Anuvad Ka Naya Vimarsh
(0)
Author:
Shrinarayan SameerPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
400
320 (20% off)
Available
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प्रस्तुत पुस्तक अनुवाद को विशुद्ध भाषा संवाद मानने की प्रचलित मान्यता से प्रस्थान का विमर्श है। यह अनुवाद को दो भाषाभाषी समाजों और सभ्यताओं में भाषिक अपरिचय के बरअक्स परिचय एवं संवाद का सेतु मानने, विकास की दौड़ में पिछड़े समाजों की आवाज़ मानने और सभ्यता संवाद मानने का तार्किक घोषणापत्र है। इसमें अनुवाद को किसी भाषा रचना की दूसरी भाषा में पुनर्रचना मानने और इस तरह उसे रचना का अनश्वर उद्यम मानने की मुकम्मल तर्क-रचना भी है। इस विमर्श में अनुवाद को सृजन का अनुसृजन बनाने की संस्तुति और तर्क का ताप यत्र-तत्र-सर्वत्र है। इस पुस्तक को पढ़ना समय के संघात से रू-बरू होना और अनुवाद के वैभव को समग्रता में समझना है। साथ ही भूमंडलीकरण, सूचना विस्फोट और बाज़ारवाद के दौर में मानवीय आकांक्षा, भाषा एवं राजनीति के रिश्ते तथा सरोकार को समझना और अपनी पक्षधरता को बेबाक व तलस्पर्शी बनाना भी है।</p> <p>प्रशासनिक तथा तकनीकी अनुवाद को सरल, सहज एवं सर्जनात्मक बनाने के लिए जिरह करती यह पुस्तक, अपने तर्क एवं विमर्श से अनुवादवेत्ताओं, विशेषज्ञों और सुधि अध्येताओं के बीच समान रूप से समादृत होगी।
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प्रस्तुत पुस्तक अनुवाद को विशुद्ध भाषा संवाद मानने की प्रचलित मान्यता से प्रस्थान का विमर्श है। यह अनुवाद को दो भाषाभाषी समाजों और सभ्यताओं में भाषिक अपरिचय के बरअक्स परिचय एवं संवाद का सेतु मानने, विकास की दौड़ में पिछड़े समाजों की आवाज़ मानने और सभ्यता संवाद मानने का तार्किक घोषणापत्र है। इसमें अनुवाद को किसी भाषा रचना की दूसरी भाषा में पुनर्रचना मानने और इस तरह उसे रचना का अनश्वर उद्यम मानने की मुकम्मल तर्क-रचना भी है। इस विमर्श में अनुवाद को सृजन का अनुसृजन बनाने की संस्तुति और तर्क का ताप यत्र-तत्र-सर्वत्र है। इस पुस्तक को पढ़ना समय के संघात से रू-बरू होना और अनुवाद के वैभव को समग्रता में समझना है। साथ ही भूमंडलीकरण, सूचना विस्फोट और बाज़ारवाद के दौर में मानवीय आकांक्षा, भाषा एवं राजनीति के रिश्ते तथा सरोकार को समझना और अपनी पक्षधरता को बेबाक व तलस्पर्शी बनाना भी है।</p>
<p>प्रशासनिक तथा तकनीकी अनुवाद को सरल, सहज एवं सर्जनात्मक बनाने के लिए जिरह करती यह पुस्तक, अपने तर्क एवं विमर्श से अनुवादवेत्ताओं, विशेषज्ञों और सुधि अध्येताओं के बीच समान रूप से समादृत होगी।
Book Details
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ISBN9788194364832
-
Pages142
-
Avg Reading Time5 hrs
