Lekin Darwaza
Author:
Pankaj BishtPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 319.2
₹
399
Unavailable
‘‘...महानगरीय कथा-कृतियों में प्रायः समकालीनता को ही उजागर किया जाता है; किन्तु ‘लेकिन दरवाज़ा’ में समकालीनता को चालू भाषा-शैली में चित्रित किया गया है। याद नहीं पड़ता कि हिन्दी की किसी कथा-कृति में इस तरह की चालू भाषा-शैली में महानगरीय समकालीनता को इतने ताज़ेपन के साथ पहले प्रस्तुत किया गया हो...’’</p>
<p>—‘आलोचना’</p>
<p>‘‘...रचनाधर्मिता के नाम पर जोड़-तोड़ के दमघोंटू व कल्टीवेटेड माहौल पर आधारित बिष्ट का यह उपन्यास एक तरफ़ साहित्यिक जीवन की परतों को उधेड़ता है तो दूसरी ओर आभिजात्य वर्ग की पतनशील रूमानी मानसिकता को दर्शाता है।...’’</p>
<p>—‘अमर उजाला’</p>
<p>‘‘ ‘लेकिन दरवाज़ा’ को ‘कुरु-कुरु स्वाहा’ से भी ज़्यादा सफलता मिली। इसका एक मुख्य कारण यह हो सकता है कि मनोहर श्याम जोशी ने जहाँ विलक्षणता, मामूली-मामूली बातों को ग़ैरमामूली ढंग से पेश करने में दिखाई, वहाँ ‘लेकिन दरवाज़ा’ में लेखक ने ग़ैरमामूली ढंग से कहा।’’</p>
<p>—‘नवभारत टाइम्स’</p>
<p>‘‘दरअसल समकालीन साहित्यिक दुनिया के वास्तविक सन्दर्भों को विषय के रूप में उठाना एक जोखिम-भरा काम है। लेकिन पंकज बिष्ट की यह ख़ूबी रही है कि वे इन सन्दर्भों का ब्योरा मात्र पेश करने के बजाय उन्हें सामाजिक परिप्रेक्ष्य की सापेक्षता में उभारते हैं।...’’</p>
<p>—साक्षात्कार</p>
<p>‘‘लेखक दूसरे-दूसरे वर्गों के बारे में तो ख़ूब लिखते हैं, मगर उनके ख़ुद के बारे में कम लिखा जाता है।...यह उत्सुकता का विषय है कि सबके बारे में लिखनेवाले लेखक का अपना सांसारिक परिवेश कैसा होता है या उसकी जीवनगत परिस्थितियाँ, उसके आदर्श, उसका परिवार, उसकी रुचियाँ, उसके संघर्ष किस क़िस्म के होते हैं? पंकज बिष्ट ने इसी कथा-भूमि को उठाया है—महानगर दिल्ली के लेखकों के जीवन को।’’</p>
<p>—‘नई दुनिया’
ISBN: 9788126702459
Pages: 388
Avg Reading Time: 13 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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अहं की क्षुद्रता और परम की असीमता के द्वन्द्व को उद्घाटित करनेवाला एक रोचक उपन्यास।
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- Author Name:
Jose Saramago
- Book Type:

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Description:
दो साल से लिस्बन में रह रहे हाथी सोलोमन को अब एक लम्बे सफ़र पर जाना है। राजा डोम जुआँऊ तृतीय वियना के हैप्सबर्ग के एक आर्चदुक को उसे शादी के तोहफ़े के रूप में भेंट करना चाहता है। अपने नए ठिकाने तक पहुँचने के लिए हाथी को पैदल ही पहुँचना है। इस तरह शुरू होता है वह दिलचस्प सफ़र जो इस बहादुर हाथी को कास्टील के धूल-भरे मैदानों से होते हुए समुद्र पार जेनोआ और उत्तरी इटली तक ले जाएगा। वहाँ उसे बर्फीले आल्प्स को पार करना होगा जैसे सदियों पहले हानिबल के योद्धा हाथियों ने किया था।
यह उपन्यास एक सच्ची घटना पर आधारित है जिसमें लेखक ने तथ्यों, किंवदन्तियों और कल्पना का अद्भुत मिश्रण किया है।
Nati
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

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Description:
बंगाल की प्रसिद्ध उपन्यासकार महाश्वेता देवी की चमत्कारी लेखनी से हिन्दी पाठक पूर्णरूपेण परिचित हो चुके हैं। ‘ज्ञानपीठ पुरस्कार’ और ‘साहित्य अकादेमी पुरस्कार’ से सम्मानित महाश्वेता देवी की कृति ‘नटी’ पढ़कर पाठक एक बार फिर चौकेंगे।
करीब सवा सौ साल पहले की संगीत-सभा, मुजरा-गोष्ठी, भारतीय स्वातंत्र्य-संग्राम की प्रथम चिनगारी और संघर्ष के वातावरण के बीच मोती नाम की एक नर्तकी की प्रेरणादायक भूमिका का यह इतिहास-खंड एक नई दुनिया की ही सृष्टि करता है। मोती अद्वितीय सुन्दरी थी, अपूर्व नर्तकी, ख़ूब मोहक। लेकिन राजाओं-महाराजाओं के बीच मुजरा करके उनका मनोरंजन करते-करते स्वयं ही एक सिपाही ख़ुदाबख़्श की प्रेयसी बन उसे सारा जीवन संन्यासिनी होकर क्यों बेचैन रहना पड़ा, इसी की कथा है यह—नटी।
रंग, रेशम, जरी, जेवर और वेणी में तूफ़ान भरकर अनेक मजलिसों से घिरी, घुँघरुओं की झंकार पर थिरकती मोती जब घाघरे का एक वृत्त बनाकर बैठ गई तो उसका सीमाहीन जीवन ख़ुदाबख़्श की एकान्त प्रेम-परिधि में कैसे बँध गया, क्यों? ख़ुदाबख़्श के वक्ष के अतिरिक्त मोती के लिए छिपने का कहीं स्थान नहीं बचा क्यों...क्यों? रंगीन जीवन की अनेकानेक रहस्यमय परतों को एक-एक कर खोलनेवाली और पग-पग पर पाठकों को चौंकानेवाली ‘नटी’ की यह अनुपम कथा एक अनुपम साहित्यिक उपलब्धि है।
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