Machhali Mari Hui : Stri Samlaingita Ko Rekhankit Karta Upanyas
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Author:
Rajkamal ChaudharyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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हिन्दी के प्रख्यात रचनाकार राजकमल चौधरी की बहुचर्चित-बहुप्रशंसित कृति है ‘मछली मरी हुई’। लेखक ने अपनी इस महत्त्वाकांक्षी कृति में जहाँ महानगर कलकत्ता के उद्योग जगत की प्रामाणिक और सजीव तस्वीर प्रस्तुत की है, वहीं आनुषंगिक विषय के रूप में समलैंगिक स्त्रियों के रति-आचरण का भी इस उपन्यास में सजीव चित्रण किया है। इसमें ठनकती हुई शब्दावली और मछली के प्रतीक का ऐसा सर्जनात्मक प्रयोग किया गया है कि समलैंगिक रति-व्यापार तनिक भी फूहड़ नहीं हुआ है। इन पात्रों को लेखक की करुणा सर्वत्र सींचती रहती है।</p> <p>उपन्यास का प्रमुख पात्र निर्मल पद्मावत हिन्दी उपन्यास साहित्य का अविस्मरणीय चरित्र है। हिंस्र पशुता और संवेदनशीलता का, आक्रामकता और उदासी का, सजगता और अजनबीपन का, शक्ति और दुर्बलता का ऐसा दुर्लभ मिश्रण हिन्दी के शायद ही किसी उपन्यास में मिलेगा।</p> <p>‘मछली मरी हुई’ के अधिकांश पात्र मानसिक विकृतियों के शिकार हैं, पर उपन्यासकार ने उनके कारणों की तरफ़ संकेत कर अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। यह प्रतिबद्धता उद्योगपतियों के व्यावसायिक षड्यंत्र, भ्रष्ट आचरण आदि की विवेकपूर्ण आलोचना के रूप में भी दिखाई देती है। इस उपन्यास के केन्द्रीय पात्र निर्मल पद्मावत की कर्मठता, मज़दूरों के प्रति उदार दृष्टिकोण, छद्म आचरण के प्रति घृणा, किसी भी हालत में रिश्वत न देने की दृढ़ता, ऊपर से हिंस्र जानवर जैसा दिखने पर भी अपनी माँ, पत्नी और अन्य स्त्रियों के प्रति गहरी संवेदनशीलता—ये सारी बातें उपन्यासकार के गहरे नैतिकता-बोध के प्रमाण हैं।</p> <p>‘मछली मरी हुई’ राजकमल चौधरी का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है। इस उपन्यास को स्त्री-समलैंगिकता पर केन्द्रित भी माना जाता रहा है, जिसका कारण शायद यह है कि काफ़ी शोध के बाद ही लेखक ने इस विषय को यहाँ उठाया है।
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हिन्दी के प्रख्यात रचनाकार राजकमल चौधरी की बहुचर्चित-बहुप्रशंसित कृति है ‘मछली मरी हुई’। लेखक ने अपनी इस महत्त्वाकांक्षी कृति में जहाँ महानगर कलकत्ता के उद्योग जगत की प्रामाणिक और सजीव तस्वीर प्रस्तुत की है, वहीं आनुषंगिक विषय के रूप में समलैंगिक स्त्रियों के रति-आचरण का भी इस उपन्यास में सजीव चित्रण किया है। इसमें ठनकती हुई शब्दावली और मछली के प्रतीक का ऐसा सर्जनात्मक प्रयोग किया गया है कि समलैंगिक रति-व्यापार तनिक भी फूहड़ नहीं हुआ है। इन पात्रों को लेखक की करुणा सर्वत्र सींचती रहती है।</p>
<p>उपन्यास का प्रमुख पात्र निर्मल पद्मावत हिन्दी उपन्यास साहित्य का अविस्मरणीय चरित्र है। हिंस्र पशुता और संवेदनशीलता का, आक्रामकता और उदासी का, सजगता और अजनबीपन का, शक्ति और दुर्बलता का ऐसा दुर्लभ मिश्रण हिन्दी के शायद ही किसी उपन्यास में मिलेगा।</p>
