित्व और उनके जुझारू, किंतु अत्यधिक संवेदनशील कृतित्व का सजीव चित्रण, अपनी पूरी क्षमता और प्राणवत्ता के साथ किया है। —प्रो. सारस्वत मोहन ‘मनीषी’ अंतरराष्ट्रीय कवि एवं साहित्यकार वस्तुतः देवजी प्रसिद्ध से पूर्व सिद्ध कवि और महाकाव्यकार हैं। ‘पं. रामप्रसाद बिस्मिल’ महाकाव्य उनकी आत्मा की अमंद राष्ट्र-ज्योति की अनर्घ प्रस्तुति है। —प्रो.भगवान शरण भारद्वाज प्रख्यात साहित्यकार एवं शिक्षाविद् क्रांति के अमर पुरोधा ‘पं. रामप्रसाद बिस्मिल’ का भौतिक स्मारक, मेरे लाख प्रयत्न करके भी सरकार तो नहीं बनवा सकी, किंतु प्रस्तुत महाकाव्य के रूप में उनका ‘साहित्यिक स्मारक’ आचार्य देवेंद्र देव ने मेरे जीवनकाल में ही रचकर मुझे दे दिया है। —डॉ. मदनलाल वर्मा ‘क्रांत’ कवि एवं साहित्यकार संपूर्ण महाकाव्य में भावों का अनुगमन करती भाषा, अलकनंदा की अजस्र जलधारा की भाँति मंथर गति से चित्त को बहाती चलती है। हिंदी-जगत् खड़े होकर इस महाकाव्य का करतल ध्वनि से स्वागत करेगा। —प्रो मंगला रानी विद्वान् शिक्षाविद्"
Naye Varsh Ki Subha
- Author Name:
Gerdur Kristny
- Book Type:

- Description: 1970 में रेकजाविक, आइसलैंड में जन्मी गेरदुर क्रिस्ट्नी गुद्योंसदोत्तिर एक बहुमुखी प्रतिभासम्पन्न लेखिका हैं, जिन्होंने रचनात्मक लेखन की विभिन्न विधाओं में अपनी महत्त्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज की है। कहानियाँ, नाटक, यात्रा-संस्मरण लिखे हैं। स्कूली बच्चों के लिए पाठ्य-पुस्तकें लिखी हैं। इन सबके साथ-साथ पत्रकार के रूप में भी विशेष ख्याति अर्जित की है। कई वर्षों तक आइसलैंड की प्रतिष्ठित पत्रिका ‘मैनलिफ़’ की मुख्य सम्पादक रहीं और फ़ैशन लाइफ़-स्टाइल के साथ-साथ समसामयिक सामाजिक विषयों पर गम्भीर विश्लेषणात्मक लेख लिखे। गैरदुर को प्रकृति से बेहद प्यार है जो उनकी ‘प्रकृति’ कविता में स्पष्ट झलकता है। वे ईश्वर की उपस्थिति को बड़ी शिद्दत के साथ प्रकृति में महसूस करती हैं। ईश्वर एक सर्जनात्मक ऊर्जा के साथ उनकी कविताओं में मौजूद है। कवि को ‘लैंगनेस’ कविता में ‘बंजर में फूटती आवाज़ों की फुसफुसाहट’ में ईश्वर का प्रतिरूप दिखाई देता है। इसी तरह एक कविता में प्रेम और ऊन से बुनी शिशु यीशु की शॉल उन स्त्रियोचित गुणों को रेखांकित करती है जिनसे वह पूरे मानवीय समाज को सम्पृक्त करना चाहती हैं। उनकी कविता ‘चियर्स’ में सृष्टि की उत्पत्ति दो रूपों में व्यंजित हुई है—एक का सन्दर्भ है ईसाई धर्मग्रन्थ जैनेसिस में आई दन्तकथा तो दूसरे का सन्दर्भ है योहान सिगुरजनसन की आइसलैंड की अत्यन्त लोकप्रिय कविता ‘द कप’।
Dhoondha Aur Paya
- Author Name:
Vipin Kumar Agarwal
- Book Type:

