Janiye Bharat Ke Mundaon Ko
(0)
Author:
Radhagovind PatarPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
200
₹ 160 (20% off)
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"मानव जाति में सभ्यता का उद्भव एवं विकास होने के पहले मानव के रहन-सहन, व्यवहार, खान-पान आदि अन्य पशुओं से बहुत अधिक भिन्न नहीं था। परंतु मानव जाति में प्रकृति प्रदत्त विकसित मस्तिष्कीय चेतना एवं बोलने की क्षमता ने मनुष्य को स्पष्ट रूप से अन्य पशुओं से आगे एवं श्रेष्ठ बनाया। विकसित मस्तिष्क एवं वाक्शक्ति के कारण मनुष्य ने सभ्यता के क्षेत्र में प्रवेश किया। परंतु मानव समाज में भी संपूर्ण विश्व में सभी एक साथ, एक ही कालखंड में समान रूप से विकसित होकर सभ्यता को प्राप्त नहीं हुए थे। भिन्न-भिन्न क्षेत्र के मनुष्यों ने भिन्न-भिन्न कालखंड में सभ्यता के विभिन्न स्तर को प्राप्त किया। भारत में आर्य और द्रविड़ संस्कृति एवं सभ्यता विकसित हुई। इस बीच मानव समाज की अनेक अन्य छोटी-छोटी टुकडि़याँ जो वन-जंगलों और पहाड़ों में निवास करती थीं, सभ्यता की दौड़ में पीछे रह गइर्ं। ऐसी वनवासी टुकडि़याँ संपूर्ण भारत में है। मुंडा भी ऐसी ही एक आçदवासी जनजाति है जिसकी आबादी झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम आदि राज्यों में हैं। मुंडा लोग समय के साथ अपनी आदिम संस्कृति को पीछे छोड़ते हुए द्रुत गति से सभ्यता के उच्चतर पड़ाव पर पहुँच रहे हैं। कई स्थानों में मुंडारी संस्कृति, यहाँ तक कि मुंडारी भाषा भी पीछे छूट रही है। यह पुस्तक मुंडाओं के क्रमिक विकास की एक जीवंत कहानी बताती है जो आमजन के साथ मानवशास्त्र के प्रति रुचि रखनेवालों के लिए भी समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी। "
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"मानव जाति में सभ्यता का उद्भव एवं विकास होने के पहले मानव के रहन-सहन, व्यवहार, खान-पान आदि अन्य पशुओं से बहुत अधिक भिन्न नहीं था। परंतु मानव जाति में प्रकृति प्रदत्त विकसित मस्तिष्कीय चेतना एवं बोलने की क्षमता ने मनुष्य को स्पष्ट रूप से अन्य पशुओं से आगे एवं श्रेष्ठ बनाया। विकसित मस्तिष्क एवं वाक्शक्ति के कारण मनुष्य ने सभ्यता के क्षेत्र में प्रवेश किया। परंतु मानव समाज में भी संपूर्ण विश्व में सभी एक साथ, एक ही कालखंड में समान रूप से विकसित होकर सभ्यता को प्राप्त नहीं हुए थे। भिन्न-भिन्न क्षेत्र के मनुष्यों ने भिन्न-भिन्न कालखंड में सभ्यता के विभिन्न स्तर को प्राप्त किया।
भारत में आर्य और द्रविड़ संस्कृति एवं सभ्यता विकसित हुई। इस बीच मानव समाज की अनेक अन्य छोटी-छोटी टुकडि़याँ जो वन-जंगलों और पहाड़ों में निवास करती थीं, सभ्यता की दौड़ में पीछे रह गइर्ं। ऐसी वनवासी टुकडि़याँ संपूर्ण भारत में है। मुंडा भी ऐसी ही एक आçदवासी जनजाति है जिसकी आबादी झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, असम आदि राज्यों में हैं। मुंडा लोग समय के साथ अपनी आदिम संस्कृति को पीछे छोड़ते हुए द्रुत गति से सभ्यता के उच्चतर पड़ाव पर पहुँच रहे हैं। कई स्थानों में मुंडारी संस्कृति, यहाँ तक कि मुंडारी भाषा भी पीछे छूट रही है। यह पुस्तक मुंडाओं के क्रमिक विकास की एक जीवंत कहानी बताती है जो आमजन के साथ मानवशास्त्र के प्रति रुचि रखनेवालों के लिए भी समान रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।
"
Book Details
-
ISBN9789390378463
-
Pages120
-
Avg Reading Time4 hrs
-
Age18+ yrs
-
Country of OriginIndia