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Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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इस पुस्तक के जरिए यह बताने का प्रयास किया गया है कि दुनिया में कुछ भी असंभव नहीं है। अगर टीमवर्क हो, वर्क कल्चर हो, विजन हो, बेहतर लीडरशिप हो और लोगों में काम करने का जज्बा हो तो मृतप्राय संस्था को भी पुनर्जीवित किया जा सकता है, उसे एक बेहतरीन संस्था बनाया जा सकता है। ‘प्रभातखबर’अखबार की 30 वर्षों की यात्रा के संदर्भ में लिखी इस पुस्तक में इसी बात का उल्लेख है कि वे कौन से कारण हैं, जिनके बल पर एक समय बंद होता प्रभात खबर (स्थानीय/क्षेत्रीय अखबार) देश के शीर्ष हिंदी अखबारों में शामिल हो गया। पुस्तक में इस बात का जिक्र है कि कैसे एक संस्था को खड़ा किया जा सकता है। इसके लिए प्रभात खबर में क्या-क्या प्रयोग किए गए। चाहे वह संपादकीय प्रयोग हो या गैर-संपादकीय प्रयोग। प्रभात खबर की यात्रा में साधन के अभाव में अनेक मौके आए, जब लगा कि अखबार आज बंद हो गया कल, लेकिन ये सभी आशंकाएँ गलत निकलीं। पूरी किताब में उदाहरणों के बल पर यह बताने का प्रयास किया गया है कि एक स्थानीय और क्षेत्रीय अखबार भी अपने कंटेंट और अनूठे प्रयोग केबल पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो सकता है।
Ped-Paudhon Ki Ashcharyajanak Baaten
- Author Name:
Kumar Manish
- Book Type:

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"प्रस्तुत पुस्तक में संसार के ऐसे ही विचित्र पेड़-पौधों के बारे में रोचक एवं ज्ञान-वर्धक जानकारी संकलित की गई है। रोचकता इसका प्राण है और ज्ञान-वर्धक इसका गुण। पुस्तक में पेड़-पौधों की आश्चर्यजनक बातों के साथ-साथ उनके जन्म-स्थान, मानव जीवन में उनके महत्त्व तथा यथासंभव उनके उपलब्ध चित्र दिए गए हैं। आशा है यह रोचक एवं ज्ञान-वर्धक रचना सभी वर्ग के पाठकों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी। "
Ekta-Akhandata Ki Kahaniyan
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
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"‘एकता-अखंडता’ की कहानियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत हैं। टी.वी. चैनलों के हास्य और मनोरंजन के कार्यक्रम, जो कुछ जनता के समक्ष परोस रहे हैं, उसके परिणामस्वरूप समाज का युवा वर्ग दिशाहीन होता जा रहा है। चोरी, डकैती और छेड़छाड़ की घटनाएँ निरंतर बढ़ती जा रही हैं। एक-दो नहीं, अनेक रेप कांड सभ्य नागरिकों, देशभक्तों के लिए घोर चिंता का विषय हैं। आम लोग न समाचार सुनते हैं, न सत्साहित्य पढ़ते हैं। प्रायः घरों में सीरियल ही देखते हैं। चरित्र-निर्माण तथा राष्ट्रभक्ति सिखाने की कोई व्यवस्था दिखाई नहीं देती। छोटी-छोटी बातों पर युवक गोली चला देते हैं। चाकूबाजी की घटनाएँ तो सामान्य हैं। राजनीति के खिलाड़ी सामान्य घटनाओं को राजनीतिक रंग देकर सांप्रदायिक झगड़े खड़े कर देते हैं। कोई जातीय रंग देते हैं, उच्च वर्ग और दलित वर्ग का संघर्ष खड़ा कर देते हैं, कारण वही है कि राष्ट्रीयता की भावना का पोषण करनेवाला साहित्य भी सीमित ही उपलब्ध है। हर समुदाय अपने जातीय हित के लिए आंदोलन के लिए तैयार है। कहीं जाट अपनी जाति को आरक्षण दिलवाने के लिए कटिबद्ध हैं तो कहीं पटेल विद्रोह पर उतर आए हैं। उनके सामने न सरकार और न्यायालय की विवशता है, न राष्ट्र की साख का प्रश्न है। युवाओं को देश की एकता-अखंडता की प्रेरणा देने का यह एक प्रयास है। आशा है, युवा वर्ग इन नई-पुरानी कहानियों से कुछ सीखेगा। "