-
Description:
‘ढूँढ़ा और पाया’ कवि विपिन कुमार अग्रवाल का ख़ास ढंग से विशिष्ट काव्य-संग्रह है। इसमें की कुछ कविताएँ विपिन के एकदम पहले, या कि पहले आधे संग्रह ‘धुएँ की लकीरें’ (1956) से ली गई हैं—इस संग्रह के दूसरे कवि लक्ष्मीकान्त वर्मा हैं। यह संयोग से कुछ अधिक है कि नई कविता के ये दोनों असाधारण कवि अपना पहला संग्रह संयुक्त रूप से प्रकाशित करते हैं। फिर प्रस्तुत संग्रह में कुछ अब तक की असंकलित कविताएँ सम्मिलित की गई हैं। और विशिष्टता तब पूरी हो जाती है जब हम पाते हैं कि कवि की पाँच अन्तिम अप्रकाशित कविताएँ यहाँ पढ़ने को पहली बार सुलभ हो रही हैं।
यों, यह संग्रह विपिन के काव्य-समग्र का बड़ी कुशलता के साथ प्रतिनिधित्व करता है। इसका संकलन-सम्पादन डॉ. शीला अग्रवाल द्वारा किया गया है। विपिन की इन कविताओं को इस रूप में पढ़ते समय एक विषादपूर्ण सन्तोष का अनुभव होता है। कविताएँ हमारे सामने हैं, कवि अनुपस्थित। पर क्या इन कविताओं में ही हम कवि को उपस्थित नहीं पाते? निराला का स्मरण अनायास हो आता है—मैं अलक्षित हूँ, यही कवि कह गया है।
—रामस्वरूप चतुर्वेदी
Amma Se Batein Aur Kuch Lambi Kavitayan
- Author Name:
Bhagwat Rawat
- Book Type:

- Description: भगवत रावत का काव्य-संसार विविधवर्णी और बहुआयामी है। वे हिन्दी के ऐसे कवि हैं जिन्होंने अपने आत्मीय देसी मुहावरे में कविता को सम्भव किया। छोटी कविताओं से लेकर अनेक लम्बी और प्रयोगमूलक कविताओं तक फैला हुआ उनका काव्य-फलक अत्यन्त व्यापक है। उनकी कविताओं का संसार हमारे समाज के निम्नवर्ग से लेकर मध्यवर्ग तक के उन अति साधारण लोगों की जीवन छवियों का ऐसा रचनात्मक दस्तावेज है जो दुनिया में बची हुई मनुष्यता का जीवन्त साक्ष्य है। यथार्थ की ठोस जमीन पर खड़ी उनकी कविता न तो किसी छद्म क्रान्ति का शंखनाद है, न सबकुछ के नष्ट हो जाने की उदासी और अवसाद। उनमें करुणा की ऐसी ऊर्जा है जिसमें जीवन की महक और उसकी खनक छिपी हुई है। भगवत रावत की कविता रूप और कथ्य के अनेक स्तरों से गुज़रती हुई अपना संसार रचती है। इस दृष्टि से उनकी लम्बी कविताएँ विशेष रूप से द्रष्टव्य हैं। इन कविताओं में उन्होंने बौद्धिकता और आधुनिक जीवन की जटिलताओं को आत्मसात् कर जो सहजता और आत्मीयता अर्जित की है, वह समकालीन हिन्दी कविता की विरल उपलब्धि है। ‘अम्मा से बातें’, ‘नकद उधार’, ‘जो भी पढ़ रहा या सुन रहा है इस समय’, ‘लड़का अजूबा’ से लेकर ‘सुनो हिरामन’ और ‘अथ रूपकुमार कथा’ आदि कविताएँ अपनी तरह के अकेले उदाहरण हैं। उनकी लम्बी कविता ‘कहते हैं कि दिल्ली की है कुछ आबोहवा और’ ने भी न सिर्फ़ साहित्यिक समाज बल्कि व्यापक पाठक समुदाय को आन्दोलित किया है। इन कविताओं को जाने-समझे बिना भगवत रावत के कवि स्वभाव को सम्पूर्णता में पहचानना शायद सम्भव नहीं होगा। यह संग्रह इस दृष्टि से भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
Har Kavita Kuchh Kahti Hai
- Author Name:
Kalpana Verma
- Book Type:

- Description: अपना तीसरा कविता-संग्रह मैं अपने पाठकों को सौंप रही हूँ। एक शिशु की तरह देखभाल करके मैंने संग्रह की कविताओं को पालने की कोशिश की है। एहसासों के साथ अपने होने को महसूस किया है। एक ओर ज़िन्दगी की अज़ब कहानी चल रही है तो दूसरी ओर चार दृश्यों का सच है। प्यार और पैसे की जंग में भौतिकता की जीत का जश्न है। डिमेंशिया और सुडोकू जैसे ग्रहण भी हैं। केबल टी.वी. की जकड़न का अपना अन्दाज़ है। बूँद भी छलकती है, चलते-चलते, सब आ जाता है के विस्तार में अनुभवों की पकड़ है। विचारों की आवाजाही से कलम को गति मिली है। यह पुस्तक इस गति का एक पड़ाव है। पड़ाव पर ठहरने के बाद आगे की मंजिल दिखने लगी है।
Akaal Mein Saaras
- Author Name:
Kedarnath Singh
- Book Type:

