Thake Paon
Author:
Bhagwaticharan VermaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 396
₹
495
Available
प्रस्तुत उपन्यास ‘थके पाँव’ सामाजिकता, बौद्धिकता और भावनात्मक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है।</p>
<p>भगवतीचरण वर्मा हिन्दी जगत के जाने-माने विख्यात उपन्यासकार हैं। आपके सभी उपन्यासों में एक विविधता है। हास्य व्यंग्य, समाज, मनोविज्ञान और दर्शन सभी विषयों पर उपन्यास लिखे हैं। कवि और कथाकार होने के कारण वर्मा जी के उपन्यासों में भावनात्मक और बौद्धिकता का सामंजस्य मिलता है। वर्मा जी के उपन्यासों को पढ़ते समय यह सदा ध्यान रखना चाहिए कि वे मूलत: एक छायावादी और प्रगतिवादी कवि हैं और उनके कथा साहित्य में कविता की भावना की प्रधानता बौद्धिक यथार्थ से कभी अलग नहीं होती। उपन्यासों के अब तक परम्परागत शिथिल और बने-बनाए रूप-विन्यास और कथन-शैली की नई शक्ति और सम्पन्नता ही नहीं, वरन् कथावस्तु का नया विस्तार भी मिला।
ISBN: 9788180315671
Pages: 128
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: मेरे दोस्त ! तुम्हारी बुझी आँखों में मुझे उस भारत की तस्वीर दिखती है ,जिसमें रंग भरने को ना जाने कितनी किस्तों में कितनों ने लहू बहाए हैं । मुबारक हो ये रंग तुम्हें और उन्हें जिनके खेतों की खड़ी फसल इस इंसानी आग ने जलाए हैं । भूली मंजिलें ,भटकाती राहें ,शरीर तोड़ती चोटें और निहायती ठंडी आहें ! इनमें उलझे कल तुम्हीं तो मिले थे अंधेरी रात ,सूने रास्ते पर जूतों से गर्द उड़ाते ,हंसते-हंसते कोई उदास गीत गाते !कहाँ खो दिए वो सुकुमार शरीर ,भोली मुस्कुराहटें ,आँखों का रंग ,बचकानी चाहतें ? समूचा शहर जला दिया !क्यों ? तुम्हारे जैसे कितने सुनहरे सपने आसमान से टूटकर बेसहारा ,बिखरकर इस आग में गिर पड़े ! सब कुछ छिन गया ! जरूरतें मिट गयीं ,गया तुम्हारा शौक , तुम्हारे अरमान ;कट गए तुम्हारे पर, टूट गया तुम्हारा आसमान !तुम्हारे अरमानों के प्रेत ,तुम्हारा यह पिंजर बलिदान नहीं अभी बस मौत है । मेरे दोस्त !अपने चिता की एक चिंगारी मुझे दे दो ! इस पाप की लंका के लिए बस इतना ही काफी है ।ये सारे लुटेरे मारे जाऐंगे ,सारे अंधेरे दूर हो जाऐंगे क्योंकि अब तक की उस समझ को हमने दूर करने का प्रण लिया है जो लहू की कीमत को लहू बहने के डर से जोड़ती थी ।
Dheere Bahe Done Re : Vols. 1-2
- Author Name:
Mikhaiel Sholokhov
- Book Type:

-
Description:
इस वृहद् उपन्यास की जटिल संरचना और प्लॉट के पीछे इतिहास की नियमसंगत निरन्तरता का विचार उपस्थित है। शोलोख़ोव दो दुनियाओं के बीच के संघर्ष की भव्यता से पाठक का साक्षात्कार कराते हैं। स्थापित सामाजिक सम्बन्धों, संस्थाओं, परम्पराओं, रीति-रिवाजों की दुनिया टूट-बिखर रही है और एक नई दुनिया उभर रही है, स्वयं को स्थापित कर रही है। महत्त्वपूर्ण सामाजिक मुद्दों के साथ ही उपन्यास व्यक्ति और जन-समुदाय की ऐतिहासिक नियति के बीच के सम्बन्ध, ऐतिहासिक आवश्यकता और चयन की स्वतंत्रता के प्रश्न तथा त्रासदीपूर्ण संघर्षों और नाटकीय परिणतियों को जन्म देनेवाली ऐतिहासिक परिस्थितियों पर सोचने-विचारने के लिए पाठक को उकसाता है और उन सभी बिन्दुओं पर काव्यात्मक न्यायपूर्ण एवं तर्कपूर्ण अवस्थिति प्रस्तुत करता है।
शोलोख़ोव की कुशलता यह है कि यह सब कुछ वह कला की शर्तों पर नहीं करते बल्कि, इनके द्वारा अपनी कला को और अधिक उन्नत बनाते हैं। वे 'जनगण की नियतियों के महाकाव्यात्मक वर्णन की परम्परा को रचनात्मक ढंग से विकसित करते हुए, एक ऐतिहासिक प्रक्रिया के अंग के रूप में जनता के व्यापक आन्दोलनों के चित्र उपस्थित करते हैं। उपन्यास की कहानी ग्रिगोरी मेलेख़ोव के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है, लेकिन इसका वास्तविक नायक यही जनता है।
‘धीरे बहे दोन रे...’ क्रान्ति और गृहयुद्ध के दौरान कज़्ज़ाकों के आन्तरिक और बाह्य जगत में मची उथल-पुथल और बदलावों का ग्राफ़िक चित्रण प्रस्तुत करता है। 'धीरे बहे दोन रे' ने शोलोख़ोव को न केवल सोवियत लेखकों की अग्रिम पंक्ति में स्थापित कर दिया, बल्कि उन्हें विश्व-स्तर पर चर्चित लेखक बना दिया। इसके लिए उन्हें 1941 में ‘स्तालिन पुरस्कार से’ सम्मानित किया गया।
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