Aiwan-E- Ghazal
(0)
Author:
Jeelani Bano, Surjeet, Zilani BanoPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Poetry₹
399
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‘ऐवाने ग़ज़ल’ की फ़िज़ा परम्परा से शायराना चली आई है, लेकिन वक़्त, बदला, ज़मींदारी की पुख़्ता ज़मीनें खिसकने लगीं, सबकी बराबरी के नारे हवा में गूँजने लगे तो ऐवाने ग़ज़ल के आख़िरी शायर वाहिद हुसैन के पास दिल की बातें करने के लिए रंगीन परों वाली एक नन्ही-सी चिड़िया ही बच गई जो रोज़ उनके बाग़ में उनके पास आकर बैठती। ख़त्म होने पर आमादा इस कहानी को नई रफ़्तार बख़्शती है चाँद। बड़ी हवेली की नन्ही-मुन्नी खिलंदड़ी नवासी चाँद बड़ी होकर स्टेज पर पहुँचती है और एक असम्भव मुहब्बत में तपेदिक के हत्थे चढ़ जाती है। लेकिन जाते-जाते अपने पीछे छोड़ जाती है ग़ज़ल को। ग़ज़ल जिसने पैदा होने के बाद से प्यार और दुलार क्या होता है, नहीं जाना; बड़ी हुई तो ज़िन्दगी से उसने सिर्फ़ एक चीज़ माँगी—प्यार। जो आख़िरकार उसे नहीं मिला और उसने अपना ख़ाली आँचल क्रान्ति के ऊपर फैला दिया। और नक्सली माँ-बाप की जंगलों में जन्मी इकलौती औलाद क्रान्ति ने जैसे ‘ऐवाने ग़ज़ल’ की पूरी परम्परा को ही उलटकर रख दिया। उसके कमरे में बम थे, जेब में पिस्तौल, हाथ में सिगरेट और चेहरे पर वह तेज़ जिसके सामने ऐवाने ग़ज़ल की दीवारों पर चस्पाँ तमाम हुस्नपरस्त शायर हक-दक रह गए। छोटी-छोटी तफ़सीलों से लबरेज़ एक बड़ी कहानी।
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‘ऐवाने ग़ज़ल’ की फ़िज़ा परम्परा से शायराना चली आई है, लेकिन वक़्त, बदला, ज़मींदारी की पुख़्ता ज़मीनें खिसकने लगीं, सबकी बराबरी के नारे हवा में गूँजने लगे तो ऐवाने ग़ज़ल के आख़िरी शायर वाहिद हुसैन के पास दिल की बातें करने के लिए रंगीन परों वाली एक नन्ही-सी चिड़िया ही बच गई जो रोज़ उनके बाग़ में उनके पास आकर बैठती। ख़त्म होने पर आमादा इस कहानी को नई रफ़्तार बख़्शती है चाँद। बड़ी हवेली की नन्ही-मुन्नी खिलंदड़ी नवासी चाँद बड़ी होकर स्टेज पर पहुँचती है और एक असम्भव मुहब्बत में तपेदिक के हत्थे चढ़ जाती है। लेकिन जाते-जाते अपने पीछे छोड़ जाती है ग़ज़ल को। ग़ज़ल जिसने पैदा होने के बाद से प्यार और दुलार क्या होता है, नहीं जाना; बड़ी हुई तो ज़िन्दगी से उसने सिर्फ़ एक चीज़ माँगी—प्यार। जो आख़िरकार उसे नहीं मिला और उसने अपना ख़ाली आँचल क्रान्ति के ऊपर फैला दिया। और नक्सली माँ-बाप की जंगलों में जन्मी इकलौती औलाद क्रान्ति ने जैसे ‘ऐवाने ग़ज़ल’ की पूरी परम्परा को ही उलटकर रख दिया। उसके कमरे में बम थे, जेब में पिस्तौल, हाथ में सिगरेट और चेहरे पर वह तेज़ जिसके सामने ऐवाने ग़ज़ल की दीवारों पर चस्पाँ तमाम हुस्नपरस्त शायर हक-दक रह गए।
छोटी-छोटी तफ़सीलों से लबरेज़ एक बड़ी कहानी।
Book Details
-
ISBN9788171787241
-
Pages304
-