-
Description:
केदारनाथ सिंह की कविताओं का संग्रह ‘अकाल में सारस’ आज की हिन्दी कविता को एक सर्वथा नया मोड़ देने की सार्थक कोशिश है। इस संग्रह के साथ यह उम्मीद बनी रहेगी कि कविता अपनी जड़ों में ही फैलती है और उसी से प्राप्त ऊर्जा के बल पर वह अपने समय, परिवेश, आदमी के संघर्ष, प्रकृति में धडक़ती हुई जिजीविषा को उपयुक्त शब्द देने में कामयाब होती है। ‘अकाल में सारस’ में जनपदीय चेतना में रची-बसी भाषा की ऐन्द्रिकता, अर्थध्वनि, मूर्तता, गूँज और व्याप्ति को पहचानना उतना ही सहज है जितना साँस लेना। पर इस सहज पहचान में बहुत कुछ है जो उसी के ज़रिए जीवन की छिपी हुई या अधिक गहरी सच्चाइयों के प्रति उत्सुक बनाता है। एक तरह से देखें तो इन कविताओं की सरलता उस विडम्बनापूर्ण सरलता का उदाहरण है जो वस्तुओं में छिपे जीवन-मर्म को भेदकर देखने की अनोखी हिकमत कही जा सकती है।
‘अकाल में सारस’ में भाषा के प्रति अत्यन्त संवेदनशील तथा सक्रिय काव्यात्मक लगाव एक नए काव्य-प्रस्थान की सूचना देता है। भाषा के सार्थक और सशक्त उपयोग की सम्भावनाएँ खोजने और चरितार्थ करने की कोशिश केदार की कविता की ख़ास अपनी और नई पहचान है। प्रगीतों की आत्मीयता, लोक-कथाओं की-सी सरलता और मुक्त छन्द के भीतर बातचीत की अर्थसघन लयात्मकता का सचेत इस्तेमाल करते हुए केदार ने अपने समय के धडक़ते हुए सच को जो भाषा दी है, वह यथार्थ की तीखी समझ और संवेदना के बग़ैर अकल्पनीय है। केदार के यहाँ ऐसे शब्द कम नहीं हैं जो कविता के इतिहास में और जीवन के इस्तेमाल में लगभग भुला दिए गए हैं, पर जिन्हें कविता में रख-भर देने से सुदूर स्मृतियाँ जीवित वर्तमान में मूर्त हो उठती हैं। परती-पराठ, गली-चौराहे, देहरी-चौखट, नदी-रेत, दूब, सारस जैसे बोलते-बतियाते केदार के शब्द उदाहरण हैं कि उनकी पकड़ जितनी जीवन पर है उतनी ही कविता पर भी। ‘अकाल में सारस’ एक कठिन समय की त्रासदी के भीतर लगभग बेदम पड़ी जीवनाशक्ति को फिर से उपलब्ध और प्रगाढ़ बनाने के निरन्तर संघर्ष का फल है।
Bindu Sindhu Ki Oor
- Author Name:
Vairamuthu
- Book Type:

-
Description:
भारतीय साहित्य के वर्तमान युग के शलाका-पुरुष कमलेश्वर जी के शब्दों में—‘समकालीन कविता परिदृश्य पर तमिल कवि वैरमुत्तु ने जिस तरह अपने अनुवाद के साथ हिन्दी में उपस्थिति दर्ज की है, उससे साबित होता है कि कविता भाषाओं की सीमा में बँधी नहीं रह सकती। इन कविताओं में वैरमुत्तु अपनी सम्पूर्ण प्रतिभा और कलात्मक प्रखरता के साथ मौजूद हैं। वह शब्दों को ध्वजा की तरह फहराकर कविता नहीं बुनते, वरन् समय को पकड़कर कविता में ही भविष्य का सपना गूँथ देते हैं। वे जीवन में शेष हो चली आस्थाओं की पुनर्रचना करते हैं। उनके शब्दों में संवेदना की छायाएँ झाँकती हैं।...कवि के रचना-संसार में वह सब कुछ है जिसके माध्यम से वह आत्मा की क्षत-विक्षत स्मृतियों में जाकर समय की संवेदना और खुद की सृजनशीलता के मानवीय स्रोतों को खोजता है, तब ही कविता क्लासिकी रंगत के साथ पाठकों को झकझोरने लगती है।’
हिन्दी में विचार-कविताओं के प्रवर्तक तथा स्वप्नदर्शी चिन्तक डॉ. बलदेव वंशी का निरीक्षण है—‘कविताओं में सर्वाधिक मुखर स्वर प्रकृतिपरक कविताओं, प्रकृति-तत्त्वों, प्रकृति-सत्यों, लयों-रंगतों-गतियों एवं विभिन्न बिम्ब-प्रतीकों आदि का है। इसी से कवि की समृद्ध अनुभूतिशीलता, संवेदना, दृष्टिबोध की व्यापकता का परिचय मिलता है और इसी के आधार पर उसके स्वर की प्रामाणिकता भी सिद्ध होती है; क्योंकि प्रकृति अपने आप में एक सत्य है।...निसर्ग (प्रकृति) के साथ ऐसा एकात्म भाव वैरमुत्तु के कवि की ऐसी विरल विशेषता है, जो उन्हें भिन्न एवं महत्त्वपूर्ण बनाती है। युग की बाज़ारवादी, आर्थिक भूमंडलीकरण की अमानवीयता एवं संवेदना-विहीनता के विपरीत वे आत्मिक एवं संवेदनात्मक आग्रहों को लेकर अपनी और भारतीय विश्वदृष्टि की विधेयता सिद्ध कर रहे हैं...‘माटी की गंध’ से भरपूर मस्ती और संघर्ष की साहसिक उत्फुल्लता तथा मज़दूर-ग़रीब-शोषित के प्रति अक्षय आत्मीयता उन्हें बृहत्तर आयामों से जोड़ती है।’
Cooker Ki Seeti
- Author Name:
Yogita Warde
- Book Type:

- Description: जब हमने हँसते-मुस्कुराते हमेशा की तरह 2020 में प्रवेश किया, तब कहाँ पता था कि हमारी आने वाली ज़िंदगी में हमें एक बीमारी के चलते 'लॉकडाउन' में रहना पड़ेगा। लॉकडाउन हम सभी के लिए कठिन दौर रहा, जहां हमारे ऊपर क्या-क्या गुजरा, हमें किन-किन चीजों का नया अनुभव हुआ। किस तरह हम कहीं आ-जा नहीं सकते थे। किस तरह हम घरों में रहने पर मजबूर हुए। किस तरह हँसना-रोना, बिछड़ना, तकलीफें, स्कूल बंद रहे, वर्क फ्रॉम होम किया। किस तरह मजदूरों की घर वापसी हुई, वहीं बच्चे अपनी नानियों के घर नहीं जा सके। किस तरह हम डिज़िटल दुनिया में बीस साल आगे हो गए। किस तरह हमारी ज़िन्दगी में सोशल मीडिया ने अहम रोल निभाया। किस तरह हमने अपने परिवार के साथ समय बिताया। कहीं किसी की शादी का टूटना, कहीं किसी का साथ हमेशा के लिए छूटना। इन सभी अनुभवों का लेखा-झोखा है यह किताब.... 'कुकर की सीटी' में छह नाटकों का संकलन है, जो कि लॉकडाउन पर आधारित हैं।
Udaan
- Author Name:
Pukhraj Maroo
- Book Type:

-
Description:
ग़ज़ल हिन्दुस्तानी रिवायत की हसीन-तरीन विरासत है, इसको ज़बानों के संकीर्ण दायरों में क़ैद नहीं किया जा सकता। यह न उर्दू है, न हिन्दी—बस, ग़ज़ल तो ग़ज़ल होती है और उसको ग़ज़ल ही होना चाहिए, वरना सारी मेहनत और कोशिश व्यर्थ हो जाएगी। पुखराज मारू की ग़ज़लों का दीवान देखते हुए मेरे इस ख़याल को मज़ीद तक़वियत मिली। उसकी ग़ज़लें सर-सब्ज़ फलदार दरख़्तों की तरह हैं जिनमें ख़ुशज़ायका मुनफ़रिद और ख़ूबसूरत महकदार फल हैं। बाज पककर रस-भरे बन गए हैं, कुछ अधकच्चे हैं और कुछ इब्तिहाई मराहिल में। लेकिन किसी मज़मूए में बड़ी तादाद में अच्छे शे’र और ख़ूबसूरत मिसरे हों तो दाद तो देनी ही पड़ेगी।
पुखराज मारू ग़ज़ल की क्लासिकी रिवायत के रम्ज शनास हैं। उसकी बारीकियों से परिचित और शब्द पर भी उनकी पकड़ है। ख़याल भी नाज़ुक, ख़ूबसूरत और दिलनवाज़ हैं। नई-नई ज़मीनें भी तराशी हैं और ग़ज़ल के गुल-बूटे खिलाए हैं। वह इक्कीसवीं शताब्दी के बर्क़ रफ़्तार अहद में और बाज़ारवाद के युग में रहते हैं। किन्तु उनकी ग़ज़लों की दुनिया क़दीम है, इसमें शिद्दत नहीं है। समकालीन परिस्थितियों की झलक है भी तो बहुत कम-कम। यह शायर दुनिया का और मानवता का भला प्रेम के ढाई अक्षर में ही तलाश करना चाहता है। यद्यपि इश्क़ से बढ़कर और क्या है जो सारी कायनात में छाया हुआ है।
—बशीर बद्र
Main Ek Pheriwala
- Author Name:
Rahi Masoom Raza
- Book Type:

- Description: राही मासूम रज़ा मूलतः कवि हैं और उनकी आन्तरिक अनुभूतियों को कविताओं में ही तीव्रतम अभिव्यक्ति मिली है। ‘मैं एक फेरीवाला’ की कविताओं में ज़िन्दगी की कटुताओं से जूझने की ज़िद है और उसी ज़िन्दगी को गरम-गरम पीने की प्यास भी! संग्रह में लगभग 18 वर्षों के लम्बे अन्तराल में लिखी गई कविताएँ संगृहीत हैं। ‘मैं एक फेरीवाला’ की कविताएँ ‘हिज्र’, ‘प्यास’ और ‘तनहाई’ की कविताएँ है। स्वयं कवि के शब्दों में, “मेरी शायरी की बुनियादी लय उदासी की है। यह उदासी हमारे युग की सबसे बड़ी और जीवित वास्तविकता है।” इन भावनाओं को विभिन्न कविताओं में प्रतिबिम्वित होते देखा जा सकता है। इतनी लम्बी अवधि की कविताओं का संग्रह होने की वजह से काव्यरूप और विषयवस्तु के स्तर पर इसमें बड़ा वैविध्य है। रूमानियत से भरपूर गीतों से लेकर एक सामान्य आदमी की लाचारी और आकांक्षा का चित्रण करनेवाली छोटी-छोटी कविताएँ भी इस संग्रह में मिलेंगी । यह संग्रह राही मासूम रज़ा के कवि-व्यक्तित्व का वैविध्य पाठकों के सामने प्रस्तुत करता है ।
Hasya Vyang Ki Shikhar Kavitaye
- Author Name:
Arun Gemini
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी में हास्य-व्यंग्य कविताओं का उदय मुख्यतः स्वतंत्रता के बाद हुआ। बेढब बनारसी, रमई काका, गोपालप्रसाद व्यास और काका हाथरसी आदि कवियों ने हिन्दी की ज़मीन में हास्य-व्यंग्य कविताओं के बीज बोए। कालान्तर में, ख़ासकर सन् 1970 के बाद, ये बीज भरपूर फ़सल बने और लहलहाए। जीवन में बढ़ते तनाव ने हास्य-व्यंग्य को कवि सम्मेलनों के केन्द्र में स्थापित कर दिया। इसने लोकप्रियता के शिखर छुए। देश में ही नहीं, विदेश में भी। हिन्दीभाषियों में ही नहीं, अहिन्दीभाषियों में भी।
इस ऐतिहासिक प्रक्रिया में कुछ कविताओं की भूमिका विशेष रही। इस पुस्तक में वही कविताएँ प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है। इस दृष्टि से कि कोई एक संकलन ऐसा हो, जो हिन्दी की सर्वाधिक सराही गई हास्य-व्यंग्य कविताओं का प्रतिनिधित्व सचमुच कर सके। इस दृष्टि से भी कि हिन्दी की महत्त्वपूर्ण हास्य-व्यंग्य कविताओं के समुचित मूल्यांकन के लिए आधार-सामग्री एक जगह उपलब्ध हो सके।
उम्मीद है कि प्रस्तुत प्रयास आज़ादी के बाद की हास्य-व्यंग्य प्रधान कविताओं और उनमें व्यक्त देश-काल की विडम्बनाओं-विद्रूपताओं को रेखांकित करने की भूमिका अदा करेगा; और कविता-संवेदना की इस धारा की क्षमताओं को सामने लाने में भी सफल होगा।
Archna
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