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- Description: हे पुस्तक सजग, सर्वसामान्य वाचकांसमोर भारतीय निसर्ग-पर्यावरण आणि त्यातील आर्थिक, सामाजिक, राजकीय गुंतागुंत सविस्तर उलगडते.पर्यावरण क्षेत्रात सक्रिय व्यक्ती/संस्था/समूहांना आजवर पडलेल्या बहुतांश अनुत्तरित प्रश्नांची समर्पक उत्तरे देणारे; निव्वळ ‘झाडे लावा, वाघ वाचवा' ह्यांच्यापलीकडे असणारा पर्यावरण प्रश्नांवरील उपायांबाबतचा संवाद-आवाका भारतीय संदर्भ घेऊन समजवणारे आणि इथल्या पर्यावरण समस्या निवारण्यासाठी आवश्यक संवादाच्या दिशा अचूक दर्शवणारे हे पुस्तक आहे.पर्यावरणसंवादाचे सामाजिक न्याय, विज्ञान, समाजशास्त्र, व्यवस्थापन, राज्यशास्त्र, मानसशास्त्र, तंत्रज्ञान, विक्री-कौशल्ये या अन्य विद्याशाखांशी गहिरे नाते असते. हे पुस्तक ते विस्तृत रीतीने दर्शवते. संबंधित विषयांच्या अभ्यासकांना, अध्यापकांना, संशोधकांना या आंतरविद्याशाखीय अभ्यासक्षेत्रातील भावी अभ्यास-संशोधनाचे थांबे, हे पुस्तक स्पष्ट करते. पैस पर्यावरणसंवादाचा | संतोष शिंत्रे Pais Paryavaransanvadacha I Santosh Shintre
Chanakya Ka Naya Ghoshnapatra
- Author Name:
Pawan Kumar Verma
- Book Type:

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Description:
लगभग 2500 वर्ष पहले, ईसा पूर्व चौथी सदी में, जब विश्व के अधिकांश भागों की सभ्यता अपनी शैशवावस्था में थी, चाणक्य नाम के एक विद्वान और विचारक ने ‘अर्थशास्त्र’ शीर्षक से एक ग्रन्थ लिखा, जो संसार में राजनीति पर सर्वाधिक गहन और सघन रचनाओं में से एक है।
‘अर्थशास्त्र’ में लगभग 6000 श्लोक और सूत्र हैं। यहाँ व्यवस्थित रूप से प्रभावशाली प्रशासन,
लोककल्याण, आर्थिक समृद्धि, शासक के गुण, उसके मंत्रियों की योग्यता, अधिकारियों के कर्तव्यों, प्रशासनिक क्षमता, नागरिक दायित्व, क़ानून के शासन का महत्त्व, प्रभावी न्याय व्यवस्था, भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के तरीक़े, दंडनीति अथवा अपराधियों को दंडित करने की नीति, विदेशनीति के संचालन, युद्ध की तैयारी और संचालन, गठबन्धनों की नीति और अन्य बातों पर राष्ट्रीय हितों की सर्वोपरिता की चर्चा की गई है।
यह निश्चित रूप से वही क्षेत्र हैं, जिनमें अपेक्षाकृत नवस्वतंत्र गणतंत्र भारत लगता है कि राह से भटका हुआ है। किन्तु यदि दो हज़ार साल पहले चाणक्य जैसा कोई व्यक्ति, इन्हीं परिस्थितियों में परिवर्तन ला सकता था और प्रशासन का एक नूतन दृष्टिकोण रच सकता था, तो कोई कारण नहीं कि हम भी यह न कर सकें और इस पुस्तक का प्रतिपाद्य भी यही है। क्षुद्र अहंमन्यता, बौद्धिक विशिष्टता या पक्षधर संकीर्णता से परे इसका उद्देश्य केवल यह है कि ‘परिवर्तन’ के लिए राष्ट्रव्यापी रूप से तत्काल और गहन बहस की शुरुआत हो सके।
Yunan Mein Darshanshastra
- Author Name:
Ras Bihari Dutta
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Ardhanareeshwar
- Author Name:
Ramdhari Singh Dinkar
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- Description: इस पुस्तक के निबन्ध अपने समय के दस्तावेज हैं जिनको पढ़ते दिनकर के वैचारिक-स्रोतों और सन्दर्भों से हम अवगत हो सकते हैं; और जान सकते हैं कि एक युगद्रष्टा साहित्यकार अपने जीवन में अपनी कलम के साथ किस द्वन्द्व-अन्तर्द्वन्द्व के साथ जीता रहा। ‘अर्धनारीश्वर’ दिनकर का वह निबन्ध-संग्रह हैं जिसमें समाज, साहित्य, राजनीति, स्वतंत्रता, राष्ट्रीयता, अन्तरराष्ट्रीयता, धर्म, विज्ञान के साथ-साथ लेखकों, चिन्तकों, मनीषियों, राजनेताओं के कृतित्व और व्यक्तित्व से जुड़े अनेक पहलुओं का व्यापक परिप्रेक्ष्य में गम्भीरता से आकलन किया गया है और तर्क-सम्मत निष्कर्ष निकाले गए हैं। इस संग्रह का नाम ‘अर्धनारीश्वर’ क्यों रखा गया, इसके बारे में स्वयं लेखक का कहना है कि, '“इसमें ऐसे भी निबन्ध हैं जो मन-बहलाव में लिखे जाने के कारण कविता की चौहद्दी के पास पड़ते हैं और कुछ ऐसे भी हैं जिनमें बौद्धिक चिन्तन या विश्लेषण प्रधान है। इसीलिए मैंने इस संग्रह का नाम ‘अर्धनारीश्वर’ रखा है, यद्यपि इसमें अनुपातत: नरत्व अधिक और नारीत्व कम है।” अतएव स्पष्ट है कि राष्ट्रकवि दिनकर की कविताएँ जिन्हें पसन्द हैं, उन्हें ये निबन्ध भी उनकी सोच-संवेदना के बेहद करीब लगेंगे।
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