Katha Satisar
(0)
Author:
ChandrakantaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
699
₹ 559.2 (20% off)
Unavailable
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
शैव, बौद्ध और इस्लाम की साँझी विरासतों से रची कश्मीर वादी में पहले भी कई कठिन दौर आ चुके हैं। कभी औरंगजेब के समय, तो कभी अफ़ग़ान-काल में। लेकिन वे दौर आकर गुज़र गए। कभी धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेगबहादुर मसीहा बनकर आए, कभी कोई और। तभी ललद्यद और नुन्दऋषि की धरती पर लोग भिन्न धर्मों के बावजूद, आपसी सौहार्द और समन्वय की लोक-संस्कृति में रचे-बसे जीते रहे। आज वही आतंक, हत्या और निष्कासन का कठिन सिकन्दरी दौर फिर आ गया है, तब सिकन्दर के आतंक से वादी में पंडितों के कुल ग्यारह घर बचे रह गए थे। गो कि नई शक्ल में नए कारणों के साथ, पर व्यथा-कथा वही है—मानवीय यंत्रणा और त्रास की चिरन्तन दु:ख-गाथा। लोकतंत्र के इस गरिमामय समय में, स्वर्ग को नरक बनाने के लिए कौन ज़िम्मेदार हैं? छोटे-बड़े नेताओं, शासकों, बिचौलियों की कौन-सी महत्त्वाकांक्षाओं, कैसी भूलों, असावधानियों और ढुलमुल नीतियों का परिणाम है—आज का रक्त-रँगा कश्मीर? पाकिस्तान तो आतंकवाद के लिए ज़िम्मेदार है ही, पर हमारे नेतागण समय रहते चेत क्यों न गए? ऐसा क्यों हुआ कि जो औसत कश्मीरी, ग़ुस्से में, ज़्यादा-से-ज़्यादा, एक-दूसरे पर काँगड़ी उछाल देता था, वही कलिशनिकोव और एके सैंतालीसों से अपने ही हमवतनों के ख़ून से हाथ रँगने लगा? ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ तथा ‘यहाँ वितस्ता बहती है’ के बाद कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखा गया चर्चित लेखिका चन्द्रकान्ता का बृहद् उपन्यास है—‘कथा सतीसर’। लेखिका ने अपने इस उपन्यास में पात्रों के माध्यम से मानवीय अधिकार और अस्मिता से जुड़े प्रश्नों को उठाया है। इस पुस्तक में सन् 1931 से लेकर 2000 के शुरुआती समय के बीच बनते-बिगड़ते कश्मीर की कथा को संवेदना का ऐसा पुट दिया गया है कि सारे पात्र सजीव हो उठते हैं । सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में घटे हादसों से जन-जीवन के आपसी रिश्तों पर पड़े प्रभावों का संवेदनात्मक परीक्षण ही नहीं है यह पुस्तक, वर्तमान के जवाबदेह तथ्यों को साहित्य में दर्ज करने से एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ भी बन गई है।
Read moreDon’t Miss Out
Pick a membership and see exactly what it gets you
- 15 Free Deliveries
- 1 Free Book up to ₹500 MRP
- 0% off every book, every time
Subscribed already? Continue to your
benefits Login
You pay ₹1,499/Year
You will be auto-charged ₹1,499 every year. Cancel auto-charge anytime.
Benefits with Rachnaye Connoisseur
1 Free Physical Book up to ₹500 MRP
Personal Recommendations
15 Free Deliveries Per Year
Format:
Piracy Free
Express Delivery
Secure Payment
About the Book
शैव, बौद्ध और इस्लाम की साँझी विरासतों से रची कश्मीर वादी में पहले भी कई कठिन दौर आ चुके हैं। कभी औरंगजेब के समय, तो कभी अफ़ग़ान-काल में। लेकिन वे दौर आकर गुज़र गए। कभी धर्म की रक्षा के लिए गुरु तेगबहादुर मसीहा बनकर आए, कभी कोई और। तभी ललद्यद और नुन्दऋषि की धरती पर लोग भिन्न धर्मों के बावजूद, आपसी सौहार्द और समन्वय की लोक-संस्कृति में रचे-बसे जीते रहे। आज वही आतंक, हत्या और निष्कासन का कठिन सिकन्दरी दौर फिर आ गया है, तब सिकन्दर के आतंक से वादी में पंडितों के कुल ग्यारह घर बचे रह गए थे। गो कि नई शक्ल में नए कारणों के साथ, पर व्यथा-कथा वही है—मानवीय यंत्रणा और त्रास की चिरन्तन दु:ख-गाथा।
लोकतंत्र के इस गरिमामय समय में, स्वर्ग को नरक बनाने के लिए कौन ज़िम्मेदार हैं? छोटे-बड़े नेताओं, शासकों, बिचौलियों की कौन-सी महत्त्वाकांक्षाओं, कैसी भूलों, असावधानियों और ढुलमुल नीतियों का परिणाम है—आज का रक्त-रँगा कश्मीर? पाकिस्तान तो आतंकवाद के लिए ज़िम्मेदार है ही, पर हमारे नेतागण समय रहते चेत क्यों न गए? ऐसा क्यों हुआ कि जो औसत कश्मीरी, ग़ुस्से में, ज़्यादा-से-ज़्यादा, एक-दूसरे पर काँगड़ी उछाल देता था, वही कलिशनिकोव और एके सैंतालीसों से अपने ही हमवतनों के ख़ून से हाथ रँगने लगा?
‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ तथा ‘यहाँ वितस्ता बहती है’ के बाद कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखा गया चर्चित लेखिका चन्द्रकान्ता का बृहद् उपन्यास है—‘कथा सतीसर’। लेखिका ने अपने इस उपन्यास में पात्रों के माध्यम से मानवीय अधिकार और अस्मिता से जुड़े प्रश्नों को उठाया है।
इस पुस्तक में सन् 1931 से लेकर 2000 के शुरुआती समय के बीच बनते-बिगड़ते कश्मीर की कथा को संवेदना का ऐसा पुट दिया गया है कि सारे पात्र सजीव हो उठते हैं । सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में घटे हादसों से जन-जीवन के आपसी रिश्तों पर पड़े प्रभावों का संवेदनात्मक परीक्षण ही नहीं है यह पुस्तक, वर्तमान के जवाबदेह तथ्यों को साहित्य में दर्ज करने से एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ भी बन गई है।
Book Details
-
ISBN9788126713615
-
Pages595
-
Avg Reading Time20 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Hashiye Ki Ibaraten
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
चन्द्रकान्ता की कृतियाँ जहाँ सामयिक व्यवस्था के विद्रूपों एवं स्त्री-विमर्श की जटिलताओं की तहें खोलती हैं, वहीं सम्बन्धों के विघटन और मनुष्य के यांत्रिक होते जाने की विडम्बनाओं के बावजूद मूल्यों और विश्वासों की सार्थकता को नए आयाम देती हैं।
कश्मीर पर तीन महत्त्वपूर्ण उपन्यास लिखने के बावजूद चन्द्रकान्ता का लेखन समय के ज्वलन्त प्रश्नों एवं वृहत्तर मानवी सरोकारों से जुड़ा है।
प्रस्तुत है, स्त्रियों की सोच, आकांक्षाओं, स्वप्नों और संघर्षों की सच्चाइयों से साक्षात्कार करवानेवाली चन्द्रकान्ता की सद्य:प्रकाशित पुस्तक : ‘हाशिए की इबारतें’। अपने आत्मकथात्मक संस्मरणों के बहाने चन्द्रकान्ता ने स्त्री-मन के भीतर रसायन को खँगाला है। वहाँ अगर अँधेरे तहख़ाने हैं, तो रोशनी के गवाक्ष भी हैं; चाहों का हिलोरता सागर भी है और प्यास से हाँफता रेगिस्तान भी।
बकौल लेखिका : “मैंने इन संस्मरणों में स्त्री-समीक्षा नहीं की है, स्त्री-जीवन की भौतिकी, भीतरी कैमिस्ट्री की दख़लन्दाज़ी से बने गुट्ठिल व्यक्तित्व की कुछ गुत्थियों को खोलने की चेष्टा की है। बेटी, माँ, बहन, पत्नी, दादी, नानी के रोल निभाती स्त्री की सोच, आकांक्षाओं और स्वप्नों में सेंध लगाकर जानना चाहा है कि कई दशकों को पीछे ठेलते, प्रगति के तमाम सोपान पार करने के बाद, स्त्री से जुड़ी परिवर्तनकारी रीति-नीतियों और पुरुष वर्चस्व के अहम् पूरित सोच में कितना कुछ सार्थक बदलाव आ पाया है। घर-परिवार की धुरी स्त्री क्यों केन्द्र में क़दम जमाने से पहले ही बार-बार हाशिए पर धकेल दी जाती है? भूमंडलीकरण के इस दौर में भी क्या स्त्री के लिए कसाईघर मौजूद नहीं, जहाँ ख़ामोश, अपढ़ और बोलनेवाली तेज़-तर्रार, दोनों मिज़ाज की स्त्रियाँ, गाहे-बगाहे शहीद की जाती हैं?”
Pratinidhi Kahaniyan : Chandrakanta
- Author Name:
Chandrakanta +1
- Book Type:

- Description:
चन्द्रकान्ता कश्मीर केन्द्रित अपने विपुल कथा-लेखन के लिए हिन्दी जगत में ख़ासी लोकप्रिय हैं। अपनी कहानियों में उन्होंने देश-विभाजन के तत्काल बाद कश्मीर संकट से उपजे हालात से लेकर 'जेहाद' के नाम पर जारी आतंकवाद से झुलसते कश्मीर की आबोहवा और अवाम के दुःख-दर्द का अद्यतन चित्र उकेरा है, जहाँ वे यथास्थिति का चित्रण-भर करके नहीं रुक जातीं अपितु प्यार, ईमान और इंसानियत से लबरेज़ पात्रों का सृजन कर कट्टरता एवं हिंसा के विरुद्ध पुरज़ोर आवाज़ उठाती हैं। कश्मीर ही नहीं, देश-दुनिया की हर उस मानवीय त्रासदी को चन्द्रकान्ता अपनी कहानियों में जगह देती हैं जिससे एक संवेदनशील रचनाकार का मन आहत एवं उद्वेलित होता है। वे उस भ्रष्ट व्यवस्था और मनुष्य विरोधी तंत्र को कठघरे में खड़ा करती हैं, जिसने तेज़ी से बदलते समाज में चतुर्दिक संघर्ष से घिरे मनुष्य की आन्तरिक अनुभूतियों को कहीं गहरे दफ़न कर दिया है। व्यक्ति और व्यवस्था की मुठभेड़ में वे पूरी प्रतिबद्धता के साथ प्रत्येक विषम परिस्थिति एवं प्रवृत्ति की समीक्षा करती हैं; तत्पश्चात् उन तथ्यों का अन्वेषण करती हैं जिससे मनुष्य की अन्तरात्मा को मरने से बचाया जा सके और इस प्रकार एक बेहतर कल के लिए मनुष्य के स्वप्नों, संवेदनाओं और स्मृतियों को सिरज लेने की चिन्ता चन्द्रकान्ता की कहानियों का प्रस्थान-बिन्दु बन जाती है।
