The Haunting of Dutta Villa
(2)
Author:
Avishek GuptaPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
EnglishCategory:
Literary-fiction₹
123
₹ 104.55 (15% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
Samira Chatterjee, a retired br>Widower, lived a quiet life in the golf Green neighbourhood of Kolkata. His only entertainment was to watch the movies of his idol Shammi Kapoor on a daily basis. The villa opposite Chatterjee’s bungalow was lying desolate for months. However, some mysterious new occupants had recently moved in there and seemed desperate to attract Chatterjee’s attention. Will Chatterjee’s curiosity get the better of itself? Can he find out what his new neighbours wanted?.
Read moreAbout the Book
Samira Chatterjee, a retired br>Widower, lived a quiet life in the golf Green neighbourhood of Kolkata. His only entertainment was to watch the movies of his idol Shammi Kapoor on a daily basis. The villa opposite Chatterjee’s bungalow was lying desolate for months. However, some mysterious new occupants had recently moved in there and seemed desperate to attract Chatterjee’s attention. Will Chatterjee’s curiosity get the better of itself? Can he find out what his new neighbours wanted?.
Book Details
-
ISBN9789390006335
-
Pages100
-
Avg Reading Time2 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Mukhyamantri
- Author Name:
Chanakya Sen
- Book Type:

-
Description:
‘मुख्यमंत्री’ एक राजनीतिक उपन्यास है। इसमें भारत के समकालीन राजनीतिक जीवन का आश्चर्यजनक यथार्थ चित्रण है। यह कृति वर्तमान भारतीय जीवन की तीखी आलोचना है। कृष्ण द्वैपायन कौशल का दुर्धर्ष व्यक्तित्व, उसकी रसिकता, उसके कुटिल राजनीतिक दाँव-पेच, अपने राजनीतिक संगी-साथियों के दोषों और कमज़ोरियों को पहचानने का उसका बुद्धिकौशल तथा सत्ता हथियाने के लिए सिद्धान्तों की भी निर्ममतापूर्वक
हत्या करने में गुरेज़ न करना—इन सबके कारण वह एक जीवन्त और शक्तिशाली चरित्र बन गया है। इसके साथ ही उपन्यास में उन अनेक राजनीतिज्ञों का भी बड़ा मार्मिक चित्रण हुआ है जिन्हें हमने देखा-सुना तो है, पर जिनके बारे में हमने कुछ अस्पष्ट-सी धारणाएँ बना रखी हैं। किन्तु उपन्यासकार ने इन सबको पूरे फ़ोकस में लाकर खड़ा कर दिया है।
‘मुख्यमंत्री’ मूल बांग्ला में 1966 में प्रकाशित हुआ था। अब तक इसके अनेक संस्करण हो चुके हैं। यह एक असाधारण उपन्यास है। भारतीय भाषाओं में लिखे गए राजनीतिक उपन्यासों में मुख्यमंत्री अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। भारतीय राजनीति के चारित्रिक ह्रास को समग्रता में उद्घाटित करता इसका कथानक ऐतिहासिक साहित्यिक दस्तावेज़ बन जाता है। स्वतंत्रता-प्राप्ति के तत्काल बाद के वर्षों में राजनीतिक सत्ता पाने और बनाए रखने के लिए जोड़-तोड़ के जिन समीकरणों को स्थापित किया गया उन्होंने ही आगे चलकर सम्पूर्ण भारतीय राजनीति में चारित्रिक प्रदूषण फैलाया है। स्वतंत्रतापूर्व के आदर्श स्वातंत्र्योत्तर भारत की राजनीति में किस प्रकार एकांगी व असहाय हो गए यह भी इस उपन्यास में देखा जा सकता है।
स्वतंत्रता के बाद के वर्षों की यह कथा हमारी आज की व्यथा से अलग नहीं है। यही वजह है कि यह उपन्यास वर्षों बाद भी प्रासंगिक है, बल्कि कहना चाहिए कि आज और अधिक प्रासंगिक है।
It's You Always And Forever
- Author Name:
Kolgani Babu RP
- Book Type:


- Description: Love is not merely a word but an experience which cannot be described to others. It is a feeling one has for another. How often have we realised that there is an inner voice that speaks to us? Even if we realise that our inner voice is speaking to us, how often do we listen to it? The question often arises whether our inner voice is in conflict with what our mind desires or whether it is but an extension of what we truly are? Contained herein are stories of individuals placed in different situations who gave great importance to their inner voice and unknowingly revealed their hidden selves. In the author’s opinion, our behaviour is inevitably governed by what we believe.
Inteha
- Author Name:
Ramendra Kumar
- Book Type:

- Description: टूटी फूटी इक ख्वाइश है मेरी। इक हल्की सी गुज़ारिश है मेरी । बेइंतेहा चाहतों में लिपटी, इक सहमी सी सिफ़ारिश है मेरी ... रमेन्द्र कुमार (रमेन) राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित लेखक हैं। इन्होंने लेखन की प्रायः हर विधा जैसे फ़िक्शन, व्यंग, यात्रा संस्मरण एवं कविताओं के लेखन का कार्य किया है। इन्होंने अब तक कुल 28 पुस्तकें लिखी हैं जिनका अनुवाद कई भारतीय और विदेशी भाषाओं मे किया जा चुका है। इनकी रचनाएँ अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुकी हैं एवं संग्रहीत हैं। 2014 में प्रकाशित इनके उपन्यास 'मोहिनी' का प्रथम संस्करण मात्र एक हफ्ते में ही पूर्ण रूप से बिक गया। इनकी प्रथम नॉन-फ़िक्शन रचना 'इफेक्टिव पेरेंटिंग' भी काफी सराही जा रही है। रमेन अंतर्राष्ट्रीय स्तर के कथा वाचक और प्रेरणात्मक वक्ता हैं जो श्रोताओं के बीच अपनी अमिट छाप छोड़ने की क्षमता रखते हैं। इन्होंने 'जगन्नाथ संस्कृति' पर देश-विदेश में अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया है। 'इंतेहा' इनके गीत एवं ग़ज़ल का प्रथम संग्रह है।
Vishva Dharma Sammelan
- Author Name:
Laxminiwas Jhunjhunwala
- Book Type:

- Description: इसके बाद यह प्रस्ताव पारित किया गया। यहाँ बहुधा यह कहा गया और मैं भी यह कहता रहा हूँ कि हम लोगों ने विगत सत्रह दिनों में जैसा आयोजन देखा है ऐसा अब इस पीढ़ी को तो उनके जीवनकाल में पुन: देखने का अवसर नहीं प्राप्त होगा; पर जिस प्रकार के उत्साह व शक्ति का संचार इस सम्मेलन ने किया है, लोग दूसरे धर्म सम्मेलन के स्वप्न देखने लगे हैं, जो इससे भी अधिक भव्य व लोकप्रिय होगा। मैंने अपनी बुद्घि लगाई है कि अगले धर्म सम्मेलन के लिए उचित स्थान कौन सा हो। जब मैं अपने अत्यंत नम्र जापानी भाइयों को देखता हूँ तो मेरा मन कहता है कि पैसिफिक महासागर की शांति में स्थित टोकियो शहर में अगला धर्म सम्मेलन किया जाए, पर मैं यह सोचता हूँ कि अंग्रेजी शासन के अधीन भारतवर्ष में यह सम्मेलन हो। पहले मैंने बंबई शहर के बारे में सोचा, फिर सोचा कि कलकत्ता अधिक उपयुक्त रहेगा, पर फिर मेरा मन गंगा के तट की प्राचीन नगरी वाराणसी पर जाकर स्थिर हो गया, ताकि भारत के सबसे ओंधक पवित्र स्थल पर ही हम मिलें। अब यह भव्य सम्मेलन कब होगा? हम आज यह निश्चय कर विदा ले रहे हैं कि बीसवीं सदी में अगला भव्य सम्मेलन वाराणसी में होगा तथा इसकी भी अपयक्षता जॉन हेनरी बरोज ही करेंगे।
Gokul Mathura Dwarka
- Author Name:
Raghuveer Chaudhary
- Book Type:

-
Description:
मूल गुजराती में समादृत इस कथात्रयी ‘गोकुल मथुरा द्वारिका’ के नायक हैं श्रीकृष्ण, जो कथा में आद्योपान्त यवनिका के पीछे तिरोहित रहते हैं, किन्तु पाठक पग-पग पर उनका सान्निध्य पाता चलता है—अदृश्य, अगोचर किन्तु अनुभूति में व्याप्त। फिर ऐसे श्रीकृष्ण का जीवन-चरित लिखते हुए लेखक ने गोकुल मथुरा द्वारिका जैसे स्थलवाचक नाम क्यों दिए? श्रीकृष्ण का जीवन तो समग्र भारतवर्ष के साथ सम्बद्ध है?
गोकुल मथुरा द्वारिका कहते ही क्या सम्पूर्ण कृष्ण हमारे मानसपटल पर नहीं आ उपस्थित होते?
गोकुल के लोकनायक कृष्ण!
मथुरा के युगपुरुष कृष्ण!
द्वारिका के योगेश्वर कृष्ण!
अपने-अपने में परिपूर्ण मगर एक दूसरे की सर्वथापूरक यह उपन्यास-त्रयी हिन्दी पाठकों को उस श्रीकृष्ण से परिचित करवाने का प्रयास है जो रसेश्वर से योगेश्वर बने हैं।
एक से बढ़कर एक चुनौतियों का सामना करनेवाला यह चरित्र प्रत्येक युग के लिए प्रेरणादायक है। वे समग्र रूप में पुरुषोत्तम हैं। आनन्द रूप में अनुभव-गम्य हैं।
‘अमृता’ उपन्यास के माध्यम से हिन्दी पाठक जगत के बीच सुख्यात और ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ विजेता रघुवीर चौधरी की यह उपन्यास-त्रयी इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है कि इसमें मिथक की गरिमा और कथात्मकता की रक्षा करते हुए आधुनिक जीवन और परिवेश की झलक भी पाठकों को स्पष्ट रूप में मिल जाती है।
Aur Pasina Bahata Raha
- Author Name:
Abhimanyu Anat
- Book Type:

-
Description:
मॉरिशस के हिन्दी-लेखकों में अग्रगण्य अभिमन्यु अनत अपने देश की मिट्टी से जुड़े कथाकार हैं। उनके उपन्यासों में मॉरिशस के आम आदमी की ज़िन्दगी, उसके सुख-दु:ख और हर्ष-विषाद का अत्यन्त आत्मीयतापूर्ण चित्रण है। आम आदमी यानी प्रवासी भारतीय, जो उस देश की आबादी में लगभग तीन-चौथाई हैं।
अभिमन्यु अनत ने लगभग डेढ़ दशक पहले एक ऐतिहासिक उपन्यास-त्रयी की कल्पना की थी, जिसमें भारतीयों के मॉरिशस पहुँचने पर अपनी अस्तित्व-रक्षा के लिए किए गए संघर्षों से प्रारम्भ करके वे उनकी आज तक की सामाजिक-सांस्कृतिक-आर्थिक-राजनीतिक स्थितियों के उतार-चढ़ाव को अंकित करना चाहते थे। इस त्रयी की पहली कड़ी ‘लाल पसीना’ में प्रवासी भारतीयों की वह संघर्ष-कथा अंकित है जो न केवल भारतीयों द्वारा अपनी अस्तित्व-रक्षा के लिए किए गए प्रयत्नों की कहानी है बल्कि मॉरिशस के निर्माण की कहानी भी है। दूसरी कड़ी थी ‘गांधी जी बोले थे’ जिसमें प्रवासी भारतीयों के सामाजिक-सांस्कृतिक उत्थान की कहानी है। प्रस्तुत उपन्यास और पसीना बहता रहा इस त्रयी की अन्तिम कड़ी है। आज से लगभग डेढ़ सौ साल पहले वहाँ जिस संघर्ष की शुरुआत हुई थी, वह अभी समाप्त नहीं हुआ है। अलबत्ता उसका रूप बदल गया है। आज भारतवंशियों के लिए वह अस्मिता की रक्षा का संघर्ष बन गया है। प्रस्तुत उपन्यास में इसी संघर्ष की कहानी है। किसी भी प्रवासी भारतीय द्वारा अपनी जातीय अस्मिता की कहानी को महाकाव्यात्मक गरिमा के साथ सम्भवत: पहली बार प्रस्तुत किया गया है, और इस दृष्टि से इस उपन्यास-त्रयी को हिन्दी कथा-साहित्य की एक उपलब्धि माना जाएगा।
Utarti Hui Dhoop
- Author Name:
Govind Mishra
- Book Type:

-
Description:
आधुनिक भारतीय समाज में कॉलेज-जीवन का यथार्थ क्या है ? अध्ययन, प्रेम और रोमांस या कि हमारी परम्परागत सामाजिकता के विभिन्न दबाव ? निश्चय ही गोविन्द मिश्र का यह उपन्यास हमें इन सवालों के जवाब देता है, लेकिन किसी गणितीय गुणा-भाग से नहीं, बल्कि एक भावप्रवण काव्यात्मक रचाव के साथ।
समर्थ रचनाकार के नाते गोविन्द मिश्र की एक अलग पहचान है और हमारे मध्यवर्गीय जीवन में उन्होंने नारी-स्वातन्त्र्य तथा प्रेम एवं काम-सम्बन्धों की बहुस्तरीय पड़ताल की है। कहने की आवश्यकता नहीं कि उनका यह बहुचर्चित उपन्यास भी एक ऐसी ही पड़ताल का नतीजा है। इसमें उन्होंने एक कॉलेजियेट युगल के धूप-छाँही रोमांस और परवर्ती परिस्थितियों के परिणामस्वरूप उनके मोहभंग का प्रभावी अंकन किया है। प्रेमिल स्मृतियों और अधूरे सपनों के प्रति उद्दाम आकर्षण के बावजूद अन्ततः उन्हें इस सच्चाई को स्वीकार करना पड़ता है कि सामाजिक यथार्थ उनके व्यक्तिगत भावावेश से कहीं ज्यादा अहम है। संक्षेप में, अपने तमाम रागात्मक खुलेपन के बावजूद यह कथाकृति हमें सामाजिक दायित्वबोध के स्वीकार की प्रेरणा देती है।
The Call Of The Wild
- Author Name:
Jack London
- Book Type:

- Description: The Call of the Wild by Jack London is a timeless classic that follows Buck, a large dog who is stolen from his home in California and sold into service as a sledge dog during the Klondike Gold Rush. Forced to adapt to the harsh climate and conditions, Buck experiences an awakening as he reverts to his ancestral wolf roots to survive. Through his journey, readers witness Buck's transformation from a civilized domestic dog to a primordial beast as he struggles for dominance, companionship and meaning in an unforgiving landscape. London's vivid descriptions transport readers to the vast wilderness of Yukon, evoking the raw and untamed spirit of the far north during one of the most pivotal eras in North American history. This thrilling adventure story remains as gripping today as it was over a century ago.
5 Jeevon Se Baatein
- Author Name:
Anita Gopesh
- Book Type:

- Description: गूगल और इंटरनेट ने बच्चों की कल्पना से प्रकृति के असली, जीवंत रंग कहीं छीन से लिए हैं। जबकि पेड़, पौधों और जीव-जंतुओं की दुनिया अनगिनत रंगों, रहस्यों और कहानियों से भरी है। जीव विज्ञान पढ़ाते हुए समझ आया कि यह संसार कितना रोचक है- और इतना विस्तृत कि इसे एक बार में बता पाना लगभग असंभव है। इसी सजीव दुनिया से बच्चों का परिचय कराने के लिए मैंने कुछ जाने-पहचाने जन्तुओं को बच्चों से बातें करते हुए पेश करने की कोशिश की है । उसी प्रयास से यह किताब जन्मी - ताकि बच्चे फिर से प्रकृति को उसके अपने रंगों में देख सकें, सुन सकें और महसूस कर सकें।
Anamantrit Mehman
- Author Name:
Anand Shankar Madhvan
- Book Type:

-
Description:
‘‘मानवता और उसके इस संसार में जो सत्य अनादिकाल से क्रियाशील है, उसे समझने और पाने के लिए जितना दिमाग़ी परिश्रम इस भारतवर्ष के योगी-महात्माओं ने किया है, उतना कहीं के भी महापुरुषों ने नहीं किया है। इस ओर प्रत्येक ऋषि अपने-अपने तरीक़े से, स्वतंत्र रूप से, अनुसन्धान करते आए हैं। मगर वे सभी यही अनुभव करते रहे कि प्रत्येक मार्ग एक-दूसरे का पूरक है। इस तरह अन्त में वे एक ही सत्य पर पहुँचते भी थे। तुम बच्चे हो बेटा, तुमने कुछ पुस्तकें पढ़ी हैं, वह भी अंग्रेज़ी पुस्तकों में वर्णित विचारों को पचाने का प्रयास मात्र किया है। इस तरह तुम न तो उन ऋषियों की घनघोर साधनाओं को समझोगे और न उनके अतुलनीय बुद्धि-वैभव को ही। तुम उनकी बुद्धि-शक्ति की कल्पना करो जिन्होंने अंक व्यवस्था का आविष्कार किया और शून्य का पता चलाया। तुम भारतीय ज्ञान-विद्या और अभिनय-शास्त्र को भी समझने का प्रयास करो। इस देश में धर्म सिर्फ़ राम जपना ही नहीं रहा है। मनुष्य का प्रत्येक आचरण परमेश्वर-प्राप्ति का एक साधन समझा जाता था। अतः वैद्य चिकित्सा करते समय, गायक गाते समय, गणितज्ञ किसी समस्या को हल करते समय, राजा राज्य-कार्य करते समय, पत्नी पति-सेवा करते समय, भंगी झाड़ू लगाते समय; इस तरह प्रत्येक व्यक्ति अपने प्रत्येक आचरण को ही ईश्वर का एक क़दम समझता था। कम-से-कम विधि और व्यवस्था इसी ओर रही है।’’ ‘‘खैर, ऐसा ही सही; आखिर उन सब अनुष्ठानों से भारत ने क्या पाया? सैकड़ों बरस की ग़ुलामी जब मुसलमान आए तो उसका ग़ुलाम हुआ; जब अंग्रेज़ आए तो उसका ग़ुलाम हुआ। जातीय जीवन में कुछ भी शक्ति रहती तो वह इतनी जल्दी और इतने शौक से ग़ुलामी को स्वीकार नहीं करता। बाबा जी, यह सत्य है कि मैंने धर्म का अध्ययन नहीं किया, पर क्या वजह है कि हम इतने क्षीण चारित्र्य के हो गए कि अपनी स्त्रियों तक को आततायियों से बचा नहीं सके? बुरा नहीं मानिए। जानने की व्यग्रता में मेरी पवित्र वेदना सन्निहित है।’’
‘‘मैं मानता हूँ, जातीय जीवन गिर गया है। हज़ारों बरसों से गिरता आ रहा है।’’
‘‘कब बढ़ी हालत में थी? इतिहास में तो कुछ प्रमाण नहीं मिलता। सब आपस में लड़े-भिड़े हैं। सैकड़ों बार लड़कियों के लिए लड़ाइयाँ हुई हैं।’’ ‘‘यह तो ग़लत बात है। इतिहास सदा मात्र सच्ची और सही घटनाओं को प्रस्तुत नहीं करता।’’ ‘‘तो सही क्या है—आपकी प्रिय धारणाएँ? आपकी प्रिय विचारधाराएँ?’’ ‘‘तो तुम्हारा क्या कहना है?’’ ‘‘मेरा यह कहना है कि इन भौगोलिक प्रतिष्ठानों का कुछ भी अर्थ नहीं है। क्या अर्थ है भारत भूमि का; क्यों आप भारत को पुण्यभूमि और भगवान का प्रिय देश कहते हैं? चीनी लोगों ने कौन-सा अपराध किया कि उनके देश में कोई पुण्यभूमि की मान्यता नहीं मिलती? सच बात तो यह है कि मनुष्य जहाँ-जहाँ जमकर रहते गए, उन्होंने अपनी उसी जमाअत तथा भू-भाग को महत्त्वपूर्ण समझना प्रारम्भ किया। उसके ममत्व में जो बेमतलब और बेबुनियाद का एक भाव चढ़ता गया, उसे राष्ट्रीयता कहते हैं। जैसे-जैसे यातायात की सुगमताएँ बढ़ती जाएँगी और मानव एक-दूसरे के निकटतम सम्पर्क में आता जाएगा, वैसे-वैसे राष्ट्र और राष्ट्रीयता भी कम होती जाएगी, भाषाएँ कम होती चलेंगी, जातियाँ मिटती चलेंगी और धर्म भी घटता चलेगा। विज्ञान पूरी मानवता को एक धरातल पर खड़ा कर देगा; एक सत्य पर व्यवस्थित कर देगा। जो चीज़ भेद-भाव को प्रश्रय देती हुई उसे मान्यता प्रदान करती है, उसे मैं ग़लत, झूठ और अन्याय मानता हूँ। इससे मैं मानवता को बचाऊँगा।’’
अध्यात्म और साम्यवाद को केन्द्र में रखकर रचा गया आनन्द शंकर माधवन का विचारोत्तेजक उपन्यास है—‘अनामंत्रित मेहमान’। अपने इस पठनीय उपन्यास में लेखक ने जहाँ दो विपरीत धाराओं का अपनी तार्किक दृष्टि से विवेचन-विश्लेषण प्रस्तुत किया है, वहीं निश्छल प्रेम और उदारता के आगे कठोर से कठोर व्यक्ति भी किस तरह स्वयं को पराजित-सा महसूस करने लगता है, इसका बड़ा ही मार्मिक चित्रण किया है।
Somtirth
- Author Name:
Raghuveer Chaudhary
- Book Type:

-
Description:
महमूद ग़ज़नवी ने सोमनाथ लूटा, उसके बाद भारत के हिन्दुओं में मुस्लिमों के प्रति अरुचि जागी, जो और दृढ़ होती गई। ऐसा होना नहीं चाहिए था। महमूद के दो मुख्य सेनापति हिन्दू थे और महमूद धर्म के अगुआ के रूप में नहीं आया था। उसकी भूख सत्ता और सम्पत्ति की थी। उसके धर्माध्यक्ष भी उससे सावधान रहते थे। अन्त में वह भाग निकला। उस समय भारत में बचे हुए उसके साथी शादी कर यहाँ के समाज में मिल गए—जिनसे बाढेल और शेखावत हुए। यहाँ तत्कालीन राजनीतिक–सामाजिक स्थितियों का वर्णन करते हुए उपन्यासकार ने लोगों के निजी सुख–दु:ख तथा दाँव–पेच को भी संजीदगी से उजागर किया है।
लेखक ने यहाँ दो महत्त्वपूर्ण कार्य किए हैं—(1) सत्ता और सम्पत्ति के लोभी राजपुरुषों द्वारा धार्मिक प्रजाजनों के बीच खड़ी की गई ग़लतफ़हमी दूर करना, और (2) सृष्टि में व्याप्त कल्याणकारी सौन्दर्य को शिवतत्त्व के रूप में निरूपित करना।
ऐतिहासिक तथ्यों के प्रति वफ़ादार रहते हुए लेखक ने कहीं–कहीं छूट भी ली है लेकिन इस तरह कि कथासृष्टि के वातावरण में उपकारक सिद्ध हो।
सरस भाषा एवं रोचक शैली में यह उपन्यास पढ़ते हुए महसूस ही नहीं होता कि हम गुजराती उपन्यास का रूपान्तर पढ़ रहे हैं।
Sidhyon Par Cheetah
- Author Name:
Tejinder
- Book Type:

-
Description:
उत्तराखंड के देहरादून से चेन्नई जा पहुँचा भारत सरकार का एक क्लास वन सिख ऑफ़िसर रंधावा। समुद्र के और वहाँ के दरिद्रनारायण बाशिन्दों के क़रीब पहुँच जाने पर उसे अनुभव होने लगा है कि ‘ग़रीब आदमी की हथेलियों में लिखी हुई रेखाएँ, पेंसिल से खींची हुई होती हैं और उन्हें मिटानेवाले सारे रबर पैसेवालों के हाथों में होते हैं।’ “अंकल, आप नहीं समझते, इस डायरी के शब्दों में कितनी एनर्जी और कितना पैशन है।”
“लेकिन ये सड़ी और तर्कहीन नफ़रत से भरे हुए हैं...”
“पर अंकल, जागीरसिंह ठीक कहता था, मैं भी अपने रास्ते में जो आएगा, उसे छोड़ूँगा नहीं, आई विल किल हिम।”
“तुम्हारे रास्ते का मतलब?”
“समुद्र की पीठ पर अपना घर बनाने का रास्ता।” समुद्र की पीठ पर अपना घर बनाने का रास्ता महज़ शिवा के दिमाग़ में नहीं, अनेक विद्वानों के मस्तिष्कों से उपजा है। प्रोफ़ेसर लक्ष्मीनारायण श्रीनिवास राघवन ने एक दिन शिवा को कान्नेमारा लाइब्रेरी की सीढ़ियों पर बैठकर समझाया था—‘अंग्रेज़ कलकत्ते से ज़्यादा मद्रास को प्यार करते थे, इसीलिए उन्होंने यहाँ कान्नेमारा लाइब्रेरी बनवाई। यहाँ पर जो किताबें हैं और उनमें द्रविड़ियन ज्ञान की जो फ़ायर है, वह सोने की तरह है, जिसके सामने काशी के वेद फीके हैं। नो आर्यन फ़िलासफ़र कैन ईवन स्टैंड नीयरबाय।’
“आप यह समुद्र के उस पार के द्वीप में जो लड़ाई चल रही है, उसके बारे में क्या सोचती हैं?” रंधावा ने नीला नारायणन से पूछा था।
“दे डोन्ट नो देम सेल्व्स, उन्हें क्या चाहिए। वे अपने घर के लिए लड़ रहे हैं इसीलिए हमारे घर बन रहे हैं।” टी.वी. पर ब्रेकिंग न्यूज़ के तहत बताया जा रहा था कि बारिश से हुई बर्बादी के बाद रात के टोकन बटोरने की कोशिश में एक तमिल क़स्बे में अपने ही लोगों की भीड़ से कुचलकर बयालीस लोग मर गए थे।
जागीरसिंह और शिवा दोनों दिग्भ्रमित नौजवानों ने अन्ततः अपने विचारों को सच मानते हुए, उनकी रक्षा में मौत का चोग़ा ओढ़ लिया था। उपन्यास में धड़ल्ले से किए गए तमिल वाक्यों के उपयोग से यह विश्वास नहीं हो सकता कि लेखक एक हिन्दीभाषी क्षेत्र का निवासी है।
सिर्फ़ हिन्दी ही नहीं, एक ज्वलन्त, अछूते विषय पर अब तक किसी भी भारतीय भाषा में लिखी गई एक अनोखी, कालजयी रचना।
—विद्यासागर नौटियाल
Aandharmanik
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

- Description: सन् साठ के दशक के कई बांग्ला प्रकाशन महत्त्वपूर्ण थे। इसी दौर में ‘आंधारमानिक’ उपन्यास लगभग 1967 में प्रकाशित हुआ था। पहली बार कथावस्तु की तर्जनी जनता के इतिहास की तरफ़ उठी थी। इस उपन्यास में उपयोग किया गया ‘आंधारमानिक’ नाम एक ख़ास केन्द्रबिन्दु है और इसे रूपक ही मानना चाहिए। अठारहवीं सदी में बंगाल के समाज में धनी-मानी, ज़मींदार वग़ैरह वर्गों के मूल्यबोध का तो दिवाला ही निकल गया था। एक तरफ़ जातियों की किचिर-पिचिर, संकीर्णता, अनुदारता, दूसरी तरफ़ ऐश-विलास! इधर समाज में प्रचलित अन्धविश्वास, कुत्सित प्रथाएँ। बंगाल के समाज का इतिहास अनगिनत विचित्रताओं से भरा था। जंगल इलाक़ों के लोग, अपने सामन्त स्वामियों के ख़िलाफ़ काफ़ी अर्से पहले ही बागी हो चुके थे। इस कृति में वर्गीय आक्रमण और उससे जुड़ी कई घटनाओं तथा समाज पर पड़नेवाले उसके प्रभावों का प्रामाणिक चित्रण किया गया है। ‘आंधारमानिक’ प्रमुख रूप से लोकवृत्त का इतिहास है–कलकत्ता से जुड़े मध्यवित्त जीवन की शुरुआत से पूर्व–मुहूर्त का इतिहास! यह उपन्यास किसी अर्थ में समकालीन भी है, क्योंकि वर्ण-श्रेणी शासन की औरतों के प्रति तर्जनी ताने रहने जैसी कितनी बातें हमारे समाज के ऊपरी स्तर तले आज भी विद्यमान हैं। आशा है, इस उपन्यास को पढ़ना पाठकों के लिए एक दिलचस्प अनुभव होगा।
Abhishapt
- Author Name:
Dr. Kislay Panday
- Book Type:

- Description: रणविजय ने अपने आपको प्रीलिम्स परीक्षा की तैयारी में पूरी तरह से झोंक दिया, जिसका नतीजा यह हुआ कि प्रीलिम्स की परीक्षा में वह अव्वल रहा। इस नतीजे ने उसका मनोबल और बढ़ा दिया। वह और भी उत्साह के साथ मुख्य परीक्षा की तैयारी में जुट गया। अपनी पहली उपलब्धि जब उसने अपने पिता जागीर सिंह को बताई तो वे खुशी के मारे फूले नहीं समाए, और जब यही खबर जागीर सिंह ने रणविजय की माँ को बताई तो उनकी आँखें खुशी से छलछला आईं। तभी वह वार्ड बॉय हाथ में कुछ सामान लेकर हमारे पास आया। उसने रणविजय का नाम लिया तो मैंने हामी भर दी। जिसके बाद उसने वे चीजें हमारे बगल में रख दीं, जिसमें लकड़ी का एक डंडा था, जिसे रणविजय अपने आखिरी दिनों में सहारे के लिए इस्तेमाल करता था। एक पॉलिथिन में उसके कुछ कपड़े थे। एक डायरी थी, जिसमें शायद उसने कुछ नोट्स लिखे थे और एक पोटली जैसी कोई चीज थी, जिस पर रणविजय की माँ की निगाहें जाकर टिक गई थीं। उन्होंने उसी पल उस पोटली को उठा लिया और उसे सीने से लगाकर रोने लगीं। मैं समझ गया, शायद यह वही पोटली थी, जिसमें वे हर बार खाने के रूप में अपना प्यार बाँधकर अपने बेटे को देती थीं। बेटा खुद तो चला गया, मगर वह खाली पोटली माँ के लिए छोड़ गया, जिसे वे शायद दोबारा कभी नहीं भर पाएँगी। —इसी पुस्तक से अत्यंत भावपूर्ण उपन्यास, जिसके मुख्य पात्र के जीवन को लेखक ने खुद नए सिरे से जिया है। यह एक पुस्तक न होकर जीवन-दर्शन साबित होगी।
Bheemcharit Mahakavya
- Author Name:
Shailesh Bharati
- Book Type:

- Description: भारतरत्न डॉ. भीमराव रामजीराव अंबेडकर, जिन्हें आज लोग श्रद्धा से बाबा साहब कहकर पुकारते हैं। उनका व्यक्तित्व इतना वृहद् और बहुआयामी है, जिसका विस्तार आकाश के समान विस्तृत और समुद्र की भाँति गहन है। उनके विषय में लिखना बड़ा दुष्कर कार्य है, जिसने युग के प्रवाह को मोड़ दिया, रूढिय़ों को तोड़ दिया और जब हिंदू धर्म में कोई सुधार न हुआ तो हिंदू धर्म ही छोड़ दिया। देवी, देवता, ऋषि-मुनि, महात्मा, शंकराचार्य आदि यहाँ तक कि अवतार भी शूद्र को समता तो क्या मानवता का दर्जा भी न दिला सके, उन्हें डॉ. भीमराव ने पूर्ण मानवता का दर्जा ही नहीं दिलाया अपितु समता का अधिकार भी दिलाया। इतनी महान् विभूति के बारे में लिख पाना मेरे सामथ्र्य के बाहर है, फिर भी मैंने उन पर लिखने का प्रयास किया है, क्योंकि अभी तक बाबा साहब पर जो भी लिखा गया है, भले ही वह हिंदी, मराठी, अंग्रेजी अथवा अन्य किसी भारतीय भाषा में लिखा गया हो, वह सबका सब गद्य में लिखा गया है। किंतु मैंने सर्वप्रथम उनके संपूर्ण संघर्षमय जीवन को ‘भीमचरित महाकाव्य’ शीर्षक के अंतर्गत काव्यबद्ध करने का प्रयास किया है।
Sadabahar Kahaniyan : Ravindranath Tagore
- Author Name:
Rabindranath Thakur
- Book Type:

- Description: रवीन्द्रनाथ ठाकुर 1861-1941 रवीन्द्रनाथ ठाकुर बांग्ला के विश्वप्रसिद्ध कवि, कथाकार, गीतकार, चित्रकार और शिक्षाविद थे। जिन्हें श्रद्धा से गुरुदेव कहा जाता है। उन्हें 1913 में गीतांजलि के लिए नोबेल पुरस्कार मिला, जो न सिर्फ़ हिंदुस्तान, बल्कि एशिया को मिला पहला नोबेल पुरस्कार है। उन्हें बांग्लादेश और हिंदुस्तान- दोनों देशों का राष्ट्रगान लिखने का गौरव हासिल है। उन्होंने भारतीय नवजागरण और राष्ट्रिय स्वाधीनता आन्दोलन को गहरे प्रभावित किया और जालियांवाला बाग़ जनसंहार के ख़िलाफ़ 'नाईटहुड' की उपाधि वापस कर दी। लेकिन वह अंधराष्ट्रवादी नहीं थे- वह विश्वमानवता के पक्षधर थे। यह संकलन उनकी बहुरंगी कहानियों का खूबसूरत गुलदस्ता है। आशा है आपको पसंद आएगा।
Naukar Ki Kameez
- Author Name:
Vinod Kumar Shukla
- Rating:
- Book Type:

- Description: ‘नौकर की कमीज़’ भारतीय जीवन के यथार्थ और आदमी की कशमकश को प्रस्तुत करनेवाला उपन्यास है। इस उपन्यास की सबसे बड़े ख़ासियत यह है कि इसके पात्र मायावी नहीं बल्कि दुनियावी हैं, जिनमें कल्पना और यथार्थ के स्वर एक साथ पिरोए हुए हैं। कहीं भी ऐसा नहीं लगता कि किसी पात्र को अनावश्यक रूप से महत्त्व दिया गया हो। हर पैरे और हर पात्र की अपनी महत्ता है। केन्द्रीय पात्र संतू बाबू एक ऐसा दुनियावी पात्र है जो घटनाओं को रचता नहीं, बल्कि उनसे जूझने के लिए विवश, है और साथ ही इस सोसाइटी के हाथों इस्तेमाल होने के लिए भी। आज की ‘ब्यूरोक्रेसी’ और अहसानफ़रामोश लोगों पर यह उपन्यास सीधा प्रहार ही नहीं करता, बल्कि छोटे-छोटे वाक्यों के सहारे व्यंग्यात्मक शैली में एक माहौल भी तैयार करता चलता है। विनोद कुमार शुक्ल की सूक्ष्म निरीक्षण शक्ति का ही कमाल है कि पूरे उपन्यास को पढ़ने के बाद ज़िन्दगी के अनगिनत मार्मिक तथ्य दिमाग़ में तारीख़वार दर्ज होते चले जाते हैं। उनके छोटे-छोटे वाक्यों में अनुभव और यथार्थ का पैनापन है, जिसकी मारक शक्ति केवल तिलमिलाहट ही पैदा नहीं करती बल्कि बहुत अन्दर तक भेदती चली जाती है।
Samaychakra
- Author Name:
Dhirendra Verma
- Book Type:

-
Description:
संसार के सभी मनुष्यों का पूर्वजन्म और अगला जन्म होता है। पूर्वजन्म की यादें इसलिए भूल जाती हैं क्योंकि प्रत्येक जन्म स्वयं ही इतना विशद और विशाल होता है कि यदि हमें पिछला जन्म याद आ जाए तो इस जीवन का उत्तरदायित्व और भार वहन करना असम्भव हो जाएगा। इसका मतलब यह नहीं कि पूर्वजन्म हम एकदम से विस्मृत कर देते हैं। पूर्वजन्म की स्मृति हमारे अवचेतन में निरन्तर दबी रहती है जो कभी-कभी याद आ जाती है। हमारे साथ जो कुछ भी हो रहा है वह हमारे पिछले कर्मों के आधार पर हो रहा है और भविष्य में जो कुछ भी हमारे साथ होगा वह हमारे वर्तमान कर्मों के आधार पर होगा। अर्थात अतीत का जो वर्तमान से सम्बन्ध है वही सम्बन्ध वर्तमान का भविष्य से है। सारा संसार ही नहीं समस्त सृष्टि कार्य और कारण के सिद्धान्त के आधार पर चल रही है, जिसे हम कर्म और भाग्य का भी नाम दे सकते हैं। जो कुछ भी हम कर रहे हैं उसका परिणाम हमें भुगतना ही होगा। इसलिए हम यदि अपना भविष्य स्वर्णिम बनाना चाहते हैं तो हमें अच्छे से अच्छे कार्य करने होंगे।
समीर को नैनीताल के ‘जोशी लॉज़’ में एक अद्भुत अनुभव होता है। वहाँ पर समीर अपनी उम्र के पैंतीस वर्ष अतीत में पहुँच जाता है। उसकी भेंट सैम नामक युवक से होती है। सैम से उसे पता चलता है कि योग और मंत्र की साधना से उसने अपना अतीत, वर्तमान और भविष्य तीनों जान लिया है। अर्थात वह साधना की उस स्थिति में पहुँच गया है जहाँ मनुष्य अपना प्रारब्ध जान लेता है।
समीर को यह जीवन्त अनुभव जैसा लगता है परन्तु वास्तव में ऐसा नींद में हुआ। सैम से उसकी भेंट पूर्वजन्म से जुड़ी थी। ‘समयचक्र’ की परिक्रमा प्रत्येक मनुष्य करता है। समीर को यह अनुभव अपने जीवन में अनेक बार होता है। उसे विश्वास हो जाता है कि कर्म और भाग्यवाद का सम्बन्ध अवश्य ही पूर्वजन्म और पुनर्जन्म से है।
Sara Aakash
- Author Name:
Rajendra Yadav
- Book Type:

-
Description:
आज़ाद भारत की युवा-पीढ़ी के वर्तमान की त्रासदी और भविष्य का नक़्शा। आश्वासन तो यह है कि सम्पूर्ण दुनिया और सारा आकाश तुम्हारे सामने खुला है—सिर्फ़ तुम्हारे भीतर इसे जीतने और नापने का संकल्प हो—हाथ-पैरों में शक्ति हो...
मगर असलियत यह है कि हर पाँव में बेड़ियाँ हैं और हर दरवाज़ा बन्द है। युवा बेचैनी को दिखाई नहीं देता कि किधर जाए और क्या करे। इसी में टूटता है उसका तन, मन और भविष्य का सपना। फिर वह क्या करे—पलायन, आत्महत्या या आत्मसमर्पण?
आज़ादी के पचास बरसों ने भी इस नक़्शे को बदला नहीं—इस अर्थ में ‘सारा आकाश’ ऐतिहासिक उपन्यास भी है और समकालीन भी।
बेहद पठनीय और हिन्दी के सर्वाधिक लोकप्रिय उपन्यासों में से एक ‘सारा आकाश’ चालीस संस्करणों में आठ लाख प्रतियों से ऊपर छप चुका है, लगभग सारी भारतीय और प्रमुख विदेशी भाषाओं में अनूदित है। बासु चटर्जी द्वारा बनी फ़िल्म ‘सारा आकाश’ (हिन्दी) सार्थक कलाफ़िल्मों की प्रारम्भकर्ता फ़िल्म है।
Birbal Ki Kahaniyan
- Author Name:
Nirupma
- Book Type:

- Description: This book doesn’t have any description
Customer Reviews
Be the first to write a review...
3.5 out of 5
Book