Ji Ji Ji
(0)
Author:
Pandey Bechan Sharma 'Ugra'Publisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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मुरली : मुरली ठाकुर मेरा नाम है और जीजीजी मेरी बड़ी बहन हैं, जिन्हें मेरे जनम के पहले ‘प्रभा’ कहकर पुकारा करते...अकसर मैं जीजीजी को समझाता हूँ कि वे माँ की अनुचित बातों पर विद्रोह क्यों नहीं करतीं...!</p> <p>मंगला प्रसाद : अपनी प्राण से प्यारी, पुत्र की तरह पाली हुई पुत्री को मैट्रिक तक पढ़ाकर इंतेहान में नहीं बैठाया। एक-एक कर सारी मानवी स्वतंत्रताएँ उसकी अपहरण कर ली गईं।...स्त्री का प्रेम पाने के लिए उसके चुनिन्दे पुरुष को अपनी लड़की तक दे देना। स्त्री भी वह जो कन्या की माँ नहीं।</p> <p>जीजीजी : एक औरत की हैसियत से मैं सदा हताश और निराश हुई और सिवा पुरुषों की रुचि रखने के दूसरी कोई गति सचमुच मुझे स्त्रियों की नज़र नहीं आई। प्रायः सारे संसार का इतिहास स्त्रियों पर पुरुषों के अत्याचार से भरा है।</p> <p>नरकू : मगर उक्त सारी बातें मनगढ़ंत थीं, चित्र की युवती का मुँह तो जीजीजी की तरह मैंने बनाया था—नाक उनकी ज़रा सुधार कर। कोई दस हज़ार बार असफल स्केच करने के बाद जीजीजी का चित्र अब मेरी उँगलियों में उतर आया है।
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मुरली : मुरली ठाकुर मेरा नाम है और जीजीजी मेरी बड़ी बहन हैं, जिन्हें मेरे जनम के पहले ‘प्रभा’ कहकर पुकारा करते...अकसर मैं जीजीजी को समझाता हूँ कि वे माँ की अनुचित बातों पर विद्रोह क्यों नहीं करतीं...!</p>
<p>मंगला प्रसाद : अपनी प्राण से प्यारी, पुत्र की तरह पाली हुई पुत्री को मैट्रिक तक पढ़ाकर इंतेहान में नहीं बैठाया। एक-एक कर सारी मानवी स्वतंत्रताएँ उसकी अपहरण कर ली गईं।...स्त्री का प्रेम पाने के लिए उसके चुनिन्दे पुरुष को अपनी लड़की तक दे देना। स्त्री भी वह जो कन्या की माँ नहीं।</p>
<p>जीजीजी : एक औरत की हैसियत से मैं सदा हताश और निराश हुई और सिवा पुरुषों की रुचि रखने के दूसरी कोई गति सचमुच मुझे स्त्रियों की नज़र नहीं आई। प्रायः सारे संसार का इतिहास स्त्रियों पर पुरुषों के अत्याचार से भरा है।</p>
<p>नरकू : मगर उक्त सारी बातें मनगढ़ंत थीं, चित्र की युवती का मुँह तो जीजीजी की तरह मैंने बनाया था—नाक उनकी ज़रा सुधार कर। कोई दस हज़ार बार असफल स्केच करने के बाद जीजीजी का चित्र अब मेरी उँगलियों में उतर आया है।
Book Details
-
ISBN9788171194490
-
Pages119
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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एक कम्पन, एक हरकत-सी हुई तुम्हारे जिस्म में—जैसे मेरी बात का जवाब दिया हो।
“रूमानी शायर जिस्म पर भी जिस्म से लिखता है,’’ मैंने कहा।
“आप जिस्मानी शायर हैं!”‘जिस्म जिस्म के लोग’ बदलते हुए जिस्मों की आत्मकथा है। ‘जिस्म जिस्म के लोग’ में—और हर जिस्म में—बदलते वक़्त और बदलते ताल्लुक़ात का रिकॉर्ड दर्ज है।
“इतने वक़्त के बाद...,” तुमने मुझसे या शायद जिस्म ने जिस्म से कहा।
“कितने वक़्त के बाद?”
“जिस्म की लकीरों से वक़्त लिखा हुआ है।”
“दोनों जिस्मों पर वक़्त के दस्तख़त हैं,” मैंने कहा।
जिस्म पर वक़्त के दस्तख़त को मैंने उँगलियों से छुआ तो तुमने याद दिलाया—
“सूरज के उगने, न सूरज के ढलने से...
“वक़्त बदलता है जिस्मों के बदलने से।’”
दुनिया का हर इंसान अपना—या अपना-सा—जिस्म लिए घूम रहा है। उन्हीं जिस्मों को समझने, उन पर—या उनसे—लिखने और ‘जिस्म-वर्षों के गुज़रने की दास्तान है ‘जिस्म जिस्म के लोग’।
“बहुत जिस्म-वर्ष गुज़र गए...जिस्म जिस्म घूमते रहे!” मैंने कहा।
“तो दुनिया घूमकर इस जिस्म के पास क्यूँ आए?”
“जिस्मों जिस्मों होता आया”,
वक़्त के दस्तख़त पर मेरे हाथ रुक गए,
“अब ये जिस्म समझ में आया।”
Umraojan Adaa
- Author Name:
Mirza Haadi 'Ruswa'
- Book Type:

- Description:
उमराव जान ‘अदा’ उर्दू के आरम्भिक उपन्यासों में अहम स्थान रखता है। वस्तुतः यह आत्मकथात्मक उपन्यास है जिसे मिर्ज़ा हादी ‘रुस्वा’ ने क़लमबन्द किया है। शायर होने के नाते लेखक तवायफ़-शायर उमराव जान ‘अदा’ को काफ़ी क़रीब से जनता था। उमराव ने अपने संस्मरण स्वयं मिर्ज़ा को सुनाए थे।
फ़ैज़ाबाद की बच्ची ‘अमीरन’ के लखनऊ में तवायफ़ उमराव जान से शायरा ‘अदा’ बनने तक के सफ़र को समेटती हुई यह कथा उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध की विडम्बनाओं, विसंगतियों तथा अंग्रेज़ी दौर की तबाहियों का भी ख़ाक़ा खींचती है। अपने रूप-सौन्दर्य, मधुर कंठ, नृत्य-कला, नफ़ासत तथा अदबी तौर-तरीक़ों के कारण उमराव जान अमीरों-रईसों में ससम्मान लोकप्रिय रही। बचपन में ही बेघर हो जाने की वजह से ताउम्र वह मोहब्बत की तलाश में भटकती रही। उसने वे सारी त्रासदियाँ भोगीं जो एक संवेदनशील व्यक्ति के दरपेश होती हैं।
उपन्यास में भाषा का इस्तेमाल पत्र और परिस्थिति के अनुकूल है जो मार्मिक है और प्रभावशाली भी। उर्दू के अवधी लहजे की मिठास इसकी सबसे बड़ी ख़ासियत है। अनुवादक गिरीश माथुर ने मूल भाषा की सजीवता बरकरार रखी है।
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