Chandrakanta Ki Lokpriya Kahaniyan
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
इस संकलन में जिन कहानियों को शामल किया गया है, उनकी लोकप्रियता का आधार पाठकों, संपादकों के आत्मीय पत्र हैं और समीक्षकों की प्रशंसात्मक टिप्पणियाँ भी। इनकी लोकप्रियता के कई कारणों में एक कारण कथ्य एवं विषय की विविधता है। इन कहानियों में देश-विदेश के कई प्रांतों-प्रदेशों की लोक संस्कृति के इंद्रधनुंषी रंग हैं। ये कहानियाँ किसी एक खचे में बंद नहीं हैं। यहाँ प्रेम और आपसी सौहार्द की बेमसाल धरती कश्मीर और पंजाब में पनपे आतंकवाद की त्रासद परिणतियाँ ‘काली बर्फ’, ‘आवाज’, ‘आत्मबोध’ जैसी कहानियों में है, तो ‘पोशनूल की वापसी’, ‘तैंतीबाई’ में दीन-धमर्, वर्गवर्ण से ऊपर निश्छल स्नेह और आत्मीय संबंधों के अनूठे उदाहरण भी हैं। सामाजिक-राजनीतिक दुर्व्यवस्था आतंकवाद, अंधविश्वास और रूढ़ मान्यताओं का विरोध करती ये कहानियाँ मनुष्य के अधिकारों, स्वप्नों और उम्मीदों के लिए आवाज उठाती हैं। वैश्वीकरण की इस दौड़ में मूल्यों का विघटन, वृद्धों के प्रति बढ़ती संवेदनहीनता आदि सामयिक मुद्दों से जुड़ी ये कहानियाँ स्त्री-विमर्श के नारे दिए बिना स्त्री की अस्मता, अधिकारों और संघर्ष के प्रश्न शिद्दत से उठाती हैं। आज की नई स्त्री की बदली सोच और आत्मक शक्ति ‘आवाज’, ‘लगातार युद्ध’, ‘अलकटराज देखा’, ‘दहलीज पर न्याय’ आदि कहानियों में देखी जा सकती है। समय की ज्वलंत समस्याओं का परीक्षण करती ये कहानियाँ मानवीय करुणा और जिजीविषा को बचाकर मनुष्य की संवेदना को बचाए रखने की कोशिशें हैं। यही इनकी लोकप्रियता का कारण भी है।
Kali Barf
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
मैं एक दिन आत्मीयता और मानवीय सरोकारों से पूरमपूर कहानी ‘पोशनूल की वापसी’ लिखती हूँ और दूसरे दिन आतंक, हत्या, अविश्वास और दरिंदगी से अँटी ‘काली बर्फ’। जीवन की विविधवर्णी सच्चाइयों में वहाँ कहीं आतंक के दौर में फँसे निर्दोष जनों की पीड़ा के कारण छिपे होते हैं, जो शरणदाता होते हुए पुरखों के प्यार पगे आँगनों से निष्कासित होकर शरणागत की मजबूरियाँ ढोते हैं। जहाँ हिकारत, अभाव और छोटे-छोटे स्वार्थ उसे मानवीय गरिमा से वंचित कर देते हैं, वहीं ‘शरणागत दीनार्त’ जैसी कथा जन्म लेती है। अनुभव के वृत्त कभी उपभोक्तावादी संस्कृति में वस्तु बनने की नियति से जूझती ‘पायथन’ जैसी कथाएँ पैदा करते हैं, कभी संवेदनहीन होते समाज में असहाय होते वृद्धों की नियति ‘वनवास’ कथा लिखने का कारण बन जाती है। समाज के छद्म, दोहरे मानदंड और पुरुष-वर्चस्व की धौंसियाती स्थितियाँ ‘शेष दिन’, ‘विदागीत’, ‘गलत गणित’, ‘नदी का काम बहना है’, ‘रानी भाभी’, ‘पृष्ठभूमि’ आदि कहानियों में विश्लेषित होती हैं, जहाँ स्त्रियाँ यथास्थिति के विरोध में खड़ी जीवन को अपनी शर्तों पर जीने की हिम्मत जुटा लेती हैं। राजनीतिक मूल्यहीनता, आतंकवाद, सामाजिक-आर्थिक वैषम्य से उत्पन्न मानवीय यंत्रणा के बहुविध कारणों की पड़ताल करती ये कहानियाँ बेहतर जीवन के लिए सार्थक बदलाव एवं आत्मसमीक्षा के लिए प्रेरित करती हैं और मूल्यों के पुनर्परीक्षण के लिए भी।
Elan Gali Zinda Hai
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
