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Jakheere Mein Shahadat

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भारतीय क्रान्तिकारी दल के मस्तिष्क, दिल्ली में वायसराय ट्रेन बम विस्फोट कांड के प्रमुख सूत्रधार, ‘नौजवान भारत सभा’ व ‘हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ’ के घोषणापत्रों के साथ ही गांधी के ‘कल्ट ऑफ द बम’ के सैद्धान्तिक व तर्कपूर्ण प्रत्युत्तर ‘बम का दर्शन’ के साक्षात् रूप क्रान्तिकारी भगवतीचरण वोहरा की 28 मई, 1930 को बम परीक्षण में रावी तट पर हुई शहादत हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन की अति विशिष्ट घटना है। भगवती भाई क्रान्तिकारी दल के सेनापति चन्द्रशेखर आजाद के दाहिने हाथ थे, तो वहीं भगतसिंह के अन्यतम सहयोगी भी थे। आजाद उनकी क्षमताओं से बखूबी परिचित थे। असेम्बली बम कांड में भगत सिंह की गिरफ्तारी और बाद में भगवती भाई की शहादत आजाद को बहुत अकेला कर गई। यदि आजाद, भगवती और भगत सिंह की क्रान्तिकारी त्रिमूर्ति अधिक समय तक क्रान्तिकारी आन्दोलन का नेतृत्व करने के लिए जिन्दा रहती तो देश के विप्लवी इतिहास को सर्वथा नया आयाम प्राप्त हुआ होता। भगवतीचरण की पत्नी दुर्गा भाभी ने भी अपने कृतित्व से भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन के इतिहास में स्त्री की भूमिका को कदम-ब-कदम अपनी तरह से दर्ज किया है। मुक्ति-संग्राम के इतिहास में भगवती भाई और दुर्गा भाभी के नाम के हरूफ नई पीढ़ी के हृदयों को सदा स्पन्दित और आलोकित करते रहेंगे। भारतीय क्रान्तिकारी संग्राम के सजग अध्येता व विश्लेषक सुधीर विद्यार्थी ने निरन्तर खोजबीन करके क्रान्तिकारी शहीद भगवतीचरण वोहरा के दुर्लभ जीवन-प्रसंगों और उनकी क्रान्तिकारी विचार-यात्रा के पड़ावों को उनके हमसफरों तथा कुछेक दस्तावेजों के जरिए पाठकों के सामने लाने की अनोखी कोशिश की है। इस पुस्तक में उन्होंने भगवतीचरण वोहरा के व्यक्तित्व के चारों ओर बनाए गए कुहासे को भी निष्पक्षता और प्रामाणिकता से छाँटने के जरूरी काम को अंजाम दिया है। पुस्तक में इस कथा की भीतरी परतों को साहसपूर्ण ढंग से अनावृत करने का जोखिम भी दिखाई पड़ता है।

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भारतीय क्रान्तिकारी दल के मस्तिष्क, दिल्ली में वायसराय ट्रेन बम विस्फोट कांड के प्रमुख सूत्रधार, ‘नौजवान भारत सभा’ व ‘हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र संघ’ के घोषणापत्रों के साथ ही गांधी के ‘कल्ट ऑफ द बम’ के सैद्धान्तिक व तर्कपूर्ण प्रत्युत्तर ‘बम का दर्शन’ के साक्षात् रूप क्रान्तिकारी भगवतीचरण वोहरा की 28 मई, 1930 को बम परीक्षण में रावी तट पर हुई शहादत हमारे राष्ट्रीय आन्दोलन की अति विशिष्ट घटना है। भगवती भाई क्रान्तिकारी दल के सेनापति चन्द्रशेखर आजाद के दाहिने हाथ थे, तो वहीं भगतसिंह के अन्यतम सहयोगी भी थे। आजाद उनकी क्षमताओं से बखूबी परिचित थे। असेम्बली बम कांड में भगत सिंह की गिरफ्तारी और बाद में भगवती भाई की शहादत आजाद को बहुत अकेला कर गई। यदि आजाद, भगवती और भगत सिंह की क्रान्तिकारी त्रिमूर्ति अधिक समय तक क्रान्तिकारी आन्दोलन का नेतृत्व करने के लिए जिन्दा रहती तो देश के विप्लवी इतिहास को सर्वथा नया आयाम प्राप्त हुआ होता। भगवतीचरण की पत्नी दुर्गा भाभी ने भी अपने कृतित्व से भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन के इतिहास में स्त्री की भूमिका को कदम-ब-कदम अपनी तरह से दर्ज किया है। मुक्ति-संग्राम के इतिहास में भगवती भाई और दुर्गा भाभी के नाम के हरूफ नई पीढ़ी के हृदयों को सदा स्पन्दित और आलोकित करते रहेंगे। भारतीय क्रान्तिकारी संग्राम के सजग अध्येता व विश्लेषक सुधीर विद्यार्थी ने निरन्तर खोजबीन करके क्रान्तिकारी शहीद भगवतीचरण वोहरा के दुर्लभ जीवन-प्रसंगों और उनकी क्रान्तिकारी विचार-यात्रा के पड़ावों को उनके हमसफरों तथा कुछेक दस्तावेजों के जरिए पाठकों के सामने लाने की अनोखी कोशिश की है।

इस पुस्तक में उन्होंने भगवतीचरण वोहरा के व्यक्तित्व के चारों ओर बनाए गए कुहासे को भी निष्पक्षता और प्रामाणिकता से छाँटने के जरूरी काम को अंजाम दिया है। पुस्तक में इस कथा की भीतरी परतों को साहसपूर्ण ढंग से अनावृत करने का जोखिम भी दिखाई पड़ता है।

Book details

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100% OriginalGenuine copy from Rajkamal Prakashan Samuh
Format
Hardbound
Publisher
Rajkamal Prakashan Samuh
Publication year
2012
Weight
320 grams
ISBN-13
9788126721498
Pages
160
Reading time
~5 hrs
Age
18+
Country of origin
India
Dimensions
14.5 × 22.5 cm
Language
Hindi

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