-
Description:
‘अर्चना’ निराला की परवर्ती काव्य-चरण की प्रथम कृति है। इसके प्रकाशन के बाद कुछ आलोचकों ने इसमें उनका प्रत्यावर्तन देखा था। लेकिन सच्चाई यह है कि जैसे ‘बेला’ के गीत अपनी धज में ‘गीतिका’ के गीतों से भिन्न हैं, वैसे ही ‘अर्चना’ के गीत भी
‘गीतिका’ ही नहीं, ‘बेला’ के गीतों से भिन्न हैं। इस संग्रह की समीक्षा करते हुए श्रीनरेश मेहता ने लिखा था कि यह निराला की ‘विनयपत्रिका’ है। निश्चय ही इसके अधिसंख्यक गीत धर्म-भावना नहीं है। यहाँ हमें मार्क्स की यह उक्ति याद करनी चाहिए : ‘धार्मिक वेदना एक साथ ही वास्तविक वेदना की अभिव्यक्ति और वास्तविक वेदना के विरुद्ध विद्रोह भी है। अकारण नहीं कि ‘अर्चना’ के भक्तिभाव से भरे हुए गीत स्वातंत्र्योत्तर भारत के यथार्थ को बहुत तीखे ढंग से हमारे सामने लाते हैं, यथा—‘आशा-आशा मरे/लोग देश के हरे!’ ‘निविड़ विपिन, पथ अराल;/भरे हिंस्र जन्तु-व्याल’ आदि गीत।
पहले की तरह ही अनेक गीतों में निराला का स्वर स्पष्टत: आत्मपरक है, जैसे ‘तरणी तार दो/अपर पार को!’ ‘प्रिय के हाथ लगाए जगी,/ ऐसी मैं सो गई अभागी।’ ऐसे सरल प्रेमपरक गीत हमें उनमें पहले नहीं मिलते! प्रकृति से भी उनका लगाव हर दौर में बना रहता है। यह बात ‘आज प्रथम गाई पिक पंचम’ और ‘फूटे हैं आमों में बौरे’ ध्रुवकवाले गीतों में दिखलाई पड़ती है।
‘अर्चना’ में ऐसे गीत भी हैं, जो इस बात की सूचना देते हैं कि कवि अब महानगर और नगरों को छोड़कर अपने गाँव आ गया है। उनका कालजयी और अपनी सरलता में बेमिसाल गीत ‘बाँधो न नाव इस ठाँव, बन्धु!/पूछेगा सारा गाँव, बन्धु’ ‘अर्चना’ की ही रचना है, जिसमें गाँव की एक घटना के सौन्दर्यात्मक पक्ष का चित्रण किया गया है।
—नन्दकिशोर नवल
Gul-E-Nagma
- Author Name:
Firaq Gorakhpuri
- Book Type:

- Description: ‘आने वाली नस्लें तुम पर रश्क करेंगी हम-असरो जब ये ध्यान आएगा उनको, तुमने ‘फ़िराक़’ को देखा था।’ ‘फ़िराक़’ की शायरी इस धरती की सोंधी-सुगन्ध, नदियों की मदमाती चाल, हवाओं की नशे में डूबी मस्ती में ढूँढ़ी जा सकती है। ‘फ़िराक़’ प्रायः कहा करते थे कि कलाकार का मात्र भारतवासी होना पर्याप्त नहीं है, वरन् उसके भीतर भारत को निवास करना चाहिए। भारत की शायरी की पहचान भारतीयता से होनी चाहिए। भारतीयता का एक विशिष्ट काव्य प्रतिमान है। ‘फ़िराक़’ की शायरी ने जीवन पर अमृत वर्षा कर दी और उसे ऐसा मधुर संगीत प्रदान किया, जिससे देवताओं के पवित्र नेत्र भीग जाएँ। ‘फ़िराक़’ की शायरी जीवन के लिए पाकीज़ा दुआ बन गई। 'फ़िराक़' ने उर्दू शायरी को एक बिलकुल नया आशिक़ दिया है और उसी तरह बिलकुल नया माशूक़ भी। इस नए आशिक़ की एक बड़ी स्पष्ट विशेषता यह है कि इसके भीतर एक ऐसी गम्भीरता पाई जाती है जो उर्दू शायरी में पहले नज़र नहीं आती थी। ‘फ़िराक़’ के काव्य में मानवता की वही आधारभूमि है और उसी स्तर की है जैसे ‘मीर’ के यहाँ उनके काव्य में ऐसी तीव्र प्रबुद्धता है, जो उर्दू के किसी शायर से दब के नहीं रहती। अतएव, उनके आशिक़ में एक तरफ़ तो आत्मनिष्ठ मानव की गम्भीरता है, दूसरी तरफ़ प्रबुद्ध मानव की गरिमा है।
Aadhi Pankti
- Author Name:
Anchit
- Book Type:

