Ji Ji Ji
(0)
Author:
Pandey Bechan Sharma 'Ugra'Publisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
40
₹ 32 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
मुरली : मुरली ठाकुर मेरा नाम है और जीजीजी मेरी बड़ी बहन हैं, जिन्हें मेरे जनम के पहले ‘प्रभा’ कहकर पुकारा करते...अकसर मैं जीजीजी को समझाता हूँ कि वे माँ की अनुचित बातों पर विद्रोह क्यों नहीं करतीं...!</p> <p>मंगला प्रसाद : अपनी प्राण से प्यारी, पुत्र की तरह पाली हुई पुत्री को मैट्रिक तक पढ़ाकर इंतेहान में नहीं बैठाया। एक-एक कर सारी मानवी स्वतंत्रताएँ उसकी अपहरण कर ली गईं।...स्त्री का प्रेम पाने के लिए उसके चुनिन्दे पुरुष को अपनी लड़की तक दे देना। स्त्री भी वह जो कन्या की माँ नहीं।</p> <p>जीजीजी : एक औरत की हैसियत से मैं सदा हताश और निराश हुई और सिवा पुरुषों की रुचि रखने के दूसरी कोई गति सचमुच मुझे स्त्रियों की नज़र नहीं आई। प्रायः सारे संसार का इतिहास स्त्रियों पर पुरुषों के अत्याचार से भरा है।</p> <p>नरकू : मगर उक्त सारी बातें मनगढ़ंत थीं, चित्र की युवती का मुँह तो जीजीजी की तरह मैंने बनाया था—नाक उनकी ज़रा सुधार कर। कोई दस हज़ार बार असफल स्केच करने के बाद जीजीजी का चित्र अब मेरी उँगलियों में उतर आया है।
Read moreAbout the Book
मुरली : मुरली ठाकुर मेरा नाम है और जीजीजी मेरी बड़ी बहन हैं, जिन्हें मेरे जनम के पहले ‘प्रभा’ कहकर पुकारा करते...अकसर मैं जीजीजी को समझाता हूँ कि वे माँ की अनुचित बातों पर विद्रोह क्यों नहीं करतीं...!</p>
<p>मंगला प्रसाद : अपनी प्राण से प्यारी, पुत्र की तरह पाली हुई पुत्री को मैट्रिक तक पढ़ाकर इंतेहान में नहीं बैठाया। एक-एक कर सारी मानवी स्वतंत्रताएँ उसकी अपहरण कर ली गईं।...स्त्री का प्रेम पाने के लिए उसके चुनिन्दे पुरुष को अपनी लड़की तक दे देना। स्त्री भी वह जो कन्या की माँ नहीं।</p>
<p>जीजीजी : एक औरत की हैसियत से मैं सदा हताश और निराश हुई और सिवा पुरुषों की रुचि रखने के दूसरी कोई गति सचमुच मुझे स्त्रियों की नज़र नहीं आई। प्रायः सारे संसार का इतिहास स्त्रियों पर पुरुषों के अत्याचार से भरा है।</p>
<p>नरकू : मगर उक्त सारी बातें मनगढ़ंत थीं, चित्र की युवती का मुँह तो जीजीजी की तरह मैंने बनाया था—नाक उनकी ज़रा सुधार कर। कोई दस हज़ार बार असफल स्केच करने के बाद जीजीजी का चित्र अब मेरी उँगलियों में उतर आया है।
Book Details
-
ISBN9788171194490
-
Pages119
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Amrit Sanchaya
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

- Description: आदिवासी जीवन की प्रामाणिक जानकार के नाते ख्यात लेखिका महाश्वेता देवी ने इतिहास को भी अपने लेखन का विषय बनाया है। पहले उपन्यास ‘झाँसी की रानी’, ‘जली थी अग्निशिखा’ से लेकर प्रस्तुत उपन्यास ‘अमृत संचय’ तक इस बात के गवाह हैं। यह उपन्यास सन् 1857 से थोड़ा पहले शुरू होता है जब सांगठनिक दृष्टि से देश कमज़ोर था। सभी अपने-आपमें मगन, अलग-अलग समूहों, खेमों और राज्यों में विभक्त। 1857 के विद्रोह में बंगाल ने किसी भी प्रकार की हिस्सेदारी नहीं निभाई थी। उधर संथाल में अंग्रेज़ी सत्ता के विरुद्ध बग़ावत, नील-कर को लेकर असन्तोष और अपेक्षित वेतन न मिलने के कारण सेना भी असन्तुष्ट थी। उपन्यास इसी संधिस्थल से आरम्भ होता है और तैंतीस वर्षों बाद उस बिन्दु पर ख़त्म होता है, जहाँ भारतीय जनमानस के चेहरे और विन्यास में बदलाव नज़र आने लगा था। गहन खोज, अध्ययन और परिश्रम का प्रतिफल यह उपन्यास तत्कालीन समय की राजनीति, इतिहास, आमजन के स्वभाव-चरित्र, रंग-ढंग, रिवाज-संस्कार को प्रामाणिक तौर पर हमारे सामने लाता है। हालाँकि देशी-विदेशी क़रीब सौ चरित्रों को समेटना मुश्किल काम है, पर महाश्वेता देवी ने अपनी विलक्षण बुद्धि और शैली के बूते इसे सम्भव कर दिखाया है। लेखिका की पहचान रही उन तमाम ख़ूबियों को समेटे यह बांग्ला का प्रमुख उपन्यास माना जाता है जिसमें विपरीत स्थितियों में भी जीवन के प्रति ललक है और संघर्ष की आतुरता शेष है।
Nayan Rahasya
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

