Sambhaji Maharaj (Hindi Translation of Life and Death of Sambhaji)
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Author:
Medha Deshmukh BhaskaranPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
Historical-fiction₹
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संभाजी महाराज की नजर महादजी की ओर जाती है। यह सही बातें कहने और करने का समय है। अभी वे जो करेंगे, वह उनके देश की नियति बदल देगा। वे मराठी में कहते हैं, ''महादजी, आबा साहिब ने हर सैनिक के जीवन का सम्मान किया। वे चाहते थे कि हम बेवजह शहादत से बचें और जीवित रहें, ताकि हम स्वराज के लिए, मराठा राष्ट्र के लिए एक और लड़ाई लड़ सकें, लेकिन उन्होंने कभी भी मराठा राष्ट्र के बदले में जीवन को गले नहीं लगाया होता। संभाजी महाराज फर्श पर एक ढेर की तरह गिर जाते हैं। वे जानते हैं कि कुछ ही दिनों में उनकी आँखें निकाल ली जाएँगी। लेकिन औरंगजेब बस इतना ही कर सकता है। संभाजी महाराज मराठों के दिलों में एक आग जला जाएँगे और वे दावानल में बदल जाएँगे, जो औरंगजेब के सपनों को जलाकर राख कर देंगे। युद्ध चलता रहेगा लेकिन वह कभी दक्कन नहीं जीत पाएगा। —इसी पुस्तक से छत्रपति शिवाजी महाराज के उतने ही प्रतापी पुत्र संभाजी महाराज के शौर्य और पराक्रम की यशोगाथा बताती अनुपम कृति। आक्रांताओं के दाँत खट्टे कर मराठा स्वाभिमान को जाग्रत करने में संभाजी महाराज के योगदान को रेखांकित करनेवाली कृति। हर भारतीय के राष्ट्रभाव को जाग्रत करनेवाली पठनीय कृति।
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संभाजी महाराज की नजर महादजी की ओर जाती है। यह सही बातें कहने और करने का समय है। अभी वे जो करेंगे, वह उनके देश की नियति बदल देगा। वे मराठी में कहते हैं, ''महादजी, आबा साहिब ने हर सैनिक के जीवन का सम्मान किया। वे चाहते थे कि हम बेवजह शहादत से बचें और जीवित रहें, ताकि हम स्वराज के लिए, मराठा राष्ट्र के लिए एक और लड़ाई लड़ सकें, लेकिन उन्होंने कभी भी मराठा राष्ट्र के बदले में जीवन को गले नहीं लगाया होता।
संभाजी महाराज फर्श पर एक ढेर की तरह गिर जाते हैं। वे जानते हैं कि कुछ ही दिनों में उनकी आँखें निकाल ली जाएँगी। लेकिन औरंगजेब बस इतना ही कर सकता है। संभाजी महाराज मराठों के दिलों में एक आग जला जाएँगे और वे दावानल में बदल जाएँगे, जो औरंगजेब के सपनों को जलाकर राख कर देंगे। युद्ध चलता रहेगा लेकिन वह कभी दक्कन नहीं जीत पाएगा।
—इसी पुस्तक से
छत्रपति शिवाजी महाराज के उतने ही प्रतापी पुत्र संभाजी महाराज के शौर्य और पराक्रम की यशोगाथा बताती अनुपम कृति। आक्रांताओं के दाँत खट्टे कर मराठा स्वाभिमान को जाग्रत करने में संभाजी महाराज के योगदान को रेखांकित करनेवाली कृति। हर भारतीय के राष्ट्रभाव को जाग्रत करनेवाली पठनीय कृति।
Book Details
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ISBN9789355212290
-
Pages448
-
Avg Reading Time15 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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भगत सिंह को फाँसी-1 यह कैसे हुआ कि मामूली हथियारों से लैस कुछ नौजवानों को ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया, जिसके चलते उन्हें उम्रकैद और फाँसी की सजा हुई! ‘युद्ध’, जो उन्होंने लड़ा हालाँकि ‘‘यह युद्ध उपनिवेशवादियों व पूँजीपतियों के विरुद्ध लड़ा गया।’’ और जो ‘‘ न ही यह हमारे साथ शुरू हुआ और न ही यह हमारे जीवन के साथ खत्म होगा।’’ और, मात्र 30 महीने की उल्लेखनीय अवधि में 8-9 सितम्बर 1928 को ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन’ की स्थापना के साथ शुरू होकर, यह सम्पन्न हो गया। विश्वास से भरपूर भगत सिंह के शब्द थे, कि ‘‘मैं अपने देश के करोड़ों लोगों की ‘इंकलाब जिंदाबाद’ की हुंकार सुन पा रहा हूँ। काल-कोठरी की मोटी दीवारो के पीछे बैठे हुए भी मुझे कहै कि यह नारा हमारे स्वतंत्राता संघर्ष को प्रेरणा देता रहेगा।’’ इस पुस्तक में प्रस्तुत है इसका प्रथमद्रष्टया विवरण।
Ambapali: A Novel
- Author Name:
Tanushree Podder
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Not every courtesan has gone down in the annals of history like Ambapali. She was beautiful, intelligent, talented and, as the nagarvadhu janpad kalyani-the bride of the city-she went on to wield immense power amongst the nobles. Until she renounced all worldly pleasures to embrace Buddhism. This vivid narrative tells the story of a young woman forced to follow a path because of the machinations of powerful people. Propelled onto the cultural centerstage in the Vajji republic against her wishes, betrayed in love, disappointed by friends, Ambapali’s is yet the story of a strong woman determined to take control over her life. A remarkable, poignant novel about the dazzling glamour, daring romance, and sacrifice that marked Ambapali’s life.
Thengphakhri Tehsildar Kee Tambewali Talwar
- Author Name:
Indira Goswami
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‘थेंगफाखरी तहसीलदार की ताँबेवाली तलवार’ उन्नीसवीं सदी के उत्तरार्द्ध में असम में बसी बोडो जनजाति की प्रथम महिला स्वतंत्रता सेनानी और ब्रिटिशकालीन भारत की पहली महिला तहसीलदार थेंगफाखरी के जीवन पर आधारित उपन्यास है। इन्दिरा गोस्वामी ने भारत के पूर्वोत्तर अंचल में प्रचलित जनश्रुतियों और उपलब्ध ऐतिहासिक साक्ष्यों के आधार पर, थेंगफाखरी के गुमनाम हो चुके असाधारण व्यक्तित्व को साकार किया है। जब असम में सामाजिक-राजनीतिक स्तर पर एक अस्पष्टता व्याप्त थी और अलग बोडोलैंड के लिए ‘डिवाइड असम फिफ्टी-फिफ्टी’ का नारा गूँज रहा था, वैसे समय में इन्दिरा ने यह उपन्यास लिखकर असमिया और बोडो संस्कृतियों और भाषाओं के मध्य प्रशंसनीय सेतुबन्धन किया। यह उपन्यास थेंगफाखरी के अदम्य साहस और भारतीय स्वाधीनता आन्दोलन में निचले असम के बिजनी राज्य के महत्त्वपूर्ण योगदान से परिचित कराता है। औपनिवेशिक शासन के दौरान थेंगफाखरी का तहसीलदार के पद पर नियुक्त होना जहाँ महिला सशक्तीकरण की मिसाल पेश करता है, वहीं अंग्रेज़ों के विरुद्ध क्रान्तिकारी के रूप में थेंगफाखरी के रूपान्तरण से ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियों का पर्दाफ़ाश भी करता है। उपन्यास में औपनिवेशिक शासन के दौरान असम के सुदूर गाँवों में बसे, सरकारी करों की भीषण मार झेलते ग़रीब किसानों की मानसिक-शारीरिक यंत्रणा मार्मिक ढंग से उजागर हुई है। इसमें सन्देह नहीं कि यह उपन्यास हिन्दी पाठकों को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक अल्पज्ञात अध्याय से रू-ब-रू कराएगा, बल्कि विविधता में एकता को अपनी राष्ट्रीय शक्ति मानने वाली भारतीय दृष्टि को और दृढ़ता प्रदान करेगा।
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