कहा गया है कि अगर पृथ्वी पर कहीं स्वर्ग है तो वह काश्मीर ही है और ‘ऐलान गली ज़िन्दा है’ उपन्यास इसी स्वर्ग के हाशिये पर दरिद्रता, अज्ञान और अभावों में पल रहे लोगों की संस्कृति और जीवन-संघर्षों को बहुत अन्तरंग विवरणों के साथ उजागर करता है। जहाँ आज धर्म, जाति और भाषा के नाम पर आदमी-आदमी के बीच दीवारें खड़ी की जा रही हों, वहाँ ऐलान गली के अनवर मियाँ, दयाराम मास्टर, संसारचन्द आदि लोग हिन्दू-मुस्लिम साम्प्रदायिक सौहार्द के प्रतीक बनकर उभरते हैं। दूसरी ओर बेरोज़गारी के अन्धकार में पल रही युवा पीढ़ी है, जो रोज़गार की तलाश में बड़े शहरों की ओर दौड़ रही है। अवतारा ऐसी ही युवा पीढ़ी का प्रतिनिधि चरित्र है, जिसे आजीविका के लिए मुम्बई जैसे महानगर में जाना पड़ता है। महानगरीय सुविधाओं और चकाचौंध के बीच वह ख़ुद को अजनबी और अस्तित्वहीन महसूस करता है, उसके ज़ेहन में ऐलान गली प्यार के समुद्र की तरह पछाड़ें मारती है।
ऐलान गली के निवासियों के आपसी सम्बन्धों के विविध आयामों को इस उपन्यास में इतने विस्तार और सूक्ष्मता से चित्रित किया गया है कि एक समूचे समाज का रूप उभरकर सामने आता है। वस्तुतः अपने तमाम पिछड़ेपन के बावजूद ऐलान गली वहाँ के प्रवासियों और निवासियों के दिल-दिमाग़ में उसी तरह ज़िन्दा है, जिस तरह फूलों में सुगन्ध।
Jahan-Jahan Kadam Pade
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
वर्षों से निलम्बित साहस को बटोरकर, अपने सुरक्षित दैनिक व्यापार के दुष्चक्र को तोड़कर जब हम यात्राओं पर निकलते हैं तो वह सिर्फ बाहर की यात्रा नहीं होती, भीतर की भी होती है; अपने भीतर, अपने आपको नया करने की यात्रा। असीम तक फैले इस विराट संसार से एकमेक होकर स्वयं को एक नवीन रूप में देखने-जानने की यात्रा।
‘जहाँ-जहाँ क़दम पड़े’ पुस्तक में संकलित, वरिष्ठ कथाकार चन्द्रकान्ता के यात्रा-वृत्त इसी अहसास के साथ की गई यात्राओं का विवरण देते हैं। यात्राएँ जिनका आरम्भ उत्सुकता से हुआ, और जो पूर्ण हुईं इस बोध के साथ कि ‘छोटी-छोटी यात्राएँ कभी-कभार हमारी चेतना में दबे अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर’ एक आभा के साथ हमारे सम्मुख रख देती हैं।
अमेरिका, सिंगापुर, डिज्नीलैंड, सी वर्ल्ड, योसिमिटी नेशनल पार्क, पशुपतिनाथ धाम, जगन्नाथ धाम और उनकी अपनी वादी श्रीनगर, कश्मीर के अलावा इस पुस्तक में अलग-अलग संस्कृतियों के बीच सामंजस्य की कोशिश करते अमेरिकावासी भारतीयों की कथा भी हमारा ध्यान खींचती है।
इन यात्राओं से प्राप्त अपने अनुभव के आधार पर चन्द्रकान्ता सही ही कहती हैं कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपने देखे-समझे को जीवन्ततापूर्वक अंकित करना भी एक तरह से इतिहास ही लिखना है, एक ‘जेनुइन इतिहास’, जो उन्होंने इन यात्रा-संस्मरणों में सम्भव किया भी है।
Apne Apne Konark
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
अपने-अपने कोणार्क यानी कश्मीर से ओडिशा का सफ़र। कश्मीर की सरसब्ज़ वादी में जन्मी और पली-बढ़ी चन्द्रकान्ता को भारत के अनेक प्रान्तों में रहने-बसने का मौक़ा मिला। लेकिन ओडिशा में बिताए गए छह वर्ष उनकी सर्जनात्मकता के लिए अमूल्य बन गए। उन्होंने वहाँ की जीवन-शैली, लोक-रंगों और परम्पराओं की महक महसूस की है, जिसका जीवन्त प्रमाण है ‘अपने-अपने कोणार्क’।
ओडिशा की संस्कृति धरोहर—पुरी और कोणार्क, जीवन के दो पहलू; सम्पूर्ण जीवन का फ़लसफ़ा यहाँ मौजूद है, जिसे लेखिका ने ऐतिहासिक एवं भौगोलिक परिदृश्य के साथ वर्तमान की सच्चाइयों से जोड़कर देखा है। उपन्यास की नायिका कुनी के माध्यम से उन्होंने आम ओड़िया जन को उसके विगत और वर्तमान के साथ प्रस्तुत किया है। 'मोर गौरव जगन्नाथ' में विश्वास करता आम ओड़िया जन अपने परम्परागत आलोक से मुग्ध, रक्षणशील तथा संस्कारवान भी है और हम सबकी तरह अन्धविश्वासी और रूढ़ मानसिकता से ग्रस्त भी। कुनी इसी रक्षणशील परिवार की बड़ी बेटी है, हज़ारहा दायित्वों की साँकलों में क़ैद, गोकि वह उन्हें साँकलें समझती नहीं। वह अपनी लीक आप बनाती, वक्त की सच्चाइयों के रू-ब-रू होते अपने भीतर को जानने और पाने की कोशिश करती है। ओडिशा की पृष्ठभूमि में वहाँ के इन्द्रधनुषी रंगों को समेटे कुनी की यह कहानी सच की तलाश है।
Samay-Ashva Belagam
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