-
Description:
रहस्य-रोमांच के बेजोड़ लेखक और प्रख्यात फ़िल्मकार सत्यजित राय द्वारा रचित जासूस फेलूदा का एक अत्यन्त रोचक कारनामा है—‘नयन रहस्य’।
अपनी पहचान कायम करने में जुटे एक युवा जादूगर का आमंत्रण पाकर फेलूदा और उनके साथी उसका शो देखने जाते हैं। वहाँ उन्हें पता चलता है उस युवा जादूगर की असाधारण सम्मोहन शक्ति और एक ऐसे बालक ज्योतिष्क का जिसके पास किसी भी व्यक्ति पर सिर्फ एक नजर डालकर उसके बारे में सब कुछ बता देने की अलौकिक क्षमता है। ज्योतिष्क का जादू देखने से उपजा रोमांच ज्यादा देर तक नहीं टिकता और फेलूदा के सामने एक बेहद पेचीदा मामला आ जाता है।
मामला है ज्योतिष्क की सुरक्षा का। उसकी आश्चर्यजनक क्षमता में अपार कमाई की सम्भावना देख रहे कई लोग उसके पीछे पड़ जाते हैं। नतीजन ज्योतिष्क खतरे में पड़ जाता है।
फिर तो उसे बचाने के चक्कर में तू डाल-डाल, मैं पात-पात का ऐसा खेल शुरू होता है कि उपन्यास के आखिरी पन्ने तक पहुँचने से पहले आप अनुमान भी नहीं लगा सकते कि ज्योतिष्क का असल दुश्मन कौन है?
Ashawari
- Author Name:
Arun Bagchee
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Meera Aur Mahatma
- Author Name:
Sudhir Kakkar
- Book Type:

- Description: सन् 1925; भारत का स्वतंत्रता संग्राम बिखरी हुई हालत में था, नेताओं के बीच मतभेद पैदा हो रहे थे, और पूरे देश में साम्प्रदायिक वैमनस्य की घटनाएँ हो रही थीं। इस दौरान, सक्रिय राजनीति से अलग-थलग बापू गांधी साबरमती आश्रम में अपने जीवन की सबसे महत्त्वपूर्ण गतिविधि में संलग्न थे। वे आत्मानुशासन, सहनशीलता और सादगी के उच्चतर मूल्यों को समर्पित एक समुदाय की रचना में व्यस्त थे। बापू की इसी दुनिया में पदार्पण हुआ एक ब्रितानी एडमिरल की बेटी मेडलिन स्लेड का जो बाद में मीरा के नाम से जानी गईं। गांधी के लिए जहाँ वास्तविक आध्यात्मिकता का अर्थ था आत्मानुशासन और समाज के प्रति पूर्ण समर्पण, वहीं मीरा मानती थीं कि सत्य और सम्पूर्णता का रास्ता मानव रूप में साकार शाश्वत आत्मा के प्रति समर्पण में है, और यह आत्मा उन्हें गांधी में दिखाई दी। इस प्रकार दो भिन्न आवेगों से परिचालित इन दो व्यक्तियों के मध्य एक असाधारण साहचर्य का सूत्रपात हुआ। विख्यात मनोविश्लेषक-लेखक सुधीर कक्कड़ ने बापू और मीरा के 1925 से लेकर 1930 तथा फिर 1940-42 तक के समय को इस उपन्यास का आधार बनाया है, जिस दौरान, लेखक के अनुसार वे दोनों ज़्यादा क़रीब थे। ऐतिहासिक तथ्यों की ईंटों और कल्पना के गारे से चिनी गई इस कथा की इमारत में लेखक ने बापू और मीरा के आत्मकथात्मक लेखों, पत्रों, डायरियों और अन्य समकालीनों के संस्मरणों का सहारा लिया है। राष्ट्रपिता को ज़्यादा पारदर्शी और सहज रूप में प्रस्तुत करती एक अनूठी कथाकृति।
Gokul Mathura Dwarka
- Author Name:
Raghuveer Chaudhary
- Book Type:

-
Description:
मूल गुजराती में समादृत इस कथात्रयी ‘गोकुल मथुरा द्वारिका’ के नायक हैं श्रीकृष्ण, जो कथा में आद्योपान्त यवनिका के पीछे तिरोहित रहते हैं, किन्तु पाठक पग-पग पर उनका सान्निध्य पाता चलता है—अदृश्य, अगोचर किन्तु अनुभूति में व्याप्त। फिर ऐसे श्रीकृष्ण का जीवन-चरित लिखते हुए लेखक ने गोकुल मथुरा द्वारिका जैसे स्थलवाचक नाम क्यों दिए? श्रीकृष्ण का जीवन तो समग्र भारतवर्ष के साथ सम्बद्ध है?
गोकुल मथुरा द्वारिका कहते ही क्या सम्पूर्ण कृष्ण हमारे मानसपटल पर नहीं आ उपस्थित होते?
गोकुल के लोकनायक कृष्ण!
मथुरा के युगपुरुष कृष्ण!
द्वारिका के योगेश्वर कृष्ण!
अपने-अपने में परिपूर्ण मगर एक दूसरे की सर्वथापूरक यह उपन्यास-त्रयी हिन्दी पाठकों को उस श्रीकृष्ण से परिचित करवाने का प्रयास है जो रसेश्वर से योगेश्वर बने हैं।
एक से बढ़कर एक चुनौतियों का सामना करनेवाला यह चरित्र प्रत्येक युग के लिए प्रेरणादायक है। वे समग्र रूप में पुरुषोत्तम हैं। आनन्द रूप में अनुभव-गम्य हैं।
‘अमृता’ उपन्यास के माध्यम से हिन्दी पाठक जगत के बीच सुख्यात और ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ विजेता रघुवीर चौधरी की यह उपन्यास-त्रयी इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि इसमें मिथक की गरिमा और कथात्मकता की रक्षा करते हुए आधुनिक जीवन और परिवेश की झलक भी पाठकों को स्पष्ट रूप में मिल जाती है।
Salaam Bombay Via Versova Dongri
- Author Name:
Sarang Upadhyay
- Book Type:

-
Description:
ग्यारह किस्सों के जरिए, प्रेम की शक्ति और विश्वास की डोर तक पहुँचने वाला यह उपन्यास ‘यूनिक’ है, मुम्बई के निम्न-मध्यवर्गीय जीवन का मिनिएचर बनाते हुए हिन्दी कथा-साहित्य में एक दुर्लभ और विरल पाठकीय अनुभव की सर्जना करता है, राघव और सायरा जैसे दो यादगार किरदारों के जरिए रंग और बदरंग के बीच भावनात्मकता का उदास उत्सव मनाता है और सपनों का ताना-बाना बुनता है। यह सब करते हुए सारंग उपाध्याय का उपन्यास ‘सलाम बॉम्बे व्हाया वर्सोवा डोंगरी’ मुम्बई की आत्मा को एक कड़क कथात्मक सलाम ठोंकता है, वह आत्मा जिसका नाम ‘जिजीविषा’ है। साहित्य की आत्मा का नाम भी दरअसल यही है।
—गीत चतुर्वेदी
Moolya Aadharit Shiksha
- Author Name:
Ramesh Pokhriyal 'Nishank'
- Book Type:

- Description: "वर्तमान में विद्यालयों में अनुशासनहीनता एवं हिंसक व्यवहार की घटनाएँ निरंतर बढ़ रही हैं। अतः अगर हम अपनी शिक्षा को मूल्य-आधारित और संस्कार-आधारित बना पाएँ तो हम इस प्रकार की सभी समस्याओं पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। शिक्षण के मानवतावादी पहलुओं पर जोर देते हुए भारत ने अपनी नई शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया है कि शिक्षा का तात्पर्य अध्यापकों, किताबों से प्राप्त जानकारी और सूचनाओं का संप्रेषण मात्र नहीं है। उन मूल्यों, योग्यताओं और प्रवृत्तियों को विकसित करना भी है, जो शांतिपूर्ण, न्यायोचित, समावेशी और टिकाऊ समाज के निर्माण के लिए विश्व समुदाय को एकत्र एवं प्रेरित कर विश्व-कल्याण में योगदान देने के लिए संकल्पबद्ध कर सकें। भारतीय ज्ञान-परंपरा में मूल्यपरक शिक्षा का बड़ा महत्त्व है। मूल्य-आधारित शिक्षा का अर्थ छात्रों को नैतिक मूल्यों, धैर्य, ईमानदारी, प्रेम, सद्भावना, दया, करुणा, मानवता, इत्यादि सार्वभौमिक मूल्यों को सिखाना है। मूल्य शिक्षा का संपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में निहित है। मूल्य-आधारित शिक्षा से न केवल मानवीय गुणों का विकास होगा, बल्कि हम अपनी नागरिकता के प्रति जिम्मेदारी को बेहतर ढंग से समझ पाएँगे। नैतिकता पर आधारित शिक्षा हो तो उसमें मूल्य अपने आप आ जाएँगे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी हम मानवतावादी मूल्यों का समावेश करने हेतु कटिबद्ध हैं, जिससे कि भविष्य का भारत एक सुखी, संपन्न व मानव मात्र के लिए कल्याणकारी जीवन की अवधारणा के लक्ष्यों को पूरा करने हेतु अग्रसर हो तथा संपूर्ण विश्व में शांति, प्रेम व भाईचारे की स्थापना हेतु हम ध्वजवाहक बन सकें। "
Kaale Kos
- Author Name:
Balwant Singh
- Book Type:

