Crystallized Memories
Author:
M V Chalapathi Rao, Chekuri Rama RaoPublisher:
Sahitya AkademiLanguage:
EnglishCategory:
General-non-fiction0 Reviews
Price: ₹ 141.1
₹
170
Available
English translation of Chekuri Rama Rao's Award winning Telugu Essays, Smruti Kinankam,
ISBN: 8126021632
Pages: 275
Avg Reading Time: 9 hrs
Age : 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Ghulami Ke 12 Saal
- Author Name:
Solomon Northup
- Book Type:

- Description: ऐसे भी बहुत से मालिक हैं, जिनमें इंसानियत है और निश्चित रूप से इसकी उलट प्रवृत्ति वाले मालिक हैं ही। ऐसे ग़ुलाम हो सकते हैं, जिनके तन पर कपड़ा हो, पेट में भरपेट भोजन हो और वे ख़ुश भी हों लेकिन यह भी पक्की बात है कि ऐसे भी फटे-हाल दास हैं, जिनके तन पर सिर्फ़ लंगोट है और पेट में सिर्फ़ भूख! मैं इस बात का गवाह हूँ कि वह व्यवस्था क्रूर, अत्याचारी और बर्बर है, जो इस प्रकार की अमानवीयता और विषमता को बरदाश्त करती है। लोग ग़रीब-ग़ुरबों के जीवन पर लंबी-लंबी झूठी और सच्ची कथाएँ बाँच सकते हैं और अज्ञानता के आनंद पर चतुराई से डींगे हाँक सकते हैं, चक्के वाली कुर्सी पर बैठकर ग़ुलामों के जीवन के आनंद पर बड़ी बेशर्मी से भाषण दे सकते हैं। लेकिन वे दूसरी कहानियाँ वापस लेकर आएंगे, जब उन्हें ग़ुलामों के साथ खेत में भेज दो, केबिन में उनके साथ सोने को कहो, भूसे पर बैठकर उनके साथ खाना खाने को कहो और ग़ुलामों के साथ कोड़े की मार और लात सहने को कहो। उन्हें बेचारे ग़ुलामों के दिल को जानने दो, उनके सीने में छिपे विचारों को जानने दो, वे विचार जो इस डर से नहीं व्यक्त किए जाते हैं कि कहीं गोरा सुन न ले। रात की ख़ामोश रातों में उनके साथ, उनके पास बैठ कर तो देखो, उनके साथ जीवन, आज़ादी, ख़ुशी आदि के बारे में भरोसेमंद माहौल में उनसे बात करके तो देखो, आप पाएँगे, हर सौ में से निन्यान्नवे में अपनी परिस्थिति को समझने की भरपूर समझदारी है। वह भी आपकी ही तरह अपने सीने में स्वतंत्रता से प्रेम के जुनून को वर्षों से बिल्कुल आपकी ही तरह संभाल के रखा हुआ है। --
Atma Nirbhar Bharat : Vol. 4
- Author Name:
M. Veerappa Moily
- Book Type:

-
Description:
सन् 2001 में शिक्षा के अधिकार से सम्बन्धित विधेयक पारित होने और शिक्षा को मौलिक अधिकारों के रूप में मान्यता दिये जाने के चलते भारत का ‘हर व्यक्ति को शिक्षा’ का संकल्प एक निर्णायक यात्राा पूरी कर चुका है, फिर भी भारतीय शिक्षा-व्यवस्था में गहरे पैठी खामियों को समझने की चुनौती आज भी उतनी ही बड़ी है। यह सचमुच आश्चर्यजनक है कि उच्चशिक्षा के सन्दर्भ में विश्व की विशालतम शिक्षा-व्यवस्थाओं में शामिल भारत की ‘ड्रॉप आउट’ दर चिन्ताजनक है।वीरप्पा मोइली की पुस्तक-श्ाृंखला ‘अनलेशिंग इंडिया’ का यह चैथा खंड भारतीय शिक्षा-व्यवस्था के ऐसे ही अनसुलझे सवालों का जवाब तलाशने की कोशिश है। इस पुस्तक में लेखक ने भारत, चीन, अमेरिका, सिंगापुर और अन्य कुछ देशों की तुलना करते हुए कुछ सुझाव प्रस्तुत किए हैं जिनमें पाठ्यक्रम में व्यावहारिक प्रशिक्षण को जोड़ने, शिक्षा के आधारभूत ढाँचे के विस्तार तथा पाठ्यक्रमों और पाठ्यपुस्तकों में निवेश को बढ़ाए जाने पर जोर दिया गया है।
पुस्तक के अनुसार इस समय जबकि देश एक ज्ञान-समृद्ध राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है, शिक्षा-व्यवस्था की सघन पुनव्र्याख्या और शिक्षा तथा विकास के मध्य मौजूदा फासले को पाटने की बेहद जरूरत है।
Amrai
- Author Name:
Padma Sachdev
- Book Type:

- Description: साक्षात्कार विधा में पद्मा सचदेव का विशिष्ट स्थान है। ‘दीवानखाना’ और ‘मितवाघर’ के बाद देश की कला-संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों की कद्दावर हस्तियों से लिए गए साक्षात्कारों की यह पुस्तक ‘अमराई’ भी साक्षात्कार विधा के लिए एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। इसमें असमिया की इंदिरा गोस्वामी का एकदम अल्हड़, सादा लेकिन विशिष्ट जीवन है तो कुर्रतुल-ऐन-हैदर द्वारा देखा और जिया गया तत्कालीन मुस्लिम समाज भी है। नामवर जी के जीवन के अनूठे प्रसंग हैं तो कवि केदारनाथ सिंह के भीतर बहती नदी भी है। वयोवृद्ध, लेकिन बाल-सुलभ कौतुक से भरे त्रिलोचन हैं तो डॉ. भारती, इस्मत आपा तथा दूसरे कई भूले-बिसरे लोगों के संस्मरण भी हैं। श्रीमती ललिता शास्त्री के मन का कजरी गूँथते हुए अछूता कोना भी है तो डोगरी के पंतजी का गाँव भी है। कुल मिलाकर ‘अमराई’ के बीच बिछे तख्तपोश पर आप देश के कई विशिष्ट और साधारण लोगों को बैठा पाएँगे।
Chuppiyaan Aur Daraarein : Stree Aatmakatha : Paath Aur Saiddhantiki
- Author Name:
Garima Shrivastava
- Book Type:

- Description: Literary Criticism on Feminism ‘चुप्पियाँ और दरारें’ भारत की अनेक भाषाओं में लिखी गई स्त्री आत्मकथाओं की न सिर्फ शिनाख्त करती है बल्कि इन आत्मकथाओं में विन्यस्त वैचारिकी का गहन विश्लेषण भी प्रस्तुत करती है। यह न सिर्फ हिन्दी बल्कि किसी भी भारतीय भाषा में अभूतपूर्व कही जाएगी। एक सर्वथा अनूठी पुस्तक। - अशोक वाजपेयी ध्वनि प्रदूषण पर तो आज बहुत चर्चा होती है, लेकिन चुप्पी के प्रदूषण पर नहीं। सच यह है कि जाति, लिंग और धर्म की बंदिशों से घिरे अवर्ण समाज और स्त्रियों की आत्माभिव्यक्ति बहुत कम सामने आती है। इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक में गरिमा श्रीवास्तव ने यह तथ्य पहचाना है और चुप्पी की कारा तोड़ते हुए लिखी गई विभिन्न वर्गों और जातियों से निकली औरतों की आपबीती के मर्म को एक गम्भीर अन्तर्दृष्टि से परखा है। पठनीय और सरस। —मृणाल पांडेय गरिमा श्रीवास्तव की यह किताब ‘चुप्पियाँ और दरारें’ हमारा ध्यान स्त्री आत्मकथाओं की ओर ले जाती है, जहाँ मनुष्य जाति के स्त्री पक्ष के तनिक भिन्न अनुभव से हमारा साक्षात्कार होता है। यह स्त्रियों की अपनी अनुभूति है, उनकी अपनी आत्मस्वीकृतियाँ, पीड़ा और उल्लास है। कभी सिमोन द बोउआर ने ‘द सेकंड सेक्स’ के माध्यम से जेंडर का हाल सुनाया था, कुछ उसी अन्दाज में गरिमा श्रीवास्तव की यह किताब हमें भारतीय स्त्रियों की अनसुनी कहानी बताती है। निःसंदेह पठनीय और संग्रहणीय। —प्रेमकुमार मणि >गरिमा श्रीवास्तव की निगाह हिन्दी पर तो है ही, वे इस बहुभाषी, बहुधार्मिक, बहुजातीय और बहुसामुदायिक महादेश में हिन्दू, मुसलमान, दलित, सवर्ण, बांग्ला, मलयालम और कन्नड़ दायरों में स्त्री आत्मकथाओं के एक ऐसे बहुलतावादी संसार में प्रवेश करती हैं जिसका संधान अभी तक एक साथ एक जगह नहीं किया गया है। अश्वेत स्त्री-आत्मकथाओं पर उनका काम इस बृहद कृति में पाठकों को बोनस की तरह उपलब्ध है। —अभय कुमार दुबे
Lokayat
- Author Name:
Deviprasad Chattopadhyay
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक प्राचीन भारतीय भौतिकवाद की मार्क्सवादी व्याख्या प्रस्तुत करती है। पाश्चात्य व्याख्याताओं ने भारतीय दर्शन के इस सशक्त पक्ष की प्रायः उपेक्षा की है। उनकी उपनिवेशवादी इतिहास-दृष्टि इस बात को बराबर रेखांकित करती रही है कि भारतीय दर्शन की मूल चेतना पारलौकिक और आध्यात्मिक है। उसमें जीवन तथा जगत के यथार्थ को महत्त्वहीन माना गया है अथवा उसकी उपेक्षा की गई है। देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय ने प्राचीन ग्रन्थों, पुरातात्त्विक और नृतत्त्वशास्त्रीय प्रमाणों और ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर इस बात का खंडन किया है। उनका कहना है कि प्राचीन भारत में लौकिकवाद और अलौकिकवाद, दोनों ही मौजूद थे। राजसत्ता के उदय के बाद शासक वर्ग ने लौकिक चिन्तन को अपने स्वार्थ के लिए नेपथ्य में डाल दिया तथा पारलौकिक चिन्तन को बढ़ावा दिया और भारतीय चिन्तन की एकमात्र धारा के रूप में उसे प्रतिष्ठा दिलाई। इसलिए प्राचीन भारत के लौकिक चिन्तन को समझे बिना हमारी इतिहास-दृष्टि हमेशा धुँधली रहेगी। यह पुस्तक इतिहास, दर्शन, भारतीय साहित्य और संस्कृति में दिलचस्पी रखनेवाले जिज्ञासुओं के लिए समान रूप से उपयोगी है। इस पुस्तक का विश्व की सभी प्रमुख भाषाओं में अनुवाद हो चुका है।
Nari Prasna
- Author Name:
Sarla Maheshwari
- Book Type:

- Description: नारी प्रश्न के असंख्य आयाम हैं। कुछ प्रश्न ऐसे हैं, जो काल और स्थान की सीमाओं से बँधे हुए हैं और कुछ ऐसे भी हैं, जो काल के दीर्घ प्रवाह के बीच से चिरन्तन प्रश्नों के रूप में सामने आए हैं। काल और स्थान-निरपेक्ष ये प्रश्न हर देश के नारी समाज की मानवीय अस्मिता से जुड़े हुए हैं। एक वृहत्तर मानव समाज में ऐसे प्रश्नों की अपनी नारी-पहचान के बावजूद ये प्रश्न किसी संकीर्णता के द्योतक नहीं हैं, बल्कि वास्तविक अर्थों में मानव समाज को ही और अधिक मानवीय बनाने की निरन्तर जारी प्रक्रिया के अंग हैं। अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर नारीवाद के अन्दर की अनेक परस्पर विरोधी धाराओं के बावजूद, नारी-मुक्ति और उससे जुड़े हुए मानव-मुक्ति के बहुत से महत्त्वपूर्ण प्रश्न इस संघर्ष के बीच से उभरकर सामने आए हैं। भारत का नारी आन्दोलन भी ऐसे तमाम प्रश्नों की अवहेलना नहीं कर सकता। सरला माहेश्वरी की यह पुस्तक हिन्दी में अपने क़िस्म की पहली पुस्तक है, जिसमें बहुत व्यापक और गहन अध्ययन के ज़रिए नारी आन्दोलन की अन्तरराष्ट्रीय पृष्ठभूमि और उसके आधार पर निर्मित दृष्टि की रोशनी में नारी जीवन से जुड़े कई ज़रूरी सामाजिक प्रश्नों पर गम्भीरता से रोशनी डाली गई है।
Gandhi evam Pandit Nehru ka Vaicharik Drashtikon
- Author Name:
Dr. Siyaram Shukla
- Book Type:

- Description: Description Awaited
School Ki Hindi
- Author Name:
Krishna Kumar
- Book Type:

- Description: कृष्ण कुमार का यह नया निबन्ध-चयन उनके शैक्षिक लेखन को एक वृहत्तर सांस्कृतिक सन्दर्भ देता है। बच्चों के लालन-पालन और उनकी शिक्षा से जुड़े सवालों की पड़ताल यहाँ बीसवीं सदी के अन्तिम वर्षों में बदलती-बनती नागरिक संस्कृति की परिधि में की गई है। खिलौनों और पाठ्य-पुस्तकों की भाषा से लेकर धार्मिक अलगाववाद की राजनीति और सामाजिक विषमता तक एक लम्बी प्रश्न-शृंखला है, जिसमें कृष्ण कुमार अपनी सुपरिचित चिन्ताएँ पिरोते हैं। इन चिन्ताओं में साहित्य की परख, स्त्री की असुरक्षा और भाषा के भविष्य जैसे विविध प्रसंग शामिल हैं। अपनी व्यंजनापरक शैली और चीज़ों को रुककर देखने की ज़िद से कृष्ण कुमार ने एक बड़ा पाठक-वृत्त बनाया है। अध्यापन और लेखन के बीच कृष्ण कुमार एक व्यक्तिगत पुल बनाने में सफल हुए हैं। यह पुल उनके शैक्षिक सरोकारों को खोजी यात्राओं पर ले जाता है और उनके पाठकों को स्कूल की चारदीवारी और बच्चों के मनोजगत में प्रवेश कराता है।
Prakriti Ka Dwandwavad
- Author Name:
Friedrich Engels
- Book Type:

-
Description:
उन्नीसवीं सदी के आरंभ में, और उससे भी अधिक मध्यकाल में, गणित, ज्योतिष, भौतिकी, रसायन तथा जीव-विज्ञान के क्षेत्र में आविष्कारों और उपलब्धियों का एक तांता-सा लग गया था। नए तथ्यों और प्राकृतिक नियमों की स्थापना हुई, नए सिद्धांतों तथा नई परिकल्पनाओं का बीजारोपण हुआ, और विज्ञान के नए उपांग अस्तित्व में आए।
एंगेल्स ने दिखाया कि प्राकृतिक विज्ञान की उस विजय-यात्रा में तीन सर्वोपरि उत्कर्ष हैं–जैव कोशिका की खोज, ऊर्जा की अविनाशिता, रूपांतरण के नियम की खोज और डार्विनवाद। सन् 1838 तथा 1839 ई. में मत्थियस याकोब श्लेईडैन और थियौडोर श्वान ने वनस्पति एवं पशु कोशिकाओं की एकरूपता सिद्ध की। उन्होंने सिद्ध किया कि कोशिका जीवधारियों की मूल रचना-इकाई है, और उन्होंने आंगिक संरचना के एक सांगोपांग कोशिका सिद्धांत की स्थापना की। इस प्रकार उन्होंने जीव-जगत की एकता को प्रमाणित किया। सन् 1842 और 1847 के बीच के काल में जुलियस मायर, जैम्स जूल, विलियम ग्रोव, एल.ए. कोल्डिंग और हरमान हैल्महोल्ट्ज ने ऊर्जा की अविनाशिता तथा रूपांतरण के नियम की खोज करके इसे प्रमाणित किया। परिणामतः प्रकृति का उद्घाटन एक ऐसी अविरत प्रक्रिया के रूप में हुआ जिसमें द्रव्य की एक प्रकार की सर्वव्यापी गति दूसरे प्रकार में बदलती रहती है। 'प्रकृति का द्वंद्ववाद' में जिन विषयों का समावेश है, उनकी रचना एंगेल्स ने 1873 से 1886 ई. तक के काल में की थी। प्रकृति विज्ञान के इतिहास, विशेषतः पुनर्जागरण से उन्नीसवीं सदी के मध्यकाल तक के इतिहास से, पर्याप्त साक्ष्य लेकर एंगेल्स ने दर्शाया है कि प्रकृति विज्ञान का विकास अंततोगत्वा व्यावहारिक आवश्यकताओं से, उत्पादन से, निर्धारित होता है।
हिन्दी में इस पुस्तक की लम्बे समय से प्रतीक्षा थी लेकिन इसके जटिल पाठ के चलते किसी ने इसके अनुवाद का साहस नहीं किया। विज्ञान और प्रगतिशील सोच के हिमायती गुणाकर मुळे ही ऐसे व्यक्ति थे, जो इस पुस्तक की अहमियत को समझते थे और अनुवाद में इसके साथ न्याय कर सकते थे! कुछ पृष्ठों का जो अनुवाद वे किसी कारणवश नहीं कर पाए थे, वह बाद में कराया गया और पूरी पांडुलिपि को व्यवस्थित किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में और पांडुलिपि को प्रकाशन योग्य स्थिति तक लाने में श्रीमती शांति गुणाकर मुळे की भूमिका उल्लेखनीय रही है।
आधारभूत मार्क्सवादी साहित्य में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक अमूल्य है।
Vaachikata : Aadivasi Darshan, Sahitya Aur Saundaryabodh
- Author Name:
Vandana Tete
- Book Type:

- Description: आदिवासी दर्शन प्रकृतिवादी है। आदिवासी समाज धरती, प्रकृति और सृष्टि के ज्ञात-अज्ञात निर्देश, अनुशासन और विधान को सर्वोच्च स्थान देता है। उसके दर्शन में सत्य-असत्य, सुन्दर-असुन्दर, मनुष्य-अमनुष्य जैसी कोई अवधारणा नहीं है, न ही वह मनुष्य को उसके बुद्धि-विवेक अथवा ‘मनुष्यता’ के कारण 'महान' मानता है। उसका दृढ़ विश्वास है कि सृष्टि में जो कुछ भी सजीव और निर्जीव है, सब समान है। न कोई बड़ा है, न कोई छोटा है। न कोई दलित है, न कोई ब्राह्मण। सब अर्थवान है एवं सबका अस्तित्व एकसमान है—चाहे वह एक कीड़ा हो, पौधा हो, पत्थर हो या कि मनुष्य हो। वह ज्ञान, तर्क, अनुभव और भौतिकता को प्रकृति के अनुशासन की सीमा के भीतर ही स्वीकार करता है, उसके विरुद्ध नहीं। अन्वेषण, परीक्षण और ज्ञान को आदिवासी दर्शन सुविधा और उपयोगिता की दृष्टि से नहीं देखता, बल्कि धरती, प्रकृति और समस्त जीव-जगत के साथ सहजीवी सामंजस्य और अस्तित्वपूर्ण संगति के बतौर देखता है। मानव की सभी गतिविधियों और व्यवहारों को, समूची विकासात्मक प्रक्रिया को प्रकृति व समष्टि के विरुद्ध नहीं, बल्कि उसके पूरक के रूप में देखता है। उन सबका उपयोग वह वहीं तक करता है, जहाँ तक समष्टि के किसी भी वस्तु अथवा जीव को, प्रकृति और धरती को कोई गम्भीर क्षति नहीं पहुँचती हो। जीवन का क्षरण अथवा क्षय नहीं होता हो। आदिवासी साहित्य इसी दर्शन को लेकर चलता है।
Falit Jyotish (Hora-Ganit)
- Author Name:
Dr. Shanker Adawal
- Book Type:

- Description: विज्ञान में आधुनिक और नए अनुसंधानों ने यह सिद्ध कर दिया है कि ब्रह्मांड एवं सौर मंडल के ग्रह-नक्षत्रों का पृथ्वी के चराचर पर निश्चित रूप से प्रभाव पड़ता है। इन उपलब्धियों से आधुनिक शिक्षित समाज में, जो कि कभी इस सिद्धांत (फलित ज्योतिष) को एक अंधविश्वास मात्र मानता था, पुनः इस शास्त्र के प्रति रुचि तथा विश्वास उत्पन्न हो गया है। अगर हम ज्योतिष की वैज्ञानिकता की बात रहे हैं तो इसका आधार है फलित-ज्योतिष, जो गणित पर ही आधारित है। फलित ज्योतिष में मूलभूत गणित का ज्ञान प्रत्येक को होना नितांत आवश्यक है। बिना गणित की प्रक्रिया को जाने फलित का यथार्थ ज्ञान होना संभव नहीं है। ज्योतिष शास्त्र अनंत है, उसके सिद्धांत, संहिता तथा होरा नामक तीन स्कंधों में से इस पुस्तक को होरा-शास्त्र का केवल एक अंश ही समझना चाहिए। इस पुस्तक में केवल जन्म-कुंडली और वर्ष-कुंडली के मुख्य-मुख्य गणित विषय मात्र संकलित हैं।
Bharat Mein Darshanshastra
- Author Name:
Mrinal Kanti Gangopadhyay
- Book Type:

-
Description:
‘दर्शनशास्त्र : पूर्व और पश्चिम’ ग्रन्थमाला की यह तीसरी पुस्तक है, जिसके लेखक डॉ. मृणालकान्ति गंगोपाध्याय की गणना भारतीय संस्कृति और दर्शन के विशिष्ट विद्वानों में की जाती है।
ऋग्वैदिक काल से लेकर ईसा की पहली शताब्दी तक लगभग डेढ़ हज़ार वर्ष के दौरान भारतीय दर्शन में ईश्वरवादी-विचारवादी चिन्तन से लेकर लोकायत जैसी भौतिकवादी दर्शनिक धाराएँ देखने को मिलती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में विद्वान लेखक ने इन समस्त धाराओं का मन्थन करते हुए भारतीय दर्शन की प्रकृति और अन्तर्वस्तु का यथार्थवादी परिचय दिया है।
पुस्तक की प्रस्तावना में भारतीय दर्शन की कुछ मूलभूत विशेषताओं की सामान्य विवेचना की गई है, और उसके पश्चात् प्रमुख सम्प्रदायों—उनके प्रणेताओं और ग्रंथों के साथ-साथ उनके बुनियादी सिद्धान्तों की चर्चा की गई है। भारतीय विचारकों ने दर्शन की महत्त्वपूर्ण समस्याओं पर अपने-अपने तरीक़े से जो तर्क-वितर्क किया था, उसकी विवेचना भी प्रस्तुत पुस्तक में है।
निस्सन्देह इस विषय पर अनेक पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध हैं, परन्तु डॉ. गंगोपाध्याय ने वस्तुनिष्ठता बनाए रखने के लिए पुरानी लीक पीटने के स्थान पर विवेचना की नई विधि अपनाई है और भारतीय दर्शन को, पांडित्य का प्रदर्शन किए बिना, ऐसे सरल शब्दों में प्रस्तुत किया है कि यह पुस्तक उन सामान्य पाठकों के लिए भी उपयोगी हो गई है, जिनमें से कुछ के लिए, सम्भव है, यह अपने विषय की पहली पुस्तक हो। तथापि, हम आशा करते हैं कि दर्शन के विद्यार्थियों के लिए भी यह पुस्तक विचारोत्तेजक और ज्ञानवर्द्धक सिद्ध होगी।
Sone Ki Sikdi : Roop Ki Nathiya
- Author Name:
Rashmi Vajpeyi
- Book Type:

- Description: संताल आदिवासी समुदाय झारखंड की आबादी का एक मुख्य हिस्सा है। यहाँ के तेजी से बदलते सामाजिक आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में संताल लोगों की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती जा रही है। संताल परगना के प्रमण्डलीय मुख्यालय दुमका को झारखण्ड की उप-राजधानी का दर्जा दिया गया है जो इसकी महत्ता को स्वतः उजागर करता है। आज की बदली हुई स्थिति में संताल आदिवासियों के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन के विभिन्न पहलुओं पर गहन शोध एवं अध्ययन की आवश्यकता प्रबल होती जा रही है। संताल आदिवासियों के बीच अलग-अलग मौसम त्योहार और अवसरों के लिए अलग-अलग गीतों के विधान हैं। दोङ अर्थात् विवाह गीतों के अतिरिक्त सोहराय दुरूमजाक् बाहा लांगड़े रिजां मतवार डान्टा और कराम संताल परगना के प्रमुख लोकगीत हैं। बापला अर्थात् विवाह संताल आदिवासियों के लिए मात्र एक रस्म ही नहीं वरन् एक वृहत् सामाजिक उत्सव की तरह है जिसका वे पूरा-पूरा आनन्द उठाते हैं। इसके हर विधि-विधान में मार्मिक गीतों का समावेश है। इन गीतों में जहाँ आपको आदिवासी जीवन की सहजता सरलता उत्फुल्लता तथा नैसर्गिकता आदि की झलक मिलेगी वहीं उनके जीवन-दर्शन सामाजिक सोच और मान्यता जिजीविषा तथा अदम्य आतंरिक शक्ति से भी अनायास साक्षात्कार हो जाएगा। परम्परागत संताली जीवन विविधतापूर्ण है जिसकी एक झलक प्रस्तुत करने की दिशा में हमने यह प्रयास किया है।
Meghdoot : Ek Antaryatra
- Author Name:
Prabhakar Shrotriya
- Book Type:

- Description: ‘मेघदूत’ एक कालजयी कृति ही नहीं प्रेम, प्रकृति और निसर्ग के प्रति कालिदास की अनन्य प्रपत्ति भी है। अपने विशिष्ट स्वर, स्वरूप और न्यास में यह काव्य एक अप्रतिम एवं इन्द्रधनुषी भाव-वितान है, जिसमें कृतिकार की अपूर्व परिकल्पना, मौलिक उद्भावना तथा बिम्बों और वर्णों की जीवन्त छवियाँ सहज ही देखी जा सकती हैं। कालिदास ने अपनी यशस्वी कृति ‘मेघदूत’ के द्वारा जिस रूपक-राज्य का निर्माण किया था—पिछली दो सहस्राब्दियों से उसका निरन्तर विकास और विस्तार होता रहा है। विरही यक्ष के मनोजगत में विद्यमान एक आर्तप्रेमी के प्रणयोत्सुक प्रार्थी भाव को अनुषंग बनाकर—अपनी प्राण-प्रियतमा को भेजे जानेवाले विरहातुर सन्देश को कई रचनाकारों, भाष्यकारों और रूपान्तरकारों और चित्रकारों ने अपने-अपने ढंग से, अलग-अलग शैलियों में निरूपित किया है। प्रसंगानुरूप और प्रसंगान्तर परिदृश्य को अपने विरहकातर निवेदन से मुखर करनेवाली इस कालातीत रचना का अनुगायन और अनुकीर्तन न केवल सदियों से होता रहा है, बल्कि आधुनिक और समकालीन पीढ़ियाँ भी इसमें अपनी रचनात्मक भावांजलि लिए खड़ी रही हैं। अपनी सर्जनात्मक समग्रता के नाते और ‘क्लासिकी’ के गुणों से समृद्ध एवं समादृत ‘मेघदूत’ ने काव्य और काव्येतर माध्मयों के द्वारा सहृदय पाठकों, प्रेक्षकों, गायकों और समीक्षकों की क्षमता और आकांक्षाओं के अनुरूप सुदीर्घ रचना-प्रकिया एवं परम्परा को जीवित रखा है। इसी अनुक्रम में हिन्दी के सुपरिचित विद्वान, आलोचक, कवि एवं रचनाकार प्रभाकर श्रोत्रिय ने ‘मेघदूत’ के मार्मिक प्रसंगों, अछूते अनुषंगों—और सबसे बढ़कर—रचनाकार की विराट मनोभूमि का स्पर्श एवं अनुभावन अपनी विदग्ध रचना मनीषा के द्वारा किया है। ‘मेघदूत : एक अन्तर्यात्रा’ पुस्तक प्रेमी और प्रकृति के शाश्वत एवं चिरन्तन आधान को सुललित और सर्जनात्मक आयाम प्रदान करेगी—इसमें सन्देह नहीं।
Ekta-Akhandata Ki Kahaniyan
- Author Name:
Acharya Mayaram 'Patang'
- Book Type:

- Description: "‘एकता-अखंडता’ की कहानियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत हैं। टी.वी. चैनलों के हास्य और मनोरंजन के कार्यक्रम, जो कुछ जनता के समक्ष परोस रहे हैं, उसके परिणामस्वरूप समाज का युवा वर्ग दिशाहीन होता जा रहा है। चोरी, डकैती और छेड़छाड़ की घटनाएँ निरंतर बढ़ती जा रही हैं। एक-दो नहीं, अनेक रेप कांड सभ्य नागरिकों, देशभक्तों के लिए घोर चिंता का विषय हैं। आम लोग न समाचार सुनते हैं, न सत्साहित्य पढ़ते हैं। प्रायः घरों में सीरियल ही देखते हैं। चरित्र-निर्माण तथा राष्ट्रभक्ति सिखाने की कोई व्यवस्था दिखाई नहीं देती। छोटी-छोटी बातों पर युवक गोली चला देते हैं। चाकूबाजी की घटनाएँ तो सामान्य हैं। राजनीति के खिलाड़ी सामान्य घटनाओं को राजनीतिक रंग देकर सांप्रदायिक झगड़े खड़े कर देते हैं। कोई जातीय रंग देते हैं, उच्च वर्ग और दलित वर्ग का संघर्ष खड़ा कर देते हैं, कारण वही है कि राष्ट्रीयता की भावना का पोषण करनेवाला साहित्य भी सीमित ही उपलब्ध है। हर समुदाय अपने जातीय हित के लिए आंदोलन के लिए तैयार है। कहीं जाट अपनी जाति को आरक्षण दिलवाने के लिए कटिबद्ध हैं तो कहीं पटेल विद्रोह पर उतर आए हैं। उनके सामने न सरकार और न्यायालय की विवशता है, न राष्ट्र की साख का प्रश्न है। युवाओं को देश की एकता-अखंडता की प्रेरणा देने का यह एक प्रयास है। आशा है, युवा वर्ग इन नई-पुरानी कहानियों से कुछ सीखेगा। "
Dakshin-Poorva Asia Ka Praveshdwar Thailand
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: "थाईलैंड, दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश- द्वार है। इस क्षेत्र में किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक लुभावने प्राकृतिक सौंदर्य वाले स्थान, अलंकृत मंदिर एवं समृद्ध सांस्कृतिक केंद्र पाए जाते हैं। वास्तविकता में देखा जाए तो थाईलैंड सुंदरता का देश है। आकर्षक और अद्वितीय थाई संस्कृति से स्वादिष्ट व्यंजनों, बौद्ध मंदिरों और जीवंत बाजारों तक थाईलैंड में देखने के लिए बहुत कुछ है। भारतीय पर्यटकों के लिए अच्छी बात यह है कि भारतीय और थाई लोग एक धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई विरासत साझा करते हैं। इसी क्रम में भारतीय संस्कृति ने थाईलैंड के कई पहलुओं को प्रभावित करने में एक अभिन्न भूमिका निभाई है, जिसमें धर्म, शिक्षा, उत्सव, समारोह, भाषा, साहित्य, नृत्य और भोजन शामिल हैं। थाईलैंड में समृद्ध विरासत एवं परपंराएँ, विश्वविख्यात स्थापत्य कला समेटे भवन, शिक्षा के उत्कृष्ट केंद्र, युद्ध स्मारक, मनमोहक प्राकृतिक छटा के अतिरिक्त यहाँ अत्यंत मैत्रीपूर्ण संबंध वाले लोग हैं। इस पुस्तक में थाईलैंड की संस्कृति, अर्थव्यस्था, रीति-रिवाज, इतिहास, भूगोल से लेकर वहाँ के पर्यटक स्थलों, शैक्षिक तंत्र, धार्मिक विविधता, भाषा, जैव विविधता, राजनीतिक व्यवस्था की जानकारी उपलब्ध करने का प्रयास किया है। इन विषयों पर कुछ प्रकाश डालने के अतिरिक्त भारत-थाई द्विपक्षीय संबंधों पर भी प्रकाश डाला गया है। "
Afganistan - Samrajyanchi Dafanbhumi
- Author Name:
Sachin Diwan
- Book Type:

- Description: व्यक्ती किंवा राष्ट्राच्या जीवनप्रवासात जशी उमेद देणारी आदर्श उदाहरणे आवश्यक असतात, तसेच काय करू नये हे सांगणारे, धोक्याची सूचना देणारे दाखलेही गरजेचे असतात. दुर्दैवाने आज अफगाणिस्तान हा देश धोक्याची सूचना देणाऱ्या दाखल्याच्या रूपात जगासमोर उभा आहे. भौगोलिक साधनसंपत्ती, पूर्वापार जागतिक व्यापारी मार्गांवर असलेले मोक्याचे स्थान, स्वाभिमानी आणि लढाऊ लोक अशा अनेक जमेच्या बाजू असूनही अफगाणिस्तान आज ओळखला जातो तो एक ‘फेल्ड स्टेट' म्हणून. पराकोटीचा आणि विधीनिषेधशून्य धर्माभिमान, त्याला मिळालेली हिंसेची जोड, आधुनिक जगाकडे फिरवलेली पाठ आणि परकीय शक्तींचा हस्तक्षेप यातून हा प्राचीन देश आणि समाज देशोधडीला लागला आहे. ही आपल्यासह अन्य देशांसाठीही धोक्याची घंटा ठरू शकते. त्यासाठीच अफगाणिस्तानची वाटचाल समजून घेणे निकडीचे ठरते.हा प्रवास संघर्षमय असला तरी रंजक आणि उद्बोधक आहे. साम्राज्यवादाच्या सुरुवातीच्या काळात महाशक्तींमध्ये खेळल्या गेलेल्या ‘द ग्रेट गेम'पासून अगदी आतापर्यंतच्या भू-राजकीय संघर्षाची किनार त्याला आहे. जग जिंकायला निघालेल्या अलेक्झांडरपासून सातासमुद्रांवर हुकूमत गाजवणाऱ्या ब्रिटनपर्यंत आणि सोविएत युनियनपासून अमेरिकेपर्यंत सर्व महासत्तांनी आजवर या भूमीत मारच खाल्ला आहे. त्यासाठीच अफगाणिस्तान ‘साम्राज्यांची दफनभूमी' म्हणून ओळखले जाते. अनेक रोमहर्षक प्रसंग आणि पात्रांनी ही कहाणी सजली आहे. त्यात भारताचेही हितसंबंध गुंतले असल्याने या कहाणीला वेगळे महत्त्व लाभले आहे. कवी इक्बाल यांनी शतकभरापूर्वी अफगाणिस्तानचे वर्णन ‘आशिया खंडाचे हृदय' असे केले होते. तेथे शांतता असेल तर आशियात शांतता असेल, तेथे संघर्ष असेल तर संपूर्ण आशियात संघर्ष असेल, असे इक्बाल यांनी म्हटले होते. आजही ते वर्णन अफगाणिस्तानला लागू पडते. त्या भळभळत्या हृदयाची स्पंदने टिपण्याचा प्रयत्न म्हणजे हा ग्रंथ होय! Afganistan : Samrajyanchi Dafanbhumi |Sachin Diwan अफगाणिस्तान : ‘साम्राज्यांची दफनभूमी'! | सचिन दिवाण
DGP Gupteshwar Pandey: Sangharsh Se Utkarsh Tak
- Author Name:
Savita Pandey
- Book Type:

- Description: रियल ‘सिंघम’, ‘रॉबिनहुड’, ‘दबंग’, ‘चुलबुल पांडेय’ जैसे नामों से नवाजे जाते रहे 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी गुप्तेश्वर पांडेय बिहार के डीजीपी हैं। बिहार में कम्युनिटी पुलिसिंग के अगुआ, डीजीपी पांडेय बहुत लोकप्रिय हैं। लोक जागरण के लिए सोशल मीडिया का बिंदास प्रयोग और अभिव्यक्ति का उनका अंदाज जनता, खासकर युवाओं को काफी पसंद है। वे बिहार में नशामुक्ति और शराबबंदी के ब्रांड अंबेसेडर भी हैं। उनकी जीवन-शैली इतनी साधारण, सादगीपूर्ण है कि लोग कहते हैं कि लगता ही नहीं कि वे डीजीपी हैं! इस पुस्तक में लेखिका ने श्री गुप्तेश्वर पांडेय के बतौर डीजीपी और डीजीपी बनने के क्रम में किए गए उनके प्रयासों को साझा किया है। युवाओं को समर्पित यह पुस्तक गुप्तेश्वर पांडेय की मित्र पुलिसिंग के साथ सख्त कार्य-शैली का वर्णन करती ही है, साथ-ही-साथ छात्रों व युवाओं को संदेश भी देती चलती है कि विषम और विकट परिस्थितियों में भी कैसे सफलता की मंजिल पाई जा सकती है और डीजीपी जैसे पद पर पहुँचकर भी कैसे अहंकार से पार पाया जा सकता है। आमजन में पुलिस के भय और अविश्वास को कम करने के लिए सतत क्रियाशील रहे एक समर्पित जनसेवक की प्रेरक जीवनगाथा।
Deshbhakta aani Andhabhakta
- Author Name:
Satish Kamat +1
- Book Type:

- Description: भारतीय समाजात अनुदार प्रवृत्तींचे प्रस्थ 1970 आणि नंतरच्या दशकांत वाढत गेले. मार्क्सवादी-लेनिनवाद्यांना भारतीय राज्यघटना कधीच पचनी पडली नाही; कारण तिने कोणा एका पक्षाचा (म्हणजे त्यांच्या पक्षाचा!) विशेषाधिकार मान्य केला नाही. तशीच ती हिंदू कट्टरवाद्यांनाही पचली नाही; कारण तिने कोणा विशिष्ट धर्माला (म्हणजे त्यांच्या धर्माला!) विशेषाधिकार दिले नाहीत. देशाला स्वातंत्र्य मिळाल्यापासूनच, धार्मिक अतिरेक्यांनी आणि डाव्या क्रांतिकारकांनी बळाचा वापर करून त्यांच्या पोथिनिष्ठा लादण्याचे वारंवार प्रयत्न केले. अलीकडच्या दशकांत लोकशाही कार्यपध्दतीला तिसरा धोका समोर येऊ लागला आहे. हा आहे भ्रष्टाचाराचा आणि व्यक्ती, घराणी आणि जातगटांच्या मार्फत सार्वजनिक संस्था आणि राजकीय पक्ष यांच्यावर ताबा मिळवत, घटनात्मक केंद्र पोखरून दुर्बळ होण्याचा... जिद्द हरवल्यामुळे वा संधिसाधूपणामुळे काही लेखक व बुध्दिजीवींनी काँग्रेसची खुशमस्करी सुरू केली. या लाचारीचा उद्वेग आल्याने इतर काहींनी भारतीय जनता पक्षाची कास धरली, पर्यायाने हिंदू धर्माधिष्ठित राष्ट्राच्या उद्दिष्टावर आपली मोहोर उठविली. बुध्दिजीवींचा तिसरा गट अपराधी भावनेपोटी वा निव्वळ मूर्खपणातून, मध्य भारतातील जंगल व डोंगराळ प्रदेशांत आपला प्रभाव वाढविण्याच्या प्रयत्नात असलेल्या क्रांतिकारी माओवाद्यांचा समर्थक बनला... वास्तव्य दिल्लीत नाही, तर बंगलोरमध्ये असल्यामुळे असेल कदाचित, मी राजकीय पक्षांपासून माझे स्वातंत्र्य अबाधित ठेवू शकलो. काँग्रेस, संघ परिवार आणि संसदीय डावे यांच्याविषयीच्या माझ्या मतभेदाच्या मुद्यांची चर्चा या पुस्तकातील निवडक निबंधांत केली आहे... मी माओवाद्यांचाही टीकाकार आहे; कारण सभ्यता आणि लोकशाही यांना काँग्रेसी भ्रष्टाचार आणि संघ परिवाराची असहिष्णुता यांपासून जेवढा धोका आहे, तेवढाच माओवाद्यांपासूनही आहे, असे मी मानतो. Deshbhakta aani Andhabhakta : Ramchandra Guha, Translated by Satish Kamat देशभक्त आणि अंधभक्त : रामचंद्र गुहा, अनुवाद : सतीश कामत
Khandit Bharat
- Author Name:
Dr. Rajendra Prasad
- Book Type:

- Description: "आधुनिक भारत के मनीषी, तत्त्वज्ञानियों और चिंतकों में देशरत्न राजेंद्र प्रसाद का प्रथम स्थान है। परदु:खकातरता, त्याग और सेवा- भाव उनके स्वाभाविक गुण थे। भारत की एकता और अखंडता बनाए रखना उनके लिए अत्यंत महत्त्व की बात थी। सन् 1940 के लाहौर अधिवेशन में मुसलिम लीग ने जब देश के विभाजन का प्रस्ताव पारित किया तो यह गंभीर चिंता और चर्चा का विषय बन गया। अनेक प्रमुख व्यक्तियों ने इस पर अपने विचार एवं योजनाएँ प्रस्तुत कीं तथा अपने-अपने ढंग से इस समस्या के समाधान सुझाए। 1945 में इसी बात को ध्यान में रखकर राजेंद्र बाबू ने अंग्रेजी में पुस्तक लिखी-' इंडिया डिवाइडेड'; खंडित भारत उसी का हिंदी अनुवाद है। पाकिस्तान की माँग से संबद्ध उस समय तक प्रकाशित प्राय: संपूर्ण साहित्य के विस्तृत अध्ययन के बाद लिखी गई इस पुस्तक की मुख्य विशेषता है कि इसमें लेखक के विचार पाठकों पर आरोपित नहीं किए गए। तथ्यों, आँकड़ों, तालिकाओं, नक्शों और ग्राफों की सहायता से भारतीय प्रायदीप के विभाजन से संबंधित संपूर्ण सामग्री उपस्थित कर देश के बँटवारे के पक्ष-विपक्ष में इस प्रकार तर्क प्रस्तुत किए गए हैं कि पाकिस्तान की व्यवहार्यता अथवा अव्यवहार्यता के विषय में पाठक स्वयं अपनी राय बना सकें। विभाजन के समर्थकों एवं विरोधियों-दोनों के लिए ' खंडित भारत' एक आदर्श ग्रंथ माना गया। यद्यपि देश को विभाजित हुए साठ वर्ष से ऊपर बीत चुके हैं, इतिहासकारों की दृष्टि में आज भी यह पुस्तक महत्वपूर्ण है और प्रत्येक भारतीय के लिए पठनीय है।
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Hurry! Limited-Time Coupon Code
Logout to Rachnaye
Offers
Best Deal
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua
Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.
Enter OTP
OTP sent on
OTP expires in 02:00 Resend OTP
Awesome.
You are ready to proceed
Hello,
Complete Your Profile on The App For a Seamless Journey.