Hookah Hits!
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“The depth of my feelings for him was unimaginably stressful. When you realise the feeling — name it love — when it gets out of control, then the victim and the perpetrator get united. The want and the need to be loved then becomes a curse. And this curse can only be reversed by the spell of lying the truth.” – Lana Maxwell Lana Maxwell (the protagonist) had to make a decision; along with her mother’s Maxwell Enterprise, she had to inherit her life as well. Lana’s life is paused between her past and present — an ambitionless teenage, adventurous friends, first love, exploring the unknown, and shouldering real-life responsibilities with an accidental twist by Fate. This is a fiction based on real-life events. “If you think you are in for a light-read, you are mistaken. ‘Hookah Hits!’ is a story that will resonate with the emotions of every millennial. A beautiful piece of modern literature filled with undertones of realism and humour—this is a story of exploring one’s own dynamics of unleashing layers and layers of different chapters of life. With intriguing twists and turns in the plot, I would call this a classic book depicting the metamorphosis of human relationships.” – Priyanka Chakrabarti, Founder of thelifestylepotpourri.com & Deputy Editor at Maxim magazine. “Hookah Hits! takes you along with the protagonist on a discovery trip through a family’s saga. One can easily connect to the universality of the story and will be surprised how it unfolds. This novel is intriguing in its emotional depth and understanding.” – Alexander Funk, Producer at Oberon Film (A German Film Production)
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“The depth of my feelings for him was unimaginably stressful. When you realise the feeling — name it love — when it gets out of control, then the victim and the perpetrator get united. The want and the need to be loved then becomes a curse. And this curse can only be reversed by the spell of lying the truth.” – Lana Maxwell Lana Maxwell (the protagonist) had to make a decision; along with her mother’s Maxwell Enterprise, she had to inherit her life as well. Lana’s life is paused between her past and present — an ambitionless teenage, adventurous friends, first love, exploring the unknown, and shouldering real-life responsibilities with an accidental twist by Fate. This is a fiction based on real-life events. “If you think you are in for a light-read, you are mistaken. ‘Hookah Hits!’ is a story that will resonate with the emotions of every millennial. A beautiful piece of modern literature filled with undertones of realism and humour—this is a story of exploring one’s own dynamics of unleashing layers and layers of different chapters of life. With intriguing twists and turns in the plot, I would call this a classic book depicting the metamorphosis of human relationships.” – Priyanka Chakrabarti, Founder of thelifestylepotpourri.com & Deputy Editor at Maxim magazine. “Hookah Hits! takes you along with the protagonist on a discovery trip through a family’s saga. One can easily connect to the universality of the story and will be surprised how it unfolds. This novel is intriguing in its emotional depth and understanding.” – Alexander Funk, Producer at Oberon Film (A German Film Production)
Book Details
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ISBN9788193650196
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Pages172