-
Description:
बलवन्त सिंह का रचनाकार न तो अतिरिक्त सामाजिकता से आक्रान्त रहता है और न ही कला और शिल्प के दबावों से आतंकित। अपनी सतत जागरूक और सचेत निगाह से वे अपने कथा-चरित्रों और कथा-भूमि के सबसे विश्वसनीय यथार्थ तक पहुँचने का प्रयास करते हैं। शिल्प और संवेदना का द्वन्द्व उनकी रचनाओं में प्रशंसनीय सन्तुलन के साथ प्रकट होता है।
उनकी औपन्यासिक कृतियाँ अपने कलेवर में महा-काव्यात्मक गरिमा से परिपूर्ण होती हैं। दूसरी तरफ़ उनके पात्र भी अपने जीवन के चौखटे में अपनी भरपूर ऊर्जा के साथ प्रकट होते हैं। वे नुमाइशी और कृत्रिम नहीं होते, बल्कि जिन्दगी की अनिश्चितता और अननुमेयता से जूझते हुए, हाड़-मांस के साधारण, खुरदुरे लोग होते हैं जिनका वैशिष्ट्य एक ख़ास संलग्नता के साथ देखने पर ही दिखाई देता है। बलवन्त सिंह की रचनाएँ इस संलग्नता से बख़ूबी पगी हुई होती हैं।
‘काले कोस’ की पृष्ठभूमि में भी ऐसे ही लोगों की छवियाँ दिखाई देती हैं। पंजाब की धरती की ख़ूशबू में रसे-बसे और अपनी कमज़ोरियों-ख़ूबियों से जूझते ये लोग देर तक पाठक की स्मृति में अपनी जगह बनाए रखते हैं। यह कहानी पंजाब के बँटवारे से शुरू होकर फ़सादों में ख़त्म हो जाती है। लेकिन इस ख़त्म हो जाने के साथ ही पाठक के मन में जो कुछ छोड़ जाती है, वह एक ऐसी टीस है जो आज तक ख़त्म नहीं हो पाई है।
Muhar
- Author Name:
Chandan Pandey
- Book Type:

- Description: रोली घमंडी है, रोली अकडू है, रोली ज़िद्दी है... ऐसी तमाम तोहमतों के बीच रोली है कि नौकरी पाने, नौकरी की जगह तक पहुँच पाने और वहाँ से घर लौटने की जद्दोजेहद से रोज़ गुज़र रही है। यक़ीन कीजिए कि ये साधारण सी दिखने वाली बातें एक वर्किंग वूमन के लिये रोज़ लड़ी जाने वाली लड़ाइयाँ हैं। जेंडर, आयु और शहरी/ग्रामीण पृष्ठभूमि को केंद्र में रखकर किये जाने वाले कई सूक्ष्म और स्थूल भेदभाव हैं जिनका सामना रोली और उस जैसी तमाम कामकाजी स्त्रियों को रोज़ करना होता है। परिवार, समाज और रोज़गार के मुश्किल कुरुक्षेत्र में जूझती रोली को केंद्र में रखकर लिखी गई ये कहानियाँ हर कामकाजी स्त्री के जीवन, स्वप्न और संघर्ष का सूक्ष्म और मार्मिक दस्तावेज़ बन पड़ी हैं।
Basharat Manzil
- Author Name:
Manzoor Ehtesham
- Book Type:

-
Description:
...एक उपन्यास जो लगभग दिल्ली ही के बारे में है—पुरानी यानी सन् 47 से पहले की दिल्ली।
मेरी कहानी 15 अगस्त, 1947 तक घिसटती नहीं जाती, उससे पहले ही ख़त्म हो जाती है। हाँ, यक़ीनन जो कुछ भी उसमें होना होता है, वह इस तारीख़ से पहले ही हो-हुआ चुकता है।
एक व्यक्ति और उसके परिवार की कहानी जो एक ज़माने में हर जगह था। शायरी से लेकर सियासत यानी तुम्हारे शब्दों में हक़ीक़त से लेकर फ़साने तक, हर जगह। लेकिन आज जिसका उल्लेख न तो साहित्य में है, न इतिहास में। संजीदा सोज़ और बशारत मंज़िल की कहानी। बिल्लो और बिब्बो की कहानी। ग़ज़ल की कहानी। इन तीनों बहनों की माँ, अमीना बेगम की कहानी। सोज़ की दूसरी पत्नी, जो पहले तवायफ़ थी और उसके बेटे की कहानी। सारी कहानियों की जो एक कहानी होती है, वह कहानी। मेरी और तुम्हारी कहानी भी उससे बहुत हटकर या अलग नहीं हो सकती। न है।
चावड़ी बाज़ार? —मैंने कहना शुरू किया था—चलो, यहाँ से अन्दाज़न उलटे हाथ को मुड़कर क़ाज़ी के हौज़ से होते हुए सिरकीवालों से गुज़रकर लाल कुएँ तक पहुँचो। उसके आगे बड़ियों का कटरा हुआ करता था। वहाँ से आगे चलकर नए-बाँस आता था। वह सीधा रास्ता खारी बावली को निकल गया था। नुक्कड़ से ज़रा इधर ही दाएँ हाथ को एक गली मुड़ती थी। वह बताशोंवाली गली थी। एक ज़माने में वहाँ बताशे बनते आँखों से देखे जा सकते थे। बाद में वहाँ अचार-चटनी वालों का बड़ा मार्केट बन गया था। मार्केट के बीच से एक गली सीधे हाथ को मुड़ती थी। थोड़ी दूर जाकर बाईं तरफ़ एक पतली-सी गली उसमें से कट गई थी। इस गली में दूसरा मकान बशारत मंज़िल था : पुरानी तर्ज़ की लेकिन नई-जैसी एक छोटी हवेलीनुमा इमारत। एक ज़माने में वह मकान अपने-आप में एक पता हुआ करता था मगर फिर वीरान होता गया। कुछ लोग उसे आसेबज़दा समझने लगे, दूसरे मनहूस। आज तो यक़ीन के साथ यह भी नहीं कह सकते कि वह अपनी जगह मौजूद है या नहीं।
Mahabhishag
- Author Name:
Bhagwan Singh
- Book Type:

-
Description:
‘महाभिषग’ शीर्षक से ही स्पष्ट है कि यह गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित उपन्यास है न कि भगवान बुद्ध के। बुद्ध को भगवान बनानेवाले उस महान उद्देश्य से ही विचलित हो गए थे, जिसे लेकर बुद्ध ने अपना महान सामाजिक प्रयोग किया था और यह सन्देश दिया था कि जाति या जन्म के कारण कोई किसी अन्य से श्रेष्ठ नहीं है और कोई भी व्यक्ति यदि संकल्प कर ले और जीवन–मरण का प्रश्न बनाकर इस बात पर जुट जाए तो वह भी बुद्ध हो सकता है।
‘महाभिषग’ इस क्रान्तिकारी द्रष्टा के ऊपर पड़े देववादी खोल को उतारकर उनके मानवीय चरित्र को ही सामने नहीं लाता, यह देववाद के महान गायक अश्वघोष को भी एक पात्र बनाकर सिर के बल खड़ा करने का और देववाद की सीमाओं को उजागर करने का प्रयत्न करता है। इतिहास की मार्मिक व्याख्या वर्तमान पर कितनी सार्थक टिप्पणी बन सकती है, इस दृष्टि से भी यह एक नया प्रयोग है।
Sudoor Jharne Ke Jal Mein
- Author Name:
Sunil Gangopadhyay
- Book Type:

-
Description:
‘शैशव के क़रीब बीस-पच्चीस वर्ष बाद मैं रोया था। निर्लज्ज की तरह रो रहा था। मुझे हिचकियाँ आने लगीं।...मैंने खिड़की से दुबारा झाँकने की कोशिश की। ...बाहर सिर्फ़ मेघ ही मेघ। मैं गुम होता जा रहा हूँ। निचाट अकेला!...मार्गरेट, मैं हूँ।...एक बार फिर कहो, हमारा हर पल बेहद आनन्द-भरा था।’
अपने आदि और अन्त से बिलकुल बेख़बर, बेपरवाह जीवन-यात्रा के असीम विस्तार में निर्मल जल की झील जैसा चमकता एक बिन्दु, प्रेम का एक अपूर्व अनुभव। नील लोहित जब आकाश में उड़ान भरता है, तो उसकी स्मृति बस यही कुछ अपने साथ ले जाती है। मार्गरेट हमेशा-हमेशा उसके साथ नहीं रह सकती, भले ही उसे उसके ईश्वर से अनुमति भी मिल गई हो। ‘अपने माँ, डैडी, यहाँ तक कि गॉड से भी ज़्यादा, मैं तुम्हें प्यार करती हूँ...मुझे ले लो...’ वह कहती है। लेकिन नील के अन्तस की बेचैनी उसे उस झील के तट पर डेरा डालने की इजाज़त नहीं देती।
बांग्ला के विख्यात कथाकार सुनील गंगोपाध्याय की क़लम से उतरी यह प्रेमकथा हमें अपने साथ अमेरिका के एक ख़ूबसूरत अंचल की बड़ी आत्मीय सैर कराती हुई मनुष्य की इच्छाओं, लाचारियों, आवेगों और निराशाओं से भी परिचित कराती है; और प्रेम के प्रति एक गहन आस्था भी जगाती है।
Ration Card Ka Dukh
- Author Name:
Jugnu Shardey
- Book Type:

- Description: "एक युग से आँसुओं, नारों, माँगों और फोटू कमेटी की बरसात हो रही थी। कल गरमी के बावजूद संसद् के एयरकंडीशन से कलेजे में ठंडक लिये वैसे ही मुसकराई देश की संसदीय महिलाएँ, जैसे कभी मुसकराती थीं टूथपेस्ट बेचनेवाली महिलाएँ। आखिर पेश हो गया राज्यसभा में संविधान संशोधन 108वाँ विधेयक। इसमें संसद् और विधानसभा में आबादी के 50 प्रतिशत को 33 प्रतिशत रिजर्वेशन मिल सकेगा। चाणक्य कहते हैं, कहते हैं या नहीं पता नहीं, क्योंकि स्तंभकार ने चाणक्य का अर्थशास्त्र नहीं पढ़ा है, लेकिन छोटी बात को बड़ी बनाने के लिए बड़े लोगों का नाम लेना चाहिए। इसीलिए चाणक्य कहते हैं कि कुछ भी लिखने के पहले सोचसमझ लेना चाहिए। सोचसमझ के लेखन का मतलब होता है कि लिखने के पहले सोचा ही न जाए। जन्म बीत जाए सोचतेसोचते। लेखन तो बस साप्ताहिक मुद्रास्फीति लेखन है कि बस प्रतिशत बढ़ाते या घटाते जाना लिखना भर होता है। फिर भी इस स्तंभकार ने बाकायदा खोजबीन की। ब्रेकिंगन्यूज के बकवासी खतरों और टीवीयाना बहसों की सिरदर्द के बावजूद खबरिया चैनलों को देख गया। रंगीन विज्ञापनों से भरे अगरमगरलेकिनपरंतु वाले प्रिंट मीडिया को पढ़कर चश्मे का नंबर बढ़ गया। इंटरनेटीय सर्च इंजनों को झाँक गया, जहाँ एक विषय पर लाखों भड़ासी जानकारियाँ होती हैं। तब जाकर समझ में आया कि शोधअनुसंधान के लिए विषय का होना जरूरी होता है। अब तक सारी खोजबीन बिना विषय के हो रही थी। विषय भी तय कर लिया गया—देश और गांधीजी के तीन बंदर का व्यावहारिक संबंध।"
Jhansi Ki Rani
- Author Name:
Vrindavan Lal Verma
- Book Type:

- Description: "रानी ने घोड़े की लगाम अपने दाँतों में थामी और दोनों हाथों से तलवार चलाकर अपना मार्ग बनाना आरंभ कर दिया। रानी की दुहत्थु तलवारें आगे का मार्ग साफ करती चली जा रही थीं। रानी के साथ केवल चार सरदार और उनकी तलवारें रह गईं। रानी ने देशमुख की सहायता के लिए सुंदर को इशारा किया और स्वयं संगीनबरदारों को दोनों हाथों की तलवारों से खटाखट साफ करके आगे बढ़ने लगीं। एक संगीनबरदार की हूल रानी के सीने के नीचे पड़ी। उन्होंने उसी समय तलवार से उस संगीनबनदार को खतम किया। हूल करारी थी, परंतु आँतें बच गईं। रानी ने सोचा, स्वराज्य की नींव बनने जा रही हूँ। रानी के खून बह निकला। —इसी उपन्यास से अदम्य साहस, शौर्य और देशभक्ति की प्रतिमूर्ति झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई पर केंद्रित इस उपन्यास में बाबू वृंदावनलाल वर्मा ने तत्कालीन राजनीतिक-सामाजिक परिवेश का ऐसा सजीव चित्रण किया है मानो पूरा घटनाक्रम हमारी आँखों के सामने हो रहा हो। झाँसी की रानी का नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। रानी स्वराज्य के लिए लड़ीं, स्वराज्य के लिए मरीं और स्वराज्य की नींव का पत्थर बनीं। अद्भुत, प्रेरणाप्रद, पठनीय ऐतिहासिक औपन्यासिक कृति!
Santaronwali Ladki
- Author Name:
Jostein Gaarder
- Book Type:

- Description: महान बाल-साहित्य ‘सोफीज़ वर्ल्ड’ के रचनाकार यॉस्टेन गेर्डर की यह कृति किशोर वय के पाठकों को ध्यान में रखकर संवेदनशील भाषा में एक परिकथा की तरह रची गई है। ग्योर्ग रोएड को सन्तरोंवाली लड़की की कहानी उसकी लाल रंग की बच्चागाड़ी में मिलती है जिसे उसके पिता ने अपनी मृत्यु से कुछ ही दिन पूर्व उसी के लिए लिखा था। दरअसल यह प्रेम से लिखी गई एक गहन प्रेमकथा है जो संवेदना, धैर्य, उत्कंठा के साथ-साथ नैतिक और प्राकृतिक सौन्दर्य के वैभव से बुनी पहेली जैसी लगती है। यह सहज भाषा में लिखी गई एक असाधारण कथा है जो पाठकों को एक रचनात्मक आस्वाद प्रदान करती है। हिन्दीभाषी पाठकों को यह पुस्तक न केवल पठनीय लगेगी, बल्कि वे इसे वर्षों भुला नहीं पाएँगे।
Apne Log
- Author Name:
Suchitra Bhattacharya
- Book Type:

