Chaar Kanya
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‘चार कन्या’ में यमुना, शीला, झूमुर और हीरा की कथा है। यमुना एक मामूली लड़की है, उसके भीतर बूँद–बूँद कर जन्म लेती है—अपने अधिकारबोध के प्रति तीव्र जागरूकता। ऐसी सुलझी हुई जागरूक लड़कियों को काफ़ी कुछ भुगतना पड़ता है। समाज के उलटे–सीधे नियम उन्हें बहुत सताते हैं, यमुना को भी ख़ूब सताया। शीला ठगी जाती है अपने प्रेमी द्वारा। ऐसी सैकड़ों शीलाएँ राह में चल–फिर रही हैं पर सभी तो अपनी ज़ुबान पर वे बातें नहीं ला सकतीं, क्योंकि इससे ठगनेवालों पर प्रहार के बजाय शीलाओं पर ही उलटी मार पड़ती है—समाज उन्हीं पर पत्थर फेंकता है, उनके ही मुँह पर थूकता है। ‘लज्जा’ जैसी चर्चित कृति की लेखिका तसलीमा नसरीन का यह उपन्यास स्त्री–विमर्श की कई खिड़कियाँ खोलता है, जिससे आती बयार से पाठक अछूता नहीं रह सकता।
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‘चार कन्या’ में यमुना, शीला, झूमुर और हीरा की कथा है। यमुना एक मामूली लड़की है, उसके भीतर बूँद–बूँद कर जन्म लेती है—अपने अधिकारबोध के प्रति तीव्र जागरूकता। ऐसी सुलझी हुई जागरूक लड़कियों को काफ़ी कुछ भुगतना पड़ता है। समाज के उलटे–सीधे नियम उन्हें बहुत सताते हैं, यमुना को भी ख़ूब सताया। शीला ठगी जाती है अपने प्रेमी द्वारा। ऐसी सैकड़ों शीलाएँ राह में चल–फिर रही हैं पर सभी तो अपनी ज़ुबान पर वे बातें नहीं ला सकतीं, क्योंकि इससे ठगनेवालों पर प्रहार के बजाय शीलाओं पर ही उलटी मार पड़ती है—समाज उन्हीं पर पत्थर फेंकता है, उनके ही मुँह पर थूकता है।
‘लज्जा’ जैसी चर्चित कृति की लेखिका तसलीमा नसरीन का यह उपन्यास स्त्री–विमर्श की कई खिड़कियाँ खोलता है, जिससे आती बयार से पाठक अछूता नहीं रह सकता।
Book details
- Format
- Paperback
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 5th
- Publication year
- 2001
- Weight
- 1000 grams
- ISBN-13
- 9788171198955
- Pages
- 254
- Reading time
- ~8 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14 × 22 cm
- Language
- Hindi
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रात का रिपोर्टर सम्भवत: आपातकाल के दिनों को लेकर लिखा गया हिन्दी में पहला उपन्यास है, और निर्मल जी के कथा-लेखन में नए मोड़ का सूचक भी। उपन्यास का कथा-नायक रिशी यहाँ एक ऐसे पत्रकार के रूप में सामने आता है, जिसका आन्तरिक संकट उसके बाह्य सामाजिक यथार्थ से उपजा है... हालात ने उसे जैसे अस्वस्थ और शंकालु बना दिया है। उसके चारों ओर अँधेरे का साम्राज्य है और उसका अन्तर्जगत भी उसकी ज़द में है। ऐसे में यदि वह अपने इर्द-गिर्द के अँधेरे को जाँचने-परखने की कोशिश करता है, तो स्वयं भी उसकी कसौटी पर होता है। वस्तुतः यह एक ऐसी कथाकृति है, जो एक बुद्धिजीवी की चेतना पर पड़ने वाले युगीन दबावों को रेखांकित करती है और उन्हें उसके व्यवहार में घटित होते हुए दिखाती है। इससे गुज़रते हुए हम जिस माहौल से गुज़रते हैं, वह चाहे हमारे अनुभव से बाहर रहा हो या हम उससे बाहर रहे हों, लेकिन वह हमारी दुनिया की आज़ादी के बुनियादी सवालों से परे नहीं है।
Andha Ullu
- Author Name:
Sadegh Hedayat +1
