Ruskin Bond Ki BestSeller Pustak (Best of Ruskin Bond) Set of 4 Books
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9789355214096 - Suno Bachcho, Meri Priya Kahaniyan (Hindi Translation of Collected Short Stories) सुप्रसिद्ध कहानीकार रस्किन बॉण्ड की बाल कहानियाँ न केवल मनोरंजक होती हैं, बल्कि प्रेरणादायी भी| हर कहानी में बच्चों के लिए अनुकरणीय सीख अवश्य रहती है| 9789355214157 - 21 Baal Kahaniyan प्रस्तुत संग्रह की 21 बाल कहानियाँ एक से बढ़कर एक हैं, जिनमें बच्चों के मनोविज्ञान, कल्पना लोक और वास्तविक धरातल की मिली-जुली कहानियाँ हैं, जो शिक्षाप्रद तो हैं ही, मनोरंजन और पठनरस से भरपूर भी हैं। 9789355210494 - Ruskin Bond Ki Diary (Hindi Translation of A Book of Simple Living) यह पुस्तक ऐसे अनेक छोटे-छोटे पलों को दर्ज करती है, जो स्वयं के साथ ही इस प्राकृतिक जगत्, दोस्तों और परिवार ही नहीं आने-जानेवालों को मिलाकर भी एक सामंजस्यपूर्ण जीवन की रचना करती है। इन पन्नों में हम एक जंगली बेर को फलते और देवदार के पेड़ों के बीच से चंद्रमा को निकलते देखते हैं। हम रेडस्टार्ट पक्षियों को चहचहाते और टिन की छत पर बारिश को ढोल बजाते सुनते हैं। हम क्षति के परिणामों और पुराने साथियों की सांत्वना को समझते हैं। 9789355214102 - Pariyonwali Pahadi Aur Anya Kahaniyan सुप्रसिद्ध किस्सागो रस्किन बॉण्ड की कहानियों का यह संग्रह बालक-तरुण पाठकों को परियों की हसीन दुनिया की सैर कराता है; ये भी परियों के साथ बिना परों के ही उड़ने लगते हैं । मनोरंजन से भरपूर कहानी-संग्रह|
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9789355214096 - Suno Bachcho, Meri Priya Kahaniyan (Hindi Translation of Collected Short Stories)
सुप्रसिद्ध कहानीकार रस्किन बॉण्ड की बाल कहानियाँ न केवल मनोरंजक होती हैं, बल्कि प्रेरणादायी भी| हर कहानी में बच्चों के लिए अनुकरणीय सीख अवश्य रहती है|
9789355214157 - 21 Baal Kahaniyan
प्रस्तुत संग्रह की 21 बाल कहानियाँ एक से बढ़कर एक हैं, जिनमें बच्चों के मनोविज्ञान, कल्पना लोक और वास्तविक धरातल की मिली-जुली कहानियाँ हैं, जो शिक्षाप्रद तो हैं ही, मनोरंजन और पठनरस से भरपूर भी हैं।
9789355210494 - Ruskin Bond Ki Diary (Hindi Translation of A Book of Simple Living)
यह पुस्तक ऐसे अनेक छोटे-छोटे पलों को दर्ज करती है, जो स्वयं के साथ ही इस प्राकृतिक जगत्, दोस्तों और परिवार ही नहीं आने-जानेवालों को मिलाकर भी एक सामंजस्यपूर्ण जीवन की रचना करती है। इन पन्नों में हम एक जंगली बेर को फलते और देवदार के पेड़ों के बीच से चंद्रमा को निकलते देखते हैं। हम रेडस्टार्ट पक्षियों को चहचहाते और टिन की छत पर बारिश को ढोल बजाते सुनते हैं। हम क्षति के परिणामों और पुराने साथियों की सांत्वना को समझते हैं।
9789355214102 - Pariyonwali Pahadi Aur Anya Kahaniyan
सुप्रसिद्ध किस्सागो रस्किन बॉण्ड की कहानियों का यह संग्रह बालक-तरुण पाठकों को परियों की हसीन दुनिया की सैर कराता है; ये भी परियों के साथ बिना परों के ही उड़ने लगते हैं । मनोरंजन से भरपूर कहानी-संग्रह|
