Uttarkatha : Vol. 1-2
Author:
Shri Naresh MehtaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Historical-fiction0 Ratings
Price: ₹ 880
₹
1100
Available
कालजयी उपन्यास यह ‘पथ बन्धु था’ के बाद भारतीय जीवन का सर्वांगीण परिप्रेक्ष्य प्रस्तुत करनेवाला यह उपन्यास ‘उत्तरकथा’ आधुनिक कथा-साहित्य की न केवल निष्णात ही, बल्कि सम्पूर्ण सांस्कृतिक औपन्यासिक कृति है।
स्वरूप का नहीं, प्रयोजन का नाम है महाकाव्य। आज उपन्यास ही महाकाव्य है, एतदर्थ ‘उत्तरकथा' महाकाव्य भी है। देश और काल के विशाल फलक पर चलते साधारण मनुष्य की बड़ी-छोटी परछाइयाँ ही यह संसार है। जब इसी मानवीय संसार की यथार्थता को प्रयोजन-दृष्टि प्राप्त हो जाती है तब मनुष्य सृष्टि मात्र, प्राणि मात्र का प्रतिनिधित्व करनेवाला 'पुरुष' हो जाता है। बड़ी रचनात्मकता कभी भी केवल यथार्थ को ही अन्तिम नहीं मान सकती, क्योंकि मनुष्य की रचना उदात्तता के लिए ही हुई है।
इस प्रथम खंड के सारे साधारण एवं अनाम पात्र कोई बड़ा कार्य नहीं करते परन्तु रोज का तपता हुआ जीवन जीते हैं। यह साधारण उदात्तता प्रकारान्तर से हमें भी पूर्ण बनाती है। दूसरे खंड में जब परिवेश का दबाव और अधिक गहराएगा तब मानवीय विवशता तथा व्यवहार के जल का परिवृत्त और भी सुदूर के तटों तक लहराएगा। यह शती मनुष्य की परीक्षा की शती रही है जिसमें अनाम लोगों की साधारणता, विश्वास खंडित एवं क्षत-विक्षत हुए हैं। इस मानवीय जय-पराजय की गाथा से बड़ी कौन-सी भागवत है?
ISBN: 9788180310447
Pages: 514
Avg Reading Time: 17 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Ramayan Mahan Bhartiya Sangharsh Gatha
- Author Name:
Hemant Dwivedi
- Book Type:

- Description: ‘रामायण : महान भारतीय संघर्षगाथा’ राम के दण्डकवन भ्रमण की कहानी है। विश्व की सबसे सरल एवं सबसे विख्यात कहानी। यह अयोध्या के युवराज राम द्वारा महामानव राम के शोध का परावर्तन है। दलितों, वंचितों, वनवासियों के सुख-दुःख, राग-विराग, घृणा-प्रेम, दीनता, संकल्प के अनुसन्धान का प्रतिफल है जिसकी धड़कन में राम लगातार धड़कते हैं। तभी तो राम-जानकी सम्पूर्ण भारत के नर-नारियों, बूढ़े-बच्चों के हृदय में रहने लगे। राम का जन्म तो कहीं भी हो सकता है। लेकिन राम तब निखरता है जब लाखों वंचितों के हित में दण्डक के दुर्गम पठारों को अपनी युवावस्था समर्पित कर दे। तब चलती है भूर्जपत्र पर आदिकवि की लेखनी।
Hardaul
- Author Name:
Vandana Awasthi Dubey
- Book Type:

- Description: This book has no description
Revenge And Reconciliation : Understanding South Asian History
- Author Name:
Rajmohan Gandhi
- Rating:
- Book Type:

- Description: In this remarkable study, well-known biographer Rajmohan Gandhi, underscoring the prominence in the Mahabharata of the revenge impulse, follows its trajectory in South Asian history. Side by side, he traces the role played by reconcilers up to present times, beginning with the Buddha, Mahavira and Asoka. His explanation of the 1947 division of India identifies the role of the 1857 Rebellion in shaping Gandhi’s thinking and strategy, and reflects on the wounds of Partition. The survey of post-Independence India, Pakistan, Bangladesh and Sri Lanka also touches upon the tragic bereavements of six of their women leaders.
Varun te Bahirjee
- Author Name:
Ravi Amale
- Book Type:

- Description: हा शोध आहे बहिर्जी नाईक यांचा. छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या हेरप्रमुखाचा आणि त्याच बरोबर शिवरायांच्या हेरसंस्थेचा. शिवरायांची ही हेरव्यवस्था कशी होती? तिचे स्वरूप कसे होते, तिची व्याप्ती किती होती? मुख्य म्हणजे त्यामागील विचार कोणता होता? अनेक प्रश्न. त्यांची उत्तरे शोधताना आपल्याला जावे लागते भारतीय राजनीतिच्या प्राचीन इतिहासात, हेरगिरीच्या प्राचीन परंपरांकडे, ऋग्वेद, रामायण, महाभारत, कौटिल्य, कामंदक, संत तिरुवळ्ळुवर, कृष्णदेवराय आणि अगदी कुराण आणि पैगंबरांकडेही. ‘वरुण ते बहिर्जी’ आख्यायिका, दंतकथा, फेककथा यापलीकडे जाऊन घेतलेला हा हेरगिरीच्या विचारप्रवाहाचा वेध. Varun te Bahirjee | Ravi Amale वरुण ते बहिर्जी । रवि आमले
Chhaha Swarnim Pristha
- Author Name:
Vinayak Damodar Savarkar
- Book Type:

- Description: भारतीय वाड.मय में सावरकर साहित्य का महत्त्वपूर्ण स्थान है। मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए प्राण हथेली पर रखकर जूझनेवाले महान् क्रांतिकारी; जातिभेद, अस्पृश्यता, अंधश्रद्धा जैसी सामाजिक बुराइयों को समूल नष्ट करने का आग्रह रखनेवाले स्वातंत्र्यवीर सावरकर ने इस ग्रंथ में भारतीय इतिहास पर विहंगम दृष्टि डाली है। विद्वानों में सावरकर लिखित इतिहास जितना प्रामाणिक और निष्पक्ष माना गया है उतना अन्य लेखकों का नहीं। प्रस्तुत ग्रंथ ‘छह स्वर्णिम पृष्ठ’ में हिंदू राष्ट्र के इतिहास का प्रथम स्वर्णिम पृष्ठ है यवन-विजेता सम्राट् चंद्रगुप्त की राजमुद्रा से अंकित पृष्ठ, यवनांतक सम्राट् पुष्यमित्र की राजमुद्रा से अंकित पृष्ठ भारतीय इतिहास का द्वितीय स्वर्णिम पृष्ठ, सम्राट् विक्रमादित्य की राजमुद्रा से अंकित पृष्ठ इतिहास का तृतीय स्वर्णिम पृष्ठ है। हूणांतक राजा यशोधर्मा के पराक्रम से उद्दीप्त पृष्ठ इतिहास का चतुर्थ स्वर्णिम पृष्ठ, मुसलिम शासकों के साथ निरंतर चलते संघर्ष और उसमें मराठों द्वारा मुसलिम सत्ता के अंत को हिंदू इतिहास का पंचम स्वर्णिम पृष्ठ कह सकते हैं और अंतिम स्वर्णिम पृष्ठ है अंग्रेजी सत्ता को उखाड़कर स्वातंत्र्य प्राप्त करना। विश्वास है, क्रांतिवीर सावरकर के पूर्व ग्रंथों की भाँति इस ग्रंथ का भी भरपूर स्वागत होगा। सुधी पाठक भारतीय इतिहास का सम्यक् रूप में अध्ययन कर इतिहास के अनेक अनछुए पहलुओं और घटनाओं से परिचित होंगे।
The Raja The Rebel and The Monk
- Author Name:
J. N. Sinha
- Book Type:

- Description: In late eighteenth century India, an obscure king who ruled over Huseypur in northwest Bihar, challenged the might of the British. When overpowered by the East India Company forces, he escaped into the jungles of Gorakhpur, raised a people’s army and fought a guerilla war against them for nearly thirty years. Beaten many times, he always bounced back and did not surrender ever. He was Maharaja Fateh Bahadur Sahi. A warrior, patriot and innovator, Sahi visualised the dangers of impending imperialism and rose to meet the challenge. He devised new war logistics and resorted to guerilla warfare, including ascetics, destitute and bandits in his unique army. This happened years before the Indian Revolt of 1857 and the revolutions in America and France. Mainstream history is yet to look at him, but in the middle-Ganga valley, Sahi is remembered as a folk hero and a people’s king. This work is an effort to unravel Sahi’s unusual life. How did he operate and survive for so long? Could he be considered the progenitor of India’s first war of independence? The Raja, the Rebel and the Monk attempts to answer.
Bhagat Singh Ko Fansi : Vol. 2
- Author Name:
Rajwanti Mann +1
- Book Type:

- Description: यह पुस्तक ‘भगत सिंह को फांसी-1’ का ही दूसरा भाग है। इसमें लाहौर साज़िश केस के दौरान हुई 457 गवाहियों में से महत्त्वपूर्ण गवाहियों के तो पूर्ण विवरण दिए गए हैं, जबकि शेष गवाहियों के तथ्य-सार दिए गए हैं। शहीद सुखदेव ने इस दस्तावेज़ का बारीकी से अध्ययन किया था और उनके द्वारा अंकित की गई टिप्पणियों का उल्लेख सम्बन्धित गवाहियों के ब्योरे में किया गया है। यहाँ यह कहना भी प्रासंगिक है कि इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ को पहली बार प्रकाशित किया जा रहा है, जिसके द्वारा पाठकों को अनेक विचित्र तथ्य जानने का अवसर प्राप्त होगा। ज़िक्र योग्य है कि ये गवाहियाँ विशेष ट्रिब्यूनल के समक्ष 5 मई, 1930 से 26 अगस्त, 1930 तक हुई थीं जबकि इससे पूर्व 10 जुलाई, 1929 से 3 मई, 1930 तक मुक़दमा विशेष मजिस्ट्रेट की अदालत में चला था।
Krantiveer Bhagat Singh : 'Abhyudaya' Aur 'Bhavishya'
- Author Name:
Chaman Lal
- Book Type:

- Description: ‘क्रान्तिवीर भगत सिंह : ‘अभ्युदय’ और ‘भविष्य’’ आज़ादी की लड़ाई, ख़ासकर इन्क़लाबी नौजवानों के संघर्ष की हक़ीक़त तलाशती कोशिश का नतीजा है। पुस्तक में शामिल पत्रिकाओं ‘अभ्युदय’ और ‘भविष्य’ की सामग्री हिन्दुस्तान की आज़ादी के संग्राम को ठीक से समझने के लिए बेहद ज़रूरी है। ‘अभ्युदय’ ने भगत सिंह के मुक़दमे और फाँसी के हालात पर भरपूर सामग्री छापी और 8 मई, 1931 को प्रकाशित उसका ‘भगत सिंह विशेषांक’ ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त कर लिया गया। भगत सिंह के जीवन, व्यक्तित्व और परिवार को लेकर जो सामग्री ‘अभ्युदय’ व ‘भविष्य’ में छापी गई—विशेषतः भगत सिंह व उनके परिवार के चित्र—उसी से पूरे देश में भगत सिंह की विशेष छवि निर्मित हुई। ‘भविष्य’ साप्ताहिक इलाहाबाद से रामरख सिंह सहगल के सम्पादन में निकलता था। पहले पं. सुन्दरलाल के सम्पादन में ‘भविष्य’ निकलता था, जिसमें रामरख सिंह सहगल काम करते थे। 2 अक्टूबर, 1930 को गांधी जयन्ती पर रामरख सिंह सहगल ने, जो स्वयं युक्तप्रान्त कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य थे, ‘भविष्य’ साप्ताहिक का प्रकाशन शुरू किया। पहले अंक से ही भगत सिंह आदि पर सामग्री प्रकाशित कर, ‘भविष्य’ ने सनसनी फैला दी। ‘भविष्य’ में भगत सिंह की फाँसी के बाद के हालात का जीवन्त चित्रण हुआ है। ‘भविष्य’ और ‘अभ्युदय’ से कुछ चुनिन्दा चित्र इस किताब में शामिल किए गए हैं। सम्पादक प्रो. चमन लाल ने विलुप्तप्राय तथ्यों को इस पुस्तक में सँजोकर ऐतिहासिक कार्य किया है। वस्तुतः इस इन्क़लाबी वृत्तान्त को पढ़ना स्वतंत्रता की अदम्य जिजीविषा से साक्षात्कार करना है।
Vanara
- Author Name:
Anand Neelakantan
- Rating:
- Book Type:

- Description: Baali and Sugreeva, orphan brothers from the Vana Nara tribe, were born into severe poverty and grew up as slaves like most of their fellow tribesmen. They were often called the vanaras, meaning monkey men. Caught between the ongoing war between the Deva tribes in the north and the Asura tribes in the south, the Vana Naras seemed to have lost all hope. However, Baali was determined not to remain a slave. With the help of his beloved brother Sugreeva, he built a nation for their people. The capital, Kishkindha, became a symbol of hope for freed slaves worldwide—a city of the people, by the people, for the people, where caste, creed, language, or skin color didn't matter. For a brief moment in history, it appeared mankind had found its ideal hero in Baali. But fate changed everything through Tara, daughter of a tribal healer. Loved by Baali and desired by Sugreeva, Tara sparked a brotherly war that would forever alter history. The love triangle involving Baali, Tara, and Sugreeva is arguably the first of its kind. Written by Anand Neelakantan, who also gave voice to Ravana in Asura, Duryodhana in the Ajaya series, and Sivagami in Baahubali, Vanara is a timeless story of love, lust, and betrayal. It’s Shakespearean in its tragic depth and epic in scope, giving voice to Baali, the greatest warrior in the Ramayana.
Sultan Razia : Raziyyat-Ud-Duniya Va-Ud-Din
- Author Name:
Heramb Chaturvedi
- Book Type:

- Description: रज़िया ने चन्द्रप्रभा से आखिर में बस यही कहा, “न जाने समय और तारीख हमें कैसे मूल्यांकित करेगी क्रूर, ख़ुदगर्ज़ अमीरों या दकियानूसी उलेमा के नज़रिए से...या आम आदमी की हिफाज़त, ख़ुशी और ख़ुशहाली के लिए काम करने वाली सुलतान के रूप में...” अभी वह इतना कह ही पाई थी कि एक ज़बरदस्त वार तलवार का हुआ और ख़ून का ऊँचा फव्वारा फूट गया...देखते ही देखते रज़िया का सर धड़ से अलग हो गया...जैसे ही चन्द्रप्रभा के मुँह से हाय राम निकला हिन्दू भीड़ एकदम से सकते में आ गई और जब उन्हें ज्ञात हुआ कि मरने वाली रज़िया सुल्तान थी तब वे अफ़सोस में डूब गए...मगर अफ़सोस के अलावा अब कर भी क्या सकते थे? राजसत्ता शायद किसी की भी सगी नहीं होती और न जाने क्यों जाने-अनजाने ही कैसे-कैसे लोगों की शत्रुता आमंत्रित कर लेती है?
Chhaava छावा Sambhaji Maharaj | Son of Chhatrapati Shivaji Maharaj | Saga of Bravery An Invincible King of India | Great Warrior Chhava
- Author Name:
Medha Deshmukh Bhaskaran
- Book Type:

- Description: संभाजी महाराज की नजर महादजी की ओर जाती है। यह सही बातें कहने और करने का समय है। अभी वे जो करेंगे, वह उनके देश की नियति बदल देगा। वे मराठी में कहते हैं, ""महादजी, आबा साहिब ने हर सैनिक के जीवन का सम्मान किया। वे चाहते थे कि हम बेवजह शहादत से बचें और जीवित रहें, ताकि हम स्वराज के लिए, मराठा राष्ट्र के लिए एक और लड़ाई लड़ सकें, लेकिन उन्होंने कभी भी मराठा राष्ट्र के बदले में जीवन को गले नहीं लगाया होता। संभाजी महाराज फर्श पर एक ढेर की तरह गिर जाते हैं। वे जानते हैं कि कुछ ही दिनों में उनकी आँखें निकाल ली जाएँगी। लेकिन औरंगजेब बस इतना ही कर सकता है। संभाजी महाराज मराठों के दिलों में एक आग जला जाएँगे और वे दावानल में बदल जाएँगे, जो औरंगजेब के सपनों को जलाकर राख कर देंगे। युद्ध चलता रहेगा लेकिन वह कभी दक्कन नहीं जीत पाएगा। - इसी पुस्तक से छत्रपति शिवाजी महाराज के उतने ही प्रतापी पुत्र संभाजी महाराज के शौर्य और पराक्रम की यशोगाथा बताती अनुपम कृति। आक्रांताओं के दाँत खट्टे कर मराठा स्वाभिमान को जाग्रत् करने में संभाजी महाराज के योगदान को रेखांकित करनेवाली कृति। हर भारतीय के राष्ट्रभाव को जाग्रत् करनेवाली पठनीय कृति ।
Kanaila Ki Katha
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: ‘कनैला की कथा’ ग्राम केन्द्रित जनपदीय इतिहास को सँजोने का अन्यतम उदाहरण है। सभ्यता–संस्कृति की प्राचीनता ने भारत को इतिहास की विशिष्ट विरासत सौंपी है। अतीत के प्रसिद्ध स्थान और स्मारक ही इस विरासत के अकेले वाहक नहीं हैं। गाँव-गाँव में यह विरासत बिखरी पड़ी है। हाँ, यह अवश्य हुआ है कि प्रायः अज्ञानता और उदासीनता के कारण यह विरासत उपेक्षित पड़ी रही और समय गुजरने के साथ ओझल होती चली गई। यह पुस्तक लिखकर राहुल सांकृत्यायन ने उस विरासत के एक हिस्से को अन्धकार से बाहर निकाला और वह रास्ता दिखाया जिस पर चलकर अन्य ग्रामों–कस्बों की कथाएँ भी सँजोई जा सकती हैं, जिससे हमारा इतिहास समृद्ध हो सकता है। इस पुस्तक में राहुल ने अपने पितृग्राम कनैला का ऐतिहासिक-भौगोलिक चित्र प्रस्तुत किया है, जिसका एक सिरा ईसा से तेरह सौ वर्ष पूर्व से जुड़ता है तो दूसरा सिरा बीसवीं सदी के उत्तरार्ध से। इतनी लम्बी कालावधि को कथा के रूप में समेटते हुए स्थानीय सभ्यता-संस्कृति की ऐतिहासिकता का पूरा ध्यान रखा गया है। इस तरह जो चित्र उभरता है वह पाठक को सामाजिक-सांस्कृतिक रूपान्तरों की एक दिलचस्प शृंखला से रू-ब-रू कराता है। वस्तुतः अपनी दूसरी कृतियों की तरह राहुल ने ‘कनैला की कथा’ में भी लेखन का एक अलग ही प्रतिमान रचा है। इतिहास और कथा का जैसा रोचक संयोग इस पुस्तक में घटित हुआ है वैसा किसी और कृति में देख पाना दुर्लभ है।
Ambapali: A Novel
- Author Name:
Tanushree Podder
- Book Type:

- Description: Not every courtesan has gone down in the annals of history like Ambapali. She was beautiful, intelligent, talented and, as the nagarvadhu janpad kalyani-the bride of the city-she went on to wield immense power amongst the nobles. Until she renounced all worldly pleasures to embrace Buddhism. This vivid narrative tells the story of a young woman forced to follow a path because of the machinations of powerful people. Propelled onto the cultural centerstage in the Vajji republic against her wishes, betrayed in love, disappointed by friends, Ambapali’s is yet the story of a strong woman determined to take control over her life. A remarkable, poignant novel about the dazzling glamour, daring romance, and sacrifice that marked Ambapali’s life.
Uttarkatha : Vol. 2
- Author Name:
Shri Naresh Mehta
- Book Type:

- Description: ‘उत्तरकथा’ के प्रथम खंड को पढ़ते हुए महसूस होता है कि जैसे लेखक, लूसिएँ गोल्डमान के उत्पत्तिमूलक संघटनात्मक समाजशास्त्र के सहारे पुराने मालवा के ख़ौफ़नाक अँधेरे को एक विशिष्ट सामाजिक स्थिति में एक निश्चित वरण की अनिवार्यता का सामना करते हुए उभार रहा है और उजाले में समस्याओं की एक शृंखला प्रस्तुत करते हुए आलोचनात्मक चित्र और चरित्र उकेरते हुए सार्थक समाधान की सम्भावना तक आना चाहता है। सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह कि पूरा उपन्यास आध्यात्मिक सरोकारों से विच्छिन्न नहीं है। उपन्यास का नायक शिवशंकर आचार्य दुःख-भोग और दायित्व वहन के क्रम में करुणा का अकलंक पुरुष है। ...त्रयम्बक और दुर्गा भारतीय दम्पति के शिवपार्वती जैसे आदर्श हैं। शिवशंकर आचार्य, भारतीय मनीषा की चारित्रिक स्थिति का नाम है। यह चरित्र नहीं है। यह बीज-चरित्र को गोद लेकर वृक्षत्व प्रदान करते हैं...लेखक ने केवल कथा नहीं कही है, बल्कि...उनके बीच से चेतना के अनिवार्य नैरन्तर्य को तलाशा है...तभी तो यह केवल कथा नहीं है, उत्तरकालीन कथा नहीं है, बल्कि प्रश्नों के समाधान की, उत्तर की भी कथा है। —श्री श्रीराम वर्मा (जनपक्ष)
Shukmaya Hangma
- Author Name:
Shobha Limboo
- Book Type:

- Description: ‘शुकमाया हाङमा’ लिम्बू आदिवासी समुदाय की एक सशक्त, स्वाभिमानी स्त्री की सच्ची कहानी पर आधारित उपन्यास है। शुकमाया के जीवन का आरम्भ नैसर्गिक सुषमा से परिपूर्ण और पारम्परिक जीवनशैली की प्रधानता वाले परिवेश में होता है। लेकिन विवाह के बाद वह ख़ुद को न केवल नई जगह और नए परिवेश में पाती है, बल्कि उसका जीवन भी नई चुनौतियों से घिर जाता है। बर्मा युद्ध का छिड़ना शुकमाया के लिए एक प्रचंड आघात साबित होता है जिसमें उसे अपने पति, पुत्र और श्वसुर को खो देना पड़ता है। वस्तुत: बर्मा युद्ध को पृष्ठभूमि बनाकर रची गई यह कृति उस युद्ध के दौरान विस्थापित हुए लोगों की पीड़ा और क्षत-विक्षत मन की कहानी को भी पूरी मार्मिकता से सामने लाती है। विपरीत-से-विपरीत परिस्थितियों में शुकमाया जिस दृढ़ता से खड़ी रहती है और जीवन को सँभालती चलती है, वह अपनी परवर्ती पीढ़ी के लिए प्रेरक और स्मरणीय बन जाती है। जिस आदिवासी समुदाय और जिस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अंकन इस उपन्यास में किया गया है वह हिन्दी पाठकों के लिए अपेक्षाकृत कम जाना-सुना है। इस तरह देखें तो यह उपन्यास हिन्दी साहित्य में एक नया अध्याय जोड़ता है।
New Dharshans
- Author Name:
Ponneelan +1
- Book Type:

- Description: "New Dharshans" is a powerful novel that vividly depicts the profound impact of socio-political conflicts and rural issues on remote areas, influencing daily life. Placing emphasis on the individual, this humanistic novel shines a light on the diminishing levels of humanism, honesty, kindness, and morality in the world. In addition, this fast-paced novel underscores the significance of traditions, communist ideals, and emphasizes the need for humanity to reconnect with and revisit its roots. Against the backdrop of turbulent events in India during the 1970s, this novel set new standards in the sub-genre of Tamil realistic fiction.
Paanchali : Nari Ki Ek Shaswat Gatha
- Author Name:
Shachi Mishra
- Book Type:

- Description: पांचाली उपन्यास द्रौपदी के मन को समझने का प्रयास है। द्रौपदी आजीवन सहधर्मिणी बनी रही किन्तु इसके कारण पाँच पाण्डवों की पत्नी बनी। पांचाली का कथन है कि मेरे जीवन में एक भी क्षण ऐसा नहीं आया जहाँ मुझे अनुभव हुआ हो कि मैं इन सब की पत्नी हूँ। मैं तो सदैव इनकी दासी और भोग्या ही रही। आज सोचती हूँ कि मैंने स्वयं को पाँच हिस्सों में क्यों बाँटा? जब बाँट ही रही थी तो छह हिस्से क्यों नहीं किए? एक हिस्सा अपने लिये क्यों नहीं रखा जहाँ मेरी इच्छा के विपरीत किसी का भी प्रवेश वर्जित हो, साथ ही बाँटते समय थोड़ी-सी बेईमानी क्यों नहीं कर ली? थोड़ी नहीं अधिक बेईमानी करनी चाहिये थी मुझे, आधा से भी अधिक, किन्तु अब तो बाँट चुकी, सब हिस्सों में से कतर-ब्योंत करूँगी तो भी कुछ पूरा तो होगा नहीं बस टुकड़े-टुकड़े ही रहेंगे। अब तो मैं अभ्यस्त हो चुकी हूँ वे हिस्से मेरे जीवन में ढल चुके हैं, उस समय क्यों नहीं सोचा?
Ramkatha Ke naye Aayam
- Author Name:
Dr. Shankarlal Purohit
- Book Type:

- Description: हिंदी में रामकथा पर बहुत कुछ काम हुआ है। इसमें सर्वाधिक विस्तृत संपूर्ण सर्वेक्षण फादर कामिल बुल्के (रामकथा) का है। रामचरितमानस और आधुनिक भारतीय भाषाओं में रचित रामचरितों का तुलनात्मक अध्ययन कई विद्वानों ने किया है। अभी तक गुजराती, मराठी, बँगला, तेलुगु एवं तमिल आदि भाषाओं के प्रमुख रामचरित काव्यों और उनमें उपलब्ध रामकथा का तुलसी के मानस के साथ तुलनात्मक अध्ययन हो चुका है। परंतु बलरामदास की दांडी रामायण और मानस की रामकथा का तुलनात्मक अध्ययन कम ही हुआ है। प्रसिद्ध समालोचक एवं अनुवादक डॉ. शंकरलाल पुरोहित ने बलरामदास के राम-संबंधी दृष्टिकोण के मूल में जगन्नाथ और तुलसी के राम-संबंधी दर्शन के मूल में ब्रह्म की बात को ध्यान में रखकर यह पुस्तक लिखी है। रामकथा जहाँ भी, जिस रूप में भी कही गई है, उसके मूल में भक्तिधारा रही है। तुलसी और बलराम की रामकथा-धारा में अवगाहन कर हम इसी निष्कर्ष पर पहँुचते हैं और यह भक्तिधारा मानव मंगल तथा जनकल्याण के लिए एक विराट् फलक पर उत्कीर्ण हुई है।
Mati Mati Arkati
- Author Name:
Ashwini Kumar Pankaj
- Book Type:

- Description: ब्रिटिश उपनिवेश द्वारा भारत से बाहर ले जाए गए मज़दूरों को तत्कालीन कम्पनियाँ और उनके एजेंट दो नामों से पुकारते थे। दक्षिण भारत, बिहार और प. उत्तर प्रदेश के ग़ैर-आदिवासी मज़दूरों को 'कुली' और झारखंड के सदान और आदिवासियों को 'हिल कुली', 'धांगर' और 'कोल' कहा जाता था। ये और कोई नहीं ग्रेटर झारखंड की उरांव, मुंडा, संताल, खड़िया और सदान जातियाँ थीं। ब्रिटिश संसद और ब्रिटिश उपनिवेशों में मौजूद दस्तावेज़ों में झारखंड के आदिवासियों के आप्रवासन के ठोस प्रमाण उपलब्ध हैं। कालान्तर में मॉरीशस, गयाना, फ़िजी, सूरीनाम, टुबैगो सहित अन्य कैरीबियन तथा लैटिन अमेरिकी और अफ़्रीकी देशों में लगभग डेढ़ सदी पहले ले जाए गए ग़ैर-आदिवासी गिरमिटिया मज़दूरों ने बेशक लम्बे संघर्ष के बाद इन देशों को भोजपुरी बना दिया है और वहाँ के नीति-नियन्ताओं में शामिल हो गए हैं। लेकिन सवाल है कि वे हज़ारों झारखंडी जो सबसे पहले वहाँ पहुँचे थे, कहाँ चले गए? कैसे और कब वे गिरमिटिया कुलियों की नवनिर्मित भोजपुरी दुनिया से ग़ायब हो गए? ऐसा क्यों हुआ कि गिरमिटिया कुली ख़ुद तो आज़ादी पा गए लेकिन उनकी आज़ादी हिल कुलियों को चुपचाप गड़प कर गई। एक कुली की आज़ादी कैसे दूसरे कुली के ख़ात्मे का सबब बनी? क्या थोड़े आर्थिक संसाधन जुटते ही उनमें बहुसंख्यक धार्मिक और नस्ली वर्चस्व का विषधर दोबारा जाग गया और वहाँ उस अनजान धरती पर फिर से ब्राह्मण, क्षत्रिय, भूमिहार और वैश्य पैदा हो गए? सो भी इतनी समझदारी के साथ कि 'शूद्र' को नई सामाजिक संरचना में जन्मने ही नहीं दिया? इस उपन्यास का मूल प्रश्न यही है। कोन्ता और कुन्ती की इस कहानी को कहने के पीछे लेखक का उद्देश्य पूरब और पश्चिम दोनों के ग़ैर-आदिवासी समाजों में मौजूद नस्ली और ब्राह्मणवादी चरित्र को उजागर करना है जिसे विकसित सभ्यताओं की बौद्धिक दार्शनिकता के ज़रिए अनदेखा किया जाता रहा है।
Chaurasi
- Author Name:
Dr. Ramesh Kumar Dubey
- Book Type:

- Description: बुंदेलखंड में लगभग एक सौ से भी अधिक गाँवों के क्षेत्र को पुराने समय में चौरासी के नाम से जाना जाता था, जिसमें कुछ उत्तर प्रदेश व कुछ मध्य प्रदेश के गाँव शामिल थे। इस कहानी में लेखक ने चौरासी क्षेत्र के ग्रामीण जीवन का चित्रण किया है, जो एक सत्य घटना पर आधारित है। कहानी में बुंदेलखंडी रीति-रिवाजों के बारे में बताया गया है। भैयालाल ने दोनों पुलिस वालों की बंदूकें छीनकर देवी और करण को पकड़ाईं और चिल्लाया, ‘‘बई के बाप सेठ, अब तोय नईं छोड़ हों।’’ किस प्रकार एक सीधा-सादा व्यक्ति पुलिस के बरताव के कारण बागी हो जाता है। इसका वर्णन पुस्तक में किया गया है।
Customer Reviews
Be the first to write a review...
0 out of 5
Book