Uttar-Mauryakaleen Bharat 200 BC - Ad 300
Author:
Irfan HabibPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 556
₹
695
Available
‘भारत का लोक इतिहास’ शृंखला की इस पुस्तक ‘उत्तर-मौर्यकालीन भारत’ का ताल्लुक़ उन पाँच सौ वर्षों से है जब भारत के राजनीतिक नक्शे पर इंडो-यूनानी, शकों, कुषाणों और सातवाहन वंशों का प्रभुत्व था। राजनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ इसमें उस अवधि की अर्थव्यवस्था का भी विवरण प्रस्तुत किया गया है। शिल्प-उत्पादन और विदेश-व्यापार के लिहाज़ से इस दौर में कई अहम परिवर्तन देखे गए थे।
‘उत्तर-मौर्यकालीन भारत’ में दी गई सभी सूचनाएँ और जानकारियाँ अद्यतन इतिहास-सामग्री पर आधारित हैं। शृंखला की अन्य पुस्तकों के अनुरूप ही इसमें भी चुनिन्दा शिलालेखों के अनुवाद तथा प्राचीन ग्रन्थों के अंश जोड़े गए हैं। पुराणों, संगम ग्रन्थों और कुषाण कालक्रम पर विशेष टिप्पणियाँ भी इसमें शामिल हैं जो पुस्तक को और भी प्रामाणिक बनाती है। कुछ टिप्पणियाँ मुद्राशास्त्र और अर्थशास्त्र की प्राथमिक अवधारणाओं पर भी जोड़ी गई हैं।
सहायक नक्शों और चित्रों से सुसज्जित यह पुस्तक इतिहास में रुचि रखनेवाले पाठकों, छात्रों और अध्येताओं के लिए समान रूप से उपयोगी है। पुस्तक में प्रस्तुत सामग्री में उन विधियों को विशेष रूप में रेखांकित किया गया है जो आम जन-जीवन को प्रभावित करते हैं; और जो आज भी हमें एक विश्व-दृष्टि विकसित करने में सहायक हो सकते हैं।
ISBN: 9789360867119
Pages: 168
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: यद्यपि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की दीर्घ-यात्रा पर अनेक पुस्तकें लिखी जा चुकी हैं, फिर भी संघ सदैव ही सुर्खियों में रहता है। हाल के दिनों में संघ के कामकाज को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है, क्योंकि एक ओर इन दिनों में बहुत से स्वयंसेवक सरकार में शीर्ष पदों पर पहुँचे हैं, वहीं दूसरी ओर संघ के हिंदू-राष्ट्र और एकात्मता के मूल विचार अब हमारे सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र की मुख्यधारा बन गए हैं। भारत के लिए संघ का दृष्टिकोण क्या है? यदि भारत एक हिंदू-राष्ट्र बन जाता है, तो इसमें मुसलमानों और अन्य धर्मों का क्या स्थान होगा? इतिहास-लेखन की संघ की परियोजना कितनी बड़ी है? क्या हिंदुत्व जाति की राजनीति को खत्म कर देगा? परिवार की बदलती प्रकृति और विभिन्न सामाजिक अधिकारों पसंघ का क्या दृष्टिकोण है? संघ के वरिष्ठ प्रचारक सुनील आंबेकरजी ने इस पुस्तक में इन सवालों का विश्लेषण किया है। आंबेकरजी को तथ्यों की गहरी समझ है, इसी कारण से वे विचार की स्पष्टता और उसके विस्तार, दोनों पर ध्यान केंद्रित करने में सफल हुए हैं। एक स्वयंसेवक के रूप में उन्होंने शाखा पद्धति में कार्य किया है और उसे अपने जीवन में जिया है, उसी के आधार पर संघ की आंतरिक कार्य-प्रणाली, निर्णय-प्रक्रिया और समन्वयक-दृष्टि पर गहराई से दृष्टिपात किया है। वास्तविक जीवन के अनुभवों से भरपूर ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : स्वर्णिम भारत के दिशा-सूत्र’ उन सभी के लिए एक पठनीय पुस्तक है, जो संघ-शक्ति की कार्यप्रणाली और इसकी भविष्य की योजनाओं को समझने के इच्छुक हैं।
Putin And The Russian Renaissance
- Author Name:
Dinkar Kumar
- Book Type:

- Description: The book invites you to uncover the remarkable journey of Vladimir Putin, one of the most intriguing and controversial leaders of our time. From the gritty streets of post-war Leningrad to the heights of global power, this is the story of a man who reshaped Russia and left the world divided. Explore Putin's transformation from a quiet KGB officer to a political force who rose unexpectedly to lead a nation. Witness his efforts to revive a faltering Russia, his bold and often polarizing decisions, and his relentless pursuit of restoring Russia's place on the global stage. But who is Vladimir Putin beyond the politics? This book peels back the layers to reveal the person behind the power-his early life, personal values and the driving force behind his vision. Told with clarity and depth, The Putin Story blends gripping storytelling with insightful analysis to offer a fresh perspective on a leader who has shaped history
Pragaitihas
- Author Name:
S. Irfan Habib
- Book Type:

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Description:
इस पुस्तक में उस युग की कहानी है जिस पर लिखित दस्तावेज़ों से कोई रोशनी नहीं पड़ती। यह पुस्तक ‘भारत का लोक इतिहास’ (पीपुल्स हिस्ट्री ऑफ़ इंडिया) नामक एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है, लेकिन इसे एक स्वतंत्र पुस्तक के रूप में भी देखा जा सकता है। तीन अध्यायों की इस पुस्तक के पहले अध्याय में भारत की भूगर्भीय संरचनाओं, मौसम में परिवर्तन तथा प्राकृतिक पर्यावरण (वनस्पति और प्राणी जगत) की उस हद तक चर्चा की गई है, जहाँ तक हमारे प्रागैतिहास और इतिहास को समझने के लिए प्रासंगिक है।
दूसरे अध्याय में मानव जाति की कहानी को पूरी दुनिया के सन्दर्भ में और फिर उसके अन्दर भारत के सन्दर्भ में पेश किया गया है। उसके औज़ार समूहों में परिवर्तन को औज़ार निर्माता लोगों के प्रकार के साथ जोड़कर देखा गया है। तीसरा अध्याय मूल रूप से खेती के विकास और उसके साथ-साथ शोषणकारी सम्बन्धों की शुरुआत का वर्णन करता है।
इस पुस्तक में इस बात की कोशिश की गई है कि ताज़ातरीन सूचनाएँ उपलब्ध प्रामाणिक ग्रन्थों और पत्रिकाओं से ही उद्धृत की जाएँ। यह भी कोशिश की गई है कि चीज़ों को ‘लोक-लुभावन’ तथा आडम्बरपूर्ण बनाए बग़ैर शैली को सरलतम रखा जाए। तकनीकी शब्दों के प्रयोग को न्यूनतम रखा गया है और यह भी प्रयास किया गया है कि प्रत्येक तकनीकी शब्द का प्रयोग करते समय वहीं पर उसकी एक परिभाषा प्रस्तुत कर दी जाए। प्रत्येक अध्याय के अन्त में एक पुस्तक सूची टिप्पणी भी दी गई है जहाँ उस विषय पर और अधिक सूचना देनेवाली महत्त्वपूर्ण पुस्तकों और लेखों को संक्षिप्त टिप्पणियों के साथ दर्ज किया गया है।
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