Book Details
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ISBN9789355213495
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Pages700
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Avg Reading Time23 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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ज्ञान चतुर्वेदी का यह पाँचवाँ उपन्यास है। इसलिए उनके कथा-शिल्प या व्यंग्यकार के रूप में वह अपनी औपन्यासिक कृतियों को जो वाग्वैदग्ध्य, भाषिक, शाब्दिक तुर्शी, समाज और समय को देखने का एक आलोचनात्मक नज़रिया देते हैं, उसके बारे में अलग से कुछ कहने का कोई औचित्य नहीं है। हिन्दी के पाठक उनके 'नरक-यात्रा', 'बारामासी' और 'हम न मरब' जैसे उपन्यासों के आधार पर जानते हैं कि उन्होंने अपनी औपन्यासिक कृतियों में सिर्फ़ व्यंग्य का ठाठ खड़ा नहीं किया, न ही किसी भी क़ीमत पर पाठक को हँसाकर अपना बनाने का प्रयास किया, उन्होंने व्यंग्य की नोक से अपने समाज और परिवेश के असल नाक-नक़्श उकेरे।
इस उपन्यास में भी वे यही कर रहे हैं। जैसा कि उन्होंने भूमिका में विस्तार से स्पष्ट किया है, यहाँ उन्होंने बाज़ार को लेकर एक विराट फैंटेसी रची है। यह वे भी मानते हैं कि बाज़ार के बिना जीवन सम्भव नहीं है। लेकिन बाज़ार कुछ भी हो, है तो सिर्फ़ एक व्यवस्था ही जिसे हम अपनी सुविधा के लिए खड़ा करते हैं। लेकिन वही बाज़ार अगर हमें अपनी सुविधा और सम्पन्नता के लिए इस्तेमाल करने लगे तो?
आज यही हो रहा है। बाज़ार अब समाज के किनारे बसा ग्राहक की राह देखता एक सुविधा-तंत्र-भर नहीं है। वह समाज के समानान्तर से भी आगे जाकर अब उसकी सम्प्रभुता को चुनौती देने लगा है। वह चाहने लगा है कि हमें क्या चाहिए, यह वही तय करे। इसके लिए उसने हमारी भाषा को हमसे बेहतर ढंग से समझ लिया है, हमारे इंस्टिंक्ट्स को पढ़ा है, समाज के रूप में हमारी मानवीय कमज़ोरियों, हमारे प्यार, घृणा, ग़ुस्से, घमंड की संरचना को जान लिया है, हमारी यौन-कुंठाओं को, परपीड़न के हमारे उछाह को, हत्या को अकुलाते हमारे मन को बारीकी से जान-समझ लिया है, और इसीलिए कोई आश्चर्य नहीं कि अब वह चाहता है कि हमारे ऊपर शासन करे।
इस उपन्यास में ज्ञान चतुर्वेदी बाज़ार के फूलते-फलते साहस की, उसके आगे बिछे जाते समाज की और अपनी ताक़त बटोरकर उसे चुनौती देनेवाले कुछ बिरले लोगों की कहानी कहते हैं।
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‘श्रीकांत वर्मा पुरस्कार’ और 'साहित्य अकादेमी पुरस्कार' से सम्मानित यह उपन्यास अलका सरावगी की पहली औपन्यासिक रचना थी। इस उपन्यास ने न सिर्फ़ उन्हें हिन्दी साहित्य-जगत का सितारा लेखक बना दिया, बल्कि अब तक चली आ रही उपन्यास-परम्परा को भी एक नया मोड़ दिया। इसने कथा-लेखन की एक ठहरी और इकहरी शैली से ऊबे हिन्दी पाठक को एक ऐसी भाषा और कहन दी जिससे उसने अचानक अपने को समृद्ध अनुभव किया।
