Aalhkatha : Veergatha Ka Aatmahanta Adhyay
(4)
Author:
Mahesh KatarePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Historical-fiction₹
399
₹ 319.2 (20% off)
Available
Ships within 48 Hours
Free Shipping in India on orders above Rs. 1100
आल्हकथा : वीरगाथा का आत्महन्ता अध्याय लोक में प्रचलित महाकाव्य आल्हखंड की कथा है। कवि जगनिक भट्ट के ‘परमाल रासो’ से निसृत इस गाथा में श्रोता-समुदाय की असाधारण रुचि, काव्य की मौखिक परम्पराओं और जन-कवियों की स्थानीय रचनाधर्मिता का योग भी रहा, और इस सबके चलते कम-से-कम उत्तर भारत में रामायण और महाभारत के बाद जिस काव्य ने लोक में अपनी जगह बनाई, वह आल्हा-ऊदल की कथा ही है। यह उपन्यास इतिहास और लोक-स्मृतियों को आधार बनाकर महोबा के महान योद्धाओं आल्हा-ऊदल और उनके ऐतिहासिक व सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को एक रचनात्मक आकार देने का प्रयास करता है। वरिष्ठ कथाकार महेश कटारे ने अपने पूर्व के उपन्यासों में भी कई ऐसे विषयों और चरित्रों को अपने कुशल कथा-वितान के ज़रिये जीवन्त किया है जिनकी ओर अक्सर कथाकारों का ध्यान नहीं गया था। ‘आल्हकथा’ में उन्होंने आल्हा-ऊदल के समय की विसंगतियों को चित्रित करते हुए उन सरोकारों को भी रेखांकित किया है जिनका सम्बन्ध हर युग के सामाजिक-राजनीतिक जीवन-व्यापार से होता है। लीक से हटकर लिखे गए उपन्यासों को पसन्द करने वाले पाठक इस कृति को निश्चय ही संग्रहणीय पाएँगे।
Read moreAbout the Book
आल्हकथा : वीरगाथा का आत्महन्ता अध्याय लोक में प्रचलित महाकाव्य आल्हखंड की कथा है। कवि जगनिक भट्ट के ‘परमाल रासो’ से निसृत इस गाथा में श्रोता-समुदाय की असाधारण रुचि, काव्य की मौखिक परम्पराओं और जन-कवियों की स्थानीय रचनाधर्मिता का योग भी रहा, और इस सबके चलते कम-से-कम उत्तर भारत में रामायण और महाभारत के बाद जिस काव्य ने लोक में अपनी जगह बनाई, वह आल्हा-ऊदल की कथा ही है।
यह उपन्यास इतिहास और लोक-स्मृतियों को आधार बनाकर महोबा के महान योद्धाओं आल्हा-ऊदल और उनके ऐतिहासिक व सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को एक रचनात्मक आकार देने का प्रयास करता है।
वरिष्ठ कथाकार महेश कटारे ने अपने पूर्व के उपन्यासों में भी कई ऐसे विषयों और चरित्रों को अपने कुशल कथा-वितान के ज़रिये जीवन्त किया है जिनकी ओर अक्सर कथाकारों का ध्यान नहीं गया था। ‘आल्हकथा’ में उन्होंने आल्हा-ऊदल के समय की विसंगतियों को चित्रित करते हुए उन सरोकारों को भी रेखांकित किया है जिनका सम्बन्ध हर युग के सामाजिक-राजनीतिक जीवन-व्यापार से होता है।
लीक से हटकर लिखे गए उपन्यासों को पसन्द करने वाले पाठक इस कृति को निश्चय ही संग्रहणीय पाएँगे।
Book Details
-
ISBN9789360866754
-
Pages256
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
Recommended For You
Ek Kishori Ki Diary
- Author Name:
Anne Frank
- Book Type:

- Description: अने फ़्रांक की लिखी 'एक किशोरी की डायरी' विश्व की श्रेष्ठ कृतियों में गिनी जाती है। जर्मनी में जन्मी अने ने यह ‘डायरी’ 1942 से 1944 के दौरान लिखी। इसमें युद्ध के बाद जर्मन क़ब्ज़े के दौरान डच लोगों की पीड़ा का आँखों-देखा विवरण है। एक 15 वर्षीय किशोरी ने समाज की उथल-पुथल और अपने मन की कशमकश को बहुत ही ईमानदारी से व्यक्त किया है। जन्मदिन के उपहार स्वरूप मिली एक डायरी को जिस समय उन्होंने अपना सच्चा मित्र बनाया था, उस समय ख़ुद उन्होंने भी कल्पना नहीं की होगी कि एक दिन यह डायरी विश्व की महानतम कृतियों में शुमार होगी। डायरी की प्रविष्टियों में जहाँ स्कूल की बातें हैं, तो सहेलियों की ईर्ष्या, मनपसन्द खिलौनों की चाह, छुट्टियों में बिताए समय के साथ देश में तेज़ी से बदलते हालात का भी वर्णन है। कैसे जर्मनी में रहनेवाले यहूदियों की ज़िन्दगी एक सनक-भर से जहन्नुम हो गई थी, लेकिन जीने की उत्कट इच्छा आख़िरी समय तक भी हार मानने को तैयार नहीं हुई। अने का बाल-मन कहीं न कहीं मानता है कि एक दिन सब सही हो जाएगा और वो वापस अपने परिवार के साथ एक सामान्य जीवन जी पाएगी। एक किशोरी की यह मार्मिक डायरी सिर्फ़ उसी की न रहकर सीधे पाठक के दिल में घर कर जाती है।
Paanchali : Nari Ki Ek Shaswat Gatha
- Author Name:
Shachi Mishra
- Book Type:

- Description: पांचाली उपन्यास द्रौपदी के मन को समझने का प्रयास है। द्रौपदी आजीवन सहधर्मिणी बनी रही किन्तु इसके कारण पाँच पाण्डवों की पत्नी बनी। पांचाली का कथन है कि मेरे जीवन में एक भी क्षण ऐसा नहीं आया जहाँ मुझे अनुभव हुआ हो कि मैं इन सब की पत्नी हूँ। मैं तो सदैव इनकी दासी और भोग्या ही रही। आज सोचती हूँ कि मैंने स्वयं को पाँच हिस्सों में क्यों बाँटा? जब बाँट ही रही थी तो छह हिस्से क्यों नहीं किए? एक हिस्सा अपने लिये क्यों नहीं रखा जहाँ मेरी इच्छा के विपरीत किसी का भी प्रवेश वर्जित हो, साथ ही बाँटते समय थोड़ी-सी बेईमानी क्यों नहीं कर ली? थोड़ी नहीं अधिक बेईमानी करनी चाहिये थी मुझे, आधा से भी अधिक, किन्तु अब तो बाँट चुकी, सब हिस्सों में से कतर-ब्योंत करूँगी तो भी कुछ पूरा तो होगा नहीं बस टुकड़े-टुकड़े ही रहेंगे। अब तो मैं अभ्यस्त हो चुकी हूँ वे हिस्से मेरे जीवन में ढल चुके हैं, उस समय क्यों नहीं सोचा?
Singh Senapati
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: राहुल सांकृत्यायन के ऐतिहासिक उपन्यासों में ‘सिंह सेनापति’ का विशेष स्थान है। इसमें उस वैशाली की ढाई हजार साल पूर्व की ऐतिहासिक गाथा को लिपिबद्ध किया गया है, जिसे गणतंत्र की जननी माना जाता है। इस उपन्यास में राहुल दिखलाते है कि गणतांत्रिक अथवा प्रजातांत्रिक शासन व्यवस्था से भारत का परिचय हजारों साल पहले हो चुका था। वैशाली के निवासियों ने, आज से ढाई हजार वर्ष पूर्व अपने लिए गणतांत्रिक व्यवस्था का आविष्कार कर लिया था और उसको सफलतापूर्वक संचालित किया था। ऐतिहासिक तथ्यों के जरिये वे इस कथा को न सिर्फ जीवन्तता बल्कि प्रामाणिकता भी प्रदान करते हैं। उपन्यास की कथा युद्ध और प्रेम का आधार लेकर आगे बढ़ती है, जिसमें तत्कालीन युग और जीवन को सूक्ष्मता से चित्रित किया गया है। साथ ही उस समय के सामाजिक-सांस्कृतिक-नैतिक मूल्यबोधों के बीच स्त्रियों की आजादी, बराबरी, भाई-चारा आदि को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। परिणामत: यह कृति अपने ऐतिहासिक परिधि को लाँघकर सार्वकालिक प्रासंगिकता प्राप्त कर लेती है।
Hardaul
- Author Name:
Vandana Awasthi Dubey
- Book Type:

- Description: This book has no description
Mati Mati Arkati
- Author Name:
Ashwini Kumar Pankaj
- Book Type:

- Description: ब्रिटिश उपनिवेश द्वारा भारत से बाहर ले जाए गए मज़दूरों को तत्कालीन कम्पनियाँ और उनके एजेंट दो नामों से पुकारते थे। दक्षिण भारत, बिहार और प. उत्तर प्रदेश के ग़ैर-आदिवासी मज़दूरों को 'कुली' और झारखंड के सदान और आदिवासियों को 'हिल कुली', 'धांगर' और 'कोल' कहा जाता था। ये और कोई नहीं ग्रेटर झारखंड की उरांव, मुंडा, संताल, खड़िया और सदान जातियाँ थीं। ब्रिटिश संसद और ब्रिटिश उपनिवेशों में मौजूद दस्तावेज़ों में झारखंड के आदिवासियों के आप्रवासन के ठोस प्रमाण उपलब्ध हैं। कालान्तर में मॉरीशस, गयाना, फ़िजी, सूरीनाम, टुबैगो सहित अन्य कैरीबियन तथा लैटिन अमेरिकी और अफ़्रीकी देशों में लगभग डेढ़ सदी पहले ले जाए गए ग़ैर-आदिवासी गिरमिटिया मज़दूरों ने बेशक लम्बे संघर्ष के बाद इन देशों को भोजपुरी बना दिया है और वहाँ के नीति-नियन्ताओं में शामिल हो गए हैं। लेकिन सवाल है कि वे हज़ारों झारखंडी जो सबसे पहले वहाँ पहुँचे थे, कहाँ चले गए? कैसे और कब वे गिरमिटिया कुलियों की नवनिर्मित भोजपुरी दुनिया से ग़ायब हो गए? ऐसा क्यों हुआ कि गिरमिटिया कुली ख़ुद तो आज़ादी पा गए लेकिन उनकी आज़ादी हिल कुलियों को चुपचाप गड़प कर गई। एक कुली की आज़ादी कैसे दूसरे कुली के ख़ात्मे का सबब बनी? क्या थोड़े आर्थिक संसाधन जुटते ही उनमें बहुसंख्यक धार्मिक और नस्ली वर्चस्व का विषधर दोबारा जाग गया और वहाँ उस अनजान धरती पर फिर से ब्राह्मण, क्षत्रिय, भूमिहार और वैश्य पैदा हो गए? सो भी इतनी समझदारी के साथ कि 'शूद्र' को नई सामाजिक संरचना में जन्मने ही नहीं दिया? इस उपन्यास का मूल प्रश्न यही है। कोन्ता और कुन्ती की इस कहानी को कहने के पीछे लेखक का उद्देश्य पूरब और पश्चिम दोनों के ग़ैर-आदिवासी समाजों में मौजूद नस्ली और ब्राह्मणवादी चरित्र को उजागर करना है जिसे विकसित सभ्यताओं की बौद्धिक दार्शनिकता के ज़रिए अनदेखा किया जाता रहा है।
Debku ek Prem Katha
- Author Name:
Murari Sharma
- Book Type:

- Description: देबकू-जिंदू की यह प्रेम कहानी आज से महज सौ साल पहले की है। जैसा कि उपन्यासकार मुरारी शर्मा ने उपन्यास की पृष्ठभूमि स्पष्ट करते हुए लिखा है कि यह अनूठी प्रेम कहानी प्रथम विश्वयुद्ध के आस-पास की कहानी है। मण्डी रियासत के मुख्यालय से महज बीस-बाईस किलोमीटर की दूरी पर स्थित नगरोटा गाँव से शुरू हुई यह प्रेम गाथा मण्डी नगर में सिमट कर रह गई। इस उपन्यास की विशेषता यह है कि इस प्रेमगाथा में वर्णित स्थानों व भवनों के अवशेषों से लेखक रूबरू हुआ है। बहुत से ऐसे व्यक्तियों से सम्पर्क साधने में सफल रहा है जो देबकू-जिंदू की इस प्रेम कहानी के तथ्यों की प्रामाणिकता को तस्दीक करते हैं। मुरारी शर्मा एक स्थापित वरिष्ठ कथाकार हैं, कहानी बुनने की कला में सिद्धहस्त। इन्होंने उपन्यास की पाठकीय रोचकता में कोई कमी नहीं आने दी है। सहज और सरल पात्रानुकूल भाषा-शैली उपन्यास की जीवंतता को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ती। निश्चय ही लोक में प्रचलित एक अनूठी प्रेमकथा पर आधारित यह उपन्यास हिंदी साहित्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। —विजय विशाल
The Broken Thorns
- Author Name:
Dr. Vrindavan Lal Verma
- Book Type:

- Description: This is the story of a dancer, Noorbai, at the Mughal Court, who, with her matchless beauty and artistic accomplishments, had captivated the hearts of the Mughal Emperor Muhammad Shah and the infamous invader Nadir Shah, who had taken a fancy to her and wanted to take her along on his way back to Iran. However, Noorbai made up her mind not to leave her country. The realistic picture of the country's agony in the grip of disruption and unrest serves as a backdrop to the romantic love between Noorbai and Mohan, a Jat guard and a commoner, the latter making the secret and dramatic escape from the Red Fort possible. Mohan, the Jat hero of the novel, is a remarkable common man who leads Noorbai in elevating and sublimating her life in Vrindavan by singing devotional songs addressed to Lord Krishna. Noorbai, with her transformed spirit, finally symbolises the magic touch of the liberal Hindu philosophy of adjustment and assimilation, without whose operation the broken thorns of divisiveness sticking deep into our body politic, even now in the present turbulent times, cannot be dislodged or dissolved easily to make us a united nation, i.e. India of our vision. Her self-abnegation in throwing gold and jewellery into the river Yamuna re-establishes the supremacy of spiritual values in life.
Bhagat Singh Ko Fansi : Vol. 1
- Author Name:
Malvender Jit Singh Waraich +1
- Book Type:

- Description: भगत सिंह को फाँसी-1 यह कैसे हुआ कि मामूली हथियारों से लैस कुछ नौजवानों को ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने का दोषी पाया गया, जिसके चलते उन्हें उम्रकैद और फाँसी की सजा हुई! ‘युद्ध’, जो उन्होंने लड़ा हालाँकि ‘‘यह युद्ध उपनिवेशवादियों व पूँजीपतियों के विरुद्ध लड़ा गया।’’ और जो ‘‘ न ही यह हमारे साथ शुरू हुआ और न ही यह हमारे जीवन के साथ खत्म होगा।’’ और, मात्र 30 महीने की उल्लेखनीय अवधि में 8-9 सितम्बर 1928 को ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोसिएशन’ की स्थापना के साथ शुरू होकर, यह सम्पन्न हो गया। विश्वास से भरपूर भगत सिंह के शब्द थे, कि ‘‘मैं अपने देश के करोड़ों लोगों की ‘इंकलाब जिंदाबाद’ की हुंकार सुन पा रहा हूँ। काल-कोठरी की मोटी दीवारो के पीछे बैठे हुए भी मुझे कहै कि यह नारा हमारे स्वतंत्राता संघर्ष को प्रेरणा देता रहेगा।’’ इस पुस्तक में प्रस्तुत है इसका प्रथमद्रष्टया विवरण।
TEESA
- Author Name:
Nandani Agrawal
- Book Type:

- Description: "भारत में किस्से-कहानियों में राजा और उनकी रियासत को आज भी जिंदा रखा गया है। राजाओं के भोग-विलास की कहानियाँ उस दौर में प्रजा के साथ हुई घटनाओं और राजा के कुटिल स्वभाव को भी बयान करती हैं। ‘तीसा’ उपन्यास का तानाबाना भी राजा और मंत्री की चालबाजी से शुरू होता है। जहाँ राजा लालची तो है ही लेकिन एक खौफ के साये में अपनी जिंदगी को जी रहा है। राजा का अपनी ही रानी से मोहभंग सिर्फ इसलिए हो जाता है क्योंकि रानी राजा की कुटिल करतूतों पर खामोश नहीं होती है। कहानी का केंद्र बिंदु तीसा का शांत स्वभाव और चाँद सी शीतलता ओढ़े उसकी खूबसूरती है जो जंगल में चंदन की खूशबू फैलाती हुई सी लगती है। अब जहाँ चंदन हो, वहाँ विषैले साँप तो होंगे ही। ऐसे में राजा के मायाजाल से खुद को बचाना, यह चुनौती का काम तो होगा ही। तीसा कैसे मुश्किल समय में धैर्य और साहस से अपनी जीत को सुनिश्चित करती है, यह हम सबके लिए एक सबक की तरह हो सकता है। आप किसी भी मुश्किल समय में क्यों न हों, बस उम्मीद रखिए कि बुरा समय जरूर बीत जाएगा और अधर्म कितना भी क्यों न पाँव पसारे, जीत अंत में धर्म की ही होती है।"
Kanaila Ki Katha
- Author Name:
Rahul Sankrityayan
- Book Type:

- Description: ‘कनैला की कथा’ ग्राम केन्द्रित जनपदीय इतिहास को सँजोने का अन्यतम उदाहरण है। सभ्यता–संस्कृति की प्राचीनता ने भारत को इतिहास की विशिष्ट विरासत सौंपी है। अतीत के प्रसिद्ध स्थान और स्मारक ही इस विरासत के अकेले वाहक नहीं हैं। गाँव-गाँव में यह विरासत बिखरी पड़ी है। हाँ, यह अवश्य हुआ है कि प्रायः अज्ञानता और उदासीनता के कारण यह विरासत उपेक्षित पड़ी रही और समय गुजरने के साथ ओझल होती चली गई। यह पुस्तक लिखकर राहुल सांकृत्यायन ने उस विरासत के एक हिस्से को अन्धकार से बाहर निकाला और वह रास्ता दिखाया जिस पर चलकर अन्य ग्रामों–कस्बों की कथाएँ भी सँजोई जा सकती हैं, जिससे हमारा इतिहास समृद्ध हो सकता है। इस पुस्तक में राहुल ने अपने पितृग्राम कनैला का ऐतिहासिक-भौगोलिक चित्र प्रस्तुत किया है, जिसका एक सिरा ईसा से तेरह सौ वर्ष पूर्व से जुड़ता है तो दूसरा सिरा बीसवीं सदी के उत्तरार्ध से। इतनी लम्बी कालावधि को कथा के रूप में समेटते हुए स्थानीय सभ्यता-संस्कृति की ऐतिहासिकता का पूरा ध्यान रखा गया है। इस तरह जो चित्र उभरता है वह पाठक को सामाजिक-सांस्कृतिक रूपान्तरों की एक दिलचस्प शृंखला से रू-ब-रू कराता है। वस्तुतः अपनी दूसरी कृतियों की तरह राहुल ने ‘कनैला की कथा’ में भी लेखन का एक अलग ही प्रतिमान रचा है। इतिहास और कथा का जैसा रोचक संयोग इस पुस्तक में घटित हुआ है वैसा किसी और कृति में देख पाना दुर्लभ है।
732 Miles
- Author Name:
Dr. Keerth
- Rating:
- Book Type:

- Description: In the dead of the night on August 14, 1947, at the cusp of a new era, as a throng of people on the street were celebrating, Bhavna let out a scream, so loud, and pushed her baby out. It was special—both Indya and India were born. A few days later, the boundary line to divide Pakistan and India was laid. The two nations that waited decades for the hard-earned freedom were not prepared for that. Families separated, friends estranged, women raped, and the killings increased with every passing day. Amidst those turmoil, a family with a just born baby, Indya, risked everything, only to reach home. Were they able to survive history’s greatest migration ever?
Ramkatha Ke naye Aayam
- Author Name:
Dr. Shankarlal Purohit
- Book Type:

- Description: हिंदी में रामकथा पर बहुत कुछ काम हुआ है। इसमें सर्वाधिक विस्तृत संपूर्ण सर्वेक्षण फादर कामिल बुल्के (रामकथा) का है। रामचरितमानस और आधुनिक भारतीय भाषाओं में रचित रामचरितों का तुलनात्मक अध्ययन कई विद्वानों ने किया है। अभी तक गुजराती, मराठी, बँगला, तेलुगु एवं तमिल आदि भाषाओं के प्रमुख रामचरित काव्यों और उनमें उपलब्ध रामकथा का तुलसी के मानस के साथ तुलनात्मक अध्ययन हो चुका है। परंतु बलरामदास की दांडी रामायण और मानस की रामकथा का तुलनात्मक अध्ययन कम ही हुआ है। प्रसिद्ध समालोचक एवं अनुवादक डॉ. शंकरलाल पुरोहित ने बलरामदास के राम-संबंधी दृष्टिकोण के मूल में जगन्नाथ और तुलसी के राम-संबंधी दर्शन के मूल में ब्रह्म की बात को ध्यान में रखकर यह पुस्तक लिखी है। रामकथा जहाँ भी, जिस रूप में भी कही गई है, उसके मूल में भक्तिधारा रही है। तुलसी और बलराम की रामकथा-धारा में अवगाहन कर हम इसी निष्कर्ष पर पहँुचते हैं और यह भक्तिधारा मानव मंगल तथा जनकल्याण के लिए एक विराट् फलक पर उत्कीर्ण हुई है।
Mazzini Charitra
- Author Name:
Vinayak Damodar Savarkar
- Book Type:

- Description: नहीं-नहीं, राष्ट्र कभी मरते नहीं । ईश्वर पीड़ितों का रक्षक है । उसने मनुष्य को स्वाधीनता में साँस लेने के लिए उत्पन्न किया है । यदि तुम ठान लो तो समझो, देश स्वतंत्र हो ही गया । इससे अधिक प्रोत्साहक राष्ट्रमंत्र अन्य कौन सा है? एक बार मनुष्य ने ठान लिया कि मैं स्वाधीनता, स्वदेश और मानवता का परम भक्त हूँ फिर उसे स्वाधीनता, स्वदेश और मानवता के लिए लड़ना ही होगा, निरंतर आजीवन लड़ना होगा ।'' '' मेरी इटली की जनसंख्या दो करोड़ है । यदि इन दो करोड़ लोगों ने मन में निश्चय किया तो विदेशियों के वे पचहत्तर हजार सिपाही उन्हें दबा थोड़े सकते हैं! दो करोड़ लोग और उनका सहायक ईश्वर! ऐसी स्थिति में इटली पलक झपकते ही विदेशी सत्ता को चूर-चूर कर देगी । '' - जोसेफ मैझिनी उपर्युक्त कथन 22 जून, 1805 को इटली में जनमे महान् क्रांतिकारी जोसेफ मैझिनी के हैं, जिन्होंने अपनी प्रखर देशभक्ति से इटली के स्वाधीनता आंदोलन को अनुप्राणित किया । प्रस्तुत पुस्तक ऐसे महान् राष्ट्रभक्त का भारत के महान् क्रांतिकारी स्वातव्यवीर विनायक दामोदर सावरकर द्वारा रचित जीवन-चरित्र है । इसमें इटली के स्वातंत्र्यवीर, देशभक्त मैझिनी का आत्मचरित्र और कुछ राजनीतिक लेख संकलित हैं । इन लेखों ने दो करोड़ लोगों में चेतना भर दी । इन लेखों से यूरोपीय सिंहासन उलट-पुलट हो गए । इन लेखों से इटली स्वतंत्र हुआ । इन लेखों में सभी पराधीन देशों को स्वतंत्र करने की शक्ति ठूस-ठूसकर भरी हुई है । मैझिनी के तत्त्व केवल इटली के लिए ही लागू नहीं होते, इटली केवल निमित्त बना है । राजनीति-शास्त्र के ये महत् सत्य उस महात्मा ने अखिल मानव-जाति के लिए प्रकट किए हैं । इस स्वतंत्रता-सुधा का मिष्टान्न सभी संतप्त भूमिकाओं की ओर मुड़ गया है ।
Sambhaji Maharaj (Hindi Translation of Life and Death of Sambhaji)
- Author Name:
Medha Deshmukh Bhaskaran
- Book Type:

- Description: संभाजी महाराज की नजर महादजी की ओर जाती है। यह सही बातें कहने और करने का समय है। अभी वे जो करेंगे, वह उनके देश की नियति बदल देगा। वे मराठी में कहते हैं, ''महादजी, आबा साहिब ने हर सैनिक के जीवन का सम्मान किया। वे चाहते थे कि हम बेवजह शहादत से बचें और जीवित रहें, ताकि हम स्वराज के लिए, मराठा राष्ट्र के लिए एक और लड़ाई लड़ सकें, लेकिन उन्होंने कभी भी मराठा राष्ट्र के बदले में जीवन को गले नहीं लगाया होता। संभाजी महाराज फर्श पर एक ढेर की तरह गिर जाते हैं। वे जानते हैं कि कुछ ही दिनों में उनकी आँखें निकाल ली जाएँगी। लेकिन औरंगजेब बस इतना ही कर सकता है। संभाजी महाराज मराठों के दिलों में एक आग जला जाएँगे और वे दावानल में बदल जाएँगे, जो औरंगजेब के सपनों को जलाकर राख कर देंगे। युद्ध चलता रहेगा लेकिन वह कभी दक्कन नहीं जीत पाएगा। —इसी पुस्तक से छत्रपति शिवाजी महाराज के उतने ही प्रतापी पुत्र संभाजी महाराज के शौर्य और पराक्रम की यशोगाथा बताती अनुपम कृति। आक्रांताओं के दाँत खट्टे कर मराठा स्वाभिमान को जाग्रत करने में संभाजी महाराज के योगदान को रेखांकित करनेवाली कृति। हर भारतीय के राष्ट्रभाव को जाग्रत करनेवाली पठनीय कृति।
Massacre At Midnight
- Author Name:
Chaudhary Kaushal Kishor Thakur
- Book Type:

- Description: Massacre at Midnight is a fascinating tale of medieval intrigue and revenge in the best traditions of ‘magic realism’ with a touch of the divine. Set in the Mughal era, the story opens with the covetous Nawaab of Waariaul locking horns with the principled estate owner of Singhwaar over the possession of LaaDlii and Pyaare, a famed pair of hunting dogs. The Nawaab enlists the support of the Mughal army under false pretences, portraying Singhwaar’s Thaakur as a seditious renegade. The family is massacred to the last man, and Singhwaar is laid waste. The widow gives birth to a male heir in a fugue, abandoning the infant in the wilderness. The child is miraculously saved by the benevolent goddess Vana-Durgaa and becomes her favourite. When he comes of age, Destiny takes him to the imperial court at Delhi for a showdown with his father’s murderer, witnessed by the Great Mughal himself. Mainly based on folklore, ‘Massacre at Midnight’ is replete with enchanting old-world belief in miracles, spirits protecting family fortunes and poetic justice for the unjust, as well as glimpses of life in medieval Mithilaa.
Varun te Bahirjee
- Author Name:
Ravi Amale
- Book Type:

- Description: हा शोध आहे बहिर्जी नाईक यांचा. छत्रपती शिवाजी महाराजांच्या हेरप्रमुखाचा आणि त्याच बरोबर शिवरायांच्या हेरसंस्थेचा. शिवरायांची ही हेरव्यवस्था कशी होती? तिचे स्वरूप कसे होते, तिची व्याप्ती किती होती? मुख्य म्हणजे त्यामागील विचार कोणता होता? अनेक प्रश्न. त्यांची उत्तरे शोधताना आपल्याला जावे लागते भारतीय राजनीतिच्या प्राचीन इतिहासात, हेरगिरीच्या प्राचीन परंपरांकडे, ऋग्वेद, रामायण, महाभारत, कौटिल्य, कामंदक, संत तिरुवळ्ळुवर, कृष्णदेवराय आणि अगदी कुराण आणि पैगंबरांकडेही. ‘वरुण ते बहिर्जी’ आख्यायिका, दंतकथा, फेककथा यापलीकडे जाऊन घेतलेला हा हेरगिरीच्या विचारप्रवाहाचा वेध. Varun te Bahirjee | Ravi Amale वरुण ते बहिर्जी । रवि आमले
Ramkrishan Paramhans Ke 101 Prerak Prasang
- Author Name:
Rashmi
- Book Type:

- Description: "स्वामी राम कृष्ण परमहंस एक महान संत, समाजसुधारक और हिंदू धर्म के प्रणेता थे। उनका मानना था कि यदि मनुष्य के हृदय में सच्ची श्रद्धा और लगन जग जाए तो ईश्वर का साक्षात्कार कतई मुश्किल नहीं है। वे कहते कि ईश्वर एक ही है, मनुष्यों ने उस तक पहुँचने के मार्ग अलगअलग बना लिये हैं। वे स्वयं माँ काली के अनन्य भक्त थे और उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन उन्हीं की आराधना में व्यतीत किया। उन्होंने हिंदू धर्म की प्रतिष्ठा का कार्य अपने तक ही सीमित नहीं रखा, बल्कि युवा नरेंद्र के रूप में हिंदुत्व की प्रतिष्ठा को विश्वमंच पर प्रस्थापित करने का पुरुषार्थ कर दिखाया। वे स्वयं पढ़ेलिखे नहीं थे, किंतु उन्होंने विश्व को विवेकानंद जैसा सार्वकालिक धर्मप्रवर्तक दिया। परमहंस के जीवन काल में ही उनकी ख्याति दूरदूर तक फैल गई थी। फलस्वरूप मैक्समूलर और रोम्याँ रोलाँ जैसे सुप्रसिद्ध पाश्चात्य विद्वानों ने उनकी जीवनी लिखकर अपने को धन्य माना। इस पुस्तक में स्वामी रामकृष्ण परमहंस के जीवन से जुड़े रोचक एवं प्रेरक प्रसंगों का संकलन किया गया है। इसकी सामग्री रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद पर उपलब्ध साहित्य से प्राप्त की गई। यह पुस्तक स्वामीजी के जीवन को समझने की दिशा में एक विनम्र प्रयास है। आशा है, हमारे प्रबुद्ध पाठक इस पुस्तक को पढ़कर स्वामीजी के जीवन और जीवनदर्शन को समझ पाएँगे।
Nagasaki Ki Vidhvans-Katha
- Author Name:
Hayashi Kyoko
- Book Type:

- Description: ख़तरे की चेतावनी के बिना ऊपर आकाश से पैराशूट के खुलने के साथ गिर रहे परमाणु बम को कुछ लोग मुँह बाए देख रहे थे। उन्होंने सोचा कि शायद जहाज़ अमेरिकी युद्धबन्दियों के लिए खाद्य-सामग्री गिरा रहे हैं। ये पंक्तियां उस पल के बारे में हैं जब अमेरिका का बोक्सकार नामक जहाज नागासाकी के ऊपर परमाणु बम गिरा रहा था। इस उपन्यास की लेखिका उस समय स्कूल में पढ़ती थीं और उस दिन सैकड़ों छात्रों और मजदूरों के साथ उस स्थान से कुछ ही दूरी पर श्रमदान में लगी हुई थीं। परमाणु-विस्फोट की भुक्तभोगी लेखिका के इस आत्मकथात्मक उपन्यास में नागासाकी पर गिराए गए परमाणु बम के फौरी तथा बाद के समय में सामने आए प्रभावों-अनुभवों का यथार्थ विवरण प्रस्तुत किया गया है। जहाँ आवश्यक था वहाँ उन्होंने सर्वेक्षण-रपटों और अन्य दस्तावेजों का प्रयोग भी इसमें किया है। मुख्यतः नौ अगस्त, 1945 की सुबह से लेकर उसके बाद की लगभग दो महीनों की अवधि के दौरान जापान के नागासाकी शहर और उसके आसपास के क्षेत्रों में हुए घटनाक्रम का यह वास्तविक लेखा-जोखा युद्ध के विरुद्ध एक चेतावनी है जो आज के समय, जब युद्ध के लिए एक अजीब सी व्याकुलता विश्व में देखी जा रही है, खास तौर पर प्रासंगिक है। इस उपन्यास को पढ़ना एक पीड़ादायी अनुभव है लेकिन इससे गुजरना भी जरूरी है।
Draupadi
- Author Name:
Yarlagadda Lakshmi Prasad +1
- Rating:
- Book Type:

- Description: Draupadi, originally written in Telugu, was first serialised in Andhra Jyoti before it came out in book form. The novel presented in a unique style, is not just an account of the different incidents occur around Draupadi but these incidents have been fused together into a fascinating story. The narrative process and the structural method of description used by Lakshmi Prasad fully engage the reader.
Sultan Razia : Raziyyat-Ud-Duniya Va-Ud-Din
- Author Name:
Heramb Chaturvedi
- Book Type:

- Description: रज़िया ने चन्द्रप्रभा से आखिर में बस यही कहा, “न जाने समय और तारीख हमें कैसे मूल्यांकित करेगी क्रूर, ख़ुदगर्ज़ अमीरों या दकियानूसी उलेमा के नज़रिए से...या आम आदमी की हिफाज़त, ख़ुशी और ख़ुशहाली के लिए काम करने वाली सुलतान के रूप में...” अभी वह इतना कह ही पाई थी कि एक ज़बरदस्त वार तलवार का हुआ और ख़ून का ऊँचा फव्वारा फूट गया...देखते ही देखते रज़िया का सर धड़ से अलग हो गया...जैसे ही चन्द्रप्रभा के मुँह से हाय राम निकला हिन्दू भीड़ एकदम से सकते में आ गई और जब उन्हें ज्ञात हुआ कि मरने वाली रज़िया सुल्तान थी तब वे अफ़सोस में डूब गए...मगर अफ़सोस के अलावा अब कर भी क्या सकते थे? राजसत्ता शायद किसी की भी सगी नहीं होती और न जाने क्यों जाने-अनजाने ही कैसे-कैसे लोगों की शत्रुता आमंत्रित कर लेती है?
Customer Reviews
Be the first to write a review...
4.25 out of 5
Book