1000 Bharat Gyan Prashanottari
- Author Name:
Sanjay Kumar Dwivedi
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"1000 भारत ज्ञान प्रश्नोत्तरी—संजय कुमार द्विवेदी किसी भी विषय की बढ़िया-से-बढ़िया पठन-सामग्री को उसके विस्तृत कलेवर के साथ पढ़ना और उसे याद करना कठिन होता है, परंतु यदि उसी सामग्री को प्रश्नोत्तर रूप में प्रस्तुत किया जाए तो वह अत्यंत रुचिकर हो जाती है और उसे सहजता से याद भी किया जा सकता है। भारत जैसे विशाल एवं विविधतापूर्ण देश को 1000 प्रश्नों में समेट पाना निश्चय ही जोखिम भरा काम है। वस्तुनिष्ठ प्रश्नों का अपना एक दायरा होता है। इस स्थिति का आकलन करते हुए इस पुस्तक में प्रश्नों का चयन एवं प्रस्तुतीकरण इस तरह किया गया है कि पाठकों के समक्ष अधिक-से-अधिक जानकारी पहुँचाई जा सके। पुस्तक में शामिल किए गए अधिकतर प्रश्न ऐसे हैं, जिनमें कई उप-प्रश्न और उनके उत्तर छिपे हुए हैं। प्रस्तुत पुस्तक को यथासंभव ज्ञानवर्धक एवं रोचक बनाने की कोशिश की गई है। प्रश्नों का चयन करते समय प्रत्येक विषय के हर पहलू को छूने की कोशिश की गई है। पुस्तक संतुलित हो, इसका भी हर संभव प्रयास किया गया है। आशा है, भारत को भलीभाँति समझने में पुस्तक पाठकों की भरपूर मदद तो करेगी ही, भरपूर ज्ञानवर्द्धन भी करेगी। "
Nagari-Nagari,Dware-Dware
- Author Name:
Prempal Sharma
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"यात्रा-वृत्तांत साहित्य की बड़ी जीवंत विधा है, जिसमें पहाड़ों की गूँज, नदियों की कल-कल और पक्षियों की मीठी चह-चह की तरह जीवन और जीवन-रस छलछलाता नजर आता है। इनमें हमारा समय है तो मानव-आस्था की सुदीर्घ परंपरा भी। यात्रा-वृत्तांत एक तरह से कालदेवता की अभ्यर्थना भी हैं, जो पल में हमें कल से आज और आज से कल तक हजारों वर्षों की यात्रा कराके एकदम ताजा एवं पुनर्नवा बना देते हैं। प्रस्तुत यात्रा पुस्तक में दर्शनीय तीर्थस्थलों की प्रामाणिक जानकारी दी गई है, जिससे वे सभी सुरम्य यात्रा-स्थल अपनी पूरी प्राकृतिक सुंदरता, भव्यता और ऐतिहासिक गौरव के साथ पाठक की स्मृति में बसने की ताकत रखते हैं। प्रस्तुत पुस्तक ‘नगरी-नगरी, द्वारे-द्वारे’ के यात्रा-वृत्तांतों की सबसे बड़ी विशेषता है कि ये मन को बाँध लेते हैं। पाठक इन्हें पढ़ना शुरू करे तो पूरा पढ़े बिना रह नहीं सकता है। पाठक को लगता है, वह इन्हें पढ़ नहीं रहा, बल्कि चलचित्र की भाँति देख रहा है; लेखक के साथ-साथ यात्रा कर रहा है। विभिन्न साहित्यिक पत्रिकाओं में पाठकों का अपार प्यार-दुलार पाने के बाद अब ये यात्रा-संस्मरण पुस्तक रूप में पुनः पाठकों के सामने उपस्थित हैं। पत्र-पत्रिकाओं के पाठकों से इतर पाठक-बंधु भी अब इनका रसास्वादन सहजता से कर सकेंगे। पाठकों के हृदय में उतरकर अपना स्थान बना लेनेवाले यात्रा-संस्मरणों की रोचक, पठनीय-मननीय पुस्तक।
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