Aalhkatha : Veergatha Ka Aatmahanta Adhyay
(4)
Author:
Mahesh KatarePublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
Historical-fiction₹
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आल्हकथा : वीरगाथा का आत्महन्ता अध्याय लोक में प्रचलित महाकाव्य आल्हखंड की कथा है। कवि जगनिक भट्ट के ‘परमाल रासो’ से निसृत इस गाथा में श्रोता-समुदाय की असाधारण रुचि, काव्य की मौखिक परम्पराओं और जन-कवियों की स्थानीय रचनाधर्मिता का योग भी रहा, और इस सबके चलते कम-से-कम उत्तर भारत में रामायण और महाभारत के बाद जिस काव्य ने लोक में अपनी जगह बनाई, वह आल्हा-ऊदल की कथा ही है। यह उपन्यास इतिहास और लोक-स्मृतियों को आधार बनाकर महोबा के महान योद्धाओं आल्हा-ऊदल और उनके ऐतिहासिक व सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को एक रचनात्मक आकार देने का प्रयास करता है। वरिष्ठ कथाकार महेश कटारे ने अपने पूर्व के उपन्यासों में भी कई ऐसे विषयों और चरित्रों को अपने कुशल कथा-वितान के ज़रिये जीवन्त किया है जिनकी ओर अक्सर कथाकारों का ध्यान नहीं गया था। ‘आल्हकथा’ में उन्होंने आल्हा-ऊदल के समय की विसंगतियों को चित्रित करते हुए उन सरोकारों को भी रेखांकित किया है जिनका सम्बन्ध हर युग के सामाजिक-राजनीतिक जीवन-व्यापार से होता है। लीक से हटकर लिखे गए उपन्यासों को पसन्द करने वाले पाठक इस कृति को निश्चय ही संग्रहणीय पाएँगे।
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आल्हकथा : वीरगाथा का आत्महन्ता अध्याय लोक में प्रचलित महाकाव्य आल्हखंड की कथा है। कवि जगनिक भट्ट के ‘परमाल रासो’ से निसृत इस गाथा में श्रोता-समुदाय की असाधारण रुचि, काव्य की मौखिक परम्पराओं और जन-कवियों की स्थानीय रचनाधर्मिता का योग भी रहा, और इस सबके चलते कम-से-कम उत्तर भारत में रामायण और महाभारत के बाद जिस काव्य ने लोक में अपनी जगह बनाई, वह आल्हा-ऊदल की कथा ही है।
यह उपन्यास इतिहास और लोक-स्मृतियों को आधार बनाकर महोबा के महान योद्धाओं आल्हा-ऊदल और उनके ऐतिहासिक व सामाजिक-सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को एक रचनात्मक आकार देने का प्रयास करता है।
वरिष्ठ कथाकार महेश कटारे ने अपने पूर्व के उपन्यासों में भी कई ऐसे विषयों और चरित्रों को अपने कुशल कथा-वितान के ज़रिये जीवन्त किया है जिनकी ओर अक्सर कथाकारों का ध्यान नहीं गया था। ‘आल्हकथा’ में उन्होंने आल्हा-ऊदल के समय की विसंगतियों को चित्रित करते हुए उन सरोकारों को भी रेखांकित किया है जिनका सम्बन्ध हर युग के सामाजिक-राजनीतिक जीवन-व्यापार से होता है।
लीक से हटकर लिखे गए उपन्यासों को पसन्द करने वाले पाठक इस कृति को निश्चय ही संग्रहणीय पाएँगे।
Book Details
-
ISBN9789360866754
-
Pages256
-
Avg Reading Time9 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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‘क्रान्तिवीर भगत सिंह : ‘अभ्युदय’ और ‘भविष्य’’ आज़ादी की लड़ाई, ख़ासकर इन्क़लाबी नौजवानों के संघर्ष की हक़ीक़त तलाशती कोशिश का नतीजा है। पुस्तक में शामिल पत्रिकाओं ‘अभ्युदय’ और ‘भविष्य’ की सामग्री हिन्दुस्तान की आज़ादी के संग्राम को ठीक से समझने के लिए बेहद ज़रूरी है। ‘अभ्युदय’ ने भगत सिंह के मुक़दमे और फाँसी के हालात पर भरपूर सामग्री छापी और 8 मई, 1931 को प्रकाशित उसका ‘भगत सिंह विशेषांक’ ब्रिटिश सरकार द्वारा ज़ब्त कर लिया गया। भगत सिंह के जीवन, व्यक्तित्व और परिवार को लेकर जो सामग्री ‘अभ्युदय’ व ‘भविष्य’ में छापी गई—विशेषतः भगत सिंह व उनके परिवार के चित्र—उसी से पूरे देश में भगत सिंह की विशेष छवि निर्मित हुई। ‘भविष्य’ साप्ताहिक इलाहाबाद से रामरख सिंह सहगल के सम्पादन में निकलता था। पहले पं. सुन्दरलाल के सम्पादन में ‘भविष्य’ निकलता था, जिसमें रामरख सिंह सहगल काम करते थे। 