Anawaran
Author:
Ranjana PrakashPublisher:
Author'S Ink PublicationsLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction0 Ratings
Price: ₹ 148.75
₹
175
Available
रिश्तों को समझ पाने में अक्सर हम चूक जाते हैं। जब तक समझ में आता है, देर हो जाती है और वक़्त मुट्ठी में से रेत सा फिसल जाता है। उपन्यास की नायिका शुभी के जीवन में ऐसे ही अनेक उतार चढ़ाव आए, कभी थकी, कभी लड़खड़ाई, कभी गिरी भी, फिर भी कुछ तो था जिसने उसकी जिजीविषा को समाप्त होने से बचाए रखा, क्या कारण था जो उसने आत्म हत्या का विचार किया? क्या हुआ शुभी के जटिल जीवन का अंत? क्या शुभी की तलाश को पूर्णता प्राप्त हुई? क्या अंज़ाम हुआ शुभी के जीवन का, जानने के लिये पढ़ें ये उपन्यास - "अनावरण".
ISBN: 9789385137877
Pages: 100
Avg Reading Time: 2 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Mahabhishag
- Author Name:
Bhagwan Singh
- Book Type:

-
Description:
‘महाभिषग’ शीर्षक से ही स्पष्ट है कि यह गौतम बुद्ध के जीवन पर आधारित उपन्यास है न कि भगवान बुद्ध के। बुद्ध को भगवान बनानेवाले उस महान उद्देश्य से ही विचलित हो गए थे, जिसे लेकर बुद्ध ने अपना महान सामाजिक प्रयोग किया था और यह सन्देश दिया था कि जाति या जन्म के कारण कोई किसी अन्य से श्रेष्ठ नहीं है और कोई भी व्यक्ति यदि संकल्प कर ले और जीवन–मरण का प्रश्न बनाकर इस बात पर जुट जाए तो वह भी बुद्ध हो सकता है।
‘महाभिषग’ इस क्रान्तिकारी द्रष्टा के ऊपर पड़े देववादी खोल को उतारकर उनके मानवीय चरित्र को ही सामने नहीं लाता, यह देववाद के महान गायक अश्वघोष को भी एक पात्र बनाकर सिर के बल खड़ा करने का और देववाद की सीमाओं को उजागर करने का प्रयत्न करता है। इतिहास की मार्मिक व्याख्या वर्तमान पर कितनी सार्थक टिप्पणी बन सकती है, इस दृष्टि से भी यह एक नया प्रयोग है।
Kadambari
- Author Name:
Banbhatt
- Book Type:

- Description: संस्कृत के प्रख्यात गद्यकार बाणभट्ट सातवीं शताब्दी में राजा हर्षवर्धन के समय में हुए। उनकी दो कृतियाँ ‘हर्षचरितम्’ तथा ‘कादम्बरी’ संस्कृत गद्य का अपार वैभव और सौन्दर्य ही नहीं, भारतीय कथा का अद्भुत संसार भी हमारे सामने खोलती हैं। बाणभट्ट की ‘कादम्बरी’ पारम्परिक कथा की विधा को अद्वितीय योगदान भी है और आधुनिक उपन्यास की विधा का एक भारतीय मानक भी प्रस्तुत करती है। इसके औपन्यासिक कलेवर और विस्तार के कारण ही मराठी में उपन्यास के अर्थ में ‘कादम्बरी’ शब्द एक जातिवाचक संज्ञा भी बन गया। प्रस्तुत उपन्यास बाणभट्ट की ‘कादम्बरी’ का एक साहसिक और नवीन रूपान्तर है, जिसे संस्कृत के जाने-माने विद्वान् तथा साहित्यकार राधावल्लभ त्रिपाठी ने रचा है। यह ‘कादम्बरी’ पर आधारित एक मौलिक नई कृति होने के कारण भारतीय कथा के आस्वाद के नए धरातल प्रस्तुत करता है।
Evening
- Author Name:
Neeraj
- Rating:
- Book Type:

- Description: It is a story of an Indian boy--his innocent childhood, his fascinating family, his adventurous friendship, his adorable first crush, his struggles, his pain, and his journey to the ??? Let's keep it a suspense, shall we??? It is a touching story based on real life. and it gives its readers a meaningful experience. Nikhil is a small town boy, who is enjoying his childhood with his best friend, Akshay. He has a loving family and shares a special bond with his grandfather. As the kids grow up, they face their ups and downs, failure and success, pain and wisdom. It is a cute and fascinating story about childhood , friendship and love. It's a story about school life, and all the fun and drama associated with it. So, grab a copy and relive those innocent childhood moments! A good story leaves its readers with a beautiful experience, and justifies their effort of reading it. --- NEERAJ
The Adventures Of Huckleberry Finn
- Author Name:
Mark Twain
- Book Type:

- Description: Adventures of Huckleberry Finn is a novel by Mark Twain, first published in the United Kingdom in December 1884. It is an incredible tale of a boy, Huckleberry Finn, from a Mississippi River town who narrates his adventures with Tom Sawyer and how he gets into trouble for helping a runaway slave Jim.
Ve Din
- Author Name:
Nirmal Verma
- Book Type:

-
Description:
निर्मल वर्मा के कथा-शिल्प में उसी तरह मौजूद रहता है, जैसे हमारे जीवन में—लगातार मौजूद लेकिन अदृश्य। उससे हमारे दुःख और सुख तय होते हैं, वैसे ही जैसे उनके कथा-पात्रों के होते हैं। कहानी का विस्तार उसमें बस यह करता है कि इतिहास के उन मूक और भीड़ में अनचीन्हे ‘विषयों’ को एक आलोक-वृत्त से घेरकर नुमायाँ कर देता है, ताकि वे दिखने लगें, ताकि उनकी पीड़ा की सूचना एक जवाबी सन्देश की तरह इतिहास और उसकी नियन्ता शक्तियों तक पहुँच सके। इस प्रक्रिया में अगर उनकी कथा कुछ ऐसे व्यक्तियों को रच देती है जिनकी वैयक्तिकता की आभा हमारे लिए ईर्ष्या का कारण हो उठे, तो यह उनका व्यक्तिवाद नहीं है, व्यक्ति के स्तर पर एक वैकल्पिक मनुष्य का ख़ाक़ा तैयार करने की कोशिश है।
इस उपन्यास के चरित्रों की पीड़ा और उस पीड़ा को पहचानने, अंगीकार करने की उनकी इच्छा और क्षमता उन्हें हमारे मौजूदा असहिष्णु समाज के लिए मूल्यवान बनाती है। वह चाहे रायन हो, इंदी हो, फ्रांज हो या मारिया, उनमें से कोई भी अपने दुख का हिसाब हर किसी से नहीं माँगता फिरता। चेकोस्लोवाकिया की बर्फ़-भरी सड़कों पर अपने लगभग अपरिभाषित-से प्रेम के साथ घूमते हुए ये पात्र जब पन्नों पर उद्घाटित होते हैं, तो हमें एक टीसती हुई-सी सान्त्वना प्राप्त होती है, कि मनुष्य होने का जोखिम लेने के दिन अभी लद नहीं गए।
‘वे दिन’ निर्मल वर्मा का प्रथम उपन्यास है। यह क्रिसमस के चन्द शान्तिपूर्ण दिनों की गाथा है, एक अवसादपूर्ण प्रेमकथा जो बर्फ़ और धूप, छुट्टियों के ख़ालीपन, पुराने शहर के पुलों और टावरों के बीच चुपचाप चलती है। हर पात्र का अपना अतीत है, जो यूरोप की युद्धोत्तर पीढ़ी की अभिशप्त छाया से जुड़ा है, और उपन्यास के विभिन्न पात्रों को जोड़नेवाली एक ‘रहस्यमय’ नियति भी है, जो छोटी-से-छोटी घटना को अर्थवत्ता प्रदान करती है।
Peedhiyan
- Author Name:
Neel Padamnabhan
- Book Type:

-
Description:
तमिल साहित्य की पहली आंचलिक कृति के रूप में समादृत प्रस्तुत उपन्यास ‘पीढ़ियाँ’ (तमिल : तलैमुरैगळ) को मास्टर पीसेज़ ऑफ़ इंडियन लिटरेचर के यशस्वी सम्पादक डॉ. के.एम. जॉर्ज ने भारतीय साहित्य की उत्कृष्ट कृति के रूप में स्थान दिया है।
तमिल के श्रेष्ठ महाकाव्य ‘शिलप्पाधिकारम’ के रचयिता कवि इलंगो ने जिस श्रेष्ठि-कुल के सामान्य जन को काव्य के केन्द्र में रखा था, उसी कुल की एक शाखा कालान्तर में धुर दक्षिण की ओर संक्रमण कर गई और कन्याकुमारी ज़िले में इरणियल परिसर के सात गाँवों में बसकर एलूर चेट्टी कहलाई। आधुनिक तमिल साहित्य के जाने-माने हस्ताक्षर नील पद् मनाभन ने इसी चेट्टी-समुदाय के सम्पूर्ण जीवन को, वर्तमान युग में अपनी ही रूढ़ियों और अन्धविश्वासों के मकड़जाल में फँसकर अपनी अस्मिता बनाए रखने के लिए उसके द्वारा किए जा रहे जद्दोजहद को इस उपन्यास में उकेरा है। उपन्यास की ख़ासियत यह है कि एक समुदाय-विशेष के आस्था-विश्वास, जन्म से लेकर मृत्युपर्यंत विविध संस्कार, रूढ़ियाँ, अन्धविश्वास और वर्जनाएँ, लोरी और शोकगीत सहित ग्राम्य गीत, कर्ण-परम्परा से चली आ रही दन्तकथाएँ आदि पात्रों की अपनी बोली में अविकल रूप से इसमें दर्ज हैं। इस कारण यह उपन्यास नृविज्ञानियों और समाज-भाषावैज्ञानिकों के लिए अमूल्य दस्तावेज़ का काम दे सकता है।
लगभग सत्तर साल की कालावधि में व्याप्त तीन पीढ़ियों के इतिवृत्त के केन्द्र में है दिरवी का परिवार, जो अपनी नेकनीयती और भोलेपन के कारण समाज के सबल वर्ग के स्वार्थपूर्ण हथकंडों का शिकार बनता है। अपनी बहन पर लगाए गए झूठे इल्जाम के ख़िलाफ़ यौवन की दहलीज़ पर क़दम रख रहे दिरवी को अकेले ही एक धर्मयुद्ध लड़ना पड़ता है और इस संघर्ष में वह कैसे कामयाब होता है, यही इस उपन्यास का केन्द्रबिन्दु है।
उपन्यास में यह भी दिखाया गया है कि अर्थहीन रूढ़ियों और परम्परागत विश्वासों की दुहाई देकर नारी को घर की चहारदीवारी के अन्दर बन्द रखने की मूढ़ता जिस समुदाय में प्रचलित हो, उसमें रातोंरात आमूल-चूल परिवर्तन लाना सम्भव नहीं है। अभी एक विशाल रणांगण में एक लम्बा युद्ध लड़ना शेष है। कल्पना की रंगीनी और अतिरंजनापूर्ण वर्णनों से सर्वथा अस्पृश्य होकर भी कोई कृति इतनी रोचक और मर्मस्पर्शी हो सकती है, इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है नील पद् मनाभन की ‘पीढ़ियाँ’।
Bidhar
- Author Name:
Bhalchandra Nemade
- Book Type:

-
Description:
‘बिढार’ का मतलब है—अपने कन्धे पर अपनी गृहस्थी का बोझ लादे हुए भटकना। इस दिक्-काल से परे की भटकन का मक़सद है, शायद, गौतमबुद्ध की तरह संबोधि प्राप्त करना। अपने आपको, अपनों को, अपनापे को पाना। बिढार के चांगदेव की यह भटकन, भाषा-प्रदेश और काल को लाँघकर सार्वजनीन और बीसवीं शताब्दी के डॉक्यूमेन्ट्स को लेकर सार्वकालिक बन जाती है। यह कहीं भी ख़त्म न होनेवाली भटकन, जिसका प्रारम्भ 1962 में हुआ था, वह ‘बिढार’ (1975), ‘जरीला’ (1977) और ‘झूल’ (1979) को पार कर अब अपने आगे के मुकाम ‘हिन्दू’ की ओर अग्रसर है। यह परकाया प्रवेश करनेवाले एक की आपबीती है जो अपने विस्तार में अनेक को समाहित करने का सामर्थ्य रखती है।
यह मानव-सभ्यता की कैसी विडम्बना है कि सृजन-क्षमता के विनाश को स्वीकार किए बिना मनुष्य
को समाज में प्रतिष्ठा प्राप्त नहीं होती। विपात्र बनो और प्रतिष्ठा प्राप्त करो। सत् (बीइंग) और कर्तृत्व (बिकमिंग) का घोर कुरुक्षेत्र नेमाड़े जी के उपन्यास—‘चतुष्ट्य’ का दहला देनेवाला अन्तःसूत्र है। जीवन के नैतिक और सांस्कृतिक दायित्व की व्यग्रता का भाव नेमाड़े जी के ‘बिढार’ में जिस अभिनिवेश शून्य परन्तु रचनात्मक स्वरूप में पाया जाता है, वह अन्यत्र दुर्लभ है।
—रंगनाथ तिवारी
Dil Ek sada Kaghaz
- Author Name:
Rahi Masoom Raza
- Book Type:

-
Description:
‘दिल एक सादा काग़ज़’ एक तरह ‘आधा गाँव’ से बिलकुल अलग है। यह ‘आधा गाँव’, ‘टोपी शुक्ला’, ‘हिम्मत जौनपुरी’ और ‘ओस की बूँद’ के सिलसिले की कड़ी है भी और नहीं भी है।
‘दिल एक सादा काग़ज़’ ‘जैदी विला’ के उस भूत की कहानी है जिसके कई नाम थे—रफ़्फ़न, सय्यद अली, रफ़अत ज़ैदी, बाग़ी आज़मी। और यह ज़ैदी विला, ढाका और बम्बई के त्रिकोण की कहानी है।
यह कहानी शुरू हुई तो ढाका हिन्दुस्तान में था। फिर वह पूरबी पाकिस्तान में होने लगा। और कहानी के ख़त्म होते-होते बांग्लादेश में हो गया। एक तरह से यह ढाका की इस यात्रा की कहानी भी है, हालाँकि ढाका इस कहानी में कहीं नहीं है। पहले वहाँ से ख़त आना शुरू होते हैं और फिर रिफ्यूजी, बस।
‘दिल एक सादा काग़ज़’ बम्बई के उस फ़िल्मी माहौल की कहानी भी है जिसकी भूलभुलैया आदमी को भटका देती है। और वह कहीं का नहीं रह जाता। नए अन्दाज़ और नए तेवर के साथ लिखा गया एक बिलकुल अलग उपन्यास।
Ek Ladki Ki Zindagi
- Author Name:
Qurratul Ain Haider
- Book Type:

-
Description:
दुल्हन रुख़सत होकर जा चुकी थी। मंझली खाला कोनों में मुँह छिपाकर रोती फिर रही थी। बड़े भैया बार-बार आँसू पीने की कोशिश कर रहे थे। लोगों के उठने के बाद शामियाने के नीचे सोफ़े अब ज़रा बेतरतीबी से पड़े थे। कारचोबी मसनद पर जहाँ निकाह और बाद में आरसी मुसहिफ़ हुआ था, अब बच्चे कूद रहे थे और फूलों के हार बिखरे पड़े थे। मीरासनें गाते-गाते थक चुकी थीं। शहर की ‘ऊँची सोसाइटी’ के अफ़राद मेजबानों को ख़ुदा हाफ़िज़ करके मोटरों में सवार हो रहे थे। बिलकिस रिश्तेदारों के हुजूम में अन्दर बैठी ज़ोर-ज़ोर से हँस रही थी। स्याह शेरवानी और चूड़ीदार पाजामे में मलबूस उसका कज़िन मेहमानों को सिगरेट पेश करते-करते उकताकर सोफ़े पर बैठ गया था। उसकी भाभीजान शामियाने के एक कोने में उसके दोस्तों के हुजूम में खड़ी मसल-ए-कश्मीर पर धुआँधार तकरीर कर रही थी। ‘यह हमारा पटरा करवाएँगी’—नादिर ने ज़रा परेशानी से सोचा और फिर कॉफ़ी मँगवाने के लिए कोठी के अन्दर चला गया।
वह उसी तरह कड़ी बहस में उलझ रही थी जब एक शानदार शख़्स हाथ में कॉफ़ी की प्याली लिए उसके क़रीब से गुज़रा और उसे देखकर बड़ी उदासी से मुस्कराया, गोया उसकी आँखों में तैरते बेपायाँ अलम को समझता हो या समझने की कोशिश कर रहा हो।
Dashkriya
- Author Name:
Baba Bhand
- Book Type:

-
Description:
दशक्रिया’ मराठी के प्रख्यात कथाकार बाबा भांड के इसी नाम से मराठी में प्रकाशित उपन्यास का अनुवाद है। इस उपन्यास में लेखक ने भानुदास नामक एक किशोर चरित्र को केन्द्र में रखकर समाज की जड़ रूढ़िवादिता, जाति व्यवस्था, निर्धनता आदि के आवरण में छुपे मनुष्यता के करुण चेहरों और विपरीत परिस्थितियों में भी मानवीय जिजीविषा और साहस की प्रज्ज्वलित ज्योति को रेखांकित किया है।
मृत्यु और शव के अन्तिम संस्कारों से अपनी जीविका अर्जित करनेवाले एक समुदाय के माध्यम से उपन्यासकार इस पुस्तक में वर्गों और वर्णों में बँटे भारतीय समाज का एक प्रभावशाली चित्र प्रस्तुत करता है।
तटस्थ और यथार्थवादी शैली में प्रामाणिक वर्णनों से भरपूर एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण कृति।
—भूमिका से
Firangi Raja
- Author Name:
Rajgopal Singh Verma
- Book Type:

-
Description:
आम इनसानों से लेकर ऋषि-मुनियों, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और घुमक्कड़ों के लिए हिमालय का आकर्षण हर काल में रहा है। इनमें से कुछ लोग तो यहाँ आए और यहीं के होकर रह गए। सैन्य जीवन की जटिलताओं से निकल कर आए ईस्ट इंडिया कम्पनी के एक फिरंगी सैन्य अधिकारी फ्रेडरिक विल्सन की कहानी कुछ ऐसी ही थी। उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्ध में अदम्य उद्यमशीलता के बलबूते उसने अपनी शरण स्थली गढ़वाल, हिमालय के हर्षिल क्षेत्र को आजीवन कर्मस्थली में परिणित कर दिया था। लगभग चार दशक तक उसके नाम का डंका ऐसे बजा कि तत्कालीन जनसाधारण से लेकर विशिष्ट जनों के मध्य वह ‘हर्षिल का राजा’ के रूप में चर्चित हो गया था। फ्रेडरिक विल्सन की उद्यमी सफलता की कहानियाँ आज भी गढ़वाली समाज में खूब कही और सुनी जाती हैं। गढ़वाल, हिमालय में उन्नीसवीं शताब्दी में एक तरफ वह प्रकृति का क्रूर विदोहक माना गया तो दूसरी ओर सर्वांगीण विकास का नव-प्रवर्तक भी साबित हुआ।
‘फिरंगी राजा’ में राजगोपाल सिंह वर्मा ने गढ़वाल में बीती विल्सन की जीवन-यात्रा को तत्कालीन स्थानीय वन्यता, इतिहास, संस्कृति, राजनीति, शासन-प्रशासन की कार्यशैली और विकास के विभिन्न पड़ावों के साथ बेहद खूबसूरत अन्दाज में रेखांकित किया है। यह उपन्यास उन्नीसवीं सदी के गढ़वाल का इतिहास नहीं है, पर उस कालखंड के मर्म को बखूबी उद्घाटित करता है। मानवीय साहस-दुस्साहस और उसकी प्रकृति के प्रति व्यवहार की परिणिति को विल्सन के उत्थान और अवसान के जरिये उपन्यासकार ने प्रभावी तथ्यों के साथ सामने रखा है। विल्सन की वेदना के माध्यम से यह उपन्यास हमें प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने का संदेश ही नहीं देता वरन उससे बढ़कर एक उपयोगी और कारगर नीति की रूपरेखा भी पेश करता है। इन अर्थों में यह उपन्यास नीति नियन्ताओं के लिए एक प्रामाणिक दस्तावेज की तरह है। उपन्यास में लेखक ने गढ़वाल के इतिहास में अकारण ही भुला दिये गए नायक/प्रतिनायक फ्रेडरिक विल्सन के समूचे जीवन और परिवेश को पठनीय रोचकता के साथ रचा है, जिसका स्वागत किया जाना चाहिए।
—डॉ. अरुण कुकसाल
Aai Larki
- Author Name:
Krishna Sobti
- Book Type:

-
Description:
यह एक लम्बी कहानी है—यों तो मृत्यु की प्रतीक्षा में एक बूढ़ी स्त्री की, पर वह फैली हुई है उसकी समूची ज़िन्दगी के आर-पार, जिसे मरने के पहले अपनी अचूक जिजीविषा से वह याद करती है। उसमें घटनाएँ, बिम्ब, तस्वीरें और यादें अपने सारे ताप के साथ पुनरवतरित होते चलते हैं—नज़दीक आती मृत्यु का उसमें कोई भय नहीं है बल्कि मानो फिर से घिरती-घुमड़ती सारी ज़िन्दगी एक निर्भय न्योता है कि वह आए, उसके लिए पूरी तैयारी है। पर यह तैयारी अपने मोह और स्मृतियों, अपनी ज़िद और अनुभवों का पल्ला झाड़कर किसी वैरागी सादगी में नहीं है बल्कि पिछले किये-धरे को एकबारगी अपने साथ लेकर मोह के बीचोबीच धँसते हुए प्रतीक्षा है—एक भयातुर समय में, जिसमें हम जीवन और मृत्यु, दोनों से लगातार डरते रहते हैं, उसमें सहज स्वीकार, उसकी विडम्बना और उसकी ट्रैजीकॉमिक अवस्थिति का पूरा और तीखा अवसाद है।
यह कथा अपनी स्मृति में पूरी तरह डूबी स्त्री का जगत् को छोड़ते हुए अपनी बेटी को दिया निर्मोह का उपहार है। राग और विराग के बीच चढ़ती-उतरती घाटी को भाषा की चमक में पार करते हुए कोई यह सब जंजाल छोड़कर चला जानेवाला है। लेकिन तब भी यहाँ सब कुछ ठहरा हुआ है : भाषा में।
कोई भी कृति सबसे पहले और सबके अन्त में भाषा में ही रहती है—उसी में उसका सच मिलता, चरितार्थ और विलीन होता है। कथा-भाषा का इस कहानी में एक नया उत्कर्ष है। उसमें होने, डूबने-उतराने, गढ़ने-रचने की कविता है—उसमें अपनी हालत को देखता-परखता, जीवन के अनेक अप्रत्याशित क्षणों को सहेजता और सच्चाई की सख़्ती को बखानता गद्य है। प्रूस्त ने कहीं लिखा है कि लेखक निरन्तर सामान्य चेतना और विक्षिप्तता की सरहद के आर-पार तस्करी करता है। ‘ऐ लड़की’ कविता के इलाक़े से गद्य का, मृत्यु के क्षेत्र से जीवन का चुपचाप उठाकर लाया-सहेजा गया अनुभव है।
Pahar Dhalte
- Author Name:
Manzoor Ehtesham
- Book Type:

- Description: बीहड़ सर्दियों की एक रात के आहिस्ता-आहिस्ता ढलते पहर। फ़ज़ा को इमरज़ेंसी के नाख़ूनों ने जकड़ रखा है। शहर की आम बस्तियों से दूर एक आलीशान कोठी के अँधेरे-उजाले में हरकत करते कुछ किरदार, लेखन में उन्हें, रात के अँधेरे में, एक शातिर जासूस की महारत के साथ, ऐसे पकड़ा गया है कि वे कभी यथार्थ लगते हैं कभी फ़ैन्टेसी। इन्हें देखकर सहसा मुक्तिबोध की लम्बी कविता ‘अँधेरे में’ के चरित्र याद आते हैं। इन चरित्रों में नवाब, बेगम, अफ़सर, मंत्री, व्यापारी, क़व्वाल, औरतें, ख़ादिम, शोहदे, सब हैं। अपनी-अपनी ज़िम्मेदारियों से बच निकलने का पार्ट अदा करते हुए। इस भुतहा नाटक में पाखंड, गुरूर, नफ़रत, ईर्ष्या, सूफ़ियाना क़लाम, इश्क, पछतावा, आँसू, फ़रेब, मक्कारी सभी के रक़्स हैं। रात के एक हिस्से की कहानी के बाहर जाने कितनी और रातें और दिन हैं जहाँ लेखक हमें ले जाता है, और फिर वापस ले आता है, वर्तमान में सक्रिय भूतों की बारात के बीचोबीच।
Our Dharma Between Us
- Author Name:
Pratik Sharma
- Book Type:

- Description: Every love story has two endings, either the lovers meet or they don’t. The journey between the commencement and conclusion is different for everyone, and that’s your original story.Joy deep Singh, a Sikh in his twenty-six, starts working as teacher and does voluntary service with his dad. A day comes when he comes across Pratik, a friend from his school. They meet after 4 years in the school.Being parted for a long time, they start discussing their old days. However, the name of Meenakshi drags joy deep into some thick and thin memories of his life.Being in a live-in relationship for five years, and separating later, joy illustrates his heart-rending story to Pratik. How much does a thread of a Hindu and a turban of a Sikh matters in a marriage if love is the biggest dharma?.
A Soldier's Daughter
- Author Name:
Nupur Luthra
- Book Type:

- Description: This is the life story of a young girl who is an army officer's daughter. Brought up in the private army quarters, she somehow prefers to lead an everyday civilian life. Despite her parents' (army officers) insistence, she opts out of any profession remotely related to "Army, Navy or Air-force". From schooling to college to professional life, she is perennially confused if she belongs to the elite army circle or the mundane civilian world. Having a first-hand experience of living both lives, she narrates the exciting events from her dual life. From the best of both lives to the worst, she gives an unbiased account of what it is to be a part of the army and yet lives a civilian life. An exciting account of a young girl who reveals what it is to live two lives at once!
Nar Naari
- Author Name:
Krishna Baldev Vaid
- Book Type:

-
Description:
यह उपन्यास कृष्ण बलदेव वैद के सबसे चर्चित और बहस तलब रचनाओं में से एक है। उन्होंने हिन्दी की मुख्यधारा से अकसर दूर ही रहते हुए भाषा को ऐसी कृतियाँ दी हैं जो शिल्प के हमारे साथ सोचने के तरीक़ों को भी विचलित करती रही हैं।
‘नर नारी’ उपन्यास स्त्री की समूची सामाजिक, पारिवारिक और दैहिक इयत्ता को केन्द्र में रखता है, और उनसे जुड़े प्रश्नों पर एक संकुल भावभूमि के परिप्रेक्ष्य में विचार करता है। पितृसत्तात्मक सामाजिक तंत्र में सम्पत्ति के उत्तराधिकार, विवाह-संस्था की वैधता, यौन- शुचिता और इससे जुड़े कई विधि-निषेधों पर अत्यन्त ज़ोर दिया जाता है। पति-पत्नी, बहन-भाई, माँ-बेटे आदि सभी सम्बन्ध अन्तत: इन्हीं सब के सन्दर्भ में परिभाषित होते दिखते हैं।
इनके बीच ही मौजूद है स्त्री-पुरुष का आदिम रिश्ता जो एक दूसरी की उपस्थिति को एक प्राकृतिक और समान भूमि पर परिभाषित करता है। बाँझ माँजी, रसीला, सीमा और मीनू आदि इस उपन्यास के ऐसे स्त्री पात्र हैं जिनका जीवन और दृष्टिकोण इन तमाम प्रश्नों पर अलग-अलग ढंग से प्रकाश डालता है।
संवादों के बीच से ही दृश्यों को साकार करते हुए उपन्यास को पढ़ना जैसे अपने ही मन की भीतरी तहों की यात्रा करने जैसा है। लेखक कहीं पर न पात्रों का बाहरी विवरण देता है, न परिस्थितियों का, फिर भी सब जैसे पाठक की आँखों के सामने साकार होता चलता है। एक पठनीय और विचारणीय उपन्यास।
Sukhi Mrityu
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

-
Description:
एक लोकप्रिय लेखक होने के साथ-साथ कामू एक महान चिन्तक भी थे। जीवन-भर वे अपनी आत्मा और प्रतिभा की पूरी शक्ति से, विचार के पूर्ण प्रयास तथा अन्तरात्मा की वेदना से अपने समय की जटिल व यातनाप्रद समस्याओं में उलझे रहे। उनकी रचनाओं में मानव की आत्मा के विद्रोह, सच्चे सुख के रहस्य की खोज और सत्य का मूल रूप जानने की चिर-अतृप्त जिज्ञासा बहुत गम्भीरता से व्यक्त हुई है। ‘सुखी मृत्यु’ उपन्यास भी जीवन-सुख और उसी में निहित मृत्यु-सुख को समझने के प्रयास का विवरण है।
जीवन में सुख प्राप्त करना जिससे कि मृत्यु भी एक सुखद अनुभव रहे; ऐसा सम्पूर्ण सुख कैसे मिले? यही इस उपन्यास की केन्द्रीय समस्या है। उपन्यास का पहला भाग जीवन की इस समस्या का अदीप्त, अस्पष्ट पहलू हमारे सामने रखता है जब नायक के पास न तो मानसिक परिपक्वता है, न आर्थिक क्षमता और न ही समय। दूसरा भाग उसके मन के सुख, शान्ति और आन्तरिक आनन्द को प्रस्तुत करता है।
कहा जाता है कि कामू के अत्यन्त चर्चित उपन्यास ‘अजनबी’ का अंकुर ‘सुखी मृत्यु’ उपन्यास में ही संहत है।
Kata Hua Aasman
- Author Name:
Jagdamba Prasad Dixit
- Book Type:

-
Description:
जगदम्बा प्रसाद दीक्षित ने अपने पहले उपन्यास ‘कटा हुआ आसमान’ का लेखन सन् 1964 में शुरू किया था। तीन साल बाद अर्थात् 1967 में उपन्यास पूरा हो गया। किन्तु इसका प्रकाशन तुरन्त ही नहीं हो सका। 1971 में यह उपन्यास पहली बार प्रकाशित हुआ। अपने प्रकाशन के साथ इस उपन्यास ने हिन्दी जगत् में सनसनी पैदा कर दी। महानगर के व्यस्त और खंड–खंड जीवन के अकेलेपन, अजनबीपन और संत्रास को लेकर वैसे तो काफ़ी कुछ लिखा गया था, लेकिन अनुभूति के स्तर पर इस जीवन की तीव्र अभिव्यक्ति पहली बार ‘कटा हुआ आसमान’ में हुई है।
पहली बार उपन्यास के केन्द्र में त्रासदी से गुज़रने वाले मानस–पटल को रखा गया और उसके दृष्टिकोण से वर्तमान के यथार्थ के साथ अतीत और भविष्य के कल्पना–चित्रों को संगुम्फित कर दिया गया। कथ्य और शैली, दोनों के क्षेत्र में यह एक अभूतपूर्व प्रयोग था और इसका प्रभाव भी चमत्कारिक था। कुछ लोगों ने इस उपन्यास को चेतना–प्रवाही शैली का हिन्दी का पहला उपन्यास कहा है। चेतना–प्रवाही शैली को पश्चिम में जेम्स ज्वायस ने एक नितान्त व्यक्तिवादी अभिव्यक्ति के रूप में प्रयुक्त किया था। ‘कटा हुआ आसमान’ को पूरी तरह चेतना–प्रवाही शैली का उपन्यास नहीं कहा जा सकता। इसमें व्यक्ति की चेतना को सामाजिक और वर्गीय सन्दर्भों के साथ जोड़कर समग्रता में देखा गया है।
उपन्यास के मूल में एक कथानक है जो स्त्री–पुरुष सम्बन्धों के एक ऐसे पक्ष को प्रस्तुत करता है जो वर्गीय अन्तर्विरोधों पर आधारित है। ये अन्तर्विरोध वर्गीय तो हैं ही, क़स्बाई और महानगरीय जीवन–शैलियों, मान्यताओं और मूल्यों को भी प्रतिबिम्बित करते हैं। लेकिन ‘कटा हुआ आसमान’ मात्र चिन्तन और विचार–शक्ति की अभिव्यक्ति नहीं है। यह एक तीव्र जीवनानुभव है। इस उपन्यास को जब आप पढ़ते हैं तो आप कोई पुस्तक नहीं पढ़ते हैं, एक सनसनीखेज़ अनुभव–संसार से गुज़रते हैं। भागते हुए लोगों और वाहनों की तेज़ आवाज़ें, फेरीवालों और भिखारियों की चीख़ें, सारे माहौल में व्याप्त एक विलक्षण तनाव की अनुगूँजें और यांत्रिक मानव–जीवन की तीव्रताएँ आपको लगातार झकझोरती रहती हैं। खंड–खंड यथार्थ को जीने का अनुभव आपको पल–भर के लिए भी नहीं छोड़ता। इसमें शक नहीं कि ‘कटा हुआ आसमान’ हर दृष्टि से हिन्दी उपन्यास–संसार की एक अनूठी रचना है।
Narak Gulzar
- Author Name:
Subhash Mukhopadhyay
- Book Type:

- Description: मानवीय गरिमा और सामाजिक मूल्यों की स्थापना के लिए निरन्तर युद्धरत बाडाला के अप्रतिम एवं शीर्षस्थ रचनाकार सुभाष मुखोपाध्याय का मार्मिक उपन्यास है—‘नरक गुलज़ार’। किसी प्रतिष्ठित उपक्रम का एक वरिष्ठ अधिकारी अचानक कुष्ठ रोग का शिकार हो जाए और फिर अपने सामाजिक जीवन और गिरस्ती को तिलांजलि देकर कोढ़ियों की एक उपनगरीय बस्ती में आकर अपना जीवन गुज़ारने लगे तो किसे यह विश्वास होगा कि वह इस बस्ती का सर्वप्रिय चाचा 'पैन साहब' हो जाएगा! चोरी-चकारी, देसी दारू बनानेवालों और भीख माँगनेवालों की यह बस्ती धीरे-धीरे उसे इतनी प्रिय लगने लगती है कि वह अपने अतीत को भूलकर अपने सामने चुनौती देते वर्तमान को अपना सबकुछ सौंप देता है और सारी बस्ती के सुख-दु:ख उसके अपने-से लगने लगते हैं। कोढ़ से गल गए शरीरों और इसके साथ भूमिसात सपनों की यह अपरिचित दुनिया बाहर से बड़ी ख़ौफ़नाक लगती है, लेकिन कोढ़ियों का अपना संसार कितना रोचक और संवेदनशील होकर धीरे-धीरे सुभाष दा जैसे कवि का रचनात्मक संसार बन जाता है! नक्सल आन्दोलन से जुड़े कथानकों ने साठ-सत्तर के दशकों में बांग्ला साहित्य में कभी धूम-सी मचा दी थी और आलोचकों ने इसे लेखकों का ‘नक्सलमेनिया’ भी कहा था। राजनीतिक पृष्ठभूमि में कोढ़ियों की बस्ती में युवा नक्सलों के आगमन, पुलिस का दमन-चक्र, व्यवस्था की बर्बरता और फ़र्ज़ी मुठभेड़ में उनका सफ़ाया, एक बुज़ुर्ग कोढ़िन चामुरिया के प्रेम और फिर उसके माँ बनते-बनते गुज़र जाने और इसी बस्ती की सोनी के अनब्याहे मातृत्व जैसी मार्मिक घटनाएँ इस लघु उपन्यास को बेहद जीवन्त बना देती हैं। इस उपन्यास का ताना-बाना कुछ इस तरह बुना गया है कि पाठक को यह पता ही नहीं चलता कि इसने उसे कब अपनी गिरफ़्त में ले लिया है।
Cadence
- Author Name:
Parul Tyagi
- Book Type:

- Description: Hindi Poetry Book
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book