Beetiaap Beetiaap
(0)
Author:
Vipin Kumar AgarwalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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‘बीतीआप बीतीआप’ एक नए ढंग का उपन्यास है। भाषा और शैली के नवोन्मेषी प्रयोग के माध्यम से यह एक रचनाशील व्यक्ति की कहानी बताता है। इलाहाबाद की साहित्यिक पृष्ठभूमि में नायक की सफल कवि बनने की आकांक्षा उसे प्रेम और जीवन की विचित्र परिस्थितियों में ले जाती है, जहाँ वह निराला के सार्वभौमिक भाव का साक्षात्कार करता है। लेकिन इस बीच वह अपने परिवेश, अपने जीवन और उससे जुड़े लोगों की कहानियाँ भी बताता चलता है। विपिन कुमार अग्रवाल की विशेषता है कि दैनिक जीवन की साधारण घटनाओं को भी वे अपने भाषा-चातुर्य तथा कल्पना द्वारा विशेष अर्थ से भर देते हैं। भाषिक प्रयोग, परिस्थिति वर्णन और व्यक्तियों के चित्र खींचने की शैली इस उपन्यास को प्रयोगधर्मिता के एक भिन्न स्तर पर ले जाती है।
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‘बीतीआप बीतीआप’ एक नए ढंग का उपन्यास है। भाषा और शैली के नवोन्मेषी प्रयोग के माध्यम से यह एक रचनाशील व्यक्ति की कहानी बताता है। इलाहाबाद की साहित्यिक पृष्ठभूमि में नायक की सफल कवि बनने की आकांक्षा उसे प्रेम और जीवन की विचित्र परिस्थितियों में ले जाती है, जहाँ वह निराला के सार्वभौमिक भाव का साक्षात्कार करता है।
लेकिन इस बीच वह अपने परिवेश, अपने जीवन और उससे जुड़े लोगों की कहानियाँ भी बताता चलता है। विपिन कुमार अग्रवाल की विशेषता है कि दैनिक जीवन की साधारण घटनाओं को भी वे अपने भाषा-चातुर्य तथा कल्पना द्वारा विशेष अर्थ से भर देते हैं।
भाषिक प्रयोग, परिस्थिति वर्णन और व्यक्तियों के चित्र खींचने की शैली इस उपन्यास को प्रयोगधर्मिता के एक भिन्न स्तर पर ले जाती है।
Book Details
-
ISBN9789389742916
-
Pages107
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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आधुनिक इतिहास में यदि किसी विचारक-लेखक की ख्याति उसकी ज़िन्दगी में ही पूरी दुनिया में फैल चुकी थी और जीते-जी ही वह एक मिथक बन गया था, तो वे लेव तोल्स्तोय ही थे। उन्नीसवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के साहित्यिक परिदृश्य पर जिस तरह बाल्ज़ाक छाए हुए थे, उसी तरह उत्तरार्द्ध के साहित्यिक परिदृश्य पर तोल्स्तोय का प्रभाव-साम्राज्य फैला हुआ था।
‘पुनरुत्थान’ एक नए प्रकार का उपन्यास था जिसमें पात्रों के गहन आत्मसंघर्ष और रूपान्तरण के साथ ही, सेंट पीटर्सबर्ग के दरबार के लोगों और ग्रामीण कुलीनों से लेकर किसानों, क़ैदियों और साइबेरिया-निर्वासन पर जा रहे क़ैदियों के चरित्रों के माध्यम से तत्कालीन रूस के समूचे वैविध्यपूर्ण सामाजिक परिदृश्य को एक इतिहासकार-सदृश वस्तुपरकता और अधिकार के साथ उपस्थित कर दिया गया है। कात्यूशा का मुक़दमा और उसमें जूरी सदस्य के रूप में नेख्लूदोव की उपस्थिति सामाजिक अन्याय पर आधारित जीवन की निरर्थकता और न्यायतंत्र की कुरूपता को एकदम नंगा कर देती है।
‘पुनरुत्थान’ में तोल्स्तोय सरकार, न्यायालय, चर्च, कुलीन भूस्वामियों के विशेषाधिकारियों, भूमि के निजी स्वामित्व, मुद्रा, जेलों और वेश्यावृत्ति की मर्मभेदी आलोचना करते हैं। घनी और शक्तिशाली लोगों द्वारा उत्पीड़ित निम्न वर्गों के प्रति सहानुभूति-प्रदर्शन पर उपन्यास तीखा व्यंग्य करता है। किसानों, क्रान्तिकारियों और निर्वासित अपराधियों सहित सामान्य जनसमुदाय का चित्रण करते हुए तोल्स्तोय का ज़ोर इस बात पर है कि उत्पीड़न और अधिकारहीनता ने आमजन की आत्मिक शक्तियों को पंगु बना डाला है।
Love In Jamshedpur
- Author Name:
Ajitabha Bose
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- Description: Do you remember who was your first crush? Did you too dream of marrying her? Everyone does somehow, isn't it? So did Arnab! When he saw simpi for the very first time, he fell in for a forever-love. Yet, the dream took a different turn when she rejected him time and again. What lies ahead? Will Arnab be able to impress his first love? Or will he fail, again? Bestselling author, ajitabha Bose brings to you a true tale of love based in the small town of Jamshedpur.
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