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Avg Reading Time3 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: "श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय वाड्मय का पवित्र एवं अत्यंत लोकप्रिय ग्रंथ है। विश्व की अनेक भाषाओं में इसका अनुवाद हो चुका है; इसकी अनेक टीका एवं समीक्षाएँ लिखी गई हैं। आदि शंकराचार्य से लेकर विनोबा भावे तक अनेक विद्वानों और संत-महात्माओं ने गीता पर भाष्य लिखे। लोकमान्य तिलक ने गीता को निष्काम कर्मयोग का आधार-ग्रंथ प्रतिपादित किया। गीता का धर्म कर्तव्य का द्योतक है। इसके अनुसार शरीर, इंद्रिय, मन और बुद्धि सभी के कर्तव्य निश्चित हैं। मानव शरीर जीवात्मा का परिधान मात्र है। इसमें निष्काम कर्म और संपूर्ण समर्पण के साथ परमात्मा की शरण में जाने पर जीवन की मुक्ति का मार्ग दिखाया गया है। श्रीमद्भगवद्गीता में आचार की पवित्रता, पाखंड का त्याग, सच्ची निष्ठा, फल की इच्छा न रखते हुए कर्तव्य-पालन तथा अहंकार का त्याग कर उत्कृष्ट नैतिक मूल्यों के अनुपालन का निर्देश दिया गया है। श्री देवमुनि शुक्ल ने सरस और प्रवाहमय भाषा में इसका पद्यानुवाद करके इसे ‘जीवन-गीता’ का रूप दिया है। आशा है, सुधी पाठक गीता को पद्य रूप में हृदयंगम कर इसके आदर्श गुणों को अपनाकर अपने उद्धार का मार्ग प्रशस्त करेंगे।
Mukhyamantri
- Author Name:
Chanakya Sen
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Description:
‘मुख्यमंत्री’ एक राजनीतिक उपन्यास है। इसमें भारत के समकालीन राजनीतिक जीवन का आश्चर्यजनक यथार्थ चित्रण है। यह कृति वर्तमान भारतीय जीवन की तीखी आलोचना है। कृष्ण द्वैपायन कौशल का दुर्धर्ष व्यक्तित्व, उसकी रसिकता, उसके कुटिल राजनीतिक दाँव-पेच, अपने राजनीतिक संगी-साथियों के दोषों और कमज़ोरियों को पहचानने का उसका बुद्धिकौशल तथा सत्ता हथियाने के लिए सिद्धान्तों की भी निर्ममतापूर्वक
हत्या करने में गुरेज़ न करना—इन सबके कारण वह एक जीवन्त और शक्तिशाली चरित्र बन गया है। इसके साथ ही उपन्यास में उन अनेक राजनीतिज्ञों का भी बड़ा मार्मिक चित्रण हुआ है जिन्हें हमने देखा-सुना तो है, पर जिनके बारे में हमने कुछ अस्पष्ट-सी धारणाएँ बना रखी हैं। किन्तु उपन्यासकार ने इन सबको पूरे फ़ोकस में लाकर खड़ा कर दिया है।
‘मुख्यमंत्री’ मूल बांग्ला में 1966 में प्रकाशित हुआ था। अब तक इसके अनेक संस्करण हो चुके हैं। यह एक असाधारण उपन्यास है। भारतीय भाषाओं में लिखे गए राजनीतिक उपन्यासों में मुख्यमंत्री अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। भारतीय राजनीति के चारित्रिक ह्रास को समग्रता में उद्घाटित करता इसका कथानक ऐतिहासिक साहित्यिक दस्तावेज़ बन जाता है। स्वतंत्रता-प्राप्ति के तत्काल बाद के वर्षों में राजनीतिक सत्ता पाने और बनाए रखने के लिए जोड़-तोड़ के जिन समीकरणों को स्थापित किया गया उन्होंने ही आगे चलकर सम्पूर्ण भारतीय राजनीति में चारित्रिक प्रदूषण फैलाया है। स्वतंत्रतापूर्व के आदर्श स्वातंत्र्योत्तर भारत की राजनीति में किस प्रकार एकांगी व असहाय हो गए यह भी इस उपन्यास में देखा जा सकता है।
स्वतंत्रता के बाद के वर्षों की यह कथा हमारी आज की व्यथा से अलग नहीं है। यही वजह है कि यह उपन्यास वर्षों बाद भी प्रासंगिक है, बल्कि कहना चाहिए कि आज और अधिक प्रासंगिक है।
Awastha
- Author Name:
U.R. Ananthamurthy
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- Description: Awating description for this book
Rupantar
- Author Name:
Radhakrishna
- Book Type:

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Description:
‘रूपान्तर’ कथाकार राधाकृष्ण का एक विशिष्ट उपन्यास है। इसमें संस्कृति के कुछ दुर्लभ प्रसंगों के माध्यम से जीवन के गूढ़ रहस्यों को विश्लेषित किया गया है।
चक्रवर्ती सम्राट मान्धाता का विविध आयामों में विकसित होता द्वन्द्वपूर्ण व्यक्तित्व उपन्यास का आकर्षण है। साथ ही तपस्वी सौभरि का विराग-योग जिस प्रकार परिवर्तित होता है, वह विस्मयपूर्ण है। इन दो चरित्रों का दो ध्रुवों पर स्थित चरित्र-चित्रण लेखक ने पूर्ण तन्मयता के साथ किया है।
मान्धाता का द्वन्द्व है—उदयाचल से लेकर अस्ताचल तक की भूमि को अपने प्रबल पराक्रम से पददलित करनेवाले चक्रवर्ती सम्राट मान्धाता की दारुण वेदना—अब किस पर विजय?
सौभरि की समस्या है—तपश्चर्या और साधना में शरीर को तृणवत् उपेक्षित करनेवाले ध्यान-योगी सौभरि का मानसिक द्वन्द्व, शरीर रसहीन क्यों नहीं हो पाता?
