Safai Devta
Author:
Omprakash ValmikiPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Reviews
Price: ₹ 159.2
₹
199
Available
ख्यात दलित लेखक ओमप्रकाश वाल्मीकि की इस पुस्तक में देश-समाज के सबसे उपेक्षित तबक़े भंगी या वाल्मीकि की ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के साथ मौजूदा वास्तविक स्थिति का सप्रमाण वर्णन करने का प्रयास किया गया है।
‘भंगी’—शब्द सुनकर ही लोगों की भौंहें तन जाती हैं। समाज की उपेक्षा और प्रताड़ना ने उनमें इस हद तक हीनताबोध भर दिया है कि वाल्मीकि समाज के उच्च शिक्षित लोग भी अपनी पहचान छुपाते फिरते हैं। दलितों में दलित यह तबक़ा आर्थिक विपन्नता की दलदल में फँसा है। पुनर्वसन की राजनीति करनेवाले इस तंत्र में इन सफ़ाई कर्मचारियों के पुनर्वसन की ज़रूरत कभी किसी ने महसूस नहीं की। उच्चवर्गीय, ब्राह्मणवादी मानसिकता और सामन्ती सोच-विचार के लोग इन्हें कोई भी सामाजिक अधिकार देने के पक्ष में नहीं हैं।
इस पुस्तक का उद्देश्य ऐतिहासिक उत्पीड़न, शोषण और दमन का विश्लेषण करना है। उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि का आकलन करना है, और उसके सामने खड़ी समस्याओं का विवेचन करना है। इसके लिए ऐतिहासिक विवरण ही काफ़ी नहीं हैं, वर्तमान का मूल्यांकन भी उतना ही आवश्यक है। लेखक का उद्देश्य लम्बे भीषण, नारकीय दौर में वाल्मीकि समाज की उपलब्धियों, संघर्षों की खोज कर, ऐसी मिसाल पेश करना है जो भविष्य के अन्धकार से उसे बाहर निकलने की प्रेरणा दे सके।
ISBN: 9788183616362
Pages: 156
Avg Reading Time: 5 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: ‘प्रेमचन्द : कथा सुनाते हुए’ विश्वनाथ त्रिपाठी के निबन्धों का संचयन है। इसके कुछ आलेख लेखकों को लेकर लिखे गए हैं और कुछ पुस्तकों को पढ़ते हुए, उनके बारे में सोचते हुए। जाहिर है दोनों ही में समकालीन साहित्यिक प्रश्नों पर विचार और साहित्य को समझने-जानने की प्रविधियों पर चर्चा भी होती चली है। उदाहरण के लिए, प्रेमचन्द के बारे में बात करते हुए वे लिखते हैं : ‘निर्मल वर्मा ने कहा है कि भारतीय उपन्यास लिखे ही नहीं गए। नामवर जी ने इसका समर्थन किया।’ इस पर अपना पक्ष रखते हुए विश्वनाथ त्रिपाठी का कहना है : ‘प्रेमचन्द का कथाशिल्प ठेठ भारतीय है (जैसे कोई बुजुर्ग अलाव के आसपास हाथ तापते हुए कहानियाँ सुना रहा हो) और फिर उनकी कथावस्तु क्या अभारतीय है? ...जिसे जादुई यथार्थवाद कहा जाता है वह भी अभारतीय नहीं है। प्रेमचन्द की कई कहानियों में यह जादुई यथार्थ मिलता है।’ जैनेन्द्र के ‘त्यागपत्र’ पर विचार करते हुए कहते हैं : ‘जिस तरह मृणाल की मूक सहनशीलता में विद्रोह छिपा है, उसी तरह निर्णायक घटनाओं और पात्रों के नेपथ्य ही में रहने से उनका रूप प्रभावशाली हो जाता है। शब्द मूलतः मूर्तन नहीं करते, वे श्रोता और पाठक को अपने संस्कारों, रुचियों और आवश्यकता के अनुसार कल्पना करने की पूरी छूट देते हैं। इसीलिए अच्छी कहानी या अच्छे उपन्यास पर बनी हुई फ़िल्में प्रायः पाठकों को सन्तुष्ट नहीं कर पातीं।’ यह विचारोत्तेजक है और पाठक को इन बिन्दुओं पर अपने ढंग से सोचने को आमंत्रित करता है। पुस्तक में संकलित अन्य आलेखों में आप ‘राग दरबारी’, ‘लेकिन दरवाज़ा’, ‘गोदान’, ‘सात आसमान’, ‘सारा आकाश’ और ‘मानस का हंस’ जैसे चर्चित उपन्यासों पर उनके सुचिन्तित अवलोकन के अलावा कई अन्य महत्त्वपूर्ण कृतियों पर भी उनके विचारों से अवगत होते हैं।
