Vyathit Jammu Kashmir
Author:
Narender SehgalPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 400
₹
500
Available
स्तावना —Pgs. 7
1. भारत माता के मुकुट कश्मीर का गौरवशाली अतीत —Pgs. 13
2. दिग्विजयी कश्मीर —Pgs. 21
3. धर्मांतरण से राष्ट्रांतरण —Pgs. 31
4. डुग्गर धरती का गौरवशाली अतीत —Pgs. 35
5. आत्म बलिदान की अनूठी मिसाल डुग्गर रत्न बाबा जो —Pgs. 41
6. डुग्गर पौरुष के प्रतीक वीर बंदा वैरागी —Pgs. 45
7. विजयी डोगरा सेनानायक जनरल जोरावर सिंह —Pgs. 49
8. राष्ट्रभत डोगरा शासक —Pgs. 55
9. जम्मू क्षेत्र में संघ —Pgs. 61
10. जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय —Pgs. 66
11. कश्मीर घाटी में संघ —Pgs. 75
12. रक्षा मोरचे पर संघ —Pgs. 78
13. शेख अदुल्ला का उदय —Pgs. 84
14. पं. नेहरू की अदूरदर्शिता —Pgs. 92
15. प्रजा परिषद् आंदोलन —Pgs. 109
16. आत्मनिर्णय का इसलामी जुनून —Pgs. 123
17. देशभत कश्मीरी पंडित —Pgs. 131
18. डोडा क्षेत्र में आतंक —Pgs. 141
19. जम्मू क्षेत्र से भेदभाव —Pgs. 145
20. मंदिरों का शहर बना शरणार्थियों का शहर —Pgs. 150
21. हिंदू स्वाभिमान की विजय —Pgs. 158
22. हिंदू विहीन कश्मीरियत? —Pgs. 179
23. फसाद की जड़ अनुच्छेद 370 —Pgs. 184
24. भारतीय सुरक्षा बल —Pgs. 191
25. लद्दाख में राष्ट्रवाद का जागरण —Pgs. 199
26. खतरे में लद्दाखी सभ्यता —Pgs. 203
27. समाधान की तलाश —Pgs. 205
परिशिष्ट-1 मैंने श्री गुरुजी को ‘कर्ण महल’ में प्रवेश करते देखा —Pgs. 227
परिशिष्ट-2 The Accession of the J&K State and Maharaja Hari Singh —Pgs. 228
परिशिष्ट-3 In Saving Kashmir —Pgs. 230
परिशिष्ट-4 Accession of Kashmir Sangh's Efforts —Pgs. 233
परिशिष्ट-5 महाराजा का सरदार पटेल को पत्र —Pgs. 236
परिशिष्ट-6 महाराजा का भारत में विलय का प्रस्ताव —Pgs. 241
परिशिष्ट-7 26 अतूबर, 1947 को महाराजा हरिसिंह द्वारा कार्यान्वित विलय-पत्र —Pgs. 244
परिशिष्ट-8 भारत के संविधान की धारा-370 —Pgs. 247
परिशिष्ट-9 शिमला समझौता —Pgs. 249
परिशिष्ट-10 कश्मीर समझौता (फरवरी 1975 ) —Pgs. 252
संदर्भ-ग्रंथ —Pgs. 254
पत्र-पत्रिकाएँ —Pgs. 256
ISBN: 9788177211856
Pages: 256
Avg Reading Time: 9 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: भारतीय राजनीति गठबंधन के दौर में में न केवल प्रवेश कर चुकी है, गठबंधन की सरकारों का गठन अब भारतीय लोकतंत्र का वर्तमान और आगामी अतीत नजर आ रहा है। राष्ट्रीय दलों ही नहीं, क्षेत्रीय दलों की पैठ मतदाताओं में जितनी गहरी होती जाएगी, यह चलन बढ़ेगा। क्षेत्रीय मुद्दों पर ही नहीं, राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपने क्षेत्रीय दलों पर मतदाता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है। यही वजह है कि मतदाता चाहता है कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उसका प्रतिनिधित्व उसके क्षेत्रीय दल करें। पिछले लगभग एक दशक से मतदाताओं ने गठबंधन की सरकारों के गठन का जनादेश दिया है। अपने प्रधानमंत्रित्व काल में श्री अटल बिहारी वाजपेयी ने जो उपलब्धियाँ हासिल की हैं, उन्हें सहज शब्दों में कहा जा सकता है-जो कहा, वह कर दिखाया। प्रधानमंत्री पद पर आसीन होने के बाद भी उनकी कथनी और करनी एक ही बनी रही। अपनी बात को स्पष्ट और दृढ़ शब्दों में कहना अटलजी जैसे निर्भय और सर्वमान्य व्यक्ति के लिए सहज और संभव रहा है। मुद्दा चाहे पड़ोसियों से संबंध सुधारने की दिशा में चीन यात्रा का हो, लाहौर बस यात्रा हो या कारगिल से दुश्मन को खदेड़ना, आगरा वार्ता हो या फिर से खेल संबंधों की बहाली, परमाणु परीक्षण हो या डब्ल्यू.टी.ओ. पर दो टूक राय या अमेरिका की मध्यस्थता को ठुकराने का फैसला। अटलजी के शासनकाल में देश की अर्थव्यवस्था ने नई ऊँचाइयों को छुआ। विदेशी मुद्रा भंडार, सूचना प्रौद्योगिकी, आउट सोर्सिंग, किसान बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड, ग्रामीण सड़क योजना, स्वर्ण चतुर्भुज राजमार्ग, नदियों का एकीकरण, सागर माला, दूरसंचार सुविधाओं का विकास, ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार जैसी दर्जनों योजनाएँ हैं, जो अटल जी के कार्यकाल में शुरू हुईं और जो आगामी अतीत में भारत को विकसित देशों की पंक्ति में स्थान दिलाने में सफल होंगी। भारतीय राजनीति को अटल जी का योगदान है- समन्वय की राजनीति, सामंजस्य की राजनीति, मिल- जुलकर राष्ट्रहित में आगे बढ़ने की दिशा देना।
Itihas Aur Vichardhara : Khalsa Ke Teen Sau Sal
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J.S. Grewal +1
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- Description: प्रोफ़ेसर जे.एस. ग्रेवाल और प्रोफ़ेसर इंदु बंगा द्वारा सम्पादित यह पुस्तक भारत के सामान्य इतिहास के सन्दर्भ में सिख पंथ के इतिहास को स्थापित करके खालसा की त्रिशताब्दी मनाने का एक प्रयास है। इस पुस्तक में संकलित लेख 1935 में उसकी स्थापना के बाद से भारतीय इतिहास कांग्रेस के वार्षिक सत्रों में प्रस्तुत लेखों में से चुने गए हैं। ये 18वीं से 20वीं सदी तक के सिख इतिहास के सभी प्रमुख चरणों को समेटते हैं। ये विश्व के प्रमुख सार्वभौम धर्मों में एक, सिख धर्म के विकास को उजागर करते हैं और इसके लिए उन समृद्ध धाराओं को स्पष्ट करते हैं जो भारत की समन्वित राष्ट्रीय धरोहर में सिखों के सांस्कृतिक, सामाजिक और राजनीतिक इतिहास के योगदान की उपज रही हैं।
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