Avg Reading Time10 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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अनामिका के नए संग्रह ‘टोकरी में दिगन्त—थेरी गाथा : 2014’ को पूरा पढ़ जाने के बाद मेरे मन पर जो पहला प्रभाव पड़ा, वो यह कि यह पूरी काव्य-कृति एक लम्बी कविता है, जिसमें अनेक छोटे-छोटे दृश्य, प्रसंग और थेरियों के रूपक में लिपटी हुई हमारे समय की सामान्य स्त्रियाँ आती हैं। संग्रह के नाम में 2014 का जो तिथि-संकेत दिया गया है, मुझे लगता है कि पूरे संग्रह का बलाघात थेरी गाथा के बजाय इस समय-सन्दर्भ पर ही है। संग्रह के शुरू में एक छोटी-सी भूमिका है, जिसे कविताओं के साथ जोड़कर देखना चाहिए। बुद्ध अनेक कविताओं के केन्द्र में हैं, जो बार-बार प्रश्नांकित भी होते हैं और बेशक एक रोशनी के रूप में स्वीकार्य भी। इस नए संकलन में अनेक उद्धरणीय काव्यांश या पंक्तियाँ मिल सकती हैं, जो पाठक के मन में टिकी रह जाती हैं। बिना किसी तार्किक संयोजन के यह पूरा संग्रह एक ऐसे काव्य-फलक की तरह है, जिसके अन्त को खुला छोड़ दिया गया है। स्वयं इसकी रचयिता के अनुसार “वर्तमान और अतीत, इतिहास और किंवदन्तियाँ, कल्पना और यथार्थ यहाँ साथ-साथ घुमरी परैया-सा नाचते दीख सकते हैं।” आज के स्त्री-लेखन की सुपरिचित धारा से अलग यह एक नई कल्पनात्मक सृष्टि है, जो अपनी पंक्तियों को पाठक पर बलात् थोपने के बजाय उससे बोलती-बतियाती है, और ऐसा करते हुए वह चुपके से अपना आशय भी उसकी स्मृति में दर्ज करा देती है। शायद यह एक नई काव्य-विधा है, जिसकी ओर काव्य-प्रेमियों का ध्यान जाएगा। समकालीन कविता के एक पाठक के रूप में मुझे लगा कि यह काव्य-कृति एक नई काव्य-भाषा की प्रस्तावना है, जो व्यंजना के कई बन्द पड़े दरवाज़ों को खोलती है और यह सब कुछ घटित होता है एक स्थानीय केन्द्र के चारों ओर। कविता की जानी-पहचानी दुनिया में यह सबाल्टर्न भावबोध का हस्तक्षेप है, जो अलक्षित नहीं जाएगा। —केदारनाथ सिंह
Nihshabd Noopur : Rumi Ki 100 Gazalein
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Rumi +1
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रूमी ईरान के सर्वाधिक प्रसिद्ध कवि हैं। उनकी ग़ज़लें ऊर्जस्वी काव्य के दुर्लभ उदाहरणों में से हैं। रूमी की ग़ज़लें सामान्य कविताओं की तुलना में अलग हैं। इनकी प्रत्येक ग़ज़ल का हर शे’र आत्म-अनुभूति की परिपूर्णता से उच्छलित है। इनकी कविता केवल काव्यात्मक चमत्कारों को प्रदर्शित कर पाठकों को लुब्ध करने में पर्यवसित नहीं होती, बल्कि दिल से निकलकर मस्तिष्क और हृदय को भिगोती हुई आत्मा तक का स्पर्श कर लेती है। प्रस्तुत पुस्तक उनकी चुनिन्दा 100 ग़ज़लों का अनुवाद है। इस पुस्तक के माध्यम से रूमी पहली बार सीधे फ़ारसी से हिन्दी में अनूदित हुए हैं। इसमें सबसे पहले फ़ारसी ग़ज़लों का देवनागरी में लिप्यन्तरण प्रस्तुत किया गया है, फिर साथ में ही उनका हिन्दी अनुवाद दिया गया है। अन्त में मूल ग़ज़लें फ़ारसी लिपि में भी रखी गई हैं। पुस्तक के अन्त में दिए गए अनेक परिशिष्टों के माध्यम से फ़ारसी काव्य-भाषा को समझने के महत्त्वपूर्ण उपकरण जुटाए गए हैं। ग़ज़लों में प्रयुक्त सभी छन्दों को ईरानी तथा भारतीय काव्यशास्त्रीय रीति से समझाया गया है। क्लासिकल फ़ारसी कविता के सम्यक् परिचय के लिए आवश्यक संक्षिप्त फ़ारसी व्याकरण जोड़ा गया है। अन्त में प्रत्येक शब्द का अर्थ भी दिया गया है। इस प्रकार मूल से जुड़े रसपूर्ण अनुवाद की प्रस्तुति के साथ ही यह पुस्तक रूमी-रीडर के तौर पर भी उपयोग में आने योग्य है।
Saptaparna
- Author Name:
Mahadevi Verma
