Rakesh Aur Parivesh : Patron Mein
Author:
Jaidev TanejaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 1200
₹
1500
Unavailable
कोई व्यक्ति और विशेषत: रचनाकार अपने बारे में क्या कहता है—इससे अधिक महत्त्वपूर्ण और बड़ा सच यह है कि दूसरे उसके बारे में क्या कहते हैं? यह पत्र-संग्रह दूसरों के आईने में राकेश के व्यक्तित्व, कृतित्व और परिवेश की एक प्रामाणिक तस्वीर पेश करता है। यहाँ केन्द्र में राकेश हैं और परिधि पर उनके समकालीन।</p>
<p>लेखकीय आत्म-सम्मान और अपने अधिकारों के लिए हर किसी से कभी भी और कहीं भी त्याग-पत्र देने, वॉक आउट करने और लड़ने-झगड़ने को सदैव तत्पर, निश्छल आत्मीयता की तलाश में दर-दर भटकते सैलानी, भीतर से असुरक्षित, अकेले और बेचैन लेकिन बाहर से छतफाड़ ठहाके लगानेवाले हरदिल अज़ीज़ अनूठे दोस्त, एक साथ ज़बरदस्त बौद्धिक एवं अहंकारी तथा अत्यधिक संवेदनशील और भावुक अपने सिद्धान्तों के लिए अडिग और अटूट तथा अपने लेखन के लिए अत्यन्त अस्थिर, बेसब्र और बेचैन मोहन राकेश के अन्तर्विरोधों की कोई सीमा नहीं है। इस पुस्तक में संकलित राकेश और उनके सहयात्रियों के 721 पत्र उनके जटिल व्यक्तित्व को, पाठकों के लिए, बड़े प्रामाणिक एवं विश्वसनीय रूप में एकदम पारदर्शी बना देते हैं। इनमें उनके चेतन-अवचेतन के अँधेरे-गुह्य कोनों और परिवेश के नेपथ्य की जीवन्त छवियों एवं धड़कनों को साफ़-साफ़ पहचाना और सुना जा सकता है।</p>
<p>नि:सन्देह, यह पुस्तक राकेश के पाठकों, अध्येताओं और शोधार्थियों को राकेश के संघर्षमय जीवन और वैविध्यपूर्ण रचनाकर्म के मर्म को गहराई से जानने-समझने में न केवल रोचक, दुर्लभ एवं महत्त्वपूर्ण सामग्री ही उपलब्ध कराती है, बल्कि हिन्दी के पत्र-साहित्य में एक उल्लेखनीय भूमिका भी निभाती है।
ISBN: 9788171192144
Pages: 783
Avg Reading Time: 26 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
Recommended For You
Chuppiyaan Aur Daraarein : Stree Aatmakatha : Paath Aur Saiddhantiki
- Author Name:
Garima Shrivastava
- Book Type:

- Description: Literary Criticism on Feminism ‘चुप्पियाँ और दरारें’ भारत की अनेक भाषाओं में लिखी गई स्त्री आत्मकथाओं की न सिर्फ शिनाख्त करती है बल्कि इन आत्मकथाओं में विन्यस्त वैचारिकी का गहन विश्लेषण भी प्रस्तुत करती है। यह न सिर्फ हिन्दी बल्कि किसी भी भारतीय भाषा में अभूतपूर्व कही जाएगी। एक सर्वथा अनूठी पुस्तक। - अशोक वाजपेयी ध्वनि प्रदूषण पर तो आज बहुत चर्चा होती है, लेकिन चुप्पी के प्रदूषण पर नहीं। सच यह है कि जाति, लिंग और धर्म की बंदिशों से घिरे अवर्ण समाज और स्त्रियों की आत्माभिव्यक्ति बहुत कम सामने आती है। इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक में गरिमा श्रीवास्तव ने यह तथ्य पहचाना है और चुप्पी की कारा तोड़ते हुए लिखी गई विभिन्न वर्गों और जातियों से निकली औरतों की आपबीती के मर्म को एक गम्भीर अन्तर्दृष्टि से परखा है। पठनीय और सरस। —मृणाल पांडेय गरिमा श्रीवास्तव की यह किताब ‘चुप्पियाँ और दरारें’ हमारा ध्यान स्त्री आत्मकथाओं की ओर ले जाती है, जहाँ मनुष्य जाति के स्त्री पक्ष के तनिक भिन्न अनुभव से हमारा साक्षात्कार होता है। यह स्त्रियों की अपनी अनुभूति है, उनकी अपनी आत्मस्वीकृतियाँ, पीड़ा और उल्लास है। कभी सिमोन द बोउआर ने ‘द सेकंड सेक्स’ के माध्यम से जेंडर का हाल सुनाया था, कुछ उसी अन्दाज में गरिमा श्रीवास्तव की यह किताब हमें भारतीय स्त्रियों की अनसुनी कहानी बताती है। निःसंदेह पठनीय और संग्रहणीय। —प्रेमकुमार मणि >गरिमा श्रीवास्तव की निगाह हिन्दी पर तो है ही, वे इस बहुभाषी, बहुधार्मिक, बहुजातीय और बहुसामुदायिक महादेश में हिन्दू, मुसलमान, दलित, सवर्ण, बांग्ला, मलयालम और कन्नड़ दायरों में स्त्री आत्मकथाओं के एक ऐसे बहुलतावादी संसार में प्रवेश करती हैं जिसका संधान अभी तक एक साथ एक जगह नहीं किया गया है। अश्वेत स्त्री-आत्मकथाओं पर उनका काम इस बृहद कृति में पाठकों को बोनस की तरह उपलब्ध है। —अभय कुमार दुबे
1000 Veer Savarkar Prashnottari | Revolutionaries And Pioneer Of Hindutva
- Author Name:
Anita Gaur
- Book Type:

- Description: यह धरा मेरी यह गगन मेरा, इसके वास्ते शरीर का कण-कण मेरा' - इन पंक्तियों को चरितार्थ करने वाले क्रांतिकारियों के आराध्य देव स्वातंत्र्य-वीर विनायक दामोदर सावरकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रिम पंक्ति के सेनानी और प्रखर राष्ट्रवादी नेता थे। वे न केवल स्वाधीनता संग्राम के एक तेजस्वी सेनानी थे अपितु महान् क्रांतिकारी, चिंतक, सिद्धहस्त लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता तथा दूरदर्शी राजनेता भी थे। वे एक ऐसे इतिहासकार भी हैं, जिन्होंने हिंदू राष्ट्र की विजय के इतिहास को प्रामाणिक ढंग से लिपिबद्ध किया है। उन्होंने 1857 के प्रथम स्वतंत्रता समर का सनसनीखेज व खोजपूर्ण इतिहास लिखकर ब्रिटिश शासन को हिलाकर रख दिया था। अप्रितम क्रांतिकारी, दृढ़ राजनेता, समर्पित समाज-सुधारक, दार्शनिक, दृष्टा, महान् कवि और महान् इतिहासकार आदि अनेकोनेक गुणों के धनी वीर सावरकर हर भारतीय की श्रद्धा के केंद्रबिंदु हैं। उनका संघर्ष, त्याग, उन्हें मिली यातनाएँ और तिरस्कार की करुणगाथा हमें उद्वेलित करती है, राष्ट्रभाव जगाती है।
Stri Vimarsh Ki Jameen
- Author Name:
Shriprakash Mishra
- Book Type:

- Description: स्त्री-विमर्श यूरोप के लिए चाहे जितना पुराना हो, अध्ययन के स्तर पर भारत के लिए अभी नया क्षेत्र है। इसने पिछली सदी के अन्तिम दो दशकों में जोर पकड़ा है। इस विषय पर जहाँ अंग्रेजी में अच्छी पुस्तकों की भरमार है, हिन्दी में प्रचुर सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद एक व्यवस्थित रूप से लिखी पुस्तक शायद ही मिलती हो। उम्मीद है इस कमी को यह पुस्तक 'स्त्री-विमर्श की ज़मीन' पूरी करेगी। पुस्तक का प्रत्येक अध्याय इसका प्रमाण है। वहाँ पश्चिम में हुए चिन्तन और आन्दोलन के साथ-साथ भारत में हुए चिन्तन, अध्ययन और प्रयास का खुलासा है। इस पुस्तक का पाठक-समाज में भरपूर स्वागत होगा, ऐसी उम्मीद है।
Sadhu Se Sevak
- Author Name:
Manjeet Negi
- Book Type:

- Description: ‘साधु से सेवक’ पुस्तक मोदी के युवा अवस्था के उन दो वर्षों की कहानी है, जब युवा नरेंद्र सांसारिक मोहमाया से दूर हिमालय में साधु बनने की खोज में भटक रहा था। कोलकाता में रामकृष्ण मिशन के बेलूर मठ से होते हुए ऋषिकेश के दयानंद आश्रम और फिर बाबा केदार की शरण में जाकर नरेंद्र मोदी की तृष्णा शांत हुई। ऋषिकेश के स्वामी दयानंद गिरि से पी.एम. मोदी का पुराना रिश्ता था। स्वामी दयानंद का मोदी के जीवन पर गहरा प्रभाव है। प्रचारक जीवन में मोदी जब ऋषिकेश आए और 1981 में स्वामी से जुड़ गए, तब से स्वामीजी मार्गदर्शन में सेवा-स्वच्छता को अपने जीवन में आत्मसात् किया। बाल्यकाल से ही हिमालय के प्रति नरेंद्र मोदी के मन में विशेष आकर्षण था। वह आए दिन साधु-संतों और श्रद्धालुओं से बाबा केदार, बदरीधाम, कैलाश मानसरोवर समेत हिमालयी क्षेत्र के पूर्व से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण दिशा में आनेवाले सभी पावन धार्मिक तीर्थों के विषय में रुचि लेकर सुनते थे। इन तीर्थों की महिमा और वहाँ के सौंदर्य की चर्चा सुनकर नरेंद्र मन-ही-मन में वहाँ की यात्रा कर लेते थे। यह पुस्तक नरेंद्र मोदी के आध्यात्मिक जीवन से जुड़े अनसुने पहलुओं को उजागर करने का प्रयास है। ‘साधु से सेवक’ पुस्तक युवावस्था में दो वर्षों की उस आध्यात्मिक यात्रा का सार है, जो साधु बनने की खोज में उन्हें यहाँ ले आई थी। यहीं से मिली प्रेरणा ने उनके व्यक्तित्व को हिमालय सा दृढ़ बनाया है।
Ek Teacher Ki Diary
- Author Name:
Bhavna Shekhar
- Book Type:

- Description: "भारत में शिक्षा कभी पेशा नहीं थी, किंतु आज शिक्षा का बाजारीकरण देश के समक्ष बड़ी चुनौती है। आज शिक्षक व्यवसायी है और छात्र उपभोक्ता। इनके बीच भावनात्मक संबंध नगण्य होता जा रहा है। ‘एक टीचर की डायरी’ आज के माहौल में शिक्षक और छात्र के बीच पनप रही दूरी को पाटने का एक प्रयास है। टीचर के प्रति छात्र की डूबती आस को थामने की ईमानदार कोशिश है। इसे पढ़कर तीन बातें जेहन में आएँगी : एक—प्रकृति टीचर बनाने की प्रक्रिया स्वतः करती है; दूसरी—टीचर को ‘वज्रादपि कठोराणि, मृदुनि कुसुमादपि’ होना होता है एवं तीसरी—शिक्षक सदा शिक्षक होता है, यानी अग जग में शिक्षक। नित नए रचनात्मक प्रयोग विद्यार्थियों को शिक्षक से गहरे जुड़ने का जरिया बनते हैं। आज बालकों के दिमाग में पैदायशी स्पीड का इंजन फिट है, उन्हें कक्षा की चारदीवारी में बाँधकर रखना कोई खेल नहीं, फिर घर का वातावरण प्रतिकूल हो, तब शिक्षक का दायित्व बढ़ जाता है। आज के छात्र तरह-तरह के मानसिक दबाव, फ्रस्ट्रेशन, डिप्रेशन के शिकार हैं। ऐसे में टीचर का ‘हीलिंग टच’ इन बच्चों का जीवन बदल सकता है। पुस्तक में किशोर मन की उलझन सुलझाने के कई प्रसंग हैं। छात्रों को मानव धर्म के साथ प्रकृति प्रेम तथा जीव-जंतु से लगाव का संदेश यह डायरी बखूबी देती है। इस विधा की सख्त जरूरत है। भावना शेखर की यह कथा डायरी नायाब कृति है, जो शिक्षाजगत् से जुड़े हर व्यक्ति के लिए पठनीय और अनुकरणीय है। —उषा किरण खान"
Tat Par Hun Par Tatastha Nahin
- Author Name:
Kunwar Narain
- Book Type:

- Description: कुँवर नारायण हमारे समय के उन अप्रतिम लेखकों में से हैं, जिन्होंने हिन्दी कविता में ही नहीं बल्कि पूरे भारतीय साहित्य में अपनी एक सशक्त और अमिट पहचान बनाई है। ‘तट पर हूँ पर तटस्थ नहीं’ पिछले एक दशक में कुँवर नारायण द्वारा विभिन्न लेखकों, कवियों, पत्रकारों को दी गई भेंटवार्ताओं का एक प्रतिनिधि चयन है। कुछ भेंटवार्ताओं में संवाद हैं, कुछ में अपने साहित्य और समय के प्रश्नों से गहराई में जाकर जूझने की कोशिश है और कुछ में प्रश्नों के सीधे और स्पष्ट उत्तर हैं। कुँवर नारायण हिन्दी के उन चुने हुए लेखकों में से हैं जो इंटरव्यू विधा को धैर्य और पर्याप्त गम्भीरता से लेते हैं। यही कारण है कि उनकी भेंटवार्ताओं के किसी भी चयन का महत्त्व उनकी समीक्षा पुस्तकों से कम नहीं है। उनकी कुछ लम्बी भेंटवार्ताएँ उतनी ही महत्त्वपूर्ण हैं जितनी उनकी समीक्षाएँ या विचारपरक निबन्ध। ‘तट पर हूँ पर तटस्थ नहीं’ का सम्पादन विनोद भारद्वाज ने किया है जो कुँवर नारायण की प्रारम्भिक भेंटवार्त्ताओें के संग्रह ‘मेरे साक्षात्कार’ का भी सम्पादन कर चुके हैं। पिछले चार दशकों से भी अधिक समय से विनोद भारद्वाज कुँवर नारायण के निकट सम्पर्क में रहे हैं। वह उनसे समय-समय पर कई लम्बी भेंटवार्ताओं का संयोजन भी कर चुके हैं। यह पुस्तक हिन्दी ही नहीं, भारतीय साहित्य के सभी अध्येताओं के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है। कुँवर नारायण के जीवन और साहित्य दोनों का ही एक अच्छा परिचय इस पुस्तक में मौजूद है। इंटरव्यू विधा प्रश्न-उत्तर, संवाद, डायरी, आत्मस्वीकृति, निबन्ध और समीक्षा की दुनिया में एक अद्भुत आवाजाही का माध्यम बन जाती है।
Manushya Shasak Hai
- Author Name:
James Allen
- Book Type:

- Description: जेम्स एलन का जन्म 1864 में लीसेस्टर, इंग्लैंड में हुआ। अपनी पहली किताब, ‘फ्रॉम पॉवर्टी टू पॉवर’ पूरी करने के बाद वे इल्फ्राकूम्ब में रहने चले गए। जहाँ उन्होंने अपनी यह अमर कृति ‘जैसा मनुष्य सोचता है (As a Man Thinketh)’ लिखी जो कि उनकी कालजयी रचना है। यह पुस्तक 1902 में प्रकाशित हुई और इसे सेल्फ हेल्प किताबों की क्लासिक माना जाता है। इस पुस्तक को जेम्स एलन की पत्नी लिली ने प्रकाशित करवाया था। एलन का लेखक जीवन काफी छोटा रहा सिर्फ़ 9 साल का। 1912 में 48 वर्ष की उम्र में एलन इस दुनिया को छोड़ कर चले गए।
Bharatiya Sanskritik Moolya
- Author Name:
Dr. Bajrang Lal Gupta
- Book Type:

- Description: भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता रहा है। समृद्ध कला, कौशल और तकनीक के बल पर विश्व के सकल घरेलू उत्पाद में भारत की भागीदारी 25-30 प्रतिशत तक थी। लेकिन विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा कई शताब्दियों तक इसे लगातार लूटे जाने और विदेशी शासन के कारण भारत का वैभव बीते दिनों की बात बनकर रह गया। उत्पीड़ित और असहाय जन-समुदाय ने इस आपदा से मुक्ति के लिए भगवान् की शरण ली। दो सौ वर्ष के अंग्रेजी राज में पश्चिम का बुद्धिजीवी वर्ग यह प्रचारित करने लगा कि भारतीय समाज केवल परलोक की चिंता करनेवाला व पलायनवादी है और आर्थिक मामलों को लेकर भारत की कोई सोच ही नहीं है। इसी अवधारणा की छाया में भारत ने स्वतंत्रता के उपरांत अपने विकास के लिए पश्चिमी वैचारिक अधिष्ठान पर आधारित सामाजिक, आर्थिक संरचना के निर्माण का प्रयोग किया। लेकिन इससे समस्याएँ सुलझने के बजाय उलझती ही जा रही हैं। यही नहीं, अनेक प्रकार की उपलब्धियों के बावजूद आज विश्व के अनेक विचारक पश्चिमी देशों की प्रगति की दृष्टि एवं दिशा से संतुष्ट नहीं हैं। आज पूरा विश्व एक वैकल्पिक विकास मॉडल चाहता है। प्रख्यात अर्थशास्त्रा् डॉ. बजरंग लाल गुप्ता ने अपनी पुस्तक ‘हिंदू अर्थचिंतन : दृष्टि एवं दिशा’ में भारतीय अर्थचिंतन की सुदीर्घ एवं पुष्ट चिंतन परंपरा का विशद् वर्णन करते हुए पश्चिमी अर्थचिंतन की उन खामियों का भी सांगोपांग विश्लेषण किया है, जिसके कारण पूरा विश्व आज आर्थिक-सामाजिक संकट के कगार पर खड़ा है। इस वैश्विक संकट से उबरने के लिए उन्होंने भारतीय अर्थचिंतन पर आधारित एक ऐसा वैकल्पिक मार्ग भी सुझाया है, जो सर्वमंगलकारी है।
Paryavaran Ke Paath
- Author Name:
Anupam Mishra
- Book Type:

- Description: ''अनुपम मिश्र एक अत्यन्त विनम्र, निरभिमानी व्यक्ति थे जिन्होंने पर्यावरण के क्षेत्र में साधारण और सामुदायिक विवेक और विधि का जैसा अवगाहन किया वैसा आधुनिक टेकनॉलजी के दुश्चक्र में फँसे अन्य पर्यावरणविद् अकसर नज़रन्दाज़ करते रहे हैं। अनुपम जी लगभग ज़िद कर अपनी इस धारणा पर डटे रहे कि साधारण लोग और समुदाय पढ़े-लिखों से ज़्यादा जानता-समझता है और आधुनिकता को अपनी सर्वज्ञता के दम्भ से मुक्त हो सकना चाहिए। उनसे बातचीत का यह संचयन इस अनूठे व्यक्ति के सोच-विचार की नई परतें सहजता से खोलेगा, ऐसा हमारा विश्वास है।" —अशोक वाजपेयी
Samay Ka Sankshipt Itihas
- Author Name:
Stephen Hawking
- Book Type:

- Description: स्टीफेन हॉकिंग की यह पुस्तक विज्ञान-लेखन की दुनिया में अपनी लोकप्रियता के कारण अतिविशिष्ट स्थान रखती है। वर्ष 1988 में अपने प्रकाशन के मात्र दस वर्षों की अवधि में इस पुस्तक की 10 लाख से ज़्यादा प्रतियाँ बिकीं और आज भी जिज्ञासा की दुनिया में यह पुस्तक बदस्तूर अपनी जगह बनाए हुए है। ब्रह्मांड की उत्पत्ति किस प्रकार हुई, यह कहाँ से आया और क्या यह शाश्वत है या किसी ने बाक़ायदा इसकी रचना की है? बुद्धिचालित मनुष्य का उद्भव एक सांयोगिक घटना है या फिर मनुष्य के लिए ब्रह्मांड की रचना की गई, ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो सदा से हमें विचलित-उत्कंठित करते रहे हैं। यह पुस्तक इन सवालों का उत्तर देने का प्रयास करती है। इसमें आरम्भिक भू-केन्द्रिक ब्रह्मांडिकियों से लेकर बाद की सूर्य-केन्द्रिक ब्रह्मांडिकियों से होते हुए एक अनन्त ब्रह्मांड अथवा अनन्त रूप से विस्तृत अनेक ब्रह्मांडों तथा कृमि-छिद्रों की परिकल्पनाओं तक की हमारी विकास-यात्रा का संक्षिप्त और सरलतम वर्णन किया गया है। इस संस्करण में पिछले दशक में ब्रह्मांडिकी के क्षेत्र में हासिल की गई नई सूचनाओं और नतीजों को भी सम्मिलित तो किया ही गया है; साथ ही, पुस्तक के प्रत्येक अध्याय को पूर्णतया परिवर्द्धित करते हुए प्राक्कथन के साथ-साथ वर्म होल और काल-यात्रा पर जो एक नितान्त नवीन अध्याय शामिल किया गया है, उसका महत्त्व सदैव बना रहेगा।
Tarkshastra
- Author Name:
Neelima Mishra
- Book Type:

- Description: Awating description for this book
Hindu, Hindutva, Hindustan
- Author Name:
Sudhir Chandra
- Book Type:

-
Description:
सारे बौद्धिक प्रयत्न के बावजूद, ‘हिन्दू अवचेतन’ अपने को ही भारतीय मानता है। भारत जैसे बहुधर्मी और सांस्कृतिक वैविध्य से भरपूर देश के लिए ऐसी मान्यता अनिवार्यतः अनिष्टकारी है। पिछले कुछ समय से यह मान्यता अवचेतन से निकलकर उत्तरोत्तर आक्रामक होती जा रही है। बौद्धिक प्रयत्न के बावजूद नहीं, बल्कि खुलकर एक विचारधारा के रूप में यह हिन्दू को ही राष्ट्र मान बैठी है। ख़तरा यदि प्रधानतः विचारधारा और उससे जुड़ी किसी राजनीतिक पार्टी का होता तो उससे जूझना मुश्किल न होता। पर आज परेशानी यह है कि ‘हिन्दू अवचेतन’ कहीं न कहीं उन बातों को अपनी अँधेरी गहराइयों में मानता है, जिनको चेतना के स्तर पर वह राष्ट्र के लिए घातक और नैतिक रूप से अवांछनीय समझता है। ज़रूरी है कि उसका सामना इस दुविधा से कराया जाए।
—इसी पुस्तक से
Pais Paryavaransanvadacha
- Author Name:
Santosh Shintre
- Book Type:

- Description: हे पुस्तक सजग, सर्वसामान्य वाचकांसमोर भारतीय निसर्ग-पर्यावरण आणि त्यातील आर्थिक, सामाजिक, राजकीय गुंतागुंत सविस्तर उलगडते.पर्यावरण क्षेत्रात सक्रिय व्यक्ती/संस्था/समूहांना आजवर पडलेल्या बहुतांश अनुत्तरित प्रश्नांची समर्पक उत्तरे देणारे; निव्वळ ‘झाडे लावा, वाघ वाचवा' ह्यांच्यापलीकडे असणारा पर्यावरण प्रश्नांवरील उपायांबाबतचा संवाद-आवाका भारतीय संदर्भ घेऊन समजवणारे आणि इथल्या पर्यावरण समस्या निवारण्यासाठी आवश्यक संवादाच्या दिशा अचूक दर्शवणारे हे पुस्तक आहे.पर्यावरणसंवादाचे सामाजिक न्याय, विज्ञान, समाजशास्त्र, व्यवस्थापन, राज्यशास्त्र, मानसशास्त्र, तंत्रज्ञान, विक्री-कौशल्ये या अन्य विद्याशाखांशी गहिरे नाते असते. हे पुस्तक ते विस्तृत रीतीने दर्शवते. संबंधित विषयांच्या अभ्यासकांना, अध्यापकांना, संशोधकांना या आंतरविद्याशाखीय अभ्यासक्षेत्रातील भावी अभ्यास-संशोधनाचे थांबे, हे पुस्तक स्पष्ट करते. पैस पर्यावरणसंवादाचा | संतोष शिंत्रे Pais Paryavaransanvadacha I Santosh Shintre
Jambudweepe Bharatkhande
- Author Name:
Dr. Mayank Murari
- Book Type:

- Description: भारतीय चिंतन में कल्प की अवधारणा का समय के साथ-साथ व्योम, यानी देश के हिसाब से भी विचार किया गया है। पृथ्वी के द्वारा सूर्य का परिभ्रमण करने से संवत्सर काल बनता है। इसी प्रकार जब सूर्य अपनी आकाशगंगा का चक्कर लगाता है तो उसका एक चक्र पूरा होने के समयखंड को मन्वंतर कहा जाता है। इस प्रकार आकाशगंगा भी इस ब्रह्मांड में किसी ध्रुवतारे या सप्तर्षि या अन्य तारे का चक्कर लगाती है, उसके एक चक्कर की गणना को ही कल्प कहा गया। हमारा सौरमंडल आकाशगंगा के बाहरी इलाके में स्थित है और उसके केंद्र की परिक्रमा कर रहा है। इसे एक परिक्रमा पूरी करने में लगभग 22.5 से 25 करोड़ वर्ष लग जाते हैं। —इसी पुस्तक से भारतीय जीवन में देश और काल है। काल के साथ गति है और गति के संग जीवनदर्शन जुड़ा है। यह बात ही भारत को विशिष्ट बनाती है। कालचक्र, युगचक्र, ऋतुचक्र, धर्मचक्र, भाग्यचक्र और कर्मचक्र के विधान भारतीय सांस्कृतिक चेतना में समाए हुए हैं। सनातन के माहात्म्य, भारतीय चिंतन की वैज्ञानिकता और भारतीय जीवन-मूल्यों की पुनर्स्थापना करती विचारोत्तेजक पठनीय कृति।
Bhaugolik Chintan Ki Navin Pravratiyan
- Author Name:
Poornima Shekhar Singh +1
- Book Type:

-
Description:
इस पुस्तक में भूगोल विषय की संकल्पनात्मक, सैद्धान्तिक एवं क्रियाविधिक स्वरूप का विवेचन एवं विमर्श मुख्य रूप से द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद के काल के सन्दर्भ में किया गया है। द्वितीय विश्वयुद्ध भौगोलिक चिन्तन के विकास में मील का पत्थर है, क्योंकि इसके बाद विश्व के राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक क्षितिज पर एक नए युग का सूत्रपात हुआ।
उपनिवेशवाद का चरमराता स्वरूप, स्वतंत्र देशों में नई सरकार एवं समाज के विकास के लिए नवीन सोच एवं उत्साह ने भौगोलिक चिन्तकों को भी इस बात की ओर सोचने के लिए प्रेरित किया कि विषय को जीवन्त एवं उपयोगी बनाने के लिए नई विचारधाराओं का विकास किया जाए। इसी पृष्ठभूमि में प्रत्यक्षवाद, मात्रात्मक क्रान्ति, व्यवहारवाद, उग्रसुधारवाद, मानववाद, कल्याणकारी भूगोल, उत्तर-आधुनिकतावाद आदि विचारधाराओं का विकास भूगोल में हुआ। भूगोल की इन्हीं नवीन प्रवृत्तियों का इस पुस्तक में विवेचन किया गया है।
यह कृति इस अर्थ में विलक्षण है कि भूगोल के सबसे गम्भीर पक्ष—‘भौगोलिक विचारधारा’ की नवीनतम प्रवृत्तियों पर नितान्त सुगम, परिष्कृत एवं प्रवाहपूर्ण ढंग से प्रकाश डाला गया है।
Devnagari Jagat Ki Drishya Sanskriti
- Author Name:
Sadan Jha
- Book Type:

-
Description:
“हिन्दी में सभ्यता-समीक्षा कम ही होती है और यह कहा जा सकता है कि यह हिन्दी में विचार और आलोचना की जो परम्परा रही है उससे विपथ होने जैसा है। इधर तो सारा समय हिन्दी में, जैसे कि अन्यत्र भी, देखने-दिखाने में ही बीतता है। इसके बावजूद अभी तक देवनागरी जगत में जो दृश्य संस्कृति विकसित हुई है उसका कोई सुचिन्तित अध्ययन नहीं हुआ है। सदन झा की यह पुस्तक इस सन्दर्भ में पहली ही है : उसमें समझ और जतन से, वैचारिक सघनता और खुलेपन से इस दृश्य संस्कृति के विभिन्न रूपों पर विचार किया गया है। निश्चय ही यह हिन्दी में चालू मानसिकता से अलग कुछ करने का ज़रूरी जोख़िम उठाने जैसा है। हम रज़ा पुस्तक माला में यह पुस्तक सहर्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।”
—अशोक वाजपेयी
Sanskriti Se Nikalati Rahen
- Author Name:
Ramnaresh Kushwaha
- Book Type:

- Description: हमारा देश अनेक धर्मों एवं जातियों में विभक्त है और सैकड़ों पंथ अपने-अपने दृष्टिकोण से समाज को सुदृढ़ बनाने में प्रयासरत हैं। पर आज भी हमारा समाज अनेक कुरीतियों से ग्रस्त है और आएदिन मनुष्य लालचवश तंत्र-मंत्र एवं तांत्रिकों के चक्कर में फँसकर धन-हानि क्या, प्राण-हानि तक कर डालता है। बाह्य सुख-सुविधाएँ अधिक-से-अधिक प्राप्त करने की जैसे होड़ लगी हुई है। इन सबके बीच व्यक्ति अपने आपको, अपनी अंतश्चेतना को बिलकुल भुला बैठा है। वह एक यांत्रिक प्राणी बनकर केवल भौतिक साधनों की अंधी दौड़ में दौड़ लगा रहा है। संस्कृति से निकलती राहेंहमारे प्राचीन वाङ्मय और धर्म-दर्शन से नि:सृत ज्ञान की अजस्र धारा में हमारा प्रवेश कराती है। यह हमारे मनीषियों, संत-महात्माओं और महापुरुषों के वचनों में उच्चारित हमारी गौरवपूर्ण संस्कृति से हमारा परिचय कराती हुई आत्मिक चेतना, जीवन-मूल्य और सामाजिक-सांस्कृतिक सरोकारों का मार्ग प्रशस्त करती है। भारतीय धर्म-दर्शन-संस्कृति की गौरवशाली परंपरा के आधार पर जीवन का सन्मार्ग प्रशस्त करनेवाली रोचक व ज्ञानवर्धक पुस्तक।
Gandhijan Charitramala
- Author Name:
Sunanda Mohini +7
- Book Type:

- Description: आज आपण नवभारताची संकल्पना, ‘आयडिया ऑफ इंडिया’ हीच विसरलो आहोत. हा देश येथे राहणाऱ्या सर्वांचा आहे, त्यावर त्यांचा समान हक्क आहे, समता-न्याय-बंधुता ह्यांवर आधारित देश उभारणे, त्याला समृद्ध करणे ही ह्या सर्वांची सामायिक जबाबदारी आहे, ही झाली ‘आयडिया ऑफ इंडिया.’ द्वेष आणि उन्मादाने भारलेल्या आजच्या वातावरणातून बाहेर पडण्यासाठी आपल्याला ह्या संकल्पनेचे आणि तिची पायाभरणी करणाऱ्यांचे पुनर्स्मरण करावेच लागेल. याच भूमिकेतून घेऊन येत आहोत गांधीजन चरित्रमाला... अनुराधा मोहनी संपादित या चरित्रमालेत आपल्याला वाचायला मिळतील एकाहून एक सिद्धहस्त लेखकांच्या लेखणीतून साकारण्यात आलेली आठ दिग्गज व्यक्तिमत्वांची चरित्र म्हणजेच गांधीजनांची चरित्रमाला ! 1. सर्वांचे गांधीजी । रवीन्द्र रुक्मिणी पंढरीनाथ 2. सावली नव्हे, जीवनसंगिनी – कस्तुरबा गांधी । सुनन्दा मोहनी 3. क्रांतिकारक ऋषी विनोबा भावे । मीना श्रीकांत कारंजेकर 4. नियतीशी करार करणार महामानव- पंडित जवाहरलाल नेहरू । हेमंत कर्णिक 5. नवभारताचे पहिले शिक्षणमंत्री मौलाना आझाद । नंदू गुरव 6. दीपशिखा सरोजिनी नायडू । डॉ. सिसिलिया कार्व्हालो 7. अहिंसेचा उपासक खान अब्दुल गफ्फार खान । श्याम पाखरे 8. मातृहृदयी समतायोद्धा साने गुरूजी । सुचिता पडळकर गांधीजन चरित्रमाला – संपादन : अनुराधा मोहिनी Gandhijan Charitramala – sampadan : Anuradha Mohini Lekhak - Ravindra Rukmini Pandharinath , Sunanda Mohini , Meena Shrikan Karanjekar, Hemant Karnik, Nandu Gurav, Dr, sisilia karvhalo, Shyam Pakhare, Suchita Padalkar
Meri Dhaka Diary
- Author Name:
Madhu Kankariya
- Book Type:

- Description: वरिष्ठ कथाकार मधु कांकरिया की 'मेरी ढाका डायरी' एक प्रबुद्ध व्यक्ति की आँख से एक देश और उसके समाज की ली गई थाह है। यह देश है पड़ोस का बांग्लादेश जिससे हम भारतीयों की हमेशा से साझेदारी रही है, कुछ इतनी गहरी कि वक़्त की करवटों की बदौलत बीच में खिंच गई नई सरहद के बावजूद, आज भी दोनों देशों के आम अवाम के दिल में बहुत कुछ एक-सा धड़कता है। यह किताब वक़्त की उन करवटों और उस ‘एक-सी धड़कन’, दोनों का जायज़ा लेती है। लेखक की ख़ासियत यह है कि बांग्लादेश में प्रवास के दौरान वह न केवल वहाँ की परिस्थितियों को हिसाब में लेती हैं बल्कि उन परिस्थितियों से प्राप्त सूत्रों से उन कारणों की शिनाख़्त भी करती चलती हैं जिनसे ‘सोनार बांग्ला’ की श्यामल भूमि का सहज हास बाधित हो रहा है। ये कारण हैं ग़रीबी की गहरी जड़ें, बहुसंख्यक आबादी के बीच साम्प्रदायिकता की बढ़ती पैठ और अल्पसंख्यकों में बढ़ता असुरक्षाबोध आदि। एक संवेदनशील लेखक के तौर पर मधु कांकरिया आज के बांग्लादेश के इन सभी पहलुओं को देखती हैं और ढाका के अभिजात इलाक़ों से लेकर ग़रीब-गुरबा की दैनिक जद्दोजहद तक को अपने दायरे में लेती हुईं वर्तमान बांग्लादेश से हमारा परिचय कराती हैं। कह सकते हैं कि यह पाठ एक देश ही नहीं, मानवीय जीवन की भी महागाथा है।
Aranyapantha
- Author Name:
Pt. Sanjay Tignath
- Book Type:

-
Description:
‘अरण्यपंथा’ में वे समस्त मौलिक दुविधाएँ अन्तर्निहित हैं जो ज्ञान के गहन प्रान्तरों में विद्यमान हैं, क्योंकि ‘अरण्यपंथा’ उन्हीं के अपार और संकीर्ण पथ से निकलती है। इसमें मात्र आशय है किन्तु प्रयोजन स्पष्ट नहीं है। यदि प्रयोजन के आग्रह को त्यागा जा सकता हो तो सम्भवतः ‘अरण्यपंथा’ रुचिकर लगे।
मैंने उपनिषद ग्रन्थों का पुनर्अध्ययन किया और यहाँ पाया कि मैं उनकी अनुभूतियों को पहले की अपेक्षा अधिक निकटता से अनुभव कर रहा था, तथापि ‘अरण्यपंथा’ न तो वैज्ञानिक व्याख्याओं में घुसती है और न ही उपनिषद को अपने तर्क का हिस्सा बनाने की चेष्टा करती है। सचमुच उपनिषद को तो इस पुस्तक के कथ्य में बिना स्पर्श करते हुए ही मात्र आनन्द के स्रोत की तरह उद्धृत किया गया है।
—लेखक की क़लम से
Customer Reviews
0 out of 5
Book
Be the first to write a review...