Bhartiya Sanskriti Sabhi Ke Liye
(0)
Author:
Shobhita Punja, Poornima DuttPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
History-and-politics₹
399
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सहस्राब्दियों के भारतीय इतिहास, भारतीय संस्कृति के विस्तार, और देश के सार को आकर्षक और पाठकों के लिए बोधगम्य स्वरूप में प्रस्तुत करना कोई मामूली काम नहीं है। इन्टैक ने इस पुस्तक को रचनात्मक और सुंदर स्वरूप में तैयार किया है, और इन्टैक उम्मीद करता है कि भारतीय विरासत पर आशुजानकारी पाने के इच्छुक लोग इसे बहुत पसंद करेंगे। इस पुस्तक में उल्लेखित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ, जिन्होंने उपमहाद्वीप के वर्तमान स्वरूप को आकार दिया है; कलात्मक परंपराओं और धर्मों के अभिन्न पहलुओं की स्पष्ट व्याख्याएँ, जो इस विविध रूपी और आकर्षक भूमि का निर्माण करती हैं, भारत के अध्ययन, समझ और सराहना में रुचि रखने वालों के लिए इसे एक आवश्यक संदर्भ पुस्तक बनाती हैं।
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सहस्राब्दियों के भारतीय इतिहास, भारतीय संस्कृति के विस्तार, और देश के सार को आकर्षक और पाठकों के लिए बोधगम्य स्वरूप में प्रस्तुत करना कोई मामूली काम नहीं है। इन्टैक ने इस पुस्तक को रचनात्मक और सुंदर स्वरूप में तैयार किया है, और इन्टैक उम्मीद करता है कि भारतीय विरासत पर आशुजानकारी पाने के इच्छुक लोग इसे बहुत पसंद करेंगे। इस पुस्तक में उल्लेखित महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाएँ, जिन्होंने उपमहाद्वीप के वर्तमान स्वरूप को आकार दिया है; कलात्मक परंपराओं और धर्मों के अभिन्न पहलुओं की स्पष्ट व्याख्याएँ, जो इस विविध रूपी और आकर्षक भूमि का निर्माण करती हैं, भारत के अध्ययन, समझ और सराहना में रुचि रखने वालों के लिए इसे एक आवश्यक संदर्भ पुस्तक बनाती हैं।
Book Details
-
ISBN9789354472909
-
Pages96
-
Avg Reading Time3 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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Description:
हमारा विश्व आज जिन स्थितियों से गुज़र रहा है, वे सारी स्थितियाँ केवल आर्थिक और राजनीतिक ही नहीं, वरन् सांस्कृतिक चिन्ता का विषय भी हैं। भले ही यह कहा जा रहा हो या मान लिया गया हो कि सोवियत रूस के पतन के बाद, विश्व अब द्वि-ध्रुवीय नहीं रह गया है, किन्तु अपने वर्तमान को समझने और विभिन्न भटकावों के बीच से सही मार्ग खोजने के लिए उन प्रभाव-शक्तियों का अवलोकन-प्रत्यावलोकन करना आवश्यक है, जिनका एक सुदीर्घ इतिहास है।
विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं से लेकर आज तक मानव-सभ्यता के विकास के जो भी चरण रहे हैं, उनमें कहाँ-कहाँ कौन-कौन-सी प्रभाव-शक्तियाँ परस्पर सहयोग की भूमिका में रहीं, और कौन-कौन प्रतिस्पर्द्धा या प्रतियोगिता की भूमिका में रहीं, यह हम समझते चलें तो सम्भव है, भविष्य के लिए अपना सही मार्ग चुनने में हमारी सहायता करनेवाली प्रेरणाएँ हमें अपने वर्तमान में मिल सकें।
विभिन्न समाजों की अपनी-अपनी संस्कृतियों की परिधि में, राजसत्ताओं-धर्मतंत्रों ने (और आगे चलकर विकसित होनेवाली लोकतंत्रात्मक सत्ताओं ने भी) किन-किन तत्त्वों या वर्गों को प्रश्रय दिया और प्रश्रय-प्राप्त तत्त्वों या वर्गों ने समाज को कितनी गति दी या कितने अवरोध उपस्थित किए, यह सब लक्षित करने के मूल में इस लेखक का उद्देश्य यह रहा है कि मानवीय मूल्यों के ह्रास और विकास, दोनों के वस्तुगत पक्ष सामने लाए जा सकें जिससे मनुष्य—व्यक्ति और समाज—दोनों रूपों में अपने दायित्व और अपने स्वातंत्र्य के अविच्छिन्न सम्बन्धों को आत्मसात् कर सके।
—भूमिका से
Ajay Hum
- Author Name:
Yuval Noah Harari
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Description:
हम शेरों जैसे ताक़तवर नहीं हैं,
न डॉल्फिन की तरह तैर सकते हैं,
और निश्चय ही हमारे पंख भी नहीं हैं!
तो फिर हमने इस दुनिया पर राज कैसे किया?
इसका जवाब एक ऐसी अजीब कहानी में है, जो शायद ही फिर कभी सुनने को मिले. वह भी एक सच्ची कहानी!
कभी आपके दिमाग़ में यह सवाल पैदा हुआ कि हमने यह मुक़ाम कैसे हासिल किया?
हाथियों ने शिकार से लेकर स्मार्ट फोन चलाने तक का सफ़र?
आखिर कैसे बने हम...अजेय?
इसके पीछे की सच्चाई यह है कि हमारे पास एक सुपर पावर है.
और वह यह कि - हम कहानियाँ गढ़ सकते हैं.
यह ऐसा इतिहास है जिसे आपने पहले कभी अनुभव नहीं किया होगा.
जानिए कि कैसे क़िस्सागोई की इस अनोखी ख़ूबी का इस्तेमाल हमने अच्छाई-बुराई को समझने और दुनिया पर
राज करने के लिए किया.
और जानिए कि दुनिया को बदल देने की यह ताक़त हासिल कैसे हुई?
हरारी युवा पाठकों को साथ लेकर मानव जाति के इतिहास की यात्रा पर निकले हैं. रोमांचक तथ्य और जानदार
चित्रांकन के ज़रिए विस्तृत और उलझे हुए विषय को ख़ूबसूरती से पेश करते हैं.
सबीना रादेवा, ‘ओरिजिन ऑफ़ स्पीशीज़’ की लेखिका
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