-
Description:
नितान्त अपनी ज़रूरत, अपने सुख, अपनी महत्त्वाकांक्षा, समृद्धि-लालसा की ख़ुदग़र्ज़ी के तक़ाज़े पर, इनसान ‘समूह’ बनाता है; समाज गढ़ता है; परिवार रचता है और अनगिनत रिश्तों के जाल में, अपने को उलझाए रखता है। लेकिन हैरत है, फिर भी हर इनसान निपट अकेला है, ज़िन्दगी-भर अकेला ही जीता है। ‘अपने लोग’ उपन्यास इसी निःसंग निर्जनता की तलाश है।
इस विशाल कथा की रूपरेखा समसामयिक है, पृष्ठभूमि समकालीन समाज है। माँ और बेटी के माध्यम से दो पीढ़ियों का इतिहास है और इनके इर्द-गिर्द अनगिनत रंग-बिरंगे चरित्र हैं; जिनमें कामयाब इनसान की गोपन नाकामी की स्वीकृति है; नाकामयाब इनसान का कामयाब न हो पाने का दर्द है, वहीं भावी पीढ़ी आशा-आकांक्षाओं, वर्तमान समाज की लाचारी और पापबोध के इर्द-गिर्द घूमती है। निरर्थक विद्रोह की पीड़ा और दो-दो पीढ़ियों के टकराव की दास्तान है। इसी के समानान्तर, पुरानी हवेली के खँडहरों पर नई इमारत के निर्माण की उपकथा है। नई इमारत, मानो समय के विवेक, मूल्यबोध और अनुशासन की मिसाल है। इन्हीं सबके माध्यम से लेखिका ने निःसंगता का उत्स ढूँढ़ने का प्रयास किया है।
इस वृहद उपन्यास में अनगिनत चरित्रों का जुलूस है—कोई बूढ़ा, कोई अधेड़, कोई किशोर, कोई किशोरी; जवान औरत-मर्द या फिर निरा शिशु। अलग-अलग पीढ़ियों से सम्बद्ध होने के बावजूद ये सब अभिन्न और एकमेक हैं। इन सबके अन्तस में दुःख और अवसाद चहलक़दमी कर रहा है। उपन्यास का नाम भी विराट व्यंजना का प्रतीक है। उपन्यास के सभी पात्र हमारे बेहद जाने-पहचाने, नितान्त क़रीबी लोग हैं, लेकिन नितान्त अपने होने के बावजूद, क्या सच ही कोई, किसी के क़रीब है ? क्या सचमुच नितान्त सगा, बिलकुल अपना है ? इन तमाम जीवनमुखी सवालों का जवाब है—‘अपने लोग’।
Bhartrihari : Kaya Ke Van Mein
- Author Name:
Mahesh Katare
- Book Type:

-
Description:
राजा भर्तृहरि, प्रेमी भर्तृहरि, कवि भर्तृहरि, वैयाकरण भर्तृहरि और योगी भर्तृहरि। उनके आयाम, समय और देश का अपार विस्तार। भर्तृहरि के जीवन में एक ओर प्रेम और कामिनियों के आकर्षण हैं तो दूसरी ओर वैराग्य का शान्ति-संघर्ष। वह संसार से बार-बार भागते हैं, बार-बार लौटते हैं। इसी के साथ उनके समय की सामाजिक, धार्मिक उथल-पुथल भी जुड़ी है।
भर्तृहरि का द्वन्द्व सीधे गृहस्थ व वैराग्य का न होकर तिर्यक है। विशेष है। वह इसलिए कि वे कवि हैं, वैयाकरण भी। सुकवि अनेक होते हैं तथा विद्वान भी लेकिन भर्तृहरि जैसे सुकवि और विद्वान एक साथ बिरले ही होते हैं।
सुपरिचित कथाकार महेश कटारे का यह उपन्यास इन्हीं भर्तृहरि के जीवन पर केन्द्रित है। इस व्यक्तित्व को, जिसके साथ असंख्य किंवदन्तियाँ भी जुड़ी हैं, उपन्यास में समेटना आसान काम नहीं था, लेकिन लेखक ने अपनी सामर्थ्य-भर इस कथा को प्रामाणिक और विश्वसनीय बनाने का प्रयास किया है। भर्तृहरि के निज के अलावा उन्होंने इसमें तत्कालीन सामाजिक और धार्मिक परिस्थितियों का भी अन्वेषण किया है। उपन्यास के पाठ से गुज़रते हुए हम एक बार उसी समय में पहुँच जाते हैं।
भर्तृहरि के साथ दो बातें और जुड़ी हुई हैं—जादू और तंत्र-साधना। लेखक के शब्दों में, ‘मेरा चित्त अस्थिर था, कथा के प्रति आकर्षण बढ़ता और भय भी, कि ये तंत्र-मंत्र, जादू-टोने कैसे समेटे जाएँगे? भाषा भी बहुत बड़ी समस्या थी कि वह ऐसी हो जिसमें उस समय की ध्वनि हो।’
Justju-E-Nihan : Urf Runiyabas Ki Antarkatha
- Author Name:
Jitendra Bhatia
- Book Type:

-
Description:
‘जुस्तजू-ए-निहां उर्फ़ रुणियाबास की अन्तर्कथा’ यानी तलाश एक ऐसी छिपी हुई अन्दरूनी दुनिया की, जिसे पहचानकर उस पर उँगली रख पाना सचमुच बहुत मुश्किल है, लेकिन फिर भी जिसका कोई-न-कोई अंश हमें बार-बार अपने भीतर छटपटाता दिखाई दे जाता है। इसे हम अपने होने का दु:ख, उसका अकेलापन या अकेलेपन की समूची अव्यक्त तकलीफ़ को किसी मूर्त आस्था की बैसाखियों पर खड़ा कर सकने की भोली ललक, या ठहराव को तोड़ने की उद्दाम लालसा या एक बिखरती हुई सिनिकल सभ्यता की बदहवासी के बीच से दु:ख का प्रतिदान ढूँढ़ निकाल पाने की पागल, मर्मांतक ज़िद—कुछ भी कह सकते हैं...
...किसी बेग़ैरत और मखौल-भरी ज़िन्दगी से उकताया एक अनास्थावादी ‘खोजी’ पत्रकार जब अनायास ही राजस्थान के बियाबान इलाक़े में उपेक्षित खड़े एक नामालूम खँडहर और उस खँडहर के भीतर बरसों से ‘अदृश्यवास’ कर रहे अनदेखे ‘ओझल बाबा’ की किंवदन्ती से जा टकराता है तो उसे लगता है कि उस रहस्य के भीतर से वह कहीं अपनी उद्देश्यहीन ज़िन्दगी का खोया हुआ सिरा भी ढूँढ़ निकालेगा।...क्या सचमुच वहाँ किसी सिद्ध बाबा का वास था? क्या उनके भीतर भी वही गुमनाम, अपरिभाषित-सी बेचैनी मँडरा रही थी? चालीस वर्षों के असाध्य एकान्तवास के ज़रिए क्या वे भी उसकी तरह ही किसी नामालूम, बेग़ैरत ज़िन्दगी का तोड़ ढूँढ़ निकालने की ज़िद पर अड़े हुए थे? अगर अड़े हुए थे तो क्या आख़िरकार उन्हें वह मिल पाया? और अगर मिला, तो क्या था वह तोड़?
‘जुस्तजू-ए-निहां...’ अपने समय और सभ्यता के अवसाद और उसकी आस्थाहीनता का विकल्प ढूँढ़ निकालने का एक जुनून-भरा वैयक्तिक अभियान है, जिसमें विचारधाराओं, नसीहतों और सैद्धान्तिकताओं से अलग एक पारदर्शी ईमानदारी और तड़प साफ़ महसूस की जा सकती है। रहस्य, रोमांच, व्यंग्य, अनास्था और संवेदना के सम्मोहक ताने-बाने में छतों और दीवारों के बाहर, खुले आसमान तले रचा गया हिन्दी गद्य के सशक्त हस्ताक्षर जितेन्द्र भाटिया का यह विलक्षण उपन्यास न सिर्फ़ कई स्तरों पर हमारी संवेदनाओं को छूता है, बल्कि अपनी पुरानी संवादपरकता पर से खोया हुआ विश्वास हमें लौटाने का साहस भी दिखाता है।
Parti Parikatha
- Author Name:
Phanishwarnath Renu
- Book Type:

- Description: इस उपन्यास को पढ़ते हुए प्रत्येक संवेदनशील पाठक स्पन्दनीय ज़िन्दगी के सप्राण पन्नों को उलटता हुआ-सा अनुभव करेगा। सहृदयता के सहज-संचित कोष के रस से सराबोर प्रत्येक शब्द, हर गीत की आधी-पूरी कड़ी ने मानव-मन के अन्तरतम को प्रत्यक्ष और सजीव कर दिया है। दो पीढ़ियों के जीवन के विस्तृत चित्रपट पर अनगिनत महीन और लयपूर्ण रेखाओं की सहायता से चतुर कथाशिल्पी ने एक अमित कथाचित्र का प्रणयन किया है। इस महाकाव्यात्मक उपन्यास को पढ़कर समाप्त करने तक पाठक अनेक चरित्रों, घटना-प्रसंगों, संवादों और वर्णन-शैली के चमत्कारों से इतना सामीप्य अनुभव करने लगेंगे कि उनसे बिछुड़ना एक बार उनके हृदय में अवश्य कसक पैदा करके रहेगा।
Rangbhoomi
- Author Name:
Premchand
- Book Type:

- Description: अंधे भिखारी सूरदास के पास एक ज़मीन है, जो पूरे गाँव के पशुओं की चारागाह है। जॉन सेवक उसपर सिगार का कारखाना लगाना चाहता है। अकेला सूरदास गाँव के लिए उस ज़मीन को बचाने की लड़ाई लड़ता है। इस लड़ाई में वह राजा, पूंजीपति, गाँव के षड्यंत्रकारियों और शहरी न्यायतंत्र से लड़ता हुआ शहीद होता है। यह संक्षिप्त कथा 'रंगभूमि' के जटिल और विस्तृत वितान का संकेत मात्र है। इसके साथ-साथ निर्मम अंग्रेजी सत्ता - व्यवस्था है और समाज में बदलाव की उठती गिरती लहरें है, और मनुष्यों के प्रतिक्षण बदलते हृदय। नैतिक और अनैतिक की बहसों के बीच प्रेमचंद की मँजी हुई लेखनी सब कुछ दर्ज करती चलती है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book