keertigaan
Author:
Chandan PandeyPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 200
₹
250
Available
उन्माद के जाल की पैमाइश में जुटे एक पत्रकार की उथल-पुथल भरी ज़िन्दगी की कथा है—‘कीर्तिगान’, जो उस वक़्त और उलझ जाती है जब भीड़-हत्याओं और उनसे जुड़े लोगों से मिलते हुए उसके लिए प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष का भेद मिट जाता है। उसकी दुनिया उन लोगों से भर जाती है जो या तो इस दुनिया में नहीं हैं या उन भीड़-हत्याओं से जुड़े हैं।</p>
<p>उसकी ज़िन्दगी का एक सिरा उस स्त्री से जुड़ता है जो भीड़-हत्याओं की रिपोर्टिंग के अभियान में उसके साथ काम कर रही है और ऐसी हर घटना के साथ अपने उस अतीत के निकट पहुँच जाती है जिसकी ज़मीन एक त्रासदी की स्याही से अब तक गीली है।</p>
<p>अपनी नौकरी को बचाए रखने भर के लिए इस अभियान से जुड़ा पत्रकार और अपने काम को पसन्द करने वाली उसकी सहकर्मी, दोनों की अपनी-अपनी त्रासदियाँ उस समय व्यक्तिगत नहीं रह जातीं जब वे रिपोर्टिंग के दौरान समाज में अकल्पनीय ढंग से जड़ जमा चुकी उन्मादी मानसिकता से रू-ब-रू होते हैं।</p>
<p>इसमें जीवन से वाचक का पुनर्जागृत प्रेम है और विकसित होती हुई एक प्रेम कहानी भी, जिनसे कथा विरल ढंग से पठनीय हो उठती है।
ISBN: 9789392757723
Pages: 192
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
What Is Your Dream
- Author Name:
Heena Vijayvergiya
- Book Type:

- Description: Sometimes you don't find your dreams; they find you! Priyanshi is a small-town girl who gets a scholarship for the Delhi University, but she struggles to keep up with the fast-paced city life and finds it difficult to come to terms with the people around. Rohan is an oversized boy who has a secret dream of being a guitarist, but does not have the courage to come out in front and showcase his talent. Deeper is a tomboy who is hiding her soft side behind her tough and bold personality. She is trying to conceal the pain that she has been holding in her heart. Br>varun is a rich but careless boy, who is made to leave his lavish life and stay in the college hostel by his mother. It is here that he gets to know the true meaning of life!! What happens when these vivid personalities start walking on the same path and somewhere along the way become an inseparable part of each other? This is a simple tale of friendship, courage, struggles, fears, dreams, and love, which will br>tug at your heartstrings and take you on a rollercoaster ride of emotions. How important are your friends in your journey of accomplishing your dreams?.
Dashkriya
- Author Name:
Baba Bhand
- Book Type:

-
Description:
दशक्रिया’ मराठी के प्रख्यात कथाकार बाबा भांड के इसी नाम से मराठी में प्रकाशित उपन्यास का अनुवाद है। इस उपन्यास में लेखक ने भानुदास नामक एक किशोर चरित्र को केन्द्र में रखकर समाज की जड़ रूढ़िवादिता, जाति व्यवस्था, निर्धनता आदि के आवरण में छुपे मनुष्यता के करुण चेहरों और विपरीत परिस्थितियों में भी मानवीय जिजीविषा और साहस की प्रज्ज्वलित ज्योति को रेखांकित किया है।
मृत्यु और शव के अन्तिम संस्कारों से अपनी जीविका अर्जित करनेवाले एक समुदाय के माध्यम से उपन्यासकार इस पुस्तक में वर्गों और वर्णों में बँटे भारतीय समाज का एक प्रभावशाली चित्र प्रस्तुत करता है।
तटस्थ और यथार्थवादी शैली में प्रामाणिक वर्णनों से भरपूर एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कृति।
—भूमिका से
Adhbuni Rassi : Ek Parikatha
- Author Name:
Sachchidanand Chaturvedi
- Book Type:

-
Description:
रस्सी अगर अधबुनी रह जाए तो वह रस्सी नहीं कहलाती। रस्सीपन न हो तो रस्सी कैसी? बुननेवाले ने आख़िर पूरी क्यों नहीं बुनी? बुननेवाला मिले तभी तो पूछें। और वह नहीं मिलता। डमरुआ गाँव और उसमें रहनेवालों की ज़िन्दगी ऐसी ही एक अधबुनी रस्सी है। जीवन्तता में कोई कमी नहीं है। लेकिन यह एक कड़ी सच्चाई है कि जिजीविषा अपने आपमें कोई गारंटी नहीं—न निर्माण की और न नाश के निराकरण की। फिर यह भी कि जहाँ जिजीविषा, वहाँ आस्था। भले ही अधबुनी ज़िन्दगियाँ हों लेकिन ज़िन्दगीपन से भरपूर हैं —उनका यह पूरापन आकर्षित भी करता है और अपने अधबुनेपन पर करुणा भी उपजाता है। और सबसे ख़ास बात यह है कि लेखक ने कथा बड़ी सहजता से कही है। पूरे भरोसे के साथ उसने पात्रों और उनके परिवेश का पाठकों से परिचय करवाया है और सहृदय पाठक पाता है कि परिचय एक अविस्मरणीय आत्मीयता में बदल गया है। कहना होगा कि औपन्यासिकता कोई अधबुनी नहीं रह गई है। लेखक का यह पहला उपन्यास है लेकिन इसे निस्संकोच ‘मैला आँचल’ और ‘अलग अलग वैतरणी’ की परम्परा में रखा जा सकता है और यह कोई कम उपलब्धि की बात नहीं। डमरुआ गाँव और उसमें रहनेवालों को जानना जैसे स्वयं को और अपने परिवेश को नए सिरे से पहचानना है। जिस सहजता के साथ डमरुआ एकाएक बीसवीं शती के उत्तरार्ध का भारत बन जाता है, वह पाठक के लिए एक सुखद विस्मयकारी घटना है। कथा-रस और यथार्थ का ऐसा संयोग बहुत ही कम देखने को मिलता है और ‘अधबुनी रस्सी : एक परिकथा’ उपन्यास इसीलिए पाठक के अनुभव संसार को अतुलनीय समृद्धि देने में सक्षम बन सका है। कथ्य सहज, शिल्प सहज और फिर भी रस्सी के अधबुनी रह जाने की अत्यन्त विशिष्ट कथा उपन्यास को बार-बार पढ़ने को प्रेरित करती है। कोई विस्मय की बात नहीं, अगर यह उपन्यास भविष्य में इने-गिने महत्त्वपूर्ण उपन्यासों में एक गिना जाए।
—वेणुगोपाल
Mahamuni Agastya
- Author Name:
Ramnath Neekhara
- Book Type:

- Description: “वृत्तेन भवति आर्येण विद्यया न कुलेन च के सिद्धान्तानुसार ऋषित्व व महानता कुल तथा विद्या की उच्चता पर नहीं, कर्म एवं आचरण की श्रेष्ठता पर निर्भर करती है; अतः यह प्रश्न नहीं उठता कि किसने किससे जन्म ग्रहण किया, प्रश्न यह आता है कि गुण व कर्म की श्रेष्ठता किसमें कम है और किसमें अधिक है।” इस पौराणिक सिद्धांत को आधार बनाकर तर्कसंगत नया आख्यान रचा है हिंदी के जाने-माने विद्वान रामनाथ नीखरा ने अपनी इस पुस्तक ‘महामुनि अगस्त्य’ में! महामुनि अगस्त्य समाज, राष्ट्र व संसार से पूर्णतः उदासीन निरे वैरागी नहीं थे, वह मंत्र-स्रष्टा तो थे ही, क्रान्ति-द्रष्टा भी थे। वह सामाजिक, सांस्कृतिक व धार्मिक गरिमा के संवाहक ही नहीं थे; राष्ट्रीय अस्मिता, एकता व अखंडता के संरक्षक भी थे, और वे राष्ट्रहिताय आयोज्य कर्म-यज्ञ के सच्चे अर्थ में प्रणेता, होता व पुरोधा थे। किन्तु पुराणकर्ताओं ने उनकी इस महत्ता को रहस्यात्मक ढंग से प्रस्तुत कर अनुद्घाटित ही रहने दिया है। प्रस्तुत उपन्यास ‘महामुनि अगस्त्य’ उनकी इसी महानता को उद्घाटित करने का तर्कसंगत, सार्थक एवं प्रामाणिक प्रयास है।
Chandrakanta
- Author Name:
Devakinandan Khatri
- Book Type:

-
Description:
‘चन्द्रकान्ता’ का प्रकाशन 1888 में हुआ। ‘चन्द्रकान्ता’, ‘सन्तति’, ‘भूतनाथ’—यानी सब मिलाकर एक ही किताब। पिछली पीढ़ियों का शायद ही कोई पढ़ा-बेपढ़ा व्यक्ति होगा जिसने छिपाकर, चुराकर, सुनकर या ख़ुद ही गर्दन ताने आँखें गड़ाए इस किताब को न पढ़ा हो। चन्द्रकान्ता पाठ्य-कथा है और इसकी बुनावट तो इतनी जटिल या कल्पना इतनी विराट है कि कम ही हिन्दी उपन्यासों की हो।
अद्भुत और अद्वितीय याददाश्त और कल्पना के स्वामी हैं—बाबू देवकीनन्दन खत्री। पहले या तीसरे हिस्से में दी गई एक रहस्यमय गुत्थी का सूत्र उन्हें इक्कीसवें हिस्से में उठाना है, यह उन्हें मालूम है। अपने घटना-स्थलों की पूरी बनावट, दिशाएँ उन्हें हमेशा याद रहती हैं। बीसियों दरवाज़ों, झरोखों, छज्जों, खिड़कियों, सुरंगों, सीढ़ियों...सभी की स्थिति उनके सामने एकदम स्पष्ट है। खत्री जी के नायक-नायिकाओं में ‘शास्त्रसम्मत’ आदर्श प्यार तो भरपूर है ही।
कितने प्रतीकात्मक लगते हैं ‘चन्द्रकान्ता’ के मठों-मन्दिरों के खँडहर और सुनसान, अँधेरी, ख़ौफ़नाक रातें।—ऊपर से शान्त, सुनसान और उजाड़-निर्जन, मगर सब कुछ भयानक जालसाज हरकतों से भरा...हर पल काले और सफ़ेद की छीना-झपटी, आँख-मिचौनी।
खत्री जी के ये सारे तिलिस्मी चमत्कार, ये आदर्शवादी परम नीतिवान, न्यायप्रिय सत्यनिष्ठावान राजा और राजकुमार, परियों जैसी ख़ूबसूरत और अबला नारियाँ या बिजली की फुर्ती से ज़मीन-आसमान एक कर डालनेवाले ऐयार सब एक ख़ूबसूरत स्वप्न का ही प्रक्षेपण हैं।
‘चन्द्रकान्ता’ को आस्था और विश्वास के युग से तर्क और कार्य-कारण के युग में संक्रमण का दिलचस्प उदाहरण भी माना जा सकता है।
—राजेन्द्र यादव
Zindaginama
- Author Name:
Krishna Sobti
- Rating:
- Book Type:

- Description: लेखन को जीवन का पर्याय माननेवाली कृष्णा सोबती की क़लम से उतरा एक ऐसा उपन्यास जो सचमुच ‘ज़िन्दगी’ का पर्याय है—‘ज़िन्दगीनामा’। ‘ज़िन्दगीनामा’—जिसमें न कोई नायक। न कोई खलनायक। सिर्फ़ लोग और लोग और लोग। ज़िन्दादिल। जाँबाज़। लोग जो हिन्दुस्तान की ड्योढ़ी पंचनद पर जमे, सदियों ग़ाज़ी मरदों के लश्करों से भिड़ते रहे। फिर भी फ़सलें उगाते रहे। जी लेने की सोंधी ललक पर ज़िन्दगियाँ लुटाते रहे। ‘ज़िन्दगीनामा’ का कालखंड इस शताब्दी के पहले मोड़ पर खुलता है। पीछे इतिहास की बेहिसाब तहें। बेशुमार ताक़तें। ज़मीन जो खेतिहर की है और नहीं है, वही ज़मीन शाहों की नहीं है मगर उनके हाथों में है। ज़मीन की मालिकी किसकी है? ज़मीन में खेती कौन करता है? ज़मीन का मामला कौन भरता है? मुजारे आसामियाँ। इन्हें जकड़नों में जकड़े हुए शोषण के वे क़ानून जो लोगों को लोगों से अलग करते हैं। लोगों को लोगों में विभाजित करते हैं। ‘ज़िन्दगीनामा’ का कथानक खेतों की तरह फैला, सीधा-सादा और धरती से जुड़ा हुआ। ‘ज़िन्दगीनामा’ की मजलिसें भारतीय गाँव की उस जीवन्त परम्परा में हैं जहाँ भारतीय मानस का जीवन-दर्शन अपनी समग्रता में जीता चला जाता है। ‘ज़िन्दगीनामा’—कथ्य और शिल्प का नया प्रतिमान, जिसमें कथ्य और शिल्प हथियार डालकर ज़िन्दगी को आँकने की कोशिश करते हैं। ‘ज़िन्दगीनामा’ के पन्नों में आपको बादशाह और फ़क़ीर, शहंशाह, दरवेश और किसान एक साथ खेतों की मुँड़ेरों पर खड़े मिलेंगे। सर्वसाधारण की वह भीड़ भी जो हर काल में, हर गाँव में, हर पीढ़ी को सजाए रखती है।
Khwab Sa Kuchh
- Author Name:
Sanjay Manharan Singh
- Book Type:

-
Description:
उपन्यास पढ़ना शुरू करते ही, यह महसूस होने लगता है कि यह एक कवि की गद्यकथा है। बेशक इसकी लय गति थोड़ी तीव्र है, और आँखों के सामने उपस्थित होने वाले दृश्य, तुरन्त कथा प्रवाह में बिला जाते हुए लगते हैं। लेकिन इसकी गति में मौजूद सहज घुलनशीलता स्मृति में बहुत कुछ बचाए रखती है, कि हम उसे अपने अनुभवों के आईने में अपने अंतरंग और आत्मीय की तरह सजीवता में देख सकें और तब 'ख्वाब सा कुछ' में 'सच सा कुछ' देखते हुए हम जान पाते हैं, कि शायद सच से बढ़कर दूसरा कोई सपना है भी नहीं।
गाँव और कस्बे के यथार्थ जीवन को उपन्यासकार, कुछ इस तरह से लिखता है कि, वह ब्यौरों के चित्रण में सिमटने और सीमित हो जाने के बदले, विडम्बना और आत्म-व्यंग्य से समृद्ध रूपकीय विन्यास जैसा लगने लगता है। चरित्र, कथानक या सामाजिक परिवेश, इस व्यापक व्यंजकता में एकदम घुले मिले लगते हैं। ऐंठबहार, घुमनाहा और बुतरू के परिवार का अतीत और वर्तमान, लेखक की लिखत में कुछ इस तरह विन्यस्त हो सका है कि हम उन्हें उनसे भिन्न किसी भी परिवार और परिवेश में देख और पा सकते हैं।
उपन्यास में यौन वर्जना ग्रस्त भारतीय समाज के जो रूप उभरते हैं, वे भी केवल यथार्थ निर्देश नहीं करते, बल्कि पूरे समाज की आत्मरुद्धता की ओर सार्थक संकेत करते प्रतीत होते हैं। लेकिन उपन्यास के पाठ में सबसे महत्त्वपूर्ण उसकी पठनीयता है जो विविध मानसिकता के पाठकों को भी बाँधे रखने की अजब किस्सागोई से सम्पन्न है।
—प्रभात त्रिपाठी
Kahi Isuri Faag
- Author Name:
Maitreyi Pushpa
- Book Type:

-
Description:
ऋतु डॉक्टर नहीं बन पाई क्योंकि रिसर्च गाइड प्राध्यापक प्रवर पी.के. पांडेय की दृष्टि में ऋतु ने ईसुरी पर जो कुछ लिखा था, वह न शास्त्र-सम्मत था, न शोध-अनुसन्धान की ज़रूरतें पूरी करता था। वह शुद्ध बकवास था क्योंकि ‘लोक’ था।
‘लोक’ में भी कोई एक गाइड नहीं होता। लोक उस बीहड़ जंगल की तरह होता है जहाँ अनेक गाइड होते हैं—जो जहाँ तक का रास्ता बता दे वही गाइड बन जाता है—कभी-कभी तो कोई विशेष पेड़, कुआँ या खँडहर ही गाइड का रूप ले लेते हैं। ऋतु भी ईसुरी-रजऊ की प्रेम-कथा के ऐसे ही बीहड़ों के सम्मोहन की शिकार है। बड़ा ख़तरनाक होता है जंगलों, पहाड़ों और समुद्र का आदिम सम्मोहन...हम बार-बार उधर भागते हैं किसी अज्ञात के ‘दर्शन’ के लिए...‘कही ईसुरी फाग’ भी ऋतु के ऐसे ही भटकावों की दुस्साहसिक कहानी है।
इस उपन्यास का नायक ईसुरी है, मगर कहानी रजऊ की है—प्यार की रासायनिक प्रक्रियाओं की कहानी जहाँ ईसुरी और रजऊ दोनों के रास्ते बिलकुल विपरीत दिशाओं को जाते हैं। प्यार बल देता है तो तोड़ता भी है...
सिद्ध संगीतकार कविता की किसी एक पंक्ति को सिर्फ़ अपना प्रस्थान-बिन्दु बनाता है—बाक़ी ठाठ और विस्तार उसका अपना होता है। ‘बाजूबंद खुल-खुल जाए’ में न बाजूबंद रात-भर खुल पाता है, न कविता आगे बढ़ पाती है क्योंकि कविता की पंक्ति के बाद सुर-साधक की यात्रा अपने संसार की ऊँचाइयों और गहराइयों के अर्थ तलाश करने लगती है। मैत्रेयी पुष्पा की यह कहानी उसी आधार का कथा-विस्तार है—शास्त्रीय दृष्टि के ख़िलाफ़ अवैध लोक का जयगान।
Ashawari
- Author Name:
Arun Bagchee
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Ek Beegha Pyar
- Author Name:
Abhimanyu Anat
- Book Type:

-
Description:
मॉरिशस के प्रवासी भारतीय लेखक अभिमन्यु अनत उस देश के हिन्दी साहित्यकारों में विशिष्ट स्थान के अधिकारी हैं। अब तक उनके कई उपन्यास और कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए हैं जिनमें मॉरिशस के देहातों की मर्मस्पर्शी झाँकी देखने को मिलती
है।‘एक बीघा प्यार’ अभिमन्यु अनत का दूसरा उपन्यास है, जिसमें अदम्य साहस और निष्ठा तथा श्रम की महिमा का आख्यान है। एक प्रकार से यह अच्छाई और बुराई के संघर्ष की कहानी है—मनुष्य का आदर्शवाद समाज-विरोधी तत्त्वों से टकराकर बार-बार पराजित होता प्रतीत होता है, पर आस्था का विनाश नहीं होता और अन्तत: नायक को, जो परिस्थितियों से प्रताड़ित और खेती के काम से ऊब गया था, पुन: खेतों की ओर लौटते दिखाया गया है—निडर, नि:शंक भाव से। साथ ही, पूरे कथानक में सहज-निश्छल प्रेम की निर्मल स्रोतस्विनी भी प्रवाहित है जिसमें स्नान कर एक नए प्रकार की ताज़गी का अनुभव होता है।
Mahabharat : Ek Navin Rupantaran
- Author Name:
Shiv K. Kumar
- Book Type:

-
Description:
‘महाभारत’ विश्व-इतिहास का प्राचीनतम महाकाव्य है। होमर की ‘इलियड’ और ‘ओडीसी’ से कहीं ज़्यादा प्रवीणता के साथ परिकल्पित और शिप्लित यह रचनात्मक कल्पना की अद्भुत कृति है। ऋषि वेदव्यास द्वारा ईसा के प्रायः 2000 वर्ष पूर्व रचित इस महाकाव्य में लगभग समस्त मानवीय मनोभावों—प्रेम और घृणा, क्षमा और प्रतिशोध, सत्य और असत्य, ब्रह्मचर्य और सम्भोग, निष्ठा और विश्वासघात, उदारता और लिप्सा—की सूक्ष्म प्रस्तुति मिलती है।
यों तो ‘महाभारत’ भारतीय मानस में रचा-बसा ग्रन्थ है, पर इसने सम्पूर्ण विश्व के पाठकों को आकर्षित किया है। शायद इसीलिए इस महाकाव्य का रूपान्तर विश्व की सभी प्रमुख भाषाओं में हुआ है। परन्तु विस्मय होता है यह देखकर कि ज़्यादातर रूपान्तरों में इसकी क्षमता का प्रतिपादन एक काव्यात्मक सौन्दर्य और सुगन्ध से समृद्ध कथा के रूप में नहीं हो पाया है। सम्भवतः इसलिए कि लेखकों ने मूलतः इसके कहानी पक्ष को ही प्रधानता दी।...किन्तु इस पुस्तक के लेखक शिव के. कुमार ने इसी कारण इस महाकाव्य में कुछ रंग और सुगन्ध भरने का प्रयास किया है।
यह वस्तुतः ‘महाभारत’ का एक नवीन रूपान्तर है। ‘महाभारत’ एक अद्वितीय रचना है। यह काल और स्थान की सीमाओं से परे है। इसलिए हर युग में इसके साथ संवाद सम्भव है। वर्तमान युग में भी सामाजिक न्याय, राजनीतिक स्वार्थजनित राष्ट्र विभाजन, नारी सशक्तिकरण और राजनेताओं के आचरण के सन्दर्भों में इसका आर्थिक औचित्य है। अंग्रेज़ी से हिन्दी में इस कृति का अनुवाद करते हुए प्रभा के. सिंह ने हिन्दी भाषा की प्रकृति का विशेष ध्यान रखा है। समग्रतः एक अनूठी रचना।
Aur Pasina Bahata Raha
- Author Name:
Abhimanyu Anat
- Book Type:

-
Description:
मॉरिशस के हिन्दी-लेखकों में अग्रगण्य अभिमन्यु अनत अपने देश की मिट्टी से जुड़े कथाकार हैं। उनके उपन्यासों में मॉरिशस के आम आदमी की ज़िन्दगी, उसके सुख-दु:ख और हर्ष-विषाद का अत्यन्त आत्मीयतापूर्ण चित्रण है। आम आदमी यानी प्रवासी भारतीय, जो उस देश की आबादी में लगभग तीन-चौथाई हैं।
अभिमन्यु अनत ने लगभग डेढ़ दशक पहले एक ऐतिहासिक उपन्यास-त्रयी की कल्पना की थी, जिसमें भारतीयों के मॉरिशस पहुँचने पर अपनी अस्तित्व-रक्षा के लिए किए गए संघर्षों से प्रारम्भ करके वे उनकी आज तक की सामाजिक-सांस्कृतिक-आर्थिक-राजनीतिक स्थितियों के उतार-चढ़ाव को अंकित करना चाहते थे। इस त्रयी की पहली कड़ी ‘लाल पसीना’ में प्रवासी भारतीयों की वह संघर्ष-कथा अंकित है जो न केवल भारतीयों द्वारा अपनी अस्तित्व-रक्षा के लिए किए गए प्रयत्नों की कहानी है बल्कि मॉरिशस के निर्माण की कहानी भी है। दूसरी कड़ी थी ‘गांधी जी बोले थे’ जिसमें प्रवासी भारतीयों के सामाजिक-सांस्कृतिक उत्थान की कहानी है। प्रस्तुत उपन्यास और पसीना बहता रहा इस त्रयी की अन्तिम कड़ी है। आज से लगभग डेढ़ सौ साल पहले वहाँ जिस संघर्ष की शुरुआत हुई थी, वह अभी समाप्त नहीं हुआ है। अलबत्ता उसका रूप बदल गया है। आज भारतवंशियों के लिए वह अस्मिता की रक्षा का संघर्ष बन गया है। प्रस्तुत उपन्यास में इसी संघर्ष की कहानी है। किसी भी प्रवासी भारतीय द्वारा अपनी जातीय अस्मिता की कहानी को महाकाव्यात्मक गरिमा के साथ सम्भवत: पहली बार प्रस्तुत किया गया है, और इस दृष्टि से इस उपन्यास-त्रयी को हिन्दी कथा-साहित्य की एक उपलब्धि माना जाएगा।
Aangan Mein Ek Vriksha
- Author Name:
Dushyant Kumar
- Book Type:

-
Description:
दुष्यन्त कुमार ने बहुत कुछ लिखा पर जिन अच्छी कृतियों से उनके रचनात्मक वैभव का पता चलता है, यह उपन्यास उनमें से एक है।
उपन्यास में एक सामन्ती परिवार और उसके परिवेश का चित्रण है। सामन्त ज़मीन और उससे मिलनेवाली दौलत को क़ब्ज़े में रखने के लिए न केवल ग़रीब किसानों, अपने नौकर-चाकरों और स्त्रियों का शोषण और उत्पीड़न करता है, बल्कि स्वयं को और जिन्हें वह प्यार करता है, उन्हें भी बर्बादी की तरफ़ ठेलता है, इसका यहाँ मार्मिक चित्रण किया गया है।
उपन्यास बड़ी शिद्दत से दिखाता है कि अन्तत: सामन्त भी मनुष्य ही होता है और उसकी भी अपनी मानवीय पीड़ाएँ होती हैं, पर अपने वर्गीय स्वार्थ और शोषकीय रुतबे को बनाए रखने की कोशिश में वह कितना अमानवीय होता चला जाता है, इसका ख़ुद उसे भी अहसास नहीं होता।
उपन्यास के सारे चरित्र चाहे वह चन्दन, भैनाजी, माँ, पिताजी और मंडावली वाली भाभी हों या फिर मुंशीजी, यादराम, भिक्खन चमार आदि निचले वर्ग के हों—सब अपने परिवेश में पूरी जीवन्तता और ताज़गी के साथ उभरते हैं। उपन्यासकार कुछ ही वाक्यों में उनके पूरे व्यक्तित्व को उकेरकर रख देता है, और अपनी परिणति में कथा पाठक को स्तब्ध तथा द्रवित कर जाती है।
दुष्यन्त कुमार की भाषा के तेवर की बानगी यहाँ भी देखने को मिलती है—कहीं एक भी शब्द न फ़ालतू, न सुस्त।
अत्यन्त पठनीय तथा मार्मिक कथा-रचना।
Begum Meri Vishwas : Vol. 1-2
- Author Name:
Bimal Mitra
- Book Type:

-
Description:
भारत में अंग्रेज़ी राज्य की स्थापना के कालखंड पर आधारित एक वृहत् महागाथा जो हमें सन् 1757 के बंगाल के प्रसिद्ध प्लासी के युद्ध के बीच लाकर खड़ा कर देती है।
सिराजुद्दौला, क्लाइव और मराली—तीनों के माध्यम से दो शती पूर्व के बंगाल के इतिहास से दर्ज घटनाएँ अपने आप आँखों के सामने बिखर जाती हैं।
सिद्ध कथाशिल्पी बिमल मित्र की जादूगर लेखनी ने इस कथा द्वारा यह सत्य उद्घाटित किया है कि मानव-चरित्र कभी नहीं बदलता। दो सौ वर्ष पूर्व जो लोग थे, वे दूसरे नामों से आज भी वर्तमान हैं और यह भी सत्य मूर्त हो उठा है कि देश के कर्णधारों के कारण ही देश का पतन नहीं होता, बल्कि जनसाधारण का सामूहिक चरित्र-दोष के कारण होता है।
बिमल मित्र के इस ऐतिहासिक उपन्यास की नायिका बेगम मेरी विश्वास थी एक साधारण हिन्दू रमणी। सिराजुद्दौला के विलास-व्यसन की माँग पूरी करने के लिए जिन परिस्थितियों के बीच उसका जीवन व्यतीत हुआ, उसी आधार पर यह अनूठी कहानी लिखी गई है। सिराजुद्दौला के जीवन की कुछेक प्रमुख ऐतिहासिक घटनाओं के परिप्रेक्ष्य में मेरी विश्वास तथा और भी कुछेक नर-नारियों की विचित्र जीवन-कथा इस उपन्यास की उपजीव्य है। सिराजुद्दौला के व्यर्थ जीवन के विषादमय चित्र, उसके दुश्चरित्र सहयोगी, नवाब अलीवर्दी की बेगम सिराजुद्दौला की नानी तथा और अनेकानेक पार्श्व-चरित्रों के समावेश एवं 'चेहल-सुतून' की अन्दरूनी ज़िन्दगी के चित्र द्वारा अठारहवीं शताब्दी के मध्य के बंगाल की जीवन-यात्रा की एक अपूर्व छवि फूट पड़ी है। मेरी विश्वास के असाधारण व्यक्तित्व ने इस चित्र को महिमामंडित किया है।
इस उपन्यास में इतिहास के साथ कल्पना का विरोध नहीं, समन्वय घटित हुआ है।
‘बेगम मेरी विश्वास’ में मराली विश्वास गाँव-देहात की एक ग़रीब लड़की है लेकिन कालचक्र के प्रभाव से भारत के इतिहास को बदलने में प्रमुख भूमिका निभाती है। घटना-चक्र से यही मराली विश्वास सिराजुद्दौला के हरम में पहुँचकर मरियम बेगम हो जाती है और बाद में क्लाइव के पास पहुँचकर बन पाती है मेरी। हिन्दू, मुसलमान और ईसाई—तीन विभिन्न धर्मों के संगम की प्रतीक बन जाती है एक मामूली-सी लड़की।
दो इतिहास पुरुष—सिराजुद्दौला और क्लाइव के बीच थी एक नायिका—मराली यानी बेगम मेरी विश्वास, दोनों शत्रुओं का समान रूप से विश्वास जीतनेवाली।
Jan Nayak Krishna
- Author Name:
Virendra Sarang
- Book Type:

-
Description:
वीरेन्द्र सारंग का यह नया उपन्यास इस मायने में महत्त्वपूर्ण है कि यह महाभारत काल और कृष्ण से जुड़े मिथकों को एक नई दृष्टि से देखता है। इसका असली सार कृष्ण के उस जननायक रूप का है जिसे बाक़ायदा राजनीति के तहत नन्द और वासुदेव समर्थकों ने उनके बचपन से ही मिथकीय रूप दिया ताकि कंस के ख़िलाफ़ जनता को एकजुट किया जा सके। कंस असुर है जो देवताओं और आर्यों के चंगुल में फँसकर क्रूर और तानाशाह हो गया है। उग्रसेन नाक़ाबिल और कमज़ोर राजा हैं जिन्हें हटाकर कंस राजा बनता है ताकि अपनी अनार्य संस्कृति की रक्षा की जा सके, जो मूलत: गोपालक और कृषक जाति है। देवता आर्य संस्कृति को बढ़ावा देना चाहते हैं जो मूलत: उपभोग की संस्कृति है।
इस उपन्यास की ख़ासियत यह है कि मिथकों में जिनको राक्षसों का रूप दिया जाता है, लेखक ने बहुत यथार्थवादी दृष्टि से उनका मानवीकरण कर दिया है, उनके सुख-दु:ख का भी। उपन्यास का सबसे दिलचस्प हिस्सा कृष्ण के बुढ़ापे का है जब सब कुछ उनके हाथ से निकल जाता है। द्वारका में अराजकता फैल चुकी है और कृष्ण बहुत अकेले पड़ गए हैं। वे अपनी झोली लेकर द्वारका छोड़ देते हैं। उनकी मृत्यु का प्रसंग और भी दारुण है। क्या हर क्रान्ति का यही हश्र होता है? शायद यह सत्ता का चरित्र है जो किसी को भी निरंकुश बना देती है। जिस शान्ति के लिए कृष्ण द्वारका आए, वह अराजक हो गई। उनकी अपनी ही सन्तानें उनके ख़िलाफ़। कुल मिलाकर यह उपन्यास कृष्ण-कथा का नया और दिलचस्प भाष्य प्रस्तुत करता है जो बेहद पठनीय है।
Nadi Ke Dweep
- Author Name:
Sachchidananda Hirananda Vatsyayan 'Ajneya'
- Rating:
- Book Type:

- Description: व्यक्ति अज्ञेय की चिंतन-धरा का महत्तपूर्ण अंग रहा है, और ‘नदी के द्वीप’ उपन्यास में उन्होंने व्यक्ति के विकसित आत्म को निरुपित करने की सफल कोशिश की है-वह व्यक्ति, जो विराट समाज का अंग होते हुए भी उसी समाज की तीव्रगामी धाराओं, भंवरों और तरंगो के बीच अपने भीतर एक द्वीप की तरह लगातार बनता, बिगड़ता और फिर बनता रहता है । वेदना जिसे मांजती है, पीड़ा जिसे व्यस्क बनाती है, और धीरे-धीरे द्रष्टा । अज्ञेय के प्रसिद्द उपन्यास ‘शेखर : एक जीवनी’ से संरचना में बिलकुल अलग इस उपन्यास की व्यवस्था विकसनशील व्यक्तियों की नहीं, आंतरिक रूप से विकसित व्यक्तियों के इर्द-गिर्द बुनी गई है । उपन्यास में सिर्फ उनके आत्म का उदघाटन होता है । समाज के जिस अल्पसंख्यक हिस्से से इस उपन्यास के पत्रों का सम्बन्ध है, वह अपनी संवेदना की गहराई के चलते आज भी समाज की मुख्यधारा में नहीं है । लेकिन वह है, और ‘नदी के द्वीप’ के चरों पत्र मानव-अनुभूति के सर्वकालिक-सार्वभौमिक आधारभूत तत्त्वों के प्रतिनिधि उस संवेदना-प्रवण वर्ग की इमानदार अभिव्यक्ति करते हैं । ‘नदी के द्वीप’ में एक सामाजिक आदर्श भी है, जिसे अज्ञेय ने अपने किसी वक्तव्य में रेखांकित भी किया था, और वह है-दर्द से मंजकर व्यक्तित्व का स्वतंत्र विकास, ऐसी स्वतंत्रता की उद्भावना जो दूसरे को भी स्वतंत्र करती हो । व्यक्ति और समूह के बीच फैली तमाम विकृतियों से पीड़ित हमारे समाज में ऐसी कृतियाँ सदैव प्रासंगिक रहेंगी ।
Ataichi-Rahasya
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Jaya Ganga : Prem Ki Khoj Mein Ek Yatra
- Author Name:
Vijay Singh
- Book Type:

-
Description:
फ्रांस में जब यह औपन्यासिक यात्रा-वृत्तांत प्रकाशित हुआ तो इसकी बहुत सराहना हुई। यह कृति लेखक की आन्तरिक और बाहरी दुनिया के विलय का अभूतपूर्व चित्र प्रस्तुत करती है।
बाद में लेखक ने स्वयं ही इस पुस्तक को एक फ़िल्म में रूपान्तरित किया जो कि 40 देशों में दिखाई गई तथा फ्रांस और इंग्लैंड के सिनेमाघरों में 49 सप्ताह तक चली।
पेरिस में रहनेवाले एक युवा लेखक निशान्त की हिमालय में गंगा के उत्स से शुरू की गई इस गंगा-यात्रा में जया की स्मृतिकथा साथ-साथ चलती है। यात्रा के दौरान गंगा के किनारे उसकी भेंट ज़ेहरा से होती है जो एक तवायफ़ है।
मन के भीतर जया और ज़ेहरा की छवियाँ लिये लेखक अपने मार्ग में साधुओं, नाविकों, इंजीनियरों, स्थानीय पत्रकारों, तवायफ़ों और दलालों से रू-ब-रू होता चलता है। काव्यात्मक गद्य और श्रेष्ठ पत्रकारिता के सहज संयोग का प्रतिफल यह पाठ उपन्यास भी है, आत्मकथात्मक यात्रावृत्त भी और रिपोर्ताज भी।
Royal Bengal Rahasya
- Author Name:
Satyajit Ray
- Book Type:

-
Description:
'रॉयल बंगाल रहस्य' महान फ़िल्मकार और अनूठे लेखक सत्यजित राय द्वारा रचित लोकप्रिय जासूस किरदार फेलूदा के सर्वाधिक प्रशेसित कारनामों में शुमार है।
अमूमन शहरी परिवेश के रहस्यों को उजागर करते नजर आने वाले फेलूदा इस उपन्यास में एक निपट ग्रामीण इलाके में पहुँच जाते हैं, जहाँ आदमखोर बाघ की गुत्थी सुलझाने के लिए उन्हें जंगल में भी जाना पड़ता है। वहाँ बाघ तो मिलता है, पर वह आदमखोर नहीं होता। इसके साथ ही वहाँ एक ऐसा राज भी उजागर होता है, जिसका अनुमान फेलूदा को कतई नहीं था। और तब स्पष्ट होता है कि जानवरों के मिजाज को समझना उतना मुश्किल नहीं है, जितना इनसानों का!
अपने रहस्य-रोमांच में आखिरी पंक्ति तक बाँधे रखने वाला उपन्यास!
Rui Lapeti Aag
- Author Name:
Avadhesh Preet
- Book Type:

-
Description:
परमाणु हथियारों की जरूरत किसे है, देशों और उनके नक़्शों को? वहाँ रहने वाले लोगों को, या उन लोगों के डरों को अपनी सत्ताकांक्षा की खुराक बनाने वाले राष्ट्राध्यक्षों को? या यह सिर्फ संसार के शक्ति-सन्तुलन की माँग है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती?
‘रुई लपेटी आग’ के केन्द्र में मूलत: यही प्रश्न हैं जिन्हें उपन्यास अपनी विशिष्ट कथा-शैली में धीरे-धीरे जरूरी प्रश्नों के तौर पर स्थापित कर देता है। कथा का एक सिरा संगीत है और दूसरा पोखरण। वही पोखरण जहाँ 1974 और फिर 1998 में भारत ने अपने सफल परमाणु परीक्षण किए थे और जिनके चलते दुनिया के परमाणु शक्ति-सम्पन्न देशों की श्रेणी में सम्मानित जगह बना पाया था। दूसरी तरफ पखावज है जिसकी रचना, एक किंवदन्ती के अनुसार, शिव के तांडव को लयबद्ध करने के लिए ब्रह्मा ने की थी ताकि सृष्टि के विनाश को रोका जा सके।
पखावज उस विनाश को रोक तो नहीं पाता लेकिन उससे पैदा हुए घावों को खुली आँखों से देखते हुए अपनी असहमति ज़रूर व्यक्त करता है। हिरोशिमा और नागासाकी को एक चेतावनी की तरह याद रखते हुए पखावज की साधिका अरुंधति पोखरण से मात्र चार किलोमीटर दूर स्थित खेतोलाई गाँव की भूमि को अपने कार्यक्रम के लिए चुनती है। पोखरण में हुए परमाणु विस्फोट के परिणामस्वरूप राजस्थान के इस गाँव में आज ऐसा कोई घर नहीं है जहाँ एक-दो लोग गम्भीर बीमारियों के शिकार नहीं हैं।
उपन्यास में भारत की उस सहज जीवनशैली को बखूबी रेखांकित किया गया है जिसमें विभिन्न समुदायों की सहजीविता समाज के सहजबोध का हिस्सा है, और जो बीच-बीच में साम्प्रदायिक राजनीति का शिकार होते रहने के बावजूद अभी तक बची हुई है।
लेकिन केंद्रीय प्रश्न परमाणु शक्ति की नैतिक वैधता का ही है, रुई में लिपटी रखी उस आग के औचित्य का जो कभी भी भड़क सकती है और पूरी मानव-जाति के विनाश का कारण बन सकती है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book