अत्यन्त विचारोत्तेजक उपन्यास।
Bharatiyata Ki Pahchan
- Author Name:
Manoj Kumar Rai
- Book Type:

- Description: हम भारत की संपूर्ण सत्ता को समझने के लिए उसे तीन कोणों से देखें तो ठीक-ठीक समझ सकते हैं। वे कोण हैं— (1) ‘मृण्मय’ (अर्थात भौगोलिक-आर्थिक-जैविक दृष्टि से), (2) ‘शाश्वत’ (ऐतिहासिक अविच्छिन्न विकास की दृष्टि से), (3) ‘चिन्मय’ (श्रुति अर्थात ‘अचल’ मूल्यों की दृष्टि से, यानी ‘मूल प्रकृति’ या essence की दृष्टि से)। इन तीन कोणों से भारत का अध्ययन करके संपूर्ण भारतीय ‘सत्ता’ और भारतीय पुरुषार्थ को हम समझ सकते हैं। भारत का मृण्मय रूप हमारे गाँव-नगर, खेत-खलिहान, नदी-पहाड़, हाट-बाजार में उपस्थित है और इस रूप द्वारा भारत ‘काम’ और ‘अर्थ’ की साधना कर रहा है। भारत का ‘शाश्वत रूप’ काल-प्रवाह अर्थात इतिहास में हजार-हजार वर्षों से, सैंधव सभ्यता के पूर्व से, निषाद-द्रविड़-किरात आर्य—इन चार महान् प्रवाहों के क्रमागत आगमन से निरंतर चलायमान है। यह ‘शाश्वत’ इस अर्थ में है कि यह अविच्छिन्न रहा है। अत: भारत का ‘शाश्वत रूप’ इतिहास की विकास-यात्रा में नित्य देहांतर करते हुए, निरंतर चलते हुए ‘धर्म’ नामक तृतीय पुरुषार्थ की अखंड, अविच्छिन्न उपासना कर रहा है। भारत का ‘चिन्मय रूप’ इस शाश्वत रूप से भी सूक्ष्म है। इस रूप का लक्ष्य है ‘मोक्ष धर्म’, अर्थात ‘शुद्ध आनंद’।
Nacohus
- Author Name:
Purushottam Agarwal
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Description:
एक दशक पहले, आहत भावनाओं की हिंसक राजनीति के बढ़ते संकट पर टिप्पणी करते हुए, पुरुषोत्तम अग्रवाल ने एक व्यंग्य-लेख में, प्रस्ताव किया था, ‘आहट भावना आयोग का गठन’ कर ही दिया जाए...
अब यह उपन्यास...ज़बान पर लगते जा रहे नित नए तालों की डरावनी ख़बर की पड़ताल करने के साथ ही, सूचना और मनोरंजन के सब तरफ़ पसरते जंजाल में, तकनीकी आतंक तले चेतना के हाशिए पर धकेले जा रहे विवेक की चीत्कार को स्वर देता है यह उपन्यास...
पुरुषोत्तम अग्रवाल का पहला उपन्यास ‘नाकोहस’ नई-नई गढ़ी जा रही वास्तविकता की पड़ताल के लिए गढ़े गए ‘बौनैसर’ और ऐसे अनेक विचारोत्तेजक शब्दों के कारण भी ध्यान खींचता है...
स्वयं ‘नाकोहस’ भी ऐसा ही एक शब्द है...
The Shades Of Incandescent
- Author Name:
Sonai Tiwary
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- Description: The Shades Of Incandescent
Nadan Premam
- Author Name:
S. K. Pottekat
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Description:
‘नादान प्रेमम्’ एक प्रतिष्ठित कथाकार का प्रथम उपन्यास है। रासायनिक स्वादों से साहित्य को दूर रखने का ख़याल एस.के. पोट्टेक्काट्ट ने हमेशा रखा। आम आदमी के जीवन की परिस्थितियों को विषय-वस्तु बनाकर विशिष्ट कृतियाँ लिखने में वे सव्यसाची-सरीखे थे।
‘नादान प्रेमम्’ गाँव-देहात की मुहब्बत की दास्तान है। लेखक के लिए चिर-परिचित गाँव मुक्कम तथा उधर की इरुवषमि नदी का परिवेश उपन्यास की सहजता को बढ़ाता है। इक्कोरन और मालू इसके मुख्य पात्र हैं। छल-कपट से मुक्त प्रेमिका के दिल की धड़कन का वर्णन मार्मिक है। क्या नादान होना ख़तरनाक है? यह सन्देश भी उपन्यास पढ़ते समय पाठकों के मन में सहज ही उभर आएगा। रोचक कथानक, सहज परिवेश, ग्रामीण पात्र, पात्रानुकूल भाषा, लोकजीवन के बिम्ब आदि इस उपन्यास की ख़ूबियाँ हैं।
आलोचक प्रवर प्रो. के.एम. तरकन ने इस उपन्यास का मूल्यांकन ग्रामांचल में घटित होनेवाले ‘शाकुन्तल’ के रूप में किया है।
उपन्यासकार ने ‘नादान प्रेमम्’ को अपनी पहली सन्तान का दर्जा दिया है। गौण प्रसंगों में भी गम्भीरता के बीजों को तलाशने की प्रवृत्ति यहाँ द्रष्टव्य है। यह उपन्यास प्रेम की निष्ठा को उजागर करता है, लेकिन कभी निष्ठा का परिणाम धोखा भी होता है। मानवता के उत्कर्ष की वकालत करनेवाले लेखक की एक अनुपम कृति है ‘नादान प्रेमम्’।
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