Anna Kranti
Author:
AshutoshPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 240
₹
300
Unavailable
"अगस्त 2011 में मजबूत लोकपाल विधेयक की माँग को लेकर अन्ना हजारे का आमरण अनशन स्वतंत्र भारत के इतिहास की ऐतिहासिक घटना थी। कई घोटालों के उजागर होने के तुरंत बाद हुआ यह आंदोलन जिस तेजी से मध्यम वर्ग के बीच फैला उसने भारतीय जनमानस को आंदोलित कर दिया। उसमें एक आशा का संचार किया कि भारत से भ्रष्टाचार का खात्मा हो सकता है।
मशहूर पत्रकार आशुतोष ने भारत को बदल देनेवाले इन 13 दिनों की कहानी बुनी है। उन्होंने सारी घटनाओं की सीधी जानकारी इसमें दी है, क्योंकि वे स्वयं भी अनशन स्थल, दिल्ली के रामलीला मैदान में उपस्थित थे और दोनों पक्षों—केंद्र की यू.पी.ए. सरकार तथा टीम अन्ना के साथ सीधे संपर्क में थे। अन्ना हजारे के आंदोलन की मानसिकता को समझाने के लिए आशुतोष ने जयप्रकाश नारायण के आंदोलन और महात्मा गांधी के सत्याग्रह को याद करते हुए स्वतंत्रता पूर्व के भारत की राजनीति की भी पड़ताल की है।
भारत से भ्रष्टाचार के खिलाफ आम आदमी के आक्रोश के क्रांतिकारी 13 दिनों की सजीव दास्ताँ है यह पुस्तक।
"
ISBN: 9789350482025
Pages: 240
Avg Reading Time: 8 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Netaji Subhash Chitramaya Jeevani
- Author Name:
Rajendra Patoriya
- Book Type:

- Description: नेताजी सुभाषचंद्र बोस क्रांतिकारी थे, उनका ध्येय था भारत की स्वतंत्रता। वे एक राजनेता, कूटनीतिज्ञ के साथ-साथ दूरदर्शी एवं स्पष्टवक्ता थे। उन्होंने किसी भी कीमत पर आजादी के लिए समझौता नहीं किया। उनका एक ही लक्ष्य था—अंग्रेजों से भारत की मुक्ति। नेताजी अपने चुंबकीय व्यक्तित्व के कारण भारत और बाहर आकर्षण का केंद्र रहे। वे अपने समय के विश्वमान्य नेता थे। स्वतंत्रता के पूर्व विदेशी शासक घबराते रहे नेताजी सुभाष बाबू से तो स्वतंत्रता के उपरांत देशी सत्ताधीन घबराते रहे जनमानस पर उनके व्यक्तित्व और कर्तृत्व के अमिट प्रभाव से। यह बड़े ही आश्चर्य की बात है कि आजादी के बाद नेताजी के बारे में, उनके कार्यों के विषय में सरकारें कभी भी सही-सही मूल्यांकन नहीं कर पाईं। विद्वानों का मत है कि सुभाषचंद्र बोस और आजाद हिंद सेना के संपूर्ण विषय को विस्मृति के गर्त में ढकेलने के लिए सुनियोजित षड्यंत्र और कुचक्र रचे गए। नेताजी के जीवित होने के बारे में भी जनता असमंजस में रही। लेकिन इन तमाम कुत्सित प्रयासों के बाद भी जन-जन के मन-मस्तिष्क में बसे हैं, आजादी के इतने वर्षों बाद भी जनता उनको भूल नहीं पाई है। जन-जन के कंठहार और साहस व शौर्य की प्रतिमूर्ति नेताजी सुभाषचंद्र बोस की प्रेरक जीवन-कथा व दुर्लभ चित्रावली।
Vishwa Itihas Ki Bhumika
- Author Name:
Ramsharan Sharma
- Book Type:

-
Description:
पृथ्वी की आयु चार अरब साठ करोड़ वर्ष से ज़्यादा मानी गई है और पृथ्वी तल पर जीवन की उत्पत्ति कोई तीन अरब पचास करोड़ वर्ष पहले। 15-20 लाख वर्ष पहले पूर्वी और दक्षिणी अफ्रीका में प्रथम मानव कहे जानेवाले ‘होमो हैविलिस’ का आविर्भाव हुआ तथा ‘होमो सेपीयन्स’ का दक्षिणी अफ्रीका में जन्म 1,15,000 वर्ष पूर्व हुआ। आधुनिक मनुष्य का उद्भव इसी से माना जाता है, जिसका इतिहास पुरापाषाण युग (6 लाख वर्ष ई.पू. से 10 हजार ई.पू.) से आरम्भ होता है, और हम तक आता है।
प्रख्यात इतिहासकार रामशरण शर्मा और कृष्णकुमार मंडल की यह पुस्तक हमें इस पूरी इतिहास-यात्रा का संक्षिप्त, लेकिन सारगर्भित और सप्रमाण ब्यौरा उपलब्ध कराती है। आदिम सभ्यता से लेकर यूरोप के धर्मसुधार के समय तक चरणबद्ध रूप में लिखा गया यह इतिहास सिर्फ़ राजनीतिक घटनाओं तक सीमित नहीं है, इसमें विज्ञान, समाज और दर्शन के क्षेत्र में होनेवाले वैचारिक परिवर्तनों तथा उद्भावनाओं के रास्ते से भी विश्व की प्रगति को समझा गया है।
इतिहास के जिन महत्त्वपूर्ण चरणों का विवरण इस पुस्तक में समाहित है, वे हैं : आदिम सभ्यता, प्राचीन मिस्र की सभ्यता, शहरी सभ्यताओं का उदय, पहली सहस्राब्दी ई.पू. के धर्मसुधार-आन्दोलन, यूनान, रोम और प्राचीन भारत की सभ्यता, इस्लाम का उदय और प्रसार, सामन्त प्रथा और मध्यकालीन यूरोप, यूरोप का रेनेसाँ और धर्मसुधार।
पुस्तक की विशेषता है रोचक उपशीर्षकों के माध्यम से प्रत्येक कालखंड के क्रम-विकास का रेखांकन जिससे इसे न सिर्फ़ पढ़ना रुचिकर हो जाता है, बल्कि सम्बन्धित विषय की जानकारी तक भी सुगमतापूर्वक पहुँचा जा सकता है। इतिहास के जिज्ञासुओं तथा विद्यार्थियों के लिए अत्यन्त उपयोगी पुस्तक।
Cintan Prawah
- Author Name:
Hukumdev Narayan Yadav
- Book Type:

- Description: लोहिया का नाम लेने वाले, समाजवाद की रट लगाने वाले और समता समाज का नारा लगाने वाले, सभी भ्रमित होकर केवल विशेष अवसर को ही अंतिम लक्ष्य मान चुके हैं। द्वेष, जलन, हिंसा, व्यक्तियों की स्वार्थोन्नति और राजनीति पर कब्जा, यही उनके विशेषाधिकार का मूलमंत्र है। यदि इस सिद्धांत के द्वारा जाति विनाश, समान शिक्षा, आर्थिक बराबरी, सत्ता का विकेंद्रीकरण, स्वदेशी, स्वराज्य, ग्रामोन्नति, कृषि को प्राथमिकता, भ्रष्टाचार और भोग का अंत इत्यादि किए जाते तो समता समाज की स्थापना के दर्शन की ओर कदम बढ़ाया गया माना जाता। आर्थिक गैर बराबरी के कारण सवर्ण में अवर्ण और अवर्ण में सवर्ण बन गए हैं। पिछड़ों और दलितों में भी द्विज बन गए हैं। तथा द्विजों में भी पिछड़े और दलित बन गए हैं। आरक्षण की राजनीति करनेवालों का उस दिन अंत होगा, जिस दिन आरक्षण का अंध विरोध बंद हो जाएगा। केवल सरकारी नौकरी में आरक्षण से ही राष्ट्र का कायाकल्प नहीं हो सकता है। उन्हें तो केवल वोट चाहिए, चाहे उसके लिए जाति, भाषा और संप्रदाय के नाम पर भारत की धरती लाल क्यों न हो जाए। राष्ट्रीयता, समता, दृढता, उदारता, निष्पक्षता, समरसता, ममता और आध्यात्मिकता के दर्शन के आधार पर बनाया गया सिद्धांत ही मानव के लिए कल्याणकारी हो सकता है। आज उसी तरह के नेतृत्व की आवश्यकता है। क्या सभी इस पर सोचेंगे? —इसी पुस्तक से वरिष्ठ राजनेता श्री हुक्मदेव नारायण यादव के प्रखर राष्ट्रवादी चिंतन-प्रवाह के रूप में बाहर आए ये मोती-स्वरूप विचार एक सजग-जागरूक समाज बनाने के इच्छुक हर भारतीय के लिए पठनीय पुस्तक।
Agnipath Se Nyaypath
- Author Name:
Deokinandan Gautam
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक उस बालक की कहानी है, जिसने जीवन में संघर्ष को उत्सव और उत्कर्ष का सोपान बनाने का प्रयत्न किया। बुंदेलखंड के पिछड़े क्षेत्र में साधारण किसान परिवार में जनमे इस बालक ने अभावों में अपनी भाव-भंगिमा को ईश्वर के सहारे सार्थकता से युक्त रखा। श्रीमद्भगवद्गीता, उसमें दिए गए ध्यान के प्रयोग उसके पाथेय रहे। पढ़-लिखकर पुलिस सेवा को एक मिशन के तौर पर लिया और यथाशक्त निर्वाह किया। थपेड़े खाए, पर न्यायपथ पर डटा रहा। भगवान श्रीकृष्ण की कृपा से पुलिस विभाग के शीर्षस्थ पद से कुछ बड़े परिवर्तनों का वाहक बनने का निमित्त बना। जीवन में अनेक महान् विभूतियों के दर्शनों का सौभाग्य उसे मिला। पुस्तक के आकार की मर्यादा का ध्यान रखते हुए लेखक ने विभिन्न प्रकरण संक्षेप में दिए गए हैं। अनेक को स्थान नहीं मिल पाया है। बहुत से प्रकरण इसलिए भी छोड़ने पड़े कि उनमें आत्मश्लाघा की बू आने लगती अथवा ऐसे गंभीर ऑपरेशनल मैटर्स एवं विभागीय कमियों का ब्योरा आ जाता जिसका लाभ देश-विरोधी ताकतों को मिल जाता। जीवनमूल्यों की स्थापना करते हुए कर्तव्य के अग्निपयध पर सतत चलकर न्यायपथ की विस्तीर्ण यात्रा है यह पुस्तक
Loktantra Ki Chaukidari
- Author Name:
Steven Levitsky and Daniel Ziblatt
- Rating:
- Book Type:

- Description: लोकतंत्र कैसे ख़त्म होता है? अपने लोकतंत्र को बचाने के लिए हम क्या कर सकते हैं? इतिहास हमें क्या सिखाता है? इक्कीसवीं सदी में लोकतंत्र जितना ख़तरे में है, पहले कभी नहीं रहा। समूचे इतिहास से सबक लेते हुए—चिली में पिनोशे की ख़ूनी सत्ता से लेकर चुपचाप ढहते तुर्की में एर्दुआं की सरकार तक—हार्वर्ड के प्रोफ़ेसर स्टीवेन लेवित्सकी और डेनियल ज़िब्लाट यह समझाते हैं कि लोकतंत्र क्यों नाकाम हो जाते हैं, ट्रम्प जैसे नेता कैसे उसे नष्ट करते हैं और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए हम में से हर एक व्यक्ति क्या कर सकता है। विशेषज्ञों की राय जो भी लोकतंत्र के भविष्य को लेकर चिन्तित है उसे यह सहज, सरल किताब पढ़नी चाहिए। जो चिन्तित नहीं हैं, उन्हें तो ज़रूर पढ़नी चाहिए। दारोन एसेमोगलू ‘व्हाई नेशंस फ़ेल’ के लेखक और 2024 के नोबेल पुरस्कार विजेता लेवित्सकी और ज़िब्लाट ने कितनी कुशलता से यह दलील रखी है कि हम सबको इस देश के रुझानों पर चिन्तित होना चाहिए, अमेरिकी संविधान का ज़बर्दस्त प्रशंसक होने के नाते मेरे लिए यह पढ़ना हताशाजनक था। ‘यह यहाँ नहीं हो सकता’ वाली धारणा लेवित्सकी और ज़िब्लाट के विश्लेषण में नहीं टिकती...क्या शानदार लिखा है। डेनियल डब्ल्यू. ड्रेज़नर ‘वॉशिंगटन पोस्ट’ उत्कृष्ट, विद्वत्तापूर्ण, पठनीय, चिन्ताजनक और सन्तुलित निक कोहेन ‘ऑब्ज़र्वर’
Dattopant Thengadi
- Author Name:
Anirban Ganguly +1
- Book Type:

- Description: The dimension of Dattopant Thengadi, founder of the largest trade union movement in India, that has been brought out in this volume is his role as an activist parliamentarian through his debates in the Rajya Sabha for two terms from 1964 to 1976. What stands out from the extracts of his speeches in Parliament are his meticulous presentation of facts, highly referenced propositions and dignified response to counter viewpoints. His intense intellectualism and his diverse fields of knowledge are manifest in the range of subjects Thengadi handled, each an area of specialisation for an expert. This volume is a lesson for young and elder parliamentarians of today on how to be an efficient, a competent and an elegant parliamentarian. To those interested in post-independence India’s political evolution, this volume provides a window through Thengadi’s political activism in his two terms in Parliament which spanned some of the most momentous developments in India’s political history after independence.
Kakori Train Dakaiti Ki Ansuni Kahani | Hindi Translation of Destination of Kakori 9 August 1925 | Freedom Fighter of India
- Author Name:
Smita Dhruv
- Book Type:

- Description: क्या आपको दस वीरों द्वारा रचित 'काकोरी ट्रेन लूट' याद है? यह घटना 9 अगस्त, 1925 की है। भारत के बलिदानियों द्वारा रचित एक वास्तविक जीवन का नाटक, जिसके इर्द-गिर्द यह कथा लिखी गई है। ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध भारत का असहयोग आंदोलन एक साल के भीतर भारत को स्वतंत्र कराने के वादे के साथ शुरू किया गया था। जब 1922 में इसे अचानक वापस ले लिया गया, तो हजारों युवा स्वतंत्रता सेनानी निराश हो गए। इस धोखे ने बड़ी संख्या में क्रांतिकारियों को जन्म दिया, जिन्होंने भारत में सत्तारूढ़ अंग्रेजों के विरुद्ध अकेले ही अपनी पूरी ताकत से लड़ाई लड़ी। इस दिन दस युवा लड़कों की एक टीम ने लखनऊ की बगल में काकोरी रेलवे स्टेशन के पास भारतीय रेल के खजाने को लूट लिया। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के स्वर्णिम इतिहास की एक घटना और इसके इर्द-गिर्द बुनी गई एक काल्पनिक कहानी। यह पुस्तक युवा, साहसी हुतात्माओं व बलिदानियों की वीरता के उन चमकदार क्षणों को जीवंत करती है, जो आज तक हमारे लिए अज्ञात हैं। हमारे देश के नायकों और उनके परिवारों के जीवन में मानसिक पीड़ा, दुविधा और अस्तित्व के मुद्दों का एक शानदार चित्रण काकोरी के वीरों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
Ek Tha Doctor Ek Tha Sant
- Author Name:
Arundhati Roy
- Book Type:

- Description: वर्तमान भारत में असमानता को समझने और उससे निपटने के लिए, अरुंधति रॉय ज़ोर दे कर कहती हैं कि हमें राजनीतिक विकास और एम.के. गांधी का प्रभाव, दोनों का ही परीक्षण करना होगा। सोचना होगा कि क्यों बी.आर. आंबेडकर द्वारा गांधी की लगभग दैवीय छवि को दी गई प्रबुद्ध चुनौती को भारत के कुलीन वर्ग द्वारा दबा दिया गया। राय के विश्लेषण में, हम देखते हैं कि न्याय के लिए आंबेडकर की लड़ाई, जाति को सुदृढ़ करनेवाली नीतियों के पक्ष में, व्यवस्थित रूप से दरकिनार कर दी गई, जिसका परिणाम है वर्तमान भारतीय राष्ट्र जो आज ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र है, विश्वस्तर पर शक्तिशाली है, लेकिन आज भी जो जाति व्यवस्था में आकंठ डूबा है।
Supreme Court Mein Ramlala
- Author Name:
Pawan Kumar
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Congress-Mukt Bharat
- Author Name:
Amit Bagaria
- Book Type:

- Description: अब 80 महीने से भी अधिक का समय बीत चुका है, जब भारतीय राजनीति की ‘वयोवृद्ध पार्टी’, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 2014 के चुनावों में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी/एनडीए के हाथों करारी हार का सामना करना पड़ा था। पाँच साल बाद 2019 में मोदी ने अपने नेतृत्व में बीजेपी/एनडीए को उससे भी बड़ी जीत दिलाई, भले ही कांग्रेस को इस बार कुछ अधिक सीटें मिलीं। अगस्त 2019 में ‘इंडिया टुडे’ के सर्वे में 57.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कांग्रेस अपने अंत की ओर बढ़ रही है, 71.4 प्रतिशत ने कहा कि भारतीय मतदाताओं ने निर्णायक रूप से वंशवादी राजनीति को खारिज कर दिया है, और मात्र 32.6 प्रतिशत ने कहा कि सिर्फ एक गांधी ही पार्टी को पुनर्जीवित कर सकता है। जनवरी 2020 में कराए गए ऐसे ही सर्वे में 68.2 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कांग्रेस अपने सबसे बड़े नेतृत्व संकट से गुजर रही है। अगस्त 2020 में 55.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि कांग्रेस अपने अंत के करीब है। लेकिन अब तक भी 135 साल पुरानी पार्टी के पुनर्जीवित होने के संकेत नहीं दिखते। 7 अगस्त, 2020 को 23 वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के अध्यक्ष पद समेत विभिन्न संगठनों के चुनाव कराए जाने की माँग के साथ ही नेहरू-गांधी परिवार के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इतने महीने बाद भी पार्टी में नेतृत्व के संकट को दूर करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठता नहीं दिखता। ‘बागियों’ और ‘परिवार के तथाकथित वफादारों’ के बीच की दरार कांग्रेस पार्टी को लगातार डरा रही है।
Dastan Mughal Mahilaon Ki
- Author Name:
Heramb Chaturvedi
- Book Type:

- Description: मध्यकालीन इतिहास के अध्ययन, अध्यापन, शोध से 33 वर्षों के अधिक के जुड़ाव के कारण, इस काल के इतिहास से भली-भाँति वाक़िफ़ हैं अतः, ऐतिहासिक शोध के साथ लिखी गई कुछ कहानियों के माध्यम से चयनित महिला पात्रों की भूमिका के साथ उन्होंने न्याय करने के प्रयास में, इस संकलन की आवश्यकता महसूस की। इसमें प्रसिद्ध मंगोल शासक चंगेज़ ख़ाँ की पुत्र-वधू से प्रारम्भ करके, बाबर की नानी से होते हुए, हमीदा बानो बेगम की दास्ताँ बयाँ करते हुए, हर्रम बेगम की भूमिका को रेखांकित किया गया है जिसके फलस्वरूप हुमायूँ अन्ततोगत्वा भारत में प्रवेश कर पाता है। अन्त में अनारकली की गुत्थी को भी सुलझाने का प्रयास किया गया है।
1965 Bharat-Pak Yuddha Ki Anakahi Kahani
- Author Name:
R.D. Pradhan
- Book Type:

- Description: 1965 भारत-पाक युद्ध की अनकही कहानी 1965 का युद्ध वर्ष 1947 में हुए विभाजन के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच पहला पूर्ण युद्ध था। भारत के तत्कालीन रक्षा मंत्री वाई.बी. चह्वाण ने 22 दिन तक चले इस युद्ध का विवरण स्वयं अपनी डायरी में दर्ज किया था। इस पुस्तक में बताई गई अंदरूनी बातों से पता चलता है— • पाकिस्तानी हमले के समय का पता करने में भारत का खुफिया विभाग बिलकुल विफल रहा। • कैसे और क्यों चह्वाण ने प्रधानमंत्री को सूचित किए बिना ही वायुसेना को हमला करने का आदेश दे दिया। • कैसे एक डिवीजन कमांडर को अभियान से अलग कर दिया गया। • कैसे एक सेना कमांडर ने अपनी ‘रेजीमेंट के महान् गौरव’ के लिए 300 से अधिक लोगों को कुरबान कर दिया। • भारतीय सेना ने लाहौर के अंदर कूच क्यों नहीं किया? • कैसे प्रधानमंत्री ने अपना धैर्य बनाए रखा और युद्ध के समय एक महान् नेता बनकर उभरे। • क्या यह युद्ध निरर्थक था, भारत ने युद्ध के मोर्चे पर जो कुछ जीता था, क्या वह सब ताशकंद में गँवा दिया था? और अंत में, राजनीतिक नेतृत्व ने कैसे रक्षा बलों के नेतृत्व के साथ फिर से अपने समुचित संबंध बहाल कर लिये और 1962 के भारत-चीन युद्ध के समय पैदा हुई कड़वाहट को मिटा दिया। यह पुस्तक वायुसेना के सम्मान में लिखी गई है, जिसे स्वतंत्रता के बाद पहली बार युद्ध में लगाया गया था। यह उन बख्तरबंद रेजीमेंटों को भी श्रद्धांजलि है, जो इस युद्ध में बड़ी वीरता से लड़ीं और पैटन टैंकों के सर्वश्रेष्ठ होने के मिथक को तोड़ दिया।
Bharatiya Janata Party Ki Gauravgatha
- Author Name:
Shantanu Gupta
- Book Type:

- Description: 29 मार्च, 2015 को, 11 अशोक रोड स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पुराने कार्यालय में एक डिजिटल काउंटर आगे बढ़ता जा रहा था। पार्टी कार्यकर्ता, पदाधिकारी, यहाँ तक कि स्टाफ की नजरें भी डिजिटल स्क्रीन पर जमी थीं। स्क्रीन पर पार्टी की सदस्यता लेनेवालों की कुल संख्या दिख रही थी, जिन्हें पार्टी के नए ‘सदस्यता अभियान’ से जोड़ा जा रहा था। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अमित शाह उस दिन कार्यालय में ही थे। बालसुलभ उत्सुकता के साथ उनकी भी नजरें डिजिटल काउंटर पर ही गड़ी थीं। काउंटर जैसे ही अपने लक्ष्य पर पहुँचा, पूरा कार्यालय खुशी से झूम उठा। 8.8 करोड़ सदस्यों तक पहुँचते ही इसने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को पीछे छोड़ दिया था। इस महत्त्वाकांक्षी सदस्यता अभियान के पीछे अमित शाह की ही सोच थी। यह कैसे संभव हुआ? क्या यह महज आँकड़े जुटाने का अभियान था, जिसने भाजपा के भाग्य को और बलवान बनाया, या इसके पीछे ऐसी सोच थी, जिसका समय आ चुका था? 1984 में लोकसभा में महज दो सीटों वाली पार्टी का विपक्ष को इस प्रकार बुरी तरह परास्त करना और इतना भीमकाय रूप लेना क्या मात्र मोदी-शाह की जोड़ी का कमाल है या इसके कारण हिंदुत्व आंदोलन की उस जटिलता की गहराई में छिपे हैं, जिसे लेकर काफी गलतफहमी है? इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए शांतनु गुप्ता भारत के दक्षिणपंथी आंदोलनों के इतिहास, उनकी वैचारिक उत्पत्ति से राष्ट्रवादी विचारों के विकास तक जाते हैं, और भाजपा पर एक समग्र अध्ययन को लेकर आते हैं, जो मात्र एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक वैचारिक संगठन है, जो इस देश के राष्ट्रवादी आंदोलन को इस प्रकार परिभाषित करता है, जैसा पहले कभी नहीं किया गया था।
Hindu Muslim Rishte
- Author Name:
Aashutosh Varshney
- Book Type:

-
Description:
समाज-विज्ञान के क्षेत्र में ऐसी किताबें कम ही हैं जो अपने भारी-भरकम विषय में प्रमुख स्थान बनाने के साथ ही अपने लेखक को स्थापित कर दें। यह एक ऐसी ही किताब है। पर इसके लिए तर्कों और विचारों की नवीनता और विलक्षणता के साथ लेखक का श्रम भी श्रेय का हक़दार है। हिन्दू-मुस्लिम दंगों सम्बन्धी काफ़ी विवरणों को छान डालने के बाद लेखक ने छह शहरों का सघन अध्ययन भी किया है—इसमें वर्षों का श्रम लगा है, अनेक सहयोगियों की मदद लेनी पड़ी है और सम्भवतः लाखों डॉलर ख़र्च हुए हैं।
लेकिन दंगों और नागरिक समाज की मुस्तैदी या ढील में एकदम स्पष्ट रिश्ता देखने-दिखाने वाली इस किताब ने इस सब श्रम-ख़र्च और बौद्धिक ऊर्जा के ख़र्च की सार्थकता साबित की है, लेखक ने ठोस प्रमाणों के आधार पर अभी तक प्रचलित जातीय दंगों सम्बन्धी उन सब सिद्धान्तों को ख़ारिज किया है जो अनेक प्रश्न अनुत्तरित ही छोड़ देते थे। यही कारण है कि भारतीय शहरों के अध्ययन पर आधारित इस पुस्तक की चर्चा दुनिया-भर में हुई है।
पर यह किताब सिर्फ़ अकादमिक जगत् की चर्चा-भर की चीज़ नहीं है। यह हर पाठक, इस विषय में दिलचस्पी रखनेवाले हर व्यक्ति के मन में कुछ सवाल उठाती है, विभिन्न क़िस्म के संगठनों से जुड़कर अपना कुछ वक़्त समाज को देने की प्रेरणा देती है, पार्टियों-मजदूर संघों, व्यापार संगठनों, पेशागत संगठनों वग़ैरह से सामाजिक चौकसी की माँग करती है। यह स्थापित करती है कि बड़े शहरों के उदय के साथ इस चौकसी के बिना दंगे होंगे ही और सामाजिक चौकसी ही दंगे रोकने का अचूक मंत्र है।
Sarabjit Singh : A Case of Mistaken Identity
- Author Name:
Awaish Sheikh
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
2014 CHUNAV : JISNE BHARAT KO BADAL DIYA
- Author Name:
Rajdeep Sardesai
- Book Type:

- Description: भारत के 2014 के आम चुनावों को 1977 के बाद भारतीय इतिहास का सबसे महत्त्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इस चुनाव में देश ने सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी को समेटते हुए, भारतीय जनता पार्टी को शानदार जीत दिलाई। साथ ही, चुनाव प्रचार की एकदम नई तरह की शैली देखी गई, जिसने राजनीतिक खेल के सारे नियम तोड़ डाले। लेकिन यह कैसे और क्यों मुमकिन हुआ? इस दिलचस्प पुस्तक में प्रसिद्ध पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने राजनीति के सभी प्रमुख खिलाडि़यों और बड़ी खबरों के जरिए चुनावी कहानी पर नजर रखने का प्रयास किया है। इसकी शुरुआत 2012 से होती है, जब नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार गुजरात में राज्य विधानसभा के चुनाव में विजय हासिल की, लेकिन साथ ही एक बड़े मिशन पर अपनी निगाहें गड़ाईं। मनमोहन सिंह और संप्रग-दो के घोटालों, टीम मोदी की परदे के पीछे की रणनीतियों, राहुल गांधी की अभूतपूर्व चूकों और चुनाव वर्ष के राजनीतिक ड्रामे से होते हुए वे साल 2014 की उस शानदार जीत को रेखांकित कर रहे हैं, जिसने भारत को बदल दिया।
Smriti Sakshya
- Author Name:
Ganga Prasad
- Book Type:

- Description: बिहार में 1974 में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, तानाशाही, संविधान एवं न्यायालय विरोधी सरकार के कार्य जैसे मुद्दों को लेकर छात्र आंदोलन शुरू हुआ और इसने प्रचंड रूप धारण कर लिया था। बाद में जयप्रकाश नारायणजी भी आंदोलन के समर्थन में आ गए थे। उस आंदोलन में मैं भी छात्रों का समर्थन कर रहा था, इस कारण मुझे आपातकाल के पूर्व दो बार जेल जाना पड़ा । फिर कुछ ही दिन बाद हम जेल से बाहर आए देशव्यापी आंदोलन से असहज होकर तत्कालीन केंद्र सरकार ने आपातकाल की घोषणा कर दी। आपातकाल के दौरान पटना शहर से कुछ दूर खाजपुरा गाँव स्थित मेरा पैतृक निवास 'आर्य भवन' आंदोलन संबंधी गतिविधियों के संचालन का गुप्त केंद्र बन गया था, इस बीच संघ एवं जनसंघ की आंतरिक गुप्त बैठकें 'आर्य भवन' में ही होती थीं। जिसमें संघ के अखिल भारतीय अधिकारी, जनसंघ एवं दूसरे दलों के भूमिगत शीर्षस्थ नेता भी शामिल होते थे। इस दृष्टि से 'आर्य भवन' आंदोलन संचालन का मुख्यालय बन गया था।
Bhashan Kala
- Author Name:
Mahesh Sharma
- Book Type:

- Description: जिस प्रकार धनुष से निकला हुआ बाण वापस नहीं आता, उसी प्रकार मुँह से निकली बात भी वापस नहीं आती, इसलिए हमें कुछ भी बोलने से पहले सोच-समझकर बोलना चाहिए। भाषण देना, व्याख्यान देना अपनी बात को कलात्मक और प्रभावशाली ढंग से कहने का तरीका है। इसमें अपने भावों को आत्मविश्वास के साथ नपे-तुले शब्दों में कहने की दक्षता प्राप्त कर व्यक्ति ओजस्वी वक्ता हो सकता है। हाथों को नचाकर, मुखमुद्रा बनाकर ऊँचे स्वर में अपनी बात कहना मात्र भाषण-कला नहीं है। भाषण ऐसा हो, जो श्रोता को सम्मोहित कर ले और वह पूरा भाषण सुने बिना सभा के बीच से उठे नहीं। यह पुस्तक सिखाती है कि वहीं तक बोलना जारी रखें, जहाँ तक सत्य का संचित कोष आपके पास है। धीर-गंभीर और मृदु वाक्य बोलना एक कला है, जो संस्कार और अभ्यास से स्वतः ही आती है प्रस्तुत पुस्तक में वाक्-चातुर्य की परंपरा की छटा को नयनाभिराम बनाते हुए कुछ विलक्षण घटनाओं का भी समावेश किया गया है, जो कहने और सुनने के बीच एक मजबूत सेतु का काम करती हैं। विद्यार्थी, परीक्षार्थी, साक्षात्कार की तैयारी करनेवाले तथा श्रेष्ठ वाक्-कौशल प्राप्त करने के लिए एक पठनीय पुस्तक।
Manavadhikar Ka Manveeya Chehara
- Author Name:
Subhash Mishra
- Book Type:

- Description: मानव-जाति के भाग-निर्माण में जितनी शक्तियों ने योगदान दिया है और दे रही हैं, उन सब में धर्म के रूप में प्रगट होनेवाली शक्ति से अधिक महत्त्वपूर्ण कोई नहीं है। सभी सामाजिक संगठनों के मूल में कहीं-न-कहीं यही अद्भुत शक्ति काम करती रही है तथा अब तक मानवता की विविध इकाइयों को संगठित करनेवाली सर्वश्रेष्ठ प्रेरणा इसी शक्ति से प्राप्त हुई है। हम सभी जानते हैं कि धार्मिक एकता का संबंध प्रायः जातिगत, जलवायुगत तथा वंशानुगत एकता के संबंधों से भी दृढ़तर सिद्ध होता है।
Dorahe Par Vam
- Author Name:
Praful Bidwai
- Book Type:

-
Description:
एक बड़ा प्रासंगिक सवाल उठता है कि भारत में राजनीतिक दलों के लिए वैधता के एक महत्त्वपूर्ण स्रोत के रूप में वामपंथी राजनीति उस सीमा तक क्यों नहीं विकसित हो पाई जैसा कि बेहिसाब अन्याय और बढ़ती जाती असमानता वाले समाज में अपेक्षित था।
दलीय वाम अब प्राथमिक रूप से दो धाराओं में सीमित रह गया है : मुख्यधारा वाले संसदीय साम्यवादी दल और उनके सहयोगी तथा ग़ैर-संसदीय माओवादी अथवा मार्क्सवादी-लेनिनवादी समूह।
इस पुस्तक के सरोकार का विषय सीमित है : यह प्राथमिक रूप से संसदीय साम्यवादी दलों पर केन्द्रित है। इस सीमा के पीछे तीन कारक हैं। पहला, मुख्यधारा वाले गुट को भारत की बुर्जुआ उदारवादी लोकतांत्रिक व्यवस्था–अपनी सीमाओं के बावजूद जिसे जनता से पर्याप्त वैधता प्राप्त है–से जुड़ने का प्रयास करने का सबसे लम्बा और सबसे समृद्ध अनुभव है और यह प्रगतिशील परिवर्तन और रूपान्तरण की संभावनाओं वाली राजनीति के अवसर प्रदान करता है।
दूसरे, वामपंथ की सभी धाराओं में मुख्यधारा वाला खेमा सबसे बड़ा है और विविध विभाजनों, असहमतियों और पारस्परिक प्रतिद्वान्दिताओं के बावजूद इसका लगातार सबसे लम्बा संगठित अस्तित्व रहा है।
तीसरे, और यह बात बहुत चकरानेवाली लग सकती है कि मुख्यधारा के वाम पर राज्य केन्द्रित अध्ययनों, लेखों से अलग राष्ट्रीय स्तर पर ताज़ा विश्लेषणात्मक साहित्य बहुत कम है। आशा है कि यह पुस्तक राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर वामपंथी दलों के कामकाज के विश्लेषण को उनके विचारधारात्मक आग्रहों, रणनीतिक परिप्रेक्ष्यों, राजनीतिक गोलबंदियों के दृष्टिकोणों और संगठनात्मक प्रणालियों तथा व्यवहारों के साथ जोड़कर इस शून्य को भरने में मदद करेगी।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book