कश्मीरी पंडितों के विस्थापन की पृष्ठभूमि में यह उपन्यास अपनी सांस्कृतिक जड़ों से विच्छिन्न मनों की पीड़ा तथा ग्लोबलाइजेशन से बौराए हमारे मौजूदा वक़्त की कथा है। एक तरफ़ लोग कहीं मजबूरन तो कहीं नए दौर के प्रवाह में अपनी जड़ों से उखड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ़ जीना एक वैश्विक स्पर्धा होता जा रहा है।
कश्मीर से जान बचाकर निकला एक पंडित परिवार अपने जैसे अनेक लोगों के साथ राजधानी दिल्ली में आकर नए सिरे से जीवन शुरू करता है। धीरे-धीरे उनके पैर नई ज़मीन पर अपनी जगह भी बनाने लगते हैं लेकिन यह अहसास कि अगर हम अपने ही देश में शरणार्थी हैं तो फिर दुनिया में कहीं भी रहें, क्या फ़र्क़ पड़ता है; भावी पीढ़ी के लिए निर्णायक बन जाता है।
कश्मीरी संस्कृति और मूल्यों में रसे-पगे माता-पिता का प्रशिक्षण परिवार को बिखरने तो नहीं देता लेकिन अपने घर-ज़मीन से दूर, महानगरों के परायेपन में सम्बन्धों को उस तरह जीना भी सम्भव नहीं जैसे अपनी भूमि पर अपनी संस्कृति, अपने माहौल के बीच हो सकता था।
वरिष्ठ कथाकार चन्द्रकान्ता अपने इस नए उपन्यास में कश्मीर से विस्थापित परिवार की कहानी के माध्यम से जैसे वर्तमान का पूरा चित्र ही खींच देती हैं। बुज़ुर्गों का अकेलापन, नई पीढ़ी के भटकाव, सतत एक होड़ में डूबे युवाओं का तनाव, बिखरता दाम्पत्य, पश्चिमी संस्कृति और तकनीक के दबाव, विश्व के अलग-अलग हिस्सों में हो रहा विस्थापन, सार्वजनिक स्पेस में स्त्रियों पर होनेवाले हमले और वह सब जो इस दौर को एक शान्त धारा नहीं, भीषण भँवर का रूप देता है; इन सबको लेकर एक गम्भीर चेतावनी यहाँ मौजूद है।
उपन्यास के मुख्य पात्र सुरेन्द्रनाथ का यह कथन कि 'यह समय बूढ़ों का नहीं है' जैसे इस पूरे परिदृश्य पर एक सम्पूर्ण टिप्पणी है। अर्थात धीरता, गम्भीरता, ठहराव, गहराई और प्रकृति के हमक़दम चलने का यह समय नहीं है। देश से लेकर विदेश तक बेलगाम बहती एक गति है जिसके बने रहने के लिए हर किसी की साँसें उखड़ी जा रही हैं। चन्द्रकान्ता की सधी हुई क़लम एक-एक पंक्ति में वैश्विक विडम्बना की एक-एक परत खोलती है।
Krishnakali
- Author Name:
Shivani
- Book Type:

- Description:
पाठक किसी पात्र से एकत्व स्थापित कर लेता है; जब उसका अपमान उसकी वेदना बन जाता है, तब ही लेखनी की सार्थकता को हम मान्यता दे पाते हैं। जब ‘कृष्णकली’ लिख रही थी तब लेखनी को विशेष परिश्रम नहीं करना पड़ा, सब कुछ स्वयं ही सहज बनता चला गया था। जहाँ क़लम हाथ में लेती, उस विस्तृत मोहक व्यक्तित्व को, स्मृति बड़े अधिकारपूर्ण लाड़-दुलार से खींच, सम्मुख लाकर खड़ा कर देती, जिसके विचित्र जीवन के रॉ-मैटीरियल से मैंने वह भव्य प्रतिमा गढ़ी थी। ओरछा की मुनीरजान के ही ठसकेदार व्यक्तित्व को सामान्य उलट-पुलटकर मैंने पन्ना की काया गढ़ी थी। जब लिख रही थी तो बार-बार उनके मांसल मधुर कंठ की गूँज कानों में गूँज उठती। वही विस्तृत मधुर गूँज, उनके नवीन व्यक्तित्व के साथ, ‘कृष्णकली’ में उतर आई। —शिवा
Do Khirkiyan
- Author Name:
Amrita Preetam +2
- Book Type:

- Description:
‘दो खिड़कियाँ’ में पंजाबी की सुप्रसिद्ध लेखिका अमृता प्रीतम की मर्मस्पर्शी रचनाएँ संग्रहीत हैं। इनमें सात कहानियाँ, एक लघु उपन्यास और सबसे अन्त में एक ऐसा प्रयोग है जिसमें दुनिया के नौ उपन्यासों में से नौ पात्र चुनकर उनकी मनोदशा को समझने की कोशिश की गई है—हर पात्र की आत्मा में पैठकर। ‘दो खिड़कियाँ’ जिसके आधार पर इस संग्रह का नामकरण हुआ है, दुनिया के निज़ाम पर भयानक व्यंग्य करती हुई कहानी है। इसकी नायिका के शब्द उसके कमरे की सामनेवाली खिड़की में से निकलकर बाहर सड़क पर चले गए हैं और अर्थ पिछली खिड़की में से निकलकर जंगल में खो गए हैं। छह अन्य कहानियों में स्त्री और स्त्री के रिश्ते का विश्लेषण है। इन छहों कहानियों का शीर्षक एक ही है—‘दो औरतें’। ‘पक्की हवेली’ शीर्षक लघु उपन्यास में भूत-प्रेतों वाली एक हवेली का दर्द एक छोटी-सी बच्ची की ज़बानी है जो मनुष्य के मन की गुत्थियों को समझने में असमर्थ है पर डरती-काँपती और रोती उसको समझने का प्रयत्न करती है। संग्रह की सारी रचनाएँ अमृता प्रीतम की स्वभावगत भावुकता से ओत-प्रोत हैं और मन पर बड़ा कवित्वमय प्रभाव छोड़ती हैं।