Hansa Karo Puratan Baat
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

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Description:
‘हंसा करो पुरातन बात’ कथाकार-उपन्यासकार काशीनाथ सिंह के साक्षात्कारों का संकलन है। इस किताब में उनके 1989 से 2022 तक के साक्षात्कार हैं। साक्षात्कारों को प्रकाशन-क्रम से रखा गया है ताकि पाठक उनकी रचनात्मक और वैचारिक यात्रा को प्रामाणिकता के साथ समझ सकें।
काशीनाथ जी से जुड़ा वह हर सवाल यहाँ मौजूद है जिसमें एक पाठक की जिज्ञासा हो सकती है। ये सभी साक्षात्कार वे हैं जो उनकी पूर्व-प्रकाशित दोनों पुस्तकों, ‘गपोड़ी से गपशप’ और ‘बातें हैं बातों का क्या’ में नहीं हैं। ‘परिशिष्ट’ में ऐसे साक्षात्कार हैं जिनमें सीधे-सीधे सवाल-जवाब की पद्धति नहीं है, लेकिन साक्षात्कारकर्ता या पत्र-पत्रिका ने उन्हें ‘बातचीत’ या ‘बातचीत पर आधारित’ कहा है। इन साक्षात्कारों में ‘सदी का सबसे बड़ा आदमी’ कहानी के प्रति उनका मोह दृष्टिगोचर होता है। ‘काशी का अस्सी’ को वे अपना सर्वश्रेष्ठ उपन्यास तथा ‘अपना मोर्चा’ को भूमिका मात्र मानते हैं। सामासिक संस्कृति की पक्षधरता और मनुष्यता में उनका विश्वास भी प्रकट होता है। कहानी लेखन में बदलाव, कहानी से संस्मरण की ओर शिफ्ट होने के कारण, देश-विदेश-छात्र राजनीति एवं वर्तमान लेखन पर उनके विचार इन साक्षात्कारों में अभिव्यक्त हैं।
Parkeey Haat
- Author Name:
Ravi Amle
- Book Type:

- Description: परकीय हात. फॉरिन हँड.विदेशी शक्तींचा, त्यांच्या हेरसंस्थांचा...तो भारतात सतत फिरत होता. फिरत आहे.तो अमेरिका, ब्रिटन, रशिया यांसारख्या मित्रराष्ट्रांचा आहे, तसाच पाकिस्तान, चीनसारख्या शत्रूंचाही.तो भारतात हेरगिरी करत आहे. येथील माणसे फोडत आहे. पण ते एवढ्यापुरतेच मर्यादित नाही.येथील राजकारण, अर्थकारण, समाजकारण यांत तो हस्तक्षेप करत आहे. सरकारी धोरणे आणि निर्णयांवर प्रभाव टाकत आहे. येथील लोकमानसास हवे ते वळण लावण्याचा प्रयत्न करत आहे. यातून तो आपल्या मन-मेंदूपर्यंत पोचू पाहत आहे. हेच ते सायवॉर!आज त्याला जोड लाभली आहे सायबरयुद्धाची. हे युद्धही केवळ येथील गोपनीय माहिती पळवणे एवढ्यापुरते मर्यादित नाही. भारतात घातपात घडवण्यासाठीही सायबरशस्त्रे वापरली जात आहेत. ही बखर आहे त्या थरारक कारवाया आणि कुटील कारस्थानांची.त्या विदेशी शक्तींच्या, सीआयए, केजीबी, एमआय-सिक्स, आयएसआय, चीनची क्वोचानछांपू अशा हेरसंस्थांच्या उद्योग आणि उपद्व्यापांची... स्वातंत्र्यपूर्वकाळापासून आजपर्यंतची... Parkeey Haat | Ravi Amale परकीय हात | रवि आमले