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मनुष्य की स्थूल पार्थिव सत्ता उसकी रंग-रूपमयी आकृति में व्यक्त होती है। उसके बौद्धिक संगठन से जीवन और जगत सम्बन्धी अनेक जिज्ञासाओं, उनके तत्त्व के शोध और समाधान के प्रयास, चिन्तन की दिशा आदि संचालित और संयमित होते हैं! उसकी रागात्मक वृत्तियों का संघात उसके सौन्दर्य-संवेदन, जीवन और जगत के प्रति आकर्षण-विकर्षण, उन्हें अनुकूल और मधुर बनाने की इच्छा, उसे अन्य मानवों की इच्छा से सम्पृक्त कर अधिक विस्तार देने की कामना और उसकी कर्म-परिणति आदि का सर्जक है।
Hari Patang Par Hara Patanga
- Author Name:
Varun Grover +1
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Age group 9-12 years कथा शुरू ऐसे होती है ……….एक है घोड़ा दो सवार हैं ….तीन लोक के चार द्वार हैं। यह अपनी हरियाली के लिये अपना बादल आप बनाने के सफर का किस्सा है। भटक भटक के किस्से किस्से जमा किए बादल के हिस्से वरुण ग्रोवर ने इस लम्बी कविता में ऐसी भाषा, बिम्ब और लय अपनाये हैं कि पुराने समय की खोजी यात्राएँ साकार होने लगती हैं। और वह यात्रा भी जो यात्रियों में अपने समय को समझने के लिए चलती है। इसमें एलन शॉ के चित्रों का वैविध्य बेमिसाल है। चित्रों में माया सभ्यता से लेकर अब तक के आम इंसान हैं। सब अपने-अपने तरीकों से अपने बादलों की खोज में दिखाई देते हैं। जैसे यह इंसानी सभ्यता की अनवरत खोज है। इस तरह किताब में दो कविताएँ हैं। दूसरी कहें कि पहलीॽ कि पहले के भी पहले की कविता, एलन शॉ की है।
Main Jab Tak Aayi Bahar
- Author Name:
Gagan Gill
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‘मैं क्यों कहूँगी तुम से/अब और नहीं/सहा जाता/मेरे ईश्वर’—गगन गिल की ये काव्य-पंक्तियाँ किसी निजी पीड़ा की ही अभिव्यक्ति हैं या हमारे समय के दर्द का अहसास भी? और जब यह पीड़ा अपने पाठक को संवेदित करने लगती है तो क्या वह अभिव्यक्ति प्रकारान्तर से प्रतिरोध की ऐसी कविता नहीं हो जाती, जिसमें ‘दर्दे-तनहा’ और ‘ग़मे-ज़माना’ का कथित भेद मिटकर ‘दर्दे-इनसान’ हो जाता है? कविता इसी तरह इतिहास अर्थात समय का काव्यान्तरण सम्भव करने की ओर उन्मुख होती है। गगन गिल की इन आत्मपरक-सी लगती कविताओं के वैशिष्ट्य को पहचानने के लिए मुक्तिबोध के इस कथन का स्मरण करना उपयोगी हो सकता है कि कविता के सन्दर्भ ‘काव्य में व्यक्त भाव या भावना के भीतर से भी दीपित और ज्योतित’ होते हैं, उनका स्थूल संकेत या भाव-प्रसंगों अथवा वस्तु-तथ्यों का विवरण आवश्यक नहीं है। इन कविताओं का अनूठापन इस बात में है कि वे एक ऐसी भाषा की खोज करती हैं, जिसमें सतह पर दिखता हल्का-सा स्पन्दन अपने भीतर के सारे तनावों-दबावों को समेटे होता है—बाँध पर एकत्रित जलराशि की तरह। यह भी कह सकते हैं कि ये कविताएँ प्रार्थना के नये-से शिल्प में प्रतिरोध की कविताएँ हैं—प्रतिरोध उस हर सत्ता-रूप के सम्मुख जो मानवत्व मात्र पर, स्त्रीत्व पर भी, आघात करता है। इन आघातों का दर्द अपने एकान्त में सहने पर ही कवि-मन पहचान पाता है कि ‘मैं जब तक आयी बाहर एकान्त से अपने/बदल चुका था मर्म भाषा का’। ये कविताएँ काव्य-भाषा को उसकी मार्मिकता लौटाने की कोशिश कही जा सकती हैं। —नन्दकिशोर आचार्य
Sarkti Parchhaiyan
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
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