Jwaar
- Author Name:
Madhu Bhaduri
- Book Type:

- Description:
नारी-स्वातंत्र्य के लिए प्रतिभूत इस युग में सुपरिचित लेखिका मधु भादुड़ी का यह उपन्यास कुछ बुनियादी सवाल उठाता है। नारी विवाहित हो या अविवाहित—आर्थिक स्वावलम्बन उसके लिए बहुत ज़रूरी है, लेकिन आर्थिक रूप से स्वावलम्बी स्त्रियाँ भी क्या इस समाज में अपने आत्मसम्मान, स्वाभिमान और स्वातंत्र्य को बनाए रख पा रही हैं? सुखवादी सपनों में खोई रहनेवाली पढ़ी-लिखी निशा अगर एक ‘सम्पन्न घर की बहू’ बनने के अपने और अपने माता-पिता के व्यामोह का शिकार हो जाती है, और अनपढ़ लाजो अगर कठोर श्रम के बावजूद अपने शराबी पति की ‘सेवा का धर्म’ निबाहे जा रही है, तो यह मसला शिक्षा और श्रम से ही हल होनेवाला नहीं है। इसके लिए तो वस्तुत: उसे अपने गले-सड़े संस्कारों से लड़ना होगा। यही कारण है कि लेखिका ने सुषमा जैसे नारी-चरित्र की रचना की है। सुषमा इस उपन्यास की केन्द्रीय पात्र है, जिसके आत्मसंघर्ष में सम्भवत: नारी-स्वातंत्र्य के सही मायने निहित हैं, क्योंकि इसे वह स्त्री के बाह्य व्यक्तित्व और व्यवहार तक ही सीमित नहीं मानती, बल्कि यह चीज़ उसकी अस्मिता और समूची मानसिक संरचना के साथ जुड़ी हुई है।
The Orioles are Back and Other Stories Book in English- Chandrakanta
- Author Name:
Chandrakanta
- Book Type:

- Description:
Awating description for this book
Pariyon Ke Beech
- Author Name:
Ruth Vanita
- Book Type:

- Description:
परियों के बीच उपन्यास एक ऐसे कोमल अहसास और रिश्ते का संसार हमारे सामने उजागर करता है जिसका वजूद हमेशा से रहा है, लेकन ज़्यादातर वक़्तों में यह अनकहा और पोशीदा रहा; कई बार उसे अपनी स्वाभाविक मानवीयता की अनदेखी करनेवाले सवालों का सामना भी करना पड़ा है। दो औरतों, मशहूर तवायफ़ चपला बाई और शायरा नफ़ीस बाई के आपसी प्यार की इस कहानी में उनके कुछ मर्द दोस्त भी हैं जो उनकी मदद करते हैं। इन दोस्तों में कुछ नामचीन शायर हैं तो ख़ुद एक मर्द से प्यार करने वाला शरद भी। उपन्यास में रंगीन, इंशा और जुरअत जैसे उर्दू के कुछ असल शायर क़िरदार के रूप में आए हैं। उनकी शायरी के साथ-साथ उस दौर की कुछेक ग़ज़लों-नज़्मों और गानों का इस्तेमाल उपन्यास की ख़ूबसूरती और असर को बढ़ा देता है। वस्तुत: यह उपन्यास पूर्व-औपनिवेशिक काल के उस दौर को जीवन्त करता है जब समलैंगिक प्यार को अपेक्षाकृत सहजता से स्वीकार किया जाता था। लेकिन 1857 के बाद के दौर में उसको सवालिया बना दिया गया।
Ek Zameen Apni
- Author Name:
Chitra Mudgal
- Book Type:

- Description:
विज्ञापन की चकाचौंध दुनिया में जितना हिस्सा पूँजी का है, शायद उससे कम हिस्सेदारी स्त्री की नहीं है। इस नए सत्ता-प्रतिष्ठान में स्त्री अपनी देह और प्रकृति के माध्यम से बाज़ार के सन्देश को ही उपभोक्ता तक नहीं पहुँचाती, बल्कि इस उद्योग में पर्दे के पीछे एक बड़ी ‘वर्क फ़ोर्स’ भी स्त्रिायों से ही बनती है। ‘एक ज़मीन अपनी’ विज्ञापन की उस दुनिया की कहानी भी है जहाँ समाज की इच्छाओं को पैना करने के औज़ार तैयार किए जाते हैं और स्त्री के उस संघर्ष की भी जो वह इस दुनिया में अपनी रचनात्मक क्षमता की पहचान अर्जित करने और सिर्फ़ देह-भर न रहने के लिए करती है। आठवें दशक की बहुचर्चित कथाकार चित्रा मुद्गल ने इस उपन्यास में उसके इस संघर्ष को निष्पक्षता के साथ उकेरते हुए इस बात का भी पूरा ध्यान रखा है कि वे सवाल भी अछूते न रह जाएँ जो विज्ञापन-जगत की अपेक्षाकृत नई संघर्ष-भूमि में नारी-स्वातंत्र्य को लेकर उठते हैं, उठ सकते हैं।
Dalit Veerangnayen Evam Mukti Ki Chah
- Author Name:
Badri Narayan +1
- Book Type:

- Description:
भारत में सांस्कृतिक अभ्युदय की गवेषणा करनेवाली यह पुस्तक उत्तर भारत में दलित-राजनीति के प्रस्फुटन का अवलोकन करती है और बताती है कि 1857 की विद्रोही दलित वीरांगनाएँ, उत्तर प्रदेश में दलित-स्वाभिमान की प्रतीक कैसे बनीं और उनका उपयोग बहुजन समाजवादी पार्टी की नेत्री मायावती की छवि निखारने के लिए कैसे किया गया। यह पुस्तक रेखांकित करती है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में दलितों की भूमिका से सम्बन्धित मिथकों और स्मृतियों का उपयोग इधर राजनीतिक गोलबन्दी के लिए किस तरह किया जा रहा है। इसमें वे कहानियाँ भी निहित हैं जो दलितों के बीच तृणमूल स्तर पर राजनीतिक जागरूकता फैलाने के लिए कही जा रही हैं। व्यपार-शोध और अन्वेषण पर आधारित इस पुस्तक में इस बात का भी उल्लेख है कि किस तरह लोगों के बीच प्रचलित क़िस्सों को अपने मनमुताबिक़ मौखिक रूप से या पम्फ़लेट के रूप में फिर से रखा जा रहा है और किस प्रकार अपने राजनीतिक हित-साधन के लिए प्रत्येक जाति के देवताओं, वीरों एवं अन्य सांस्कृतिक उपादानों को दिखाकर प्रतिमाओं, कैलेंडरों, पोस्टरों और स्मारकों के रूप में तब्दील कर दिया गया है। इस पुस्तक में यह भी दर्शाया गया है कि कैसे बी.एस.पी. अपना जनाधार बढ़ाने के लिए ऐतिहासिक सामग्रियों का निर्माण एवं पुनर्निर्माण करती है। यह पुस्तक ज़मीनी सच्चाइयों एवं परोक्ष जानकारियों पर आधारित है, जिसमें लेखक राजनीतिक गोलबन्दी के लिए ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संसाधनों के इस्तेमाल का विरोध करता है।
Main Janak Nandini
- Author Name:
Asha Prabhat
- Book Type:

- Description:
भारतीय मानस का अर्थ केवल पढ़े-लिखे शिक्षितों का मानस नहीं है, उसका मूल अभिप्राय है—लोक मानस। इस लोक मानस की भारतीयता का लक्षण है—काल के आदिहीन, अन्तहीन प्रवाह की भावना...। जनमानस में आज तक सीता का मूक (मौन) स्वरूप ही विद्यमान है। सौम्यस्वरूपा आज्ञाकारी पुत्री का, जो बिना तर्क-वितर्क या प्रतिरोध किए पिता का प्रण पूर्ण करने हेतु या पुत्र-धर्म के निर्वाह हेतु उस किसी भी पुरुष के गले में वरमाला डाल देती, जो शिव के विशाल पिनाक पर प्रत्यंचा का सन्धान कर देता। उस समर्पिता, सहधर्मिणी या सह-गामिनी पत्नी का जो सहजभाव से सारा राज्य सुख तथा वैभव त्यागकर पति राम की अनुगामिनी बनकर उनके संग चल देती है चुनौती-भरे वन्य जीवन के दु:खों को अपनाने। सीता के चरित पर अनेक ग्रन्थ लिखे गए हैं, अधिकांश में उन्हें जगजननी, शक्तिस्वरूपा या देवी मानकर पूजनीया बनाया गया। किन्तु मानवी मानकर उनके मर्म के अन्तस्थल तक पहुँचने...उनके मर्म की थाह लेने की चेष्टा न के बराबर की गई। उनके प्रति किए गए राम के सारे निर्णय को उनकी मौन स्वीकृति मानकर राम की महानता, मर्यादा तथा उत्तमता को और महिमामंडित किया गया। क्या वास्तव में ऐसा था? क्या सीता के पास अपने प्रति किए जा रहे अविचार के प्रति प्रतिरोध के स्वर का अभाव था? अपने जीवन-जनित अभीष्ट अपने कर्मों में निहित कर जीती सीता क्या मात्र पाषाण प्रतिमा थीं? क्या उनका अन्तस संवेदनशून्य था या उन्हें हर्ष-विषाद तथा शोक-सन्ताप नहीं व्याप्तता था? और क्या हर स्थिति-परिस्थिति को उन्होंने सहज स्वीकार लिया था, शिरोधार्य कर लिया था बिना प्रतिवाद किए? यह उपन्यास ऐसे ही अनेक प्रश्नों का सन्धान है।
Aamne-Saamne
- Author Name:
Namvar Singh +2
- Book Type:

- Description:
नामवर सिंह अब हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनका बोला-बताया अब भी ऐसा बहुत कुछ है जो सामने आना बाकी है। लम्बे समय तक उन्होंने व्यवस्थित ढंग से कुछ नहीं लिखा था; व्याख्यानों और वक्तव्यों के रूप में ही उन्होंने आलोचना के नए-नए पैमाने तोड़े और बनाए। युवाओं, वरिष्ठों, छात्रों-पत्रकारों और समकालीन रचनाकारों को दिए साक्षात्कारों में भी उन्होंने सदैव एक उत्तरदायी आलेचकीय चेतना को अभिव्यक्ति दी। उनकी आश्चर्यजनक स्मृति, वैचारिक स्पष्टता और आस्वादपरक समीक्षा के चलते व्याख्यानों की तरह उनके साक्षात्कार भी सदैव चर्चित रहे। इस पुस्तक में उनके ऐसे साक्षात्कारों को संकलित किया गया है जो अब तक किसी और पुस्तक में नहीं आए थे। कई वरिष्ठ और कनिष्ठ रचनाकारों और सम्पादकों के साथ हुए ये वार्तालाप उनकी आलोचना-दृष्टि, समकालीन रचनात्मकता पर उनके विचारों और सरोकारों को रेखांकित करते हैं। इनमें से कुछ साक्षात्कार इसलिए और भी दिलचस्प है कि इनमें उन्होंने किसी एक ही रचनाकार या कृति पर केन्द्रित प्रश्नों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। मसलन स्वयं प्रकाश, त्रिलोचन, काशीनाथ सिंह का ‘काशी का अस्सी’ आदि पर केन्द्रित बातचीत। साक्षात्कारकर्ताओं में भी अलग-अलग पीढ़ियों के लोग हैं; जिन्होंने अपने-अपने ढंग से उनसे अपनी जिज्ञासाओं पर विचार-विनिमय किया है।
