Pahala Padav
Author:
Shrilal ShuklaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 636
₹
795
Available
‘राग दरबारी’ जैसे कालजयी उपन्यास के रचयिता श्रीलाल शुक्ल हिन्दी के वरिष्ठ और विशिष्ट कथाकार हैं। उनकी क़लम जिस निस्संग व्यंग्यात्मकता से समकालीन सामाजिक यथार्थ को परत-दर-परत उघाड़ती रही है, ‘पहला पड़ाव’ उसे और अधिक ऊँचाई सौंपता है।</p>
<p>श्रीलाल शुक्ल ने अपने इस उपन्यास को राज-मज़दूरों, मिस्त्रियों, ठेकेदारों, इंजीनियरों और शिक्षित बेरोज़गारों के जीवन पर केन्द्रित किया है और उन्हें एक सूत्र में पिरोए रखने के लिए एक दिलचस्प कथाफलक की रचना की है। सन्तोषकुमार उर्फ़ सत्ते परमात्मा जी की बनती हुई चौथी बिल्डिंग की मुंशीगीरी करते हुए न सिर्फ़ अपनी डेली-पैसिंजरी, एक औसत गाँव-देहात और ‘चल-चल रे नौजवान’ टाइप ऊँचे सम्बोधनों की शिकार बेरोज़गार ज़िन्दगी की बखिया उधेड़ता है, बल्कि वही हमें जसोदा उर्फ़ ‘मेमसाहब’ जैसे जीवन्त नारी चरित्र से भी परिचित कराता है। इसके अलावा उपन्यास के प्रायः सभी प्रमुख पात्रों को लेखक ने अपनी गहरी सहानुभूति और मनोवैज्ञानिक सहजता प्रदान की है और उनके माध्यम से विभिन्न सामाजिक-आर्थिक अन्तर्विरोधों, उन्हें प्रभावित-परिचालित करती हुई शक्तियों और मनुष्य-स्वभाव की दुर्बलताओं को अत्यन्त कलात्मकता से उजागर किया है।</p>
<p>वस्तुतः श्रीलाल शुक्ल की यह कथाकृति बीसवीं शताब्दी के अन्तिम दशकों में ईंट-पत्थर होते जा रहे आदमी की त्रासदी को अत्यन्त मानवीय और यथार्थवादी फलक पर उकेरती है।
ISBN: 9788171785278
Pages: 244
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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विश्वप्रसिद्ध ट्रॉय-युद्ध के महान योद्धा ओडिसियस की घर वापसी का वृत्तान्त है—‘ओडिसी’। प्राचीन यूरोप के महान रचनाकार होमर की कथाकारिता का बेमिसाल नमूना है। यह ग्रन्थ जिसकी विशेषताओं की पुनरावृत्ति परवर्ती कथाकारों से सम्भव नहीं हो सकी।
इस ग्रन्थ ने सम्पूर्ण विश्व के कथा साहित्य को प्रभावित किया है। इसका रचनाफलक व्यापक है जिसमें मानवीय सम्बन्ध, क्रिया-कलाप और समाज के सभी पक्षों का समावेश है।
नित परिवर्तनशील विश्व के सुख-दु:ख और संघर्षों के चित्रण के माध्यम से ‘ओडिसी’ में होमर ने जीवन और जगत् के यथार्थ को उजागर करते हुए यह रेखांकित किया है कि साहस, उत्साह और जिज्ञासावृत्ति से ही मनुष्य सफलता के शिखर पर पहुँचता है।
होमर के रचना-कौशल ने दृश्य-जगत् की वास्तविकताओं को कुछ इस तरह सहेजा है कि यह ग्रन्थ साहित्य ही नहीं अपितु इतिहास, पुरातत्त्व, समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र और मनोविज्ञान के खोजी विद्वानों के आकर्षण की वस्तु बन गया है।
जटिल संरचना के बावजूद ‘ओडिसी’ का कथाप्रवाह पाठकों का औत्सुक्य बनाए रखता है। अपनी इन विशेषताओं के कारण ही ई.पू. 850 के आसपास जन्मे होमर की यह कृति आज भी प्रेरणादायी बनी हुई है।
Bahati Ganga
- Author Name:
Shivprasad Mishra 'Rudra'
- Book Type:

- Description: 'बहती गंगा' अपने ढंग की अनूठी रचना है। यह अकेली रचना इसके लेखक शिवप्रसाद मिश्र ‘रुद्र’ काशिकेय को अक्षय कीर्ति दे गई है। भिन्न-भिन्न शीर्षकों से सत्रह अध्यायों में विभक्त यह कृति आख्यान और किंवदंतियों का एक अद्भुत मिश्रण वाला उपन्यास है। अलग-अलग अध्याय अपने आप में पूर्ण एक कथा होने के साथ-साथ किसी चरित्र के माध्यम से विकसित होकर परवर्ती अध्याय की कथा से जुड़ते दिखाई पड़ते हैं। परम्परागत अर्थों में किसी केन्द्रीय चरित्र या कथानक की जगह सारे चरित्र और सभी आख्यान बनारस की भावभूमि, उसके इतिहास, भूगोल, उसकी संस्कृति और उत्थान-पतन की महागाथा बनते हैं। अध्यायों के शीर्षक ही नहीं, भाषा, मानवीय व्यवहार और वातावरण का चित्रण बेहद सटीक और मार्मिक है। सबसे बड़ी बात यह है कि रचनाकार यथार्थ और आदर्श, दंतकथा और इतिहास मानव-मन की दुर्बलताओं और उदात्तताओं को इस तरह मिलाता है कि उससे जो तस्वीर बनती है वह एक पूरे समाज, की खरी और सच्ची कहानी कह डालती है।
Ummid
- Author Name:
Shrikumaran Tampi
- Book Type:

- Description: श्रीकुमारन तम्पी के मूल मलयालम उपन्यास 'कुट्टनाटु' का परम विद्वान डॉ. रंजीत रविशैलम द्वारा किया गया हिन्दी अनुवाद 'उम्मीद' एक मर्मस्पर्शी कृति है। त्याग की भावनाओं को उजागर करता यह उपन्यास केरल के उस परिवेश का सजीव चिंत्राकन करता है, जो आज से लगभग 60 वर्ष पूर्व के गाँव की जीवनशैली को प्रस्तुत करने में सक्षम है। जाति और धर्म को प्राथमिकता देने वाले उस समय के केरलीय परिवेश में एक नायर परिवार कुलीनता के नाम पर अपना सर्वस्व त्यागने का साहस करता है, इस भावपूर्ण और कठिन विषय को सरलता के साथ प्रस्तुत किया गया है। ईसाई, मुसलमान, हिन्दू के बीच समन्वय स्थापित करने के प्रयास का यथावत् चित्रण, साथ ही, दो भाईयों के भिन्न व्यवहार का बहुत सुन्दर चित्रण किया गया है। जहाँ एक ओर, एक भाई के स्वार्थी व्यवहार को दर्शाने के लिए उचित शाब्दिक स्थितियाँ निर्मित की गई हैं, वहीं दूसरी ओर, दूसरे भाई के त्याग की भावना को उजागर करने के लिए उपयुक्त भावुक वातावरण बनाया गया है।
Dukhmochan
- Author Name:
Nagarjun
- Book Type:

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Description:
दु:खमोचन एक गाँव की कहानी है—ऐसे एक पिछड़े गाँव की कहानी, जहाँ युगों से निश्चल पड़ी जिंदगी नए युग की रोशनी पाकर धीरे–धीरे जाग रही है। मौजूदा परिवेश में प्रकारान्तर से यह देश के हर पिछड़े गाँव के जागने की कहानी है। दुखमोचन में लोकजीवन के चितेरे कथाकार नागार्जुन ने अलग–अलग जातियों और वर्गों में बँटे उस ठेठ देहाती समाज का जीवन्त चित्रण किया है, जो आज भी अभावों और विवशताओं में जीता है।
‘दुखमोचन’ एक छोटा मगर शक्तिशाली उपन्यास है। इसका नायक ‘दुखमोचन’ नई युग–चेतना का संवाहक है। अन्ध रूढ़ियों और पुराने संस्कारों से ग्रस्त समाज में बदलाव लाने के लिए वह जो संघर्ष करता है, उसे कथाकार ने बड़ी मार्मिकता से चित्रित किया है। पीड़ितों और दलितों के रहबर के रूप में दुखमोचन की भूमिका जहाँ मन में प्रेरणा जगाती है, वहीं नित्याबाबू और त्रिजुगी चौधरी जैसे गाँव के इने–गिने सम्पन्न लोगों के फरेबों और कुचक्रों से रोष उत्पन्न होता है।
Haryana Ki Lokkathayen
- Author Name:
Nisha
- Book Type:

- Description: लोककथा को आज हम आदिमानव की आदिम विधा कहकर इतिश्री नहीं कर सकते, न ही इसे प्रारंभिक विधा कह नमन कर आगे बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इन कहानियों में अब भी बहुत कुछ सार्वभौमिक एवं सार्वकालिक-सा है, जो उसे न केवल सदा जिंदा रखेगा, बल्कि हमें मजबूर भी करेगा कि हम उसे अपने साथ रखें। लोककथा पर आज विभिन्न दृष्टिकोणों से शोध किए जाने की आवश्यकता है। जीवन में कहानी होती है और कहानी में जीवन। एक साधारण व्यक्ति अपने रोजमर्रा के कामों में, अपने हालातों में निरंतर खप रहा होता है। कहानी से वह रस पाया करता है, जो उसे चुनौतियों से टकराने में सहायता करता है। हरियाणा की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और मान्यताओं का दिग्दर्शन करवाती ये लोककथाएँ पाठकों के जीवन में अपूर्व उत्साह और आनंद का संचार करेंगी।
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