Salam Aakhiri
(0)
Author:
Madhu KankariyaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Literary-fiction₹
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समाज में वेश्या की मौजूदगी एक ऐसा चिरन्तन सवाल है जिससे हर समाज हर युग में अपने-अपने ढंग से जूझता रहा है। वेश्या को कभी लोगों ने सभ्यता की ज़रूरत बताया, कभी कलंक बताया, कभी परिवार की क़िलेबन्दी का बाई-प्रोडक्ट कहा और कभी सभ्य, सफ़ेदपोश दुनिया का गटर जो ‘उनकी’ काम-कल्पनाओं और कुंठाओं के कीचड़ को दूर अँधेरे में ले जाकर डंप कर देता है। इधर वेश्याओं को एक सामान्य कर्मचारी का दर्जा दिलाए जाने की क़वायद भी शुरू हुई है। लेकिन</p> <p>ऐसा कभी नहीं हुआ कि समाज अपनी पूरी इच्छाशक्ति के साथ वेश्यावृत्ति के उन्मूलन के लिए कटिबद्ध हो जाए; इस अभिशाप के उन्मूलन के नाम पर तमाम तरह के उत्पीड़न-दमन और शोषण का शिकार वेश्याएँ ज़रूर होती रही हैं।</p> <p>यह उपन्यास वेश्याओं और वेश्यावृत्ति के पूरे परिदृश्य को देखते हुए हमारे भीतर उन असहाय स्त्रियों के प्रति करुणा का उद्रेक करता है, जो किसी भी कारण इस बदनाम और नारकीय व्यवसाय में आ फँसी हैं।</p> <p>कलकत्ता के सोनागाछी रेड लाइट एरिया की अँधेरी गलियों का सीधा साक्षात्कार कराते हुए लेखिका सभ्य समाज की संवेदनहीनता और कठोरता को भी साथ-साथ झिंझोड़ती चलती है; यही चीज़ इस उपन्यास को सिर्फ़ एक कथा-पुस्तक की हद से निकालकर एक दस्तावेज़ में बदल देती है।
Read moreAbout the Book
समाज में वेश्या की मौजूदगी एक ऐसा चिरन्तन सवाल है जिससे हर समाज हर युग में अपने-अपने ढंग से जूझता रहा है। वेश्या को कभी लोगों ने सभ्यता की ज़रूरत बताया, कभी कलंक बताया, कभी परिवार की क़िलेबन्दी का बाई-प्रोडक्ट कहा और कभी सभ्य, सफ़ेदपोश दुनिया का गटर जो ‘उनकी’ काम-कल्पनाओं और कुंठाओं के कीचड़ को दूर अँधेरे में ले जाकर डंप कर देता है। इधर वेश्याओं को एक सामान्य कर्मचारी का दर्जा दिलाए जाने की क़वायद भी शुरू हुई है। लेकिन</p>
<p>ऐसा कभी नहीं हुआ कि समाज अपनी पूरी इच्छाशक्ति के साथ वेश्यावृत्ति के उन्मूलन के लिए कटिबद्ध हो जाए; इस अभिशाप के उन्मूलन के नाम पर तमाम तरह के उत्पीड़न-दमन और शोषण का शिकार वेश्याएँ ज़रूर होती रही हैं।</p>
<p>यह उपन्यास वेश्याओं और वेश्यावृत्ति के पूरे परिदृश्य को देखते हुए हमारे भीतर उन असहाय स्त्रियों के प्रति करुणा का उद्रेक करता है, जो किसी भी कारण इस बदनाम और नारकीय व्यवसाय में आ फँसी हैं।</p>
<p>कलकत्ता के सोनागाछी रेड लाइट एरिया की अँधेरी गलियों का सीधा साक्षात्कार कराते हुए लेखिका सभ्य समाज की संवेदनहीनता और कठोरता को भी साथ-साथ झिंझोड़ती चलती है; यही चीज़ इस उपन्यास को सिर्फ़ एक कथा-पुस्तक की हद से निकालकर एक दस्तावेज़ में बदल देती है।
Book Details
-
ISBN9788126712922
-
Pages192
-
Avg Reading Time6 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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सामाजिक विचार के व्यावहारिक चिन्तक एवं रचनाकार जयप्रकाश कर्दम का यह उपन्यास दलित साहित्य का क्रान्तिधर्मी दस्तावेज़ है। उपन्यास की कथा से गुज़रते हुए महसूस होता है कि आज़ादी के इतने वर्षों बाद भी संवैधानिक मूल्यों के परिप्रेक्ष्य में सामाजिक संरचना के सर्जनात्मक साहित्य की ज़मीन की तलाश ज़रूरी है, ताकि आत्मीय और भावनात्मक प्रसंगों की पृष्ठभूमि में अपनी समझ के तीखे से तीखे सामाजिक-सांस्कृतिक सवालों के समाधान खोजने का उपक्रम किया जा सके। जयप्रकाश कर्दम ने डॉ. अम्बेडकर के जीवन-दर्शन और विचारों को क्रियान्वित करने के लिए कथानायक चन्दन की सृष्टि की है, जो सदियों से अज्ञान और पिछड़ेपन की गति में पड़े हुए दलित समाज को जगाना चाहता है। वह कॉलेज में पढ़ते हुए भी स्कूल चलाता है और बच्चों को स्वयं पढ़ाता है; क्योंकि वह जानता है कि जीवन और समाज में व्याप्त विसंगतियों के ख़िलाफ़ लड़ाई जीतने के लिए शिक्षा सबसे ज़्यादा मारक और शक्तिशाली शस्त्र है।
‘छप्पर’ की सबसे महत्त्वपूर्ण उपलब्धि है—दलित समाज का वैचारिक आधार पर संगठित होना तथा सामन्ती-ब्राह्मणी शोषण-उत्पीड़न और जातिगत भेदभाव से मुक्ति के लिए अनथक संघर्ष की प्रेरणा। साथ ही सामाजिक सम्मान की भावना जाग्रत कर स्वाभिमान से जीने की ललक पैदा करना।
उपन्यासकार ने शिक्षा के महत्त्व को समझते हुए सामाजिक क्रान्ति पर ज़ोर दिया है, क्योंकि सांस्कृतिक क्रान्ति के बिना सामाजिक क्रान्ति अधूरी है और इसके बिना दलित समाज का उत्थान और विकास सम्भव नहीं।
Waiting Based On What Could Have Happened
- Author Name:
Prashant Gupta
- Book Type:

- Description: "It is 2017, and the world is getting crazy about a new security system “, The finger-print security”. It is by far theoretically the best security system to be produced and applied to this mass scale. No one now has ever to remember and care to protect their password anymore. Kaushal shares with his two best friends the hack he has found. A year later, it turns out that the company they are working for has stolen money, using the same hack that Kaushal had discovered and shared only with his friends. Victims have now filed a police complaint against the company. But to everyone's surprise, the firm's CEO, Mr Sanjay keer, has absconded. Without any trace of his existence ever in the city, he vanishes...".
Main Ravindranath ki Patni
- Author Name:
Ranjan bandyopadhyay
- Book Type:

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Description:
‘मैं रवीन्द्रनाथ की पत्नी’ एक ऐसी पुष्पलता की कहानी है जिसे एक विराटवृक्ष के साहचर्य में आने की कीमत अपने अस्तित्व को ओझल करके चुकानी पड़ी।
गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर की पत्नी थीं—मृणालिनी देवी। उनका सिर्फ एक ही परिचय था कि वे विश्वकवि की सहधर्मिणी हैं। उनका जीवन मात्र अट्ठाइस वर्षों का रहा, जिनमें से उन्नीस वर्ष उन्होंने रवीन्द्रनाथ की पत्नी के रूप में जिये। रवीन्द्रनाथ की विराट छाया में मृणालिनी का अन्तर्जगत हमेशा अँधेरे में रहने को ही अभिशप्त रहा। रवीन्द्रनाथ से इतर उनका अपना कोई अस्तित्व मानो रहा ही नहीं।
लेकिन क्या सचमुच ऐसा ही था? क्या अपने निजी जीवन में मृणालिनी ने दाम्पत्य का सहज सुख पाया और अपने जीवनसाथी की सच्ची सहधर्मिणी हो पाई थीं? क्या उन्हें रवीन्द्रनाथ की पत्नी के रूप में प्रेमपूर्ण जीवन जीने को मिला था? इन तमाम सवालों का जवाब है यह उपन्यास जिसमें एक स्त्री के सम्पूर्ण मन-प्राण की व्यथा इस तरह अभिव्यक्त हुई है जो इतिहास को नई रोशनी में देखने की माँग करती है।
एक अविस्मरणीय कृति!
Adab Mein Baaeen Pasli : Afro-Asiayi NataK Vol. 4
- Author Name:
Nasera Sharma
- Book Type:

- Description: इस संग्रह में तीन महत्त्वपूर्ण नाटकों के अनुवाद दिए जा रहे हैं। जिनमें नाटककारों के अपने व्यक्तित्व एवं जीवन की गहरी छाप है। उस भाषा देश और समाज की परम्पराएँ तो झलकती हैं, साथ ही उनकी समस्याएँ, कठिनाइयाँ, दु:ख और सुख की भी सूचनाएँ मिलती हैं। रचनाकारों और पाठकों की अपनी निजी जीवन-दृष्टि, अनुभव, पसन्द-नापसन्द होती हैं मगर इन सब के बावजूद कुछ रचनाएँ इन सारी बातों के दबाव से निकल अपनी उपस्थिति विश्व स्तर के साहित्यकारों और पाठकों व आलोचकों में बना लेती हैं, जहाँ नापसन्दगी के बावजूद उसकी अहमियत से इंकार नहीं किया जा सकता है। मिसाल के तौर पर इन तीनों नाटकों के विषय जिनके तारों से हर काल में नई आवाज़ें निकालने की कोशिशें की गई हैं जो आज भी जारी हैं। इसका कारण वे बुनियादी सवाल हैं, जिनसे लगातार आज का आधुनिक इंसान जूझ रहा है। अली ओकला ओरसान का नाटक पुराने ऐतिहासिक पर्दे पर नई समस्याओं की ओर इंगित करता है। दूसरा नाटक 'पशु-बाड़ा’, गौहर मुराद का बेहद लोकप्रिय नाटक रहा है। रिफ़अत सरोश का पूरा वजूद शायरी और अदब से प्रभावित रहा है। उनके विषय किसी विशेष वर्ग या वाद तक सीमित नहीं रहे हैं, उनके व्यापक दृष्टिकोण का नमूना उनका नाटक 'प्रवीण राय’ है।
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