Sankalp Vijay Ka
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जीवन के उतार-चढ़ावों के बीच व्यक्ति अपने आसपास की बहुविध परिस्थितियों को देखकर आश्वस्त होता है और आगे बढ़ता है। पर कोई ऐसी भयावह परिस्थिति, जो केवल कहानियों में सुनी हो, सब तरफ का वातावरण नकारात्मकता से भरा हुआ हो, उसको सहने के लिए तो कोई मानवेतर शक्ति ही संबल बनती है। कोरोना काल में इन मानवेतर शक्तियों को जगाने के लिए श्रेष्ठ व्यक्तियों ने आह्वान किए। कुछ अदम्य साहसी पुण्यात्माओं ने कोरोना के वातावरण में भी मानव-मूल्यों का परिचय दिया। यही विषय-वस्तु इस पुस्तक में संकलित है। सामान्य परिस्थितियों में भी देहदान-अंगदान के विषय में संकल्पपूर्वक कुछ व्यक्ति मानव-मूल्यों को जीवित रख रहे हैं। मानव सेवा की यह प्रेरक कहानी इस पुस्तक के माध्यम से आप तक पहुँचाने का विनग्र प्रयास है।
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जीवन के उतार-चढ़ावों के बीच व्यक्ति अपने आसपास की बहुविध परिस्थितियों को देखकर आश्वस्त होता है और आगे बढ़ता है। पर कोई ऐसी भयावह परिस्थिति, जो केवल कहानियों में सुनी हो, सब तरफ का वातावरण नकारात्मकता से भरा हुआ हो, उसको सहने के लिए तो कोई मानवेतर शक्ति ही संबल बनती है। कोरोना काल में इन मानवेतर शक्तियों को जगाने के लिए श्रेष्ठ व्यक्तियों ने आह्वान किए। कुछ अदम्य साहसी पुण्यात्माओं ने कोरोना के वातावरण में भी मानव-मूल्यों का परिचय दिया। यही विषय-वस्तु इस पुस्तक में संकलित है। सामान्य परिस्थितियों में भी देहदान-अंगदान के विषय में संकल्पपूर्वक कुछ व्यक्ति मानव-मूल्यों को जीवित रख रहे हैं। मानव सेवा की यह प्रेरक कहानी इस पुस्तक के माध्यम से आप तक पहुँचाने का विनग्र प्रयास है।
Book Details
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ISBN9789394534216
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Pages176
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Avg Reading Time6 hrs
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Age18-100 yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: मनोहर श्याम जोशी ने अनेक फिल्मों के लिए पटकथा और संवाद-लेखन का काम किया। यहाँ उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसका एक कारण शायद यह भी है कि सिनेमा में पूरी तरह निर्देशक ही माध्यम होता है और उसमें लेखक की कहानी को निर्देशक अपने किसी खास कोण से सिनेमा में ढालता है और इस क्रम में लेखक का संदेश कई बार कहीं पीछे छूट जाता है। ‘हे राम’, ‘भ्रष्टाचार’, ‘पापा कहते हैं’ उनकी लिखी कुछ ऐसी फिल्में हैं, जिनकी चर्चा की जा सकती है। मनोहर श्याम जोशी का व्यक्तित्व बहुआयामी कहा जा सकता है। उनके इस बहुआयामी व्यक्तित्व का केंद्रीय आयाम लेखन था। उनको एक ऐसे लेखक के रूप में याद किया जाएगा, जो अनेक माध्यमों में लेखन की कसौटी पर खरे उतरे। यही कारण है कि हिंदी पत्रकारों-लेखकों में उनका व्यक्तित्व सबसे अलग दिखाई देता है। वे एक ऐसे पत्रकार थे, जिनका पत्रकारिता और साहित्य से समान नाता रहा। हमें विश्वास है कि विश्वविद्यालय द्वारा मूर्धन्य पत्रकार-संपादकों की इस मोनोग्राफ श्रृंखला से पत्रकार जगत् और पत्रकारिता के विद्यार्थी लाभान्वित होंगे और विरासत की इस समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रवृत्त होंगे।
Rajya Sarkar Aur Jansampark
- Author Name:
Kalidutt Jha +2
- Book Type:

- Description: लोकतान्त्रिक मूल्यों की महत्ता को देखते हुए ‘लोक’ और ‘जन’ अभिव्यक्तियाँ किसी भी संगठन या गतिविधि को सम्मान दिलाने के लिए कारगर विशेषण या उपसर्ग बन जाती हैं। कई बार ये अभिव्यक्तियाँ सम्मान का स्थान प्राप्त करने का औजार मात्र बनकर रह जाती हैं। उसकी मूल भावना का नितान्त अभाव सम्बन्धित संगठन या गतिविधि में होता है। भारतीय संविधान में सरकार के लिए जो भूमिका निर्धारित की गई है उसके चलते, वैश्वीकरण की आँधी के बावजूद सरकार आनेवाले बहुत समय तक समाज की सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण संस्था के रूप में स्थापित रहेगी। सच कहा जाए तो सरकार की भूमिका का दायरा बढ़ता ही जा रहा है, बहुत बार सही ढंग से तथा कई बार प्रश्नास्पद तरीके से यह प्रवृत्ति भारत की तरह अन्य लोकतान्त्रिक विकासशील देशों में भी जारी रहेगी, तेज भी हो सकती है, पर घटेगी नहीं। समाज पर बाजार के हावी होने की कोशिश के बावजूद राज्य की महत्ता के अक्षुण्ण रहने के परिप्रेक्ष्य में समाचार के क्षेत्र में सरकार के सम्पर्क में आनेवाले, सरकार से जूझनेवाले और सरकार में सेवा करनेवाले सभी प्रकार के लोगों के लिए निश्चय ही विशेषज्ञ लेखकों द्वारा तैयार यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी।
Rahbari Ke Sawal
- Author Name:
Chandrashekhar
- Book Type:

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Description:
‘रहबरी के सवाल’ में चन्द्रशेखर के ही शब्दों में उनके जीवन के कुछ प्रमुख पड़ावों और विचार-बिदुओं को नए सन्दर्भों में नए सिरे से प्रस्तुत किया गया है। चन्द्रशेखर का जीवन मूलत: एक भारतीय किसान का जीवन था जिसमें कोई दुराव-छिपाव नहीं। राजनीति के शिखर व्यक्तित्व होते हुए भी वे किसी भी विषय पर बिना लाग-लपेट के और दो टूक बोलते थे। यह भी भारतीय किसान का ही स्वभाव है। चन्द्रशेखर के व्यक्तित्व को समझने में यह अवधारणा बहुत मदद देती है। वे जिस विषय पर बोलते थे, उनके विचारों के केन्द्र में भारतीय समाज की परिस्थितियाँ और समाजवादी लोकतांत्रिक मूल्य प्रमुख रूप से दिखाई देते थे। अपनी वैचारिक दृढ़ता के कारण ही वे उथल-पुथल भरे राजनैतिक झंझावातों के बीच आज भी एक जलती मशाल की तरह दृष्टिगत होते हैं।
इस पुस्तक के छह खंडों के नाम हैं : ‘राजनीति के सोपान’, ‘चौदहवीं लोकसभा और संसदीय प्रणाली’, ‘यक्ष प्रश्न’, ‘नज़रिया’, ‘अन्तरंग’ तथा ‘अनुलग्नक’। इन अध्यायों में उन प्रसंगों पर विस्तृत बातचीत की गई है जो आज के सन्दर्भ में भी जीवन्त हैं। चन्द्रशेखर का जीवन एक कभी न रुकनेवाला यायावर का जीवन था। इसमें कहीं ठहराव नहीं। यही वजह है कि उनका व्यक्तित्व उनके किसी भी समकालीन राजनैतिक व्यक्तित्व की तुलना में अधिक गतिशील दिखता है। इस पुस्तक में सार्थक और जीवन्त प्रश्नों के सहारे चन्द्रशेखर के अद्यतन वैचारिक चिन्तन और निष्कर्षों को दर्ज करने का ऐतिहासिक प्रयास किया गया है। ये विचार हमें आत्ममंथन के लिए तो प्रेरित करते ही हैं, भूमंडलीकरण के शोर में अपनी खोती हुई अस्मिता को बचाने के लिए नई शक्ति से भरते भी हैं। यही वजह है कि यह पुस्तक निराशा के राष्ट्रव्यापी माहौल में नई व्यवस्था बनाने के लिए एक सार्थक हस्तक्षेप की तरह है।
Chetna Hero
- Author Name:
Mission Chetna
- Book Type:

- Description: चेतना इस संसार में भलाई को पहचानने, उसकी सहारना करने और उसे आगे बढ़ानेवाला एक अभियान है। 'भलाई का प्रसार' करने और तमाम लोगों को जीवन में भलाई पर चलने की प्रेरणा देने के अपने मिशन पर खरा उतरते हुए, चेतना भारत भर में उन पुरुषों और महिलाओं की पहचान और उनका सम्मान हि] है, जो धारा के खिलाफ जाने और अन्य व्यक्तियों तथा परिवारों तक पहुँचने का पर्याप्त साहस रखते हैं। ये पुरुष और स्त्रियाँ चेतना के नायक- नायिकाएँ हैं--चेतना हीरो हैं। “चेतना हीरो' की जीवंत कहानियाँ दूसरों को भी कुछ ऐसा ही करने की, उसमें सहयोग करने की प्रेरणा दे सकती हैं--यही सोच इस चेतना हीरो की कॉफी टेबल बुक का आधार है। चेतना हीरो ऐसे भले लोग हैं, जिन्होंने कर्म के जरिए बोलने का फैसला किया है। उनमें से किसी ने भी बड़े पैमाने पर सुनियोजित और अच्छे-खासे पैसों के साथ भलाई के अपने काम शुरू नहीं किए। वे जिन लोगों के संपर्क में वे आए, उनकी मदद के लिए उन्होंने चुपचाप उनकी तकलीफों को कम किया और फिर किसी एक की तकलीफ दूर करने के बाद वे रुके नहीं। वे खुद से लगातार पूछते रहे, “मैं और क्या कर सकता हूँ समाज के लिए?” और 'किसे इस तरह की मदद चाहिए ?' इस तरह के सवालों के जवाब ने उनको चेतना हीरो में बदल दिया, जो वे आज हैं। 'चेतना हीरो : कॉफी टेबल बुक ' ऐसे ही कुछ असाधारण व्यक्तियों की सराहना है, जिन्होंने पशु देखभाल, शिक्षा, पर्यावरण देखभाल, भूख, सामाजिक जिम्मेदारी, दिव्यांगों और महिलाओं के सशकतीकरण में अपने प्रयासों से करोड़ों लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। चेतना की यह पहल उन सभी हीरो को एक मंच पर लेकर आती है। नेटवर्क बनाने और एक-दूसरे से जुड़ने के कारण इन हीरो को यह सुनिश्चित करने में मदद मिली है कि उनके कार्यों का सामूहिक प्रभाव दयालुता और देखभाल के व्यक्तिगत कार्यों की तुलना में कई गुना व्यापक हो। आशा है कि कॉफी टेबल बुक आपके जीवन में भी 'भलाई के प्रसार' का एक दीपक जलाएगी। ...
Jag Badalnare - Granth
- Author Name:
Deepa Deshmukh
- Book Type:

- Description: जग बदलणारे ग्रंथ माणसाची प्रगती होण्यासाठी अनेक गोष्टी कारणीभूत ठरल्या. चाकाचा शोध लागला आणि त्याच्या जगण्याला गती मिळाली. विज्ञान आणि शोधांनी माणसाला डोळस बनवलं. कलेनं त्याचं आयुष्य सुंदर केलं. औद्योगिक क्रांती झाली आणि त्याच्या आयुष्यानं वेगळी वाट पकडली. तंत्रज्ञानानं त्याच्या आयुष्यात खूप मोठी जागा व्यापली आणि त्याचं आयुष्य सुखकर केलं. माणसाच्या वाटचालीत स्त्रीवर लादलेलं दुय्यमत्व झुगारण्यासाठी तिनं संघर्ष केला आणि आपल्या स्वतंत्र अस्तित्वासाठी ठाम भूमिका घेतली. सृष्टीच्या या अफाट पसाऱ्यात माणसाची मग एक एक गोष्ट नीट समजून घेण्याची धडपड सुरू झाली, कधी त्यानं विज्ञानाची साथ घेतली, तर कधी तंत्रज्ञानाची मदत घेतली. कधी त्यानं स्वत:ला समजून घेण्यासाठी मानसशास्त्राची शाखा निर्माण केली. कधी त्यानं व्यवहार सुरळीत चालण्यासाठी अर्थशास्त्राची सोबत घेतली. कधी त्यानं आपली मूल्यं विकसित करताना त्यांना तत्त्वज्ञानाची जोड दिली. या सगळ्या गोष्टींचा दस्तावेज 'ग्रंथ' रुपात जतन करण्याची प्रक्रिया त्यानं सुरू ठेवली. त्यामुळेच जगभरात आज धर्म, कला, विज्ञान, तंत्रज्ञान, मानसशास्त्र अनुवंशशास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राज्यशास्त्र, चरित्र अशा अनेक शाखांमधलं लिखाण ग्रंथांच्या रुपानं निर्माण झालं. यातल्या अनेक ग्रंथांनी जगावर प्रभाव टाकला. यातले निवडक ५0 ग्रंथ घेऊन त्यांची ओळख करून देण्याचा प्रयत्न 'ग्रंथ' मध्ये करण्यात आला आहे. कुतूहल, ज्ञानाची आस असणाऱ्या प्रत्येकानं आपलं जगणं अर्थपूर्ण आणि समृद्ध करण्यासाठी दीपा देशमुख लिखित 'ग्रंथ' वाचायलाच हवा. Jag Badalnare - Granth -Deepa Deshmukh जग बदलणारे ग्रंथ - दीपा देशमुख
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