Kissa Besir-pair
About the book
यह उपन्यास स्मृतियों की क़िस्सागोई है जिसके केन्द्र में इतिहास प्रवर्तक घटनाएँ और व्यक्तित्व नहीं हैं। हो भी नहीं सकते; क्योंकि वे हमारे दैनिक जीवन से दूर कहीं, वाक़ई इतिहास नाम की उस जगह में रहते होंगे, जहाँ तनखैये इतिहासकार बग़ल में काग़ज़-क़लम-कूची लेकर बैठते होंगे। हमारे इस जीवन में जिनकी मौजूदगी, बस कुछ डरावनी छायाओं की तरह दर्ज होती चलती है। हम यानी लोग, जिनके ऊपर जीवन को बदलने की नहीं, सिर्फ़ उसे जीने की ज़िम्मेदारी होती है। यह उन्हीं हममें से एक के मानसिक भूगोल की यात्रा है, जिसमें हम दिन-दिन बनते इतिहास को जैसे एक सूक्ष्मदर्शी की मदद से, उसकी सबसे पतली शिराओं में गति करते देखते हैं। जो नंगी आँखों दिखाई नहीं देती। वह गति, जिसका दायित्व एक व्यक्ति के ऊपर है, वही जिसका भोक्ता है, वही द्रष्टा। वह गति जो उसकी भौतिक-सामाजिक-राजनीतिक उपस्थिति के इहलोक से उधर एक इतने ही विराट संसार की उपस्थिति के प्रति हमें सचेत करती है। लेखक यहाँ हमारे इहलोक के अन्तिम सिरे पर एक चहारदीवारी के दरवाज़े-सा खड़ा मिलता है, जो इस वृत्तान्त में खुलता है; और हमें उस चहारदीवारी के भीतर बसी अत्यन्त जटिल और समानान्तर जारी दुनिया में ले जाता है, जो हम सबकी दुनिया है, अलग-अलग जगहों पर खड़े हम उसके अलग-अलग दरवाज़े हैं। उन्हीं में से एक दरवाज़ा यहाँ इन पन्नों में खुल रहा है। अद्भुत है यहाँ से समय को बहते देखना। यह उपन्यास सोदाहरण बताता है कि न तो जीना ही, केवल शारीरिक प्रक्रिया है, और न लिखना ही।
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About the Book
यह उपन्यास स्मृतियों की क़िस्सागोई है जिसके केन्द्र में इतिहास प्रवर्तक घटनाएँ और व्यक्तित्व नहीं हैं। हो भी नहीं सकते; क्योंकि वे हमारे दैनिक जीवन से दूर कहीं, वाक़ई इतिहास नाम की उस जगह में रहते होंगे, जहाँ तनखैये इतिहासकार बग़ल में काग़ज़-क़लम-कूची लेकर बैठते होंगे। हमारे इस जीवन में जिनकी मौजूदगी, बस कुछ डरावनी छायाओं की तरह दर्ज होती चलती है। हम यानी लोग, जिनके ऊपर जीवन को बदलने की नहीं, सिर्फ़ उसे जीने की ज़िम्मेदारी होती है।
यह उन्हीं हममें से एक के मानसिक भूगोल की यात्रा है, जिसमें हम दिन-दिन बनते इतिहास को जैसे एक सूक्ष्मदर्शी की मदद से, उसकी सबसे पतली शिराओं में गति करते देखते हैं। जो नंगी आँखों दिखाई नहीं देती। वह गति, जिसका दायित्व एक व्यक्ति के ऊपर है, वही जिसका भोक्ता है, वही द्रष्टा। वह गति जो उसकी भौतिक-सामाजिक-राजनीतिक उपस्थिति के इहलोक से उधर एक इतने ही विराट संसार की उपस्थिति के प्रति हमें सचेत करती है।
लेखक यहाँ हमारे इहलोक के अन्तिम सिरे पर एक चहारदीवारी के दरवाज़े-सा खड़ा मिलता है, जो इस वृत्तान्त में खुलता है; और हमें उस चहारदीवारी के भीतर बसी अत्यन्त जटिल और समानान्तर जारी दुनिया में ले जाता है, जो हम सबकी दुनिया है, अलग-अलग जगहों पर खड़े हम उसके अलग-अलग दरवाज़े हैं।
उन्हीं में से एक दरवाज़ा यहाँ इन पन्नों में खुल रहा है।
अद्भुत है यहाँ से समय को बहते देखना।
यह उपन्यास सोदाहरण बताता है कि न तो जीना ही, केवल शारीरिक प्रक्रिया है, और न लिखना ही।
Book details
- Format
- Hardbound
- Publisher
- Rajkamal Prakashan Samuh
- Edition
- 1st
- Publication year
- 2017
- Weight
- 620 grams
- ISBN-13
- 9788126730438
- Pages
- 367
- Reading time
- ~12 hrs
- Age
- 18+
- Country of origin
- India
- Dimensions
- 14.5 × 22 cm
- Language
- Hindi
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