MAHARSHI VITHTHAL RAMJI SHINDE : JIVAN VA KARYA
- Author Name:
G. M. Pawar
- Book Type:

- Description: “स्वार्थावर लाथ मारून गळ्यात झोळी अडकवून संस्थेकरता - अर्थात आमच्या लोकांकरिता - संस्थेचे जे चालक भिक्षांदेही करीत दारोदार फिरतात व त्यांना त्यात कितीही अल्प यश आले तरी ते पर्वा न करता चंदनासारखे स्वत: झिजू दुसर्यांना- आम्हांला - सुख देण्याकरिता, आमची स्थिती सुधारण्याकरिता आपला प्रयत्न चालू ठेवतात, त्या संतांची किंमत आजपर्यंत झालेल्या कोणत्याही संतापेक्षा आम्हांला यत्किं चितही कमी वाटत नाही. कित्येकांना ती जास्त वाटेल.’’ श्री. गणेश आकाजी गवई डी. सी. मिशनच्या महाराष्ट्र परिषदेत केलेले भाषण, पुणे, 1912 “इतिहास असे सांगतो की, ज्यापासून राष्ट्राचा विकास होतो, अशा सर्व प्रकारच्या चळवळींचा उगम थोड्याशा व्यक्तींच्या कार्यात सापडतो. प्रस्तुतच्या बाबतीत त्या व्यक्ती म्हणजे, ज्यांची प्रथम प्रथम हेटाळणी झाली ते डिप्रेस्ड क्लासेस मिशनचे गृहस्थ होत. त्यांच्या कार्याने प्रचंड अशा हिंदू समाजाची सदसद्विवेकबुद्धी जागृत झाली.’’ न्यायमूर्ती सर नारायणराव चंदावरकर डी. सी. मिशनची अस्पृश्यतानिवारक परिषद , मुंबई, 1918 “मराठ्यांतील कार्यशक्ती काय करू शकते, असा जर कोणी आपल्याला प्रश्न विचारला, तर अण्णासाहेब शिंद्यांच्या कार्याकडे बोट करा. मराठ्यांतील स्वार्थत्यागाचे उदाहरण दाखविण्याचा प्रसंग आला, तर आपण अण्णासाहेब शिंद्यांचे नाव घ्या. परकीय सत्तेचा विध्वंस शिवाजीमहाराजांनी केला; वर्णवर्चस्वाचा विध्वंस शाहूमहाराजांनी केला व अस्पृश्यतेच्या विध्वंसनाचे कार्य करण्याकरिता तितक्याच धडाडीने अण्णासाहेबांनी आपले आयुष्य वेचले.’’ श्री. बाबुराव जेधे मुंबई इलाखा शेतकरी परिषद, पुणे, 1928 “शिंद्यांचा जिला भरीव हातभार लागला नाही, अशी लोकसेवेची व समाजोन्नतीची चळवळ दाखवून देणे कठीण आहे. राजकारण, समाजकारण, धर्मकार्य, शिक्षणकार्य; इतकेच नव्हे, तर वाङ्मयसेवा आणि इतिहास संशोधन या सर्वांत शिंद्यांचा भाग आहे; आणि फार महत्त्वाचा भाग आहे. ज्या काळी विधवाविवाहासारखे साधे प्रश्न सुटणे दुरापास्त होते, अशा त्या घनदाट धर्मवेडाच्या काळात अस्पृश्योद्धाराची चळवळ सुरू करणे, त्यासाठी डिप्रेस्ड क्लासेस मिशन ही संस्था काढणे; इतकेच नव्हे, तर अस्पृश्यांत जाऊन त्यांच्यापैकी एक झाल्याप्रमाणे त्यांच्यात वागणे, या गोष्टींसाठी अतुल स्वमतधैर्याची; एवढेच नव्हे, तर मूलमार्गी बुद्धीची व समाजाविषयी खर्या कळकळीचीही गरज होती. इतक्या व्यापक व सूक्ष्म दृष्टीच्या कार्यकर्त्याची दृष्टी सबंध देशाइतकी विशाल विस्तृत असावी लागते. म्हणूनच श्री. शिंदे सामाजिक चळवळींप्रमाणेच अनेक राजकीय चळवळींतही भाग घेताना दिसत.’’ न्यायमूर्ती भवानीशंकर नियोगी महाराष्ट्र साहित्य संमेलन नागपूर, 1933 Maharshi Vitthal Ramaji Shinde : Jeevan Va Karya / G. M. Pawar महर्षी विठ्ठल रामजी शिंदे : जीवन व कार्य । गो. मा. पवार
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