201 Prerak Neeti Kathayen

(0)

₹ 400

320 (20% off)

Unavailable

Ships within 48 Hours

Free Shipping in India on orders above Rs. 1100


201 प्रेरक नीति कथाएँ—शिवकुमार गोयल धर्मशास्‍‍त्रों, नीतिशास्‍‍त्रों की कथाएँ तथा ऋषि-मुनियों, वीर-वीरांगनाओं, विभिन्न क्षेत्रों के आदर्श पुरुषों के जीवन प्रसंग आदर्श जीवन जीने, अपना कर्तव्यपालन करने की प्रेरणा देने में हमेशा से सहायक रहे हैं। बच्ïचे दादा-दादी, नाना-नानी व माता-पिता के मुख से प्रेरक कथाएँ सुनने के लिए लालायित रहा करते हैं। इन आदर्श कथाओं, पावन प्रसंगों से बालकों को सत्य बोलने, माता-पिता, वृद्धजनों व गुरुजनों की सेवा व सम्मान करने, धर्मानुसार आदर्श जीवन जीने की स्वत: प्रेरणा मिलती है। 201 प्रेरक नीति कथाएँ की सरल-सुबोध कहानियाँ हमारे जीवन की दिशा बदलने की क्षमता रखती हैं। सद्ïगुण, सदï्विचार, सदाचार—यानी मानव जीवन के लिए आवश्यक सभी गुणों की खान हैं ये नीति कथाएँ। इन्हें पढ़कर हम सन्मार्ग पर चलें और धर्ममय नीति-रीति से जीवन जिएँ तो इस संग्रह का प्रकाशन सार्थक होगा।

Read more

ISBN
N/A
Pages
N/A
Avg Reading Time
3 hrs
Age
18+ yrs
Country of Origin
India

Don’t Miss Out

Pick a membership and see exactly what it gets you

  • 15 Free Deliveries
  • 1 Free Book up to ₹500 MRP

Format:

This Book is out of stock
This Book is out of stock

Piracy Free

Express Delivery

Secure Payment

About the Book

201 प्रेरक नीति कथाएँ—शिवकुमार गोयल धर्मशास्‍‍त्रों, नीतिशास्‍‍त्रों की कथाएँ तथा ऋषि-मुनियों, वीर-वीरांगनाओं, विभिन्न क्षेत्रों के आदर्श पुरुषों के जीवन प्रसंग आदर्श जीवन जीने, अपना कर्तव्यपालन करने की प्रेरणा देने में हमेशा से सहायक रहे हैं। बच्ïचे दादा-दादी, नाना-नानी व माता-पिता के मुख से प्रेरक कथाएँ सुनने के लिए लालायित रहा करते हैं। इन आदर्श कथाओं, पावन प्रसंगों से बालकों को सत्य बोलने, माता-पिता, वृद्धजनों व गुरुजनों की सेवा व सम्मान करने, धर्मानुसार आदर्श जीवन जीने की स्वत: प्रेरणा मिलती है। 201 प्रेरक नीति कथाएँ की सरल-सुबोध कहानियाँ हमारे जीवन की दिशा बदलने की क्षमता रखती हैं। सद्ïगुण, सदï्विचार, सदाचार—यानी मानव जीवन के लिए आवश्यक सभी गुणों की खान हैं ये नीति कथाएँ। इन्हें पढ़कर हम सन्मार्ग पर चलें और धर्ममय नीति-रीति से जीवन जिएँ तो इस संग्रह का प्रकाशन सार्थक होगा।

Book Details

  • ISBN
    9788192850801
  • Pages
    168
  • Avg Reading Time
    3 hrs
  • Age
    18+ yrs
  • Country of Origin
    India

Recommended For You

Customer Reviews

Be the first to write a review...