<p>‘मछली मरी हुई’ के अधिकांश पात्र मानसिक विकृतियों के शिकार हैं, पर उपन्यासकार ने उनके कारणों की तरफ़ संकेत कर अपनी सामाजिक प्रतिबद्धता का परिचय दिया है। यह प्रतिबद्धता उद्योगपतियों के व्यावसायिक षड्यंत्र, भ्रष्ट आचरण आदि की विवेकपूर्ण आलोचना के रूप में भी दिखाई देती है। इस उपन्यास के केन्द्रीय पात्र निर्मल पद्मावत की कर्मठता, मज़दूरों के प्रति उदार दृष्टिकोण, छद्म आचरण के प्रति घृणा, किसी भी हालत में रिश्वत न देने की दृढ़ता, ऊपर से हिंस्र जानवर जैसा दिखने पर भी अपनी माँ, पत्नी और अन्य स्त्रियों के प्रति गहरी संवेदनशीलता—ये सारी बातें उपन्यासकार के गहरे नैतिकता-बोध के प्रमाण हैं।</p>
<p>‘मछली मरी हुई’ राजकमल चौधरी का सर्वश्रेष्ठ उपन्यास है। इस उपन्यास को स्त्री-समलैंगिकता पर केन्द्रित भी माना जाता रहा है, जिसका कारण शायद यह है कि काफ़ी शोध के बाद ही लेखक ने इस विषय को यहाँ उठाया है।
Book Details
-
ISBN9788171788231
-
Pages172
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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आधुनिक भारतीय कथा - साहित्य में कहानी कहना बंगाल की कला है । प्रस्तुत रचना इस मान्यता का एक अच्छा उदाहरण है । धीरोदात्त नायक यहाँ नहीं है । है तो ढोड़ाय , जैसा मामूली नाम तैसा चरित , ततमा लोगों के पूरे सामाजिक संदर्भ में , जहाँ ' पक्की ' ( यानी पक्की सड़क ) आधुनिक जीवन और बाहरी तत्त्व को प्रतिकित करती है । यह ' पक्की ' ही पूरे उपन्यास को आदि से अंत तक जोड़े हुए है । जिस समाज में महज पक्की सड़क नयी रोशनी का प्रतीक हो , उसे आधुनिक संदर्भों में जोड़ना रचनात्मक और वैचारिक दोनों स्तरों पर ' कितना कठिन है , यह आसानी से समझा जा सकता है । पर प्रख्यात बंगला कथा - शिल्पी सतीनाथ भादुड़ी ने कलात्मक धीरज के साथ इस जोड़ को साधा है । यों एक बड़े कालगत अंतराल को कथाकार ने अपनी संवेदना से पूरा किया है । प्रसिद्ध बंगला उपन्यास ' ढोड़ाय चरितमानस ' हिंन्दी में प्रकाशित होने के पूर्व ही यहाँ विस्तृत चर्चा का विषय बना रहा है । तब हिंदी पाठक के मन में उसको लेकर अतिरिक्त उत्सुकता का होना स्वाभाविक है । ' मैला आँचल ' हिंदी के समकालीन क्लैसिकों में है । उसका मूल नक्शा यहाँ देखा जा सकता है , जिसे हिंदी के उपन्यासकार ने अपने ढंग से समृद्धतर किया है । यों हिंदी की आंचलिक कथा - धारा का एक स्रोत है । ' ढोड़ाय चरितमानस ' । इस दृष्टि से सामान्य से सामान्य पाठक और विशिष्ट से विशिष्ट शोधकर्ता के लिए यह कथा - कृति रोचक और उपयोगी सिद्ध होगी ।
Bhavbhuti Katha
- Author Name:
Mahesh Katare
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भवभूति आठवीं सदी में हुए थे। नाटककार थे, कवि थे। संस्कृत में लिखे उनके नाटकों को कालिदास की रचनाओं के बराबर माना जाता है।
यह उपन्यास उनके जीवन पर आधारित है, जिसकी मुख्य कथाधारा ब्राह्मण होने के बावजूद नाट्य-कर्म में उनकी प्रवृत्ति और उसके चलते अपने समाज में उनके संघर्ष के साथ-साथ चलती है।
महेश कटारे इससे पूर्व भर्तृहरि पर केन्द्रित एक अत्यन्त लोकप्रिय उपन्यास की रचना कर चुके हैं। भारत के सांस्कृतिक इतिहास के उल्लेखनीय पड़ावों को औपन्यासिक कलेवर में प्रस्तुत करते हुए वे तत्कालीन तथ्यों और आज के प्रश्नों को बराबर ध्यान में रखते हैं। देश, काल और पात्रानुकूल भाषा तथा जीवन-व्यवहार के विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए वे एक तरफ जहाँ अतीत को मूर्तिमान कर देते हैं, वहीं मानव-समाज और व्यवस्था के लिए हमेशा प्रासंगिक रहने वाले मुद्दों को भी अनदेखा नहीं करते।
भवभूति के बहुवर्णी चरित्र पर केन्द्रित यह उपन्यास भी उसका अपवाद नहीं है।
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