Shekhar Ek Jeevani : Vol. 2
Publisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 319.2
₹
399
Available
‘शेखर : एक जीवनी’ को कुछ वैचारिक हलक़ों में आत्म-तत्त्व के बाहुल्य के कारण आलोचना का शिकार होना पड़ा था। साथ ही अपने समय के नैतिक मूल्यों के लिए भी इसे चुनौती की तरह देखा गया था। लेकिन आत्म के प्रति अपने आग्रह के बावजूद यह नहीं कहा जा सकता कि ‘शेखर’ समाज से विलग, या उसके विरोध में खड़ा हुआ कोई व्यक्ति है। अगर ऐसा होता तो शेखर अपने समय-समाज के ऐसे-ऐसे प्रश्नों से नहीं जूझता जो उस समय स्वाधीनता आन्दोलन के नेतृत्वकारी विचारकों-चिन्तकों के लिए भी चिन्ता का मुख्य बिन्दु नहीं थे, मसलन—जाति और स्त्री से सम्बन्धित प्रश्न।</p>
<p>जैसा कि स्वयं अज्ञेय ने संकेत किया है, शेखर अपने समय से बनता हुआ पात्र है। वह परिस्थितियों से विकसित होता हुआ और परिस्थितियों को आलोचनात्मक दृष्टि से देखता हुआ पात्र है।</p>
<p>उपन्यास के प्रथम भाग में जिस तरह से शेखर का मनोविज्ञान, उसके अन्तस्तल के निर्माण की प्रक्रिया उद्घाटित हुई है, उसी आवेग और सघनता के साथ इस दूसरे भाग में शेखर के वास्तविक जीवनानुभवों का वर्णन किया गया है। कहना न होगा कि 'शेखर एक जीवनी’ की बुनावट में ‘पैशन’ की वैसी ही उच्छल धारा प्रवाहित है जैसी, हमारे जीवन में होती है। अपने औपन्यासिक वितान में ‘शेखर : एक जीवनी’ इसीलिए एक कालजयी कृति के रूप में मान्य है।
ISBN: 9788126726783
Pages: 256
Avg Reading Time: 9 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: Initially written in 1882 by Bankim Chandra Chatterjee, Anandamath takes the reader back to Bengal in the clutches of the famine, the backdrop of the pre-independence struggle and the turmoil of human lives caught in this frame of time. The novel's plot reveals the various dimensions of life in the backdrop of the Sannyasi Rebellion - such as the plight of the people wrecked by lack of food and hunger that drove them to the brink of cannibalism, the militant rebels, and women's participation alongside their husbands. It is considered one of the most remarkable Bangla and Indian literary works. The rebellion was fought by the sannyasi or monks and the common multitudes who took up arms against the tyranny of the British colonisers and their excesses and significantly taxes in such a time of privation. Bankim also gave us the song "Vande Mataram", which became the rallying call for rebels. The first two stanzas eventually became the National song of India. One of the gems of Indian Literature, "Anandmath", carries a deep sentiment of nationalism which was the essence of the freedom struggle.
Chotti Munda Aur Uska Teer
- Author Name:
Mahashweta Devi
- Book Type:

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Description:
भारत के आदिवासी समाज और उसके जीवन पर महाश्वेता देवी ने प्रामाणिक कथासाहित्य का निर्माण किया है।
‘चोट्टि मुण्डा और उसका तीर’ इसी शृंखला की एक कड़ी है, जो इस उपन्यास के नायक चोट्टि मुण्डा (चोट्टि एक नदी का भी नाम है) के संघर्षमय जीवन के माध्यम से मुण्डा जाति के शोषण, उत्पीड़न और उसके ख़िलाफ़ उसके तेजस्वी और वीरत्वपूर्ण संघर्ष की कहानी कहती है।
मुण्डा जाति ने अंग्रेज़ों के शासनकाल में बिरसा मुण्डा के नेतृत्व में गौरवशाली विद्रोह किया था, जिसे अन्ततः दबा दिया गया। शोषण, उत्पीड़न बदस्तूर जारी रहा, जो आज़ादी के बाद भी बरकरार रहा। आदिवासी कल्याण की परिकल्पनाएँ कितनी थोथी और पाखंडपूर्ण हैं, यह भी इस उपन्यास में पूरी तरह स्पष्ट होता है।
चोट्टि मुण्डा की कहानी मुण्डारी जाति और दूसरी अस्पृश्य हिन्दू जातियों के विद्रोह की अपूर्व तथा शौर्यमय गाथा है, जो हमारे देश के वर्तमान ‘सच’ को उजागर करती है।
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