Chandrashekhar Ke Vichar
Author:
HarivanshPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics0 Ratings
Price: ₹ 716
₹
895
Available
हमारे पारंपरिक समाज में ‘विचारवान’ एक आस्थासूचक विशेषण है। अगर कोई अच्छी बात कहता है और उससे लोगों का भला होता है, तो समाज की स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है–‘बड़ा विचारवान आदमी है।’ चन्द्रशेखर भारतीय राजनीति के ‘विचारवान शख्स’ थे! <br>चन्द्रशेखर समाज के लिए समाज की सतह पर खड़े होकर सोचते थे। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के जमाने से ही चन्द्रशेखर समाजोन्मुख चिंतन और सामाजिक गैर-बराबरी को दूर करनेवाले विचार के साथ जनता से मुखातिब होते रहे। इसमें कोई शक नहीं कि चन्द्रशेखर समाजवादी विचारधारा की देन थे और इस विचारधारा के प्रति उनकी निष्ठा असंदिग्ध रही। जब वह छोटी अवधि के लिए प्रधानमंत्री बने, तो उन्होंने अपने अधिकांश भाषणों में अपने कामकाज का बखान करने की जगह भारत की गरीबी और विपन्न बच्चों की शिक्षा को लेकर गहरी चिंता जाहिर की। इस पुस्तक में संकलित भाषणों में भी यह चिंता बखूबी झलकती है। <br>आर्थिक सवाल पर उनके विचार वैज्ञानिक चेतना से संपन्न देशज स्वाभिमान की तरह हमारे सामने हैं–देशज विकल्प के साथ। यह विकल्प गांधी के रास्ते चन्द्रशेखर तक आया है, इसलिए इसमें प्रति नागरिक आत्मोन्नति को पहली प्राथमिकता प्राप्त है। कहते हैं–अगर उदारीकरण आत्मोन्नति के प्रयासों को धक्का नहीं पहुँचाता है, लालफीताशाही और भ्रष्टाचार की जकड़न से समाज को मुक्त कराता है, तो यह ठीक है–नहीं तो यह महज एक लफ्फाजी है और ऊँचे वर्गों का सोसा है–और यही हमारे समय में चल रहे उदारीकरण की नियति है। <br>इस पुस्तक में प्रधानमंत्रित्व काल के उनके भाषणों और ‘यंग इंडियन’ व अन्यत्र छपे उनके कुछ महत्त्वपूर्ण लेखों का संकलन किया गया है। इस संकलन की महत्ता यह है कि पाठक देख सकते हैं कि विभिन्न मुद्दों पर चन्द्रशेखर के विचार आज भी कितने प्रासंगिक हैं।
ISBN: 9788126704699
Pages: 272
Avg Reading Time: 9 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Bharat Ke Prasiddha Kile
- Author Name:
Gunakar Muley
- Book Type:

-
Description:
भारत के प्रत्येक किले में हमारे देश के अतीत का एक विशेष क्षण छिपा हुआ है। इन किलों ने न जाने कितने आक्रमण सहे, जाने कितने युद्धों को प्रत्यक्ष देखा, और जाने कितने रक्तपात और वैभव को अपनी मजबूत दीवारों में सहेजा-समेटा है।
प्राचीन भारतीय इतिहास के सम्बन्ध में आज जो जानकारी किलों से मिलती है उसे नजरअन्दाज नहीं किया जा सकता। प्रत्येक किला हमारे लोमहर्षक इतिहास का एक जीवन्त अध्याय है। लेकिन भारतीय राजवंशों के उतार-चढ़ावों की दिलचस्प कथाएँ बताने वाले और इतिहास के स्वर्णिम युगों के गवाह इन किलों में से अनेक अब खँडहर बन गए हैं, भूत-बँगले हो गए हैं। कुछ किले पुरातत्व विभाग के अधीन होकर भी अपनी किस्मत को रो रहे हैं।
यह भी एक तथ्य है कि कुछ प्रमुख किलों को छोड़ दें तो ज्यादातर किलों के बारे में साधारणजन पूरी तरह अनभिज्ञ हैं। गुणाकर जी की यह पुस्तक भारत के किलों के बारे में एक विस्तृत और प्रामाणिक विवरण प्रस्तुत करती है। 300 से ज्यादा चित्रों और नक्शों से सुसज्जित इस पुस्तक में प्रत्येक प्रदेश के किलों का सिलसिलेवार विवरण दिया गया है और उनके स्थापत्य तथा उनसे जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं पर प्रकाश डाला गया है।
Vedic Kaal
- Author Name:
S. Irfan Habib
- Book Type:

-
Description:
‘भारत के लोक इतिहास’ श्रृंखला के इस खंड का विषय 1500 ईसा पूर्व से 700 ईसा पूर्व के बीच का काल-खंड है जिसके तहत ऋग्वेद और उसके बाद के ग्रन्थों को क्रमशः व्यवस्थित किया गया है और उस युग के भूगोल, प्रव्रजन, प्रौद्योगिकी, अर्थव्यवस्था और समाज के साथ-साथ धर्म और दर्शन आदि पहलुओं का अन्वेषण किया गया है। लेखकों की कोशिश रही है कि उक्त आदिग्रन्थों के माध्यम से तत्कालीन जन-जीवन की पुनर्रचना कर आम पाठकों के लिए उसे बोधगम्य बनाया जाए। इस प्रक्रिया में लैंगिक और वर्ग-आधारित सामाजिक विभाजनों को ख़ास तौर पर देखने की कोशिश की गई है।
पुस्तक के एक अध्याय में पुरातात्त्विक साक्ष्यों के आधार पर प्रमुख क्षेत्रीय संस्कृतियों का सावधानीपूर्वक अध्ययन किया गया है। इतिहास में लोहे का आगमन एक महत्त्वपूर्ण घटना है जो इसी युग में सम्पन्न हुई थी, सो उसका वर्णन किंचित् विस्तार से हुआ है। साथ ही जाति व्यवस्था के आरम्भ पर भी इस पुस्तक में अपेक्षित प्रकाश डाला गया है।
मूल ग्रन्थों के उद्धरणों, तार्किक व्याख्याओं और विश्लेषणों, अनेक प्रामाणिक चित्रों और नक़्शों से समृद्ध यह पुस्तक न सिर्फ़ रुचिकर, बल्कि पाठकों को विचारोत्तेजक भी लगेगी।
Belag Lapet
- Author Name:
R.K. Sinha
- Book Type:

- Description: इस पुस्तक का हर लेख एक विषय पर केंद्रित है। किसी को कम श्रेष्ठ कहना कठिन काम है। पुस्तक के लेखों का समग्र फलक बहुत बड़ा है। इसकी व्यापकता में राजनीति, संसद्, राजनीतिक मर्यादा, संस्कृति, राजनीतिक इतिहास, शिक्षा, देश के ज्वंलत प्रश्न, हिंदू-मुसलिम संबंध, पाकिस्तान और काला धन आदि विषय समाए हुए हैं। राजनीति के केंद्र और परिधि में जो-जो विषय आ सकते हैं, उन्हें इसमें पाया जा सकता है। एक अर्थ में यह कहना ज्यादा उचित है कि इसमें समसामयिक विषयों में से कुछ छूटा ही नहीं है। सब कुछ आ गया है। विषय अलग-अलग हैं। इन्हें पढ़ते हुए पाठक भाषा का मनोरम प्रवाह अनुभव कर सकेंगे। उलझाव तो कहीं नहीं है। एक राजनीतिक दल के नेता और सांसद की कलम पर कई बार इतना बोझ आ जाता है कि वह ठिठक जाती है। कुंठित हो जाती है। इसे लेखन में लेखक कोशिश कर छिपाता है, पर वह छिपता नहीं है। रवींद्र किशोर सिन्हा ने न तो बोझ महसूस किया है और न ही वे लेखन में कहीं से पाठक को गुफाओं से गुजारते हैं। इसलिए इन लेखों को पढ़ते हुए किसी गुफा से गुजरने की ऊब नहीं होती। हर पाठक अनुभव कर सकता है कि वह पौ फटने की बेला में है। नया दिन नए विचार और नए दृष्टिकोण से शुरू करने का उसे सुअवसर प्राप्त हो रहा है। अपनी राजनीतिक-सांस्कृतिक निष्ठा बनाए रखते हुए वे पेशेवर मर्यादाओं का अपने लेखों में पूरा पालन करते देखे जा सकते हैं। —इसी पुस्तक से
Aapatkal Aakhyan : Indira Gandhi Aur Loktantra Ki Agni Pariksha
- Author Name:
Gyan Prakash
- Book Type:

-
Description:
लोकतांत्रिक भारत के इतिहास के सबसे अँधेरे पलों में से एक का प्रभावी और प्रामाणिक अध्ययन, जो हमारे वर्तमान दौर में, लोकतंत्र पर मँडरा रहे वैश्विक संकटों पर भी रौशनी डालता है।
—सुनील खिलनानी; इतिहासकार, राजनीति विज्ञानी
एक ऐसे दौर में, जब दुनिया एक बार फिर अधिनायकवाद के ज़लज़लों से रू-ब-रू हो रही है, ज्ञान प्रकाश की किताब ‘आपातकाल आख्यान’ आपातकाल (1975-77) को बेहतर ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में समझने के लिए हमें इतिहास के उस दौर में ले जाती है, जब भारत ने स्वतंत्रता हासिल की थी। यह किताब इस मिथक को तोड़ती है कि आपातकाल एक ऐसी आकस्मिक परिघटना थी जिसका एकमात्र कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री का सत्तामोह था, इसके बरक्स यह तर्क देती है कि आपातकाल के लिए जितनी ज़िम्मेदार इन्दिरा गांधी थीं, उतने ही ज़िम्मेदार भारतीय लोकतंत्र और लोकप्रिय राजनीति के बनते-बिगड़ते नाज़ुक सम्बन्ध भी थे। यह ऐसी परिघटना थी जो भारतीय राजनीति के इतिहास में निर्णायक मोड़ साबित हुई।
ज्ञान प्रकाश आपातकाल के ठीक पहले के वर्षों में घटी घटनाओं का विस्तार से लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए बताते हैं कि लोकतांत्रिक बदलाव के वादे के अधूरे रह जाने ने कैसे राज्य सत्ता और नागरिक अधिकारों के बीच मौजूद नाज़ुक सन्तुलन को हिला दिया था। कैसे उग्र होते असन्तोष ने इन्दिरा गांधी की सत्ता को चुनौती दी और कैसे उन्होंने वैध नागरिक अधिकारों को निलम्बित करने के लिए क़ानून को ही अपना हथियार बनाया। जिसने भारत की राजनीतिक व्यवस्था पर कभी न मिटने वाले घाव के निशान छोड़े और निकट भविष्य में जाति और हिन्दू राष्ट्रवाद की राजनीति के लिए द्वार खोल दिये।
The Beliefs Of Arya Samaj
- Author Name:
Mahendra Arya
- Book Type:

- Description: The prime object of Arya Samaj is to do good to the whole world, i.e. to achieve physical, spiritual and social prosperity for all. —Swami Dayanand Sarswati What is Arya Samaj? May be a different kind of cult! They don’t believe in God! I heard—they worship only fire! They talk negative about others! They are not Hindus! So on! And so forth! So many misconceptions about Arya Samaj! This book is written to address all the queries pertaining to beliefs of Arya Samaj. The book gives point to point information about principles and practices of Arya Samaj. This book will be a handbook for all those readers who want to have a feel of Arya Samaj. It has all the answers—in short bullet points— as people want them in today’s life!
Patliputra Ki Kahani Patna Ki Zubaani
- Author Name:
Urmila Singh +1
- Book Type:

- Description: मेरा प्राचीन नाम पाटलिपुत्र है। मैं विश्वविख्यात नगर हूँ। मैं जितना पुराना हूँ, मेरी दास्तान भी उतनी ही मनोरंजक एवं पुरानी है। मैं करीब एक हजार वर्षों तक प्राचीन भारत की राजधानी रहा। मैंने समय-समय पर अनेक कालजयी सम्राटों, राजाओं, योद्धाओं, चिंतकों, विद्वानों, विचारकों, संतों, समाज-सुधारकों एवं राजनीतिज्ञें को पनपाया, जिनकी अमिट छाप संपूर्ण भारत पर ही नहीं, देश के बाहर विदेशों में भी देखी गई। मैं मौर्य तथा गुप्त साम्राज्यों की राजधानी बना। गंगा नदी के तट पर अवस्थित होने के कारण पाटलिपुत्र के बाहर के नगरों, अरब एवं यूरोपीय देशों के साथ मेरे व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध विकसित हुए। मैं बौद्ध एवं जैन धर्मों का प्रमुख केंद्र तो था ही, साथ ही दसवें सिख गुरु, ‘खालसापंथ’ के प्रवर्तक, गुरु गोविंद सिंह की जन्मभूमि रहा। आज मैं सिखों का प्रमुख तीर्थस्थान हूँ। इतिहास के पन्नों को पलटें तो पाएँगे कि अपना उत्थान-पतन मैंने जितनी बार देखा, उतना शायद और किसी नगर ने नहीं देखा होगा। अनेक बार मैं उजड़ा, बना, बसा और पुनः धराशायी हो गया। आज भी मेरे यहाँ की पुरानी भव्य इमारतें, मंदिर, मसजिद, मजार तथा भग्नावशेष बिन बोले मेरी कथा सुना रहे हैं। सत्ता के लिए महलों में होती साजिशोें, सत्ता परिवर्तनों, समय-समय पर विदेशी शासकों के मगध पर आधिपत्य जमाने के प्रयासों के पश्चात् पार्टी व्यवस्था की उथल-पुथल ने उद्वेलित किया। इसी का परिणाम है पुस्तक ‘पाटलिपुत्र की कहानी, पटना की जुबानी
Teesri Aankh
- Author Name:
Anil Joshi +1
- Book Type:

- Description: इतिहास तीसरी आँख होता है । मनुष्य की दो आँखें आगे देखती हैं, इतिहास की आँख पीछे देखती है। जो समाज जितना पीछे भूतकाल में देख सकता है, वह उतना आगे भविष्य में दूर तक विचार भी कर सकता है। जो धनुर्धर होता है, वह प्रत्यंचा को श्रुति यानी कान तक खींचता है, दूर संधान करने की कोशिश करता है। -धर्म की ग्लानि से इस राष्ट्र का दर्शन क्या है ? हमारे राष्ट्र का इतिहास क्या है? हमारे राष्ट्र की परंपरा क्या है ? हमारे राष्ट्र का वैशिष्ट्य क्या है ? हमारे राष्ट्र का उद्देश्य क्या है? हमारे राष्ट्र की विश्व- जगत् में विशेषता क्या है ? हमारे राष्ट्र का विश्व - दृष्टि से कर्तव्य क्या है ? वैश्विक जागृति में जिम्मेदारी क्या है? -डॉ. हेडगेवार और राष्ट्र दृष्टि से डॉ. अंबेडकर ने धारा 370 का विरोध किया और जब शेख अब्दुल्ला ने डॉ. अंबेडकर जी को कहा कि हमको कश्मीर के लिए कुछ अधिक अधिकार दीजिए तो डॉ. साहब ने शेख अब्दुल्ला से कहा, तुम चाहते हो कि भारत कश्मीर की रक्षा करे, कश्मीरियों को पूरे भारत में समान अधिकार मिले, पर भारत और भारतीयों को तुम कोई अधिकार नहीं देना चाहते। मैं भारत का कानून मंत्री हूँ और मैं अपने देश के साथ इस तरह की धोखाधड़ी और विश्वासघात करने में शामिल नहीं हो सकता । डॉ. भीमराव अंबेडकर : एक असाधारण बहुआयामी व्यक्तित्व से
Bharatiya Janata Party Ki Gauravgatha
- Author Name:
Shantanu Gupta
- Book Type:

- Description: 29 मार्च, 2015 को, 11 अशोक रोड स्थित भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पुराने कार्यालय में एक डिजिटल काउंटर आगे बढ़ता जा रहा था। पार्टी कार्यकर्ता, पदाधिकारी, यहाँ तक कि स्टाफ की नजरें भी डिजिटल स्क्रीन पर जमी थीं। स्क्रीन पर पार्टी की सदस्यता लेनेवालों की कुल संख्या दिख रही थी, जिन्हें पार्टी के नए ‘सदस्यता अभियान’ से जोड़ा जा रहा था। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अमित शाह उस दिन कार्यालय में ही थे। बालसुलभ उत्सुकता के साथ उनकी भी नजरें डिजिटल काउंटर पर ही गड़ी थीं। काउंटर जैसे ही अपने लक्ष्य पर पहुँचा, पूरा कार्यालय खुशी से झूम उठा। 8.8 करोड़ सदस्यों तक पहुँचते ही इसने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी को पीछे छोड़ दिया था। इस महत्त्वाकांक्षी सदस्यता अभियान के पीछे अमित शाह की ही सोच थी। यह कैसे संभव हुआ? क्या यह महज आँकड़े जुटाने का अभियान था, जिसने भाजपा के भाग्य को और बलवान बनाया, या इसके पीछे ऐसी सोच थी, जिसका समय आ चुका था? 1984 में लोकसभा में महज दो सीटों वाली पार्टी का विपक्ष को इस प्रकार बुरी तरह परास्त करना और इतना भीमकाय रूप लेना क्या मात्र मोदी-शाह की जोड़ी का कमाल है या इसके कारण हिंदुत्व आंदोलन की उस जटिलता की गहराई में छिपे हैं, जिसे लेकर काफी गलतफहमी है? इन प्रश्नों का उत्तर देने के लिए शांतनु गुप्ता भारत के दक्षिणपंथी आंदोलनों के इतिहास, उनकी वैचारिक उत्पत्ति से राष्ट्रवादी विचारों के विकास तक जाते हैं, और भाजपा पर एक समग्र अध्ययन को लेकर आते हैं, जो मात्र एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक वैचारिक संगठन है, जो इस देश के राष्ट्रवादी आंदोलन को इस प्रकार परिभाषित करता है, जैसा पहले कभी नहीं किया गया था।
Sakshibhav
- Author Name:
Narendra Modi
- Book Type:

- Description: સંવેદનશીલ કર્મયોગી નરેન્દ્ર મોદીની ડાયરી રૂપે લખાયેલી આ પ્રાર્થનાઓ છે. 1986ના અંતમાં આ મનવહીનો પ્રારંભ થયો છે. અહીં મનોજગતના સંઘર્ષની કથા, વ્યથા, અને ચિંતન છે। સ્વ સાથેનો સંવાદ, વિસંવાદ, મંથન, મથામણ અને સવાલ -જવાબ છે. મોટી વાત તો એ છે કે આમાં કોઈ દીનહીન ભાવ નથી, કોઈ માંગણી નથી પણ લાગણીનું અગાધ ઊંડાણ છે. માણસ જયારે કોઇપણ પ્રકારની મુશ્કેલીમાં હોય ત્યારે બધું જ જગતમાતાના ચરણમાં મૂકી દેવું અને નિરાધાર થયા વિના માતાની કૃપામાં પૂર્ણ શ્રદ્ધા રાખીને આવી પડેલી અવસ્થાને ઓળંગી જવી . આમ આ જે કઈ ભીતરનો સંવાદ છે તે કોઈ નિરાકારને સંબોધીને નહી પણ દ્રષ્ટિ સમક્ષ દર્શન આપતી જગદંબાને સંબોધીને કહેવાયેલી હ્રદયછૂટી વાત છે.
Bhartiya Rajniti Par Ek Drishti
- Author Name:
Kishan Patnayak
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक में आज़ादी के बाद की भारतीय राजनीति के परिदृश्य का उसके समस्त आयामों में गम्भीर विश्लेषण मिलता है। सम्यक् विश्लेषण के साथ-साथ लेखक ने आधुनिक राजनीति की सभी अवधारणाओं, मूल्यों, मान्यताओं, विधायिका-कार्यपालिका-न्यायपालिका आदि संस्थाओं, विविध प्रक्रियाओं-घटनाओं, नेताओं आदि पर अपना मत रखा है। आधुनिक राजनीति के बीजपदों—संविधान, लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता, समता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय, समाजवाद, गांधीवाद, साम्यवाद, राष्ट्र, राज्य, राष्ट्र-राज्य, राष्ट्रीय सम्प्रभुता, राष्ट्रीय अस्मिता, क्षेत्रीय अस्मिता, अन्तरराष्ट्रीयता, अर्थनीति, विदेशनीति, कूटनीति, उपनिवेशवाद, साम्राज्यवाद, तानाशाही, फासीवाद, साम्प्रदायिकता, जगतीकरण आदि का अर्थभेदन समता के विचार की ज़मीन पर खड़े होकर किया है। भारतीय के अलावा दुनिया की राजनीति पर भी पैनी और गहरी निगाह डाली है। भारत और दुनिया के प्राचीन राजनैतिक अनुभव और ज्ञान का हवाला भी कई जगह आया है।
किशन पटनायक इस दौर के ज़्यादातर बुद्धिजीवियों की तरह महज विश्लेषण के लिए विश्लेषण नहीं करते। वे देश के अकेले ऐसे चिन्तक हैं जिन्होंने उदारीकरण-ग्लोबीकरण के हमले की आहट सबसे पहले सुनी। भारत के राजनेताओं और बुद्धिजीवियों को चेतावनी देने के साथ उन्होंने देशव्यापी जनान्दोलनों की एकजुटता और राजनीतिकरण का निरन्तर प्रयास किया। इसी क्रम में उन्होंने भारत सहित दुनिया में तेज़ी से फैलते पूँजीवादी साम्राज्यवाद के मुक़ाबले एक वैकल्पिक विचारधारा (समाजवादी) गढ़ने का भी निरन्तर प्रयास किया। उनके बाक़ी लेखन के समान इस पुस्तक में भी वैकल्पिक विचारधारा के सूत्र और कार्यप्रणाली दर्ज हुए हैं।
पिछले पाँच वर्षों से चर्चा में चली आ रही ‘विकल्पहीन नहीं है दुनिया’ के बाद किशन पटनायक की यह दूसरी पुस्तक है। यूँ तो जीवन के सभी क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए यह पुस्तक पठनीय है, लेकिन परिवर्तनकारी सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए यह एक अपरिहार्य पुस्तक है। इसके साथ एक छोटी पुस्तक ‘किसान आन्दोलन : दशा और दिशा’ भी प्रकाशित हुई है।
Rashtra Aur Naitikata : Naye Bharat Se Uthte 100 Sawal
- Author Name:
Rajeev Bhargava
- Book Type:

- Description: भारत की सामूहिक नैतिक पहचान बहुत दबाव में है। हमारी सामूहिक भलाई किस चीज़ में है, इस पर देश में कोई आम सहमति नहीं दिखती। कुछ समूह मानते हैं कि भारत आख़िरकार अपनी हिन्दू पहचान को वापस पा रहा है और फिर से एक महान राष्ट्र-राज्य बनने की राह पर है। कुछ अन्य के लिए यह बदलाव हमें अपने उस सभ्यतागत चरित्र को गवाँ देने के कगार पर ला चुका है, जहाँ समावेशी होने का अर्थ कम हिन्दू या कम भारतीय होना नहीं था। राजीव भार्गव का मानना है कि एक समावेशी और बहुलतावादी भारत के विचार से जिन लोगों का भी मोहभंग हो चुका है, उनकी जायज़ चिन्ताओं को भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के खाँचे के भीतर ही सम्बोधित किया जा सकता है। अपने संक्षिप्त, सहज और सुबोध लेखों में वे पाठकों को भारतीय गणतंत्र के बुनियादी आख्यानों तक ले जाते हैं। वे यह बताने की कोशिश करते हैं कि अगर मूल नीतियों और नैतिक दृष्टि पर हमारी समझ सही बन पाई, तो हो सकता है कि हम अपने देश को और ज़्यादा ध्रुवीकरण से अब भी बचा ले जाएँ और साथ ही कुछ दरारों को भी भर सकें।
Jee...Vittamantri Jee...!
- Author Name:
Prakash Biyani
- Book Type:

- Description: Jee...Vittamantri Jee...!
Nagrikta Sanshodhan Adhiniyam Ke Virodh Ki Rajneeti
- Author Name:
Dr. Kuldip Chand Agnihotri
- Book Type:

- Description: भारत के नागरिकता अधिनियम में हुए संशोधन (नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019) को लेकर देश भर में बहस शुरू हो गई। इस संशोधन के द्वारा पाकिस्तान, अफगानिस्तान व बँगलादेश से भारत में आ चुके अल्पसंख्यक समुदाय के नागरिकों को भारतीय नागरिकता देने का प्रावधान है। विरोध करनेवाले दो समूह हैं। पहला ऐसा समूह, जो विरोध में अपना राजनीतिक स्वार्थ देखता है। दूसरा ऐसा समूह, जो जानबूझकर या फिर अनजाने में संशोधन को लेकर भ्रम का शिकार हो गया है। वह इस संशोधन को नागरिकों के राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के साथ नत्थी करके देखता है, जबकि दोनों का आपस में कुछ लेना-देना नहीं है। आज सत्तर साल बाद नरेंद्र मोदी ने इस शरणार्थी हिंदू समाज, अफगानी हिंदू-सिख समाज और भारतीय नागरिकता के बीच नेहरू और उनकी पार्टी द्वारा खड़ी की गई दीवार को तोड़ दिया है। यह कांग्रेस द्वारा किए गए भारत विभाजन से उपजे पाप के एक दाग को धोने का ऐतिहासिक फैसला है, लेकिन इसे क्या कहा जाए, कि आज कांग्रेस और मुसलिम लीग मिलकर एक बार फिर पाप की उस दीवार को बचाने का प्रयास कर रही हैं। प्रस्तुत पुस्तक में इस समस्या का भारत विभाजन के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
Pracheen Bharat "Prashant Gaurav"
- Author Name:
Prashant Gaurav
- Book Type:

-
Description:
भारतीय इतिहास का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण काल प्राचीनकाल है। राजनीति, अर्थव्यवस्था, कला, संस्कृति एवं विज्ञान के क्षेत्र में इस काल का योगदान अमूल्य है। प्राचीन इतिहास के अध्ययन का मिज़ाज बदला है। संस्कृति और सभ्यता को विकसित करने में राजा–रानी, सामन्त–मंत्री, सेना आदि से ज़्यादा महत्त्वपूर्ण अब विज्ञान और प्रौद्योगिकी को स्वीकारा जाने लगा है। परम्परा को जीवित रखने अथवा उसमें अदलाव–बदलाव लाने में ग़रीबों, शिल्पकारों, मज़दूरों और स्त्रियों की भूमिका के वैज्ञानिक महत्त्व को समझने–जानने को आवश्यक माना जाने लगा है। फलस्वरूप प्राचीन इतिहास का परम्परावादी रूप राष्ट्रीय–अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बदला है। प्रस्तुत पुस्तक इन सभी नवीन तत्त्वों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसमें नकारात्मक पहलुओं पर कम ध्यान देते हुए सकारात्मक और मुख्यधारा से जुड़े तथ्यों तथा नवीन शोध परिणामों को प्रस्तुत करने का ज़्यादा प्रयास किया गया है। प्राचीनकाल के किन–किन विशेषताओं का अस्तित्व आधुनिककाल में महत्त्वपूर्ण रूप में बना हुआ है, क्या है योगदान प्राचीनकाल का—इन पर बेहतर और नवीन प्रकाश डालने का प्रयास इस पुस्तक में किया गया है।
‘भारतीय परिधान की प्राचीनता और विकास के चरण’, ‘प्राचीन और आधुनिककाल के बीच निरन्तरता’, ‘कला के विकास में विज्ञान की भूमिका’, ‘नगरीकरण का प्रथम एवं द्वितीय चरण’, ‘प्राचीन श्रृंगार की उपस्थिति आधुनिककाल में’ जैसे चन्द महत्त्वपूर्ण अध्यायों को पुस्तक में प्रस्तुत किया गया है। प्राचीन भारत के इतिहास लेखन में सम्भवत: यह पहला प्रयास है।
केन्द्रीय प्रतियोगी परीक्षाओं, प्रान्तीय प्रतियोगी परीक्षाओं और दिल्ली तथा पटना विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत पुस्तक को तैयार किया गया है। विश्वास है, छात्रों के लिए यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।
Jab Neel Ka Daag Mita : Champaran-1917
- Author Name:
Pushyamitra
- Book Type:

-
Description:
सन् 1917 का चम्पारण सत्याग्रह भारतीय स्वतंत्रता आन्दोलन में महात्मा गांधी के अवतरण की अनन्य प्रस्तावना है, जिसका दिलचस्प वृत्तान्त यह पुस्तक प्रस्तुत करती है।
गांधी नीलहे अंग्रेज़ों के अकल्पनीय अत्याचारों से पीड़ित चम्पारण के किसानों का दु:ख-दर्द सुनकर उनकी मदद करने के इरादे से वहाँ गए थे। वहाँ उन्होंने जो कुछ देखा, महसूस किया वह शोषण और पराधीनता की पराकाष्ठा थी, जबकि इसके प्रतिकार में उन्होंने जो कदम उठाया वह अधिकार प्राप्ति के लिए किए जानेवाले पारम्परिक संघर्ष से आगे बढ़कर 'सत्याग्रह’ के रूप में सामने आया। अहिंसा उसकी बुनियाद थी।
सत्य और अहिंसा पर आधारित सत्याग्रह का प्रयोग गांधी हालाँकि दक्षिण अफ़्रीका में ही कर चुके थे, लेकिन भारत में इसका पहला प्रयोग उन्होंने चम्पारण में ही किया। यह सफल भी रहा। चम्पारण के किसानों को नील की ज़बरिया खेती से मुक्ति मिल गई, लेकिन यह कोई आसान लड़ाई नहीं थी।
नीलहों के अत्याचार से किसानों की मुक्ति के साथ-साथ स्वराज प्राप्ति की दिशा में एक नए प्रस्थान की शुरुआत भी गांधी ने यहीं से की। यह पुस्तक गांधी के चम्पारण आगमन के पहले की उन परिस्थितियों का बारीक ब्यौरा भी देती है, जिनके कारण वहाँ के किसानों को अन्तत: नीलहे अंग्रेज़ों का रैयत बनना पड़ा।
इसमें हमें अनेक ऐसे लोगों के चेहरे दिखलाई पड़ते हैं, जिनका शायद ही कोई ज़िक्र करता है, लेकिन जो सम्पूर्ण अर्थों में स्वतंत्रता सेनानी थे।
इसका एक रोचक पक्ष उन किंवदन्तियों और दावों का तथ्यपरक विश्लेषण है, जो चम्पारण सत्याग्रह के विभिन्न सेनानियों की भूमिका पर गुज़रते वक़्त के साथ जमी धूल के कारण पैदा हुए हैं।
सीधी-सादी भाषा में लिखी गई इस पुस्तक में क़िस्सागोई की सी सहजता से बातें रखी गई हैं, लेकिन लेखक ने हर जगह तथ्यपरकता का ख़याल रखा है।
Chunav 2019 : Kahani Modi 2.0 Ki
- Author Name:
Aaku Shrivastava
- Book Type:

- Description: वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रचार की शुरुआत सब दलों ने विकास की बातों से की, लेकिन प्रचार जब चरम पर पहुँचा तो यह एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने पर केंद्रित हो गया। यहाँ तक कि नेताओं के बिगड़े बोलों से आजिज आकर सुप्रीम कोर्ट को चुनाव आयोग को निर्देश देने पड़े। दूसरी ओर चुनाव आयोग की भूमिका पर भी खूब सवाल उठाए गए। ई.वी.एम. की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। चुनाव प्रचार निम्न स्तर पर पहुँच गया था। इस तरह से वर्ष 2019 का चुनाव पिछले सत्तर वर्षों में एक अलग ही तरह का चुनाव देखा गया। इस चुनाव में प्रचार के पारंपरिक तरीके तो गायब हुए ही, जनता के सरोकार भी बहुत पीछे छूट गए। इसके अलावा इस लोकसभा चुनाव में कई ऐसे सवाल खड़े किए, जो 2014 में उठाए गए थे। कुछ के जवाब मिले, कुछ ने और सवालों को जन्म दिया; कुछ भुला दिए गए तो कुछ बहस का मुद्दा बन गए। क्या भविष्य होगा, इन सवालों का और उनके जवाबों का—इसी पर एक गहन चर्चा इस पुस्तक में की गई है।.
Chakravarty Samrat Ashok
- Author Name:
Rachna Bhola Yamini
- Book Type:

- Description: इतिहास में सम्राट् अशोक को दो चीजों के लिए याद किया जाता है—एक, कलिंग के युद्ध के लिए और दूसरा, भारत के बाहर की दुनिया में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए। अपने आरंभिक दिनों में अशोक बहुत क्रूर राजा था। अपने निष्कंटक राज्य के लिए उसने अपने सौतेले भाइयों को मरवा दिया था। उसके इन क्रूर कारनामों के कारण उसे ‘चंड अशोक’ कहा जाने लगा था। उसने एक के बाद एक राज्य जीता और साम्राज्यवाद की अपनी महत्त्वाकांक्षा को सींचता रहा। उसका राज्य भारत के पार दक्षिण एशिया और पर्शिया तक को छूने लगा। आखिर कलिंग का युद्ध हुआ। इसमें भी अशोक को जीत मिली। लेकिन इस युद्ध में दोनों पक्षों के एक-एक लाख लोग मारे गए और इससे भी ज्यादा बेघर हो गए। कलिंग युद्ध में हुए महाविनाश से विचलित हो गया। उसने बौद्ध धर्म ग्रहण कर लिया। उसने जनकल्याण के कार्य आरंभ कर दिए और राजसी भोग-विलास का परित्याग कर दिया। उसने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। सम्राट् अशोक के शौर्य, युद्धकौशल विजय अभियानों और दानव से मानव बनने की मार्मिक कथा प्रस्तुत करनेवाली एक पठनीय पुस्तक।
Aahuti
- Author Name:
Ed.Sanju Sadanandan +1
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Shalbhanjika
- Author Name:
Uday Narayan Rai
- Book Type:

-
Description:
‘शालभञ्जिका’ शब्द प्राचीन भारतीय कला की एक विशेष लोकप्रिय ललित मुद्रा का वाचक था। इसके ज्वलन्त उदाहरण भारत के विविध ऐतिहासिक केन्द्रों से प्राप्य हैं, जिसमें उच्चित्रित सुन्दरी अपने एक हाथ से वृक्ष-शाखा को नमित एवं दूसरा कटि-प्रदेश पर अलम्बित करती त्रिभङ्ग मुद्रा में विलसित है। कला के अतिरिक्त संस्कृत, पालि एवं प्राकृत साहित्य में भी इस ललित कला-मुद्रा का प्रचुर निरूपण प्राप्य है। इससे विशेष रूप से प्रभावित होनेवाले कवियों, लेखकों एवं समीक्षकों में अश्वघोष, कालिदास, श्रीहर्ष, बाणभट्ट, राजशेखर एवं गोवर्द्धनाचार्य उल्लेखनीय हैं। इनके ग्रन्थों में प्राप्य तत्सम्बन्धी विवरण कला, इतिहास एवं दर्शन की दृष्टि से रोचक, सारगर्भित एवं ज्ञानवर्द्धक हैं।
भारतीय कला के मर्मज्ञ डॉ. उदय नारायण राय ने प्राचीन ग्रन्थों का मन्थन कर साहित्यिक एवं पुरातत्त्वीय साक्ष्यों में सुन्दर सामंजस्य स्थापित करते हुए प्रस्तुत ग्रन्थ में इस ललित कला-मुद्रा का विस्तृत ऐतिहासिक परिचय एकत्र उपलब्ध कराने का अभिमत प्रयास किया है।
Pracheen Vishwa Ka Uday Evam Vikas
- Author Name:
Om Prakash Prasad
- Book Type:

-
Description:
विश्व-इतिहास का निर्माण जिन लोगों ने किया, उन्हें निम्न पशुमानव, निर्धन, अनपढ़, अर्धनग्न, जंगली और आदिवासी के नाम से पहचाना गया। इतिहासकार उन्हें विश्व का आविष्कर्ता और प्रारम्भिक वैज्ञानिक मानते हैं। भारत, मिस्र, मेसापोटामिया, चीन, यूनान, और रोम की सभ्यताओं का उदय और विकास उन्हीं के प्रयासों का परिणाम है।
जिस सूत्र से ये सभी सभ्यताएँ परस्पर सम्बद्ध रहीं, वह सूत्र है—इस पुस्तक में मानव-विकास के विभिन्न चरणों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए जिन पहलुओं पर विशेष दृष्टिपात किया गया है, उनमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रमुख हैं। इस क्रम में पुस्तक यह भी स्पष्ट करती है कि अखिल विश्व में एकता और परस्पर-निर्भरता का आधार सबसे ज़्यादा वैज्ञानिक उपकरणों ने तैयार किया। विज्ञान के साथ-साथ विद्वान इतिहासकार ने इस कृति में समय-समय पर अस्तित्व में आए धर्मों की भी जानकारी दी है।
पुस्तक के अन्त में दी गई शब्दावली विशेष रूप से उपयोगी है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book