The Great Derangement
Author:
Amitav GhoshPublisher:
Penguin IndiaLanguage:
EnglishCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 331.17
₹
399
Available
One of India's greatest writers, Amitav Ghosh, argues that future generations may well think so. How else can we explain our imaginative failure in the face of global warming? In this groundbreaking return to non-fiction, Ghosh examines our inability-at the level of literature, history and politics-to grasp the scale and violence of climate change. The climate crisis asks us to imagine other forms of human existence-a task to which fiction, Ghosh argues, is the best suited of all forms. The Great Derangement serves as a brilliant writer's summons to confront the most urgent task of our time.
ISBN: 9780143429067
Pages: 284
Avg Reading Time: 9 hrs
Age: 18+
Country of Origin: IN
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- Description: सर्वप्रथम हमें पूर्वोत्तर के इतिहास में जाना ज़रूरी है, जिससे यह पता चलता है कि वे अंग्रेज़ों, ज़ुल्मी राजाओं या किसी भी अन्याय के ख़िलाफ़ लड़े। इस पुस्तक में हमने अलग-अलग भाषा व राज्यों के वीर नायकों व नायिकाओं की कथाओं के अतिरिक्त पूर्वोत्तर के भिन्न राज्यों में हुए विद्रोहों, प्रतिरोधात्मक आन्दोलनों पर शोधपरक गाथाएँ व सामग्री प्रस्तुत की है। ये सभी गाथाएँ—लिजिन्द्रियाँ, लोककथाएँ या लोकगीत व टिप्पणियाँ पूर्वोत्तर के ही लेखकों द्वारा लिखी गई हैं। हमने इनका चयन कर हिन्दी में अनूदित कर प्रस्तुत किया है। इनके चयन और सम्पादन में काफ़ी समय लगा। चूँकि अनूदित सामग्री की भाषा को परिष्कृत भी करना पड़ा। हमने हिन्दी में कुछ गाथाएँ पूर्वोत्तर में उपलब्ध भिन्न ग्रन्थों व दस्तावेज़ों में दर्ज टिप्पणियों के आधार पर तैयार करके भी प्रस्तुत की गई हैं। एक ही नायक पर भिन्न-भिन्न लेखकों ने अपने-अपने क्षेत्र में उपलब्ध सामग्री (लोकगीत, किंवदंतियों, लोककथाएँ, ऐतिहासिक दस्तावेज आदि) से लेकर अपने-अपने दृष्टिकोण से प्रस्तुत की है। हमने सभी को सम्मानित करने का प्रयास किया है, ताकि पूर्वोत्तर में घटित इस इतिहास को गहराई तक समझा और जाना जा सके और शेष भारत उनसे अपना दर्द का रिश्ता जोड़ कर संवाद क़ायम करे। —‘सम्पादकीय’ से
GK QUIZ
- Author Name:
Anish Bhasin
- Book Type:

- Description: "सवाल करना और उनके जवाब पाने की उत्सुकता व्यक्ति में सहज ही खोजी जा सकती है। पृथ्वी कैसे बनी? महासागर कहाँ से आए? महाद्वीप कैसे बने? मनुष्य का क्रमविकास कैसे हुआ? पृथ्वी पर जंतु ज्यादा हैं या मनुष्य? मनुष्य को दहलानेवाले जलजले, सुनामी, ज्वालामुखी कैसे बनते हैं? इस प्रकार के प्रश्नों के प्रति व्यक्ति आरंभ से ही जिज्ञासु रहा है। प्रश्न करने और उनका समुचित समाधान पाने से व्यक्ति की मेधा और तर्क शक्ति को बल मिलता है। इसी ज्ञानार्जन से व्यक्ति जीवन में सफलता प्राप्त करता है। आज के युग में हर क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्द्धा है और प्रतियोगी को हर परीक्षा में नएनए प्रकार के प्रश्नों का सामना करना पड़ता है। प्रस्तुत पुस्तक भी प्रश्नोत्तरी द्वारा ज्ञानवर्द्धन की कड़ी में एक महती प्रयास है। इसके अध्ययन से पाठक लाभान्वित होकर सफलता के नए सोपान चढ़ेंगे। इसका एकएक प्रश्न उत्तर के साथ जुड़कर आपकी जानकारी में श्रीवृद्धि कर सकता है।"
Patheya
- Author Name:
Jawaharlal Kaul
- Book Type:

- Description: दिव्य प्रेम सेवा मिशन’ की कल्पना जैसे अनायास ही साकार हुई, वैसे ही मेरा उससे जुड़ना भी अनायास ही था। आत्म-साक्षात्कार के लिए निकले एक साधक के सामने अचानक कुष्ठ रोगियों के रूप में समाज खड़ा हो गया और ‘दिव्य प्रेम मिशन’ का जन्म हुआ। इस पुस्तक में पहाड़ों की संवेदनशीलता और पीड़ा की बातें हैं, जिन्हें हमारे पूर्वजों ने अरण्य नाम दिया, उन पर समाज और शासन के बीच तलवारें खिंचने की आशंकाएँ हैं, हिमानियों के लुप्त होने के खतरे, विकास के नाम पर प्रकृति के दोहन को शोषण में बदलने के कुचक्रों की दास्तान हैं। तीर्थों को निगलते पर्यटन स्थल, मलिनता के बीच तीर्थों की पवित्रता के दावे, अपनों से ही त्रस्त गंगा और ऐसी ही अनेक विचारणीय बातें हैं। बीच-बीच में महान् परिव्राजक विवेकानंद, योगी अरविंद, युगांतरकारी बुद्ध और स्वच्छता के पुजारी गांधी सरीखे लोगों की याद भी आती रही; जो पाथेय मिला, वह भौतिक नहीं, बौद्धिक और आध्यात्मिक था। वह बाँटकर ही फलित होता है, इसलिए आपके सामने है।
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