Jeevan Dhara
Author:
Renu SainiPublisher:
Prabhat PrakashanLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 160
₹
200
Available
यूपी -100 एक ऐसा संगठन है, जो अपराधियों को तो पकड़ता ही है, इसके साथ ही यह संगठन उन नागरिकों की सेवा में भी तत्काल हाजिर हो जाता है, जो अपने दुःखों और परेशानियों से घबराकर झगड़ों, विवादों और दुर्घटनाओं को आमंत्रित करते हैं। यूपी-100 की पुलिस नागरिकों के झगड़ों, विवादों और दुर्घटनाओं पर नियंत्रण करती है और उन्हें जिंदगी के साथ ही आगे बढ़ने की एक नवीन किरण प्रदान करती है।
यूपी-100 उत्तर प्रदेश राज्य का एक बड़ा संगठन है, जो पूरे प्रदेश के साथ ही देश व विदेश के नागरिकों की रक्षा के लिए दृढ-प्रतिज्ञ है। आज यह संगठन जिस तेजी और चतुराई से आम जन की समस्याओं को सुलझाने का प्रयत्न कर रहा है, वह निस्संदेह प्रशंसनीय है। पर यह सब इतना सरल भी नहीं था।
यूपी-100 ने बहुत ही कम समय में गंभीर-से-गंभीर और छोटे-से-छोटे अपराध को सुलझाने में बेहद समझदारी और परिपक्वता का परिचय दिया है। ये सारी उपलब्धियाँ व समाचार महज समाचार-पत्र के एक कोने में आकर सिमट गई थीं। ज्यादातर लोगों को तो अभी तक यह भी जानकारी नहीं है कि पुलिस उनके जीवन में कितनी बड़ी भूमिका निभा रही है। अब यूपी-100 के कार्य कहानियों के रूप में आपके समक्ष हैं। मैंने घटनाओं के साथ कितना न्याय किया है, यह तो आप सभी की बहुमूल्य प्रतिक्रियाएँ ही बता पाएँगी।
ISBN: 9789352664658
Pages: 190
Avg Reading Time: 6 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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- Description: Literary Criticism on Feminism ‘चुप्पियाँ और दरारें’ भारत की अनेक भाषाओं में लिखी गई स्त्री आत्मकथाओं की न सिर्फ शिनाख्त करती है बल्कि इन आत्मकथाओं में विन्यस्त वैचारिकी का गहन विश्लेषण भी प्रस्तुत करती है। यह न सिर्फ हिन्दी बल्कि किसी भी भारतीय भाषा में अभूतपूर्व कही जाएगी। एक सर्वथा अनूठी पुस्तक। - अशोक वाजपेयी ध्वनि प्रदूषण पर तो आज बहुत चर्चा होती है, लेकिन चुप्पी के प्रदूषण पर नहीं। सच यह है कि जाति, लिंग और धर्म की बंदिशों से घिरे अवर्ण समाज और स्त्रियों की आत्माभिव्यक्ति बहुत कम सामने आती है। इस महत्त्वपूर्ण पुस्तक में गरिमा श्रीवास्तव ने यह तथ्य पहचाना है और चुप्पी की कारा तोड़ते हुए लिखी गई विभिन्न वर्गों और जातियों से निकली औरतों की आपबीती के मर्म को एक गम्भीर अन्तर्दृष्टि से परखा है। पठनीय और सरस। —मृणाल पांडेय गरिमा श्रीवास्तव की यह किताब ‘चुप्पियाँ और दरारें’ हमारा ध्यान स्त्री आत्मकथाओं की ओर ले जाती है, जहाँ मनुष्य जाति के स्त्री पक्ष के तनिक भिन्न अनुभव से हमारा साक्षात्कार होता है। यह स्त्रियों की अपनी अनुभूति है, उनकी अपनी आत्मस्वीकृतियाँ, पीड़ा और उल्लास है। कभी सिमोन द बोउआर ने ‘द सेकंड सेक्स’ के माध्यम से जेंडर का हाल सुनाया था, कुछ उसी अन्दाज में गरिमा श्रीवास्तव की यह किताब हमें भारतीय स्त्रियों की अनसुनी कहानी बताती है। निःसंदेह पठनीय और संग्रहणीय। —प्रेमकुमार मणि >गरिमा श्रीवास्तव की निगाह हिन्दी पर तो है ही, वे इस बहुभाषी, बहुधार्मिक, बहुजातीय और बहुसामुदायिक महादेश में हिन्दू, मुसलमान, दलित, सवर्ण, बांग्ला, मलयालम और कन्नड़ दायरों में स्त्री आत्मकथाओं के एक ऐसे बहुलतावादी संसार में प्रवेश करती हैं जिसका संधान अभी तक एक साथ एक जगह नहीं किया गया है। अश्वेत स्त्री-आत्मकथाओं पर उनका काम इस बृहद कृति में पाठकों को बोनस की तरह उपलब्ध है। —अभय कुमार दुबे
