Baa
(0)
Author:
Giriraj KishorePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
250
₹ 200 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
गांधी को लेकर एक बड़ा और चर्चित उपन्यास लिख चुके गिरिराज जी इस उपन्यास में कस्तूरबा गांधी को लेकर आए हैं। गांधी जैसे व्यक्तित्व की पत्नी के रूप में एक स्त्री का स्वयं अपने और साथ ही देश की आज़ादी के आन्दोलन से जुदा दोहरा संघर्ष। ऐसे दस्तावेज़ बहुत कम हैं जिनमें कस्तूरबा के निजी जीवन या उनकी व्यक्ति-रूप में पहचान को रेखांकित किया जा सका हो, नहीं के बराबर। इसीलिए उपन्यासकार को भी इस रचना के लिए कई स्तरों पर शोध करना पड़ा। जो किताबें उपलब्ध थीं, उनको पढ़ा, जिन जगहों से बा का सम्बन्ध था, उनकी भीतरी और बाहरी यात्रा की और उन लोगों से भी मिले जिनके पास बा से सम्बन्धित कोई भी सूचना मिल सकती थी।</p> <p>इतनी मशक्कत के बाद आकार पा सका यह उपन्यास अपने उद्देश्य में इतनी सम्पूर्णता के साथ सफल हुआ है, यह सुखद है। इस उपन्यास से गुज़रने के बाद हम उस स्त्री को एक व्यक्ति के रूप में चीन्ह सकेंगे जो बापू के बापू बनने की ऐतिहासिक प्रक्रिया में हमेशा एक ख़ामोश ईंट की तरह नींव में बनी रही। और उस व्यक्तित्व को भी जिसने घर और देश की ज़िम्मेदारियों को एक धुरी पर साधा। उन्नीसवीं सदी के भारत में एक कम उम्र लड़की का पत्नी रूप में होना और फिर धीरे-धीरे पत्नी होना सीखना, उस पद के साथ जुड़ी उसकी इच्छाएँ, कामनाएँ और फिर इतिहास के एक बड़े चक्र के फलस्वरूप एक ऐसे व्यक्ति की पत्नी के रूप में ख़ुद को पाना जिसकी ऊँचाई उनके समकालीनों के लिए भी एक पहेली थी। यह यात्रा लगता है कई लोगों के हिस्से की थी जिसने बा ने अकेले पूरा किया। यह उपन्यास इस यात्रा के हर पड़ाव को इतिहास की तरह रेखांकित भी करता है और कथा की तरह हमारी स्मृति का हिस्सा भी बनाता है।</p> <p>इस उपन्यास में हम ख़ुद बापू के भी एक भिन्न रूप से परिचित होते हैं। उनका पति और पिता का रूप। घर के भीतर वह व्यक्ति कैसा रहा होगा, जिसे इतिहास ने पहले देश और फिर पूरे विश्व का मार्गदर्शक बनते देखा, उपन्यास के कथा-फ़ेम में यह महसूस करना भी एक अनुभव है।
Read moreAbout the Book
गांधी को लेकर एक बड़ा और चर्चित उपन्यास लिख चुके गिरिराज जी इस उपन्यास में कस्तूरबा गांधी को लेकर आए हैं। गांधी जैसे व्यक्तित्व की पत्नी के रूप में एक स्त्री का स्वयं अपने और साथ ही देश की आज़ादी के आन्दोलन से जुदा दोहरा संघर्ष। ऐसे दस्तावेज़ बहुत कम हैं जिनमें कस्तूरबा के निजी जीवन या उनकी व्यक्ति-रूप में पहचान को रेखांकित किया जा सका हो, नहीं के बराबर। इसीलिए उपन्यासकार को भी इस रचना के लिए कई स्तरों पर शोध करना पड़ा। जो किताबें उपलब्ध थीं, उनको पढ़ा, जिन जगहों से बा का सम्बन्ध था, उनकी भीतरी और बाहरी यात्रा की और उन लोगों से भी मिले जिनके पास बा से सम्बन्धित कोई भी सूचना मिल सकती थी।</p>
<p>इतनी मशक्कत के बाद आकार पा सका यह उपन्यास अपने उद्देश्य में इतनी सम्पूर्णता के साथ सफल हुआ है, यह सुखद है। इस उपन्यास से गुज़रने के बाद हम उस स्त्री को एक व्यक्ति के रूप में चीन्ह सकेंगे जो बापू के बापू बनने की ऐतिहासिक प्रक्रिया में हमेशा एक ख़ामोश ईंट की तरह नींव में बनी रही। और उस व्यक्तित्व को भी जिसने घर और देश की ज़िम्मेदारियों को एक धुरी पर साधा। उन्नीसवीं सदी के भारत में एक कम उम्र लड़की का पत्नी रूप में होना और फिर धीरे-धीरे पत्नी होना सीखना, उस पद के साथ जुड़ी उसकी इच्छाएँ, कामनाएँ और फिर इतिहास के एक बड़े चक्र के फलस्वरूप एक ऐसे व्यक्ति की पत्नी के रूप में ख़ुद को पाना जिसकी ऊँचाई उनके समकालीनों के लिए भी एक पहेली थी। यह यात्रा लगता है कई लोगों के हिस्से की थी जिसने बा ने अकेले पूरा किया। यह उपन्यास इस यात्रा के हर पड़ाव को इतिहास की तरह रेखांकित भी करता है और कथा की तरह हमारी स्मृति का हिस्सा भी बनाता है।</p>
<p>इस उपन्यास में हम ख़ुद बापू के भी एक भिन्न रूप से परिचित होते हैं। उनका पति और पिता का रूप। घर के भीतर वह व्यक्ति कैसा रहा होगा, जिसे इतिहास ने पहले देश और फिर पूरे विश्व का मार्गदर्शक बनते देखा, उपन्यास के कथा-फ़ेम में यह महसूस करना भी एक अनुभव है।
Book Details
-
ISBN9788126728343
-
Pages280
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Bina Darvaze Ka Makaan
- Author Name:
Ramdarash Mishra
- Book Type:

- Description: आर्थिक विपन्नता से ग्रस्त किसी युवती को जब जीवन-ज्ञापन के लिए काम करना पड़ता है तो समाज के भूखे भेड़िए उसे ललचाई नज़रों से देखने लगते हैं। लेकिन जब उसकी आर्थिक विपन्नता के साथ उसके पति की शारीरिक निष्क्रियता भी जुड़ जाए, तो उसे सार्वजनिक सम्पत्ति ही समझ लिया जाता है। ‘बिना दरवाज़े का मकान’ की नायिका दीपा निम्न वर्ग की एक ऐसी ही अभिशप्त युवती है जो जीविकोपार्जन के साथ-साथ अपनी मर्यादा की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष कर रही है। उसकी जीवन-प्रक्रिया तथा संघर्ष के क्रम में सम्भ्रान्त बेनक़ाब होता जाता है और दो समाज आमने-सामने तने हुए दिखाई पड़ते हैं। दिल्ली की एक भरी-पूरी कॉलोनी की पृष्ठभूमि पर आधारित कथा कभी-कभी गाँव की ओर भी चली जाती है और तब विडम्बना एकदम गहरा जाती है। दर्द और यातना के गहरे प्रसार के बीच जिजीविषा एवं संघर्ष से उत्पन्न मूल्य-चेतना उपन्यास को और सशक्त बनाती है।
Dahan
- Author Name:
Suchitra Bhattacharya
- Book Type:

-
Description:
पुरुष-शासित समाज में मर्द को क्या कभी अहसास होगा कि औरत युग-युगान्तरों से अपने अन्तस में कितना अभिमान, अपमान, पीड़ा और ग्लानि छिपाए, उसे प्यार करती है? हज़ार असहमति, आपत्ति, विक्षोभ और असहनीय विसंगतियों के बावजूद, उसके साथ हमक़दम होकर सफ़र जारी रखती है? महानगर में हुई एक परिचित-सी घटना के सहारे लेखिका सुचित्रा भट्टाचार्य ने इस उपन्यास में वर्तमान समय और समाज की अँधेरी सच्चाइयों और मर्द की तानाशाहियों को क़लमबन्द किया है।
‘दहन’ महानगर के टालीगंज इलाक़े में चार समाज-दुश्मन नौजवानों के अश्लील शिकंजे से किसी गृहवधू को बचाने के लिए अपूर्व साहस से कूद पड़नेवाली एक औरत के तजुर्बे की हक़ीक़त है; उसने पुरुषत्व के अहंकार में औरत को अपने जु़ल्म और अत्याचार का शिकार बनानेवाले मर्दों के ख़िलाफ़ सामाजिक इंसाफ़ की वकालत की; उन्हें उचित सज़ा दिलाने के लिए थाना-पुलिस, कोर्ट-कचहरी तक भी दौड़ लगाने में हिचक नहीं की। अपनी साहसिकता के क्षणिक अभिनन्दन के बाद, उसने भयंकर अचरज के साथ आविष्कार किया कि नाइंसाफ़ियों के ख़िलाफ़ आवाज़ उठानेवाली और उनसे जूझने को तैयार औरत पर कितने-कितने माध्यमों से, कितनी-कितनी तरह के दबाव उसे निष्क्रिय और तुच्छ बना देते हैं। उसका प्रतिवाद, यहाँ तक कि उस पर लगाए गए अनगिनत लांछन भी उस बर्बर दबाव में पिसकर रह जाते हैं।
‘दहन’ उपन्यास, वर्तमान नारी-स्वातंत्र्य का असली चेहरा दिखाता है और पुरुष-शक्ति के नपुंसक और खोखले मूल्यबोध की हक़ीक़त बयान करता है, और वर्तमान समाज और पुरुषों द्वारा औरत की हिम्मत और मुक़ाबले की ताक़त को तोड़ने की साज़िश का पर्दाफ़ाश करता है।
Zanani Dyodhi
- Author Name:
Pearl S. Buck
- Book Type:

-
Description:
पर्ल एस. बक के ज़्यादातर उपन्यासों की विषयवस्तु परिवार और विवाह के इर्द-गिर्द घूमती है। ‘ज़नानी ड्योढ़ी’ भी इसका अपवाद नहीं है, लेकिन स्त्री-पुरुष सम्बन्धों पर जितने क्रान्तिधर्मी नज़रिए से इस उपन्यास में उठाया गया है, वह अभूतपूर्व है। 20वीं सदी के चौथे दशक में जब यह उपन्यास आया था, तब नारी-स्वातंत्र्य का विचार अपनी शुरुआती अवस्था में ही था। पर्ल एस. बक ने मैडम वू की इस कथा के माध्यम से जिस साहस और कौशल के साथ स्त्री-जीवन, सेक्स, परिवार और रिश्तों के जितने पहलुओं को उठाया था, वह आश्चर्यजनक है।
मैडम वू एक सम्पन्न चीनी परिवार की महिला है जो अपनी चालीसवीं वर्षगाँठ पर फ़ैसला करती है कि वह परिवार की ज़िम्मेदारियों से मुक्त होकर शान्ति के साथ अपना जीवन व्यतीत करेगी और इसके लिए वह अपने पति के लिए दूसरी पत्नी का प्रस्ताव रखती है। उसके इस फ़ैसले से उस भरे-पूरे परिवार में हड़कम्प मच जाता है। उसके बेटे और बहुओं के बीच के अभी तक दबे-छुपे द्वन्द्व भी सामने आने लगते हैं और इस प्रक्रिया में लेखिका विवाह संस्था और स्त्री-पुरुष सम्बन्ध को हर कोण से देखने-समझने का ‘स्पेस’ रच देती है।
चीनी पृष्ठभूमि में शाश्वत मानवीय प्रश्नों से जूझता यह उपन्यास विश्वसाहित्य की एक अमूल्य निधि है।
Parajay (Raj)
- Author Name:
Alexander Fadeyev
- Book Type:

- Description: ‘पराजय’ अलेक्सान्द्र फ़देयेव का पहला उपन्यास है। क्रान्ति-विरोधियों के विरुद्ध क्रान्तिकारियों के छापामार युद्ध का इसमें व्यापक, गहन और प्रामाणिक चित्र प्रस्तुत किया गया है। वास्तविक जीवन का सहज वर्णन करते हुए लेखक ने चरित्रों के नैतिक विकास पर ज़ोर दिया है। फ़देयेव स्वयं छापामार रहे थे, जिस कारण इस उपन्यास का कथानक न केवल विश्वसनीय बन पड़ा है, बल्कि रूसी क्रान्ति में लेखक की आस्था को भी सच्चे, सटीक ढंग से सम्प्रेषित करता है।
Antim Satya Tatha Anya Kahaniyan
- Author Name:
Himanshu Joshi
- Book Type:

- Description: प्रसिद्ध कथाकार हिमांशु जोशी की इन कहानियों में वैविध्य देखने को मिलता है। अचरज होता है-इतना वैविध्य एक ही व्यक्ति की रचनाओं में एक साथ कैसे संभव हो सकता है? छह दशक से अधिक के अपने कहानी लेखन में हिमांशु जोशी ने लगभग दो सौ कहानियाँ लिखीं। कई स्तरों को छूती आम आदमी की इन कहानियों में अदृश्य आग है, तपिश है, पीड़ा है, छटपटाहट है, और घुटन भी है। दर्द की ये तसवीरें मनुष्य-मन की व्यथा ही नहीं, आज के जी रहे मानव के अंतहीन अंतर्विरोधों को भी उजागार करती हैं। कहानी मात्र कहानी न रहकर एक यथार्थ भी बन जाए, यह स्वयं में कम बड़ी उपलब्धि नहीं। जिए हुए यथार्थ की ये कहानियाँ कहानियाँ ही नहीं, दस्तावेज भी हैं–विसंगतियों से जूझ रहे अभिशप्त आदमियों के लिए। कहानी शुरू तो कहीं से भी हो सकती है यहाँ, लेकिन प्रायः इन कहानियों का अंत मास्टर स्ट्रोक के साथ होता है। सुप्रसिद्ध कथाकार कमलेश्वर ने हिमांशु जोशी के विषय में लिखा है कि ‘स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कहानी को हिमांशु जोशी की कहानियों के बगैर पहचाना नहीं जा सकता। हिंदी कहानी ने जितनी भी रचनात्मक मंजिलें तय की हैं, उन रचनायात्राओं और मंजिलों पर हिमांशु जोशी की कोई-न-कोई कहानी साथ चलती या मंजिल पर मौजूद मिलती है।'
Mahamoh : Ahilya Ki Jivani
- Author Name:
Pratibha Rai
- Book Type:

-
Description:
यदि अहल्या ‘सौन्दर्य’ का प्रतीक है, इन्द्र ‘भोग’ का; गौतम ‘अहं’ का प्रतीक है तो राम ‘त्याग’ एवं ‘भाव’ के प्रतीक हैं। सौन्दर्य का केवल स्थूल रूप ही नहीं होता—सूक्ष्म तत्त्व भी होता है। सौन्दर्य का तत्त्व न समझ पाने पर सौन्दर्य और सौन्दर्यग्राही दोनों ही सौन्दर्य का खंडित रूप ही देख पाते हैं। सौन्दर्य मोह पैदा करता है, और मोहभंग भी करता है। इन्द्र का रूप मोह उत्पन्न करता है, जबकि राम के रूप ने अहल्या का मोहभंग किया है। मोह और मोहभंग के उतार-चढ़ाव के बीच आत्ममुग्धा अहल्या स्वयं ही बन गईं मोह का कारण और स्वयं ही मोह का लक्ष्य। इन्द्र मोह ने अहल्या को पाप की ओर प्रेरित किया था, जबकि राम-भाव ने प्रेरित किया था—मोक्ष की ओर। पाप से मोक्ष तक के उत्तरण पथ पर गौतम थे एक दंडाधिकारी प्रशासक मात्र। अहल्या की प्रेमाकांक्षा का रामाकांक्षा में बदल जाना ही अहल्या की तपस्या और मोक्ष है।
युगों से परे ‘महामोह’ है इन्द्र, गौतम और अहल्या के मोह एवं मोहभंग का आख्यान—भ्रान्ति और उत्थान की आख्यायिका।
201 Prerak Neeti Kathayen
- Author Name:
Shiv Kumar Goyal
- Book Type:

- Description: 201 प्रेरक नीति कथाएँ—शिवकुमार गोयल धर्मशास्त्रों, नीतिशास्त्रों की कथाएँ तथा ऋषि-मुनियों, वीर-वीरांगनाओं, विभिन्न क्षेत्रों के आदर्श पुरुषों के जीवन प्रसंग आदर्श जीवन जीने, अपना कर्तव्यपालन करने की प्रेरणा देने में हमेशा से सहायक रहे हैं। बच्ïचे दादा-दादी, नाना-नानी व माता-पिता के मुख से प्रेरक कथाएँ सुनने के लिए लालायित रहा करते हैं। इन आदर्श कथाओं, पावन प्रसंगों से बालकों को सत्य बोलने, माता-पिता, वृद्धजनों व गुरुजनों की सेवा व सम्मान करने, धर्मानुसार आदर्श जीवन जीने की स्वत: प्रेरणा मिलती है। 201 प्रेरक नीति कथाएँ की सरल-सुबोध कहानियाँ हमारे जीवन की दिशा बदलने की क्षमता रखती हैं। सद्ïगुण, सदï्विचार, सदाचार—यानी मानव जीवन के लिए आवश्यक सभी गुणों की खान हैं ये नीति कथाएँ। इन्हें पढ़कर हम सन्मार्ग पर चलें और धर्ममय नीति-रीति से जीवन जिएँ तो इस संग्रह का प्रकाशन सार्थक होगा।
Mithauwa
- Author Name:
Ashtbhuja Shukla
- Book Type:

- Description: मिठउवा -अष्टभुजा शुक्ल के ललित निबंध सिर्फ ललित नहीं हैं। ये अपनी अन्तर्वस्तु में पाठक को हमारे समय की असाध्य समस्याओं, जीवन के जटिल और बीहड़ पथों तक ले जाते हैं। उनके निबंधों में गजब की आन्तरिक संगति है और इनमें अष्टभुजा शुक्ल लेखक के रूप में भी किसान लगते हैं। सरोकारों, स्थितियों से जूझते हुए, वंचित जन के साथ जीवन - क्षेत्र में कुदाल–कलम से जोतते-खोदते हुए। सो अष्टभुजा शुक्ल हिन्दी गद्य को समर्थतर बनाने वाले सिर्फ गद्यकार नहीं समर्थ कवि सक्षम गद्यकार हैं। आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की परंपरा को देखते हुए कौन कहता है कि हिन्दी गद्य में बाणभट्ट की संभावना नहीं है। -विश्वनाथ त्रिपाठी आवरण के चित्रकार 'पद्मश्री' भज्जू श्याम गोंड चित्रकला के लिए सुविख्यात प्रधान गोंड परिवार की नयी पीढ़ी के चित्रकार हैं। उनके चित्र भारत भवन समेत देश और विदेश में अनेक जगह प्रदर्शित हुए हैं। भज्जू ने पारंपरिक गोंड चित्रकला में आधुनिक आयाम जोड़कर उसका विस्तार किया है। लंदन यात्रा पर आधारित उनकी बहुचर्चित पुस्तक - 'द लन्दन जंगल बुक' इटैलियन, डच, फ्रेंच, कोरियन और पुर्तगाली भाषाओं में भी प्रकाशित हुई है।
Zameen Apni To Thi
- Author Name:
Jagdish Chandra
- Book Type:

-
Description:
जगदीश चन्द्र के पूर्व प्रकाशित ‘नरककुंड में बास’ और ‘धरती धन न अपना’—इन दोनों उपन्यासों के विस्तार के पीछे भारतीय दलित समाज की अवस्था–दुरावस्था को उसके विविध चरणों में विकासात्मक रूप से पकड़ने का भाव छिपा था। आज़ादी के पहले का घोड़ेवाहा का दलित काली ‘धरती धन न अपना’ से जब ‘नरककुंड में बास’ के तहत सामने आता है तो युग स्थितियों का परिवर्तन ही साफ़ लक्षित नहीं होता, इस परिवर्तन के सम्बन्धगत और भावगत रूपाकार भी पकड़ में आने लगते हैं।
काली अब निरे सामन्तीय सम्बन्धों से बाहर आकर जालन्धर के अर्ध–सामन्तीय, अर्ध–पूँजीवादी हालातों
का शिकार है, यहाँ उसका शोषण करनेवाले टेनरीज़ के उसी के वर्ग से सम्बन्ध रखनेवाले मालिक ही नहीं, दलितों का नेतृत्व करने का दावा करनेवाले उनके अपने राजनेता भी हैं।
आज़ाद भारत में अब दलित वर्ग के उभार के अनेक सकारात्मक पहलुओं के साथ–साथ कुछ ऐसे पहलू भी उभरने शुरू हो गए थे, जिनमें प्रतिक्रियावादी प्रवृत्तियों के बीज छिपे थे। जगदीश जी अक्सर यह बात दोहराते थे कि ‘नरककुंड में बास’ के आख़िरी खंडों में काली अपने साथी मज़दूरों का छोटा–मोटा लीडर ज़रूर बनता है पर मज़दूरों से एलिएनेट हो रहा है क्योंकि वे उसे मालिकों का पिट्ठू समझते हैं। जगदीश जी इस गहरी सामाजिक प्रक्रिया को और ब्योरे व तफसील के साथ समझना चाह रहे थे जिसकी परिणति अन्तत: ‘ज़मीन अपनी तो थी’ के रूप में हुई।
इस उपन्यास का काली साहसी है, निडर है, क्रोध करने में सक्षम है, अपने काम और अपनी परम्परा पर गर्व करता है, और आख़िर में अपने बेटे के रूप में अपनी परम्परा को बदलते और एक नितान्त भिन्न राह पकड़ते देखता है।
Ek Ummid Aur
- Author Name:
Abhimanyu Anat
- Book Type:

-
Description:
चर्चित और यशस्वी उपन्यासकार अभिमन्यु अनत का यह उपन्यास समकालीन उपन्यासों की धारा से कुछ हटकर है जो सहज ही पठनीयता को आमंत्रित करता है। पुनर्जन्म की अवधारणा पर आधारित इस उपन्यास में गर्भस्थ शिशु को नैरेटर बनाकर कथानक का ताना-बाना सिरजा गया है जिसके माध्यम से समकालीन जीवन में बन रहे सामाजिक और प्राकृतिक पर्यावरण के प्रदूषण पर न केवल गहरी और सार्थक चिन्ता है, बल्कि उससे निजात पाने के आवश्यक संकेत भी।
बढ़ते शहरीकरण ने जहाँ प्रकृति की सुन्दरता को विनष्ट किया है, वहीं सियासतदानों की स्वार्थपरता ने मानव-मानव के बीच नफ़रत और हिंसा की गहरी खाई पैदा कर दी है। आम आदमी जो कि इन राजनीतिज्ञों और मज़हबी, साम्प्रदायिक ताक़तों की इस चाल को नहीं समझते हैं, वे इनके झाँसे में आकर इस धरती की सुन्दरता को और इंसानियत के निरन्तर प्रवाह को क्षति पहुँचाते हैं, लेकिन जब एक शिशु के जन्म की वेला आती है तो फिर दुखी और पीड़ित इंसानों के मन में ‘एक और उम्मीद’ की कोंपल फूटती है।
यह उपन्यास इंसानियत की इसी उम्मीद की कोंपल के खिलने की दास्तान है जो अपनी रचनात्मक विशिष्टता और सहज प्रवाह के कारण न केवल पाठकीय संवेदना को स्पन्दित करता है, बल्कि वैचारिक उत्तेजना को भी नया आयाम प्रदान करता है।
Kavi Vandyaghati Gaein Ka Jeevan Aur Mrityu
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

-
Description:
वरिष्ठ बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी का यह लघु उपन्यास ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर रचा गया है, लेकिन कवि वन्द्यघटी गाईं के जन्म और मृत्यु का इतिहास पूर्णतः लेखिका की अपनी मानस-कथा है। कोई ऐतिहासिक कथा नहीं। लेखिका ने इसके माध्यम से एक ऐसे युवक के प्रेम और जिजीविषा की अनूठी कहानी रचने की कोशिश की है जो अपने जन्म और जीवन को लाँघकर एक नई दुनिया का सृजन करना चाहता है, लेकिन उसके हर प्रयास को तत्कालीन समाज ने मात दी। चुयाड़ वंश में जन्मा युवक एक ब्राह्मण कन्या से प्यार करने लगता है लेकिन अन्ततः उसके हिस्से में आता है दु:ख और अपमान।
निश्चय ही तरल संवेदना और प्रवाहमयी शिल्प में रची यह कृति एक बार फिर पाठकों को महाश्वेता देवी की रचनात्मक विशिष्टता से रू-ब-रू कराएगी।
Mitro Marjani
- Author Name:
Krishna Sobti
- Book Type:

-
Description:
रघुवीर सहाय की पंक्ति है—जिसका भाव है कि इस दुनिया के सिर पर अँधेरे में अगर मैं एक डंडा मारूँ तो यह किस भाषा में चीखेगी? मित्रो इस कहानी में संयुक्त परिवार की भीरु आत्मतुष्ट दुनिया के सिर पर पड़नेवाले डंडे की चोट है।
चरित्र की दृष्टि से मित्रो हिन्दी कहानी की अभूतपूर्व पात्र है। इस गृहस्थी में पता नहीं कहाँ से टपक पड़ी है, उसने सब कुछ अस्त-व्यस्त कर दिया है। ऐसा सजीव, सदेह पात्र किसी परिवार को तोड़ देता, पति को पागल कर देता, हत्या हो जाती। लेकिन मित्रो को ऐसे धर्मभीरु, मध्यवर्गीय, परिवार में डालकर कृष्णा सोबती ने बेलौस टक्कर की योजना की है। यह टक्कर बहुत तेज़ है लेकिन ख़तम नहीं होती। विरोधी स्थितियाँ पूरी कथा-अवधि में सक्रिय रहती हैं अनेक दाँव-पेंच करती हुई। पूरी कहानी इस टक्कर से स्पन्दित है।
मित्रो इसलिए भी अभूतपूर्व है कि बहुत सहज है। यह अभूतपूर्वता असामान्यता नहीं, वास्तविकता से उपजी है। मित्रो जैसे व्यक्ति समाज में थे, उन्हें साहित्य में नहीं लाया गया था—हिन्दी कहानी में नहीं लाया गया था। मित्रो कोई मनोविश्लेषणात्मक या असामान्य पात्र नहीं।
हिन्दी में उस जैसी स्त्री का प्रवेश पहली बार हुआ। कृष्णा सोबती ने ऐसे भरपूर पात्र को केन्द्र में रखकर यह कहानी लिखी, यह नई बात है। इसके लिए बहुत साहस, निर्ममता और ममता की ज़रूरत पड़ी होगी। यह सब बहुत-बहुत आत्मीय परिचय, पात्र से तादात्म्य के बिना सम्भव नहीं था।
—विश्वनाथ त्रिपाठी
कुछ कहानियाँ : कुछ विचार पुस्तक से
Samar Shesh Hai
- Author Name:
Abdul Bismillah
- Book Type:

-
Description:
अब्दुल बिस्मिल्लाह बहुचर्चित और बहुमुखी प्रतिभा-सम्पन्न रचनाकार हैं। ‘झीनी-झीनी बीनी चदरिया’ उपन्यास के लिए इन्हें ‘सोवियत लैंड नेहरू पुरस्कार' से भी सम्मानित किया जा चुका है।
‘समर शेष है’ अब्दुल बिस्मिल्लाह का आत्म-कथात्मक उपन्यास है। कथा-नाटक है, सात-आठ साल का मातृविहीन एक बच्चा, जो कि पिता के साथ-साथ स्वयं भी भारी विषमता से ग्रसित है। लेकिन पिता का असामयिक निधन तो उसे जैसे एक विकट जीवन-संग्राम में अकेला छोड़ जाता है। पिता के सहारे उसने जिस सभ्य और सुशिक्षित जीवन के सपने देखे थे, वे उसे एकाएक ढहते हुए दिखाई दिए। फिर भी उसने साहस नहीं छोड़ा और पुरुषार्थ के बल पर अकेले ही अपने दुर्भाग्य से लड़ता रहा। इस दौरान उसे यदि तरह-तरह के अपमान झेलने पड़े तो किशोरावस्था से युवावस्था की ओर बढ़ते हुए एक युवती के प्रेम और उसके ह्रदय की समस्त कोमलता का भी अनुभव हुआ। लेकिन इस प्रक्रिया में न तो वह कभी टूटा या पराजित हुआ और न ही अपने लक्ष्य को भूल पाया। कहने की आवश्यकता नहीं कि विपरीत स्थितियों के बावजूद संकल्प और संघर्ष के गहरे तालमेल से मनुष्य जिस जीवन का निर्माण करता है, यह कृति उसी की सार्थक अभिव्यक्ति है।
Umeed
- Author Name:
Jaydeep Khot
- Book Type:

- Description: Hindi Poetry Book
Nadi Ki Toot Rahi Deh Ki Awaz
- Author Name:
Shriprakash Mishra
- Book Type:

- Description: यह उपन्यास ज़मीन से जुडी समस्या पर आधारित है और इस मामले में यह प्रेमचन्द्, रेणु, शिवप्रसाद सिंह आदि की रचनाओं की आगे की कड़ी के रूप में दिखेगा, एक सर्वथा अपरिचित क्षेत्र और परिस्थिति में अवस्थित। यहाँ असम के लोगों का जीवन अपने पूरे सांस्कृतिक वितान के साथ तथा उसका टकराव अन्य संस्कृतियों के साथ जो बहिरागतों के आने के कारण बना है, उभरकर चित्रित हुआ है। वहाँ का आम आदमी अनुभव करता है कि वह अपने ही वतन में अल्पसंख्यक होता जा रहा है। अपने मध्यवर्गीय चरित्र के कारण सरकारें उसका समाधान निरन्तर टालती रहती हैं। परिणामस्वरूप इंसरजेंसी और आतंकवाद वहाँ के जीवन का अंग बन जाता है। लड़ते हुए लोगों का एक पूरा जीवन बीत जाता है, पर एक अदना-सा ज़मीन का टुकड़ा हस्तगत नहीं हो पाता। आज जो राष्ट्रीय नागरिकता पंजी और नए नागरिक विधान की बहस चल रही है, उसकी रुनझुन उपन्यासकार ने काफ़ी पहले अनुभव कर ली है। यह पूरा वृत्तान्त एक सुन्दर कहानी के माध्यम से इस उपन्यास में आया है। श्रीप्रकाश मिश्र निम्न मूलतः कवि हैं। इसलिए उनका प्रकृति का, मनुष्य के स्वभाव का, नौकरशाहों और राजनेताओं के व्यवहार का वर्णन एक खूबसूरत भाषा में हुआ है। यह उपन्यास पाठकों को कई तरह से समृद्ध करेगा।
Ve Aankhen
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

-
Description:
इस संसार में कोई भी ऐसा नहीं है जो पूरे विश्वास के साथ कह सके, कि वह सुखी है। जो ऐसा कहता है, वह या तो जान-बूझकर झूठ बोलता है या फिर उसे समझ ही नहीं है कि सुख क्या होता है।
इस कथा-पुस्तक की केन्द्रीय विषयवस्तु यही है। अविनाश दा की कविताओं से शब्द की महत्ता का पाठ पढ़कर कथानायक जीवन की कथा कहने बैठता है जिसमें उसके पास-पड़ोस से लेकर दिल्ली-मुम्बई तक फैले पात्रों के दु:ख-कर्म शामिल हैं। इतिहास जिस तरह आगे बढ़ता है, आदमी का जीवन भी छोटे रूप में उसी तरह ऊपर-नीचे होता हुआ बढ़ता रहता है। उसमें तरह-तरह के बदलाव आते हैं, कई बार तो ऐसे कि कुछ अन्तराल के बाद उनसे मिलो तो जैसे पहचानना ही मुश्किल हो जाता है।
अलग-अलग कथा-सूत्रों के माध्यम से बिमल मित्र यहाँ जीवन और साहित्य के रिश्ते पर, मनुष्य की विचित्र नियति पर, समाज के मुखौटों पर अलग-अलग कोणों से दृष्टिपात करते हैं। अविनाश दा, सत्य सुन्दर और मिसेज राय, अशेष दत्त, मुकुल राय जैसे पात्रों की इन कहानियों में जीवन के कई चित्र ऐसे हैं जो इस संसार के प्रति प्रेम भी जगाते हैं, मोह भी और वितृष्णा भी।
Ashawari
- Author Name:
Arun Bagchee
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Mataa-E-Dard
- Author Name:
Razia Fasih Ahamad
- Book Type:

-
Description:
‘मता-ए-दर्द’, यानी पीड़ा की पूँजी, जो उसके खाते में जमा होना शुरू हुई तो फिर बढ़ती ही चली गई। ख़ुशी के कुछ पल जो तय थे, वे ज़िन्दगी की शुरुआत में ही ख़र्च हो गए, जब उसने पहले प्यार का पहला सपना देखा था। जल्दी ही वह सपना टूटा और नासूर बनकर रूह के क़रीब बैठ गया। फिर प्यार उसके लिए प्यार न रहा, या तो उस नासूर को ढकने के लिए मरहम बना या वक़्तन-ब-वक़्तन उससे फूटनेवाली ठंडी आग की पलट, जिसका मक़सद मर्दों को अगर झुलसा देना नहीं तो सुलगाकर छोड़ देना ज़रूरी था। फिर भी यह उसकी जीत हरगिज़ न थी, दिल के हाथों वह बार-बार मजबूर हुई, अपने ऊपर से क़ाबू खो बैठी, और फिर पीड़ा की अपनी पूँजी समेटने में जुट गई। जहाँ यह उपन्यास ख़त्म होता है, वहाँ भी वह एक दोराहे पर ही खड़ी है।
पाकिस्तान की पृष्ठभूमि में लिखा गया यह उपन्यास स्त्री को लेकर लिखी जानेवाली उन फ़ार्मूलाबद्ध कथाओं में से नहीं है जिसमें लेखक अपनी वैचारिक मान्यताओं को अपने पात्रों के ऊपर थोप देते हैं। यहाँ एक स्त्री है जो अपनी स्वाभाविक गति में बनती हुई अपनी ऊँचाई की तरफ़ बढ़ रही है। वह समझौते करती है, प्रतिकार करती है, हताश होती है, लेकिन अपनी ज़िन्दगी में जो ख़ूबसूरत है, महसूस करने लायक़ है, उसके प्रति आँखें बन्द नहीं करती।
Krantikakka Ki Janm-Shatabdi
- Author Name:
Ravindra Verma
- Book Type:

-
Description:
यह उपन्यास जिस समय में अवस्थित है, वह 1857 की डेढ़ सौवीं जयन्ती के आस-पास है। इसी समय क्रान्ति कक्का की जन्म-शताब्दी भी है। युवा कक्का झाँसी में चन्द्रशेखर आज़ाद के क्रान्ति के हेडक्वार्टर के सदस्य थे जब आज़ाद काकोरी कांड के बाद इस शहर में कुछ बरस भूमिगत रहे। शिक्षक कक्का रिटायर होकर अपने दूर के भतीजे के साथ आ गए थे। झाँसी का यह मध्यवर्गीय घर इस भूमंडलीकृत समय में मध्यवर्गीय विडम्बनाओं का केन्द्र बन जाता है : इसके एक छोर पर क्रान्ति कक्का हैं जिनकी स्मृति में अपने क्रान्तिकारी दल के नौजवानों की यह शर्त है कि कौन पहले देश पर क़ुर्बान होगा; दूसरे छोर पर कक्का का प्यारा पोता है जिसके दिल्ली के पास स्थित पानी के कारखाने की बोतलों पर झाँसी की रानी की तस्वीर है—इस तस्वीर में घोड़े पर बैठी रानी का चेहरा अभिनेत्री रानी मुखर्जी का बिकाऊ चेहरा है! इसी नव-उदारवादी प्रपंच में कक्का का दूसरा पोता दिल्ली में ही अपनी नौकरी खो देता है, क्योंकि वह जिस पुरानी कपड़े की मिल में काम करता है, वह सोने के भाव बिक जाती है ताकि उस ज़मीन पर मॉल खड़ा हो सके। इसी बेकार बाप का इकलौता पुत्र अमरीका पहुँचकर स्वायत्त हो जाता है।
यह इस भूमंडलीकृत दौर में एक पुराने मध्यवर्गीय परिवार के टूटने का आख्यान है, जैसे कोई आज़ादी का शीराज़ा बिखर रहा हो। यहाँ इसी दौर की नव-औपनिवेशिक त्रासदी की आहें और कराहें हैं।
यह भारतीय नव-उदारवाद की आभ्यन्तरीकृत कथा है।
Shesh Yatra
- Author Name:
Usha Priyamvada
- Book Type:

-
Description:
अनु प्रणव के अपने फ़ैसले का शिकार हुई, वरना वैसा घर, वैसा वर न तो उसके सपनों में था, न सामर्थ्य में। गली-मोहल्लों वाले क़स्बाई परिवार से निकलकर वह लड़की अचानक अमेरिका जा बसी—डॉ. प्रणवकुमार की परिणीता बनकर। सब कुछ जैसे पलक झपकते बदल गया—घर-परिवेश, रहन-सहन, खान-पान। अनु ने बड़ी मुश्किल से अपने को सँभाला और प्रणव की आकांक्षाओं, रुचियों के अनुरूप ढाल लिया। दिन-दिन डूबती चली गई प्यार की गहराइयों में। लेकिन शीघ्र ही उसे लगने लगा कि वह वहाँ अकेली है। प्रणव की तो छाया तक उन गहराइयों में नहीं। वह तो मात्र तैराक है—भावमयी लहरों को रौंदकर प्रसन्न होनेवाला एक महत्त्वाकांक्षी और अस्थिर पुरुष।
ठगी गई अनु अपनी सुन्दरता, अपने संस्कार और सहज विश्वासी मन से। लेकिन आत्महत्या वह नहीं करेगी। टूट-बिखरकर भी जोड़ने की कोशिश करेगी स्वयं को, क्योंकि दलित-आश्रित रहना ही नारी-जीवन का यथार्थ नहीं है। यथार्थ है उसकी निजता और स्वावलम्बन।
विरल कथाकार उषा प्रियम्वदा की अनु वस्तुतः नारी-मन की समस्त कोमलताओं के बावजूद उसके जागते स्वाभिमान और कठोर जीवन-संघर्ष का प्रतीक है, जिसे इस उपन्यास में गहरी आत्मीयता से उकेरा गया है। उच्च-मध्यवर्गीय प्रवासी भारतीय समाज यहाँ अपने तमाम अन्तर्विरोधों, व्यामोहों और कुंठाओं के साथ मौजूद है। अनु, प्रणव, दिव्या और दीपांकर जैसे पात्रों का लेखिका ने जिस गहन अन्तरंगता से चित्रण किया है, उससे वे पाठकीय अनुभव का अविस्मरणीय अंग बन जाते हैं।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book