Sansad Mein Meri Baat
(0)
Author:
Ramgopal YadavPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
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इस पुस्तक का नाम है—'संसद में मेरी बात' लेकिन यदि आप इसे ध्यान से पढ़ें तो आप कहेंगे कि इसका नाम होना चाहिए था—'देश की बात'।</p> <p>प्रो. रामगोपाल यादव ने लगभग 40 विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। 40 तो शीर्षक भर हैं।</p> <p>एक-एक शीर्षक में कई-कई मुद्दे हैं। हर मुद्दे पर उन्होंने अपनी बेबाक राय रखी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग़रीबी, खेती, हिन्दी, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, आरक्षण जैसे बुनियादी मुद्दों पर उन्होंने अपनी दो-टूक बात तो कही ही है, तात्कालिक महत्त्व के कई प्रश्नों पर उन्होंने अनेक रचनात्मक सुझाव भी रखे हैं। राजनीतिशास्त्र के अध्येता और अध्यापक रहने के अनुभव ने भाषणों को गम्भीर और तर्कसम्मत भी बनाया है। उनके भाषणों को पढ़ने पर आप आसानी से समझ जाएँगे कि एक औसत नेता और एक विद्वान नेता में क्या फ़र्क़ होता है। इस संकलन में आप जब गांधी, लोहिया, अम्बेडकर आदि के साथ-साथ सुकरात, अरस्तू, थॉमस हिल ग्रीन, जॉन स्टुअर्ट मिल आदि विचारकों के प्रासंगिक सन्दर्भ देखेंगे तो आप समझ जाएँगे कि समाजवादी पार्टी ने अपने इस प्रतिभाशाली सांसद को संसद में सदा बने रहने के लिए बाध्य क्यों किया है। इस ग्रन्थ को पूरा पढ़ने पर आपको रामगोपाल जी के सपनों का भारत साफ़-साफ़ दिखाई पड़ने लगेगा। डॉ. राममनोहर लोहिया के समतामूलक समाज और बृहत्तर भारत की कल्पना को यह सपना साकार करता है।</p> <p>—वेदप्रताप वैदिक
Read moreAbout the Book
इस पुस्तक का नाम है—'संसद में मेरी बात' लेकिन यदि आप इसे ध्यान से पढ़ें तो आप कहेंगे कि इसका नाम होना चाहिए था—'देश की बात'।</p>
<p>प्रो. रामगोपाल यादव ने लगभग 40 विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। 40 तो शीर्षक भर हैं।</p>
<p>एक-एक शीर्षक में कई-कई मुद्दे हैं। हर मुद्दे पर उन्होंने अपनी बेबाक राय रखी है। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग़रीबी, खेती, हिन्दी, विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, आरक्षण जैसे बुनियादी मुद्दों पर उन्होंने अपनी दो-टूक बात तो कही ही है, तात्कालिक महत्त्व के कई प्रश्नों पर उन्होंने अनेक रचनात्मक सुझाव भी रखे हैं। राजनीतिशास्त्र के अध्येता और अध्यापक रहने के अनुभव ने भाषणों को गम्भीर और तर्कसम्मत भी बनाया है। उनके भाषणों को पढ़ने पर आप आसानी से समझ जाएँगे कि एक औसत नेता और एक विद्वान नेता में क्या फ़र्क़ होता है। इस संकलन में आप जब गांधी, लोहिया, अम्बेडकर आदि के साथ-साथ सुकरात, अरस्तू, थॉमस हिल ग्रीन, जॉन स्टुअर्ट मिल आदि विचारकों के प्रासंगिक सन्दर्भ देखेंगे तो आप समझ जाएँगे कि समाजवादी पार्टी ने अपने इस प्रतिभाशाली सांसद को संसद में सदा बने रहने के लिए बाध्य क्यों किया है। इस ग्रन्थ को पूरा पढ़ने पर आपको रामगोपाल जी के सपनों का भारत साफ़-साफ़ दिखाई पड़ने लगेगा। डॉ. राममनोहर लोहिया के समतामूलक समाज और बृहत्तर भारत की कल्पना को यह सपना साकार करता है।</p>
<p>—वेदप्रताप वैदिक
Book Details
-
ISBN9788126729135
-
Pages480
-
Avg Reading Time16 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Bipin Chandra's 'India's Struggle for Independence' is your essential resource for an in-depth, detailed overview of the Indian independence movement. The Indian freedom struggle is a crucial part of the country's history, extensively discussed, yet still with gaps in coverage. Particularly, accounts from across the entire country, rather than just one region, are rare. This book fills that gap, providing insight into the movement's impact on the people. It offers a well-researched history, based on a thorough analysis of legal, verbal, and written sources, documenting India's fight against British rule. Starting with Mangal Pandey's mutiny and highlighting the heroic efforts of Rani Laxmi Bai, the book also dedicates significant pages to Gandhi’s non-cooperation and civil disobedience campaigns, as well as Subash Chandra Bose’s tactical leadership and charisma. Covering all independence efforts regardless of size or impact, it presents oral and written narratives from various parts of India, making it a rich and diverse historical account. The book traces the entire evolution of India’s struggle for independence, ensuring no chapter is left untouched. It is especially valuable for students of modern Indian history, including those preparing for the UPSC exams with History as a subject.
