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Mannu Bhandari Aur Aapka Banti

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‘आपका बंटी’ पितृसत्तात्मक समाज में अपने अस्तित्व व मातृत्व के नाजुक द्वन्द्व के बीच भूलनेवाली उस स्त्री की कहानी है, जो इन दोनों को बचा ले जाने की कोशिश में कई मोर्चों पर एक साथ लड़ती है। साथ ही, उस बच्चे की भी कहानी है जो निर्दोष होते हुए भी कोशिश के इस तराजू पर लगातार तुलता रहता है। कभी ज़्यादा तो कभी कम। पितृत्व प्रश्न पर सदैव मौन रहनेवाला यह समाज शकुन के मातृत्व पर उँगली उठाता है। जो पिता पूरे परिदृश्य से ग़ायब है। कहानी दरअसल उसी की सन्दिग्ध भूमिका को शकुन व बंटी के माध्यम से बेपर्दा करने की कोशिश करती है। दायित्वों के निर्वहन में मिलनेवाली सामाजिक छूट का फ़ायदा सिर्फ़ पुरुष को ही क्यों? यह कहानी दरअसल सामाजिक संरचना में स्त्री-पुरुष की समान भागीदारी और उसे बनाए रखने में दोनों के प्रति एक समान सामाजिक व न्यायिक नज़रिया रखने की माँग करती है। पुस्तक में मन्नू जी द्वारा उठाए गए इस संवेदनशील मुद्दे को आज के सामाजिक परिप्रेक्ष्य के मद्देनज़र आप तक पहुँचाने की कोशिश की गई है, क्योंकि बंटी सिर्फ़ उनका या हमारा ही नहीं, आपका भी है।

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‘आपका बंटी’ पितृसत्तात्मक समाज में अपने अस्तित्व व मातृत्व के नाजुक द्वन्द्व के बीच भूलनेवाली उस स्त्री की कहानी है, जो इन दोनों को बचा ले जाने की कोशिश में कई मोर्चों पर एक साथ लड़ती है। साथ ही, उस बच्चे की भी कहानी है जो निर्दोष होते हुए भी कोशिश के इस तराजू पर लगातार तुलता रहता है। कभी ज़्यादा तो कभी कम।

पितृत्व प्रश्न पर सदैव मौन रहनेवाला यह समाज शकुन के मातृत्व पर उँगली उठाता है। जो पिता पूरे परिदृश्य से ग़ायब है। कहानी दरअसल उसी की सन्दिग्ध भूमिका को शकुन व बंटी के माध्यम से बेपर्दा करने की कोशिश करती है। दायित्वों के निर्वहन में मिलनेवाली सामाजिक छूट का फ़ायदा सिर्फ़ पुरुष को ही क्यों? यह कहानी दरअसल सामाजिक संरचना में स्त्री-पुरुष की समान भागीदारी और उसे बनाए रखने में दोनों के प्रति एक समान सामाजिक व न्यायिक नज़रिया रखने की माँग करती है।

पुस्तक में मन्नू जी द्वारा उठाए गए इस संवेदनशील मुद्दे को आज के सामाजिक परिप्रेक्ष्य के मद्देनज़र आप तक पहुँचाने की कोशिश की गई है, क्योंकि बंटी सिर्फ़ उनका या हमारा ही नहीं, आपका भी है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Edition
2nd
Publication year
2009
Weight
206 grams
ISBN-13
9788180313646
Pages
95
Reading time
~3 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14 × 22 cm
Language
Hindi

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