Born At Midnight
Author:
Kedar VitekarPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 144.5
₹
170
Available
Born At Midnight is written by Kedar Vitekar, a very talented new born writer. This is his first book in the genre of romance. The book resolves around the love and how it can turn our life around. Kedar Vitekar, in his book reveals the story of small lad Aryan, how he falls in love with cute little bubbly girl Mukta in the age of playing video games and he then end up proposing her, but when she says no he starts to take some decisions which then land himself in blunders, one thing led to another and he finds himself in a mess. When he joins college he meets Riya and all of a sudden he feels like his life going upside down.
ISBN: 9789385137105
Pages: 116
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: -
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- Description: रचना-क्रम में ‘राजर्षि’ (1885) रवीन्द्रनाथ का दूसरा उपन्यास है। इसके कथानक का केन्द्रीय-सूत्र त्रिपुरा के इतिहास से ग्रहण किया गया है और रचनाकार ने अपनी कल्पना व नवीन उद्भावना शक्ति के सहारे उसे उपन्यास का रूप दिया है। सारी घटनाएँ गोविन्दमाणिक्य और रघुपति के चारों ओर घूमती हैं। ये दोनों पात्र वस्तुत: दो अलग प्रवृत्तियों के प्रतिनिधि हैं। नक्षत्रमाणिक्य, बिल्वन ठाकुर, जयसिंह, शाह शुजा, केदारेश्वर अपने-अपने ढंग से उपन्यास के कथानक में झरनों, नदियों, अन्तरीपों, गह्वरों के समान दृश्य-अदृश्य दशाओं का निर्माण करते हैं। मन को सबसे अधिक झकझोरते हैं हासि और ताता। दोनों बालक लक्ष्य बेधने में लेखक की सबसे अधिक सहायता करते हैं। ‘राजर्षि’ में रवीन्द्रनाथ का कवि रूप भी है तथा उनकी सांस्कृतिक व लोक-चेतना भी। अनुवाद में मूल कथ्य के साथ इनकी रक्षा की चेष्टा भी की गई है। आवश्यकतानुसार पाद-टिप्पणियाँ देकर बंगाली-समाज की परम्पराओं को सबके लिए सुलभ करने का प्रयास किया गया है। सामग्री की प्रामाणिकता के सन्दर्भ में यह अनुवाद पाठकों को निराश नहीं करेगा।
Hindu Khatik Jati
- Author Name:
Dr. Bizay Sonkar Shastri
- Book Type:

- Description: "हिंदू खटिक जाति की उत्पत्ति, उत्थान एवं पतन की ऐतिहासिक घटनाओं एवं विभिन्न कालखंडों का इस कृति में सजीव चित्रण है। वैदिक काल के बलि देने वाले खट्टिक (ब्राह्मण) त्रेता युग के पहले भगवान् श्रीराम के कुल के पूर्वज राजा खट्वाग (क्षत्रिय), द्वापर युग यानी महाभारत काल के पूर्व काशी अथवा मिथिलांचल में मांस का व्यवसाय करने वाले ऋषि व्याघ्र (वैश्य) और मुगलकाल में महाराष्ट्र के संत उपासराव एवं ब्रिटिश काल में राजस्थान के संत दुर्बल नाथ (दलित) को अपना पूर्वज मानने वाले हिंदू आज खटिक जाति के लगभग 1871 गोत्रों, उपनामों एवं उपजातियों के रूप में पहचाने जाते हैं। तैमूर लंग के लूटपाट एवं अत्याचार का मुहतोड़ प्रत्युत्तर कठोर राज्य के कठिकों (खटिक) ने दिया था। सिकंदर के विश्व विजय के स्वप्न को भी खटिक जाति ने ही चूर-चूर किया था। विदेशी मुगल, तुर्क एवं मुसलिम आक्रांता शासकों के हिंदू उत्पीड़न तथा हिंदुस्थान में हिंदुओं को हिंदू होने का यानी हिंदू टैक्स अथवा जजिया कर का खुलकर विरोध महान् हिंदू खटिक जाति ने किया था। विदेशी मुसलिम आक्रांताओं के हिंदुस्थान में प्रवेश से लेकर उनके शासन तक लगातार डटकर यदि किसी ने उनका विरोध किया तो खटिक जाति ने किया। अंग्रेजों के विरुद्ध 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के नायक मेरठ के ‘तितौरिया’ भी खटिक ही थे। सामाजिक समरसता दर्शन की दिशा में चिंतन के लिए बाध्य करती इस कृति से संपूर्ण हिंदू समाज को सकारात्मक चिंतन की एक दिशा प्राप्त होगी।
Ek Sachchi Jhoothi Gatha
- Author Name:
Alka Saraogi
- Book Type:

- Description: इक्कीसवीं सदी की यह गाथा एक स्त्री और एक पुरुष के बीच संवाद और आत्मालाप से बुनी गई है। यहाँ सिर्फ सोच की उलझनें और उनकी टकराहट ही नहीं, आत्मीयता की आहट भी है। किन्तु यह सम्बन्ध इंटरनेट की हवाई तरंगों के मार्फत है, जहाँ किसी का अनदेखा, अनजाना वजूद पूरी तरह एक धोखा भी हो सकता है। अलबत्ता यह धोखा भी है तो ऐसा, जो एक-दूसरे के जीवन को देखने के नज़रिए को उलट-पलट कर रख दे। यहाँ तक कि दो व्यक्ति एक-दूसरे के सपनों में भी आवाजाही कर लें। आज भी आतंकवाद के हर हादसे पर हैरत होती है कि किसी आस्था, तर्क या सिद्धान्त की गिर$फ्त में कोई ऐसे कैसे आ सकता है कि किसी की जान लेने या खुद अपने ही चिथड़े उड़ाने को राज़ी हो जाए। ‘एक सच्ची-झूठी गाथा’ उस मानस तक पहुँचने की कोशिश है, पर बिना फैसला या फतवा दिए, क्योंकि इस सदी की राजनीति में भी अन्याय वैसे ही व्याप्त है और उससे जूझने के तरीके हिंसा में ही समाधान खोजते हैं। यह गाथा पाठकों को एक साथ कई अनचीन्ही पगडंडियों की यात्रा कराएगी। कई बार उन्हें ऐसी जगहों पर ले जाएगी, जहाँ आगे जाने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा। लेकिन यह जोखिम उठाना खुद के अन्दर और बाहर ब्रह्मांड की गहरी पहचान कराएगा : एक ऐसी तृप्ति के बोध के साथ, जो सिर्फ दुस्साहस और नयी अनुभूतियों को जीने के संकल्प से ही मिल सकती है। प्रेम, मित्रता, स्त्रीत्व, बतरस, लेखकी और सत्य के नये परिप्रेक्ष्य इस अनात्मकथा में खुलते रहेंगे और फिर धुँधले होकर लुकते-छिपते रहेंगे।
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