Ashfakulla Aur Unka Yug
- Author Name:
Sudhir Vidyarthi
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भारतीय क्रन्तिकारी आन्दोलन के इतिहास-लेखकों में सुपरिचित सुधीर विद्यार्थी की यह पुस्तक काकोरी कांड के सर्वाधिक युवा और तेजस्वी शहीद अशफ़ाक़ उल्ला के महान अवदान का दस्तावेज़ी मूल्यांकन है।
काकोरी कांड का समूचे भारतीय स्वाधीनता-संग्राम में एक विशेष महत्त्व है। यह केवल ब्रिटिश सरकार पर ही राजनीतिक हमला नहीं था, बल्कि 1921 के असहयोग आन्दोलन के स्थगन से उपजे राजनीतिक शून्य को भरने का भी प्रयास था। साथ ही इस कांड की एक सकारात्मक भूमिका और भी थी। तत्कालीन साम्प्रदायिक माहौल के ख़िलाफ़ राष्ट्रीयता को बढ़ावा देने में इससे भारी प्रेरणा मिली। राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, ठाकुर रोशनसिंह और रामप्रसाद बिस्मिल के साथ अशफ़ाक़ उल्ला का बलिदान भारतीय जनता के लिए अविस्मरणीय हो उठा। अपनी चिट्ठियों, बयानों और नज़्मों से उन्होंने देश को एक नई राह पकड़ने की प्रेरणा देते हुए क्रान्तिकारी आन्दोलन में पहली बार मार्क्सवादी सिद्धान्तों की हिमायत की।
वस्तुतः अशफ़ाक़ उल्ला के क्रान्तिकारी जीवन-संघर्ष के साथ-साथ यह कृति काकोरी युग के समूचे राजनीतिक वातावरण, वैचारिकता और क्रान्तिकारियों की ज्वलन्त राष्ट्रनिष्ठा को तथ्यात्मक ढंग से प्रस्तुत करती है।
Modi Vijaygatha 2019
- Author Name:
Pradeep Bhandari
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2019 के आम चुनाव की पृष्ठभूमि कुछ ऐसी थी जब अप्रत्याशित गठबंधन बने, जिनमें एक-दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वियों ने भी एक व्यक्ति, एक पार्टी और एक विचारधारा के खिलाफ हाथ मिला लिया था। भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ जब एकजुट विपक्ष सामने आया, जिससे ये चुनाव मोटे तौर पर मोदी-विरोधी बनाम मोदी—समर्थक बन गया। नोटबंदी और जी.एस.टी. को लोग जहाँ अब तक भूले नहीं थे, वहीं चुनाव से ठीक पहले पुलवामा के हमले और बालाकोट एयरस्ट्राइक ने राष्ट्रवाद की एक भावना पैदा कर दी। इस वजह से, सबसे अनुभवी राजनीतिक जानकार भी ये अंदाजा नहीं लगा सके कि इस चुनाव का नतीजा क्या होगा। भले ही अब हम जानते हैं कि इस चुनावी लड़ाई में जीत किसकी हुई, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि आखिर क्यों लोगों ने ऐसे समय में अपना मूड बदला, जब कई लोगों ने मोदी और बीजेपी की हार की भविष्यवाणी कर दी थी। पूरे देश में जमीनी स्तर पर लोग क्या सोच रहे थे, इस विषय पर ग्राउंड जीरो से महत्त्वपूर्ण जानकारियों के साथ, यह पुस्तक उस क्यों का जवाब देती है और यह भी बताती है कि उस जनादेश के भारतीय राजनीति के भविष्य पर कौन-कौन से प्रभाव पड़े। जमीनी सच्चाई और वोटरों के मानस का सूक्ष्म एवं गहन अध्ययन कर लिखी गई यह पुस्तक न केवल चुनाव विश्लेषकों, राजनीतिक कार्यकर्ताओं, वरन् सामान्य पाठक के लिए भी समान रूप से पठनीय है।
Patriots and Partisans
- Author Name:
Ramchandra Guha
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In this wide-ranging collection of essays, Ramachandra Guha defends the liberal centre against the dogmas of left and right, and does so with style, depth, and polemical verve. Among the subjects on which he turns a critical eye are Hindutva, the Communist left and the dynasty-obsessed Congress party. Whether writing about politics, profiling individuals or analysing social trends, Guha displays a masterly touch, confirming his standing as India's most admired historian and public intellectual. Key Features: Written in a wonderfully readable style, will provoke much debate and discussion Covering a wide range of subjects of contemporary relevance, such as: An essay on the threats to the Indian republic from the Right, the Left and the state itself An analysis comparing and contrasting two old men, PM Manmohan Singh and Anna Hazare An examination of the dynasty-obsessed Congress Party and its culture of sycophancy Hindutva hate mail which floods the Internet
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