Bhoole-Bisre Chitra
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
- Book Type:

- Description:
एक महान् कृति, भारतीय समाज और परिवार के विकास की विविध दिशाओं और रूपों का एक विराट एवं प्रभावोत्पादक चित्र। -डॉ. एस.एन. गणेशन निकट अतीत के चित्रों का एक एलबम—वह अतीत जिसे वर्तमान पीढ़ी को न भूलना चाहिए और न जिससे विमुख ही होना चाहिए, क्योंकि उसी में हमारे नए जीवन का बीजारोपण हुआ था। परिवार के चित्रों के एलबम के विपरीत इस एलबम के चित्र धुँधले नहीं पड़े हैं, क्योंकि कैमरा एक ही रहा है। लैंसों का प्रयोग इस कुशलता से किया गया है कि चित्र बिल्कुल साफ़ और हूबहू अंकित हुए हैं, दूरी ने उन्हें धुँधला नहीं किया है, भावातिरेक या दुःख ने विकृत नहीं किया है। —जगदीशचन्द्र माथुर
Dhara Ankurai
- Author Name:
Asghar Wajahat
- Book Type:

- Description:
प्रतिष्ठित कथाकार असगर वजाहत की उपन्यास-त्रयी का अन्तिम भाग 'धरा अँकुराई' एक बहुआयामी कथानक को जीवन की सच्चाइयों तक पहुँचाता है। ‘कैसी आगी लगाई’ और ‘बरखा रचाई’ शीर्षक से त्रयी के दो भाग पूर्व में प्रकाशित होकर पर्याप्त प्रशंसा प्राप्त कर चुके हैं। अनेक विवरणों, वृत्तान्तों, परिस्थितियों और अन्त:संघर्षों से गुज़रती यह कथा-यात्रा ‘जीवन के अर्थ’ का आईना बन जाती है। एक दीगर प्रसंग में आया वाक्य है, ‘...यह यात्रा संसार के हर आदमी को जीवन में एक बार तो करनी ही चाहिए।’ यह अन्त:यात्रा है। इससे व्यक्ति जहाँ पहुँचता है, वहाँ एक प्रश्न गूँज रहा है कि आख़िर इस जीवन की सार्थकता व प्रासंगिकता क्या है? उपन्यास-त्रयी के तीन प्रमुख पात्रों में से एक सैयद साजिद अली, जिन्होंने पत्रकारिता की कामयाब ज़िन्दगी जी है, महसूस करते हैं कि उनके भीतर एक ख़ालीपन फैलता जा रहा है। लगता है कि अब तक जिया सब बेमक़सद रहा। सैयद साजिद अली ‘ज़िन्दगी का अर्थ’ समझने के लिए उसी छोटी-सी जगह लौटते हैं, जहाँ से निकलकर वे जाने कहाँ-कहाँ गए थे। उपन्यासकार ने छोटी-छोटी घटनाओं के ज़रिए व्यक्ति और समाज की कशमकश को शब्द दिए हैं। प्रवाहपूर्ण भाषा ने पठनीयता में इज़ाफ़ा किया है। मौक़े-ब-मौक़े उपन्यास में वर्तमान की समीक्षा भी है, ‘‘जनता का पैसा किसी का पैसा नहीं है। यह माले-मुफ़्त है जो हमारे देश में बेदर्दी से बहाया जाता है और इसकी बारिश में अफ़सर, नेता और ठेकेदार नहाते हैं। हमने लोकतंत्र के साथ-साथ ‘विकास’ का भी एक विरला स्वरूप विकसित किया है जो कम ही देशों में देखने को मिलेगा। एक पठनीय व संग्रहणीय उपन्यास।
Rekha
- Author Name:
Bhagwaticharan Verma
- Book Type:

- Description:
व्यक्ति के गुह्यतम मनोवैज्ञानिक चरित्र-चित्रण के लिए सिद्धहस्त प्रख्यात लेखक भगवतीचरण वर्मा ने इस उपन्यास में शरीर की भूख से पीड़ित एक आधुनिक, लेकिन एक ऐसी असहाय नारी की करुण कहानी कही है जो अपने अन्तर के संघर्षों में दुनिया के सहारे सब गँवा बैठी। रेखा ने श्रद्धातिरेक से अपनी उम्र से कहीं बड़े उस व्यक्ति से विवाह कर लिया जिसे वह अपनी आत्मा तो समर्पित कर सकी, लेकिन जिसके प्रति उसका शरीर निष्ठावान नहीं रह सका। शरीर के सतरंगी नागपाश और आत्मा के उत्तरदायी संयम के बीच हिलोरें खाती हुई रेखा एक दुर्घटना की तरह है, जिसके लिए एक ओर यदि उसका भावुक मन ज़िम्मेदार है, तो दूसरी और पुरुष की वह अक्षम्य 'कमज़ोरी' भी जिसे समाज 'स्वाभाविक' कहकर बचना चाहता है। वस्तुतः रेखा जैसे युवती के बहाने आधुनिक भारतीय नारी की यह दारुण कथा पाठकों के मन को गहरे तक झकझोर जाती है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book