Sabke Ram
Author:
L Shri Rajeev Gupta, Dr. Pravesh KumarPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Available
‘सबके राम’ पुस्तक प्रभु श्रीराम के काज में लगे लाखों कार्यकर्ताओं के मन के भाव को उजागर करनेवाली है। पुस्तक की एक-एक पंक्ति निश्चित ही देश भर के रामभक्तों के मन में प्रभु राम के प्रति श्रद्धा, प्रेम एवं उनका जीवन कैसा बने, इसकी प्रेरणा देनेवाली होगी। पुस्तक देश भर में चले ‘निधि समर्पण अभियान’ में लगे कार्यकर्ताओं के अनुभवों को अपने भीतर समाहित करती है, वहीं प्रभु राम किस प्रकार भारत के कण-कण में व्याप्त हैं, इसे भी बताती है। हम सभी को यह विदित है कि ‘निधि समर्पण अभियान’ विश्व का सबसे बड़ा अभियान रहा है, जिसने भारत के प्रत्येक हिस्से के जनमानस को यह अवसर उपलब्ध कराया कि वह भी वर्षों से प्रतीक्षित प्रभु श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण का हिस्सा बन सके। इसलिए समाज के सभी वर्गों के हर आयु के बाल, युवा, महिला, पुरुष, वृद्ध ने हृदय खोलकर अपनी क्षमतानुसार निधि समर्पित की। उत्तर-पूर्व के अंतिम छोर की 95 वर्षीय महिला का समर्पण हो अथवा भारत की समुद्री सीमा एवं तटीय प्रदेश तमिलनाडु, केरल या फिर उत्तर के हिमालयी प्रदेश जम्मू-कश्मीर, लददाख आदि हों, सभी को राम-काज से जोड़ दिया। यह पुस्तक जहाँ भारत के सभी प्रांतों से प्रभु श्रीराम के संदर्भ में प्राप्त अनुभवों का संकलन है तो वहीं भारत की अस्मिता को दुनिया से परिचित करानेवाले प्रभु श्रीराम के जीवन के विभिन्न पहलुओं का भी वर्णन करती है।
ISBN: 9789355620064
Pages: 184
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: अच्छे लोगों की अच्छी दुनिया; बड़ी दुनिया जहाँ सब कुछ खुला-खुला हो, बिलकुल प्रकृति की तरह, बिलकुल ईश्वर की तरह हर वक़्त, हर किसी के लिए। ऐसी ही एक दुर्लभ दुनिया का पुनःसृजन यह उपन्यास करता है। इसके पात्र अपनी सादगी, सच्चाई और सीधे हृदय से उठे आवेगों के चलते हमें कुछ ही समय के लिए सही, एक ऐसी दुनिया में खींच लेते हैं जहाँ कोई हद ऐसी नहीं जिसे लाँघा न जा सके, कोई कुंठा ऐसी नहीं जिसे पिघलाया न जा सके और कोई आँसू इतना अड़ियल नहीं कि दिल में कील गाड़कर बैठ जाए—हर आँसू यहाँ आशीर्वाद की तरह बह जाता है। सुनील के पास भी ऐसे अनेक अनबहे आँसू थे, जो न तो तब बहे जब उसके कठोर पिता उस पर तानों के तीर चलाते थे, न तब बहे जब उसकी माँ किसी दूरस्थ अज्ञात जगह नौकरी के लिए जाते बेटे को देख बिलख पड़ी थी और न तब जब दाएँ हाथ से विकलांग होने पर उसका वायलिनवादक बनने का सपना टूटा था। वे सब आँसू सरदारा सिंह के थप्पड़ खाकर बहे; मौलाबख़्श का बनाया नक़ली हाथ पहनकर बहे; और मुद्दतों बाद वायलिन के तार छेड़कर बहे। अपनी सरल, सुगम और यथार्थवादी भाषा के ज़रिए यह उपन्यास हमें रुके हुए आँसुओं के बह जाने के साथ-साथ उन विराट हृदयों से भी मिलवाता है जो उन आँसुओं का सम्मान करते हैं, सरलता और विनम्रता को मनुष्यता की धरोहर की तरह सँजोकर रखते हैं।
Lockdown ki Reporter
- Author Name:
Indiwar
- Book Type:

- Description: माइकेला और रित न्यूयॉर्क और दिल्ली में डॉक्टर। कर्तव्य और भावना के द्वंद्व पर झूलते प्रेमी। एक नदी के दो किनारे। बीच में बहता कोरोना कालखंड। जोखिम उठाते ये डॉक्टर, इनके सपने और पत्रकार साबिया का प्रेम त्रिकोण। एक दुर्निवार प्रेम का विक्षोभ और मृत्यु का संत्रास...। मृत्यु शाश्वत सत्य। मृत्यु की प्रकृति को जीतने और खतरनाक वायरस बनाने का राक्षसी प्रयोग। इसी ने कोविड-19 को जन्म दिया। इससे होनेवाली मौतें अस्वाभाविक और दुनिया को हादसे में झोंकने वाली। ये मौतें जीवन का अपमान हैं। इनसे लाभ का प्रयास जीवन और मृत्यु, दोनों का अपमान। कोरोना कालखंड ऐसी ही त्रासदी है। रिश्तों और प्यार के पाँवों में जकड़ी बेडि़याँ, दुनिया विशाल कैदखाना—सब बंद। खुली रहीं कब्रगाहें। उनकी खुदाई का काम चलता रहा। महाशक्तियाँ विवश, लॉकडाउन की मोहताज। फिर माइकेला और रित का प्यार...? राक्षसी वृत्तियाँ इस त्रासदी में भी विस्तारवाद की ओर बढ़ीं। चीन ने अमेरिका को चुनौती दी। दक्षिणी सागर से विश्व युद्ध का खतरा उठा। गलवान की घटना और मोदी के सख्त रुख से चीन-भारत युद्ध आसन्न लगा। इसी कालखंड में शाहीन बाग, दिल्ली दंगा, निजामुद्दीन जमात और श्रीराममंदिर का शिलान्यास हुआ। विपक्ष की ओछी राजनीति दिखी। मोदी की वैश्विक नेता की छवि निखरी और राहुल का बौनापन उभरा। ये सारे परिदृश्य इसी उपन्यास के हैं, जो राजनीतिक कुटिलता, बौद्धिकता, भावना, संवेदना, प्रेम, करुणा, घृणा के द्वंद्व की मार्मिक कथा कहते हैं।
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