Mahabharat : Ek Navin Rupantaran
(0)
Author:
Shiv K. KumarPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
399
₹ 319.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
‘महाभारत’ विश्व-इतिहास का प्राचीनतम महाकाव्य है। होमर की ‘इलियड’ और ‘ओडीसी’ से कहीं ज़्यादा प्रवीणता के साथ परिकल्पित और शिप्लित यह रचनात्मक कल्पना की अद्भुत कृति है। ऋषि वेदव्यास द्वारा ईसा के प्रायः 2000 वर्ष पूर्व रचित इस महाकाव्य में लगभग समस्त मानवीय मनोभावों—प्रेम और घृणा, क्षमा और प्रतिशोध, सत्य और असत्य, ब्रह्मचर्य और सम्भोग, निष्ठा और विश्वासघात, उदारता और लिप्सा—की सूक्ष्म प्रस्तुति मिलती है।</p> <p>यों तो ‘महाभारत’ भारतीय मानस में रचा-बसा ग्रन्थ है, पर इसने सम्पूर्ण विश्व के पाठकों को आकर्षित किया है। शायद इसीलिए इस महाकाव्य का रूपान्तर विश्व की सभी प्रमुख भाषाओं में हुआ है। परन्तु विस्मय होता है यह देखकर कि ज़्यादातर रूपान्तरों में इसकी क्षमता का प्रतिपादन एक काव्यात्मक सौन्दर्य और सुगन्ध से समृद्ध कथा के रूप में नहीं हो पाया है। सम्भवतः इसलिए कि लेखकों ने मूलतः इसके कहानी पक्ष को ही प्रधानता दी।...किन्तु इस पुस्तक के लेखक शिव के. कुमार ने इसी कारण इस महाकाव्य में कुछ रंग और सुगन्ध भरने का प्रयास किया है।</p> <p>यह वस्तुतः ‘महाभारत’ का एक नवीन रूपान्तर है। ‘महाभारत’ एक अद्वितीय रचना है। यह काल और स्थान की सीमाओं से परे है। इसलिए हर युग में इसके साथ संवाद सम्भव है। वर्तमान युग में भी सामाजिक न्याय, राजनीतिक स्वार्थजनित राष्ट्र विभाजन, नारी सशक्तिकरण और राजनेताओं के आचरण के सन्दर्भों में इसका आर्थिक औचित्य है। अंग्रेज़ी से हिन्दी में इस कृति का अनुवाद करते हुए प्रभा के. सिंह ने हिन्दी भाषा की प्रकृति का विशेष ध्यान रखा है। समग्रतः एक अनूठी रचना।
Read moreAbout the Book
‘महाभारत’ विश्व-इतिहास का प्राचीनतम महाकाव्य है। होमर की ‘इलियड’ और ‘ओडीसी’ से कहीं ज़्यादा प्रवीणता के साथ परिकल्पित और शिप्लित यह रचनात्मक कल्पना की अद्भुत कृति है। ऋषि वेदव्यास द्वारा ईसा के प्रायः 2000 वर्ष पूर्व रचित इस महाकाव्य में लगभग समस्त मानवीय मनोभावों—प्रेम और घृणा, क्षमा और प्रतिशोध, सत्य और असत्य, ब्रह्मचर्य और सम्भोग, निष्ठा और विश्वासघात, उदारता और लिप्सा—की सूक्ष्म प्रस्तुति मिलती है।</p>
<p>यों तो ‘महाभारत’ भारतीय मानस में रचा-बसा ग्रन्थ है, पर इसने सम्पूर्ण विश्व के पाठकों को आकर्षित किया है। शायद इसीलिए इस महाकाव्य का रूपान्तर विश्व की सभी प्रमुख भाषाओं में हुआ है। परन्तु विस्मय होता है यह देखकर कि ज़्यादातर रूपान्तरों में इसकी क्षमता का प्रतिपादन एक काव्यात्मक सौन्दर्य और सुगन्ध से समृद्ध कथा के रूप में नहीं हो पाया है। सम्भवतः इसलिए कि लेखकों ने मूलतः इसके कहानी पक्ष को ही प्रधानता दी।...किन्तु इस पुस्तक के लेखक शिव के. कुमार ने इसी कारण इस महाकाव्य में कुछ रंग और सुगन्ध भरने का प्रयास किया है।</p>
<p>यह वस्तुतः ‘महाभारत’ का एक नवीन रूपान्तर है। ‘महाभारत’ एक अद्वितीय रचना है। यह काल और स्थान की सीमाओं से परे है। इसलिए हर युग में इसके साथ संवाद सम्भव है। वर्तमान युग में भी सामाजिक न्याय, राजनीतिक स्वार्थजनित राष्ट्र विभाजन, नारी सशक्तिकरण और राजनेताओं के आचरण के सन्दर्भों में इसका आर्थिक औचित्य है। अंग्रेज़ी से हिन्दी में इस कृति का अनुवाद करते हुए प्रभा के. सिंह ने हिन्दी भाषा की प्रकृति का विशेष ध्यान रखा है। समग्रतः एक अनूठी रचना।
Book Details
-
ISBN9788126723300
-
Pages344
-
Avg Reading Time11 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Gurukul : Ek Adhoori Kahani : Vol. 2
- Author Name:
Anita Rakesh
- Book Type:

-
Description:
गुरुकुल’ का यह दूसरा भाग उसी चिन्ता का गम्भीर और गहन विस्तार है जो उपन्यास के पहले भाग में अंकुरित होती दिखाई दी थी।
पहले उपन्यास का भोला-भाला पार्थ यहाँ पर्याप्त वयस्क हो चुका है। वह न सिर्फ़ समाज की थोथी नैतिकता की अँधेरी गलियों में दुबके गे समुदाय की दुनिया को खुली आँखों से देख रहा है, बल्कि उनके हित में एक निर्णायक संघर्ष की तैयारी भी कर रहा है।
कहने की ज़रूरत नहीं कि हिन्दी में वैकल्पिक यौन-व्यवहार के माध्यम से सामाजिक और मानवीय सहिष्णुता की तलाश का यह पहला प्रयास है। सवाल बहुत सीधा है कि स्वतंत्रता और समता के अलम्बरदार हमारे तथाकथित लोकतांत्रिक समाज में कुछ लोगों को सिर्फ़ उनके ‘सेक्सुअल प्रिफ़ेरेंस’ के कारण ही क्यों समाज की घृणा और क़ानून की क्रूरता का पात्र बना दिया जाता है? लेकिन जवाब इतना सीधा नहीं है, क्योंकि न हममें इतना नैतिक साहस है और न इतनी इंसानियत।
यह उपन्यास भी इसका जवाब नहीं देता, यह उसकी ज़िम्मेदारी भी नहीं है, वह बस इस सवाल के पीछे छिपे हमारे ख़ूँख़्वार और दानवी चेहरों को उघाड़ता है। वह बताता है कि हम क्या हैं, हमारी नैतिक पवित्रता क्या है, हमारी न्याय व्यवस्था क्या है और हमारी पुलिस क्या है, और इस तरह इस सवाल के जवाब की अनिवार्यता को रेखांकित करता है।
Yuvraj Chunda
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
- Book Type:

-
Description:
युवराज चूण्डा का प्रस्थान-बिन्दु इतिहास है— राजपूत काल का इतिहास। उपन्यासकार का उद्देश्य न तो सिर्फ व्यतीत हो चुके समय का चित्रण करना है, और न ही उस काल के यथार्थ की अनदेखी कर उसका आकर्षक किन्तु अयथार्थ चित्र प्रस्तुत करना—ऐतिहासिक कथा का आवरण लेकर भी उसने इस देश की उस चारित्रिक विशेषता का उद्घाटन करने का प्रयत्न किया है जो न केवल हमारी वर्षों की गुलामी का कारण बनी रही, बल्कि आज भी वह किसी-न-किसी रूप में हमारी जड़ों में घुन की तरह लगी है—“वैसे अगर राजस्थान के राजपूत राजा संयुक्त रूप से दिल्ली की बादशाहत पर आक्रमण करते तो वे उसका अन्त कर सकते थे, लेकिन आपसी कलह और विग्रह के कारण यह सम्भव नहीं था।”
‘युवराज चूण्डा’ की कहानी वस्तुत: नितान्त कुरूप यथार्थ के परिवेश में आदर्शवाद की कहानी है, जो आज भी न केवल अत्यन्त पठनीय है बल्कि कहीं अधिक प्रासंगिक भी।
Nauka Doobi
- Author Name:
Rabindranath Thakur
- Book Type:

- Description: भारत को आधुनिक समाज बनने के मार्ग पर आगे बढऩे की शक्ति प्रदान करनेवाले रवीन्द्रनाथ ने 'नौका डूबी' उपन्यास में व्यक्ति की मनोव्याकुलता के रहस्य उद्घाटित किए हैं। इसमें व्यक्ति के अन्तर्लोक और समाज की इच्छाओं-आस्थाओं के मध्य होनेवाली टकराहट से उत्पन्न त्रासद जीवन-दशाओं की अभिव्यक्ति हुई है। कमला, रमेश, हेमनलिनी और नलिनाक्ष तेज़ी से तथा अकस्मात् आकार लेती घटनाओं के जाल में निरन्तर उलझते रहते हैं। 'गोरा' की रचना के पूर्व रवीन्द्रनाथ भारत के समाज का जो रूप देख रहे थे और व्यक्तियों की चिन्तन-प्रणाली में जिस परिवर्तन की आहट सुन रहे थे, वही इस कृति में है। 'नौका डूबी' को उसमें निहित विशिष्ट सांस्कृतिक और सामाजिक प्रयोगों को जाने बिना अच्छी तरह नहीं समझा जा सकता। ध्यान यह भी रखना होगा कि रवीन्द्रनाथ ठाकुर भारतीय साहित्य की अवधारणा के पहले-पहले पक्षधरों में से थे; अत: उन्होंने अपनी रचनाओं में समग्र समाज के भीतरी व्यवहारों को भरपूर जगह दी है। जो पाठक यथास्थान प्रस्तुत टिप्पणियों पर ध्यान देंगे, उन्हें पता चल जाएगा कि 'नौका डूबी' के अनुवाद में इस सत्य को सामने लाने का प्रयास किया गया है। प्रामाणिकता और मूल की यथासाध्य रक्षा इस अनुवाद-कार्य का लक्ष्य रहा है।
Sabrang
- Author Name:
S. D. Ojha
- Book Type:

- Description: यह नाम है उस अद्वितीय प्रयास का, जो भारतीय संस्कृति, कला, इतिहास, दर्शन, और जीवन शैली की अथाह गहराइयों को शब्दों की माला में पिरोता है। बालपन की मासूमियत से लेकर यौवन के जोश तक, साप्ताहिक पत्रिकाओं के मधुर स्वाद से लेकर साहित्य की गहराइयों में खुद की खोज तक - श्री एस. डी. ओझा जी की सेवानिवृत्ति के बाद की लेखनी से उपजे इन लेखों में वह सब मौजूद है जो आपकी आत्मा को स्पर्श कर सकता है। इस पुस्तक में उन्होंने ऐसी रचना की है जो पाठकों को ज्ञान की गहराइयों में ले जाने के साथ-साथ उन्हें अनुप्रेरित भी करती है। जीवन के अनेक रंगों को समेटे ‘सबरंग’ आपको उस यात्रा पर ले चलेगा जहाँ प्रत्येक पृष्ठ एक नवीन रंग, एक नवीन सोच, और एक नवीन दर्शन की प्रतीक्षा में है। आइए, ‘सबरंग’ के पन्नों को उलटें और अपने जीवन को इन विचारों के रंगों से संवारें। यह पुस्तक आपके पुस्तकालय का एक अमूल्य निधि बन जाएगी।
Dakhil Kharij
- Author Name:
Ramdhari Singh Diwakar
- Book Type:

-
Description:
गाँव की टूटती-बिखरती सामाजिक-आर्थिक व्यवस्था में छीजते जा रहे मानवीय मूल्यों को कथान्वित करनेवाला यह उपन्यास ‘दाखिल खारिज’ रामधारी सिंह दिवाकर की चर्चित कथाकृति है।
अपने छूटे हुए गाँव के लिए कुछ करने के सपनों और संकल्पों के साथ प्रोफ़ेसर प्रमोद सिंह का गाँव लौटना और बेरहमी से उनको ख़ारिज किया जाना आज के बदलते हुए गाँव का निर्मम यथार्थ है। यह कैसा गाँव है जहाँ बलात्कार मामूली-सी घटना है। हत्यारे, दुराचारी, बलात्कारी और बाहुबली लोकतांत्रिक व्यवस्था और सरकारी तंत्र को अपने हिसाब से संचालित करते हैं। सुराज के मायावी सपनों की पंचायती राज-व्यवस्था में पंचायतों को प्रदत्त अधिकार धन की लूट के स्रोत बन जाते हैं। सीमान्त किसान खेती छोड़ 'मनरेगा' में मज़दूरी को बेहतर विकल्प मानते हैं। ऐसे विकृत-विखंडित होते गाँव की पीड़ा को ग्रामीण चेतना के कथाशिल्पी रामधारी सिंह दिवाकर ने पूरी संलग्नता और गहरी संवेदना से उकेरने का प्रयास किया है। हिन्दी कथा साहित्य से लगभग बहिष्कृत होते गाँव को विषय बनाकर लिखे गए इस सशक्त उपन्यास को 'कथा में गाँव के पुनर्वास' के रूप में देखा-परखा और उल्लेखित किया जाता है।
Kit Aayun Kit Jaayun
- Author Name:
Shaligram
- Book Type:

-
Description:
‘कित आऊँ कित जाऊँ’ उपन्यास का लम्बा-चौड़ा फलक उत्तर बिहार की नदियों से घिरे गाँव का दृश्य उपस्थित करता...दक्षिण गंगा के कछार को छूता...उत्तर नेपाल के तराई भाग वाली मधेसी संस्कृति को एकीकृत करता हुआ समाज के भिन्न-भिन्न पात्रों की सहजता को बटोरता आगे बढ़ता है। इसमें हमें सुरपत और निरपत जैसे निम्नवर्गीय चरित्रों के संघर्षरत जीवन में अकिंचनता का बोध होते हुए भी; उनके अन्दर छिपे धैर्य, साहस एवं आत्मविश्वास की जिजीविषा का परिचय मिलता है। उपन्यास के सभी पात्र भिन्न-भिन्न रंग में रँगे हुए भी अपनी अस्मिता को बचाते हुए वे उस सादे एवं शाश्वत रंग में अपने को रँगाए रखते हैं जो ‘सब रंग मिटै; मिटे नहीं वह जो अमिट-अविनाशी’।
सुरपत, निरपत से लेकर भुजंगीचा जैसे माँझी-मल्लाह या टम्मन साहू, अनूप लाल, घोटल झा, तीरो सिंह जैसे मध्यवर्गीय चरित्र या कुमार साहब, रानीदाय, टापसी, लॉलीडीन, ठाकुर गरजू सिंह एवं पी.के. मलिक जैसे उच्चवर्गीय चरित्रों का यहाँ शुमार मिलता है जिससे उपन्यास की सार्थकता बनी रहती है। यह उपन्यास लघुता में छिपे अपने उस विराट को हमारे सम्मुख प्रस्तुत करता है जो अदृश्य होते हुए भी दृश्य है।
Ganga Maiyya
- Author Name:
Bhairavprasad Gupt
- Book Type:

- Description: प्रस्तुत पुस्तक ‘गंगा मैया’ में भारतीय ग्रामीण जीवन-संघर्ष का जो सहज, स्वाभाविक और वास्तविक अंकन हुआ है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। यही कारण है कि यह लघु उपन्यास आज विश्व कथा-साहित्य में हिन्दी कथा-साहित्य के प्रतिनिधि के रूप में स्वीकार किया जा रहा है। अन्यान्य विदेशी भाषाओं में प्रकाशित होने के अतिरिक्त फ्रांसीसी तथा पुर्तगाली भाषाओं में प्रकाशित होनेवाली हिन्दी की पहली पुस्तक ‘गंगा मैया’ (1967-69) ही है। फ़्रांसीसी समीक्षकों ने इस उपन्यास की जो प्रशंसा की है, यह इसलिए अधिक महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि आज फ्रांसीसी कथा-साहित्य विश्व में सर्वोच्च स्थान पर प्रतिष्ठित है। हिन्दी के सर्वश्रेष्ठ उपन्यासों में ‘गंगा मैया’ कलेवर में सबसे छोटा है, किन्तु अपने आत्मिक सौष्ठव में यह उपन्यास महान है। यह हमारी गर्वोक्ति नहीं, विद्वान समीक्षकों की सामान्य उक्ति है। कथ्य, शिल्प और शैली में यह उपन्यास बेजोड़ माना गया है।
Prasad Ke Sampoorna Upanyas
- Author Name:
Jaishankar Prasad
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक में छायावादी युग के महत्त्वपूर्ण कवि, कहानीकार, नाटककार और उपन्यासकार जयशंकर प्रसाद के तीनों उपन्यास—‘कंकाल’, ‘तितली’ और ‘इरावती’ संकलित किए गए हैं। भारतेन्दु के बाद जिन लोगों ने हिन्दी गद्य को एक परिपक्व रूप दिया उनमें प्रसाद की भूमिका भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है।
उनकी सांस्कृतिक अभिरुचि, यथार्थ को अपने ढंग से देखने का उनका तरीक़ा और उसे भाषा में अंकित करने का ढंग उन्हें एक अलग जगह देता है। ये उपन्यास भी इसके साक्षी हैं। उपन्यास ‘कंकाल’ और ‘तितली’ में उन्होंने तत्कालीन युग-बोध को एक भिन्न कोण से पकड़ा था। असहाय स्त्रियों के जीवन की चुनौतियों को दिखाने के लिए उन्होंने इन रचनाओं में यथार्थ के बाह्य रूपों को चित्रित करने के साथ-साथ व्यक्तिमन की आन्तरिक परतों को भी उद्घाटित किया। ‘तितली’ को कथा-शिल्प और वस्तु-विन्यास के दृष्टिकोण से प्रसाद का सर्वाधिक परिपक्व उपन्यास माना जाता है।
‘इरावती’ को वे पूरा नहीं कर सके थे। शुंगकालीन ऐतिहासिक विषय और बौद्धकालीन रूढ़ियों-विकृतियों के प्रति विद्रोह की जिस कथा-वस्तु को लेकर उन्होंने यह उपन्यास आरम्भ किया था, वह निश्चय ही एक बड़ी औपन्यासिक कृति के रूप में फलीभूत होता। यहाँ ‘इरावती’ के उपलब्ध स्वरूप को यथावत् संकलित किया गया है ताकि पाठक प्रसाद की उपन्यास-काल के मर्म को जान सकें।
Devki Ka Athwa Beta
- Author Name:
Yogendra Pratap Singh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Raavi Likhata Hai
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

-
Description:
पाश्चात्य और भारतीय सभ्यता-संस्कारों के बीच पुल बनाता, एक संवेदनशील तथा शालीन मुस्लिम परिवार का मार्मिक दस्तावेज़। लेखक ने वर्तमान के माध्यम से अतीत के कथाचित्र का सजीव चित्रण किया है और साहित्य की एक सशक्त प्रविधि 'फैंटेसी' का बख़ूबी प्रयोग करते हुए उपन्यास को एक नए सौन्दर्यशास्त्र से सृजित किया है।
उपन्यास में एक निम्न मध्यवर्गीय लेकिन कर्मशील मुस्लिम परिवार की कई पीढ़ियों की जीवनगाथा का रोचक ब्योरा प्रस्तुत किया गया है। उनकी संस्कृति व सामाजिक सरोकारों के साथ-साथ यह उपन्यास ग्रामीण जीवन की गहनता, प्रकृति प्रेम, खेत-खलिहानों के दृश्यों का भी सफ़र करता है। भारतीयता की जड़ें कितनी सशक्त, गहरी और शाश्वत हैं और उनका प्रभाव कितना दूरगामी है, यह उपन्यास इस सच्चाई को स्थापित करता है। पाश्चात्य संस्कृति में पले बच्चे जिन्हें देशी रहन-सहन, खानपान, भाषा और अपनी दुर्व्यवस्था से अजीब-सा परहेज़ था, उनका सहज रूपान्तरण एक ख़ूबसूरत प्रक्रिया है।
लेखक ने नए और पुराने जीवन और समाज को बिना किसी टकराहट के एक शृंखला में बाँधने और सामंजस्य बनाने का एक सार्थक और अनिवार्य कार्य किया है जो आज के समय की आवश्यकता भी है।
इस उपन्यास में आज की कम्प्यूटर, मैसेज, ई-मेल की इलेक्ट्रॉनिक दुनिया और तेज़ रफ़्तार भौतिक जीवन के बीच सम्बन्धों, रिश्तों और संवेदनाओं को कैसे जीवित रखा जा सकता है, इन पहलुओं को भी सरल भाषा में सँजोया गया है। भाषा की रवानगी कृति की पठनीयता को बढ़ाती है और पाठक के अन्तर्मन से एक रिश्ता भी बनाती है।
Gali Aage Murti Hai
- Author Name:
Shivprasad Singh
- Book Type:

-
Description:
‘गली आगे मुड़ती है’ उपन्यास ‘अलग-अलग वैतरणी’ के लेखक के निजी जीवन का मोड़ था। शिवप्रसाद सिंह 1974 तक ‘ग्राम कथा’ और ‘वैतरणी’ जैसे विख्यात उपन्यासों के लेखक के रूप में अपना एक अलग स्थान बना चुके थे। वे पुराने लोकेशन (परिवेश) को कभी दुहराते नहीं। इसलिए ‘गली’ में वे काशी जैसे विरले नगर की अनेकानेक छवियों को जो काली हैं, धूसरित हैं, पंकिल हैं, उकेरना चाहते थे; पर इसी के बीच एक ऐसी भी काशी है, जिसे ग़ालिब ने कभी ‘अध्यात्म का चिराग’ कहा था, जो इस डबरे-भर परिवेश में निरन्तर प्रतिच्छायित होता रहता है। यही वह मोड़ था, जिसने लेखक को लॉरेंस ड्यूरल के ‘ऑलक्जांद्रिया क्वार्टरेट’ की तरह ‘काशी त्रयी’ लिखने की चुनौती दी। लॉरेंस तो इतिहास के दस्तावेज़ों और खँडहरों में भटककर विस्मृत हो गया, किन्तु काशी का मध्यकालीन इतिहास ‘नीला चाँद’ (काशी-2) में ऐसा निखरा कि इसे विद्वानों ने एक स्वर में अभूतपूर्व, नितान्त अनछुए विषयों से अनुप्राणित बताकर भूरि-भूरि प्रशंसा की।
शिवप्रसाद सिंह का कहना है कि ‘वैतरणी’ में सम्बोध्य राष्ट्र कृषक और कृषक पुत्र थे। ‘गली’ में सम्बोध्य सम्पूर्ण राष्ट्र का युवा वर्ग है। युवा वर्ग के क्रोध और क्षोभ का विस्फोट ‘गली’ में निरन्तर गूँजता रहता है।
Katha Viraat
- Author Name:
Sudhakar Adeeb
- Book Type:

-
Description:
भारत का स्वाधीनता आन्दोलन जिस प्रकार से लड़ा गया उसमें आए अनेक उतार-चढ़ाव और संघर्ष हमें प्राचीन ‘महाभारत’ की याद दिलाते हैं। ‘कथा विराट’ के 18 अध्यायों में भारतीयों द्वारा अंग्रेज़ों के विरुद्ध लड़े गए आधुनिक महाभारत की वृहद् कथा बेहद दिलचस्प और तथ्यपरक ढंग से शृंखलाबद्ध है। यह सन् 1915 से 1950 तक के 35 वर्षों के स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्र निर्माण का एक सजीव इतिहास है।
महात्मा गांधी तो इस युग की आत्मा थे, किन्तु इस कथाकृति के महानायक हैं राष्ट्र-निर्माता सरदार पटेल। यह उपन्यास सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा वर्तमान के एकीकरण के लिए किए गए भगीरथ प्रयत्नों को समझने की एक दुर्लभ कुंजी भी है।
Tokara Bhar Prem
- Author Name:
Alok Saxena
- Book Type:

- Description: अचानक ही धन देवी लक्ष्मी जी गहरे संताप में आ गई कि कल तक उसका आस्तिक उपासक, जो 500 और 1000 रुपए के अविनाशी नोटों को अपनी तिजोरियों, अलमारियों यहाँ तक कि अपने डबलबेड के बॉक्स व गद्दों के नीचे सँभाल-सँभालकर रखता था, बेनागा प्रतिदिन उसके आगे अगरबत्ती और दीपक जलाकर उसकी पूजा भी किया करता था, आज अचानक नास्तिक हो गया है। नास्तिक ही नहीं, जल्लाद बन गया है और उसे गंदे, मटमैले-कुचैले थैलों में भर-भरकर घर से बेघर करने पर आमादा हो गया है। हैवानियत उसके सिर चढ़कर अपना काम कर रही है। वह वर्षों से प्यार से सँजोकर रखी हुई अपनी लक्ष्मी को रात के अँधेरे में नदी-नालों, गटर, कूड़ेदान व आस-पास की झाड़-झाडि़यों में फेंकने पर आमादा हो गया है। उसे आज अपनी सुख-समृद्धि का बिलकुल भी ध्यान नहीं है। इस समय उसके लिए सुख-समृद्धि जाए चूल्हे में या फिर कहीं भी जाए, उसकी बला से! उसे तो इस समय अपने वैभव से ज्यादा अपने घर की लक्ष्मी को गुप्त रूप से ठिकाने लगाने की चिंता है। वह पहले उसे पाने के लिए अपना दिन-रात एक करता था। रात में सोता अपनी पत्नी के साथ था, परंतु खयालों में उसे ही रखता था। रात में बिस्तर पर करवटें बदलता था तो अपने गद्दों के नीचे बिछाकर रखी हुई, अपनी धन-लक्ष्मी को जब तब झाँक-झाँककर भरपूर देख नहीं लेता, तब तक उसे नींद नहीं आती थी। —इसी संग्रह से
Unwritten Letters
- Author Name:
Monica Mujumdar Dixit
- Book Type:

- Description: Anthology
Worlds First Book On Haiku Poetry
- Author Name:
Carlos Luis
- Rating:
- Book Type:

- Description: Haiku is a very short form of Japanese poetry consisting of 17 syllables arranged in three lines of 5, 7, and 5 syllables respectively. But against all odds, this is a collection of feelings written in three lines. An economical masterpiece that Trades you through realities of life; speaking of love, relationships, paradoxes in life, you name it you have it in here.
Billesur Bakariha
- Author Name:
Suryakant Tripathi 'Nirala'
- Book Type:

-
Description:
निराला के शब्दों में ‘हास्य लिये एक स्केच’ कहा गया यह उपन्यास अपनी यथार्थवादी विषयवस्तु और प्रगतिशील जीवनदृष्टि के लिए बहुचर्चित है। बिल्लेसुर एक ग़रीब ब्राह्मण है, लेकिन ब्राह्मणों के रूढ़िवाद से पूरी तरह मुक्त। ग़रीबी से उबार के लिए वह शहर जाता है और लौटने पर बकरियाँ पाल लेता है। इसके लिए वह बिरादरी की रुष्टता और प्रायश्चित्त के लिए डाले जा रहे दबाव की परवाह नहीं करता। अपने दम पर शादी भी कर लेता है।
वह जानता है कि ज़ात-पाँत इस समाज में महज़ एक ढकोसला है जो आर्थिक वैषम्य के चलते चल रहा है। यही कारण है कि ‘पैसेवाला’ होते ही बिल्लेसुर का जाति-बहिष्कार समाप्त हो जाता है। संक्षेप में यह उपन्यास बदलते आर्थिक सम्बन्धों में सामन्ती जड़वाद की धूर्तता, पराजय और बेबसी की कहानी है।
Zindagi Zero Mile
- Author Name:
Harsh Ranjan
- Book Type:

- Description: -ध्यान से देखो, पहचानते हो? मेरा इशारा यहाँ की छोटी सी -किंतु बेजान नहीं - इस सड़क की तरफ था .....यहाँ पर चलने वाले लोगों की सीधी-साधी चाल .....सड़क किनारे मंदिर में बज रही घंटियाँ ....सालों से खड़ा बरगद और उस पर लपेटी अनगिनत डोरियाँ..... निश्चल कोमल और पवित्र खिल-खिलाहटें ....अपनी इमानदार हाटें .....यहाँ की भोली-भाली उमंग ....अपने मिट्टी की गंध .... हम दोनों गंगा के किनारे चले गये। उमड़ते-घुमड़ते काले-काले मेघ....निश्चल और निर्मल गंगा...दूर तक फैलता कल-कल का स्वर....बहती ठंढ़ी हवाएँ ....तट पर की हलचल.... इस दृश्य ने जैसे हमें बाँध लिया था। सामने से सावन की धूम-धाम जैसे धीरे-धीरे अपनी ओर बढ़ती आ रही थी। -ये है अपना उत्सव!- मैंने कहा और आनंद के पास किनारे पर ही बैठ गया। वह भी काफी देर से स्थिर बैठा, इस दृश्य को देखता रहा। दूर आकाश में काले-काले मेघ छा चुके थे और फिर जोरदार बारिश शुरू हो गयी। मौसम बिल्कुल ठंडा हो गया और चारों ओर सोंधी-सोंधी गंध फैल गयी। काफी देर की चुप्पी के बाद उसने मुझसे कहा- ऐसा लगता है कि कहीं इन्हीं में खो जाऊँ! .....कहीं मिल जाऊँ .... आज शायद उसने पहली बार अपने अंधेरे कमरे से निकलकर इस दुनिया को देखा था। मेरे मन में एक संतोष सा हुआ और आँखों में आँसू आ गये -इसके लिए इन्हें भी तो यहाँ रखना होगा ...इसी पवित्रता के साथ ...इतनी ही गरिमा से .... मैं फिर वापस आ गया।
Was It A Murder
- Author Name:
Ritika Singhal +1
- Book Type:

- Description: Abhay Savarkar was enjoying the tea at his home in Ambala. One sudden call, and he was off to Port Blair. Mrs. Jazz was found dead amidst a family get-together. While Savarkar was busy collecting the clues, another death was announced. Were the two deaths linked? Both the deaths sounded natural, but Savarkar was smelling some foul play. Will there be more crimes? No Clues, No motive, No satisfaction, No one to agree with Savarkar. How will Savarkar go about it this time? And the question still prevails "Was It A MURDER?"
Shaheednama
- Author Name:
Howard Fast
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Banbhatt Ki Aatmakatha
- Author Name:
Hazariprasad Dwivedi
- Rating:
- Book Type:

- Description: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की विपुल रचना-सामर्थ्य का रहस्य उनके विशद शास्त्रीय ज्ञान में नहीं, बल्कि उस पारदर्शी जीवन-दृष्टि में निहित है, जो युग का नहीं युग-युग का सत्य देखती है। उनकी प्रतिभा ने इतिहास का उपयोग ‘तीसरी आँख’ के रूप में किया है और अतीत-कालीन चेतना-प्रवाह को वर्तमान जीवनधारा से जोड़ पाने में वह आश्चर्यजनक रूप से सफल हुई है। बाणभट्ट की आत्मकथा अपनी समस्त औपन्यासिक संरचना और भंगिमा में कथा-कृति होते हुए भी महाकाव्यत्व की गरिमा से पूर्ण है। इसमें द्विवेदी जी ने प्राचीन कवि बाण के बिखरे जीवन-सूत्रों को बड़ी कलात्मकता से गूँथकर एक ऐसी कथाभूमि निर्मित की है जो जीवन-सत्यों से रसमय साक्षात्कार कराती है। इसमें वह वाणी मुखरित है जो सामगान के समान पवित्रा और अर्थपूर्ण है-‘सत्य के लिए किसी से न डरना, गुरु से भी नहीं, मंत्रा से भी नहीं; लोक से भी नहीं, वेद से भी नहीं।’ बाणभट्ट की आत्मकथा का कथानायक कोरा भावुक कवि नहीं वरन कर्मनिरत और संघर्षशील जीवन-योद्धा है। उसके लिए ‘शरीर केवल भार नहीं, मिट्टी का ढेला नहीं’, बल्कि ‘उससे बड़ा’ है और उसके मन में आर्यावर्त्त के उद्धार का निमित्त बनने की तीव्र बेचैनी है। ‘अपने को निःशेष भाव से दे देने’ में जीवन की सार्थकता देखने वाली निउनिया और ‘सबकुछ भूल जाने की साधना’ में लीन महादेवी भट्टिनी के प्रति उसका प्रेम जब उच्चता का वरण कर लेता है तो यही गूँज अंत में रह जाती हैद-‘‘वैराग्य क्या इतनी बड़ी चीज है कि प्रेम देवता को उसकी नयनाग्नि में भस्म कराके ही कवि गौरव का अनुभव करे?’’
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book