Hindnama : Ek Mahadesh Ki Gatha
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हिन्दनामा’ एक महादेश की गाथा उसी तरह है जिस तरह प्रेमचन्द का ‘गोदान’ भारतीय किसान जीवन की गाथा है। ‘हिन्दनामा’ इतिहास है न काल्पनिक उपन्यास। यह एक धूलभरा दर्पण है जिसमें हमारे देश की बहुत सी धूमिल और चमकदार छवियाँ दिखाई देती हैं। ‘हिन्दनामा’ दरअसल हिन्दुस्तान के बारे में एक दीर्घ कविता है जिसमें कोई कालक्रम नहीं है। सब कुछ स्मृतियों की तरह गड्डमड्ड है, जहाँ प्राचीन और अर्वाचीन इस तरह मिलते हैं जैसे किसी नदी के घाट पर शेर और बकरी एक साथ अपनी प्यास बुझा रहे हों। इसकी कोई बिबलियोग्राफ़ी नहीं है—यह कबीर के करघे पर बुनी हुई एक रंगीन चादर है, जो शताब्दियों से शताब्दियों तक तनी हुई है। उग्र राष्ट्रवाद के इस वैश्विक दौर में अपने राष्ट्र को जानने की कोशिश निश्चय ही जोखिम का काम है, और यह कहने की शायद कोई ज़रूरत नहीं कि ‘हिन्दनामा’ हिन्दूनामा नहीं है। हिन्दुस्तान का इन्द्रधनुष जो सात रंगों से मिलकर बना है, उसकी ऐसी गाथा है जो कभी और कहीं भी ख़त्म नहीं होती—चलती ही जाती है। हिन्दी काव्य-जगत के लिए बरसों बाद हासिल एक उपलब्धि है ‘हिन्दनामा’।
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हिन्दनामा’ एक महादेश की गाथा उसी तरह है जिस तरह प्रेमचन्द का ‘गोदान’ भारतीय किसान जीवन की गाथा है। ‘हिन्दनामा’ इतिहास है न काल्पनिक उपन्यास। यह एक धूलभरा दर्पण है जिसमें हमारे देश की बहुत सी धूमिल और चमकदार छवियाँ दिखाई देती हैं। ‘हिन्दनामा’ दरअसल हिन्दुस्तान के बारे में एक दीर्घ कविता है जिसमें कोई कालक्रम नहीं है। सब कुछ स्मृतियों की तरह गड्डमड्ड है, जहाँ प्राचीन और अर्वाचीन इस तरह मिलते हैं जैसे किसी नदी के घाट पर शेर और बकरी एक साथ अपनी प्यास बुझा रहे हों। इसकी कोई बिबलियोग्राफ़ी नहीं है—यह कबीर के करघे पर बुनी हुई एक रंगीन चादर है, जो शताब्दियों से शताब्दियों तक तनी हुई है। उग्र राष्ट्रवाद के इस वैश्विक दौर में अपने राष्ट्र को जानने की कोशिश निश्चय ही जोखिम का काम है, और यह कहने की शायद कोई ज़रूरत नहीं कि ‘हिन्दनामा’ हिन्दूनामा नहीं है। हिन्दुस्तान का इन्द्रधनुष जो सात रंगों से मिलकर बना है, उसकी ऐसी गाथा है जो कभी और कहीं भी ख़त्म नहीं होती—चलती ही जाती है। हिन्दी काव्य-जगत के लिए बरसों बाद हासिल एक उपलब्धि है ‘हिन्दनामा’।
Book Details
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ISBN9789389577082
-
Pages304
-
Avg Reading Time10 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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साहित्य सरहदों से ऊपर होता है, कविता सीमाओं की नहीं, इनसानियत के समूचे वजूद की बात करती है, जो तमाम बँटवारों के ऊपर है और एक है।
‘पाकिस्तानी उर्दू शायरी’ शीर्षक यह शृंखला भारत और पाकिस्तान के उस साझा दिल को रौशन करती है जो लहूलुहान सरहदों के बावजूद दोनों तरफ़ एक साथ, एक ही तरह धड़कता है, उन गलियों, मुहल्लों, खेतों और पगडंडियों का नक़्शा दिखाती है जिनके रंग-ढंग को बँटवारा नहीं बदल सका, उस विरसे की याद दिलाती है, जो तमाम राजनीतिक हठधर्मियों के बावजूद अब भी एक है।
इस शृंखला का उद्देश्य पाकिस्तान के उन अनेक शायरों से हिन्दी पाठक का परिचय कराना भी है जिन्हें हम नहीं जानते। वे लोग जो इंडो-पाक मुशायरों और कल्चरल डेलीगेशनों का हिस्सा नहीं होते, लेकिन जिन्होंने कहने के फ़न को तराशा है और तमाम ख़तरों के सामने अपनी बात कहने की हिम्मत दिखाई है।
इन शायरों और उनके कलाम को हिन्दी पाठकों तक पहुँचाने के लिए सम्पादकों ने न सिर्फ़ वहाँ के पुस्तकालयों और किताबघरों की ख़ाक छानी है, बल्कि नए-पुराने रिसालों और अख़बारों की फ़ाइलें भी पलटी हैं, और शायरों से ख़तो-किताबत भी की है।
‘पाकिस्तानी उर्दू शायरी’ का यह पाँचवाँ खंड इस शृंखला की नई कड़ी है, जिसमें बारह शायरों की रचनाएँ परिचय के साथ शामिल हैं।
Lamhe Zindagi Ke
- Author Name:
Prahlad Narayan Mathur
- Book Type:

- Description: 'लम्हे जिंदगी के' कविता पुस्तक, सामाजिक विषयों पर स्वयं लेखक की कविताओं का संकलन है। 'पिता क्या होता है' इसका अहसास पिता बनने के बाद ही होता है, यह इस कविता के माध्यम से बेहतरीन तरीके से बतलाया है। इस कविता के अलावा पिता पर बहुत-सी भावनात्मक कविताओं का समावेश है जैसे 'पिता', 'पिता का प्यार', 'पिता की डांट' एवं 'सूरज से पिता' इत्यादि। माँ पर भी दिल को छू लेने वाली बहुत-सी कविताएँ हैं। 'माँ को कभी सोते देखा नहीं' कविता में एक बच्चे का माँ के प्रति अथाह प्रेम को मर्मस्पर्शी तरीके से दर्शाया है। कोरोना ने समाज के हर तबके को बहुत गम दिये हैं। बहुत लोगों ने अपनों को खोया है। कविताओं के माध्यम से कोरोना के प्रति अपनी भावनात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की है। एक छोटे बच्चें की भावना को जो करोना के कारण लंबे समय से स्कूल नहीं जा पा रहा है, बहुत सुंदर तरीके से पेश किया है। दोस्तों पर लिखी कविताएँ भी बेमिसाल है। उपरोक्त पुस्तक में प्रत्येक कविता दिल को छू जाने वाली तथा आम आदमी के जीवन का प्रतिबिम्ब है। यह हर उम्र के व्यक्तियों के पढ़ने योग्य है।
Allama Iqbal
- Author Name:
Allama Iqbal
- Book Type:

- Description: ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतज़ार देख हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा फ़क़त निगाह से होता है फ़ैसला दिल का न हो निगाह में शोख़ी तो दिलबरी क्या है सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसितां हमारा ढूंढ़ता फिरता हूं मैं 'इक़बाल' अपने आप को आप ही गोया मुसाफ़िर आप ही मंज़िल हूं मैं
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