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Author:
Dheerika PandeyPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction₹
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What would you do if life betrays you and fate is against you when you feel alone even in a crowd and have just one more chance to improve your present? A girl fighting against all odds in life, This book is a gripping account of a changing Phase in smriti's life. Smriti is a sixteen-year-old girl who lost her parents when she was ten. After the unfortunate death of her Grandpa, she moved to her new house in Gurgaon with her grandma and her elder brother Rahul. As she soon joined her new school, she realised that people were quite different from her previous school. She was bullied and insulted in front of everyone, which mentally destroyed her even more. But luck wasn't that bad with her as she had a few classmates who immensely supported her. Kartik, Inder, SIM, AMU, Asha, Sahib and Kaira made her believe in life and true friendship, uplifting her and encouraging her to have an optimistic view of life. But on the other hand, her elder brother Rahul became quite pessimistic and felt helpless. He found life unfair and cruel. Smriti tries to encourage him but fails miserably. On the other hand, smriti's deepest secret had been revealed to her friends. Will she let her fate go against her again, or will she fight against all odds and live happily? The story gives us all the answers.
Read moreAbout the Book
What would you do if life betrays you and fate is against you when you feel alone even in a crowd and have just one more chance to improve your present? A girl fighting against all odds in life, This book is a gripping account of a changing Phase in smriti's life. Smriti is a sixteen-year-old girl who lost her parents when she was ten. After the unfortunate death of her Grandpa, she moved to her new house in Gurgaon with her grandma and her elder brother Rahul. As she soon joined her new school, she realised that people were quite different from her previous school. She was bullied and insulted in front of everyone, which mentally destroyed her even more. But luck wasn't that bad with her as she had a few classmates who immensely supported her. Kartik, Inder, SIM, AMU, Asha, Sahib and Kaira made her believe in life and true friendship, uplifting her and encouraging her to have an optimistic view of life.
But on the other hand, her elder brother Rahul became quite pessimistic and felt helpless. He found life unfair and cruel. Smriti tries to encourage him but fails miserably.
On the other hand, smriti's deepest secret had been revealed to her friends. Will she let her fate go against her again, or will she fight against all odds and live happily? The story gives us all the answers.
Book Details
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ISBN9789385137723
-
Pages82
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: संत रविदास का जन्म वाराणसी के निकट मंडूर नामक गाँव में संवत् 1433 को माघ पूर्णिमा के दिन माना जाता है। उनके विभिन्न नाम हैं—रविदास, रैदास, रादास, रुद्रदास, सईदास, रयिदास, रोहीदास, रोहिदास, रूहदास, रमादास, रामदास, हरिदास। इनमें से रविदास तथा रैदास दो नाम तो ऐसे हैं, जो दोनों ही उनकी रचनाओं में उपलब्ध होते हैं। बचपन से ही उनकी रुचि प्रभु-भक्ति और साधु-संतों की ओर हो गई थी। बड़ा होने पर उन्होंने चर्मकार का अपना पैतृक काम अपना लिया। जूता गाँठते हुए वे प्रभु भजन में लीन हो जाते। जो कुछ कमाते, उसे साधु-संतों पर खर्च कर देते। रविदास ने उस समय के प्रसिद्ध भक्त गुरु रामानंद से दीक्षा ली। उन्होंने ऊँच-नीच के मत का खंडन किया। वे अत्यंत विनीत और उदार विचारों के थे। उनकी भक्ति उच्च दर्जे की थी। वे कठौती में ही गंगाजी के दर्शन कर लिया करते थे। ‘संत रैदास की वाणी’ में 87 पद तथा 3 साखियों का संकलन ‘रैदास’ के नाम से हुआ है, जिनमें से लगभग सभी में ‘रैदास’ नाम की छाप भी मिलती है। प्रस्तुत पुस्तक में संत रविदास के आध्यात्मिक जीवन, उनकी रचनाओं, उनके जप-तप और समाज-उद्धार के लिए किए गए कार्यों का सीधी-सरल भाषा में विवेचन किया गया है।
Thodi Mohabbat Thodi Yaariyan
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Amit Patel
- Book Type:

- Description: ये कहानी 3 दोस्तों की है, जो उनके उम्र बढ़ने दिलचस्प मोड़ लेती है।इसमें थोड़ी दोस्ती है,थोडा सा प्यार है,थोड़ी सी तकरार भी है,तो थोड़ी सी याद भी। एक घटना ने कैसे उनकी ज़िन्दगी पूरी तरह बदल दी ये इस कित्ताब में दिखाया गया के शुरुआत केे कुछ पन्ने ही आपको पढ़ने को मजबूर कर देँगे।
Aaina Saaz
- Author Name:
Anamika
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Description:
हमारे दौर की राजनीति, समाज, आदमी–सब अपने भीतर से लेकर बाहर तक जाने कैसे तो जंजाल में उलझे हुए हैं, और जब उसे सुलझाने चलते हैं, उस जाल से निकलकर खुली, साफ़ जगह में आने के लिए हाथ-पाँव पटकते हैं तो सुलझते-निकलते नहीं, और उलझ जाते हैं।
क्या नहीं है हमारे पास? जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी, अब वह भी है, और भरोसा है कि अब जिसकी कल्पना करेंगे, वह भी कल हो उठेगा।
लेकिन ताला अगर कहीं लग गया है तो वह कल्पना ही पर है; और उसके संगी-साथी दूसरे कई मनोभाव-मनोशक्तियाँ और इनका सरदार एक सूफ़ी मन, उजली कामनाओं, और धरती-आकाश को एक करते धवल सपनों की छतरी; यह सब उस ताले के भीतर कहीं छटपटा-सिसक रहे हैं।
खुसरो एक पैदा हुआ, मध्यकालीन कहे जानेवाले उस साँवले हिन्दुस्तान में जिसकी छतें इतनी ऊँची होती थीं, कि हम बौनों की तिमंज़िला बाँबियाँ उनमें खड़ी हो जाएँ। यह उस ख़ुसरो की आत्मकथा से रचा हुआ उपन्यास है जिसमें ख़ुसरो की चेतना को जीनेवाले आज के कुछ सूफ़ी मनवालों की कहानी भी साथ में पिरो दी गई है।
ख़ुसरो इस कथा में अपना वह सब बताते हैं जिस तक हम उनकी नातों, क़व्वालियों और पहेलियों की ओट में नहीं पहुँच पाते–कि उनका एक परिवार था, एक बेटी थी, बेटे थे, पत्नी थी, और थे निज़ाम पिया जिनकी निगाहों के साए तले उन्होंने वह सब सहा जो एक साफ़, हस्सास दिल अपने ख़ून-सने वक़्तों और बेलगाम सनकों से हासिल कर सकता था।
और इसमें कहानी है सपना की, नफ़ीस की, ललिता दी और सरोज की भी, जो आज के हत्यारे समय के सामने अपने दिल के आईने लिए खड़े हैं, लहूलुहान हो रहे हैं, पर हट नहीं रहे, जा नहीं रहे, क्योंकि वे उकताकर या हारकर अगर चले गए तो न पद्मिनियों के जौहर पर मौन रुदन करनेवाला कोई होगा, न इंसानियत को उसके क्षुद्रतर होते वजूद के लिए एक वृहत्तर विकल्प देनेवाला।
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