Bharatnama
(0)
Author:
Sunil KhilnaniPublisher:
Rajkamal Prakashan SamuhLanguage:
HindiCategory:
General-non-fiction₹
350
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Available
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आज के भारत की राजनीति का संभवतः सर्वश्रेष्ठ गैरऔपन्यासिक परिचय...-माइकल फुट, इवनिंग स्टैण्डर्ड भारत और उसकी समसामयिक परिस्थितियों पर कोई और किताब ही इससे अधिक गहनता के साथ बेहतर रौशनी डाल सके | - इयान जैक, ऑब्जर्वर इस शानदार किताब का मकसद कोई भविष्यवाणी करने के बजाय यह बताना है कि भारत अपनी मौजूदा हैसियत तक कैसे पहुँचा और उसका अंतर्निहित विचार कैसे विकसित हुआ | यह किताब आजादी के पचास साल बाद भारत की खूबियों और खामियों की तरफ इशारा करती है...उत्कृष्ट बौद्धिकता से समपन्न यह पुस्तक करीब ढाई सौ पृष्ठों में आधुनिक भारत की कई जटिलताओं की शिनाख्त करते हुए उनके उद्घाटन और व्याख्या में सफल होती है...इसकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है |-डेविड गिलमूर, इंडिपेंडेंट ऑन सन्डे यह पुस्तक भारतीय राष्ट्र की परिभाषाओं को उजागर करती है...सभी तरह के रोमानी संस्कृतिवादियों और धार्मिक कट्टरपंथियों की दलीलों को कुशलता से परास्त कर देती है |- इयान वरुपा, न्यूयार्क रिव्यु ऑव बुक्स
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आज के भारत की राजनीति का संभवतः सर्वश्रेष्ठ गैरऔपन्यासिक परिचय...-माइकल फुट, इवनिंग स्टैण्डर्ड भारत और उसकी समसामयिक परिस्थितियों पर कोई और किताब ही इससे अधिक गहनता के साथ बेहतर रौशनी डाल सके | - इयान जैक, ऑब्जर्वर इस शानदार किताब का मकसद कोई भविष्यवाणी करने के बजाय यह बताना है कि भारत अपनी मौजूदा हैसियत तक कैसे पहुँचा और उसका अंतर्निहित विचार कैसे विकसित हुआ | यह किताब आजादी के पचास साल बाद भारत की खूबियों और खामियों की तरफ इशारा करती है...उत्कृष्ट बौद्धिकता से समपन्न यह पुस्तक करीब ढाई सौ पृष्ठों में आधुनिक भारत की कई जटिलताओं की शिनाख्त करते हुए उनके उद्घाटन और व्याख्या में सफल होती है...इसकी जितनी प्रशंसा की जाए वह कम है |-डेविड गिलमूर, इंडिपेंडेंट ऑन सन्डे यह पुस्तक भारतीय राष्ट्र की परिभाषाओं को उजागर करती है...सभी तरह के रोमानी संस्कृतिवादियों और धार्मिक कट्टरपंथियों की दलीलों को कुशलता से परास्त कर देती है |- इयान वरुपा, न्यूयार्क रिव्यु ऑव बुक्स
Book Details
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ISBN9788126700134
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Pages271
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Avg Reading Time9 hrs
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Age18+ yrs
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Country of OriginIndia
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- Description: जब हम गांधी जी द्वारा परिकल्पित तथा कार्यान्वित बुनियादी शिक्षा की बात करते हैं तो अजीब-सा अनुभव महसूस हो सकता है, क्योंकि गांधी जी की बुनियादी शिक्षा-परिकल्पना के साथ आज के शिक्षा-जगत् का कोई सम्बन्ध नहीं है। प्रस्तुत पुस्तक का विचारणीय विषय यही है कि गांधी जी द्वारा परिकल्पित बुनियादी शिक्षा की मूल्यदृष्टि क्या है और आज उसे किस तरह से देखा-परखा जाना चाहिए तथा आज की नूतन शिक्षा-पद्धति के साथ इसको कैसे मिलाया जाना चाहिए। गांधी जी सचमुच एक आत्मसजग पीढ़ी भारत के लिए तैयार करना चाहते थे। इसलिए प्राथमिक शिक्षा में मातृभाषा को केन्द्र में रखा। ऐसे में हमें यह सोचना चाहिए कि मातृभाषा के माध्यम से शिक्षा, सभी तबकों के विद्यार्थियों को समान सुविधाओं वाली पाठशालाओं की परिकल्पना और उन्हें सुविधाएँ उपलब्ध कराना, शिक्षा-पद्धतियों को समान बनाना, अध्यापक-प्रशिक्षण को वैज्ञानिक बनाना, सुविधाओं से वंचित सामाजिक तबके के विद्यार्थियों को समकक्ष तक ले आने योग्य पद्धतियों व योजनाओं का अखिल भारतीय स्तर पर आविष्कार करना आदि समान दृष्टि से जब तक कार्यान्वित नहीं होगा, तब तक बुनियादी शिक्षा का यह मातृभाषा में शिक्षण का सपना अतीत का अवैज्ञानिक सपना ही सिद्ध हो सकता है। पुस्तक में बुनियादी तालीम के विभिन्न पक्षों पर सारगर्भित लेख प्रस्तुत करने का प्रयास है। इस विषय पर गम्भीर चिन्तन के लिए यह एक प्रवेशिका का कार्य करेगी, इसी आशा के साथ इसे पाठकों के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
The Shaurya Unbound
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Nitu +1
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- Description: The lead Internal Security Fore of the country, the central Reserve Police Force holds the proud distinction of being the highest decorated Central Armed Police Force of the country. 'The Shaurya, Unbeaten', Chronicles the stories of the C.R.P.F brave hearts with indomitable courage, grit and determination in the face of adversity.
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