(0)

0 out of 5

Book

201 Prerak Neeti Kathayen by Shivkumar Goyal is a collection that revives the oral tradition of moral storytelling—dharmashastra parables, episodes from the lives of rishis and warriors, and exemplary figures across Indian history—designed to instill satya (truth), duty, and reverence for elders in young readers. The book occupies the liminal space between scripture and pedagogy: each tale is brief, portable, and constructed to be read aloud by a parent or grandparent. Goyal does not modernize or simplify the ethical core of these stories; instead, he preserves their classical register while ensuring narrative clarity for children aged seven to twelve. The collection draws on the Panchatantra, the Hitopadesha, and lesser-known regional folklore, offering parents a resource to counter the erosion of intergenerational storytelling. In a household where bedtime screens have replaced bedtime stories, this volume restores the ritual of moral instruction through narrative pleasure.

यह पुस्तक पढ़ते समय मुझे कैसा अनुभव होगा?

यह पुस्तक आपको दादा-दादी की गोद में बैठकर कहानियाँ सुनने का अहसास देगी। हर कथा छोटी, सरल और सीधे हृदय को छूने वाली है। कुछ कथाएँ आपको हँसाएँगी, कुछ सोचने पर मजबूर करेंगी। पढ़ने के बाद आप शांत और प्रेरित महसूस करेंगे—जैसे किसी बुजुर्ग ने जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ सिखा दिया हो।

यह किताब किसके लिए सबसे उपयुक्त है और पाठक से क्या अपेक्षा रखती है?

  • सात से बारह वर्ष के बच्चों के लिए जो नैतिक मूल्यों को कहानियों के माध्यम से सीखना चाहते हैं।
  • माता-पिता और दादा-दादी जो बच्चों को धर्म और संस्कार की शिक्षा देना चाहते हैं।
  • शिक्षकों के लिए जो कक्षा में नीति कथाओं का उपयोग करना चाहते हैं।
  • पाठक को केवल खुले मन और सीखने की इच्छा की आवश्यकता है—कोई पूर्व ज्ञान अनिवार्य नहीं है।

आज के भारतीय पाठकों के लिए इस पुस्तक की विषयवस्तु का सांस्कृतिक महत्व क्या है?

डिजिटल युग में जब बच्चे स्क्रीन पर अधिक समय बिताते हैं, यह पुस्तक पारंपरिक कथा-परंपरा को पुनर्जीवित करती है। ये कथाएँ सत्य, सेवा, और कर्तव्यपालन जैसे मूल्यों को सिखाती हैं—जो आधुनिक समाज में कमजोर पड़ रहे हैं। यह पीढ़ियों के बीच संवाद का माध्यम बनती है और भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़ाव बनाए रखती है।

इस विषय पर लेखक का दृष्टिकोण विशिष्ट किस प्रकार बनाता है?

शिवकुमार गोयल ने धर्मशास्त्र, नीतिशास्त्र, और लोककथाओं को एक संग्रह में समेटा है—बिना उनके मूल नैतिक सार को कमजोर किए। उनकी भाषा सरल परंतु गरिमापूर्ण है, जो बच्चों को समझ आए और बड़ों को सम्मान दे। वे कथाओं को आधुनिक बनाने की बजाय उनकी शास्त्रीय प्रामाणिकता बनाए रखते हैं, जिससे हर कहानी का मूल संदेश अक्षुण्ण रहता है।

यह पुस्तक समाप्त होने के बाद पाठक के मन में क्या छोड़ जाती है?

यह पुस्तक पाठक को नैतिक दिशा-बोध और आत्मविश्वास देती है। बच्चे सीखते हैं कि सत्य और कर्तव्य की राह कठिन हो सकती है, परंतु वही सही है। माता-पिता को अपने बचपन की याद आती है और वे इसे अगली पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए प्रेरित होते हैं। यह केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि संस्कारों का वाहक भी बन जाती है।

View on Rachnaye →

Hurry! Limited-Time Coupon Code

WORDPOWER
* Terms and Conditions applied.

Offers

Best Deal

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit, sed do eiusmod tempor incididunt ut labore et dolore magna aliqua. Ut enim ad minim veniam, quis nostrud exercitation ullamco laboris nisi ut aliquip ex ea commodo consequat.

whatsapp