- Description: Aadhi Pankti Poetry
Prem Mein Ped Hona
- Author Name:
Jacinta Kerketta
- Book Type:

-
Description:
जसिंता केरकेट्टा की ये कविताएँ, जैसा कि स्वाभाविक है, उस प्रेम की कविताएँ नहीं हैं, जो केवल दो व्यक्तियों के बीच होता है, ये कविताएँ उस प्रेम पर केन्द्रित हैं जिससे समग्र सृष्टि को संबल मिलता है। वह प्रेम जो मनुष्य का प्रकृति से है, वह प्रेम जो प्रकृति बिना किसी प्रतिसाद की कामना के समूची मानवता को देती है! ये कविताएँ उस क्षुद्रता को भी सम्बोधित हैं, जिसका प्रदर्शन हम प्रकृति के उस प्रेम का अन्यायपूर्ण बँटवारा करके करते हैं।
जसिंता ने बहैसियत कवि और बहैसियत व्यक्ति इस प्रेम के वैभव को बहुत नज़दीक से देखा और आत्मसात किया है; इसी प्रेम के चलते उन्होंने आदिवासी जन की पीड़ा और प्रकृति के आर्तनाद को अपनी कविता में लगातार जगह दी है। प्रेम क्यों नहीं बहुतों से हो सकता है? बहुत सारे लोगों, बहुत सारे बच्चों, स्त्रियों, पेड़-पौधों, नदी, झरनों, पहाड़ों और पूरी धरती से? वे सही ही पूछती हैं।
इस संग्रह में निसन्देह कुछ कविताओं में हमें वह प्रेम भी मिलता है; जो दो व्यक्तियों के बीच होता है। लेकिन इसे भी देखने का उनका नज़रिया वही नहीं है, जो सबके लिए सामान्य है। इसीलिए वे ये पंक्तियाँ लिख पाती हैं : प्रेम में आदमी/क्यों एक हो जाना चाहता है?/अपनी भिन्नता के साथ/क्यों दो नहीं रह पाता?—और इस प्रश्न का समाहार वे वर्तमान के एक बड़े फलक पर ले जाकर करती हैं : इधर देश के प्रेम में कुछ लोग/सबको ‘एक’ कर देना चाहते हैं/जो ‘एक’ न हो पाए, वे मारे जाते हैं।
प्रेम का अर्थ ‘क़ब्ज़ा’ नहीं होता/न किसी की देह, न ख़ुशियों, न सपनों पर—इन पंक्तियों को हम इस कविता-संग्रह का एकाग्र मंतव्य कह सकते हैं, जिसका विस्तार एक व्यक्ति से लेकर प्रकृति के विराट तक है।
Pratinidhi kavitayen : Arun Kamal
- Author Name:
Arun Kamal
- Book Type:

-
Description:
अरुण कमल की कविता का उर्वर प्रदेश लगभग पाँच दशकों में फैला हुआ है। अरुण कमल की कविता में उस अभिनव काव्य-सम्भावना का आद्यक्षर और उसका पूरा ककहरा दिखाई पड़ता है, जिससे हिन्दी कविता का नया चेहरा आकार लेता प्रतीत होता है। अरुण कमल की कविता की बहुत बड़ी विशेषज्ञता वह अपनत्व है जो बहुत हद तक उनके व्यक्तित्व का ही हिस्सा है। उनकी कविताओं से होकर गुज़रना एक अत्यन्त आत्मीय स्वजन
के साथ एक अविस्मरणीय यात्रा है। अरुण कमल की कविताएँ एक साथ अनुभवजन्य हैं और अनुभवसुलभ। अनछुए बिम्ब, अभिन्न पर कुछ अलग से, अरुण कमल के काव्य-जगत में सहज ही ध्यान खींचते हैं और अपने समकालीनों में उन्हें एक अलग पहचान देते हैं। अरुण कमल की सबसे सधी कविताओं में अनन्य अर्थगौरव और अनुगूँज है। यह अर्थगुरुता या अर्थगहनता जिससे कविता पन्ने पर जहाँ ख़त्म होती है, वहाँ ख़त्म नहीं होती बल्कि अपने अर्थ और असर की अनुगूँजों से पढ़ने, सुननेवालों के मन-मानस में अपने को फिर से सृजित करती है। कवि का सतत सृजन-कर्म उसकी इसी अप्रतिहत विकास-यात्रा के प्रति आश्वस्त करता है।
Yaad Kiya Dil Ne
- Author Name:
Dr. Trinetra Bajpai
- Book Type:

-
Description:
हिन्दी फिल्म संगीत का एक दौर ऐसा भी था जब गीतों, गजलों, नज्मों की सम्पदा सुमधुर धुनों और संयत लय-ताल के साथ हमारे जीवन के तकरीबन हर पहलू की जीवन्त व्याख्या की तरह हमारे साथ रहती थी। हर मन की हर बात कहने के लिए कोई-न-कोई गीत निकल आता था, दर्द की, खुशी की, अफसोस की, शोक की हर लहर किसी-न-किसी गीत से जाकर जुड़ जाती थी। आज भी जरूरत के वक़्त वही गीत हमारे काम आते हैं।
और उन गीतों के पीछे थी ऐसे अनेक संगीतकारों की सुर-साधना, अनेक ऐसे गायकों की संगीत-चेतना जिनमें से बहुतों का नाम भी हम आज के धूम-धड़ाके में भूल गए हैं, या जान ही नहीं पाए।
यह किताब उन्हीं नामों की स्वर्ण-तालिका को प्रकाशित करती है। वे संगीत-निर्देशक जिन्होंने हिन्दी फ़िल्म संगीत की जड़ें गूँथी, अपनी धुनों से देश के जन-गण को स्वर दिया, ऐसी लयबद्ध पंक्तियाँ दीं जो कहीं-न-कहीं हर किसी को आपस में जोड़कर देश की सामूहिक संवेदना को आकार देती हैं।
इस पुस्तक के केन्द्र में खास तौर पर उन संगीतकारों का जीवन और कृतित्व है जिन्होंने फ़िल्म संगीत को एक नई, सुरीली और कलात्मक दिशा दी और फ़िल्म-संगीत के उस दौर को सम्भव किया जिसे आगे चलकर संगीत का ‘स्वर्ण युग’ कहा गया। संगीत की गहरी समझ, शोध और लोकप्रियता के आधार पर यहाँ ऐसे 26 संगीतकारों पर फोकस किया गया है। अपने क्षेत्र के इन युग-प्रवर्तकों के साथ ही यहाँ उन लोगों के काम को भी रेखांकित किया गया है जिन्होंने भारतीय फ़िल्म संगीत के खजाने को समृद्ध करने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई और जो आज भी सक्रिय हैं।
फ़िल्म-संगीत के प्रेमी पाठक इस अनूठी पुस्तक को सन्दर्भ ग्रंथ की तरह सहेज सकते हैं।
Is Tarah Main
- Author Name:
Pawan Karan
- Book Type:

- Description: पवन करण की कविताएँ जीवन की स्वाभाविक हरकत की तरह आती हैं। वे हर जगह कवि हैं। इसीलिए उनकी कविताएँ हर कहीं से उग आती हैं। न उन्हें विषयों के लिए दिमाग़ को किसी अनोखी दुनिया में दौड़ाना पड़ता है, न कविता को वाणी देने के लिए भाषा के साथ कोई शारीरिक-मानसिक अभ्यास करना पड़ता है। दुनिया में रहना-जीना जितना प्राकृतिक है, उनकी कविताएँ भी लगभग वैसी ही हैं। त्योहार पर घर जाते आदमी का उल्लास हो या शहर के सबसे पुराने बैंड का रुदन जो सिर्फ़ उसे सुनाई देता है, या घर वह पुरानी कैंची जो ‘फ़िलहाल घर के कोष में/नोट के दो टुकड़ों की तरह रखी है।’ और ताला, ‘यह राजदार हमारा/अनुपस्थिति में हमारी/कभी झुकता नहीं टूट भले जाए।’ या फिर बिजली के खम्भे जो रात के सुनसान में ‘जब उनके नीचे से/गुज़रता है चौकीदार/उसके सिर पर हर बार/रोशनी की उजली टोपी/पहना देते हैं’ और जब वह देर तक वापस नहीं आता तो उसे ‘अपने नीचे लेटे कुत्तों में से/किसी एक को भेजते हैं उसे देखने।’ ये कविताएँ हमें व्याकुल करके किसी बदलाव की क़सम खाने के लिए नहीं उकसातीं, बल्कि जहाँ हम हैं, जिस भी मुद्रा में वहीं हमारे भीतर आकर वहीं से हमें बदलना शुरू कर देती हैं, और इनसे गुज़रकर जब हम वापस दुनिया के रूबरू होते हैं, सबसे पहले हमें अपनी दृष्टि नई लगती है, और दुनिया के अनेक कच्चे जोड़ अचानक हमें दिखाई देने लगते हैं जिन्हें फ़ौरन रफ़ू की या मरम्मत की ज़रूरत है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book