2 अक्टूबर, 1930 को गांधी जयन्ती पर रामरख सिंह सहगल ने, जो स्वयं युक्तप्रान्त कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य थे, ‘भविष्य’ साप्ताहिक का प्रकाशन शुरू किया। पहले अंक से ही भगत सिंह आदि पर सामग्री प्रकाशित कर, ‘भविष्य’ ने सनसनी फैला दी। ‘भविष्य’ में भगत सिंह की फाँसी के बाद के हालात का जीवन्त चित्रण हुआ है। ‘भविष्य’ और ‘अभ्युदय’ से कुछ चुनिन्दा चित्र इस किताब में शामिल किए गए हैं। सम्पादक प्रो. चमन लाल ने विलुप्तप्राय तथ्यों को इस पुस्तक में सँजोकर ऐतिहासिक कार्य किया है। वस्तुतः इस इन्क़लाबी वृत्तान्त को पढ़ना स्वतंत्रता की अदम्य जिजीविषा से साक्षात्कार करना है।
Ek Kishori Ki Diary
- Author Name:
Anne Frank +1
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अने फ़्रांक की लिखी 'एक किशोरी की डायरी' विश्व की श्रेष्ठ कृतियों में गिनी जाती है। जर्मनी में जन्मी अने ने यह ‘डायरी’ 1942 से 1944 के दौरान लिखी। इसमें युद्ध के बाद जर्मन क़ब्ज़े के दौरान डच लोगों की पीड़ा का आँखों-देखा विवरण है। एक 15 वर्षीय किशोरी ने समाज की उथल-पुथल और अपने मन की कशमकश को बहुत ही ईमानदारी से व्यक्त किया है। जन्मदिन के उपहार स्वरूप मिली एक डायरी को जिस समय उन्होंने अपना सच्चा मित्र बनाया था, उस समय ख़ुद उन्होंने भी कल्पना नहीं की होगी कि एक दिन यह डायरी विश्व की महानतम कृतियों में शुमार होगी। डायरी की प्रविष्टियों में जहाँ स्कूल की बातें हैं, तो सहेलियों की ईर्ष्या, मनपसन्द खिलौनों की चाह, छुट्टियों में बिताए समय के साथ देश में तेज़ी से बदलते हालात का भी वर्णन है। कैसे जर्मनी में रहनेवाले यहूदियों की ज़िन्दगी एक सनक-भर से जहन्नुम हो गई थी, लेकिन जीने की उत्कट इच्छा आख़िरी समय तक भी हार मानने को तैयार नहीं हुई। अने का बाल-मन कहीं न कहीं मानता है कि एक दिन सब सही हो जाएगा और वो वापस अपने परिवार के साथ एक सामान्य जीवन जी पाएगी। एक किशोरी की यह मार्मिक डायरी सिर्फ़ उसी की न रहकर सीधे पाठक के दिल में घर कर जाती है।
Sambhaji Maharaj (Hindi Translation of Life and Death of Sambhaji)
- Author Name:
Medha Deshmukh Bhaskaran
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संभाजी महाराज की नजर महादजी की ओर जाती है। यह सही बातें कहने और करने का समय है। अभी वे जो करेंगे, वह उनके देश की नियति बदल देगा। वे मराठी में कहते हैं, ''महादजी, आबा साहिब ने हर सैनिक के जीवन का सम्मान किया। वे चाहते थे कि हम बेवजह शहादत से बचें और जीवित रहें, ताकि हम स्वराज के लिए, मराठा राष्ट्र के लिए एक और लड़ाई लड़ सकें, लेकिन उन्होंने कभी भी मराठा राष्ट्र के बदले में जीवन को गले नहीं लगाया होता। संभाजी महाराज फर्श पर एक ढेर की तरह गिर जाते हैं। वे जानते हैं कि कुछ ही दिनों में उनकी आँखें निकाल ली जाएँगी। लेकिन औरंगजेब बस इतना ही कर सकता है। संभाजी महाराज मराठों के दिलों में एक आग जला जाएँगे और वे दावानल में बदल जाएँगे, जो औरंगजेब के सपनों को जलाकर राख कर देंगे। युद्ध चलता रहेगा लेकिन वह कभी दक्कन नहीं जीत पाएगा। —इसी पुस्तक से छत्रपति शिवाजी महाराज के उतने ही प्रतापी पुत्र संभाजी महाराज के शौर्य और पराक्रम की यशोगाथा बताती अनुपम कृति। आक्रांताओं के दाँत खट्टे कर मराठा स्वाभिमान को जाग्रत करने में संभाजी महाराज के योगदान को रेखांकित करनेवाली कृति। हर भारतीय के राष्ट्रभाव को जाग्रत करनेवाली पठनीय कृति।
Hardaul
- Author Name:
Vandana Awasthi Dubey
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