एक मारवाड़ी परिवार की कई पीढ़ियों की दास्तान कहनेवाला यह उपन्यास शायद भाषा में उस दृष्टि को पिरोनेवाला पहला उपन्यास था जिसने नब्बे के दशक में देश में उदारीकरण के बाद जन्म लिया था। आज़ाद भारत में निर्मित सामाजिकता के प्रचलित पैमानों पर जीते मनुष्य की भीतरी अजनबीयत की पहचान से शुरू होती यह कथा अंग्रेज़ों द्वारा भारत में रेलवे लाने के शुरुआती दिनों से लेकर सन् 2000 तक के इतिहास का अवलोकन करती है। इसमें कोलकाता शहर का इतिहास भी पढ़ा जा सकता है, और मोटा-मोटी ढंग से भारत में सामाजिक-नैतिक मूल्यों के निर्माण और ध्वंस का भी।
कहानी किशोर बाबू की है जो अपनी बाइपास सर्जरी के बाद दुनिया को बिलकुल ही अलग सिरे से देखने लगते हैं, वे किशोर बाबू जो जीवन-भर दक्षिणी कोलकाता के अभिजात समाज का हिस्सा रहे अचानक ‘सड़कमाप’ बन जाते हैं, कोलकाता की अभद्र सड़कों पर भटकते दिखने लगते हैं और अपनी इसी यात्रा में अपने परिवार के पुरखों से लेकर अपनी तीन वर्षीय नातिन तक के समय को खँगाल देते हैं।
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- Description: 'रोकड़ जो मिली नहीं' वस्तुत: मनुष्य के भाग्य का इतिहास है। आज के युग में मनुष्य टेक्नोलॉजी के तर्क से पैसे को ही सब कुछ मानकर किस प्रकार के अनैतिक कार्य करता है और अन्तत: सुख उसे समृद्धि से नहीं मिलता है। इस उपन्यास में 'सोने के हार की चोरी' की खोज के माध्यम से मानव की कमज़ोरियों का रहस्य समझने का प्रयत्न किया गया है। ब्लैक प्रिंस का इतिहास पैसे के पीछे पागल लोगों का इतिहास है। जासूसी कथा शिल्प के माध्यम से रचनाकार ने कलकत्ता महानगर के काले पक्ष को उजागर करने का आश्चर्यजनक प्रयत्न किया है। कौतूहल मनोरंजन आदि तत्त्वों से युक्त होने के बावजूद यह ‘रहस्य रोमांच’ से भिन्न एक साहित्यिक रचना है, यही इसका रहस्य है। सुनीति मित्र, झगड़ू और ब्लैक प्रिंस तो सामाजिक व्यवस्था के उस पक्ष के परिणाम हैं जो रोटी के लिए पूँजी की भूख पैदा करता है। अपराधों के सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कारण क्या हैं, यह पुस्तक पढ़कर समझा जा सकता है, क्योंकि अपराध इसमें स्वयं प्रतीक के रूप में प्रयुक्त है। वस्तुत: इन्हीं कारणों से पुस्तक रोचक और कौतूहलपरक ही नहीं, शैली की दृष्टि से भी आकर्षक है।
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- Description: ‘ख़ुदा की बस्ती’ शौक़त सिद्दीक़ी का बहुचर्चित-बहुप्रशंसित उपन्यास है। इसे पाकिस्तान के सर्वोच्च पुरस्कार ‘आदमजी प्राइज़’ से सम्मानित किया गया है। इसके उर्दू में पाकिस्तान में तीस संस्करण छप चुके हैं और संसार की सभी भाषाओं में यह उपन्यास अनूदित होकर प्रसिद्धि पा चुका है। इस उपन्यास पर आधारित सिन्ध प्रान्त और कराची के बीच ‘ख़ुदा की बस्ती’ बसाई गई है। इस उपन्यास के सारे चरित्र वही हैं, जो ख़ुदा की जीती-जागती बस्तियों में भी मिल जाते हैं—अच्छे-बुरे, गुंडे, मवाली, शिद्दत से प्रेम वाले और उसी शिद्दत से नफ़रत करनेवाले भी। छोटे-मोटे, चोर-उचक्के, जेबकतरे, राजनीति का एक हिस्सा बन जानेवाले भी। इस उपन्यास के प्रकाशित होते ही उर्दू की साहित्यिक दुनिया में हंगामा मच गया, क्योंकि इससे पहले इस विषय पर और इतने अनोखे अन्दाज़ में उर्दू में कुछ भी नहीं लिखा गया था।
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