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ईरान के ही नहीं, विश्व के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में गिने जाने वाले उपन्यास ‘अन्धा उल्लू’ का लेखन इसके लेखक ने बम्बई में अपने भारत प्रवास के दौरान किया था। एक हताश व्यक्ति के भीतरी अँधेरे और उसे चारों तरफ़ से भींचकर रखे रहने वाली दुनिया के प्रति उसका क्षोभ इस उपन्यास के शब्द-शब्द में बिंधा है जिसे सुपरिचित कथाकार नासिरा शर्मा ने बड़े मनोयोग से मूल फ़ारसी से हिन्दी में प्रस्तुत किया है। अपने असंगत अतियथार्थ में यह उपन्यास जहाँ हमें ख़ुद से दूर की कोई चीज़ लगता है, वहीं अपने उन्हीं विवरणों और प्रतिक्रियाओं में अपने बहुत क़रीब भी लगता है। संवेदनहीन ज्यामितिक आकृतियों से घिरे हमारे आधुनिक मनोजगत का वह स्याह विस्तार इसमें अंकित हुआ है, जहाँ पाँव रखने का साहस हम अक्सर नहीं कर पाते। अथाह निराशा, भयावह दुःस्वप्नों, घोर अकेलेपन और मृत्युबोध के हौलनाक चित्रण के चलते ईरान में इस उपन्यास पर प्रतिबन्ध भी लगा जिसका एक कारण यह भी बताया जाता है कि इसे पढ़ने के बाद कुछ पाठकों ने अपना जीवन समाप्त करने के प्रयास भी किए। लेकिन इस उपन्यास में अभिव्यक्त सचाई को नकार पाना कभी सम्भव नहीं हुआ और समय के साथ ‘अन्धा उल्लू’ हरेक सजग संवेदनशील व्यक्ति के लिए एक अपरिहार्य पाठ के तौर पर अधिक से अधिक मान्य होता गया।
Naqqashidar Cabinet
- Author Name:
Sudha Om Dhingra
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सुधा ओम ढींगरा का उपन्यास नक़्क़ाशीदार केबिनेट वर्ष 2016 का अत्यंत सफल उपन्यास है। यह उपन्यास पेपरबैक और ऑडियोबुक में भी उपलब्ध है।
Gawah Gairhazir
- Author Name:
Chandrakishore Jaiswal
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किसुन साह ने जब बिना किसी सिर-फुड़ौव्वल के बेटों के बीच बाँट-बखरा कर दिया तो लोगों ने उन्हें इस बात पर खुश होने को कहा कि अब उनके बुढ़ापे के दिन मौज-मस्ती में कटते रहेंगे। किसुन साह ने भी निर्णय ले लिया कि मौज-मस्ती में दिन काटने के लिए उन्हें अब बूढ़ा भी हो ही जाना चाहिए। लेकिन...। परिवार नामक सुख के टापू की यह कहानी यहीं से शुरू होती है। लोक और ग्रामीण जीवन के मर्मज्ञ कथाकार चन्द्रकिशोर जायसवाल का उपन्यास ‘गवाह गैरहाजिर’ अपनी बहुस्तरीय भाषा-सामर्थ्य के लिए खासतौर पर जाना जाता है। पात्रों की कहानी कहने के साथ ही कथाकार इसमें भारतीय ग्राम्य समाज और उसकी संरचना पर भी टिप्पणियाँ करते चलते हैं जिससे एक तरफ सूक्ष्म पर्यवेक्षण की उनकी क्षमता रेखांकित होती है, तो दूसरी तरफ़ गाँव की गझिन सामाजिक-मानसिक बनावट को समझने में भी मदद मिलती है। उपन्यास की कथा के केन्द्र में किसुन साह हैं—एक स्वाभिमानी और समझदार बुजुर्ग। घर की सम्पत्ति इत्यादि का बँटवारा अपने परिवार में शान्तिपूर्वक करने के बाद वे सबसे छोटे बेटे के साथ रहने का फैसला करते हैं। कुछ दिन वहाँ रहने के बाद जब उन्हें लगता है कि बेटा-बहू का व्यवहार उनके प्रति ठीक नहीं है तो वे घर छोड़कर बाकी जीवन एक मन्दिर में बिताने का फैसला करते हैं, लेकिन परिवार से मोह के चलते यह भी नहीं कर पाते। पारिवारिक सम्बन्धों की महीन अक्कासी के अलावा यह उपन्यास पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी और सम्बन्धों की ऊष्मा के छीजते जाने की मनोवैज्ञानिक पड़ताल भी करता है। समर्थ शिल्प, जीवन्त भाषा और बेधक कथ्य वाला अत्यन्त पठनीय उपन्यास !
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