Ulta Daun
(0)
Author:
Prabodh Kumar SanyalPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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जीवन के झंझावात के सम्मुख एक संवेदनशील व्यक्ति के असहाय और अकेले हो जाने की कथा है ‘उल्टा दाँव’। बांग्ला के अत्यन्त लोकप्रिय कथाकार<strong>, </strong>यात्रावृत्त-लेखक प्रबोध कुमार सान्याल का यह चर्चित उपन्यास मानव-चरित्र की कई कोणों से पड़ताल करता है।</p> <p>हेमन्त<strong>, </strong>रूनू और उसके परिवार की सम्पन्न पृष्ठभूमि में यह उपन्यास हमें अपने आसपास की ही कहानी लगती है<strong>, </strong>लेकिन इसके चरित्रों के भीतरी अन्तर्विरोध<strong>, </strong>आकांक्षाएँ<strong>, </strong>कमज़ोरियाँ उन्हें एक ऐसा आईना बना देती है जिसमें हम अपने तथा अपने जीवन से जुड़े अनेक चरित्रों के चेहरे देख सकते हैं।</p> <p>बांग्ला कथाकारों की वह विशेषता जो उनकी कथाकृतियों को बेहद पठनीय बना देती है<strong>, </strong>इस उपन्यास में भी पाठक को बाँधने के लिए अपने पूरे जादू के साथ उपस्थित है। रहस्य<strong>, </strong>रोमांच और रोमांस से भरे-पूरे इस उपन्यास में न्याय तथा नैतिकता सम्बन्धी प्रश्न को बहुत गहराई में जाकर पकड़ा है।
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जीवन के झंझावात के सम्मुख एक संवेदनशील व्यक्ति के असहाय और अकेले हो जाने की कथा है ‘उल्टा दाँव’। बांग्ला के अत्यन्त लोकप्रिय कथाकार<strong>, </strong>यात्रावृत्त-लेखक प्रबोध कुमार सान्याल का यह चर्चित उपन्यास मानव-चरित्र की कई कोणों से पड़ताल करता है।</p>
<p>हेमन्त<strong>, </strong>रूनू और उसके परिवार की सम्पन्न पृष्ठभूमि में यह उपन्यास हमें अपने आसपास की ही कहानी लगती है<strong>, </strong>लेकिन इसके चरित्रों के भीतरी अन्तर्विरोध<strong>, </strong>आकांक्षाएँ<strong>, </strong>कमज़ोरियाँ उन्हें एक ऐसा आईना बना देती है जिसमें हम अपने तथा अपने जीवन से जुड़े अनेक चरित्रों के चेहरे देख सकते हैं।</p>
<p>बांग्ला कथाकारों की वह विशेषता जो उनकी कथाकृतियों को बेहद पठनीय बना देती है<strong>, </strong>इस उपन्यास में भी पाठक को बाँधने के लिए अपने पूरे जादू के साथ उपस्थित है। रहस्य<strong>, </strong>रोमांच और रोमांस से भरे-पूरे इस उपन्यास में न्याय तथा नैतिकता सम्बन्धी प्रश्न को बहुत गहराई में जाकर पकड़ा है।
Book Details
-
ISBN9788180311420
-
Pages144
-
Avg Reading Time5 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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