Chhoti Darbi Aur Narbada
Author:
Neelam GuptaPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction0 Ratings
Price: ₹ 100
₹
125
Unavailable
इस पुस्तक में दक्षिण राजस्थान के वन क्षेत्र की अनुसूचित जाति, जनजाति की निन्यानबे फ़ीसद निरक्षर महिलाओं के घर से बाहर निकलने और महिला मंडल बनाने के द्वन्द्व, साहस और हाथ में आर्थिक ताक़त आ जाने के साथ ही उनके भीतर अपने अस्तित्व के अहसास का विवरण है।
गाँव में पानी की ज़रूरत को पूरा करने के लिए इन महिलाओं की पहल, उनके काम और उस काम में उनके व्यापक सामाजिक, परिवेशगत व पर्यावरणीय नज़रिए का विश्लेषण भी इस पुस्तक में किया गया है।
पर्यावरण और स्त्री-विषयों पर लगातार नज़र रखनेवाली पत्रकार नीलम गुप्ता ने इस पुस्तक में यह बताने की कोशिश की है कि पानी के लिए काम करते हुए समाज में धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की अवधारणा लगातार कभी पृष्ठभूमि में, तो कभी प्रत्यक्ष काम करती रहती है। दूसरा, यह काम वह बिसरा दिया गया काम है जो कभी यहाँ की सामाजिक व्यवस्था में वैयक्तिक व सामाजिक स्तर पर जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा होता था।
अन्तिम दो अध्यायों में गाँव में पानी आने से कैसे महिलाओं का जीवन बदला, कैसे उनका निजी, पारिवारिक व सामाजिक जीवन सुखद हुआ, इसका वर्णन किया गया है।
ISBN: 9788126710102
Pages: 115
Avg Reading Time: 4 hrs
Age: 18+
Country of Origin: India
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देश की जिन गम्भीर समस्याओं पर मुख्यधारा का मीडिया ख़ामोश रहता है और सरकार उदासीन, उनमें बँधुआ मज़दूरों की समस्या भी एक है। सरकारी घोषणाओं में यह समस्या ख़त्म हो चुकी है और मीडिया के लिए इसमें सनसनी नहीं रही। लेकिन समस्या अभी जहाँ की तहाँ है। 1975 में राष्ट्रपति के एक अध्यादेश के ज़रिए औपचारिक तौर पर बँधुआ मज़दूरी पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था, लेकिन देश के लगभग सभी राज्यों में आज भी यह प्रथा बिना किसी रोक-टोक के जारी है। बीच-बीच में सरकारें बँधुआ तौर पर काम कर रहे मज़दूरों की मुक्ति और पुनर्वास का स्वाँग भी रचती हैं, लेकिन मुक्त कराए गए मज़दूरों को पुन: एक नई तरह की बँधुआ मज़दूरी का शिकार होना पड़ा है। न तो उनकी जीविका के लिए पर्याप्त साधन मुहैया कराए गए और न ही शक्तिशाली भूमिपतियों से उनकी हिफ़ाज़त का कोई विश्वसनीय इन्तज़ाम हो पाया।
‘भारत में बँधुआ मज़दूर’ इस समस्या का सर्वांग अध्ययन प्रस्तुत करती है। प्रख्यात बांग्ला लेखिका महाश्वेता देवी यहाँ पूर्णतया एक शोधकर्मी के तौर पर प्रकट हुई हैं, ज़ाहिर है, उत्पीड़ितों-उपेक्षितों के लिए अपनी सर्वज्ञात संवेदना के साथ। शोधकर्म की निर्मम असंलग्नता से बचते हुए, विषय के साथ नितान्त मानवीय लगाव के साथ यह शोध किया गया है।
Pais Paryavaransanvadacha
- Author Name:
Santosh Shintre
- Book Type:

- Description: हे पुस्तक सजग, सर्वसामान्य वाचकांसमोर भारतीय निसर्ग-पर्यावरण आणि त्यातील आर्थिक, सामाजिक, राजकीय गुंतागुंत सविस्तर उलगडते.पर्यावरण क्षेत्रात सक्रिय व्यक्ती/संस्था/समूहांना आजवर पडलेल्या बहुतांश अनुत्तरित प्रश्नांची समर्पक उत्तरे देणारे; निव्वळ ‘झाडे लावा, वाघ वाचवा' ह्यांच्यापलीकडे असणारा पर्यावरण प्रश्नांवरील उपायांबाबतचा संवाद-आवाका भारतीय संदर्भ घेऊन समजवणारे आणि इथल्या पर्यावरण समस्या निवारण्यासाठी आवश्यक संवादाच्या दिशा अचूक दर्शवणारे हे पुस्तक आहे.पर्यावरणसंवादाचे सामाजिक न्याय, विज्ञान, समाजशास्त्र, व्यवस्थापन, राज्यशास्त्र, मानसशास्त्र, तंत्रज्ञान, विक्री-कौशल्ये या अन्य विद्याशाखांशी गहिरे नाते असते. हे पुस्तक ते विस्तृत रीतीने दर्शवते. संबंधित विषयांच्या अभ्यासकांना, अध्यापकांना, संशोधकांना या आंतरविद्याशाखीय अभ्यासक्षेत्रातील भावी अभ्यास-संशोधनाचे थांबे, हे पुस्तक स्पष्ट करते. पैस पर्यावरणसंवादाचा | संतोष शिंत्रे Pais Paryavaransanvadacha I Santosh Shintre
1000 Mahabharat Prashnottari
- Author Name:
Rajendra Pratap Singh
- Book Type:

- Description: क्या आप जानते हैं-' वह कौन पांडव वंशज था, जिसने एक बार अनजाने में ही भीम को मल्ल-युद्ध में पराजित कर दिया था ', ' धृतराष्ट्र का वह कौन पुत्र था, जो महाभारत युद्ध में जीवित बच गया था ', ' किस वीर से युद्ध करते हुए अर्जुन की मृत्यु हो गई थी ', ' द्रौपदी को ' याज्ञसेनी ' क्यों कहते थे ', ' हस्तिनापुर का नाम ' हस्तिनापुर ' कैसे पड़ा ', ' महाभारत युद्ध में कुल कितने योद्धा मारे गए थे ', ' उस अस्त्र को क्या कहते हैं, जिसके प्रयोग करने पर पत्थरों की वर्षा होने लगती थी ' तथा ' एक ब्रह्मास्त्र को दूसरे ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर दबा देने से कितने वर्षों तक वर्षा नहीं होती थी?' यदि नहीं, तो ' महाभारत प्रश्नोत्तरी ' पढ़ें । आपको इसमें इन सभी और ऐसे ही रोचक, रोमांचक, जिज्ञासापूर्ण व खोजपरक 1000 प्रश्नों के उत्तर जानने को मिलेंगे । इस पुस्तक में भीष्म, द्रोण, कर्ण, अर्जुन, भीम एवं अभिमन्यु जैसे पराक्रमियों के अद्भुत शौर्य का वर्णन तो है ही, विभिन्न शस्त्रास्त्रों, दिव्यास्त्रों एवं उनके प्रयोगों और प्रयोग के पश्चत् परिणामों की जानकारी भी दी गई है । इसके अतिरिक्त महाभारतकालीन नदियों, पर्वतों, राज्यों, नगरों तथा राज्याधिपतियो का सुस्पष्ट संदर्भ भी जानने को मिलता है । साथ ही लगभग दो सौ विभिन्न पात्रों के माता, पिता, पत्नी, पुत्र- पुत्री, पितामह, पौत्र, नाना, मामा आदि संबंधों का खोजपरक विवरण भी । यह पुस्तक आम पाठकों के लिए तो महत्त्वपूर्ण है ही, लेखकों संपादकों पत्रकारों वक्ताओं, शोधार्थियों, शिक्षकों व विद्यार्थियों के लिए भी अत्यंत उपयोगी है । वस्तुत: यह महाभारत का संदर्भ कोश है ।
Operation Khatma
- Author Name:
R.C. Ganjoo +1
- Book Type:

- Description: सन् 1990 के दशक में जम्मू और कश्मीर में ‘आजादी’ और ‘जेहादी’ तत्वों के बीच प्रधानता की लड़ाई चल रही थी, जिसमें आम नागरिक झुलस रहा था। ‘आजादी’ समर्थक जम्मू एंड कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जे.के.एल.एफ.) को ‘जेहादी’ हिजबुल मुजाहिदीन (एच.एम.) से गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। दोनों आतंकी संगठन पाकिस्तान के हाथों की कठपुतली थे। जे.के.एल.एफ. और एच.एम. की प्रतिस्पर्धा में सनसनीखेज मोड़ तब आया जब जे.के.एल.एफ. ने 1996 में श्रीनगर स्थित पाक हजरत बल दरगाह पर कब्ज़ा कर लिया। राज्य सरकार आतंकवादियों से लगातार मुँह की खा रही थी, पर इस बार उसने उन्हें आड़े हाथों लेने का फैसला किया। जम्मू और कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने पहली बार आतंकियों को खत्म करने का बीड़ा उठाया। आतंकी पाक दरगाह में थे, इसलिए ऑपरेशन बेहद संवेदनशील था। कैसे हुई यह सर्जिकल स्ट्राइक? कैसे आतंकवाद की कमर तोड़ी गई, जिससे कश्मीर में दस साल बाद संसद् और विधानसभा के चुनाव हो पाए। ‘ऑपरेशन खात्मा’ आतंकवाद पर लिखा ग्राफिक फर्स्ट हैंड थ्रिलर है, जो एक साहसिक कदम से परिचित कराता है।
The Great Derangement
- Author Name:
Amitav Ghosh
- Book Type:

- Description: One of India's greatest writers, Amitav Ghosh, argues that future generations may well think so. How else can we explain our imaginative failure in the face of global warming? In this groundbreaking return to non-fiction, Ghosh examines our inability-at the level of literature, history and politics-to grasp the scale and violence of climate change. The climate crisis asks us to imagine other forms of human existence-a task to which fiction, Ghosh argues, is the best suited of all forms. The Great Derangement serves as a brilliant writer's summons to confront the most urgent task of our time.
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