Hansa Karo Puratan Baat
- Author Name:
Kashinath Singh
- Book Type:

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Description:
‘हंसा करो पुरातन बात’ कथाकार-उपन्यासकार काशीनाथ सिंह के साक्षात्कारों का संकलन है। इस किताब में उनके 1989 से 2022 तक के साक्षात्कार हैं। साक्षात्कारों को प्रकाशन-क्रम से रखा गया है ताकि पाठक उनकी रचनात्मक और वैचारिक यात्रा को प्रामाणिकता के साथ समझ सकें।
काशीनाथ जी से जुड़ा वह हर सवाल यहाँ मौजूद है जिसमें एक पाठक की जिज्ञासा हो सकती है। ये सभी साक्षात्कार वे हैं जो उनकी पूर्व-प्रकाशित दोनों पुस्तकों, ‘गपोड़ी से गपशप’ और ‘बातें हैं बातों का क्या’ में नहीं हैं। ‘परिशिष्ट’ में ऐसे साक्षात्कार हैं जिनमें सीधे-सीधे सवाल-जवाब की पद्धति नहीं है, लेकिन साक्षात्कारकर्ता या पत्र-पत्रिका ने उन्हें ‘बातचीत’ या ‘बातचीत पर आधारित’ कहा है। इन साक्षात्कारों में ‘सदी का सबसे बड़ा आदमी’ कहानी के प्रति उनका मोह दृष्टिगोचर होता है। ‘काशी का अस्सी’ को वे अपना सर्वश्रेष्ठ उपन्यास तथा ‘अपना मोर्चा’ को भूमिका मात्र मानते हैं। सामासिक संस्कृति की पक्षधरता और मनुष्यता में उनका विश्वास भी प्रकट होता है। कहानी लेखन में बदलाव, कहानी से संस्मरण की ओर शिफ्ट होने के कारण, देश-विदेश-छात्र राजनीति एवं वर्तमान लेखन पर उनके विचार इन साक्षात्कारों में अभिव्यक्त हैं।
Cyanide : Rajeev Hatyakand Ki kahani
- Author Name:
Praveen Kumar Jha
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- Description: मद्रास के निकट श्रीपेरम्बुदूर में एक बम विस्फोट द्वारा राजीव गांधी की हत्या एक रहस्यमय घटना है, जिसके कई तार अब तक सुलझे नहीं हैं। इस हत्याकांड की जाँच जहाँ एक मॉडल की तरह देखा गया, वहीं यह पूरा घटनाक्रम किसी थ्रिलर फ़िल्म की पटकथा की तरह है। भारत की ज़मीन से बाहर हो रहे षडयंत्र की तह तक पहुँचना और देश-विदेश के राजनीतिक मकड़जाल से बचते हुए कदम रखना आसान न था। लेखक प्रवीण कुमार झा ने अपनी क़िस्सागोई अंदाज़ में इस घटनाक्रम को संवादों और दृश्यों में पिरो दिया है। यह कोई नयी अकादमिक पड़ताल या रिपोर्ताज नहीं, बल्कि उपलब्ध दस्तावेज़ों पर आधारित एक रोमांचक कथा है।
The Stranger
- Author Name:
Albert Camus
- Book Type:

- Description: अल्बेयर कामू कामू का जन्म 7 नवंबर, 1913 को फ्रांस के तत्कालीन उपनिवेश अल्जी़रिया के मांडोवी नामक नगर में हुआ था। आधुनिक फ्रेंच साहित्य के वे प्रमुख हस्ताक्षर और चिन्तक थे। उनके और ज्याँ-पाल सार्त्र के बीच हुई बहस को बीसवीं शताब्दी की सबसे महत्त्वपूर्ण साहित्यिक-वैचारिक बहसों में शुमार किया जाता है। उन्हें 1957 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था। उपन्यास: प्लेग, सुखी मृत्यु, वह पहला आदमी निर्वासन और आधिपत्य। कहानी-संग्रह: कालिगुला, न्यायप्रिय, अर्थदोष (नाटक) उनकी चर्चित कृतियाँ हैं। कामू के तर्क बिखरे हुए ज़रूर थे लेकिन व्यवहारिक थे इसीलिए किसी सैद्धांतिक पार्टीबद्धता में उनका मन नहीं लगा। दरअसल वे स्वभाव से पार्टीबद्ध व्यक्ति थे ही नहीं। संभवतः इसी कारण वे अल्जीरिया के श्रमिकों और आदिवासी-मुसलमानों के साथ दिली रिश्ता क़ायम कर सके। 1960 को कार दुर्घटना में उनकी 47 साल की आयु में मृत्यु हो गई।
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