🇮🇳 India’s home-grown full-stack ecosystem for Publishers, Authors, Writers, and Readers. 🎊🎊 Celebrate Your Language, Authors from Your Own Land, with Rachnaye!!! 🎊🎊 Enjoy 🎧 Audiobooks at Rachnaye, download the Rachnaye App from Play Store or App Store

Kavya Ke Roop

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


About the book

‘काव्य’ शब्द संस्कृत में गद्य और पद्य दोनों का द्योतक माना गया है। गुलाबराय इसी ‘गद्य-पद्य’ के साहित्यिक स्वरूप पर विचार करते हुए ‘काव्य के रूप’ में साहित्यालोचन के सिद्धान्तों की चर्चा करते हैं। संस्कृत साहित्य की परम्परा में मूलतः ‘काव्य’ का विभाजन श्रव्य और दृश्य इन्हीं दो रूपों में होता आया है; किन्तु साहित्यिक विधाओं की आपसी विभाजन रेखा को परिभाषित करना और उनके बीच के अन्तर को उद्घाटित करना अत्यन्त सूक्ष्म कार्य है जिसे इस पुस्तक में थोड़ी स्थूलता प्रदान की गई है। गुलाबराय अपने विचारों को साहित्य की भारतीय और पाश्चात्य परम्परा के सैद्धान्तिक निकष पर परखते हुए ‘काव्य के रूप’ में न केवल साहित्यिक विधाओं के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करते हैं बल्कि विधाओं के विकासक्रम के संक्षिप्त इतिहास पर भी दृष्टि डालते हैं। दृष्टिपूर्ण ढंग से ‘काव्य के रूप’ पुस्तक का आरम्भ, मध्य और समापन युक्तियुक्त प्रासंगिकता को सृजित करता है, जो आलोचना के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक धरातल पर साहित्य के स्वरूप के विविध पक्षों को अपने में समेटे हुए है। साहित्य के विधागत स्वरूप और उसके विकासक्रम से परिचय करानेवाला यह प्राथमिक कार्य गुलाबराय द्वारा साहित्यालोचन के सृजनात्मक अवदान को प्रतिफलित करता है, जो इस पुस्तक को साहित्य के मूल्यांकन के स्तर पर अधिक समीचीन बनाएगा।

Read more

₹ 250

₹ 200 20% off

Available

Rachnaye membership

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format

Frequently bought together
Kavya Ke Roop This book ₹200
Zindagi - Story of Life Vastvik Amera ₹175
Born At Midnight Kedar Vitekar ₹170
3 books selected ₹595 ₹545

100% Original

Fast Dispatch

Secure Payment

About the Book

‘काव्य’ शब्द संस्कृत में गद्य और पद्य दोनों का द्योतक माना गया है। गुलाबराय इसी ‘गद्य-पद्य’ के साहित्यिक स्वरूप पर विचार करते हुए ‘काव्य के रूप’ में साहित्यालोचन के सिद्धान्तों की चर्चा करते हैं। संस्कृत साहित्य की परम्परा में मूलतः ‘काव्य’ का विभाजन श्रव्य और दृश्य इन्हीं दो रूपों में होता आया है; किन्तु साहित्यिक विधाओं की आपसी विभाजन रेखा को परिभाषित करना और उनके बीच के अन्तर को उद्घाटित करना अत्यन्त सूक्ष्म कार्य है जिसे इस पुस्तक में थोड़ी स्थूलता प्रदान की गई है।

गुलाबराय अपने विचारों को साहित्य की भारतीय और पाश्चात्य परम्परा के सैद्धान्तिक निकष पर परखते हुए ‘काव्य के रूप’ में न केवल साहित्यिक विधाओं के विभिन्न पहलुओं को स्पष्ट करते हैं बल्कि विधाओं के विकासक्रम के संक्षिप्त इतिहास पर भी दृष्टि डालते हैं। दृष्टिपूर्ण ढंग से ‘काव्य के रूप’ पुस्तक का आरम्भ, मध्य और समापन युक्तियुक्त प्रासंगिकता को सृजित करता है, जो आलोचना के सैद्धान्तिक और व्यावहारिक धरातल पर साहित्य के स्वरूप के विविध पक्षों को अपने में समेटे हुए है। साहित्य के विधागत स्वरूप और उसके विकासक्रम से परिचय करानेवाला यह प्राथमिक कार्य गुलाबराय द्वारा साहित्यालोचन के सृजनात्मक अवदान को प्रतिफलित करता है, जो इस पुस्तक को साहित्य के मूल्यांकन के स्तर पर अधिक समीचीन बनाएगा।

Book details

Fast dispatchShips within 48 hours
Secure paymentOnline, or cash on delivery on eligible orders
100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Paperback
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
1st
Publication year
2025
Weight
230 grams
ISBN-13
9789349180895
Pages
248
Reading time
~8 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 21.5 cm
Language
Hindi

Recommended for you

Customer reviews

Be the first to write a review

Read this one? Tell other readers what you thought about the story, the translation and the print.

Offers

Loading offers…

whatsapp