Nayee Disha
(0)
Author:
Dhirendra VermaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
295
236 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
बीसवीं सदी के आठवें दशक में प्रकाशित एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास है ‘नई दिशा’। इसमें बदलते युग की वह गाथा है, जो सामाजिक परिस्थितियों के बीच युवा-मानस की बेचैनियों से निर्मित हुई थी। जीवन की उथल-पुथल को इस उपन्यास में बड़े ही कलात्मक ढंग से चित्रित किया गया है।</p> <p>‘नई दिशा’ में एक ऐसे आदर्शवादी युवक प्रशान्त की कहानी है जो निश्छल ग्रामीण वातावरण में पलता है, लेकिन ऊँची शिक्षा पाने के लिए जब वह शहर जाता है तो वहाँ के जीवन में व्याप्त विकृतियाँ-विसंगतियाँ उसे स्तम्भित कर देती हैं। वह देखता है कि पाश्चात्य प्रभाव के चलते यहाँ पर व्यवहार ही नहीं, चिन्ता और चिन्तन के स्तर पर भी सर्वत्र अराजकता और भ्रष्टाचार का बोलबाला है। यथार्थ के जिस रूप से प्रशान्त का साक्षात्कार होता है, उससे उसे लगता है कि राजनीतिक प्रवंचना के इस युग में पूरी की पूरी पीढ़ी ही जैसे भटक गई है तथा जिस दिशा की ओर बढ़ी जा रही है, वह सही नहीं है। यह उपन्यास उसी सही दिशा की तलाश की गाथा है जिसमें बदलाव की आकांक्षा और भटकाव को दूर करने की जद्दोजहद प्रबलता से मुखर हुई है।</p> <p>इसमें मूल और मूल्यों का संवेदनात्मक पक्ष अपने प्रभाव में अद्भुत और अविस्मरणीय है। अपने समय की एक दस्तावेज़ है ‘नई दिशा’।
Read moreAbout the Book
बीसवीं सदी के आठवें दशक में प्रकाशित एक महत्त्वपूर्ण उपन्यास है ‘नई दिशा’। इसमें बदलते युग की वह गाथा है, जो सामाजिक परिस्थितियों के बीच युवा-मानस की बेचैनियों से निर्मित हुई थी। जीवन की उथल-पुथल को इस उपन्यास में बड़े ही कलात्मक ढंग से चित्रित किया गया है।</p>
<p>‘नई दिशा’ में एक ऐसे आदर्शवादी युवक प्रशान्त की कहानी है जो निश्छल ग्रामीण वातावरण में पलता है, लेकिन ऊँची शिक्षा पाने के लिए जब वह शहर जाता है तो वहाँ के जीवन में व्याप्त विकृतियाँ-विसंगतियाँ उसे स्तम्भित कर देती हैं। वह देखता है कि पाश्चात्य प्रभाव के चलते यहाँ पर व्यवहार ही नहीं, चिन्ता और चिन्तन के स्तर पर भी सर्वत्र अराजकता और भ्रष्टाचार का बोलबाला है। यथार्थ के जिस रूप से प्रशान्त का साक्षात्कार होता है, उससे उसे लगता है कि राजनीतिक प्रवंचना के इस युग में पूरी की पूरी पीढ़ी ही जैसे भटक गई है तथा जिस दिशा की ओर बढ़ी जा रही है, वह सही नहीं है। यह उपन्यास उसी सही दिशा की तलाश की गाथा है जिसमें बदलाव की आकांक्षा और भटकाव को दूर करने की जद्दोजहद प्रबलता से मुखर हुई है।</p>
<p>इसमें मूल और मूल्यों का संवेदनात्मक पक्ष अपने प्रभाव में अद्भुत और अविस्मरणीय है। अपने समय की एक दस्तावेज़ है ‘नई दिशा’।
Book Details
-
ISBN9789389598391
-
Pages88
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Love In Jamshedpur
- Author Name:
Ajitabha Bose
- Rating:
- Book Type:

- Description: Do you remember who was your first crush? Did you too dream of marrying her? Everyone does somehow, isn't it? So did Arnab! When he saw simpi for the very first time, he fell in for a forever-love. Yet, the dream took a different turn when she rejected him time and again. What lies ahead? Will Arnab be able to impress his first love? Or will he fail, again? Bestselling author, ajitabha Bose brings to you a true tale of love based in the small town of Jamshedpur.
Ajeeb Aadmi
- Author Name:
Ismat Chugtai
- Book Type:

-
Description:
मंगला चोट खाई नागिन की तरह पलटकर ख़ुद ही को डसने लगी। उसके पति ने, जो उसका आशिक भी था, माशूक भी, उसके नारीत्व को ठुकराया था। उसके प्यार का अपमान किया था। उसकी कला का गला घोंट दिया था। कभी उसकी आवाज गली-कूचों में गूँजा करती थी, ख़ुद को सारी दुनिया पर छाई हुई महसूस करती थी। अब उसके गाने कभी-कभी ही रेडियो पर सुनाई देते। दुनिया ने उसे ज़िन्दा ही दफ़न करना शुरू कर दिया था। और इस कफ़न-दफ़न में धर्म—उसके पति का हाथ सबसे आगे था। अपनी फ़िल्मों के लिए रिज़र्व करके, फिर एकदम दो कौड़ी की एक लड़की जरीन की ख़ातिर उसे दूध की मक्खी की तरह निकल फेंका। आख़िर मंगला अपने अस्तित्व की रक्षा में सफल हो सकी? धर्मदेव और जरीन के प्यार का क्या हुआ? क्या वह परवान चढ़ सका; क्या फिर मंगला और धर्मदेव का मिलन हो सका? बहुचर्चित-प्रशंसित लेखिका इस्मत चुग़ताई का एक रोमांटिक उपन्यास है—‘अजीब आदमी’। इस उपन्यास में लेखिका ने फ़िल्म-जगत की रंगीनियों की यथार्थ झाँकी बड़ी बेबाकी से प्रस्तुत की है। बेहद रोचक और पठनीय उपन्यास।
Jareela
- Author Name:
Bhalchandra Nemade
- Book Type:

-
Description:
जरीला चांगदेव पाटील नामक युवक के बहाने उस अखिल भारतीय भूमि की जटिल वास्तविकता से रूबरू कराता है जो जाति, धर्म, परम्परा, संस्कार और इनके साथ ईर्ष्या, अहंकार, स्पर्द्धा आदि भावों के मिलने से बनती है। इसमें भारतीय जन-जीवन के उस पहलू रेखांकित किया गया है जिसे किसी एक प्रान्त या स्थान तक सीमित नहीं किया जा सकता।
चांगदेव इस भूमि पर स्वयं को अकेला अनुभव करता है। वह अपने आसपास की संकीर्णताओं से ऊब उठता है लेकिन किसी से स्थायी घृणा उसे कभी नहीं होती। अपनी तरफ से वह अपेक्षा से ज्यादा देता है और जवाब में बहुत कम चाहता है। उसके लिए बड़े सवाल वे नहीं जो आसपास के सब लोगों के हैं। अपने होने की परम सार्थकता को अनुभव कर पाना ही उसकी एकमात्र इच्छा है।
वह एक पहाड़ी गाँव के कॉलेज में प्रोफेसर है जहाँ पर जाति की राजनीति सबसे प्रभावी शक्ति है। लेकिन वह उस सबसे ऊपर उठकर अपना काम करता रहता है और खुश है। विद्यालय के सहकर्मी अध्यापकों और गाँव के लोगों के साथ उसका अपनी तरह का एक सम्बन्ध बनता है। लेकिन तभी गाँव का ट्रांसफार्मर जल जाता है, और छह महीने के लिए लोग वापस अन्धकार युग में चले जाते हैं। बाहर का यह अँधेरा धीरे-धीरे उसके भीतरी अकेलेपन को इतना गहरा देता है कि वह घबरा उठता है। किसी से या कहीं से अन्तिम तौर पर जुड़ नहीं जाना है, उसका यह आन्तरिक आग्रह भी उसे गतिमान रखता है। अपने मामूलीपन को बचाते हुए वह जिन मूल्यों की रक्षा करता है, वे उसके सामने बहुत स्पष्ट नहीं हैं लेकिन वह उसी अस्पष्ट से मानवीय आग्रह के आधार पर अपने व्यक्तित्व को खड़ा करता है।
जरीला स्वतंत्र रूप से उतना ही दिलचस्प और पूर्ण पाठ है, जितना कि शृंखला की एक कड़ी के रूप में। यह एक बड़ी विशेषता है।
Apaar Khushi Ka Gharana
- Author Name:
Arundhati Roy
- Book Type:

-
Description:
'अपार ख़ुशी का घराना' हमें कई वर्षों की यात्रा पर ले जाता है। यह एक कहानी है जो पुरानी दिल्ली की तंग बस्तियों से खुलती हुई फलते-फूलते नए महानगर और उससे दूर कश्मीर की वादियों और मध्य भारत के जंगलों तक जा पहुँचती है, जहाँ युद्ध ही शान्ति है और शान्ति ही युद्ध है और जहाँ बीच-बीच में हालात सामान्य होने का एलान होता रहता है।
अंजुम, जो पहले आफ़ताब थी, शहर के एक क़ब्रिस्तान में अपना तार-तार कालीन बिछाती है और उसे अपना घर कहती है। एक आधी रात को फुटपाथ पर कूड़े के हिंडोले में अचानक एक बच्ची प्रकट होती है। रहस्यमय एस. तिलोत्तमा उससे प्रेम करनेवाले तीन पुरुषों के जीवन में जितनी उपस्थित है उतनी ही अनुपस्थित रहती है।
'अपार ख़ुशी का घराना' एक साथ दुखती हुई प्रेम-कथा और असंदिग्ध प्रतिरोध की अभिव्यक्ति है। उसे फुसफुसाहटों में, चीख़ों में, आँसुओं के ज़रिये और कभी-कभी हँसी-मज़ाक़ के साथ कहा गया है। उसके नायक वे लोग हैं जिन्हें उस दुनिया ने तोड़ डाला है जिसमें वे रहते हैं और फिर प्रेम और उम्मीद के बल पर बचे हुए रहते हैं। इसी वजह से वे जितने इस्पाती हैं उतने ही भंगुर भी, और वे कभी आत्म-समर्पण नहीं करते। यह सम्मोहक, शानदार किताब एक नए अन्दाज़ में फिर से बताती है कि एक उपन्यास क्या कर सकता है और क्या हो सकता है। अरुंधति रॉय की कहानी-कला का करिश्मा इसके हर पन्ने पर दर्ज है।
The Forgotten Life
- Author Name:
Atul Purohit
- Book Type:

- Description: Have you ever been a part of that spectacular moment which changed your life or the life of someone around you? A moment that was lost in the forgotten lanes of the past? Write youth brings you a wonderful collection of forgotten stories that ought to be remembered. Life is a mire of uncertainty. The more we struggle, the more we get sucked into it. The beautiful memories along the way amalgamate with the turning tracks of our lives and are sometimes lost forever. We wish to overcome the problems we face in our paths to lead a happy and peaceful life, but destiny has something else planned for us. The best way is to face them head-on hoping that things will change for the good. Life will flourish again, and the Ray of hope will arrive brighter than ever. 'The forgotten life' Is a leap to bid farewell to hopelessness, to inspire You to meet new people, explore yourself with positivity and optimism as your guiding powers. We want you to shine again with full enthusiasm and be a bright flower in the world of wild roses. Contributors Surabhi Ghose | Dr. Palak Deshmukh | Akash rumade man VI Singh | Balasubramanian.M | Ravina Kaniyawala | Jaydeep Khot | Prativa Rathi | Sanjay bandooni | Esha sajjanhar | Payal Srivastava | Sharad Mishra | Devyani Balasra | Sri Sai Latha | Priya Vyas | Mukta Warbringer | Amit Rajpurohit.
Nadi Ke Dweep
- Author Name:
Sachchidananda Hirananda Vatsyayan 'Ajneya'
- Rating:
- Book Type:

- Description: व्यक्ति अज्ञेय की चिंतन-धरा का महत्तपूर्ण अंग रहा है, और ‘नदी के द्वीप’ उपन्यास में उन्होंने व्यक्ति के विकसित आत्म को निरुपित करने की सफल कोशिश की है-वह व्यक्ति, जो विराट समाज का अंग होते हुए भी उसी समाज की तीव्रगामी धाराओं, भंवरों और तरंगो के बीच अपने भीतर एक द्वीप की तरह लगातार बनता, बिगड़ता और फिर बनता रहता है । वेदना जिसे मांजती है, पीड़ा जिसे व्यस्क बनाती है, और धीरे-धीरे द्रष्टा । अज्ञेय के प्रसिद्द उपन्यास ‘शेखर : एक जीवनी’ से संरचना में बिलकुल अलग इस उपन्यास की व्यवस्था विकसनशील व्यक्तियों की नहीं, आंतरिक रूप से विकसित व्यक्तियों के इर्द-गिर्द बुनी गई है । उपन्यास में सिर्फ उनके आत्म का उदघाटन होता है । समाज के जिस अल्पसंख्यक हिस्से से इस उपन्यास के पत्रों का सम्बन्ध है, वह अपनी संवेदना की गहराई के चलते आज भी समाज की मुख्यधारा में नहीं है । लेकिन वह है, और ‘नदी के द्वीप’ के चरों पत्र मानव-अनुभूति के सर्वकालिक-सार्वभौमिक आधारभूत तत्त्वों के प्रतिनिधि उस संवेदना-प्रवण वर्ग की इमानदार अभिव्यक्ति करते हैं । ‘नदी के द्वीप’ में एक सामाजिक आदर्श भी है, जिसे अज्ञेय ने अपने किसी वक्तव्य में रेखांकित भी किया था, और वह है-दर्द से मंजकर व्यक्तित्व का स्वतंत्र विकास, ऐसी स्वतंत्रता की उद्भावना जो दूसरे को भी स्वतंत्र करती हो । व्यक्ति और समूह के बीच फैली तमाम विकृतियों से पीड़ित हमारे समाज में ऐसी कृतियाँ सदैव प्रासंगिक रहेंगी ।
Ek Aag Ka Dariya
- Author Name:
Harsh Ranjan
- Book Type:

- Description: मैं हर्ष रंजन हूँ, आपके लिए सर्वथा अपरिचित। ये किताब मेरा पहला परिचय है। एक सीरीज आपके सामने लाया हूँ, पाँच कहानी-संग्रह, जो एक के बाद एक आपके सामने आएंगी। लिखना कब, क्यों और कैसे शुरू होता है कहना मुश्किल है बस इतना बता सकता हूँ कि पत्रों से शुरुआत की थी। सालों गुजर गए, न आज वो चिट्ठियाँ हैं और ना... बहरहाल मैं अपने जीवन-क्रम से चुनकर दस कहानियाँ आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ। इसमे गंगा के घाट से लेकर आग के दरिया, जमीन से लेकर आकाश तक का वर्णन है। मैंने इतनी मेहनत की है कि भले ही ये कभी जीने के लिए बहुत कठिन हों लेकिन आज पढ़ने के लिए बहुत सरल हैं। आशा है कि सरलता और सादगी आपको पसंद आएगी। बस इस सीढ़ी पर पहला कदम रखिए और देखिये इस दुनिया को नए नजरिए से। रचना आपको कैसी लगी जरूर बताएं।
Sudoor Jharne Ke Jal Mein
- Author Name:
Sunil Gangopadhyay
- Book Type:

-
Description:
‘शैशव के क़रीब बीस-पच्चीस वर्ष बाद मैं रोया था। निर्लज्ज की तरह रो रहा था। मुझे हिचकियाँ आने लगीं।...मैंने खिड़की से दुबारा झाँकने की कोशिश की। ...बाहर सिर्फ़ मेघ ही मेघ। मैं गुम होता जा रहा हूँ। निचाट अकेला!...मार्गरेट, मैं हूँ।...एक बार फिर कहो, हमारा हर पल बेहद आनन्द-भरा था।’
अपने आदि और अन्त से बिलकुल बेख़बर, बेपरवाह जीवन-यात्रा के असीम विस्तार में निर्मल जल की झील जैसा चमकता एक बिन्दु, प्रेम का एक अपूर्व अनुभव। नील लोहित जब आकाश में उड़ान भरता है, तो उसकी स्मृति बस यही कुछ अपने साथ ले जाती है। मार्गरेट हमेशा-हमेशा उसके साथ नहीं रह सकती, भले ही उसे उसके ईश्वर से अनुमति भी मिल गई हो। ‘अपने माँ, डैडी, यहाँ तक कि गॉड से भी ज़्यादा, मैं तुम्हें प्यार करती हूँ...मुझे ले लो...’ वह कहती है। लेकिन नील के अन्तस की बेचैनी उसे उस झील के तट पर डेरा डालने की इजाज़त नहीं देती।
बांग्ला के विख्यात कथाकार सुनील गंगोपाध्याय की क़लम से उतरी यह प्रेमकथा हमें अपने साथ अमेरिका के एक ख़ूबसूरत अंचल की बड़ी आत्मीय सैर कराती हुई मनुष्य की इच्छाओं, लाचारियों, आवेगों और निराशाओं से भी परिचित कराती है; और प्रेम के प्रति एक गहन आस्था भी जगाती है।
Jungle Tantram
- Author Name:
Shrawan Kumar Goswami
- Book Type:

-
Description:
सिंह बनाम राजनेता। मोर बनाम प्रशासक। नाग बनाम पूँजीपति और चूहा बनाम आम आदमी—‘जंगल तंत्रम’ के ये ख़ास घटक हैं। इन्हीं चार जन्तुओं के माध्यम से लेखक ने आज की राजनीति के तहत चलनेवाली लोकतांत्रिक शासन-प्रणाली के जनविरोधी चरित्र को उजागर किया है।
सिंह, मोर और नाग किस तरह अपने-अपने निहित स्वार्थों के लिए पारस्परिक गठजोड़ किए हुए हैं, फ़ैंटेसीनुमा इस उपन्यास से यह बख़ूबी समझ में आ जाता है। चूहा इसे समझता भी है कि इसकी जोड़-तोड़ का असली शिकार तो मैं ही हूँ पर वह इससे उबर नहीं पाता। छोटे-छोटे प्रलोभनों, सुख-सुविधाओं की आस उसे बराबर कमज़ोर बनाए हुए है। संघर्ष के लिए वह खड़ा तो होता है, पर उसी की वर्गीय और परम्परागत दुर्बलताएँ उसकी पीठ का बोझ बनी हुई हैं।
वास्तव में सुपरिचित कथाकार श्रवण कुमार गोस्वामी का यह बहुचर्चित उपन्यास अपनी सार्थक प्रतीकात्मकता और धारदार भाषा-शैली के आद्योपान्त निर्वाह के कारण एक अनूठा प्रभाव छोड़ता है।
Its My Love Story
- Author Name:
Ajitabha Bose
- Rating:
- Book Type:

- Description: India's most popular pocket book writer brings to you his first novel. It's a story inspired from real life incidents. A story based on the college life of 6 friends. It's a love story of Aditya and janvi. Aditya is from Jamshedpur and moves to Delhi for his graduation. He aspires to become a successful filmmaker. Janvi is a delhiite and loves travelling. She dreams to settle in Italy someday. Life takes a different turn when love brought them together. What lies ahead? Where will destiny lead them? Bestselling author ajitabha Bose brings to you another heartwarming tale of love, friendship and dreams.
Ek Kasbe Ke Notes
- Author Name:
Neelesh Raghuwanshi
- Book Type:

-
Description:
नीलेश रघुवंशी की एक उपलब्धि यह है कि उसने एक ऐसे कथानक को, जिसमें भावनिकता के भयावह अवसर थे, एक निर्मम ढंग से यथार्थवादी रखा है जिसमें हास-परिहास के लिए भी गुंजाइश है। परिवार में माँ है लेकिन वह हमेशा ममतामयी और पतिपरायणा नहीं है, उसमें छिपी विद्रोहिणी कभी भी जागृत हो सकती है। इकलौता बेटा मुँहफट और दुर्विनीत है। अलग-अलग उम्रों, स्वभावों और नियतियों वाली बेटियाँ हैं लेकिन उनमें एक बराबरी का बहनापा है। उनके अपने-अपने कुँवारे और ब्याहता सपने हैं। उनकी जद्दोजहद, छोटी-बड़ी दुखान्तिकाएँ और जीवन-परिवर्तक उपलब्धियाँ भी हैं। क्या भारत सरीखे जटिल समाज में ‘फेमिनिस्ट’ सरीखे सीमित और भ्रामक शब्द की जगह ‘एक क़स्बे के नोट्स’ को हम ‘मातृवादी’ या ‘बेटीवादी’ या ‘बहनापावादी’ कह सकते हैं? और यदि पिता को लेकर इतनी समझदारी और स्नेह है तो ‘पितावादी’ भी क्यों नहीं?
शायद यह हिन्दी का पहला उपन्यास है जिसमें किसी लेखिका ने एक निम्न-मध्यवर्गीय क़स्बाई पारिवारिक जीवन को इतनी अन्तरंगता और असलियत से जीवन्त किया हो। प्रतिभा के लिए सृजन में तो कुछ भी असम्भव नहीं, किन्तु किसी पुरुष के लिए ऐसे घर-परिवार का इतना अन्दरूनी अनुभव मुश्किल ही था।
सच तो यह लगता है कि लेखिका ने इस एक क़स्बे के बहाने लगभग सभी उत्तर भारतीय क़स्बों को चेहरा दे दिया है। हम सब यदि (अब) छोटे शहरों में नहीं भी रहते हैं तो कभी-न-कभी उनमें हमारी बूद-ओ-बाश थी, वहाँ से गुज़रते, लौटते रहते हैं, हमारे कितनी ही दोस्तियाँ और रिश्ते, और सबसे ऊपर, स्मृतियाँ, अब भी वहीं बसी हुई हैं। हिन्दी लेखन से एक झटके से क़स्बा काट दो, वह हलाल हो जाएगा। नीलेश रघुवंशी ने बेशक अपने क़स्बे को सजीव पात्रों से आबाद किया है लेकिन उसमें हरकत और जान तभी आती है जब सारे क़स्बाई दृश्य, ध्वनियाँ, रंग, गंध, स्पर्श और वे मौसम और धूल-धूसर जो सिर्फ़ क़स्बों में नसीब होते हैं, उस अलबम को मूक सीपियाँ से परदे के वाचाल रंगीन में बदल देते हैं। टेलीविज़न पर अपने लम्बे अनुभव के कारण लेखिका अपना शिल्प नियंत्रित रखना जानती है, और पठनीयता के स्तर पर पिछले कुछ वर्षों में ऐसे उपन्यासों का दुर्भिक्ष-सा रहा है।
—विष्णु खरे
Dhapel
- Author Name:
Shyam Bihari 'Shyamal'
- Book Type:

-
Description:
‘धपेल’ हिन्दी का ऐसा पहला उपन्यास है, जिसमें देश के सर्वाधिक सूखा-अकाल पीड़ित, भूख-ग़रीबी से त्रस्त-सन्तप्त तथा मृत्यु-उपत्यका का पर्याय कहे जानेवाले पलामू क्षेत्र का लोमहर्षक जीवन-संघर्ष सीधे-सीधे दर्ज हुआ है—बग़ैर किसी कलाबाज़ी या कृत्रिम लेखकीय कसरत
के।बांग्ला भाषा में पलामू पर विपुल साहित्य रचा गया है। पिछली ही शताब्दी में बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय के अग्रज सजीवचन्द्र चट्टोपाध्याय ने 1880 में ‘पलामू’ नामक औपन्यासिक कृति का सृजन किया था। तब से लेकर महाश्वेता देवी जैसी शीर्षस्थ रचनाकार तक की क़लम पलामू पर निरन्तर चलती रही। हिन्दी में ही इस पर ज़मीनी अनुभवों से उपजी प्रामाणिक कृति का अभाव रहा है। ‘धपेल’ इस अभाव को प्रभावशाली ढंग से मिटाता है। 1993 के एक अकाल-सूखा प्रसंग को केन्द्र में रखकर रचा गया यह उपन्यास अन्ततः इस अभिशप्त भूगोल-विशेष की ही गाथा नहीं रह जाता, बल्कि भूख और ग़रीबी की जड़ों को उधेड़ते हुए अपने सम्पूर्ण देश और काल का मर्मान्तक आख्यान बन जाता है। ‘पलामू ग़रीब भारत का आईना है’ जैसे महाश्वेता देवी के पुराने चिन्ता-कथन का श्यामल ने अपने इस पहले उपन्यास में जैसा प्रामाणिक एवं मर्मस्पर्शी चित्रण-विश्लेषण किया है, इससे उनकी रचना-क्षमता एवं वर्णन-कौशल का पता चलता है।
यहाँ ‘धपेल’ एक ऐसे भयावह प्रतीक के रूप में चित्रित हुआ है जो सभी प्रकार की जीवनी-शक्तियों को सोखने का काम करता है। दिवंगत आत्मा की शान्ति के लिए होनेवाले ब्रह्मभोज में असाधारण मात्रा में भोजन करनेवाले ‘धपेल’ बाबा अन्ततः व्यवस्था के उन तमाम धपेलों के आगे बौने साबित होते हैं, जो हर क्षेत्र में ऊर्जा को चट करने में जुटे हुए हैं। व्यवस्था के धपेलीकरण का यह सारा वृत्तान्त रोंगटे खड़े कर देनेवाला है।
Sensation of A Soul
- Author Name:
Jyoti Patel
- Book Type:

- Description: Despite their contrasting personas, two people get conjoined and manifest that true love stories never have final; a woman’s fingers fling away from the keypad at the very instant of reading startling news. A man founds himself standing in silence amidst talks, unable to react to the love of his life. A couple never praises each other until someday; a guy always prefers to look up at the sky and think enormously about his precious life and death. There are some sorrowful and amicable poetries and thought-provoking stories. The affecting poems and captivating stories in this book share the Theme of relationship, adoration, passion, love, hope, faith, desire, dreams and life. The inner meanings are even more profound than the words used in this splendid and awe-inspiring book. The sensation of a soul is sure to touch the hearts of many readers, brings out the best moments of one’s life and encourages people to evaluate their inner selves and the world around them with advanced eyes.
Andhera Kona
- Author Name:
Uma Shankar Choudhary
- Book Type:

-
Description:
हर चर्च में एक क्वायर होता है। लड़के-लड़कियों का, स्त्रियों और पुरुषों का, जो आस्थावान और बे-आस्था सबको अपने धीमे गायन से आध्यात्मिक दुनिया की ऐसी गलियों में लिए चलता है कि मन भीग जाता है। ‘अँधेरा कोना’ पढ़ते हुए एक ऐसा ही धीमा दुःख मन को जकड़ने लगता है और फिर उसकी गिरफ्त से छूटना खासा मुश्किल हो जाता है। यह उपन्यास...एक नृशंस समय का रेखांकन है, एक हताशा और निराशा के बीच झूलते समाज का यथार्थवादी चिन्तन है।
उमा शंकर चौधरी एक जागरूक पर्यवेक्षक की तरह हमें उन गायब जगहों पर ले जाते हैं जहाँ पात्रों का एक क्वायर कुछ गा रहा है। आप यदि नजदीक जाकर सुनने की कोशिश करेंगे तो सुन लेंगे बखूबी उनका हलाक हो जाने वाला गीत। इस गीत में एक पूरा समय और समाज है, एक लोकतांत्रिक व्यवस्था की उखड़ती परतें हैं, प्रेम है, निस्तार है, अभाव है और सब कुछ खत्म हो जाने के पहले कुछ विचार करने और बचा लेने की गुहार है।
अत्यन्त चुस्त भाषा, कथ्य की रवानगी, राजनीति और समाज पर मजबूत पकड़ के दिलचस्प वाकयों से भरा यह उपन्यास कोई जादुई यथार्थवाद का आख्यान नहीं है। यह तेतरी गाँव और पटौना स्टेशन का आज का सच है। बिहार के किसी जिले का सच। वहाँ की छीजती भाषा और संस्कृति का सच। स्त्री मुक्ति के शहरी आडम्बर का गँवई, पिछड़ा और दुखद सच। मोहब्बत के नाश का सच। प्रकृति से अलगाव का सच। लोकतंत्र के प्राण-पखेरू उड़ने की आशंका का सच। जो प्रीतिकर नहीं उसे ओझल कर देने का सच। उन अँधेरे कोनों का सच जो पारम्परिक रूप से पुरानी और बेकाम हो गई चीजों को फेंकने से पहले कुछ देर छिपा देने के लिए हुआ करते थे। लेकिन आज लोकतंत्र ने अपने तईं ऐसी व्यवस्था कर दी है कि हम सबने अपनी सुविधानुसार, अपने घरों, मोहल्लों के अलावा सार्वजनिक इस्तेमाल के स्पेसेस में भी वे अँधेरे कोने ‘डंपिंग ग्राउंड’ तैयार कर लिए हैं जहाँ हम बहुत आसानी से बेमोल चीजों को फेंक कर आ सकते हैं।
ऐसे में गायब हो गए विदो बाबू को कैसे ढूँढ़े नागो, गोकि उसे फरियाद करनी है और फरियाद करने का माद्दा तो सिर्फ उस साहसी बूढ़े के पास था—यही सच है आज का—देखिए न यह जादुई विकास का कैसा अद्भुत खेल है कि हमने अपने एक्टिविस्टों, समाज सुधारकों, को ही अँधेरे कोने में डाल दिया है।
—वन्दना राग
Sadabahar Kahaniyan Maxim Gorky
- Author Name:
Maxim Gorky
- Book Type:

- Description: मैक्सिम गोर्की रूस के प्रसिद्ध लेखक और संस्कृति चिंतक थे। गोर्की एक सामान्य मजदूर थे लेकिन अपनी रचनात्मक प्रतिभा से दुनिया के चहेते लेखक बन गये। उनकी लेखन शैली ने अनगिनत लेखकों को प्रभावित किया, जिसे "समाजवादी यथार्थवाद" कहा जाता है। उनकी रचनाओं में ग़रीब-अमीर में निरंतर बना रहने वाला संघर्ष, उनकी सौन्दर्य भावना, खुशी, जिजीविषा और अनुभव से पैदा परिवर्तनकारी विवेक की रचनात्मक अभिव्यक्ति होती है। यहाँ उनकी हर तरह की कहनियाँ मिलेंगी ।
The World As I See It
- Author Name:
Albert Einstein
- Book Type:

- Description: To the majority of people Einstein's theory is a complete mystery. Their attitude towards Einstein is like that of Mark Twain towards the writer of a work on mathematics: here was a man who had written an entire book of which Mark could not understand a single sentence. Einstein, therefore, is great in the public eye partly because he has made revolutionary discoveries which cannot be translated into the common tongue. We stand in proper awe of a man whose thoughts move on heights far beyond our range, whose achievements can be measured only by the few who are able to follow his reasoning and challenge his conclusions. There is, however, another side to his personality. It is revealed in the addresses, letters, and occasional writings brought together in this book. These fragments form a mosaic portrait of Einstein the man. Each one is, in a sense, complete in itself; it presents his views on some aspect of progress, education, peace, war, liberty, or other problems of universal.
Our Love That Fell Apart
- Author Name:
Nupur Luthra
- Rating:
- Book Type:

- Description: Brian serves grey with divorce papers, announces he’s gay and is in love with someone else. Her whole world falls apart, filled with rage, she has no one to turn too. Brian feels bad and is miserable for causing her a lot of pain, but the heart wants what it wants. Brian and his lover get married, which causes grey further pain. What happens next? How does grey deal with the pain and agony? Does it all end well or does someone die in the end? Find out in our love falls apart.
When Life Gives You Another Chance
- Author Name:
Maninder Singh
- Book Type:

- Description: "Life is full of suprises. Sometimes everything happens as per your plans but in few cases, you have no idea about what life might be cooking for you. Lucky are those who get a second chance in their lives to redeem their love."
Srijan Ka Rasayan
- Author Name:
Shivmurti
- Book Type:

-
Description:
रचना किसी विस्मय से कम नहीं है। शब्दों में जैसे एक समूचा संसार साकार हो उठता है। रचनाकार स्वयं इस रहस्य से अभिभूत रहता है कि कैसे अतीत का कोई क्षण भाषा में कौंध उठता है। स्मृति के अपार विस्तार में शब्द, स्पर्श, रूप, रस व गन्ध के असंख्य अनुभवों में से कब कौन सृजन का सहयात्री बन जाए, कहना कठिन है।
वरिष्ठ कथाकार शिवमूर्ति के गद्य का अनूठा आयाम उद्घाटित करती पुस्तक ‘सृजन का रसायन’ संस्मरण के शिल्प में उनकी रचना-प्रक्रिया को रेखांकित करती है। शिवमूर्ति का जीवन अनुभवों का भंडार है। गाँव और गाँव-जवार के जाने कितने चरित्र उनके लेखन का अभिन्न अंग बन चुके हैं। जिस कथारस व दृश्यधर्मिता के साथ ठेठ देसी अन्दाज़ में वे वृत्तान्त साधते हैं, वह अद्भुत है। गाँव के छोटे-छोटे विवरणों के अलावा जियावन दरजी, डाकू नरेश, धन्नू बाबा, संतोषी काका और जुल्म का विरोध करनेवाला जंगू—सब पुस्तक के पृष्ठों पर जाग उठते हैं।
शिवमूर्ति ने माता-पिता, परिवार, रिश्तेदारों और गाढ़े समय के साथियों को कृतज्ञ आत्मीयता के साथ याद किया है। बकरी चराते, अन्य श्रम साध्य काम करते, मेले में मजमा लगाते हुए वे किस तरह सफलता की राह पर आगे बढ़े, किस तरह सर्जना के संसार में विकसित हुए, प्रतिष्ठा प्राप्त की, इसका वर्णन अत्यन्त पठनीय है।
स्त्रियाँ ‘सृजन का रसायन’ की आत्मा हैं। माँ, नानी, पत्नी, परदेसिन मइया, जग्गू बहू, मनी बहू आदि अनेक चरित्र। और हाँ, ‘पितु मातु सहायक स्वामि सखा’ सरीखी शिवकुमारी। शिवमूर्ति और शिवकुमारी के विचित्र सम्बन्धों पर हिन्दी साहित्य में कौतूहल मिश्रित बहुत कुछ कहा-लिखा गया है। शिवमूर्ति इस पुस्तक में इस रिश्ते की दास्तान बयान करते हैं। जीवनानुभवों के साथ साहित्य के अनेक प्रश्नों के संवाद करती यह पुस्तक सचमुच अनूठी है।
Barah Baje Raat Ke
- Author Name:
Dominique Lapierre
- Book Type:

- Description: स्वाधीनता-आन्दोलन की चरम परिणति थी आज़ादी लेकिन उससे जुड़ा सदी का कुरूपतम सच—विभाजन। बारह बजे रात के उसी का वृत्तान्त है। यह बड़ी–बड़ी परिघटनाओं वाला इतिहास नहीं बल्कि छोटी-छोटी घटनाओं, मामूली विवरणों, हज़ारों दस्तावेजों और साक्षात्कारों से सजा सूक्ष्म इतिहास है। हालाँकि लैरी कॉलिन्स और डोमीनिक लापियर दोनों विदेशी लेखक हैं, फिर भी जिस आत्मीयता और निष्पक्षता से उन्होंने विभाजन के गोपन रहस्यों, षड्यंत्रों, साम्प्रदायिक नंगई और ओछेपन को उजागर किया है, उसकी चतुर्दिक सराहना हुई है। दिलचस्प है कि इसमें कहीं भी ब्रिटिश साम्राज्यवाद का पक्ष नहीं लिया गया है। विरले ही कोई ग़ैर-साहित्यिक कृति क्लासिक बनती है लेकिन सच्चाई, पठनीयता और निष्पक्षता की बदौलत यह क्लासिक बन गई है। भारतीय उपमहाद्वीप की कई पीढ़ियाँ इसे पढ़ेंगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book